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NEET रसायन विज्ञान: कार्बनिक रसायन के मूल सिद्धांत और हाइड्रोकार्बन · Chapter 2

कार्बनिक रसायन: कुछ आधारभूत सिद्धांत (Organic Chemistry: Some Basic Principles)

याद रखने योग्य बातें

  • कार्बन चतुःसंयोजी (tetravalent) है और sp³ (चतुष्फलकीय, 109.5°), sp² (त्रिकोणीय समतलीय, 120°) तथा sp (रैखिक, 180°) संकरित कक्षक बनाता है; s-लक्षण 25 %, 33.3 % और 50 % होता है, तथा आबंध लंबाई का क्रम C–C > C=C > C≡C है।
  • स्थायित्व के क्रम जो जानने आवश्यक हैं: कार्बधनायन और मुक्त मूलक 3° > 2° > 1° > मेथिल; कार्बऋणायन मेथिल > 1° > 2° > 3°। कार्बधनायन +I, अतिसंयुग्मन और अनुनाद द्वारा स्थायी होते हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव गुणों की व्याख्या करते हैं: प्रेरणिक प्रभाव दूरी के साथ तेज़ी से घटता है, अनुनाद (+R या −R) π इलेक्ट्रॉनों या एकाकी युग्मों का विस्थानीकरण करता है, और अतिसंयुग्मन α C–H के σ आबंध का उपयोग करता है। Cl₃CCOOH > Cl₂CHCOOH > ClCH₂COOH > CH₃COOH का अम्ल सामर्थ्य क्रम क्लोरीन के −I प्रभाव से प्राप्त होता है।
  • IUPAC नाम मुख्य क्रियात्मक समूह वाली सबसे लंबी शृंखला से बनते हैं, और उस समूह को सबसे छोटा स्थान-अंक (locant) दिया जाता है। प्राथमिकता क्रम –COOH > –SO₃H > –COOR > –COCl > –CONH₂ > –CN > –CHO > C=O > –OH > –NH₂ > C=C > C≡C है।

चतुःसंयोजकता, संकरण और आकृति

कार्बन का मूल अवस्था (ground state) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p² है। एक 2s इलेक्ट्रॉन 2p में उत्तेजित होता है, जिससे चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों वाला 2s¹ 2p³ विन्यास बनता है। इसलिए कार्बन चार सहसंयोजी आबंध बनाता है (चतुःसंयोजकता)। यह अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ शृंखलाओं और वलयों में जुड़ सकता है (शृंखलन, catenation) और एकल, द्वि तथा त्रि आबंध बना सकता है।

संकरणमिश्रित कक्षकआकृतिआबंध कोणs-लक्षणउदाहरणकार्बन–कार्बन आबंध लंबाई
sp³एक s + तीन pचतुष्फलकीय109.5°25 %CH₄, C₂H₆C–C लगभग 154 pm
sp²एक s + दो pत्रिकोणीय समतलीय120°33.3 %CH₂=CH₂C=C लगभग 134 pm
spएक s + एक pरैखिक180°50 %HC≡CHC≡C लगभग 120 pm

सिग्मा (σ) आबंध कक्षकों के आमने-सामने अतिव्यापन से बनता है। पाई (π) आबंध असंकरित p कक्षकों के पार्श्व अतिव्यापन से बनता है। π आबंध σ आबंध से दुर्बल होता है और बहु-आबंध का अभिक्रियाशील भाग होता है। द्वि आबंध में एक σ + एक π होता है; त्रि आबंध में एक σ + दो π होते हैं। एथीन में पाँच σ और एक π आबंध होते हैं; एथाइन में तीन σ और दो π आबंध होते हैं। s-लक्षण अधिक होने पर कार्बन अधिक विद्युतऋणात्मक होता है और आबंध युग्म को अधिक कसकर पकड़ता है, इसलिए sp कार्बन से बना आबंध छोटा होता है।

संरचनात्मक निरूपण और वर्गीकरण

  • पूर्ण संरचना सूत्र: प्रत्येक परमाणु और प्रत्येक आबंध दर्शाया जाता है।
  • संघनित सूत्र: समूहों को साथ-साथ लिखा जाता है, जैसे CH₃CH₂CH₂CH₃ या CH₃(CH₂)₂CH₃।
  • आबंध-रेखा सूत्र: कार्बन और कार्बन पर स्थित हाइड्रोजन परमाणु नहीं लिखे जाते; रेखा का प्रत्येक मोड़ या सिरा एक कार्बन परमाणु होता है, और चार आबंध पूरे करने के लिए हाइड्रोजन परमाणु मान लिए जाते हैं।
वर्गअर्थउदाहरण
विवृत शृंखला (acyclic, ऐलिफैटिक)कोई वलय नहींCH₃CH₂CH₃
ऐलिसाइक्लिक (alicyclic)कार्बन परमाणुओं का बंद वलय जिसके गुण ऐलिफैटिक होते हैंसाइक्लोहेक्सेन
ऐरोमैटिक (aromatic)बेन्ज़ीन और संबंधित यौगिक (बेन्ज़ेनॉइड, या अबेन्ज़ेनॉइड जैसे ट्रोपोलोन)बेन्ज़ीन, नैफ्थेलीन
विषमचक्रीय (heterocyclic)वलय में कार्बन के अतिरिक्त कोई अन्य परमाणु होता हैपिरिडीन, फ्यूरान

क्रियात्मक समूह (functional group) वह परमाणु या समूह है जो यौगिक के रासायनिक गुण निर्धारित करता है। समजातीय श्रेणी (homologous series) समान क्रियात्मक समूह और समान सामान्य सूत्र वाले यौगिकों का परिवार है, जिसमें क्रमागत सदस्य –CH₂– इकाई (14 u) से भिन्न होते हैं। सदस्यों के भौतिक गुणों में नियमित क्रम और रासायनिक गुणों में समानता होती है। ऐल्केन CₙH₂ₙ₊₂, ऐल्कीन CₙH₂ₙ, ऐल्काइन CₙH₂ₙ₋₂ हैं।

IUPAC नामपद्धति

ऐलिफैटिक यौगिक के लिए पद:

  • 1. मुख्य क्रियात्मक समूह वाली सबसे लंबी शृंखला चुनिए (और यदि संभव हो तो बहु-आबंधों की अधिकतम संख्या वाली)।
  • 2. शृंखला को इस प्रकार अंकित कीजिए कि मुख्य क्रियात्मक समूह को सबसे छोटा स्थान-अंक मिले, फिर बहु-आबंधों को, फिर प्रतिस्थापियों को। यदि फिर भी बराबर हो, तो वर्णानुक्रम में पहले आने वाले प्रतिस्थापी को छोटा अंक दीजिए।
  • 3. प्रतिस्थापियों को वर्णानुक्रम में उपसर्ग के रूप में लिखिए। di, tri और tetra उपसर्ग वर्णानुक्रम में नहीं गिने जाते। नाम = उपसर्ग + मूल + (en या yne) + प्रत्यय।

मूल नाम: C₁ meth, C₂ eth, C₃ prop, C₄ but, C₅ pent, C₆ hex, C₇ hept, C₈ oct। हैलो (fluoro, chloro, bromo, iodo), नाइट्रो, ऐल्कॉक्सी और ऐल्किल समूह केवल उपसर्ग के रूप में नामित होते हैं।

क्रियात्मक समूहप्रत्ययउपसर्ग रूपउदाहरण
कार्बोक्सिलिक अम्ल –COOH-oic acidcarboxyCH₃COOH ethanoic acid
सल्फोनिक अम्ल –SO₃H-sulphonic acidsulphoC₆H₅SO₃H benzenesulphonic acid
एस्टर –COOR-oatealkoxycarbonylCH₃COOCH₃ methyl ethanoate
अम्ल क्लोराइड –COCl-oyl chloridechloroformylCH₃COCl ethanoyl chloride
ऐमाइड –CONH₂-amidecarbamoylCH₃CONH₂ ethanamide
नाइट्राइल –CN-nitrilecyanoCH₃CN ethanenitrile
ऐल्डिहाइड –CHO-aloxo या formylCH₃CHO ethanal
कीटोन >C=O-oneoxoCH₃COCH₃ propanone
ऐल्कोहॉल –OH-olhydroxyCH₃CH₂OH ethanol
ऐमीन –NH₂-amineaminoCH₃NH₂ methanamine
ऐल्कीन C=C-ene–CH₂=CHCH₃ propene
ऐल्काइन C≡C-yne–HC≡CCH₃ propyne

बहुक्रियात्मक और प्रतिस्थापित नामों के उदाहरण: HOCH₂CH₂COOH का नाम 3-hydroxypropanoic acid है; CH₃CH(OH)CH₂CHO का 3-hydroxybutanal; CH₂=CHCH₂OH का prop-2-en-1-ol; CH₃CH(CH₃)CH₂CH₃ का 2-methylbutane; CH₃CH(Cl)CH₃ का 2-chloropropane; CH₃CH₂CH(CH₃)CH₂CH₃ का 3-methylpentane।

प्रतिस्थापित बेन्ज़ीन। बेन्ज़ीन मूल यौगिक है। दो प्रतिस्थापी 1,2 (ऑर्थो, o-), 1,3 (मेटा, m-) या 1,4 (पैरा, p-) स्थितियों पर होते हैं। IUPAC द्वारा मान्य प्रचलित नामों में टॉलूईन (toluene, methylbenzene), फीनॉल (phenol), ऐनिलीन (aniline), बेन्ज़ैल्डिहाइड (benzaldehyde), बेन्ज़ोइक अम्ल (benzoic acid) और नाइट्रोबेन्ज़ीन (nitrobenzene) सम्मिलित हैं। उदाहरण: 1,2-dimethylbenzene (o-xylene); 1,3-dichlorobenzene (m-dichlorobenzene); 4-nitrophenol (p-nitrophenol); 2,4,6-trinitrophenol (पिक्रिक अम्ल, picric acid)। फीनॉल वाले वलय में –OH वाला कार्बन संख्या 1 होता है।

समावयवता (Isomerism)

समावयवी का आणविक सूत्र समान किंतु संरचनाएँ या विन्यास भिन्न होते हैं।

प्रकारअंतरउदाहरण (सूत्र)
शृंखलाभिन्न कार्बन कंकालButane और 2-methylpropane (C₄H₁₀)
स्थितिसमान कंकाल, क्रियात्मक समूह या बहु-आबंध का स्थान भिन्नPropan-1-ol और propan-2-ol (C₃H₈O); but-1-ene और but-2-ene (C₄H₈)
क्रियात्मकभिन्न क्रियात्मक समूहEthanol और methoxymethane (C₂H₆O); propanal और propanone (C₃H₆O)
मध्यावयवता (Metamerism)एक ही बहुसंयोजी परमाणु (O, S, N) पर भिन्न ऐल्किल समूहDiethyl ether और methyl propyl ether (C₄H₁₀O)
चलावयवता (Tautomerism) (संक्षेप में)हाइड्रोजन परमाणु के स्थानांतरण से तीव्र साम्य में दो रूपकीटो रूप CH₃COCH₃ ⇌ ईनॉल रूप CH₃C(OH)=CH₂

त्रिविम समावयवी (Stereoisomers) का संरचना सूत्र समान होता है किंतु आकाश में विन्यास भिन्न होता है।

  • ज्यामितीय समावयवता द्वि आबंध के परितः घूर्णन अवरुद्ध होने से तब उत्पन्न होती है जब द्वि आबंधित प्रत्येक कार्बन पर दो भिन्न समूह हों। सिस (cis) समावयवी में समान समूह एक ही ओर होते हैं; ट्रांस (trans) समावयवी में विपरीत ओर (cis-but-2-ene और trans-but-2-ene)। But-1-ene और propene में सिस-ट्रांस समावयवी नहीं होते, क्योंकि द्वि आबंध के एक कार्बन पर दो समान हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
  • प्रकाशिक समावयवता (संक्षेप में): चार भिन्न समूहों से जुड़ा कार्बन किरेल कार्बन (असममित कार्बन) कहलाता है। ऐसे अणु का दर्पण प्रतिबिंब अध्यारोपणीय नहीं होता। दोनों रूप प्रतिबिंब रूप (enantiomers) कहलाते हैं। वे समतल ध्रुवित प्रकाश के तल को समान मात्रा में विपरीत दिशाओं में घुमाते हैं। दोनों का समआण्विक मिश्रण रेसिमिक मिश्रण होता है और प्रकाशिक रूप से निष्क्रिय होता है। उदाहरण: लैक्टिक अम्ल CH₃CH(OH)COOH और butan-2-ol CH₃CH(OH)CH₂CH₃ में प्रत्येक में एक किरेल कार्बन है।

अभिक्रिया क्रियाविधि की मूल अवधारणाएँ

सहसंयोजी आबंध दो प्रकार से टूट सकता है।

  • समांश विखंडन (homolytic fission): प्रत्येक परमाणु साझे युग्म का एक इलेक्ट्रॉन ले लेता है। इससे मुक्त मूलक (अयुग्मित इलेक्ट्रॉन वाली स्पीशीज़) बनते हैं। यह अध्रुवीय विलायकों में, ऊष्मा, प्रकाश या परॉक्साइडों द्वारा सुगम होता है। इसे आधे सिरे वाला (मछली-काँटा) तीर दर्शाता है।
  • विषमांश विखंडन (heterolytic fission): साझा युग्म एक परमाणु के पास चला जाता है। इससे धनायन और ऋणायन बनते हैं, उदाहरणतः कार्बधनायन और हैलाइड आयन। यह ध्रुवीय विलायकों और ध्रुवीय आबंध द्वारा सुगम होता है। इसे पूर्ण सिरे वाला तीर दर्शाता है।
स्पीशीज़संकरण और आकृतिस्थायित्व क्रमकारण
कार्बधनायन (R₃C⁺)sp², समतलीय, रिक्त p कक्षक3° > 2° > 1° > CH₃⁺ऐल्किल समूहों का +I प्रभाव और अतिसंयुग्मन धनावेश को फैला देते हैं
कार्बऋणायन (R₃C⁻)sp³, पिरामिडीय, एकाकी युग्मCH₃⁻ > 1° > 2° > 3°ऐल्किल समूह (+I) कार्बन की ओर इलेक्ट्रॉन धकेलकर ऋणावेश बढ़ाते हैं, जो प्रतिकूल है
मुक्त मूलक (R₃C•)लगभग sp², समतलीय3° > 2° > 1° > CH₃•ऐल्किल समूहों द्वारा अतिसंयुग्मन

ऐलिल और बेन्ज़िल कार्बधनायन अनुनाद के कारण साधारण ऐल्किल कार्बधनायनों से अधिक स्थायी होते हैं।

इलेक्ट्रॉनस्नेही (electrophile) इलेक्ट्रॉन-न्यून स्पीशीज़ है जो इलेक्ट्रॉन युग्म की खोज करती है (उदाहरण: H⁺, NO₂⁺, कार्बधनायन, BF₃, AlCl₃, C=O का कार्बन)। नाभिकस्नेही (nucleophile) इलेक्ट्रॉन-समृद्ध स्पीशीज़ है जो इलेक्ट्रॉन युग्म देती है (उदाहरण: OH⁻, CN⁻, Cl⁻, NH₃, H₂O, कार्बऋणायन)। एकाकी युग्म वाले उदासीन अणु, जैसे NH₃ और H₂O, नाभिकस्नेही होते हैं।

इलेक्ट्रॉन विस्थापन प्रभाव

प्रभावप्रकृतिकारणमुख्य बिंदु
प्रेरणिक प्रभाव (Inductive effect)स्थायीविद्युतऋणात्मक परमाणु या समूह द्वारा σ आबंध का ध्रुवणशृंखला के साथ तेज़ी से घटता है और तीन कार्बन परमाणुओं के बाद लगभग नगण्य हो जाता है। हाइड्रोजन संदर्भ है
अनुनाद (मेसोमेरी) प्रभाव (Resonance effect)स्थायीसंयुग्मित निकाय में π इलेक्ट्रॉनों या एकाकी युग्मों का विस्थानीकरण+R: इलेक्ट्रॉन देने वाले समूह (–OH, –OR, –NH₂, –Cl, –Br)। −R: इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (–NO₂, –CN, –CHO, –COOH, >C=O)
इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव (Electromeric effect)अस्थायीआक्रमणकारी अभिकर्मक की माँग पर बहु-आबंध के π इलेक्ट्रॉन युग्म का एक परमाणु पर पूर्ण स्थानांतरणअभिकर्मक हटाने पर समाप्त हो जाता है
अतिसंयुग्मन (Hyperconjugation)स्थायीα C–H आबंध के σ इलेक्ट्रॉनों का आसन्न p कक्षक या π आबंध में विस्थानीकरण"आबंध-रहित अनुनाद"; α हाइड्रोजन परमाणु जितने अधिक, स्थायित्व उतना अधिक

प्रेरणिक प्रभाव। इलेक्ट्रॉन धकेलने वाले समूह (+I): ऐल्किल समूह, और क्रम (CH₃)₃C– > (CH₃)₂CH– > CH₃CH₂– > CH₃–। इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (−I): –NO₂ > –CN > –F > –Cl > –Br > –I।

अनुनाद। जिस अणु को एक संरचना से नहीं दर्शाया जा सकता, उसे दो या अधिक योगदान करने वाली (विहित, canonical) संरचनाओं से वर्णित किया जाता है। वास्तविक अणु अनुनाद संकर (resonance hybrid) होता है, जो किसी भी एक योगदानी संरचना से अधिक स्थायी होता है। ऊर्जा के अंतर को अनुनाद ऊर्जा कहते हैं। नियम: केवल इलेक्ट्रॉन गति करते हैं, परमाणु नहीं; सभी योगदानी संरचनाओं में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है; योगदानी संरचनाएँ जितनी अधिक समतुल्य और उनकी ऊर्जा जितनी कम, स्थायित्व उतना अधिक। बेन्ज़ीन दो केकुले संरचनाओं का संकर है।

अतिसंयुग्मन और स्थायित्व।

कार्बधनायनα C–H आबंधों की संख्यासापेक्ष स्थायित्व
CH₃CH₂⁺ (एथिल)3तीनों में सबसे कम
(CH₃)₂CH⁺ (आइसोप्रोपिल)6मध्यवर्ती
(CH₃)₃C⁺ (तृतीयक-ब्यूटिल)9सबसे अधिक

ऐल्कीनों में द्वि आबंध के कार्बनों पर जितने अधिक ऐल्किल समूह होते हैं, उतनी अधिक अतिसंयुग्मी संरचनाएँ बनती हैं, इसलिए ऐल्कीन अधिक स्थायी होती है। अतः but-2-ene (छह α हाइड्रोजन परमाणु) but-1-ene (दो α हाइड्रोजन परमाणु) से अधिक स्थायी है, और एथीन, जिसमें कोई α हाइड्रोजन नहीं है, प्रोपीन से कम स्थायी है।

कार्बनिक अभिक्रियाओं के प्रकार

प्रकारअर्थउदाहरण
प्रतिस्थापनएक परमाणु या समूह दूसरे का स्थान लेता हैCH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl (प्रकाश)
योगπ आबंध टूटने से दो अणु मिलकर एक बनाते हैंCH₂=CH₂ + Br₂ → BrCH₂CH₂Br
विलोपनआसन्न परमाणुओं से कोई छोटा अणु निकल जाता है और बहु-आबंध बनता हैCH₃CH₂Br + ऐल्कोहॉली KOH → CH₂=CH₂ + KBr + H₂O
पुनर्विन्यासअणु के परमाणु पुनः व्यवस्थित होकर समावयवी देते हैंअमोनियम सायनेट → गर्म करने पर यूरिया

अम्लता और क्षारकता की प्रवृत्तियाँ

अम्ल सामर्थ्य संयुग्मी क्षार के स्थायित्व पर निर्भर करता है। जो भी कारक ऋणायन के ऋणावेश को फैलाकर या घटाकर उसे स्थायी करता है, वह अम्ल को प्रबल बनाता है।

अम्लpKa (लगभग)कारण
Cl₃CCOOH0.65तीन −I क्लोरीन परमाणु ऋणायन को दृढ़ता से स्थायी करते हैं
Cl₂CHCOOH1.29दो −I क्लोरीन परमाणु
ClCH₂COOH2.86एक −I क्लोरीन परमाणु
HCOOH3.75कोई +I ऐल्किल समूह नहीं
C₆H₅COOH4.20फेनिल समूह हल्का −I है
CH₃COOH4.76+I मेथिल समूह ऋणायन को अस्थायी करता है

कम pKa का अर्थ प्रबल अम्ल है। हैलोऐसीटिक अम्लों में −I क्रम के अनुसार FCH₂COOH > ClCH₂COOH > BrCH₂COOH > ICH₂COOH है। −I समूह –COOH के जितना निकट होता है, अम्ल उतना प्रबल होता है।

फीनॉल एथेनॉल से अधिक अम्लीय है क्योंकि फीनॉक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थायी होता है, जबकि एथॉक्साइड आयन +I ऐल्किल समूह द्वारा अस्थायी होता है। p-नाइट्रोफीनॉल फीनॉल से अधिक अम्लीय है क्योंकि –NO₂ समूह (−I, −R) फीनॉक्साइड आयन को स्थायी करता है।

क्षारकता नाइट्रोजन पर एकाकी युग्म की उपलब्धता पर निर्भर करती है। ऐलिफैटिक ऐमीन अमोनिया से अधिक क्षारीय होती हैं क्योंकि ऐल्किल समूह (+I) नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं। ऐनिलीन अमोनिया से कम क्षारीय है क्योंकि इसका एकाकी युग्म अनुनाद द्वारा बेन्ज़ीन वलय में विस्थानीकृत हो जाता है।

NEET के जाल

  • कार्बधनायन का स्थायित्व 1° < 2° < 3° क्रम में बढ़ता है, किंतु कार्बऋणायन का स्थायित्व उसी दिशा में घटता है। इन्हें उलटें नहीं।
  • कार्बधनायन sp² और समतलीय होता है। कार्बऋणायन sp³ और पिरामिडीय होता है।
  • अतिसंयुग्मन को आबंध-रहित अनुनाद कहते हैं। इसे α C–H आबंधों की संख्या (β की नहीं) निर्धारित करती है।
  • प्रेरणिक प्रभाव σ-आबंध का प्रभाव है और दूरी के साथ घटता है। अनुनाद π-इलेक्ट्रॉन या एकाकी युग्म का प्रभाव है।
  • इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव अस्थायी है और आक्रमणकारी अभिकर्मक की आवश्यकता होती है; अनुनाद प्रभाव स्थायी है।
  • –Cl, –Br का +R प्रभाव उपस्थित होता है, किंतु हैलोजनों का −I प्रभाव अधिक प्रबल होता है।
  • क्लोरोऐसीटिक अम्ल ऐसीटिक अम्ल से प्रबल अम्ल है, इसका कारण Cl का −I है, +I नहीं।
  • समजातीय श्रेणी में CH₂ का अंतर होता है; समावयवियों का आणविक सूत्र समान होता है। इन्हें मिलाएँ नहीं।
  • मध्यावयवियों में एक ही बहुसंयोजी परमाणु पर भिन्न ऐल्किल समूह होते हैं। Diethyl ether और methyl propyl ether मध्यावयवी हैं; ethanol और methoxymethane क्रियात्मक समावयवी हैं।
  • किरेल कार्बन के लिए चार भिन्न समूह चाहिए; propan-2-ol में कोई किरेल कार्बन नहीं है।

एक-पंक्ति तथ्य

  • कार्बन चतुःसंयोजी है और शृंखलन दर्शाता है।
  • sp³, sp² और sp कार्बन में क्रमशः 25 %, 33.3 % और 50 % s-लक्षण होता है।
  • C≡C आबंध (120 pm), C=C (134 pm) से छोटा है, जो C–C (154 pm) से छोटा है।
  • समजातीय श्रेणी में एक CH₂ इकाई का अंतर होता है।
  • ऐल्डिहाइड के लिए IUPAC प्रत्यय -al और कीटोन के लिए -one है।
  • हैलो, नाइट्रो और ऐल्कॉक्सी समूह केवल उपसर्ग होते हैं।
  • स्थिति समावयवियों में क्रियात्मक समूह का स्थान भिन्न होता है।
  • Diethyl ether और methyl propyl ether मध्यावयवी हैं।
  • किरेल कार्बन में चार भिन्न समूह होते हैं।
  • रेसिमिक मिश्रण प्रकाशिक रूप से निष्क्रिय होता है।
  • समांश विखंडन से मुक्त मूलक बनते हैं; विषमांश विखंडन से आयन बनते हैं।
  • इस श्रेणी में मेथिल कार्बधनायन सबसे कम स्थायी कार्बधनायन है।
  • अतिसंयुग्मन को आबंध-रहित अनुनाद भी कहते हैं।
  • –NO₂ समूह −I और −R प्रभाव दर्शाता है।
  • क्लोरो-प्रतिस्थापित ऐसीटिक अम्लों और ऐसीटिक अम्ल में ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल सबसे प्रबल अम्ल है।

अभ्यास प्रश्न

  1. एथाइन (ethyne) में प्रत्येक कार्बन परमाणु का संकरण है:

    1. sp²
    2. sp
    3. sp³d
    4. sp³
    उत्तर

    B. sp

    HC≡CH के प्रत्येक कार्बन पर एक त्रि आबंध और एक अन्य आबंध है, अर्थात् दो σ आबंध: sp, रैखिक, 180°।

    The hybridisation of each carbon atom in ethyne is:

    1. sp²
    2. sp
    3. sp³d
    4. sp³
  2. प्रोपाइन (propyne), CH₃C≡CH, में σ और π आबंधों की संख्या है:

    1. 6 σ और 3 π
    2. 5 σ और 3 π
    3. 6 σ और 2 π
    4. 7 σ और 1 π
    उत्तर

    C. 6 σ और 2 π

    चार C–H σ आबंध + दो C–C σ आबंध = 6 σ; त्रि आबंध में दो π आबंध होते हैं।

    The number of σ and π bonds in propyne, CH₃C≡CH, is:

    1. 6 σ and 3 π
    2. 5 σ and 3 π
    3. 6 σ and 2 π
    4. 7 σ and 1 π
  3. (CH₃)₂CHCH₂CH₂Cl का IUPAC नाम है:

    1. 1-chloro-3-methylbutane
    2. 3-methyl-1-chloropentane
    3. 1-chloro-2-methylbutane
    4. 4-chloro-2-methylbutane
    उत्तर

    A. 1-chloro-3-methylbutane

    सबसे लंबी शृंखला में चार कार्बन हैं; Cl वाले कार्बन से अंकन करने पर 1-chloro-3-methylbutane मिलता है।

    The IUPAC name of (CH₃)₂CHCH₂CH₂Cl is:

    1. 1-chloro-3-methylbutane
    2. 3-methyl-1-chloropentane
    3. 1-chloro-2-methylbutane
    4. 4-chloro-2-methylbutane
  4. CH₃CH₂CH(OH)CH₃ का IUPAC नाम है:

    1. butan-1-ol
    2. 2-methylpropan-1-ol
    3. butan-3-ol
    4. butan-2-ol
    उत्तर

    D. butan-2-ol

    जिस सिरे से अंकन करने पर –OH को छोटा स्थान-अंक मिले, उससे butan-2-ol प्राप्त होता है।

    The IUPAC name of CH₃CH₂CH(OH)CH₃ is:

    1. butan-1-ol
    2. 2-methylpropan-1-ol
    3. butan-3-ol
    4. butan-2-ol
  5. CH₃COCH₂CH₃ का IUPAC नाम है:

    1. butan-2-ol
    2. butan-3-one
    3. butanal
    4. butan-2-one
    उत्तर

    D. butan-2-one

    चार कार्बन की शृंखला जिसके C-2 पर कीटोन समूह हो, butan-2-one है।

    The IUPAC name of CH₃COCH₂CH₃ is:

    1. butan-2-ol
    2. butan-3-one
    3. butanal
    4. butan-2-one
  6. CH₂=CHCH₂OH का IUPAC नाम है:

    1. prop-2-en-1-ol
    2. propen-3-ol
    3. prop-2-en-3-ol
    4. prop-1-en-3-ol
    उत्तर

    A. prop-2-en-1-ol

    –OH समूह (मुख्य समूह) को स्थान-अंक 1 मिलता है, अतः द्वि आबंध C-2 पर है।

    The IUPAC name of CH₂=CHCH₂OH is:

    1. prop-2-en-1-ol
    2. propen-3-ol
    3. prop-2-en-3-ol
    4. prop-1-en-3-ol
  7. HOCH₂CH₂CHO का IUPAC नाम है:

    1. 1-hydroxypropanal
    2. 3-oxopropan-1-ol
    3. 3-hydroxypropanal
    4. 1-hydroxypropan-3-al
    उत्तर

    C. 3-hydroxypropanal

    ऐल्डिहाइड की प्राथमिकता –OH से अधिक है, इसलिए यह प्रत्यय -al (C-1) है और –OH 3-hydroxy उपसर्ग है।

    The IUPAC name of HOCH₂CH₂CHO is:

    1. 1-hydroxypropanal
    2. 3-oxopropan-1-ol
    3. 3-hydroxypropanal
    4. 1-hydroxypropan-3-al
  8. कौन-सा युग्म मध्यावयवियों (metamers) को दर्शाता है?

    1. CH₃CH₂OH और CH₃OCH₃
    2. CH₃OCH₂CH₂CH₃ और CH₃CH₂OCH₂CH₃
    3. CH₃CH₂CH₂CH₃ और (CH₃)₃CH
    4. CH₃CH₂CH₂OH और CH₃CH(OH)CH₃
    उत्तर

    B. CH₃OCH₂CH₂CH₃ और CH₃CH₂OCH₂CH₃

    दोनों C₄H₁₀O ईथर हैं जिनमें ऑक्सीजन पर भिन्न ऐल्किल समूह हैं।

    Which pair represents metamers?

    1. CH₃CH₂OH and CH₃OCH₃
    2. CH₃OCH₂CH₂CH₃ and CH₃CH₂OCH₂CH₃
    3. CH₃CH₂CH₂CH₃ and (CH₃)₃CH
    4. CH₃CH₂CH₂OH and CH₃CH(OH)CH₃
  9. कार्बधनायनों के स्थायित्व का सही क्रम है:

    1. (CH₃)₂CH⁺ > (CH₃)₃C⁺ > CH₃CH₂⁺ > CH₃⁺
    2. (CH₃)₃C⁺ > (CH₃)₂CH⁺ > CH₃CH₂⁺ > CH₃⁺
    3. (CH₃)₃C⁺ > CH₃CH₂⁺ > (CH₃)₂CH⁺ > CH₃⁺
    4. CH₃⁺ > CH₃CH₂⁺ > (CH₃)₂CH⁺ > (CH₃)₃C⁺
    उत्तर

    B. (CH₃)₃C⁺ > (CH₃)₂CH⁺ > CH₃CH₂⁺ > CH₃⁺

    ऐल्किल समूह जितने अधिक, +I और अतिसंयुग्मन उतना अधिक, अतः 3° > 2° > 1° > मेथिल।

    The correct order of stability of carbocations is:

    1. (CH₃)₂CH⁺ > (CH₃)₃C⁺ > CH₃CH₂⁺ > CH₃⁺
    2. (CH₃)₃C⁺ > (CH₃)₂CH⁺ > CH₃CH₂⁺ > CH₃⁺
    3. (CH₃)₃C⁺ > CH₃CH₂⁺ > (CH₃)₂CH⁺ > CH₃⁺
    4. CH₃⁺ > CH₃CH₂⁺ > (CH₃)₂CH⁺ > (CH₃)₃C⁺
  10. निम्नलिखित में से कौन-सा कार्बऋणायन सबसे अधिक स्थायी है?

    1. CH₃CH₂⁻
    2. (CH₃)₂CH⁻
    3. (CH₃)₃C⁻
    4. CH₃⁻
    उत्तर

    D. CH₃⁻

    ऐल्किल समूह (+I) कार्बऋणायन कार्बन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं, इसलिए मेथिल कार्बऋणायन सबसे अधिक स्थायी है।

    Which of the following carbanions is the most stable?

    1. CH₃CH₂⁻
    2. (CH₃)₂CH⁻
    3. (CH₃)₃C⁻
    4. CH₃⁻
  11. निम्नलिखित में से कौन-सा नाभिकस्नेही (nucleophile) है?

    1. BF₃
    2. AlCl₃
    3. NH₃
    4. NO₂⁺
    उत्तर

    C. NH₃

    NH₃ के पास देने के लिए एकाकी युग्म है; BF₃, NO₂⁺ और AlCl₃ इलेक्ट्रॉन-न्यून इलेक्ट्रॉनस्नेही हैं।

    Which of the following is a nucleophile?

    1. BF₃
    2. AlCl₃
    3. NH₃
    4. NO₂⁺
  12. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक प्रकाशिक सक्रियता दर्शाता है?

    1. CH₃CH(OH)CH₂CH₃
    2. (CH₃)₂CHOH
    3. (CH₃)₃COH
    4. CH₃CH₂CH₂OH
    उत्तर

    A. CH₃CH(OH)CH₂CH₃

    केवल butan-2-ol में एक कार्बन (C-2) चार भिन्न समूहों से जुड़ा है: H, OH, CH₃ और C₂H₅।

    Which of the following compounds shows optical activity?

    1. CH₃CH(OH)CH₂CH₃
    2. (CH₃)₂CHOH
    3. (CH₃)₃COH
    4. CH₃CH₂CH₂OH
  13. सहसंयोजी आबंध के समांश विखंडन से बनते हैं:

    1. दो कार्बऋणायन
    2. एक कार्बधनायन और एक कार्बऋणायन
    3. दो कार्बधनायन
    4. मुक्त मूलक
    उत्तर

    D. मुक्त मूलक

    समांश विखंडन में प्रत्येक परमाणु साझे युग्म का एक इलेक्ट्रॉन ले लेता है, जिससे मुक्त मूलक बनते हैं।

    Homolytic fission of a covalent bond produces:

    1. two carbanions
    2. a carbocation and a carbanion
    3. two carbocations
    4. free radicals
  14. निम्नलिखित में से कौन ज्यामितीय (सिस-ट्रांस) समावयवता दर्शाता है?

    1. CH₃CH=CH₂
    2. CH₃CH=CHCH₃
    3. (CH₃)₂C=CH₂
    4. CH₃CH₂CH=CH₂
    उत्तर

    B. CH₃CH=CHCH₃

    but-2-ene के द्वि आबंधित प्रत्येक कार्बन पर दो भिन्न समूह (H और CH₃) हैं।

    Which of the following shows geometrical (cis-trans) isomerism?

    1. CH₃CH=CH₂
    2. CH₃CH=CHCH₃
    3. (CH₃)₂C=CH₂
    4. CH₃CH₂CH=CH₂
  15. अम्लीय सामर्थ्य का सही बढ़ता क्रम है:

    1. CH₃COOH < ClCH₂COOH < Cl₂CHCOOH < Cl₃CCOOH
    2. CH₃COOH < Cl₃CCOOH < Cl₂CHCOOH < ClCH₂COOH
    3. ClCH₂COOH < CH₃COOH < Cl₂CHCOOH < Cl₃CCOOH
    4. Cl₃CCOOH < Cl₂CHCOOH < ClCH₂COOH < CH₃COOH
    उत्तर

    A. CH₃COOH < ClCH₂COOH < Cl₂CHCOOH < Cl₃CCOOH

    क्लोरीन परमाणु जितने अधिक, −I प्रभाव उतना प्रबल और ऋणायन उतना स्थायी।

    The correct increasing order of acidic strength is:

    1. CH₃COOH < ClCH₂COOH < Cl₂CHCOOH < Cl₃CCOOH
    2. CH₃COOH < Cl₃CCOOH < Cl₂CHCOOH < ClCH₂COOH
    3. ClCH₂COOH < CH₃COOH < Cl₂CHCOOH < Cl₃CCOOH
    4. Cl₃CCOOH < Cl₂CHCOOH < ClCH₂COOH < CH₃COOH
  16. तृतीयक-ब्यूटिल कार्बधनायन (CH₃)₃C⁺ में α C–H आबंधों (अतिसंयुग्मी हाइड्रोजनों) की संख्या है:

    1. 3
    2. 6
    3. 9
    4. 12
    उत्तर

    C. 9

    C⁺ से जुड़े तीनों CH₃ समूहों में से प्रत्येक में तीन हाइड्रोजन परमाणु हैं: 3 × 3 = 9।

    The number of α C–H bonds (hyperconjugative hydrogens) in the tert-butyl carbocation (CH₃)₃C⁺ is:

    1. 3
    2. 6
    3. 9
    4. 12
  17. नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: sp-संकरित कार्बन sp³-संकरित कार्बन से अधिक विद्युतऋणात्मक होता है। कथन II: C≡C आबंध C–C आबंध से छोटा होता है।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    A. कथन I और कथन II दोनों सही हैं

    s-लक्षण अधिक होने से कार्बन अधिक विद्युतऋणात्मक होता है, और त्रि आबंध लगभग 120 pm का है जबकि C–C 154 pm का।

    Given below are two statements: Statement I: An sp-hybridised carbon is more electronegative than an sp³-hybridised carbon. Statement II: The C≡C bond is shorter than the C–C bond.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  18. नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: कार्बधनायन sp² संकरित और समतलीय होते हैं। कथन II: कार्बऋणायन sp² संकरित और समतलीय होते हैं।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    3. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    B. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है

    कार्बऋणायन sp³ संकरित और पिरामिडीय होते हैं।

    Given below are two statements: Statement I: Carbocations are sp² hybridised and planar. Statement II: Carbanions are sp² hybridised and planar.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    3. Both Statement I and Statement II are incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  19. नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: अनुनाद संकर अपनी किसी भी योगदानी संरचना से अधिक स्थायी होता है। कथन II: अनुनाद में योगदानी संरचनाओं में परमाणु अपनी स्थितियाँ बदलते हैं।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    C. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है

    केवल इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित होते हैं; परमाणुओं की स्थितियाँ वही रहती हैं।

    Given below are two statements: Statement I: A resonance hybrid is more stable than any of its contributing structures. Statement II: In resonance, atoms change their positions in the contributing structures.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  20. नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव स्थायी प्रभाव है। कथन II: अतिसंयुग्मन को आबंध-रहित अनुनाद भी कहते हैं।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    D. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है

    इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव अस्थायी है और केवल आक्रमणकारी अभिकर्मक की उपस्थिति में प्रकट होता है।

    Given below are two statements: Statement I: The electromeric effect is a permanent effect. Statement II: Hyperconjugation is also called no-bond resonance.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  21. नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: कार्बऋणायनों के स्थायित्व का क्रम 3° > 2° > 1° > CH₃⁻ है। कथन II: आबंध का समांश विखंडन आयन देता है।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    B. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं

    कार्बऋणायन का स्थायित्व CH₃⁻ > 1° > 2° > 3° है, और समांश विखंडन से मुक्त मूलक बनते हैं।

    Given below are two statements: Statement I: The stability order of carbanions is 3° > 2° > 1° > CH₃⁻. Statement II: Homolytic fission of a bond gives ions.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  22. नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: क्लोरोऐसीटिक अम्ल ऐसीटिक अम्ल से प्रबल अम्ल है। कथन II: ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल डाइक्लोरोऐसीटिक अम्ल से प्रबल अम्ल है।

    1. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    2. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    3. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    C. कथन I और कथन II दोनों सही हैं

    क्लोरीन का −I प्रभाव ऋणायन को स्थायी करता है, और क्लोरीन परमाणु जितने अधिक, प्रभाव उतना बढ़ता है।

    Given below are two statements: Statement I: Chloroacetic acid is a stronger acid than acetic acid. Statement II: Trichloroacetic acid is a stronger acid than dichloroacetic acid.

    1. Both Statement I and Statement II are incorrect
    2. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    3. Both Statement I and Statement II are correct
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  23. नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: Propan-1-ol और propan-2-ol शृंखला समावयवी हैं। कथन II: Ethanol और methoxymethane क्रियात्मक समावयवी हैं।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    D. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है

    Propan-1-ol और propan-2-ol स्थिति समावयवी हैं।

    Given below are two statements: Statement I: Propan-1-ol and propan-2-ol are chain isomers. Statement II: Ethanol and methoxymethane are functional isomers.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  24. कथनों में से कौन-से सही हैं? 1. फीनॉल एथेनॉल से अधिक अम्लीय है। 2. ऐनिलीन अमोनिया से प्रबल क्षार है। 3. p-नाइट्रोफीनॉल फीनॉल से अधिक अम्लीय है।

    1. 1 और 3 केवल
    2. 1 और 2 केवल
    3. 2 और 3 केवल
    4. 1, 2 और 3
    उत्तर

    A. 1 और 3 केवल

    ऐनिलीन का एकाकी युग्म वलय में विस्थानीकृत हो जाता है, इसलिए यह अमोनिया से दुर्बल क्षार है।

    Which of the following statements are correct? 1. Phenol is more acidic than ethanol. 2. Aniline is a stronger base than ammonia. 3. p-Nitrophenol is more acidic than phenol.

    1. 1 and 3 only
    2. 1 and 2 only
    3. 2 and 3 only
    4. 1, 2 and 3
  25. कथनों में से कौन-से सही हैं? 1. एथीन में पाँच σ आबंध और एक π आबंध हैं। 2. एथाइन में तीन σ आबंध और दो π आबंध हैं। 3. एथाइन के दोनों कार्बन परमाणु sp² संकरित हैं।

    1. 1 और 3 केवल
    2. 2 और 3 केवल
    3. 1 और 2 केवल
    4. 1, 2 और 3
    उत्तर

    C. 1 और 2 केवल

    एथाइन के कार्बन sp संकरित हैं।

    Which of the following statements are correct? 1. Ethene has five σ bonds and one π bond. 2. Ethyne has three σ bonds and two π bonds. 3. Both carbon atoms in ethyne are sp² hybridised.

    1. 1 and 3 only
    2. 2 and 3 only
    3. 1 and 2 only
    4. 1, 2 and 3
  26. नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: Butan-2-ol में एक किरेल कार्बन परमाणु है। कथन II: Propan-2-ol में एक किरेल कार्बन परमाणु है।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    4. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    उत्तर

    D. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है

    Propan-2-ol के C-2 पर दो समान CH₃ समूह हैं, इसलिए यह अकिरेल है।

    Given below are two statements: Statement I: Butan-2-ol has a chiral carbon atom. Statement II: Propan-2-ol has a chiral carbon atom.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is incorrect but Statement II is correct
    4. Statement I is correct but Statement II is incorrect
  27. अभिकथन (A): ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल ऐसीटिक अम्ल से प्रबल अम्ल है। कारण (R): क्लोरीन परमाणुओं का −I प्रभाव ट्राइक्लोरोऐसीटेट आयन को स्थायी करता है।

    1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
    2. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
    3. A सत्य है लेकिन R असत्य है
    4. A असत्य है लेकिन R सत्य है
    उत्तर

    A. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है

    Cl द्वारा इलेक्ट्रॉन आकर्षण ऋणायन के ऋणावेश को फैला देता है।

    Assertion (A): Trichloroacetic acid is a stronger acid than acetic acid. Reason (R): The −I effect of the chlorine atoms stabilises the trichloroacetate ion.

    1. Both A and R are true and R is the correct explanation of A
    2. Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
    3. A is true but R is false
    4. A is false but R is true
  28. अभिकथन (A): तृतीयक कार्बधनायन प्राथमिक कार्बधनायन से अधिक स्थायी होता है। कारण (R): ऐल्किल समूह जितने अधिक, +I प्रभाव और अतिसंयुग्मन उतना अधिक।

    1. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
    2. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
    3. A सत्य है लेकिन R असत्य है
    4. A असत्य है लेकिन R सत्य है
    उत्तर

    B. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है

    ऐल्किल समूह धनावेश को फैला देते हैं।

    Assertion (A): A tertiary carbocation is more stable than a primary carbocation. Reason (R): More alkyl groups give more +I effect and more hyperconjugation.

    1. Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
    2. Both A and R are true and R is the correct explanation of A
    3. A is true but R is false
    4. A is false but R is true
  29. अभिकथन (A): But-2-ene, but-1-ene से अधिक स्थायी है। कारण (R): But-2-ene में but-1-ene की तुलना में α हाइड्रोजन परमाणु कम हैं।

    1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
    2. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
    3. A असत्य है लेकिन R सत्य है
    4. A सत्य है लेकिन R असत्य है
    उत्तर

    D. A सत्य है लेकिन R असत्य है

    But-2-ene में छह α हाइड्रोजन हैं जबकि but-1-ene में दो, इसलिए R असत्य है।

    Assertion (A): But-2-ene is more stable than but-1-ene. Reason (R): But-2-ene has fewer α hydrogen atoms than but-1-ene.

    1. Both A and R are true and R is the correct explanation of A
    2. Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
    3. A is false but R is true
    4. A is true but R is false
  30. अभिकथन (A): फीनॉल एथेनॉल से कम अम्लीय है। कारण (R): फीनॉक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थायी होता है।

    1. A असत्य है लेकिन R सत्य है
    2. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
    3. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
    4. A सत्य है लेकिन R असत्य है
    उत्तर

    A. A असत्य है लेकिन R सत्य है

    फीनॉल एथेनॉल से अधिक अम्लीय है, इसलिए A असत्य है; R सत्य है।

    Assertion (A): Phenol is less acidic than ethanol. Reason (R): The phenoxide ion is stabilised by resonance.

    1. A is false but R is true
    2. Both A and R are true and R is the correct explanation of A
    3. Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
    4. A is true but R is false
  31. अभिकथन (A): एथाइन रैखिक अणु है। कारण (R): C≡C आबंध C=C आबंध से छोटा होता है।

    1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
    2. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
    3. A सत्य है लेकिन R असत्य है
    4. A असत्य है लेकिन R सत्य है
    उत्तर

    B. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है

    रैखिक आकृति sp संकरण से आती है, आबंध लंबाई से नहीं।

    Assertion (A): Ethyne is a linear molecule. Reason (R): A C≡C bond is shorter than a C=C bond.

    1. Both A and R are true and R is the correct explanation of A
    2. Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
    3. A is true but R is false
    4. A is false but R is true
  32. अभिकथन (A): प्रतिस्थापी से दूरी बढ़ने पर प्रेरणिक प्रभाव घटता है। कारण (R): प्रेरणिक प्रभाव अस्थायी प्रभाव है।

    1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
    2. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
    3. A सत्य है लेकिन R असत्य है
    4. A असत्य है लेकिन R सत्य है
    उत्तर

    C. A सत्य है लेकिन R असत्य है

    प्रेरणिक प्रभाव स्थायी प्रभाव है, इसलिए R असत्य है।

    Assertion (A): The inductive effect decreases as the distance from the substituent increases. Reason (R): The inductive effect is a temporary effect.

    1. Both A and R are true and R is the correct explanation of A
    2. Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
    3. A is true but R is false
    4. A is false but R is true
  33. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. CH₃CHO b. CH₃COCH₃ c. CH₃COOH d. CH₃CN सूची II: i. Propanone ii. Ethanenitrile iii. Ethanal iv. Ethanoic acid

    1. a-i, b-iii, c-iv, d-ii
    2. a-iii, b-iv, c-i, d-ii
    3. a-iii, b-i, c-ii, d-iv
    4. a-iii, b-i, c-iv, d-ii
    उत्तर

    D. a-iii, b-i, c-iv, d-ii

    CH₃CHO ethanal है, CH₃COCH₃ propanone, CH₃COOH ethanoic acid, CH₃CN ethanenitrile।

    Match List I with List II. List I: a. CH₃CHO b. CH₃COCH₃ c. CH₃COOH d. CH₃CN List II: i. Propanone ii. Ethanenitrile iii. Ethanal iv. Ethanoic acid

    1. a-i, b-iii, c-iv, d-ii
    2. a-iii, b-iv, c-i, d-ii
    3. a-iii, b-i, c-ii, d-iv
    4. a-iii, b-i, c-iv, d-ii
  34. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. शृंखला समावयवता b. स्थिति समावयवता c. क्रियात्मक समावयवता d. मध्यावयवता सूची II: i. Propanal और propanone ii. Butane और 2-methylpropane iii. Diethyl ether और methyl propyl ether iv. But-1-ene और but-2-ene

    1. a-ii, b-iv, c-i, d-iii
    2. a-ii, b-iv, c-iii, d-i
    3. a-ii, b-i, c-iv, d-iii
    4. a-iv, b-ii, c-i, d-iii
    उत्तर

    A. a-ii, b-iv, c-i, d-iii

    प्रत्येक युग्म को उसकी समावयवता के प्रकार से सुमेलित कीजिए।

    Match List I with List II. List I: a. Chain isomerism b. Position isomerism c. Functional isomerism d. Metamerism List II: i. Propanal and propanone ii. Butane and 2-methylpropane iii. Diethyl ether and methyl propyl ether iv. But-1-ene and but-2-ene

    1. a-ii, b-iv, c-i, d-iii
    2. a-ii, b-iv, c-iii, d-i
    3. a-ii, b-i, c-iv, d-iii
    4. a-iv, b-ii, c-i, d-iii
  35. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. CH₄ में कार्बन b. CH₂=CH₂ में कार्बन c. HC≡CH में कार्बन d. कार्बधनायन R₃C⁺ में कार्बन सूची II: i. रैखिक, 50 % s-लक्षण ii. चतुष्फलकीय, 25 % s-लक्षण iii. त्रिकोणीय समतलीय, 120°, जिस पर एक π आबंध है iv. रिक्त p कक्षक के साथ समतलीय

    1. a-iii, b-ii, c-i, d-iv
    2. a-ii, b-iii, c-i, d-iv
    3. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
    4. a-ii, b-iii, c-iv, d-i
    उत्तर

    B. a-ii, b-iii, c-i, d-iv

    CH₄ का कार्बन sp³ है, एथीन का कार्बन π आबंध सहित sp² है, एथाइन का कार्बन sp है, और कार्बधनायन का कार्बन रिक्त p कक्षक सहित sp² है।

    Match List I with List II. List I: a. Carbon in CH₄ b. Carbon in CH₂=CH₂ c. Carbon in HC≡CH d. Carbon in a carbocation R₃C⁺ List II: i. Linear, 50 % s-character ii. Tetrahedral, 25 % s-character iii. Trigonal planar, 120°, with one π bond on it iv. Planar with a vacant p orbital

    1. a-iii, b-ii, c-i, d-iv
    2. a-ii, b-iii, c-i, d-iv
    3. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
    4. a-ii, b-iii, c-iv, d-i
  36. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. प्रेरणिक प्रभाव b. इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव c. अतिसंयुग्मन d. अनुनाद प्रभाव सूची II: i. α C–H आबंध के σ इलेक्ट्रॉनों का विस्थानीकरण ii. σ आबंध का ध्रुवण iii. आक्रमणकारी अभिकर्मक की उपस्थिति में π युग्म का अस्थायी स्थानांतरण iv. संयुग्मित निकाय में π इलेक्ट्रॉनों का विस्थानीकरण

    1. a-ii, b-iii, c-iv, d-i
    2. a-iii, b-ii, c-i, d-iv
    3. a-ii, b-iii, c-i, d-iv
    4. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
    उत्तर

    C. a-ii, b-iii, c-i, d-iv

    प्रत्येक प्रभाव को उसके वर्णन से सुमेलित कीजिए।

    Match List I with List II. List I: a. Inductive effect b. Electromeric effect c. Hyperconjugation d. Resonance effect List II: i. Delocalisation of σ electrons of an α C–H bond ii. Polarisation of a σ bond iii. Temporary shift of the π pair in the presence of an attacking reagent iv. Delocalisation of π electrons through a conjugated system

    1. a-ii, b-iii, c-iv, d-i
    2. a-iii, b-ii, c-i, d-iv
    3. a-ii, b-iii, c-i, d-iv
    4. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
  37. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. NO₂⁺ b. OH⁻ c. CH₃• d. CH₃⁻ सूची II: i. नाभिकस्नेही ii. इलेक्ट्रॉनस्नेही iii. मुक्त मूलक iv. sp³ कार्बन वाला कार्बऋणायन

    1. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
    2. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
    3. a-iii, b-i, c-ii, d-iv
    4. a-ii, b-i, c-iv, d-iii
    उत्तर

    A. a-ii, b-i, c-iii, d-iv

    NO₂⁺ इलेक्ट्रॉनस्नेही है, OH⁻ नाभिकस्नेही, CH₃• मुक्त मूलक और CH₃⁻ कार्बऋणायन है।

    Match List I with List II. List I: a. NO₂⁺ b. OH⁻ c. CH₃• d. CH₃⁻ List II: i. Nucleophile ii. Electrophile iii. Free radical iv. Carbanion with an sp³ carbon

    1. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
    2. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
    3. a-iii, b-i, c-ii, d-iv
    4. a-ii, b-i, c-iv, d-iii
  38. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. प्रतिस्थापन b. योग c. विलोपन d. पुनर्विन्यास सूची II: i. NH₄CNO → गर्म करने पर यूरिया ii. CH₂=CH₂ + Br₂ → BrCH₂CH₂Br iii. CH₃CH₂Br + ऐल्कोहॉली KOH → CH₂=CH₂ iv. प्रकाश में CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl

    1. a-iv, b-iii, c-ii, d-i
    2. a-iv, b-ii, c-iii, d-i
    3. a-iv, b-ii, c-i, d-iii
    4. a-ii, b-iv, c-iii, d-i
    उत्तर

    B. a-iv, b-ii, c-iii, d-i

    मेथेन का क्लोरीनीकरण प्रतिस्थापन है; एथीन पर ब्रोमीन योग है; विहाइड्रोहैलोजनन विलोपन है; अमोनियम सायनेट से यूरिया पुनर्विन्यास है।

    Match List I with List II. List I: a. Substitution b. Addition c. Elimination d. Rearrangement List II: i. NH₄CNO → urea on heating ii. CH₂=CH₂ + Br₂ → BrCH₂CH₂Br iii. CH₃CH₂Br + alcoholic KOH → CH₂=CH₂ iv. CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl in light

    1. a-iv, b-iii, c-ii, d-i
    2. a-iv, b-ii, c-iii, d-i
    3. a-iv, b-ii, c-i, d-iii
    4. a-ii, b-iv, c-iii, d-i
  39. CH₃CH(CH₃)CH(OH)CH₃ का IUPAC नाम है:

    1. 2-methylbutan-2-ol
    2. 2-methylbutan-3-ol
    3. 3-methylbutan-2-ol
    4. 3-methylbutan-1-ol
    उत्तर

    C. 3-methylbutan-2-ol

    –OH के निकट वाले सिरे से अंकन करने पर –OH C-2 पर और मेथिल समूह C-3 पर आता है।

    The IUPAC name of CH₃CH(CH₃)CH(OH)CH₃ is:

    1. 2-methylbutan-2-ol
    2. 2-methylbutan-3-ol
    3. 3-methylbutan-2-ol
    4. 3-methylbutan-1-ol
  40. CH₃CH₂CH(Cl)CH(CH₃)CH₃ का IUPAC नाम है:

    1. 3-chloro-4-methylpentane
    2. 2-methyl-3-chloropentane
    3. 2-chloro-3-methylpentane
    4. 3-chloro-2-methylpentane
    उत्तर

    D. 3-chloro-2-methylpentane

    सबसे छोटा स्थान-अंक समुच्चय {2,3} है; उपसर्ग वर्णानुक्रम में होते हैं, अतः chloro, methyl से पहले आता है।

    The IUPAC name of CH₃CH₂CH(Cl)CH(CH₃)CH₃ is:

    1. 3-chloro-4-methylpentane
    2. 2-methyl-3-chloropentane
    3. 2-chloro-3-methylpentane
    4. 3-chloro-2-methylpentane
  41. CH₂=CH–C≡CH में कार्बन परमाणुओं C-1 से C-4 तक का संकरण क्रमशः है:

    1. sp², sp², sp, sp
    2. sp², sp², sp², sp
    3. sp³, sp², sp, sp
    4. sp², sp³, sp, sp
    उत्तर

    A. sp², sp², sp, sp

    द्वि आबंध के कार्बन sp² हैं; त्रि आबंध के कार्बन sp हैं।

    In CH₂=CH–C≡CH the hybridisation of the carbon atoms C-1 to C-4 respectively is:

    1. sp², sp², sp, sp
    2. sp², sp², sp², sp
    3. sp³, sp², sp, sp
    4. sp², sp³, sp, sp
  42. निम्नलिखित में से कौन-सा सबसे प्रबल अम्ल है?

    1. ClCH₂COOH
    2. CH₃COOH
    3. FCH₂COOH
    4. BrCH₂COOH
    उत्तर

    C. FCH₂COOH

    हैलोजनों में फ्लोरीन का −I प्रभाव सबसे प्रबल है।

    Which of the following is the strongest acid?

    1. ClCH₂COOH
    2. CH₃COOH
    3. FCH₂COOH
    4. BrCH₂COOH
  43. अतिसंयुग्मी संरचनाओं की संख्या के आधार पर निम्नलिखित में से कौन-सी ऐल्कीन सबसे अधिक स्थायी है?

    1. CH₃CH=CH₂
    2. (CH₃)₂C=CHCH₃
    3. CH₃CH=CHCH₃
    4. (CH₃)₂C=CH₂
    उत्तर

    B. (CH₃)₂C=CHCH₃

    (CH₃)₂C=CHCH₃ में नौ α C–H आबंध हैं; अन्य में 3, 6 और 6 हैं।

    Which of the following alkenes is the most stable, based on the number of hyperconjugative structures?

    1. CH₃CH=CH₂
    2. (CH₃)₂C=CHCH₃
    3. CH₃CH=CHCH₃
    4. (CH₃)₂C=CH₂
  44. निम्नलिखित में से कौन-सा ऐल्किल क्लोराइड प्रकाशिक रूप से सक्रिय है?

    1. CH₃CH₂CH₂CH₂Cl
    2. CH₃CH(Cl)CH₃
    3. CH₃CH₂Cl
    4. CH₃CH₂CH(Cl)CH₃
    उत्तर

    D. CH₃CH₂CH(Cl)CH₃

    केवल 2-chlorobutane में एक कार्बन चार भिन्न समूहों से जुड़ा है: H, Cl, CH₃ और C₂H₅।

    Which of the following alkyl chlorides is optically active?

    1. CH₃CH₂CH₂CH₂Cl
    2. CH₃CH(Cl)CH₃
    3. CH₃CH₂Cl
    4. CH₃CH₂CH(Cl)CH₃
  45. (CH₃)₃C–Br में C–Br आबंध का विषमांश विखंडन (CH₃)₃C⁺ देता है। यह कार्बधनायन है:

    1. sp² संकरित और समतलीय
    2. sp संकरित और रैखिक
    3. sp³ संकरित और चतुष्फलकीय
    4. sp³ संकरित और पिरामिडीय
    उत्तर

    A. sp² संकरित और समतलीय

    कार्बधनायन में तीन आबंध और एक रिक्त p कक्षक होता है, इसलिए यह sp² और समतलीय है।

    Heterolytic fission of the C–Br bond in (CH₃)₃C–Br gives (CH₃)₃C⁺. This carbocation is:

    1. sp² hybridised and planar
    2. sp hybridised and linear
    3. sp³ hybridised and tetrahedral
    4. sp³ hybridised and pyramidal
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