हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons)
याद रखने योग्य बातें
- ऐल्केन मुक्त मूलक प्रतिस्थापन (श्रृंखला क्रियाविधि: आरंभन, संचरण, समापन) देते हैं; H के प्रतिस्थापन की सरलता 3° > 2° > 1° है। ऐल्कीन और ऐल्काइन इलेक्ट्रॉनस्नेही योग अभिक्रियाएँ देते हैं, जो मार्कोनीकॉफ़ नियम (Markovnikov's rule) का पालन करती हैं, केवल परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr का योग (प्रति-मार्कोनीकॉफ़) अपवाद है।
- ऐल्कीन का विरचन और अपचयन त्रिविम रसायन को नियंत्रित करते हैं: लिंडलार उत्प्रेरक (Lindlar catalyst) ऐल्काइन से सिस-ऐल्कीन देता है, और द्रव NH₃ में Na ट्रांस-ऐल्कीन देता है।
- अंतस्थ (terminal) ऐल्काइन दुर्बल अम्लीय होते हैं (sp कार्बन, 50 % s-लक्षण): ये Na के साथ तथा अमोनियामय AgNO₃ या Cu₂Cl₂ के साथ अभिक्रिया करते हैं। ऐल्कीन और आंतरिक ऐल्काइन नहीं करते।
- बेन्ज़ीन ऐरोमैटिक है (समतलीय, चक्रीय, 6 विस्थानीकृत π इलेक्ट्रॉन, 4n + 2 जहाँ n = 1) और इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन देती है, योग नहीं। –OH, –NH₂, –CH₃ और हैलोजन ऑर्थो/पैरा निर्देशी हैं; –NO₂, –CN, –CHO, –COOH और –SO₃H मेटा निर्देशी हैं।
वर्गीकरण और ऐल्केन
हाइड्रोकार्बन संतृप्त (ऐल्केन, साइक्लोऐल्केन), असंतृप्त (ऐल्कीन, ऐल्काइन) और ऐरोमैटिक होते हैं। ऐल्केन CₙH₂ₙ₊₂, ऐल्कीन CₙH₂ₙ, ऐल्काइन CₙH₂ₙ₋₂ हैं।
नामपद्धति और समावयवता। ऐल्केन के नाम सबसे लंबी शृंखला से, प्रतिस्थापियों को वर्णानुक्रम में सबसे छोटे स्थान-अंक देकर बनते हैं, उदाहरणतः 2-methylbutane और 2,2-dimethylpropane। ऐल्केन शृंखला समावयवता दर्शाते हैं: C₄H₁₀ के 2 समावयवी, C₅H₁₂ के 3 और C₆H₁₄ के 5 होते हैं।
एथेन की संरूपण (conformations)। C–C σ आबंध के परितः घूर्णन से बिना कोई आबंध तोड़े भिन्न विन्यास (संरूपण) बनते हैं। दो चरम रूप:
| विशेषता | विषमकोणीय (Staggered) | ग्रहणीय (Eclipsed) |
|---|---|---|
| दोनों कार्बनों के हाइड्रोजन परमाणु | यथासंभव दूर-दूर | एक-दूसरे के ठीक सामने |
| द्विफलक कोण (H–C–C–H) | 60° | 0° |
| C–H आबंधों के बीच प्रतिकर्षण | न्यूनतम | अधिकतम (मरोड़ विकृति, torsional strain) |
| स्थायित्व और ऊर्जा | सबसे अधिक स्थायी, सबसे कम ऊर्जा | सबसे कम स्थायी, सबसे अधिक ऊर्जा |
ऊर्जा का अंतर लगभग 12.5 kJ mol⁻¹ है। इस छोटे अवरोध को मरोड़ विकृति कहते हैं, और अणु कमरे के ताप पर तेज़ी से घूमता रहता है। न्यूमैन प्रक्षेपण (Newman projection) में आगे का कार्बन वह बिंदु है जहाँ तीन आबंध मिलते हैं और पीछे का कार्बन तीन आबंधों वाला वृत्त है। सॉहॉर्स प्रक्षेपण (sawhorse projection) में C–C आबंध को तिरछी रेखा से दिखाया जाता है और प्रत्येक सिरे पर तीन आबंध होते हैं। विषमकोणीय न्यूमैन दृश्य में आगे का प्रत्येक C–H आबंध पीछे के दो C–H आबंधों के ठीक बीच में होता है; ग्रहणीय दृश्य में पीछे के C–H आबंध आगे वालों के पीछे छिप जाते हैं।
ऐल्केन का विरचन
| विधि | अभिक्रिया | टिप्पणी |
|---|---|---|
| ऐल्कीन या ऐल्काइन का हाइड्रोजनीकरण | CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃CH₃ (Pt, Pd या Ni) | कार्बन परमाणुओं की संख्या समान |
| वुर्ट्ज़ अभिक्रिया (Wurtz reaction) | 2CH₃Br + 2Na → CH₃CH₃ + 2NaBr (शुष्क ईथर) | कार्बन शृंखला दुगुनी; एक हैलाइड से सम संख्या कार्बन वाले ऐल्केन मिलते हैं; मेथेन नहीं बन सकती |
| विकार्बोक्सिलन (Decarboxylation) | CH₃COONa + NaOH → CH₄ + Na₂CO₃ (CaO, ऊष्मा) | ऐल्केन में अम्ल से एक कार्बन परमाणु कम होता है |
| कोल्बे वैद्युत अपघटन (Kolbe electrolysis) | 2CH₃COONa + 2H₂O → CH₃CH₃ + 2CO₂ + H₂ + 2NaOH | ऐल्केन और CO₂ ऐनोड पर, H₂ और NaOH कैथोड पर; शृंखला दुगुनी |
भौतिक गुण। C₁–C₄ गैसें हैं, C₅–C₁₇ द्रव हैं और उच्चतर सदस्य ठोस हैं। ऐल्केन अध्रुवीय और जल में अविलेय होते हैं। क्वथनांक मोलर द्रव्यमान के साथ बढ़ता है। समावयवियों में शाखन क्वथनांक घटाता है क्योंकि अणु अधिक सघन होता है और वान डर वाल्स बल दुर्बल होते हैं: pentane > 2-methylbutane > 2,2-dimethylpropane।
रासायनिक अभिक्रियाएँ
- हैलोजनीकरण (मुक्त मूलक प्रतिस्थापन)। UV प्रकाश, ऊष्मा या 520–670 K पर CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl। आगे के उत्पाद CH₂Cl₂, CHCl₃ और CCl₄ हैं। हैलोजनों की अभिक्रियाशीलता: F₂ > Cl₂ > Br₂ > I₂। आयोडीनीकरण उत्क्रमणीय है, इसलिए HI हटाने के लिए HIO₃ या HNO₃ जैसे ऑक्सीकारक की आवश्यकता होती है।
- क्रियाविधि (मेथेन का क्लोरीनीकरण):
- आरंभन: Cl–Cl → 2Cl• (प्रकाश या ऊष्मा द्वारा समांश विखंडन)।
- संचरण: CH₄ + Cl• → •CH₃ + HCl ; •CH₃ + Cl₂ → CH₃Cl + Cl•।
- समापन: Cl• + Cl• → Cl₂ ; •CH₃ + •CH₃ → CH₃CH₃ ; •CH₃ + Cl• → CH₃Cl।
- दहन। CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O, ΔH = −890 kJ mol⁻¹। सामान्य: CₙH₂ₙ₊₂ + (3n + 1)/2 O₂ → nCO₂ + (n + 1)H₂O।
- नियंत्रित ऑक्सीकरण। 2CH₄ + O₂ → 2CH₃OH (Cu, 523 K, 100 atm); CH₄ + O₂ → HCHO + H₂O (Mo₂O₃); 2CH₃CH₃ + 3O₂ → 2CH₃COOH + 2H₂O ((CH₃COO)₂Mn, ऊष्मा); (CH₃)₃CH → (CH₃)₃COH, KMnO₄ के साथ।
- समावयवीकरण। n-ब्यूटेन (n-Butane) → 2-methylpropane, निर्जल AlCl₃ और HCl के साथ।
- ऐरोमैटीकरण। n-हेक्सेन (n-Hexane) → बेन्ज़ीन + 4H₂, 773 K, 10–20 atm पर, ऐलुमिना पर Cr₂O₃/V₂O₅/Mo₂O₃ के साथ।
- उच्चताप-अपघटन (क्रैकिंग)। वायु की अनुपस्थिति में उच्च ताप पर उच्चतर ऐल्केनों को गर्म करने से निम्नतर ऐल्केन, ऐल्कीन और हाइड्रोजन मिलते हैं, उदाहरणतः C₁₂H₂₆ → C₇H₁₆ + C₅H₁₀।
ऐल्कीन (Alkenes)
द्वि आबंध के कार्बन sp² संकरित होते हैं। C=C आबंध (134 pm) में एक σ और एक π आबंध होता है। एथीन के छह परमाणु एक ही तल में होते हैं तथा H–C–H और H–C=C कोण लगभग 120° होते हैं। जब प्रत्येक कार्बन पर दो भिन्न समूह हों, तो C=C के परितः अवरुद्ध घूर्णन से ज्यामितीय (सिस-ट्रांस) समावयवता उत्पन्न होती है।
विरचन
| विधि | अभिक्रिया | टिप्पणी |
|---|---|---|
| लिंडलार उत्प्रेरक द्वारा ऐल्काइन का आंशिक अपचयन | RC≡CR + H₂ → cis-RCH=CHR (CaCO₃ पर Pd, क्विनोलीन या सल्फर से विषाक्त) | सिस-ऐल्कीन; सिन योग |
| द्रव NH₃ में Na के साथ ऐल्काइन | RC≡CR + 2Na + 2NH₃ → trans-RCH=CHR | ट्रांस-ऐल्कीन |
| ऐल्किल हैलाइडों का विहाइड्रोहैलोजनन | CH₃CH₂Br + ऐल्कोहॉली KOH → CH₂=CH₂ + KBr + H₂O | सेत्ज़ेफ़ नियम (Saytzeff rule): अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन मुख्य उत्पाद होती है; सरलता 3° > 2° > 1° हैलाइड |
| सन्निध डाइहैलाइडों का विहैलोजनन | BrCH₂CH₂Br + Zn → CH₂=CH₂ + ZnBr₂ | Zn चूर्ण आसन्न कार्बनों पर स्थित दो हैलोजन हटा देता है |
| ऐल्कोहॉलों का अम्लीय निर्जलन | CH₃CH₂OH → CH₂=CH₂ + H₂O (सांद्र H₂SO₄, 443 K) | सरलता 3° > 2° > 1° ऐल्कोहॉल |
अभिक्रियाएँ
- H₂ का योग: RCH=CH₂ + H₂ → RCH₂CH₃ (Pt, Pd या Ni)।
- हैलोजनों का योग: CH₂=CH₂ + Br₂ (CCl₄ में) → BrCH₂CH₂Br। ब्रोमीन का लालिमायुक्त नारंगी रंग समाप्त हो जाता है। यह असंतृप्तता का परीक्षण है।
- HX का योग (अभिक्रियाशीलता HI > HBr > HCl)। मार्कोनीकॉफ़ नियम: असममित अभिकर्मक HX के योग में ऋणात्मक भाग उस कार्बन पर जाता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणु कम हों (अधिक प्रतिस्थापित कार्बन)। CH₃CH=CH₂ + HBr → CH₃CHBrCH₃ (2-bromopropane)। क्रियाविधि: (1) H⁺ द्वि आबंध पर जुड़कर अधिक स्थायी कार्बधनायन बनाता है, प्राथमिक CH₃CH₂CH₂⁺ के बजाय द्वितीयक (CH₃)₂CH⁺ (मंद पद); (2) Br⁻ कार्बधनायन पर आक्रमण करता है (तीव्र पद)।
- परॉक्साइड (खराश) प्रभाव: परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr का योग मुक्त मूलक श्रृंखला क्रियाविधि द्वारा मार्कोनीकॉफ़ नियम के विरुद्ध होता है: CH₃CH=CH₂ + HBr → CH₃CH₂CH₂Br (1-bromopropane)। यह केवल HBr के साथ होता है, HCl या HI के साथ नहीं। Br• पहले जुड़ता है और अधिक स्थायी द्वितीयक मुक्त मूलक बनाता है।
- H₂SO₄ और जल का योग: CH₂=CH₂ + H₂SO₄ → CH₃CH₂OSO₃H (एथिल हाइड्रोजनसल्फेट)। प्रोपीन + सांद्र H₂SO₄ आइसोप्रोपिल हाइड्रोजनसल्फेट देता है, जो जल के साथ उबालने पर propan-2-ol देता है। तनु H₂SO₄ से जलयोजन भी मार्कोनीकॉफ़ नियम का पालन करता है: प्रोपीन → propan-2-ol।
- बेयर अभिकर्मक (Baeyer's reagent) से ऑक्सीकरण (ठंडा, तनु, क्षारीय KMnO₄): CH₂=CH₂ → HOCH₂CH₂OH (ethane-1,2-diol)। गुलाबी रंग समाप्त हो जाता है, और यह असंतृप्तता का परीक्षण है। अम्लीय KMnO₄ या K₂Cr₂O₇ से C=C आबंध टूट जाता है: CH₃CH=CHCH₃ → 2CH₃COOH; (CH₃)₂C=CH₂ → CH₃COCH₃ + CO₂ + H₂O।
- ओज़ोनी अपघटन (Ozonolysis): ऐल्कीन O₃ से अभिक्रिया करके ओज़ोनाइड बनाती है, और Zn/H₂O से ऐल्डिहाइड या कीटोन मिलते हैं: CH₃CH=CH₂ → CH₃CHO + HCHO। इससे द्वि आबंध की स्थिति ज्ञात होती है।
- बहुलकीकरण: n CH₂=CH₂ → (–CH₂–CH₂–)ₙ पॉलिथीन (उच्च ताप, उच्च दाब, उत्प्रेरक); प्रोपीन से पॉलिप्रोपीन मिलती है।
ऐल्काइन (Alkynes)
त्रि आबंध के कार्बन sp संकरित होते हैं और अणु रैखिक होता है। C≡C 120 pm का है, जिसमें एक σ और दो π आबंध हैं।
विरचन। (1) कैल्सियम कार्बाइड: CaC₂ + 2H₂O → HC≡CH + Ca(OH)₂ (CaC₂ CaO और कार्बन से बनता है)। (2) सन्निध डाइहैलाइड की ऐल्कोहॉली KOH से दो बार अभिक्रिया, फिर NaNH₂: BrCH₂CH₂Br → CH₂=CHBr → HC≡CH।
अंतस्थ ऐल्काइनों का अम्लीय लक्षण। sp कार्बन अधिक विद्युतऋणात्मक है (50 % s-लक्षण), इसलिए C–H आबंध अधिक ध्रुवीय होता है और हाइड्रोजन H⁺ के रूप में निकल सकता है। अम्ल सामर्थ्य: HC≡CH > CH₂=CH₂ > CH₃CH₃।
- 2HC≡CH + 2Na → 2HC≡C⁻Na⁺ + H₂ (सोडियम एथाइनाइड)
- HC≡CH + अमोनियामय AgNO₃ → सिल्वर ऐसिटिलाइड का श्वेत अवक्षेप
- HC≡CH + अमोनियामय Cu₂Cl₂ → कॉपर ऐसिटिलाइड का लाल अवक्षेप
ये परीक्षण अंतस्थ ऐल्काइनों (R–C≡C–H) की पहचान करते हैं। But-2-yne अभिक्रिया नहीं करती।
योग अभिक्रियाएँ
- H₂: HC≡CH → CH₂=CH₂ → CH₃CH₃ (Pt, Pd या Ni)।
- हैलोजन: HC≡CH + Br₂ → CHBr=CHBr → CHBr₂CHBr₂ (1,1,2,2-tetrabromoethane); Br₂ का रंग समाप्त हो जाता है।
- HX: HC≡CH + HBr → CH₂=CHBr → CH₃CHBr₂ (1,1-dibromoethane, मार्कोनीकॉफ़)।
- जल: HC≡CH + H₂O → [CH₂=CHOH] → CH₃CHO (तनु H₂SO₄, HgSO₄, 333 K)। अस्थायी ईनॉल (विनाइल ऐल्कोहॉल) चलावयवीकरण द्वारा ऐल्डिहाइड में बदल जाता है। प्रोपाइन से propanone मिलता है।
बहुलकीकरण। रैखिक बहुलकीकरण से पॉलिऐसिटिलीन मिलती है। चक्रीय बहुलकीकरण: एथाइन को 873 K पर लाल-तप्त लोहे की नली से गुजारने पर 3HC≡CH → बेन्ज़ीन।
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन: बेन्ज़ीन
संरचना। बेन्ज़ीन C₆H₆ है, छह sp² कार्बन परमाणुओं का समतलीय वलय जिसके ऊपर और नीचे विस्थानीकृत π बादल होता है। बेन्ज़ीन एकांतर एकल और द्वि आबंधों वाली दो संरचनाओं का अनुनाद संकर है। सभी छह C–C आबंध समान हैं, लगभग 139 pm (C–C के 154 pm और C=C के 134 pm के बीच)। अनुनाद बेन्ज़ीन को असाधारण रूप से स्थायी बनाता है, इसलिए यह योग की अपेक्षा प्रतिस्थापन को वरीयता देती है।
ऐरोमैटिकता (हकल नियम, Hückel rule)। कोई यौगिक ऐरोमैटिक होता है यदि वह समतलीय, चक्रीय, पूर्णतः संयुग्मित हो और उसमें (4n + 2) π इलेक्ट्रॉन हों, जहाँ n = 0, 1, 2, …
| यौगिक | π इलेक्ट्रॉन | n | ऐरोमैटिक? |
|---|---|---|---|
| बेन्ज़ीन | 6 | 1 | हाँ |
| नैफ्थेलीन | 10 | 2 | हाँ |
| ऐन्थ्रासीन | 14 | 3 | हाँ |
| साइक्लोपेन्टाडाइएनिल ऋणायन, ट्रोपिलियम धनायन | 6 | 1 | हाँ |
| साइक्लोऑक्टाटेट्राईन (असमतलीय) | 8 | – | नहीं |
विरचन। (1) एथाइन का चक्रीय बहुलकीकरण। (2) विकार्बोक्सिलन: C₆H₅COONa + NaOH → C₆H₆ + Na₂CO₃ (CaO, ऊष्मा)। (3) जिंक चूर्ण से फीनॉल का अपचयन: C₆H₅OH + Zn → C₆H₆ + ZnO।
इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन। तीन पदों में क्रियाविधि: (1) इलेक्ट्रॉनस्नेही का उत्पादन; (2) π इलेक्ट्रॉनों का इलेक्ट्रॉनस्नेही पर आक्रमण, जिससे अनुनाद-स्थायी कार्बधनायन (ऐरीनियम आयन, सिग्मा संकुल) बनता है, यह मंद पद है; (3) ऐरोमैटिक वलय पुनः स्थापित करने के लिए H⁺ का निकलना।
| अभिक्रिया | अभिकर्मक और परिस्थितियाँ | इलेक्ट्रॉनस्नेही | उत्पाद |
|---|---|---|---|
| नाइट्रीकरण | सांद्र HNO₃ + सांद्र H₂SO₄, 323–333 K | NO₂⁺ | नाइट्रोबेन्ज़ीन |
| हैलोजनीकरण | Cl₂ या Br₂ + FeCl₃ या FeBr₃ (लूईस अम्ल) | Cl⁺ या Br⁺ (ध्रुवित हैलोजन) | क्लोरोबेन्ज़ीन, ब्रोमोबेन्ज़ीन |
| सल्फोनीकरण | धूम्रित H₂SO₄ (ओलियम) | SO₃ | बेन्ज़ीनसल्फोनिक अम्ल |
| फ्रीडेल–क्राफ्ट्स ऐल्किलीकरण | CH₃Cl + निर्जल AlCl₃ | CH₃⁺ | टॉलूईन |
| फ्रीडेल–क्राफ्ट्स ऐसिलीकरण | CH₃COCl + निर्जल AlCl₃ | CH₃CO⁺ | ऐसीटोफीनोन |
NO₂⁺ इस प्रकार बनता है: HNO₃ + 2H₂SO₄ ⇌ NO₂⁺ + H₃O⁺ + 2HSO₄⁻।
योग और अन्य अभिक्रियाएँ। C₆H₆ + 3H₂ → C₆H₁₂ (साइक्लोहेक्सेन; Ni, 453–473 K)। UV प्रकाश में C₆H₆ + 3Cl₂ → C₆H₆Cl₆ (बेन्ज़ीन हेक्साक्लोराइड, BHC)। दहन: 2C₆H₆ + 15O₂ → 12CO₂ + 6H₂O, कार्बन की अधिक मात्रा के कारण कालिखयुक्त ज्वाला के साथ।
निर्देशी प्रभाव। वलय पर पहले से उपस्थित समूह तय करता है कि अगला प्रतिस्थापी कहाँ जाएगा।
| वर्ग | समूह | दर पर प्रभाव |
|---|---|---|
| ऑर्थो/पैरा निर्देशी, सक्रियक | –OH, –NH₂, –NHR, –OCH₃, –CH₃, –C₂H₅ | बेन्ज़ीन से तेज़ |
| ऑर्थो/पैरा निर्देशी, निष्क्रियक | –Cl, –Br, –I, –F | बेन्ज़ीन से धीमी |
| मेटा निर्देशी, निष्क्रियक | –NO₂, –CN, –CHO, –COR, –COOH, –COOR, –SO₃H | बेन्ज़ीन से धीमी |
सक्रियक समूह इलेक्ट्रॉन देते हैं (+R, +I) और ऑर्थो तथा पैरा स्थितियों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं। निष्क्रियक मेटा निर्देशी इलेक्ट्रॉन खींचते हैं (−R, −I)। हैलोजन −I द्वारा इलेक्ट्रॉन खींचते हैं (निष्क्रियक) किंतु उनके एकाकी युग्म +R द्वारा इलेक्ट्रॉन देते हैं, जो स्थिति (ऑर्थो/पैरा) को नियंत्रित करता है।
कैंसरजनकता और विषाक्तता। बेन्ज़ीन विषैली है और कैंसरजन है। बहुनाभिकीय हाइड्रोकार्बन, जिनमें दो से अधिक संगलित बेन्ज़ीन वलय होते हैं, कैंसरजन होते हैं। ये कोयला, पेट्रोलियम और तंबाकू जैसे कार्बनिक पदार्थों के अपूर्ण दहन से बनते हैं, और DNA को क्षति पहुँचाकर कैंसर उत्पन्न कर सकते हैं।
NEET के जाल
- वुर्ट्ज़ अभिक्रिया एक हैलाइड से सम संख्या कार्बन वाले ऐल्केन देती है और मेथेन नहीं दे सकती; विकार्बोक्सिलन से एक कार्बन कम मिलता है।
- कोल्बे वैद्युत अपघटन में ऐल्केन ऐनोड पर बनती है, कैथोड पर नहीं।
- लिंडलार उत्प्रेरक सिस-ऐल्कीन देता है; Na/द्रव NH₃ ट्रांस-ऐल्कीन देता है।
- परॉक्साइड प्रभाव केवल HBr के लिए काम करता है। यह HCl या HI के लिए काम नहीं करता।
- मार्कोनीकॉफ़ योग अधिक स्थायी कार्बधनायन से होकर जाता है; प्रति-मार्कोनीकॉफ़ योग अधिक स्थायी मुक्त मूलक से होकर जाता है।
- बेयर अभिकर्मक डाइऑल देता है और कार्बन कंकाल बनाए रखता है; अम्लीय KMnO₄ C=C आबंध तोड़ देता है।
- केवल अंतस्थ ऐल्काइन ही अमोनियामय AgNO₃ या Cu₂Cl₂ के साथ अवक्षेप देते हैं।
- बेन्ज़ीन कागज़ पर असंतृप्त होने पर भी ब्रोमीन जल या बेयर अभिकर्मक का रंग नहीं हटाती।
- बेन्ज़ीन में हैलोजन निष्क्रियक होने पर भी ऑर्थो/पैरा निर्देशी होते हैं।
- विषमकोणीय एथेन ग्रहणीय एथेन से अधिक स्थायी है; विषमकोणीय में द्विफलक कोण 60° और ग्रहणीय में 0° होता है।
एक-पंक्ति तथ्य
- ऐल्केन का सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₂ है।
- एथेन का सबसे स्थायी संरूपण विषमकोणीय है।
- एथेन के संरूपणों के बीच ऊर्जा अवरोध लगभग 12.5 kJ mol⁻¹ है।
- मेथेन −890 kJ mol⁻¹ के ΔH के साथ जलती है।
- निर्जल AlCl₃/HCl n-ब्यूटेन को 2-methylpropane में समावयवित करते हैं।
- n-हेक्सेन 773 K पर ऐरोमैटीकरण से बेन्ज़ीन देती है।
- एथीन 443 K पर सांद्र H₂SO₄ से एथेनॉल द्वारा बनाई जाती है।
- सेत्ज़ेफ़ नियम अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन देता है।
- बेयर अभिकर्मक ठंडा, तनु, क्षारीय KMnO₄ है।
- प्रोपीन का ओज़ोनी अपघटन ethanal और methanal देता है।
- कैल्सियम कार्बाइड जल के साथ एथाइन देता है।
- Hg²⁺/H⁺ से एथाइन का जलयोजन ethanal देता है।
- एथाइन के तीन अणु बेन्ज़ीन देते हैं।
- बेन्ज़ीन में सभी C–C आबंध लगभग 139 pm के होते हैं।
- नाइट्रीकरण में इलेक्ट्रॉनस्नेही NO₂⁺ है।
अभ्यास प्रश्न
शुष्क ईथर में एथिल ब्रोमाइड की सोडियम धातु के साथ वुर्ट्ज़ अभिक्रिया (Wurtz reaction) से प्राप्त होता है:
- butane
- hexane
- propane
- ethane
उत्तर
A. butane
2CH₃CH₂Br + 2Na → CH₃CH₂CH₂CH₃ + 2NaBr; दोनों एथिल समूह जुड़ जाते हैं।
The Wurtz reaction of ethyl bromide with sodium metal in dry ether gives:
- butane
- hexane
- propane
- ethane
सोडियम प्रोपेनोएट को सोडा लाइम के साथ गर्म करने पर प्राप्त होता है:
- methane
- ethane
- butane
- propane
उत्तर
B. ethane
विकार्बोक्सिलन में एक कार्बन Na₂CO₃ के रूप में निकल जाता है: CH₃CH₂COONa → CH₃CH₃।
Heating sodium propanoate with soda lime gives:
- methane
- ethane
- butane
- propane
जलीय सोडियम ऐसीटेट के वैद्युत अपघटन में कैथोड पर मुक्त होने वाली गैस है:
- कार्बन डाइऑक्साइड
- methane
- ethane
- हाइड्रोजन
उत्तर
D. हाइड्रोजन
एथेन और CO₂ ऐनोड पर बनते हैं; H₂ और NaOH कैथोड पर बनते हैं।
On electrolysis of aqueous sodium acetate, the gas liberated at the cathode is:
- carbon dioxide
- methane
- ethane
- hydrogen
एथेन के सबसे स्थायी संरूपण में दोनों कार्बनों पर निकटतम C–H आबंधों के बीच द्विफलक कोण है:
- 180°
- 90°
- 60°
- 0°
उत्तर
C. 60°
विषमकोणीय संरूपण में निकटतम C–H आबंध 60° की दूरी पर होते हैं; ग्रहणीय में 0°।
In the most stable conformation of ethane the dihedral angle between the nearest C–H bonds on the two carbons is:
- 180°
- 90°
- 60°
- 0°
C₅H₁₂ के समावयवियों के क्वथनांकों का सही क्रम है:
- n-pentane > 2,2-dimethylpropane > 2-methylbutane
- 2,2-dimethylpropane > 2-methylbutane > n-pentane
- n-pentane > 2-methylbutane > 2,2-dimethylpropane
- 2-methylbutane > n-pentane > 2,2-dimethylpropane
उत्तर
C. n-pentane > 2-methylbutane > 2,2-dimethylpropane
शाखन पृष्ठीय क्षेत्रफल और वान डर वाल्स बलों को घटाता है, इसलिए शाखन जितना अधिक, क्वथनांक उतना कम।
The correct order of boiling points of the isomers of C₅H₁₂ is:
- n-pentane > 2,2-dimethylpropane > 2-methylbutane
- 2,2-dimethylpropane > 2-methylbutane > n-pentane
- n-pentane > 2-methylbutane > 2,2-dimethylpropane
- 2-methylbutane > n-pentane > 2,2-dimethylpropane
मेथेन का आयोडीनीकरण HIO₃ या HNO₃ की उपस्थिति में इसलिए किया जाता है ताकि:
- HI का ऑक्सीकरण हो जाए और उत्क्रम अभिक्रिया रुक जाए
- I• मूलक अधिक तेज़ी से बनें
- CH₃I का अपचयन होकर CH₄ बन जाए
- आयोडीन के लिए विलायक का कार्य हो
उत्तर
A. HI का ऑक्सीकरण हो जाए और उत्क्रम अभिक्रिया रुक जाए
अभिक्रिया उत्क्रमणीय है; HI, CH₃I को वापस CH₄ में अपचयित कर देता, इसलिए इसे ऑक्सीकरण द्वारा हटाया जाता है।
Iodination of methane is carried out in the presence of HIO₃ or HNO₃ in order to:
- oxidise HI and prevent the reverse reaction
- generate I• radicals faster
- reduce CH₃I to CH₄
- act as a solvent for iodine
परॉक्साइड की अनुपस्थिति में प्रोपीन की HBr के साथ अभिक्रिया का उत्पाद है:
- 1-bromopropane
- propan-2-ol
- 1,2-dibromopropane
- 2-bromopropane
उत्तर
D. 2-bromopropane
मार्कोनीकॉफ़ योग: Br उस कार्बन पर जाता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणु कम हों।
The product of the reaction of propene with HBr in the absence of peroxide is:
- 1-bromopropane
- propan-2-ol
- 1,2-dibromopropane
- 2-bromopropane
परॉक्साइड प्रभाव किसके योग में दिखता है:
- केवल HBr
- केवल HCl
- केवल HI
- HCl, HBr और HI
उत्तर
A. केवल HBr
परॉक्साइड की उपस्थिति में केवल HBr मुक्त मूलक पथ से जुड़ता है।
The peroxide effect is shown by the addition of:
- HBr only
- HCl only
- HI only
- HCl, HBr and HI
लिंडलार उत्प्रेरक पर H₂ द्वारा but-2-yne का अपचयन देता है:
- butane
- cis-but-2-ene
- but-1-ene
- trans-but-2-ene
उत्तर
B. cis-but-2-ene
लिंडलार उत्प्रेरक (विषाक्त Pd) सिस-ऐल्कीन पर रुक जाता है।
Reduction of but-2-yne with H₂ over Lindlar catalyst gives:
- butane
- cis-but-2-ene
- but-1-ene
- trans-but-2-ene
CH₃CH=CHCH₃ का ओज़ोनी अपघटन, फिर Zn/H₂O, देता है:
- ethanoic acid
- propanone
- methanal
- ethanal
उत्तर
D. ethanal
C=C आबंध पर विदलन से CH₃CHO के दो अणु मिलते हैं।
Ozonolysis of CH₃CH=CHCH₃ followed by Zn/H₂O gives:
- ethanoic acid
- propanone
- methanal
- ethanal
333 K पर तनु H₂SO₄ और HgSO₄ के साथ एथाइन का जलयोजन देता है:
- ethane-1,2-diol
- ethanal
- propanone
- ethanol
उत्तर
B. ethanal
पहले विनाइल ऐल्कोहॉल बनता है जो चलावयवीकरण से CH₃CHO में बदल जाता है।
Ethyne on hydration with dilute H₂SO₄ and HgSO₄ at 333 K gives:
- ethane-1,2-diol
- ethanal
- propanone
- ethanol
निम्नलिखित में से कौन अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट के साथ श्वेत अवक्षेप देता है?
- CH₃C≡CCH₃
- CH₂=CHCH₃
- CH₃C≡CH
- CH₃CH₂CH₃
उत्तर
C. CH₃C≡CH
केवल अंतस्थ ऐल्काइन (अम्लीय C–H वाले) सिल्वर ऐसिटिलाइड बनाते हैं।
Which of the following gives a white precipitate with ammoniacal silver nitrate?
- CH₃C≡CCH₃
- CH₂=CHCH₃
- CH₃C≡CH
- CH₃CH₂CH₃
नैफ्थेलीन में π इलेक्ट्रॉनों की संख्या है:
- 10
- 14
- 6
- 8
उत्तर
A. 10
नैफ्थेलीन के संगलित वलयों में पाँच द्वि आबंध हैं, अतः 10 π इलेक्ट्रॉन (4n + 2, n = 2)।
The number of π electrons in naphthalene is:
- 10
- 14
- 6
- 8
बेन्ज़ीन के नाइट्रीकरण में इलेक्ट्रॉनस्नेही है:
- NO₂•
- NO₂⁺
- NO₃⁻
- NO₂⁻
उत्तर
B. NO₂⁺
सांद्र HNO₃ और सांद्र H₂SO₄ नाइट्रोनियम आयन NO₂⁺ बनाते हैं।
The electrophile in the nitration of benzene is:
- NO₂•
- NO₂⁺
- NO₃⁻
- NO₂⁻
निम्नलिखित में से कौन-सा समूह आने वाले प्रतिस्थापी को बेन्ज़ीन की मेटा स्थिति पर निर्देशित करता है?
- –OH
- –CH₃
- –NH₂
- –NO₂
उत्तर
D. –NO₂
–NO₂ इलेक्ट्रॉन-आकर्षी मेटा निर्देशी समूह है; अन्य ऑर्थो/पैरा निर्देशित करते हैं।
Which of the following groups directs an incoming substituent to the meta position of benzene?
- –OH
- –CH₃
- –NH₂
- –NO₂
निर्जल AlCl₃ की उपस्थिति में बेन्ज़ीन की CH₃COCl से अभिक्रिया देती है:
- benzoic acid
- benzaldehyde
- acetophenone (C₆H₅COCH₃)
- toluene
उत्तर
C. acetophenone (C₆H₅COCH₃)
फ्रीडेल–क्राफ्ट्स ऐसिलीकरण CH₃CO समूह प्रविष्ट कराता है।
Benzene reacts with CH₃COCl in the presence of anhydrous AlCl₃ to give:
- benzoic acid
- benzaldehyde
- acetophenone (C₆H₅COCH₃)
- toluene
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: एथेन का विषमकोणीय संरूपण ग्रहणीय संरूपण से अधिक स्थायी है। कथन II: ग्रहणीय संरूपण में मरोड़ विकृति सबसे अधिक होती है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
A. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
ग्रहणीय अवस्था में C–H आबंधों के बीच प्रतिकर्षण अधिकतम होता है।
Given below are two statements: Statement I: The staggered conformation of ethane is more stable than the eclipsed conformation. Statement II: Torsional strain is greatest in the eclipsed conformation.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: मेथेन बनाने के लिए वुर्ट्ज़ अभिक्रिया का उपयोग नहीं किया जा सकता। कथन II: सोडियम ऐसीटेट को सोडा लाइम के साथ गर्म करने पर एथेन मिलती है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
B. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
वुर्ट्ज़ युग्मन कार्बन संख्या दुगुनी करता है, इसलिए मेथेन नहीं बन सकती। CH₃COONa के विकार्बोक्सिलन से मेथेन मिलती है।
Given below are two statements: Statement I: The Wurtz reaction cannot be used to prepare methane. Statement II: Heating sodium acetate with soda lime gives ethane.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: लिंडलार उत्प्रेरक ऐल्काइन को ट्रांस-ऐल्कीन में बदलता है। कथन II: द्रव अमोनिया में सोडियम ऐल्काइन को ट्रांस-ऐल्कीन में बदलता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
उत्तर
C. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
लिंडलार सिस-ऐल्कीन देता है; Na/द्रव NH₃ ट्रांस-ऐल्कीन देता है।
Given below are two statements: Statement I: Lindlar catalyst converts an alkyne into a trans-alkene. Statement II: Sodium in liquid ammonia converts an alkyne into a trans-alkene.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: परॉक्साइड की उपस्थिति में प्रोपीन पर HBr का योग मुक्त मूलक क्रियाविधि से होता है। कथन II: इस अभिक्रिया का उत्पाद 1-bromopropane है।
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
उत्तर
D. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
Br• पहले जुड़कर अधिक स्थायी द्वितीयक मूलक देता है, इसलिए Br अंतस्थ कार्बन पर पहुँचता है।
Given below are two statements: Statement I: The addition of HBr to propene in the presence of peroxide proceeds by a free-radical mechanism. Statement II: 1-Bromopropane is the product of this reaction.
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
- Both Statement I and Statement II are correct
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: प्रोपीन पर HX का मार्कोनीकॉफ़ योग कम स्थायी कार्बधनायन से होकर जाता है। कथन II: परॉक्साइड प्रभाव HBr के साथ-साथ HCl द्वारा भी दिखाया जाता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
B. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
मार्कोनीकॉफ़ योग अधिक स्थायी कार्बधनायन से होकर जाता है, और परॉक्साइड प्रभाव केवल HBr दिखाता है।
Given below are two statements: Statement I: Markovnikov addition of HX to propene goes through the less stable carbocation. Statement II: The peroxide effect is shown by HCl as well as HBr.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: बेयर अभिकर्मक (Baeyer's reagent) एथीन को ethane-1,2-diol में बदलता है। कथन II: ऐल्कीन का अम्लीय KMnO₄ से ऑक्सीकरण कार्बन कंकाल को अपरिवर्तित रखता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
C. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
अम्लीय KMnO₄ C=C आबंध तोड़ देता है।
Given below are two statements: Statement I: Baeyer's reagent converts ethene into ethane-1,2-diol. Statement II: Acidic KMnO₄ oxidation of an alkene keeps the carbon skeleton unchanged.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन I: बेन्ज़ीन ऐल्कीनों की भाँति सरलता से योग अभिक्रियाएँ देती है। कथन II: बेन्ज़ीन इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देती है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
D. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
योग से स्थायी विस्थानीकृत π निकाय नष्ट हो जाता, इसलिए बेन्ज़ीन प्रतिस्थापन को वरीयता देती है।
Given below are two statements: Statement I: Benzene readily undergoes addition reactions like alkenes. Statement II: Benzene undergoes electrophilic substitution reactions.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. एथाइन एथीन से अधिक अम्लीय है। 2. एथाइन अमोनियामय Cu₂Cl₂ के साथ लाल अवक्षेप बनाती है। 3. But-2-yne सोडियम से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन मुक्त करती है।
- 1 और 2 केवल
- 1 और 3 केवल
- 2 और 3 केवल
- 1, 2 और 3
उत्तर
A. 1 और 2 केवल
But-2-yne में कोई अंतस्थ C–H नहीं है, इसलिए यह सोडियम से अभिक्रिया नहीं करती।
Which of the following statements are correct? 1. Ethyne is more acidic than ethene. 2. Ethyne forms a red precipitate with ammoniacal Cu₂Cl₂. 3. But-2-yne reacts with sodium to liberate hydrogen.
- 1 and 2 only
- 1 and 3 only
- 2 and 3 only
- 1, 2 and 3
निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. बेन्ज़ीन के नाइट्रीकरण में इलेक्ट्रॉनस्नेही NO₂⁻ है। 2. सल्फोनीकरण में इलेक्ट्रॉनस्नेही SO₃ है। 3. फ्रीडेल–क्राफ्ट्स ऐसिलीकरण में CH₃COCl और निर्जल AlCl₃ प्रयुक्त होते हैं।
- 1 और 2 केवल
- 1 और 3 केवल
- 2 और 3 केवल
- 1, 2 और 3
उत्तर
C. 2 और 3 केवल
नाइट्रीकरण में इलेक्ट्रॉनस्नेही NO₂⁺ है, NO₂⁻ नहीं।
Which of the following statements are correct? 1. The electrophile in nitration of benzene is NO₂⁻. 2. The electrophile in sulphonation is SO₃. 3. Friedel–Crafts acylation uses CH₃COCl and anhydrous AlCl₃.
- 1 and 2 only
- 1 and 3 only
- 2 and 3 only
- 1, 2 and 3
निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. विहाइड्रोहैलोजनन में अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन मुख्य उत्पाद होती है। 2. अम्लीय निर्जलन प्राथमिक ऐल्कोहॉलों के लिए सबसे सरल है। 3. विहाइड्रोहैलोजनन में ऐल्कोहॉली KOH प्रयुक्त होता है।
- 1 और 2 केवल
- 2 और 3 केवल
- 1, 2 और 3
- 1 और 3 केवल
उत्तर
D. 1 और 3 केवल
अम्लीय निर्जलन तृतीयक ऐल्कोहॉलों के लिए सबसे सरल है (3° > 2° > 1°)।
Which of the following statements are correct? 1. In dehydrohalogenation the more substituted alkene is the major product. 2. Acid dehydration is easiest for primary alcohols. 3. Dehydrohalogenation uses alcoholic KOH.
- 1 and 2 only
- 2 and 3 only
- 1, 2 and 3
- 1 and 3 only
अभिकथन (A): अंतस्थ ऐल्काइन सोडियम से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन मुक्त करते हैं। कारण (R): sp-संकरित कार्बन, sp² या sp³ कार्बन से अधिक विद्युतऋणात्मक होता है, इसलिए C–H आबंध अम्लीय होता है।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
A. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
50 % s-लक्षण के कारण sp कार्बन आबंध युग्म को अधिक कसकर पकड़ता है, इसलिए H⁺ निकल सकता है।
Assertion (A): Terminal alkynes react with sodium to liberate hydrogen. Reason (R): An sp-hybridised carbon is more electronegative than an sp² or sp³ carbon, so the C–H bond is acidic.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): बेन्ज़ीन योग के बजाय इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन देती है। कारण (R): योग से स्थायी विस्थानीकृत π इलेक्ट्रॉन निकाय नष्ट हो जाता।
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
B. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
प्रतिस्थापन में ऐरोमैटिक वलय अक्षुण्ण रहता है।
Assertion (A): Benzene undergoes electrophilic substitution rather than addition. Reason (R): Addition would destroy the stable delocalised π electron system.
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): मेथेन बनाने के लिए वुर्ट्ज़ अभिक्रिया का उपयोग किया जा सकता है। कारण (R): वुर्ट्ज़ अभिक्रिया ऐल्किल हैलाइडों के दो ऐल्किल समूहों को जोड़ती है।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
D. A असत्य है लेकिन R सत्य है
दो ऐल्किल समूहों को जोड़ने पर कम से कम एथेन मिलती है, इसलिए मेथेन नहीं बन सकती।
Assertion (A): The Wurtz reaction can be used to prepare methane. Reason (R): The Wurtz reaction couples two alkyl groups from alkyl halides.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): n-हेक्सेन को ऐलुमिना पर Cr₂O₃/V₂O₅/Mo₂O₃ के साथ 773 K पर गर्म करने से बेन्ज़ीन मिलती है। कारण (R): इस अभिक्रिया को उच्चताप-अपघटन (pyrolysis) कहते हैं।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
B. A सत्य है लेकिन R असत्य है
यह अभिक्रिया ऐरोमैटीकरण (चक्रीकरण और विहाइड्रोजनीकरण) है, उच्चताप-अपघटन नहीं।
Assertion (A): n-Hexane gives benzene when heated at 773 K with Cr₂O₃/V₂O₅/Mo₂O₃ on alumina. Reason (R): This reaction is called pyrolysis.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- A is true but R is false
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is false but R is true
अभिकथन (A): इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन में क्लोरोबेन्ज़ीन, बेन्ज़ीन से तेज़ अभिक्रिया करती है। कारण (R): क्लोरीन परमाणु ऑर्थो/पैरा निर्देशी समूह है।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
उत्तर
C. A असत्य है लेकिन R सत्य है
क्लोरीन निष्क्रियक है (−I, +R से अधिक प्रबल है), इसलिए अभिक्रिया धीमी होती है, यद्यपि यह ऑर्थो/पैरा निर्देशित करता है।
Assertion (A): Chlorobenzene reacts faster than benzene in electrophilic substitution. Reason (R): The chlorine atom is an ortho/para-directing group.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is false but R is true
- A is true but R is false
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. वुर्ट्ज़ अभिक्रिया b. कोल्बे वैद्युत अपघटन c. विकार्बोक्सिलन d. लिंडलार अपचयन सूची II: i. कार्बोक्सिलिक अम्ल के सोडियम लवण का वैद्युत अपघटन ii. शुष्क ईथर में सोडियम के साथ ऐल्किल हैलाइड iii. अम्ल के सोडियम लवण को सोडा लाइम के साथ गर्म करना iv. विषाक्त Pd के साथ H₂ ऐल्काइन को सिस-ऐल्कीन में बदलता है
- a-iii, b-i, c-ii, d-iv
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-ii, b-i, c-iv, d-iii
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
उत्तर
D. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
प्रत्येक अभिक्रिया को उसके अभिकर्मक या परिस्थिति से सुमेलित कीजिए।
Match List I with List II. List I: a. Wurtz reaction b. Kolbe electrolysis c. Decarboxylation d. Lindlar reduction List II: i. Electrolysis of the sodium salt of a carboxylic acid ii. Alkyl halide with sodium in dry ether iii. Sodium salt of an acid heated with soda lime iv. Poisoned Pd with H₂ converts an alkyne to a cis-alkene
- a-iii, b-i, c-ii, d-iv
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-ii, b-i, c-iv, d-iii
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. प्रोपीन + HBr (परॉक्साइड के बिना) b. प्रोपीन + HBr (परॉक्साइड सहित) c. एथाइन + H₂O (Hg²⁺/H⁺) d. प्रोपीन + H₂O (तनु H₂SO₄) सूची II: i. 1-Bromopropane ii. 2-Bromopropane iii. Ethanal iv. Propan-2-ol
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
- a-ii, b-i, c-iv, d-iii
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-ii, b-iii, c-i, d-iv
उत्तर
A. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
मार्कोनीकॉफ़ योग से 2-bromopropane और propan-2-ol मिलते हैं; परॉक्साइड से 1-bromopropane; एथाइन से ethanal।
Match List I with List II. List I: a. Propene + HBr (no peroxide) b. Propene + HBr (with peroxide) c. Ethyne + H₂O (Hg²⁺/H⁺) d. Propene + H₂O (dilute H₂SO₄) List II: i. 1-Bromopropane ii. 2-Bromopropane iii. Ethanal iv. Propan-2-ol
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
- a-ii, b-i, c-iv, d-iii
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-ii, b-iii, c-i, d-iv
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. नाइट्रीकरण b. सल्फोनीकरण c. फ्रीडेल–क्राफ्ट्स ऐल्किलीकरण (CH₃Cl/AlCl₃) d. फ्रीडेल–क्राफ्ट्स ऐसिलीकरण (CH₃COCl/AlCl₃) सूची II: i. CH₃CO⁺ ii. NO₂⁺ iii. SO₃ iv. CH₃⁺
- a-iii, b-ii, c-iv, d-i
- a-ii, b-iii, c-iv, d-i
- a-ii, b-iii, c-i, d-iv
- a-ii, b-iv, c-iii, d-i
उत्तर
B. a-ii, b-iii, c-iv, d-i
प्रत्येक अभिक्रिया का अपना इलेक्ट्रॉनस्नेही होता है।
Match List I with List II. List I: a. Nitration b. Sulphonation c. Friedel–Crafts alkylation (CH₃Cl/AlCl₃) d. Friedel–Crafts acylation (CH₃COCl/AlCl₃) List II: i. CH₃CO⁺ ii. NO₂⁺ iii. SO₃ iv. CH₃⁺
- a-iii, b-ii, c-iv, d-i
- a-ii, b-iii, c-iv, d-i
- a-ii, b-iii, c-i, d-iv
- a-ii, b-iv, c-iii, d-i
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. बेन्ज़ीन b. नैफ्थेलीन c. ऐन्थ्रासीन d. एथाइन सूची II: i. 14 π इलेक्ट्रॉन ii. 4 π इलेक्ट्रॉन iii. 6 π इलेक्ट्रॉन iv. 10 π इलेक्ट्रॉन
- a-iii, b-iv, c-ii, d-i
- a-iv, b-iii, c-i, d-ii
- a-iii, b-iv, c-i, d-ii
- a-iii, b-i, c-iv, d-ii
उत्तर
C. a-iii, b-iv, c-i, d-ii
बेन्ज़ीन में 6, नैफ्थेलीन में 10, ऐन्थ्रासीन में 14, एथाइन में 4 π इलेक्ट्रॉन होते हैं।
Match List I with List II. List I: a. Benzene b. Naphthalene c. Anthracene d. Ethyne List II: i. 14 π electrons ii. 4 π electrons iii. 6 π electrons iv. 10 π electrons
- a-iii, b-iv, c-ii, d-i
- a-iv, b-iii, c-i, d-ii
- a-iii, b-iv, c-i, d-ii
- a-iii, b-i, c-iv, d-ii
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. विषमकोणीय एथेन b. ग्रहणीय एथेन c. न्यूमैन प्रक्षेपण d. सॉहॉर्स प्रक्षेपण सूची II: i. C–C आबंध तिरछी रेखा के रूप में ii. द्विफलक कोण 0° iii. आगे का कार्बन बिंदु और पीछे का कार्बन वृत्त के रूप में iv. द्विफलक कोण 60°
- a-ii, b-iv, c-iii, d-i
- a-iv, b-iii, c-ii, d-i
- a-iv, b-ii, c-iii, d-i
- a-iv, b-ii, c-i, d-iii
उत्तर
C. a-iv, b-ii, c-iii, d-i
विषमकोणीय 60°, ग्रहणीय 0°; न्यूमैन में बिंदु और वृत्त होता है; सॉहॉर्स में तिरछी C–C रेखा होती है।
Match List I with List II. List I: a. Staggered ethane b. Eclipsed ethane c. Newman projection d. Sawhorse projection List II: i. C–C bond drawn as a slanted line ii. Dihedral angle 0° iii. Front carbon shown as a point and rear carbon as a circle iv. Dihedral angle 60°
- a-ii, b-iv, c-iii, d-i
- a-iv, b-iii, c-ii, d-i
- a-iv, b-ii, c-iii, d-i
- a-iv, b-ii, c-i, d-iii
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. ऐरोमैटीकरण b. समावयवीकरण c. मेथेन का मेथेनॉल में नियंत्रित ऑक्सीकरण d. उच्चताप-अपघटन सूची II: i. Cu, 523 K, 100 atm ii. वायु की अनुपस्थिति में उच्च ताप iii. निर्जल AlCl₃ और HCl iv. Cr₂O₃/V₂O₅/Mo₂O₃, 773 K
- a-iv, b-iii, c-ii, d-i
- a-i, b-iii, c-iv, d-ii
- a-iii, b-iv, c-i, d-ii
- a-iv, b-iii, c-i, d-ii
उत्तर
D. a-iv, b-iii, c-i, d-ii
प्रत्येक ऐल्केन अभिक्रिया को उसकी परिस्थितियों से सुमेलित कीजिए।
Match List I with List II. List I: a. Aromatisation b. Isomerisation c. Controlled oxidation of methane to methanol d. Pyrolysis List II: i. Cu, 523 K, 100 atm ii. High temperature in the absence of air iii. Anhydrous AlCl₃ and HCl iv. Cr₂O₃/V₂O₅/Mo₂O₃, 773 K
- a-iv, b-iii, c-ii, d-i
- a-i, b-iii, c-iv, d-ii
- a-iii, b-iv, c-i, d-ii
- a-iv, b-iii, c-i, d-ii
एक ऐल्कीन का ओज़ोनी अपघटन (Zn/H₂O) CH₃COCH₃ और CH₃CHO देता है। वह ऐल्कीन है:
- 2-methylbut-2-ene
- 2-methylpropene
- pent-2-ene
- but-2-ene
उत्तर
A. 2-methylbut-2-ene
(CH₃)₂C=CHCH₃ विदलित होकर CH₃COCH₃ और CH₃CHO देती है।
An alkene on ozonolysis (Zn/H₂O) gives CH₃COCH₃ and CH₃CHO. The alkene is:
- 2-methylbut-2-ene
- 2-methylpropene
- pent-2-ene
- but-2-ene
C₃H₄ सूत्र का एक हाइड्रोकार्बन अमोनियामय AgNO₃ के साथ श्वेत अवक्षेप देता है। HgSO₄ और तनु H₂SO₄ से जलयोजन पर यह देता है:
- propanoic acid
- propanone
- propan-2-ol
- propanal
उत्तर
B. propanone
यह प्रोपाइन है; मार्कोनीकॉफ़ जलयोजन से ईनॉल बनता है जो CH₃COCH₃ में बदल जाता है।
A hydrocarbon of formula C₃H₄ gives a white precipitate with ammoniacal AgNO₃. On hydration with HgSO₄ and dilute H₂SO₄ it gives:
- propanoic acid
- propanone
- propan-2-ol
- propanal
2-methylbutane के संरचनात्मक रूप से भिन्न मोनोक्लोरो व्युत्पन्नों की संख्या है:
- 3
- 5
- 4
- 2
उत्तर
C. 4
भिन्न स्थितियाँ हैं: C-2 पर दो समतुल्य CH₃, C-2 (तृतीयक), C-3 और C-4: चार उत्पाद।
The number of structurally different monochloro derivatives of 2-methylbutane is:
- 3
- 5
- 4
- 2
ऐल्कोहॉली KOH के साथ 2-bromobutane के विहाइड्रोहैलोजनन का मुख्य उत्पाद है:
- butan-2-ol
- but-1-ene
- butane
- but-2-ene
उत्तर
D. but-2-ene
सेत्ज़ेफ़ नियम (Saytzeff's rule) के अनुसार अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन मुख्य उत्पाद होती है।
The major product of dehydrohalogenation of 2-bromobutane with alcoholic KOH is:
- butan-2-ol
- but-1-ene
- butane
- but-2-ene
परॉक्साइड की अनुपस्थिति में एक ऐल्कीन HBr के साथ अभिक्रिया करके 2-bromo-2-methylpropane देती है। वह ऐल्कीन है:
- but-2-ene
- 2-methylpropene
- propene
- but-1-ene
उत्तर
B. 2-methylpropene
H⁺ CH₂ कार्बन पर जुड़कर तृतीयक कार्बधनायन (CH₃)₃C⁺ बनाता है, फिर Br⁻ जुड़ता है।
An alkene reacts with HBr in the absence of peroxide to give 2-bromo-2-methylpropane. The alkene is:
- but-2-ene
- 2-methylpropene
- propene
- but-1-ene
सांद्र HNO₃ और सांद्र H₂SO₄ से नाइट्रोबेन्ज़ीन के नाइट्रीकरण से मुख्यतः प्राप्त होता है:
- 1,3-dinitrobenzene
- 1,2-dinitrobenzene
- 1,3,5-trinitrobenzene
- 1,4-dinitrobenzene
उत्तर
A. 1,3-dinitrobenzene
–NO₂ समूह मेटा निर्देशी और निष्क्रियक है।
Nitration of nitrobenzene with conc. HNO₃ and conc. H₂SO₄ gives mainly:
- 1,3-dinitrobenzene
- 1,2-dinitrobenzene
- 1,3,5-trinitrobenzene
- 1,4-dinitrobenzene
द्रव अमोनिया में सोडियम द्वारा but-2-yne का अपचयन देता है:
- butane
- cis-but-2-ene
- trans-but-2-ene
- but-1-ene
उत्तर
C. trans-but-2-ene
Na/द्रव NH₃ ट्रांस-ऐल्कीन देता है।
Reduction of but-2-yne with sodium in liquid ammonia gives:
- butane
- cis-but-2-ene
- trans-but-2-ene
- but-1-ene