मापन, यांत्रिकी और ऊष्मा के प्रयोग
याद रखने योग्य बातें
- वर्नियर का अल्पतमांक = 1 MSD − 1 VSD = (1 MSD का मान)/N; स्क्रू गेज का अल्पतमांक = पिच/वृत्तीय पैमाने के भागों की संख्या। संशोधित पाठ्यांक सदैव प्रेक्षित पाठ्यांक − शून्यांक त्रुटि होता है (शून्यांक त्रुटि अपने चिह्न के साथ ली जाती है)।
- सरल लोलक: T = 2π√(l/g), अतः l तथा T² के बीच खींचा गया ग्राफ मूलबिंदु से गुज़रने वाली सरल रेखा होता है जिसकी प्रवणता (ढाल) g/4π² है। लंबाई गोलक (bob) के केंद्र तक मापी जाती है और कोण छोटा रखा जाता है।
- कंठस्थ करने योग्य सूत्र: Y = MgL/(πr²l); T = rhρg/(2cosθ) (काँच में जल के लिए T = rhρg/2); η = 2r²(ρ − σ)g/(9v); v = 2f(l₂ − l₁); खोई गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा।
- अनुनाद नली (resonance tube) में l₁ + e = λ/4 तथा l₂ + e = 3λ/4, अतः सिरा संशोधन e = (l₂ − 3l₁)/2 है और यह l₂ − l₁ में कट जाता है।
वर्नियर कैलिपर्स (Vernier callipers)
उद्देश्य। किसी खोखले बेलन की लंबाई, बाह्य व आंतरिक व्यास तथा किसी बर्तन की गहराई मापना।
सिद्धांत। वर्नियर पैमाने (vernier scale) के N भाग (VSD) मुख्य पैमाने (main scale) के (N − 1) भागों (MSD) के बराबर होते हैं। अतः एक VSD, एक MSD से थोड़ा छोटा होता है।
- अल्पतमांक (LC) = 1 MSD − 1 VSD = (1 MSD)/N।
- 1 MSD = 1 mm तथा N = 10 के लिए: LC = 0.1 mm = 0.01 cm।
- 1 MSD = 1 mm तथा N = 20 (20 VSD = 19 MSD) के लिए: LC = 0.05 mm।
पाठ्यांक लेना। कुल पाठ्यांक = मुख्य पैमाने का पाठ्यांक (MSR, वर्नियर शून्य के ठीक बाईं ओर) + n × LC, जहाँ n उस वर्नियर भाग की संख्या है जो मुख्य पैमाने के किसी भाग से संपाती होता है।
शून्यांक त्रुटि (zero error)। जबड़े बंद करके पाठ्यांक नोट करें।
| स्थिति | वर्नियर शून्य की स्थिति | शून्यांक त्रुटि | संशोधन |
|---|---|---|---|
| धनात्मक | मुख्य पैमाने के शून्य के दाईं ओर | + n × LC (n = संपाती भाग) | इसे घटाएँ |
| ऋणात्मक | मुख्य पैमाने के शून्य के बाईं ओर | − (N − m) × LC (m = संपाती भाग) | इसका परिमाण जोड़ें |
संशोधित पाठ्यांक = प्रेक्षित पाठ्यांक − शून्यांक त्रुटि (चिह्न सहित)।
उपयोग। निचले जबड़े बाह्य व्यास देते हैं, ऊपरी जबड़े आंतरिक व्यास देते हैं और सिरे की पतली पट्टी बर्तन की गहराई बताती है।
पाठ्यांक और त्रुटियाँ। भिन्न-भिन्न स्थानों पर कम से कम तीन पाठ्यांक लेकर उनका औसत निकालें। त्रुटि के स्रोत: शून्यांक त्रुटि, संपाती भाग देखते समय लंबन (parallax) और जबड़ों को अधिक कसकर दबाना। सावधानियाँ: जबड़े साफ़ करें, स्लाइडर को धीरे सरकाएँ, पाठ्यांक लेने से पहले पेच कस लें, और शून्यांक त्रुटि पहले तथा बाद में दोनों बार नोट करें।
हल किया गया उदाहरण 1. LC = 0.01 cm। जबड़े बंद करने पर 3रा वर्नियर भाग संपाती है, अतः शून्यांक त्रुटि +0.03 cm है। एक छड़ के लिए MSR = 2.4 cm है और 6ठा वर्नियर भाग संपाती है। प्रेक्षित = 2.4 + 6 × 0.01 = 2.46 cm। संशोधित = 2.46 − 0.03 = 2.43 cm।
स्क्रू गेज (Screw gauge)
उद्देश्य। किसी तार का व्यास या पतली चादर की मोटाई ज्ञात करना।
सिद्धांत। ज्ञात पिच (pitch) वाला पेच घुमाने पर अपने अक्ष के अनुदिश आगे बढ़ता है। वृत्तीय पैमाना (circular scale) पिच को बराबर भागों में बाँटता है।
- पिच = पेच के एक पूरे चक्कर में तय की गई दूरी।
- LC = पिच/वृत्तीय पैमाने के भागों की संख्या।
- पिच 1 mm तथा 100 भागों के लिए: LC = 0.01 mm। पिच 0.5 mm तथा 50 भागों के लिए: LC = 0.01 mm।
पाठ्यांक लेना। कुल पाठ्यांक = पिच पैमाने का पाठ्यांक (PSR) + वृत्तीय पैमाने का पाठ्यांक (CSR) × LC। संशोधित पाठ्यांक = प्रेक्षित − शून्यांक त्रुटि।
| स्थिति (स्टड संपर्क में) | वृत्तीय पैमाने की स्थिति | शून्यांक त्रुटि |
|---|---|---|
| धनात्मक | वृत्तीय पैमाने का शून्य संदर्भ रेखा के नीचे है; n-वाँ भाग रेखा पर है | + n × LC |
| ऋणात्मक | वृत्तीय पैमाने का शून्य संदर्भ रेखा के ऊपर है; m-वाँ भाग रेखा पर है | − (N − m) × LC |
सावधानियाँ। स्टड को धीरे से बंद करने के लिए रैचेट (सुरक्षा क्लच) का उपयोग करें ताकि तार दबे नहीं। पेच को एक ही दिशा में घुमाकर पश्चप्रहार (backlash) दूर करें। तार को कई स्थानों पर और दो परस्पर लंबवत दिशाओं में मापें, क्योंकि तार पूर्णतः वृत्ताकार नहीं भी हो सकता है।
हल किया गया उदाहरण 2. पिच 0.5 mm, 50 भाग, अतः LC = 0.01 mm। स्टड छूने पर 46वाँ भाग संदर्भ रेखा पर है, अतः शून्यांक त्रुटि = −(50 − 46) × 0.01 = −0.04 mm। एक तार के लिए PSR = 2.5 mm और CSR = 28 है। प्रेक्षित = 2.5 + 0.28 = 2.78 mm। संशोधित = 2.78 − (−0.04) = 2.82 mm।
सरल लोलक (Simple pendulum) और मीटर सेतु (Metre scale)
उद्देश्य (लोलक)। लंबाई l और आवर्तकाल T के संबंध से गुरुत्वीय त्वरण g ज्ञात करना।
सिद्धांत। छोटे आयाम के लिए T = 2π√(l/g), अतः g = 4π²l/T²। l (y-अक्ष) तथा T² (x-अक्ष) के बीच ग्राफ मूलबिंदु से गुज़रने वाली सरल रेखा होता है। इसकी प्रवणता l/T² = g/4π² है, अतः g = 4π² × प्रवणता। ग्राफ से प्रवणता लेने पर यादृच्छिक त्रुटि घटती है।
विधि और पाठ्यांक। एक पतले, अप्रत्यास्थ धागे से छोटा और सघन गोलक (bob) लटकाएँ। लंबाई l = धागे की लंबाई + गोलक की त्रिज्या (गोलक के केंद्र तक मापी गई)। गोलक को छोटे कोण (कुछ अंश) से विस्थापित करके छोड़ें और माध्य स्थिति से शुरू करके 20 से 50 दोलनों का समय नोट करें। T = कुल समय/दोलनों की संख्या। पाँच या छह लंबाइयों के लिए दोहराएँ।
आयाम और ऊर्जा क्षय। यदि आयाम को समय के साथ आलेखित किया जाए तो वक्र सहज रूप से गिरता है (चरघातांकी-जैसा क्षय)। दोलन की ऊर्जा वायु के प्रतिरोध और आधार पर घर्षण के कारण धीरे-धीरे नष्ट होती है, इसलिए आयाम घटता है जबकि छोटे कोणों के लिए आवर्तकाल लगभग वही रहता है।
त्रुटियाँ और सावधानियाँ। वायु के झोंकों से बचें, दृढ़ आधार का उपयोग करें, सुनिश्चित करें कि गोलक ऊर्ध्वाधर तल में गति करे (घूमे नहीं) और दोलनों की गिनती सावधानी से करें। g में प्रतिशत त्रुटि = Δl/l + 2ΔT/T (अधिकतम)।
हल किया गया उदाहरण 3. एक विद्यार्थी निलंबन बिंदु से 4.0 cm व्यास वाले गोलक के शीर्ष तक 96.0 cm मापता है। T = 2.0 s। प्रभावी लंबाई = 96.0 + 2.0 = 98.0 cm। π² ≈ 10 लेने पर g = 4π²l/T² = 4 × 10 × 0.98/4 = 9.8 m s⁻²।
मीटर सेतु और आघूर्ण द्वारा द्रव्यमान। आघूर्णों का सिद्धांत (principle of moments): संतुलन पर, छुरी-धार (knife edge) के परितः दक्षिणावर्त आघूर्णों का योग वामावर्त आघूर्णों के योग के बराबर होता है। एक एकसमान मीटर सेतु को 50 cm चिह्न पर छुरी-धार पर संतुलित करें। तब उसका अपना भार धुरी पर लगता है और कोई बल-आघूर्ण नहीं देता। अज्ञात द्रव्यमान M को धुरी से दूरी a पर और ज्ञात द्रव्यमान m को दूसरी ओर दूरी b पर लटकाएँ और सेतु के क्षैतिज होने तक समायोजित करें। तब M × a = m × b, अतः M = m b/a। यदि धुरी 50 cm पर नहीं है तो सेतु का भार, जो उसके 50 cm चिह्न पर लगता है, भी सम्मिलित करें। सावधानी: दूरियाँ धुरी से प्रत्येक लटके द्रव्यमान के केंद्र तक मापें।
तार का यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young's modulus)
उद्देश्य। किसी धात्विक तार के पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक Y ज्ञात करना।
सिद्धांत। Y = प्रतिबल/विकृति = (F/A)/(l/L)। त्रिज्या r, लंबाई L वाले तार पर भार M लगाने से बढ़ी लंबाई (प्रसार) l हो तो: Y = MgL/(πr²l)।
व्यवस्था (सर्ले की विधि, रूपरेखा)। दो सर्वसम तार एक दृढ़ आधार से लटकाए जाते हैं। संदर्भ तार पर नियत भार रहता है और यह ताप-परिवर्तन तथा आधार के झुकाव की क्षतिपूर्ति करता है। प्रायोगिक तार में एक हैंगर होता है जिस पर खाँचेदार द्रव्यमान जोड़े जाते हैं। स्पिरिट लेवल और माइक्रोमीटर पेच छोटे प्रसार को मापते हैं। तार की त्रिज्या स्क्रू गेज से और लंबाई L मीटर सेतु से मापी जाती है।
ग्राफ। प्रत्यास्थ सीमा के भीतर भार (M) तथा प्रसार (l) के बीच ग्राफ सरल रेखा होता है। प्रवणता = M/l, अतः Y = (प्रवणता × gL)/(πr²)।
त्रुटियाँ और सावधानियाँ। प्रत्यास्थ सीमा से अधिक भार न लगाएँ। मापने योग्य प्रसार पाने के लिए लंबा, पतला तार लें। तार में बल (kink) न पड़ने दें। भार चढ़ाने और उतारने के पाठ्यांकों का औसत लें। त्रिज्या r² के रूप में आती है, इसलिए इसे सबसे सावधानी से मापना चाहिए; r में छोटी त्रुटि से Y में बड़ी त्रुटि आती है।
हल किया गया उदाहरण 4. तार की त्रिज्या 0.7 mm, लंबाई 1.54 m, भार 3.0 kg, प्रसार 1.0 mm। g = 10 m s⁻² और π = 22/7 लें। πr² = 1.54 × 10⁻⁶ m²। Y = 30 × 1.54/(1.54 × 10⁻⁶ × 10⁻³) = 3.0 × 10¹⁰ N m⁻²।
पृष्ठ तनाव और श्यानता
केशिका-आरोहण द्वारा पृष्ठ तनाव।
- सिद्धांत: T = rhρg/(2cosθ)। जल और स्वच्छ काँच के लिए θ लगभग 0 है, अतः T = rhρg/2।
- r = केशनली की त्रिज्या (चल सूक्ष्मदर्शी या वर्नियर से मापी गई), h = बर्तन में जल-तल से ऊपर जल-स्तंभ की ऊँचाई, ρ = जल का घनत्व, g = 9.8 m s⁻²।
- कमरे के ताप पर जल का पृष्ठ तनाव लगभग 7 × 10⁻² N m⁻¹ है।
- अपमार्जक (detergent) का प्रभाव: यह जल का पृष्ठ तनाव घटाता है, अतः केशिका-आरोहण घटता है (h ∝ T/r)।
- सावधानियाँ: नली को भली-भाँति साफ़ करें, उसे ऊर्ध्वाधर रखें और h को बर्तन के जल-तल से मेनिस्कस (meniscus) के निम्नतम बिंदु तक मापें। अशुद्धियाँ और ताप-परिवर्तन T को बदलते हैं।
गेंद के सीमांत वेग द्वारा श्यानता।
- सिद्धांत: द्रव में गिरती गेंद सीमांत वेग (terminal velocity) v तक तब पहुँचती है जब भार − उत्प्लावन बल = श्यान कर्षण (स्टोक्स का नियम, F = 6πηrv)।
- परिणाम: η = 2r²(ρ − σ)g/(9v), जहाँ ρ = गेंद का घनत्व और σ = द्रव का घनत्व।
- पाठ्यांक: v = लंबे जार पर दो चिह्नों के बीच की दूरी/लिया गया समय। चिह्न सतह से काफ़ी नीचे लगाए जाते हैं ताकि गेंद एकसमान वेग तक पहुँच चुकी हो।
- सावधानियाँ: चौड़े जार का उपयोग करें और गेंद को अक्ष के अनुदिश गिराएँ (दीवार के प्रभाव से बचने के लिए), गेंद को पहले गीला कर लें ताकि कोई वायु का बुलबुला न चिपके, और ताप नियत रखें क्योंकि η ताप के साथ तेज़ी से बदलता है।
- परिवर्तनों का प्रभाव: समान गेंद-पदार्थ और द्रव के लिए v ∝ r² तथा v ∝ 1/η।
हल किया गया उदाहरण 5. 1.0 mm त्रिज्या और 2000 kg m⁻³ घनत्व की गेंद 1100 kg m⁻³ घनत्व वाले द्रव में v = 0.020 m s⁻¹ से गिरती है। g = 10 m s⁻² लेने पर: η = 2 × 10⁻⁶ × 900 × 10/(9 × 0.02) = 0.1 Pa s।
अनुनाद नली द्वारा ध्वनि की चाल
उद्देश्य। अनुनाद नली और ज्ञात आवृत्ति के स्वरित्र द्विभुजों (tuning forks) की सहायता से कमरे के ताप पर वायु में ध्वनि की चाल ज्ञात करना।
सिद्धांत। एक सिरे पर बंद वायु-स्तंभ (जल की सतह) कंपित स्वरित्र द्वारा अनुनाद में लाया जाता है। जल की सतह पर निस्पंद (node) बनता है और खुले सिरे से थोड़ा ऊपर प्रस्पंद (antinode) बनता है।
- प्रथम अनुनाद: l₁ + e = λ/4।
- द्वितीय अनुनाद: l₂ + e = 3λ/4।
- घटाने पर: l₂ − l₁ = λ/2, अतः λ = 2(l₂ − l₁) और v = fλ = 2f(l₂ − l₁)।
- सिरा संशोधन (end correction): e = (l₂ − 3l₁)/2। यह नली की त्रिज्या का लगभग 0.6 गुना भी होता है।
विधि। कंपित स्वरित्र को खुले सिरे के ऊपर पकड़ें। (जलाशय को हिलाकर) जल-तल तब तक नीचे करें जब तक सबसे तेज़ ध्वनि सुनाई न दे, और l₁ नोट करें। l₂ पाने के लिए लंबाई और बढ़ाएँ। दूसरे स्वरित्र से दोहराएँ।
त्रुटियाँ और सावधानियाँ। स्वरित्र को रबर के पैड पर बजाएँ (कठोर सतह पर नहीं)। नली को ऊर्ध्वाधर रखें और स्वरित्र को नली के अक्ष के ऊपर बिना छुए पकड़ें। अधिकतम तीव्रता की स्थिति सावधानी से ज्ञात करें (ऊपर और नीचे दोनों ओर से पहुँचकर औसत लें)। l₂ − l₁ का उपयोग करने से सिरा संशोधन हट जाता है।
उदाहरण: 512 Hz का स्वरित्र l₁ = 16.0 cm और l₂ = 50.0 cm देता है, अतः λ = 68 cm और v = 348 m s⁻¹।
मिश्रण विधि द्वारा विशिष्ट ऊष्मा धारिता
उद्देश्य। किसी ठोस और किसी द्रव की विशिष्ट ऊष्मा धारिता ज्ञात करना।
सिद्धांत। यदि परिवेश को ऊष्मा की हानि न हो तो गर्म वस्तु द्वारा खोई गई ऊष्मा ठंडी वस्तुओं द्वारा ली गई ऊष्मा के बराबर होती है।
ठोस। ताप T₁ पर (भाप में गर्म किया गया) द्रव्यमान m_s का ठोस, द्रव्यमान m_c और विशिष्ट ऊष्मा c_c वाले उष्मामापी (calorimeter) में ताप T₂ पर रखे द्रव्यमान m_w के जल में शीघ्रता से डाला जाता है। अंतिम ताप T है।
m_s c_s (T₁ − T) = (m_w c_w + m_c c_c)(T − T₂), अतः c_s = (m_w c_w + m_c c_c)(T − T₂)/[m_s (T₁ − T)]।
द्रव। ज्ञात विशिष्ट ऊष्मा वाले ठोस (जैसे ताँबा, लगभग 400 J kg⁻¹ K⁻¹) को गर्म करके उष्मामापी में रखे द्रव में डाला जाता है। जल के स्थान पर द्रव को रखकर वही समीकरण प्रयुक्त होता है:
c_l = m_s c_s (T₁ − T)/[m_l (T − T₂)] जब उष्मामापी की ऊष्मा धारिता नगण्य हो।
त्रुटियाँ और सावधानियाँ। गर्म ठोस को शीघ्रता से स्थानांतरित करें, धीरे-धीरे चलाएँ, पॉलिश किया हुआ और लैग (ऊष्मारोधी) किया हुआ उष्मामापी लें, ठोस डालने से ठीक पहले जल का प्रारंभिक ताप लें और उच्चतम स्थिर ताप पढ़ें।
हल किया गया उदाहरण 6. 100 °C पर 150 g धातु को 20 °C पर 100 g जल में डाला जाता है और अंतिम ताप 30 °C है। उष्मामापी की उपेक्षा करें। 0.150 × c × 70 = 0.100 × 4200 × 10, अतः c = 400 J kg⁻¹ K⁻¹।
सूत्र सारांश।
| प्रयोग | सूत्र | अल्पतमांक / मुख्य संबंध |
|---|---|---|
| वर्नियर | पाठ्यांक = MSR + n × LC | LC = 1 MSD/N |
| स्क्रू गेज | पाठ्यांक = PSR + CSR × LC | LC = पिच/N |
| लोलक | g = 4π²l/T² | l–T² की प्रवणता = g/4π² |
| आघूर्ण | M a = m b | धुरी 50 cm पर |
| यंग प्रत्यास्थता गुणांक | Y = MgL/πr²l | r² सबसे संवेदनशील |
| पृष्ठ तनाव | T = rhρg/2 | जल के लिए θ ≈ 0 |
| श्यानता | η = 2r²(ρ − σ)g/9v | v ∝ r² |
| अनुनाद नली | v = 2f(l₂ − l₁) | e = (l₂ − 3l₁)/2 |
| मिश्रण | m_s c_s ΔT_s = (m_w c_w + m_c c_c)ΔT_w | c_w = 4200 J kg⁻¹ K⁻¹ |
NEET के जाल (traps)
- धनात्मक शून्यांक त्रुटि घटाई जाती है; ऋणात्मक शून्यांक त्रुटि जोड़ी जाती है। समय के दबाव में चिह्न आसानी से उलट जाता है।
- वर्नियर में 1 VSD, 1 MSD से छोटा होता है (N VSD = (N − 1) MSD के लिए)। LC को एक VSD के माप से न मिलाएँ।
- पिच एक पूरे चक्कर की दूरी है; अल्पतमांक वृत्तीय पैमाने के एक भाग की दूरी है।
- लोलक के l–T² ग्राफ की प्रवणता g/4π² है, 4π²/g नहीं। रेखा मूलबिंदु से गुज़रती है।
- लोलक की लंबाई गोलक के केंद्र तक मापी जाती है, उसके शीर्ष या तल तक नहीं।
- Y = MgL/(πr²l) में r त्रिज्या है, व्यास नहीं। व्यास लेने पर उत्तर 4 गुना बड़ा आता है।
- संकरी नली में केशिका-आरोहण अधिक होता है और अपमार्जक मिलाने पर घटता है।
- श्यानता बढ़ने पर सीमांत वेग घटता है और त्रिज्या के वर्ग के साथ बढ़ता है।
- l₂ − l₁ का मान λ/2 के बराबर है, λ/4 के नहीं। अकेली प्रथम अनुनाद लंबाई λ/4 − e देती है।
- मिश्रण विधि में उष्मामापी की ऊष्मा धारिता सम्मिलित की जाती है जब तक उसे नगण्य न बताया गया हो।
एक पंक्ति के तथ्य
- 10 VSD = 9 MSD और 1 MSD = 1 mm वाले वर्नियर का LC 0.1 mm है।
- बर्तन की गहराई वर्नियर कैलिपर्स की पतली पट्टी से मापी जाती है।
- पिच 1 mm और 100 भागों वाले स्क्रू गेज का LC 0.01 mm है।
- स्क्रू गेज में सदैव रैचेट का उपयोग करें ताकि तार दबे नहीं।
- लोलक का आयाम समय के साथ घटता है क्योंकि ऊर्जा वायु और आधार में नष्ट होती है।
- छोटे आयाम का अर्थ केवल कुछ अंश है।
- सरल लोलक का l–T² ग्राफ मूलबिंदु से गुज़रता है।
- यंग प्रत्यास्थता गुणांक पदार्थ का गुण है, तार के आकार का नहीं।
- सर्ले की विधि में संदर्भ तार ताप-परिवर्तन और झुकाव की क्षतिपूर्ति करता है।
- स्वच्छ काँच पर जल का संपर्क कोण लगभग शून्य होता है।
- अपमार्जक जल का पृष्ठ तनाव घटाता है।
- श्यानता के प्रयोग में गेंद को चौड़े जार के अक्ष के अनुदिश गिराया जाता है।
- कमरे के ताप पर वायु में ध्वनि लगभग 340 m s⁻¹ से चलती है।
- l₂ − l₁ का उपयोग करने पर सिरा संशोधन कट जाता है।
- जल की विशिष्ट ऊष्मा 4200 J kg⁻¹ K⁻¹ है।
अभ्यास प्रश्न
वर्नियर कैलिपर्स (vernier callipers) में 10 वर्नियर पैमाने के भाग मुख्य पैमाने के 9 भागों से संपाती होते हैं और मुख्य पैमाने का एक भाग 1 mm है। अल्पतमांक क्या है?
- 0.01 mm
- 1.0 mm
- 0.9 mm
- 0.1 mm
उत्तर
D. 0.1 mm
अल्पतमांक = 1 MSD − 1 VSD = 1 mm − 0.9 mm = 0.1 mm।
In a vernier callipers, 10 vernier scale divisions coincide with 9 main scale divisions, and one main scale division is 1 mm. What is the least count?
- 0.01 mm
- 1.0 mm
- 0.9 mm
- 0.1 mm
किसी वर्नियर कैलिपर्स में ऋणात्मक शून्यांक त्रुटि 0.03 cm है। सही पाठ्यांक पाने के लिए प्रेक्षित पाठ्यांक में कौन-सा संशोधन लगाया जाता है?
- −0.03 cm (घटाया जाता है)
- 0.03 cm पाठ्यांक में गुणा किया जाता है
- +0.03 cm (जोड़ा जाता है)
- कोई नहीं, क्योंकि शून्यांक त्रुटि केवल आंतरिक व्यास के लिए मायने रखती है
उत्तर
C. +0.03 cm (जोड़ा जाता है)
संशोधन = −(शून्यांक त्रुटि) = −(−0.03 cm) = +0.03 cm, अतः इसे जोड़ा जाता है।
A vernier callipers has a negative zero error of 0.03 cm. To get the true reading, the correction applied to the observed reading is:
- −0.03 cm (subtracted)
- 0.03 cm multiplied into the reading
- +0.03 cm (added)
- none, because zero error matters only for internal diameter
किसी वर्नियर कैलिपर्स का अल्पतमांक 0.01 cm है। जबड़े बंद करने पर शून्यांक त्रुटि −0.02 cm दिखती है। किसी छड़ को मापते समय मुख्य पैमाना 3.2 cm पढ़ता है और 7वाँ वर्नियर भाग मुख्य पैमाने के किसी भाग से संपाती होता है। संशोधित लंबाई है:
- 3.25 cm
- 3.29 cm
- 3.27 cm
- 3.31 cm
उत्तर
B. 3.29 cm
प्रेक्षित = 3.2 + 7 × 0.01 = 3.27 cm। संशोधित = प्रेक्षित − (−0.02) = 3.29 cm।
A vernier callipers has least count 0.01 cm. With the jaws closed it shows a zero error of −0.02 cm. While measuring a rod the main scale reads 3.2 cm and the 7th vernier division coincides with a main scale division. The corrected length is:
- 3.25 cm
- 3.29 cm
- 3.27 cm
- 3.31 cm
स्क्रू गेज (screw gauge) की पिच वह दूरी है:
- जो वृत्तीय पैमाने के एक पूरे चक्कर में पेच अपने अक्ष के अनुदिश तय करता है
- जो वृत्तीय पैमाने के एक भाग के घूर्णन पर पेच तय करता है
- जो वृत्तीय पैमाने के दो आसन्न भागों के बीच होती है
- जो जबड़े पूरे खुले होने पर दोनों स्टड के बीच होती है
उत्तर
A. जो वृत्तीय पैमाने के एक पूरे चक्कर में पेच अपने अक्ष के अनुदिश तय करता है
पिच एक पूरे चक्कर में पेच का रैखिक अग्रगमन है। वृत्तीय पैमाने के एक भाग के लिए अग्रगमन अल्पतमांक है।
The pitch of a screw gauge is the distance:
- moved by the screw along its axis in one complete rotation of the circular scale
- moved by the screw for a rotation of one circular scale division
- between two adjacent divisions of the circular scale
- between the two studs when the jaws are fully open
किसी स्क्रू गेज का अल्पतमांक 0.01 mm और धनात्मक शून्यांक त्रुटि 0.03 mm है। एक तार के लिए पिच पैमाने का पाठ्यांक 4 mm और वृत्तीय पैमाने का पाठ्यांक 36 भाग है। तार का व्यास है:
- 4.33 mm
- 4.39 mm
- 4.30 mm
- 4.36 mm
उत्तर
A. 4.33 mm
प्रेक्षित = 4 + 36 × 0.01 = 4.36 mm। संशोधित = 4.36 − 0.03 = 4.33 mm।
A screw gauge has least count 0.01 mm and a positive zero error of 0.03 mm. A wire gives a pitch scale reading of 4 mm and a circular scale reading of 36 divisions. The diameter of the wire is:
- 4.33 mm
- 4.39 mm
- 4.30 mm
- 4.36 mm
सरल लोलक के प्रयोग में लंबाई l (m में) तथा T² (s² में) के बीच ग्राफ मूलबिंदु से गुज़रने वाली सरल रेखा है जिसकी प्रवणता 0.25 m s⁻² है। π² ≈ 10 लेने पर g का मान है:
- 1.0 m s⁻²
- 160 m s⁻²
- 10 m s⁻²
- 2.5 m s⁻²
उत्तर
C. 10 m s⁻²
l = (g/4π²) T², अतः प्रवणता = g/4π²। g = 4π² × 0.25 = 4 × 10 × 0.25 = 10 m s⁻²।
In the simple pendulum experiment a graph of length l (in m) against T² (in s²) is a straight line through the origin with slope 0.25 m s⁻². Taking π² ≈ 10, the value of g is:
- 1.0 m s⁻²
- 160 m s⁻²
- 10 m s⁻²
- 2.5 m s⁻²
सरल लोलक के प्रयोग में लोलक की प्रभावी लंबाई निलंबन बिंदु से कहाँ तक मापी जाती है?
- गोलक के शीर्ष तक
- गोलक के केंद्र तक
- गोलक के तल तक
- केवल उस बिंदु तक जहाँ धागा गोलक के हुक से बँधा है
उत्तर
B. गोलक के केंद्र तक
प्रभावी लंबाई धागे की लंबाई और गोलक की त्रिज्या का योग है, जो गोलक के केंद्र तक पहुँचती है।
In the simple pendulum experiment, the effective length of the pendulum is measured from the point of suspension to:
- the top of the bob
- the centre of the bob
- the bottom of the bob
- the point where the thread is tied to the bob's hook only
त्रिज्या 0.7 mm और लंबाई 1.54 m के एक तार को 3.0 kg भार से खींचने पर उसका प्रसार 1.0 mm है। g = 10 m s⁻² और π = 22/7 लें। तार का यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young's modulus) है:
- 1.5 × 10¹⁰ N m⁻²
- 7.5 × 10⁹ N m⁻²
- 3.0 × 10⁷ N m⁻²
- 3.0 × 10¹⁰ N m⁻²
उत्तर
D. 3.0 × 10¹⁰ N m⁻²
Y = MgL/(πr²l)। πr² = (22/7)(0.7 × 10⁻³)² = 1.54 × 10⁻⁶ m²। Y = 30 × 1.54 /(1.54 × 10⁻⁶ × 10⁻³) = 3.0 × 10¹⁰ N m⁻²।
A wire of radius 0.7 mm and length 1.54 m is stretched by a load of 3.0 kg and its extension is 1.0 mm. Take g = 10 m s⁻² and π = 22/7. Young's modulus of the wire is:
- 1.5 × 10¹⁰ N m⁻²
- 7.5 × 10⁹ N m⁻²
- 3.0 × 10⁷ N m⁻²
- 3.0 × 10¹⁰ N m⁻²
0.5 mm त्रिज्या की स्वच्छ काँच की केशनली में जल 3.0 cm ऊपर चढ़ता है। संपर्क कोण शून्य, जल का घनत्व 1000 kg m⁻³ और g = 10 m s⁻² लें। जल का पृष्ठ तनाव (surface tension) है:
- 0.0375 N m⁻¹
- 0.15 N m⁻¹
- 0.075 N m⁻¹
- 0.0075 N m⁻¹
उत्तर
C. 0.075 N m⁻¹
T = rhρg/2 = (0.5 × 10⁻³)(3 × 10⁻²)(1000)(10)/2 = 0.075 N m⁻¹।
Water rises 3.0 cm in a clean glass capillary tube of radius 0.5 mm. Take the angle of contact as zero, density of water 1000 kg m⁻³ and g = 10 m s⁻². The surface tension of water is:
- 0.0375 N m⁻¹
- 0.15 N m⁻¹
- 0.075 N m⁻¹
- 0.0075 N m⁻¹
जल में थोड़ा अपमार्जक (detergent) मिलाने पर उसी स्वच्छ नली में केशिका-आरोहण की ऊँचाई:
- वही रहती है, क्योंकि त्रिज्या अपरिवर्तित है
- घटती है, क्योंकि जल का पृष्ठ तनाव घटता है
- बढ़ती है, क्योंकि घनत्व बढ़ता है
- बढ़ती है, क्योंकि पृष्ठ तनाव बढ़ता है
उत्तर
B. घटती है, क्योंकि जल का पृष्ठ तनाव घटता है
h = 2T cosθ/(rρg)। अपमार्जक T को घटाता है, अतः h घटती है।
When a little detergent is added to water, the height of capillary rise in the same clean tube:
- remains the same, because the radius is unchanged
- decreases, because the surface tension of water decreases
- increases, because the density increases
- increases, because the surface tension increases
1.0 mm त्रिज्या और 2000 kg m⁻³ घनत्व की एक गेंद 1100 kg m⁻³ घनत्व वाले द्रव में 0.020 m s⁻¹ की एकसमान चाल से गिरती है। g = 10 m s⁻² लें। द्रव का श्यानता गुणांक (coefficient of viscosity) है:
- 0.1 Pa s
- 0.4 Pa s
- 0.9 Pa s
- 0.05 Pa s
उत्तर
A. 0.1 Pa s
η = 2r²(ρ − σ)g/(9v) = 2 × 10⁻⁶ × 900 × 10/(9 × 0.02) = 0.018/0.18 = 0.1 Pa s।
A ball of radius 1.0 mm and density 2000 kg m⁻³ falls with a uniform speed of 0.020 m s⁻¹ in a liquid of density 1100 kg m⁻³. Take g = 10 m s⁻². The coefficient of viscosity of the liquid is:
- 0.1 Pa s
- 0.4 Pa s
- 0.9 Pa s
- 0.05 Pa s
अनुनाद नली (resonance tube) के प्रयोग में 480 Hz आवृत्ति का स्वरित्र (tuning fork) 17 cm वायु-स्तंभ लंबाई पर प्रथम अनुनाद और 53 cm पर द्वितीय अनुनाद देता है। ध्वनि की चाल है:
- 691.2 m s⁻¹
- 326.4 m s⁻¹
- 172.8 m s⁻¹
- 345.6 m s⁻¹
उत्तर
D. 345.6 m s⁻¹
λ = 2(l₂ − l₁) = 2 × 36 cm = 0.72 m। v = fλ = 480 × 0.72 = 345.6 m s⁻¹।
In a resonance tube experiment a tuning fork of frequency 480 Hz gives the first resonance at an air column length of 17 cm and the second at 53 cm. The speed of sound is:
- 691.2 m s⁻¹
- 326.4 m s⁻¹
- 172.8 m s⁻¹
- 345.6 m s⁻¹
अनुनाद नली के प्रयोग में प्रथम और द्वितीय अनुनाद वायु-स्तंभ की लंबाई 20.0 cm और 62.0 cm पर होते हैं। सिरा संशोधन (end correction) है:
- 2.0 cm
- 1.0 cm
- 0.5 cm
- 3.0 cm
उत्तर
B. 1.0 cm
e = (l₂ − 3l₁)/2 = (62 − 60)/2 = 1.0 cm। जाँच: λ/4 = 21 cm = l₁ + e।
In a resonance tube experiment the first and second resonances occur at air column lengths of 20.0 cm and 62.0 cm. The end correction is:
- 2.0 cm
- 1.0 cm
- 0.5 cm
- 3.0 cm
मिश्रण विधि (method of mixtures) में प्रयुक्त सिद्धांत यह है कि:
- गर्म वस्तु की विशिष्ट ऊष्मा जल की विशिष्ट ऊष्मा के बराबर होती है
- अंतिम ताप दोनों प्रारंभिक तापों का औसत होता है
- गर्म वस्तु द्वारा खोई गई ऊष्मा सदैव ठंडी वस्तु द्वारा ली गई ऊष्मा की दोगुनी होती है
- यदि परिवेश को ऊष्मा की हानि न हो तो गर्म वस्तु द्वारा खोई गई ऊष्मा ठंडी वस्तुओं द्वारा ली गई ऊष्मा के बराबर होती है
उत्तर
D. यदि परिवेश को ऊष्मा की हानि न हो तो गर्म वस्तु द्वारा खोई गई ऊष्मा ठंडी वस्तुओं द्वारा ली गई ऊष्मा के बराबर होती है
ऊष्मामिति (calorimetry): खोई गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा, यह मानते हुए कि निकाय विलगित है।
In the method of mixtures, the principle used is that:
- specific heat of the hot body equals that of the water
- the final temperature is the average of the two initial temperatures
- heat lost by the hot body is always twice the heat gained by the cold body
- heat lost by the hot body equals heat gained by the cold bodies, if no heat is lost to the surroundings
एक एकसमान मीटर सेतु (metre scale) को उसके 50 cm चिह्न पर छुरी-धार (knife edge) पर संतुलित किया गया है। 30 cm चिह्न पर एक वस्तु और 80 cm चिह्न पर 50 g द्रव्यमान लटकाने पर सेतु संतुलित हो जाता है। वस्तु का द्रव्यमान है:
- 120 g
- 50 g
- 75 g
- 33.3 g
उत्तर
C. 75 g
छुरी-धार से दूरियाँ: वस्तु 20 cm, ज्ञात द्रव्यमान 30 cm। M × 20 = 50 × 30, अतः M = 75 g।
A uniform metre scale is balanced on a knife edge at its 50 cm mark. An object is hung at the 30 cm mark and a 50 g mass is hung at the 80 cm mark, and the scale balances. The mass of the object is:
- 120 g
- 50 g
- 75 g
- 33.3 g
100 °C पर 150 g धातु को नगण्य ऊष्मा धारिता वाले उष्मामापी (calorimeter) में 20 °C पर रखे 100 g जल में डाला जाता है। अंतिम स्थिर ताप 30 °C है। जल की विशिष्ट ऊष्मा 4200 J kg⁻¹ K⁻¹ है। धातु की विशिष्ट ऊष्मा है:
- 400 J kg⁻¹ K⁻¹
- 200 J kg⁻¹ K⁻¹
- 350 J kg⁻¹ K⁻¹
- 900 J kg⁻¹ K⁻¹
उत्तर
A. 400 J kg⁻¹ K⁻¹
खोई गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा: 0.150 × c × 70 = 0.100 × 4200 × 10, अतः c = 4200/10.5 = 400 J kg⁻¹ K⁻¹।
150 g of a metal at 100 °C is dropped into 100 g of water at 20 °C in a calorimeter of negligible heat capacity. The final steady temperature is 30 °C. Specific heat of water is 4200 J kg⁻¹ K⁻¹. The specific heat of the metal is:
- 400 J kg⁻¹ K⁻¹
- 200 J kg⁻¹ K⁻¹
- 350 J kg⁻¹ K⁻¹
- 900 J kg⁻¹ K⁻¹
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: वर्नियर कैलिपर्स की धनात्मक शून्यांक त्रुटि को प्रेक्षित पाठ्यांक में से घटाया जाता है। कथन II: जब 10 वर्नियर भाग 9 मुख्य पैमाने के भागों के बराबर हों तो एक वर्नियर भाग एक मुख्य पैमाने के भाग से छोटा होता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
A. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
धनात्मक त्रुटि का अर्थ है कि वर्नियर शून्य मुख्य शून्य के दाईं ओर है, अतः संशोधन घटाया जाता है। 1 VSD = 0.9 MSD, जो छोटा है।
Given below are two statements: Statement I: A positive zero error of a vernier callipers is subtracted from the observed reading. Statement II: When 10 vernier divisions equal 9 main scale divisions, one vernier division is smaller than one main scale division.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: स्क्रू गेज की शून्यांक त्रुटि दोनों स्टड को पूरी तरह दूर रखकर ज्ञात की जाती है। कथन II: शून्य संशोधन का चिह्न शून्यांक त्रुटि के चिह्न के विपरीत होता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
D. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
शून्यांक त्रुटि स्टड को संपर्क में रखकर ज्ञात की जाती है, अतः कथन I गलत है। कथन II सही है।
Given below are two statements: Statement I: The zero error of a screw gauge is found with the two studs kept fully apart. Statement II: The zero correction has the opposite sign to the zero error.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: सरल लोलक के लिए लंबाई l तथा T² के बीच ग्राफ मूलबिंदु से गुज़रने वाली सरल रेखा होता है। कथन II: इसकी प्रवणता 4π²/g है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
C. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
l = (g/4π²)T², अतः रेखा मूलबिंदु से गुज़रती है किंतु प्रवणता g/4π² है, 4π²/g नहीं।
Given below are two statements: Statement I: The graph of length l against T² for a simple pendulum is a straight line through the origin. Statement II: Its slope is 4π²/g.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: यंग प्रत्यास्थता गुणांक पदार्थ का गुण है, अतः यह तार की त्रिज्या या लंबाई पर निर्भर नहीं करता। कथन II: प्रयोग के दौरान तार पर भार प्रत्यास्थ सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
A. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
Y = प्रतिबल/विकृति पदार्थ का गुण है। प्रत्यास्थ सीमा से परे प्रतिबल–विकृति संबंध रैखिक नहीं रहता।
Given below are two statements: Statement I: Young's modulus is a property of the material, so it does not depend on the radius or length of the wire. Statement II: The load on the wire must not exceed the elastic limit during the experiment.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: छोटी त्रिज्या वाली केशनली में जल कम ऊपर चढ़ता है। कथन II: अपमार्जक मिलाने से जल का पृष्ठ तनाव बढ़ता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
B. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
h ∝ 1/r, अतः संकरी नली में आरोहण अधिक होता है। अपमार्जक पृष्ठ तनाव घटाता है। दोनों कथन गलत हैं।
Given below are two statements: Statement I: Water rises less in a capillary tube of smaller radius. Statement II: Adding detergent increases the surface tension of water.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
श्यानता के लिए सीमांत वेग विधि के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. चाल तभी मापी जाती है जब गेंद एकसमान वेग प्राप्त कर चुकी हो। 2. दीवार के प्रभाव को घटाने के लिए गेंद को चौड़े बेलन के अक्ष के निकट छोड़ा जाता है। 3. द्रव की श्यानता बढ़ने पर उसी गेंद का सीमांत वेग बढ़ता है।
- 1 और 2 केवल
- 1 और 3 केवल
- 2 और 3 केवल
- 1, 2 और 3
उत्तर
A. 1 और 2 केवल
v = 2r²(ρ − σ)g/9η, अतः η बढ़ने पर v घटता है। कथन 3 गलत है।
Which of the following statements about the terminal velocity method for viscosity are correct? 1. The speed is measured only after the ball has reached uniform velocity. 2. The ball is released near the axis of a wide cylinder to reduce wall effects. 3. The terminal velocity of the same ball increases when the viscosity of the liquid increases.
- 1 and 2 only
- 1 and 3 only
- 2 and 3 only
- 1, 2 and 3
अनुनाद नली के प्रयोग के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. प्रथम अनुनाद तब होता है जब l₁ + e = λ/4। 2. द्वितीय अनुनाद तब होता है जब l₂ + e = 3λ/4। 3. अंतर l₂ − l₁, λ/4 के बराबर है।
- 1 और 2 केवल
- 2 और 3 केवल
- 1 और 3 केवल
- 1, 2 और 3
उत्तर
A. 1 और 2 केवल
l₂ − l₁ = 3λ/4 − λ/4 = λ/2, अतः कथन 3 गलत है।
Which of the following statements about the resonance tube experiment are correct? 1. The first resonance occurs when l₁ + e = λ/4. 2. The second resonance occurs when l₂ + e = 3λ/4. 3. The difference l₂ − l₁ equals λ/4.
- 1 and 2 only
- 2 and 3 only
- 1 and 3 only
- 1, 2 and 3
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: मिश्रण विधि में उष्मामापी की ऊष्मा धारिता को सदैव उपेक्षित किया जाता है। कथन II: ऊष्मामापी को लैग (ऊष्मारोधी) किया जाता है ताकि परिवेश को ऊष्मा की हानि घटे।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
D. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उष्मामापी की ऊष्मा धारिता तब तक सम्मिलित की जाती है जब तक वह नगण्य न हो। लैग करने से ऊष्मा-हानि घटती है, अतः केवल कथन II सही है।
Given below are two statements: Statement I: In the method of mixtures the heat capacity of the calorimeter is always ignored. Statement II: The calorimeter is lagged to reduce heat loss to the surroundings.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: जब एकसमान मीटर सेतु को उसके 50 cm चिह्न पर संतुलित किया जाता है तो उसका अपना भार छुरी-धार के परितः कोई बल-आघूर्ण उत्पन्न नहीं करता। कथन II: संतुलन पर छुरी-धार के परितः दक्षिणावर्त आघूर्णों का योग वामावर्त आघूर्णों के योग के बराबर होता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
A. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
एकसमान सेतु का भार 50 cm चिह्न पर, अर्थात् धुरी पर, लगता है। दोनों कथन सही हैं।
Given below are two statements: Statement I: When a uniform metre scale is balanced at its 50 cm mark, its own weight produces no torque about the knife edge. Statement II: At balance the sum of clockwise moments equals the sum of anticlockwise moments about the knife edge.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
सरल लोलक के प्रयोग के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. आयाम बड़ा हो सकता है, क्योंकि आवर्तकाल आयाम पर निर्भर नहीं करता। 2. समय तब नापना शुरू किया जाता है जब गोलक माध्य स्थिति से गुज़रता है। 3. पतला, अप्रत्यास्थ धागा और छोटा भारी गोलक प्रयोग किया जाता है।
- 1 और 2 केवल
- 2 और 3 केवल
- 1 और 3 केवल
- 1, 2 और 3
उत्तर
B. 2 और 3 केवल
T आयाम से स्वतंत्र केवल छोटे कोणों (कुछ अंश) के लिए होता है, अतः 1 गलत है।
Which of the following statements about the simple pendulum experiment are correct? 1. The amplitude may be large, because the time period does not depend on amplitude. 2. The timing is started when the bob crosses the mean position. 3. A thin, inextensible thread and a small heavy bob are used.
- 1 and 2 only
- 2 and 3 only
- 1 and 3 only
- 1, 2 and 3
अभिकथन (A): किसी दिए गए मुख्य पैमाने के लिए वर्नियर कैलिपर्स का अल्पतमांक तब घटता है जब वर्नियर भागों की संख्या बढ़ती है। कारण (R): अल्पतमांक = मुख्य पैमाने के एक भाग का मान ÷ वर्नियर भागों की संख्या।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
A. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
LC = 1 MSD/N, अतः N बड़ा होने पर LC छोटा होता है। R, A की व्याख्या करता है।
Assertion (A): For a given main scale, the least count of a vernier callipers decreases when the number of vernier divisions increases. Reason (R): Least count = value of one main scale division divided by the number of vernier divisions.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): समान पदार्थ के मोटे और पतले तार के लिए धातु का यंग प्रत्यास्थता गुणांक समान होता है। कारण (R): सर्ले की विधि में संदर्भ तार पर नियत भार रहता है जो ताप-परिवर्तन और आधार के झुकाव की क्षतिपूर्ति करता है।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
B. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
दोनों सत्य हैं, किंतु संदर्भ तार यह नहीं समझाता कि भिन्न मोटाई के लिए Y समान क्यों रहता है।
Assertion (A): Young's modulus of a metal is the same for a thick and a thin wire of the same material. Reason (R): In Searle's method a reference wire carries a constant load to compensate for temperature change and sagging of the support.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): छोटे कोणों के लिए सरल लोलक का आवर्तकाल आयाम पर निर्भर नहीं करता। कारण (R): सरल लोलक का आवर्तकाल गोलक के द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
C. A सत्य है लेकिन R असत्य है
A सत्य है। T = 2π√(l/g) द्रव्यमान से स्वतंत्र है, अतः R असत्य है।
Assertion (A): For small angles, the time period of a simple pendulum does not depend on amplitude. Reason (R): The time period of a simple pendulum depends on the mass of the bob.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): मिश्रण विधि में उष्मामापी की ऊष्मा धारिता को सदैव उपेक्षित किया जाता है। कारण (R): उष्मामापी भी गर्म वस्तु से ऊष्मा अवशोषित करता है।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
D. A असत्य है लेकिन R सत्य है
A असत्य है: जब तक नगण्य न हो, उसकी ऊष्मा धारिता सम्मिलित की जाती है। R सत्य है।
Assertion (A): The heat capacity of the calorimeter is always ignored in the method of mixtures. Reason (R): The calorimeter also absorbs heat from the hot body.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): 1 mm पिच और 100 वृत्तीय भागों वाले स्क्रू गेज का अल्पतमांक 0.01 mm होता है। कारण (R): अल्पतमांक = पिच × वृत्तीय भागों की संख्या।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
C. A सत्य है लेकिन R असत्य है
LC = 1 mm/100 = 0.01 mm, अतः A सत्य है। LC = पिच ÷ भागों की संख्या, अतः R असत्य है।
Assertion (A): A screw gauge of pitch 1 mm with 100 circular divisions has a least count of 0.01 mm. Reason (R): Least count equals pitch multiplied by the number of circular divisions.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): जल में अपमार्जक मिलाने से स्वच्छ नली में केशिका-आरोहण बढ़ता है। कारण (R): अपमार्जक जल का पृष्ठ तनाव घटाता है।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
D. A असत्य है लेकिन R सत्य है
कम पृष्ठ तनाव से आरोहण घटता है, अतः A असत्य है। R सत्य है।
Assertion (A): Detergent added to water increases the capillary rise in a clean tube. Reason (R): Detergent lowers the surface tension of water.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. वर्नियर कैलिपर्स b. स्क्रू गेज c. अनुनाद नली d. सरल लोलक। सूची II: i. बर्तन की गहराई ii. पतले तार का व्यास iii. वायु में ध्वनि की चाल iv. गुरुत्वीय त्वरण
- a-i, b-ii, c-iv, d-iii
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
- a-iii, b-ii, c-i, d-iv
उत्तर
B. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
वर्नियर की गहराई-पट्टी गहराई मापती है, स्क्रू गेज पतले तार मापता है, अनुनाद नली v देती है, लोलक g देता है।
Match List I with List II. List I: a. Vernier callipers b. Screw gauge c. Resonance tube d. Simple pendulum. List II: i. Depth of a vessel ii. Diameter of a thin wire iii. Speed of sound in air iv. Acceleration due to gravity
- a-i, b-ii, c-iv, d-iii
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
- a-iii, b-ii, c-i, d-iv
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. तार का यंग प्रत्यास्थता गुणांक b. सीमांत वेग विधि c. केशिका-आरोहण d. सरल लोलक। सूची II: i. T = rhρg/2 ii. η = 2r²(ρ − σ)g/9v iii. Y = MgL/πr²l iv. g = 4π²l/T²
- a-ii, b-iii, c-i, d-iv
- a-iii, b-ii, c-iv, d-i
- a-iii, b-ii, c-i, d-iv
- a-iii, b-i, c-ii, d-iv
उत्तर
C. a-iii, b-ii, c-i, d-iv
प्रत्येक सूत्र सूची में नामित प्रयोग का है।
Match List I with List II. List I: a. Young's modulus of a wire b. Terminal velocity method c. Capillary rise d. Simple pendulum. List II: i. T = rhρg/2 ii. η = 2r²(ρ − σ)g/9v iii. Y = MgL/πr²l iv. g = 4π²l/T²
- a-ii, b-iii, c-i, d-iv
- a-iii, b-ii, c-iv, d-i
- a-iii, b-ii, c-i, d-iv
- a-iii, b-i, c-ii, d-iv
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। एक स्क्रू गेज में 100 वृत्तीय पैमाने के भाग हैं और अल्पतमांक 0.01 mm है। स्टड के संपर्क में होने पर संदर्भ रेखा वृत्तीय पैमाने के निम्नलिखित भाग से संपाती होती है। सूची I: a. 3रा भाग b. 96वाँ भाग c. 97वाँ भाग d. 5वाँ भाग। सूची II (शून्यांक त्रुटि): i. +0.03 mm ii. −0.04 mm iii. −0.03 mm iv. +0.05 mm
- a-i, b-iii, c-ii, d-iv
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-i, b-ii, c-iv, d-iii
- a-iii, b-ii, c-i, d-iv
उत्तर
B. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
3रा भाग +3 × 0.01 = +0.03 देता है। 96वाँ भाग −(100 − 96) × 0.01 = −0.04 देता है। 97वाँ भाग −0.03 देता है। 5वाँ भाग +0.05 mm देता है।
Match List I with List II. A screw gauge has 100 circular scale divisions and least count 0.01 mm. With the studs in contact, the reference line coincides with the following circular scale division. List I: a. 3rd division b. 96th division c. 97th division d. 5th division. List II (zero error): i. +0.03 mm ii. −0.04 mm iii. −0.03 mm iv. +0.05 mm
- a-i, b-iii, c-ii, d-iv
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-i, b-ii, c-iv, d-iii
- a-iii, b-ii, c-i, d-iv
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. मिश्रण विधि b. अनुनाद नली c. स्टोक्स का नियम d. मीटर सेतु से आघूर्ण। सूची II: i. खोई गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा ii. e = (l₂ − 3l₁)/2 iii. F = 6πηrv iv. दक्षिणावर्त आघूर्ण = वामावर्त आघूर्ण
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
- a-i, b-iii, c-ii, d-iv
- a-i, b-ii, c-iv, d-iii
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
उत्तर
D. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
प्रत्येक संबंध नामित प्रयोग का सिद्धांत या परिणाम है।
Match List I with List II. List I: a. Method of mixtures b. Resonance tube c. Stokes' law d. Moments with a metre scale. List II: i. Heat lost = heat gained ii. e = (l₂ − 3l₁)/2 iii. F = 6πηrv iv. Clockwise moment = anticlockwise moment
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
- a-i, b-iii, c-ii, d-iv
- a-i, b-ii, c-iv, d-iii
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. द्रव की श्यानता b. यंग प्रत्यास्थता गुणांक c. जल का पृष्ठ तनाव d. द्रव की विशिष्ट ऊष्मा। सूची II: i. गेंद को चौड़े जार के अक्ष के अनुदिश छोड़ना ii. प्रत्यास्थ सीमा के भीतर भारित तार iii. ऊर्ध्वाधर रखी स्वच्छ केशनली iv. लैग किया हुआ उष्मामापी और चलाया गया द्रव
- a-iii, b-ii, c-i, d-iv
- a-i, b-ii, c-iv, d-iii
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
उत्तर
C. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
प्रत्येक सावधानी नामित प्रयोग की मानक सावधानी है।
Match List I with List II. List I: a. Viscosity of a liquid b. Young's modulus c. Surface tension of water d. Specific heat of a liquid. List II: i. Ball released along the axis of a wide jar ii. Wire loaded within the elastic limit iii. Clean capillary tube held vertical iv. Calorimeter lagged and the liquid stirred
- a-iii, b-ii, c-i, d-iv
- a-i, b-ii, c-iv, d-iii
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। π² ≈ 10 लें। सूची I: a. 1 mm के 19 मुख्य भागों के बराबर 20 भागों वाला वर्नियर: अल्पतमांक b. स्क्रू गेज, पिच 1 mm, 50 वृत्तीय भाग: अल्पतमांक c. 1.00 m लंबाई और 2.00 s आवर्तकाल का सरल लोलक: g d. अनुनाद नली, स्वरित्र 340 Hz, l₂ − l₁ = 0.50 m: ध्वनि की चाल। सूची II: i. 0.05 mm ii. 0.02 mm iii. 10 m s⁻² iv. 340 m s⁻¹
- a-i, b-ii, c-iv, d-iii
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-i, b-iii, c-ii, d-iv
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
उत्तर
B. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
LC = 1/20 = 0.05 mm; 1/50 = 0.02 mm; g = 4π²l/T² = 40/4 = 10; v = 2 × 340 × 0.50 = 340 m s⁻¹।
Match List I with List II. Take π² ≈ 10. List I: a. Vernier with 20 divisions equal to 19 main divisions of 1 mm: least count b. Screw gauge, pitch 1 mm, 50 circular divisions: least count c. Simple pendulum of length 1.00 m and period 2.00 s: g d. Resonance tube, fork 340 Hz, l₂ − l₁ = 0.50 m: speed of sound. List II: i. 0.05 mm ii. 0.02 mm iii. 10 m s⁻² iv. 340 m s⁻¹
- a-i, b-ii, c-iv, d-iii
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-i, b-iii, c-ii, d-iv
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
किसी स्क्रू गेज की पिच 0.5 mm और वृत्तीय भाग 50 हैं। स्टड छूने पर 46वाँ वृत्तीय भाग संदर्भ रेखा के सामने है। एक तार पिच पैमाने पर 1.5 mm और वृत्तीय पैमाने पर 24 पढ़ता है। तार का व्यास है:
- 1.96 mm
- 1.54 mm
- 1.78 mm
- 1.74 mm
उत्तर
C. 1.78 mm
LC = 0.5/50 = 0.01 mm। शून्यांक त्रुटि = −(50 − 46) × 0.01 = −0.04 mm। संशोधित = 1.5 + 0.24 + 0.04 = 1.78 mm।
A screw gauge has pitch 0.5 mm and 50 circular divisions. With the studs touching, the 46th circular division is in line with the reference line. A wire reads 1.5 mm on the pitch scale and 24 on the circular scale. The diameter of the wire is:
- 1.96 mm
- 1.54 mm
- 1.78 mm
- 1.74 mm
लोलक के प्रयोग में लंबाई 1.000 m मापी गई जिसमें 1 mm की अनिश्चितता है, और 20 दोलनों में 40.0 s लगते हैं जिसमें 0.2 s की अनिश्चितता है। g में अधिकतम प्रतिशत त्रुटि लगभग है:
- 0.6%
- 2.2%
- 0.5%
- 1.1%
उत्तर
D. 1.1%
g = 4π²l/T²। Δl/l = 0.1%। ΔT/T = 0.2/40 = 0.5%। त्रुटि = 0.1 + 2 × 0.5 = 1.1%।
In a pendulum experiment the length is measured as 1.000 m with an uncertainty of 1 mm, and 20 oscillations take 40.0 s with an uncertainty of 0.2 s. The maximum percentage error in g is about:
- 0.6%
- 2.2%
- 0.5%
- 1.1%
एक विद्यार्थी लोलक की लंबाई निलंबन बिंदु से गोलाकार गोलक के शीर्ष तक मापता है और 96.0 cm पाता है। गोलक का व्यास 4.0 cm है। आवर्तकाल 2.0 s है। π² ≈ 10 लेने पर g का सही मान है:
- 9.6 m s⁻²
- 9.4 m s⁻²
- 10.2 m s⁻²
- 9.8 m s⁻²
उत्तर
D. 9.8 m s⁻²
प्रभावी लंबाई = 96.0 + 2.0 = 98.0 cm = 0.98 m। g = 4π²l/T² = 4 × 10 × 0.98/4 = 9.8 m s⁻²।
A student measures the length of a pendulum from the suspension point to the top of a spherical bob and gets 96.0 cm. The bob has diameter 4.0 cm. The period is 2.0 s. Taking π² ≈ 10, the correct value of g is:
- 9.6 m s⁻²
- 9.4 m s⁻²
- 10.2 m s⁻²
- 9.8 m s⁻²
स्वच्छ काँच की केशनली में जल 3.0 cm ऊपर चढ़ता है। प्रयोग को आधी त्रिज्या की नली से और अपमार्जक मिलाकर दोहराया जाता है जो जल का पृष्ठ तनाव आधा कर देता है। संपर्क कोण शून्य ही रहता है। नया आरोहण है:
- 1.5 cm
- 6.0 cm
- 3.0 cm
- 12 cm
उत्तर
C. 3.0 cm
h = 2T/(rρg) ∝ T/r। T आधा और r आधा होने से T/r अपरिवर्तित रहता है और h = 3.0 cm ही रहता है।
In a clean glass capillary tube water rises 3.0 cm. The experiment is repeated with a tube of half the radius and with detergent added that halves the surface tension of water. The angle of contact stays zero. The new rise is:
- 1.5 cm
- 6.0 cm
- 3.0 cm
- 12 cm
1.0 mm त्रिज्या की एक इस्पात की गेंद किसी द्रव में 1.0 cm s⁻¹ का सीमांत वेग प्राप्त करती है। 2.0 mm त्रिज्या की इस्पात की गेंद उसी द्रव में छोड़ी जाती है। उसका सीमांत वेग है:
- 4.0 cm s⁻¹
- 8.0 cm s⁻¹
- 2.0 cm s⁻¹
- 16 cm s⁻¹
उत्तर
A. 4.0 cm s⁻¹
समान पदार्थ और द्रव के लिए v ∝ r²। त्रिज्या दोगुनी होने पर v = 4 × 1.0 = 4.0 cm s⁻¹ हो जाता है।
A steel ball of radius 1.0 mm reaches a terminal velocity of 1.0 cm s⁻¹ in a liquid. A steel ball of radius 2.0 mm is dropped in the same liquid. Its terminal velocity is:
- 4.0 cm s⁻¹
- 8.0 cm s⁻¹
- 2.0 cm s⁻¹
- 16 cm s⁻¹
400 Hz के स्वरित्र वाले अनुनाद नली के प्रयोग में प्रथम अनुनाद 20 cm पर है। सिरा संशोधन 1.5 cm है। ध्वनि की चाल है:
- 172 m s⁻¹
- 344 m s⁻¹
- 320 m s⁻¹
- 296 m s⁻¹
उत्तर
B. 344 m s⁻¹
l₁ + e = λ/4 = 21.5 cm, अतः λ = 0.86 m। v = fλ = 400 × 0.86 = 344 m s⁻¹।
In a resonance tube experiment with a 400 Hz fork the first resonance is at 20 cm. The end correction is 1.5 cm. The speed of sound is:
- 172 m s⁻¹
- 344 m s⁻¹
- 320 m s⁻¹
- 296 m s⁻¹
100 g द्रव्यमान और 400 J kg⁻¹ K⁻¹ विशिष्ट ऊष्मा की ताँबे की एक गेंद को 100 °C तक गर्म करके नगण्य ऊष्मा धारिता वाले उष्मामापी में 20 °C पर रखे 200 g द्रव में डाला जाता है। अंतिम ताप 30 °C है। द्रव की विशिष्ट ऊष्मा है:
- 2800 J kg⁻¹ K⁻¹
- 700 J kg⁻¹ K⁻¹
- 1400 J kg⁻¹ K⁻¹
- 5600 J kg⁻¹ K⁻¹
उत्तर
C. 1400 J kg⁻¹ K⁻¹
0.1 × 400 × 70 = 0.2 × c × 10, अतः c = 2800/2 = 1400 J kg⁻¹ K⁻¹।
A copper ball of mass 100 g and specific heat 400 J kg⁻¹ K⁻¹ is heated to 100 °C and dropped into 200 g of a liquid at 20 °C in a calorimeter of negligible heat capacity. The final temperature is 30 °C. The specific heat of the liquid is:
- 2800 J kg⁻¹ K⁻¹
- 700 J kg⁻¹ K⁻¹
- 1400 J kg⁻¹ K⁻¹
- 5600 J kg⁻¹ K⁻¹