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NEET रसायन विज्ञान: हैलोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक यौगिक · Chapter 1

हैलोऐल्केन और हैलोऐरीन

याद रखने योग्य बातें

  • हैलोऐल्केन (R–X) मुख्यतः नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया देते हैं। SN2 एक पद की अभिक्रिया है जिसमें विन्यास का प्रतिलोमन होता है; SN1 कार्बोनियम आयन (carbocation) से होकर दो पदों में होती है और रेसिमीकरण देती है। SN2 क्रम: CH₃X > 1° > 2° > 3°। SN1 क्रम: 3° > 2° > 1° > CH₃X।
  • हैलोऐरीन नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति बहुत अक्रिय होते हैं क्योंकि अनुनाद (C–X में आंशिक द्विआबंध), sp² कार्बन और अस्थायी फेनिल धनायन होता है। ऑर्थो या पैरा स्थिति पर –NO₂ समूह अभिक्रिया को सरल बना देता है; मेटा स्थिति पर ऐसा प्रभाव नहीं होता।
  • बेन्ज़ीन वलय पर हैलोजन निष्क्रियकारी होते हैं, फिर भी ऑर्थो-पैरा निर्देशी होते हैं (अभिक्रियाशीलता पर –I प्रभाव हावी रहता है, स्थिति +R प्रभाव तय करता है)।
  • नामित अभिक्रियाएँ उनके अभिकर्मकों के साथ याद रखें: फ़िंकेलस्टाइन (NaI, शुष्क ऐसीटोन), स्वार्ट्स (AgF, Hg₂F₂, CoF₂ या SbF₃), सैंडमेयर (Cu₂Cl₂/HCl या Cu₂Br₂/HBr), वुर्ट्ज़ (Na, शुष्क ईथर), फ़िटिग, वुर्ट्ज़-फ़िटिग, सैत्ज़ेफ़ विलोपन, ग्रिन्यार अभिकर्मक का निर्माण (Mg, शुष्क ईथर)।

वर्गीकरण और नामकरण

हैलोऐल्केन (haloalkane) में हैलोजन परमाणु sp³ कार्बन पर होता है। हैलोऐरीन (haloarene) में हैलोजन परमाणु सीधे बेन्ज़ीन वलय के sp² कार्बन पर होता है।

हैलोजन परमाणुओं की संख्या के आधार पर वर्गीकरण: मोनो-, डाई-, ट्राई- और पॉलीहैलोजन यौगिक। डाइहैलाइड में एक ही कार्बन पर स्थित दो हैलोजन जेमिनल (gem) और आसन्न कार्बनों पर स्थित हैलोजन विसिनल (vic) कहलाते हैं।

हैलोजन युक्त कार्बन के आधार पर वर्गीकरण:

  • प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°) और तृतीयक (3°) ऐल्किल हैलाइड, जिनमें X से जुड़ा कार्बन क्रमशः एक, दो या तीन अन्य कार्बनों से जुड़ा होता है।
  • ऐलिलिक हैलाइड (allylic halide): X, C=C द्विआबंध के निकट sp³ कार्बन पर होता है, जैसे CH₂=CH–CH₂Cl।
  • बेन्ज़िलिक हैलाइड (benzylic halide): X, बेन्ज़ीन वलय के निकट sp³ कार्बन पर होता है, जैसे C₆H₅CH₂Cl।
  • विनाइलिक हैलाइड (vinylic halide): X, C=C आबंध के sp² कार्बन पर होता है, जैसे CH₂=CHCl।
  • ऐरिल हैलाइड (aryl halide): X बेन्ज़ीन वलय पर होता है, जैसे C₆H₅Cl।
संरचनाIUPAC नामसाधारण नाम
CH₃CH₂CH₂Cl1-क्लोरोप्रोपेनn-प्रोपिल क्लोराइड
CH₃CHBrCH₃2-ब्रोमोप्रोपेनआइसोप्रोपिल ब्रोमाइड
(CH₃)₃CCl2-क्लोरो-2-मेथिलप्रोपेनतृतीयक-ब्यूटिल क्लोराइड
BrCH₂CH₂Br1,2-डाइब्रोमोएथेनएथिलीन डाइब्रोमाइड
CH₂Cl₂डाइक्लोरोमेथेनमेथिलीन क्लोराइड
CHCl₃ट्राइक्लोरोमेथेनक्लोरोफ़ॉर्म
C₆H₅Clक्लोरोबेन्ज़ीनफेनिल क्लोराइड
ऑर्थो-क्लोरोटॉलूईन1-क्लोरो-2-मेथिलबेन्ज़ीनo-क्लोरोटॉलूईन

हैलोऐरीन के साधारण नामों में ऑर्थो (1,2), मेटा (1,3) और पैरा (1,4) का प्रयोग होता है।

C–X आबंध की प्रकृति

हैलोजन कार्बन से अधिक विद्युतऋणात्मक है। C–X आबंध ध्रुवीय होता है; कार्बन पर आंशिक धनावेश (δ⁺) और हैलोजन पर आंशिक ऋणावेश (δ⁻) होता है। F से I की ओर जाने पर परमाणु बड़ा होता जाता है, इसलिए आबंध लंबा और दुर्बल होता जाता है।

आबंधआबंध लंबाई (लगभग)आबंध एन्थैल्पी (लगभग)
C–F139 pm452 kJ mol⁻¹
C–Cl178 pm351 kJ mol⁻¹
C–Br193 pm293 kJ mol⁻¹
C–I214 pm234 kJ mol⁻¹

C–I आबंध सबसे लंबा और सबसे दुर्बल है, इसलिए प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में आयोडाइड सबसे अधिक और फ़्लुओराइड सबसे कम अभिक्रियाशील होते हैं।

भौतिक गुण

  • समान द्रव्यमान वाले ऐल्केनों की तुलना में हैलोऐल्केनों के क्वथनांक अधिक होते हैं क्योंकि इनमें द्विध्रुव-द्विध्रुव और वान डर वाल्स बल प्रबल होते हैं।
  • समान ऐल्किल समूह के लिए क्वथनांक क्रम R–I > R–Br > R–Cl > R–F होता है (बड़ा हैलोजन, बड़ा पृष्ठ और अधिक ध्रुवणता)।
  • समावयवी हैलोऐल्केनों में शाखन बढ़ने पर क्वथनांक घटता है: 1° > 2° > 3°। उदाहरण के लिए 1-क्लोरोब्यूटेन का क्वथनांक 2-क्लोरो-2-मेथिलप्रोपेन से अधिक होता है।
  • कार्बन परमाणुओं की संख्या, हैलोजन परमाणुओं की संख्या और हैलोजन के परमाणु द्रव्यमान के साथ घनत्व बढ़ता है। ब्रोमो, आयोडो और पॉलीक्लोरो यौगिक जल से अधिक सघन होते हैं।
  • हैलोऐल्केन जल में केवल अल्प विलेय होते हैं। हैलोऐल्केन और जल के बीच बनने वाला आकर्षण उन हाइड्रोजन आबंधों से दुर्बल होता है जिन्हें जल में तोड़ना पड़ता है। ये कार्बनिक विलायकों में भली-भाँति घुलते हैं।
  • डाइहैलोबेन्ज़ीन समावयवियों में पैरा समावयवी का गलनांक सबसे अधिक होता है क्योंकि उसकी सममित आकृति क्रिस्टल जालक में अच्छी तरह बैठती है।

हैलोऐल्केनों का विरचन

विधिअभिकर्मक और उदाहरण
ऐल्कोहॉल से HX द्वाराR–OH + HCl (निर्जल ZnCl₂) → R–Cl + H₂O। HBr, NaBr + H₂SO₄ से बनता है। HI, लाल P + I₂ से बनता है। HX की अभिक्रियाशीलता: HI > HBr > HCl। ऐल्कोहॉलों की अभिक्रियाशीलता: 3° > 2° > 1°।
PCl₃ या PCl₅ के साथ3 R–OH + PCl₃ → 3 R–Cl + H₃PO₃; R–OH + PCl₅ → R–Cl + POCl₃ + HCl
थायोनिल क्लोराइड के साथR–OH + SOCl₂ → R–Cl + SO₂ + HCl। यह सर्वोत्तम विधि है क्योंकि दोनों उप-उत्पाद गैसें हैं और उत्पाद शुद्ध मिलता है।
ऐल्केनों का मुक्त मूलक हैलोजनीकरणCH₃CH₃ + Cl₂ (UV या ऊष्मा) → CH₃CH₂Cl + HCl। इससे समावयवियों और पॉलीहैलोजन उत्पादों का मिश्रण बनता है, इसलिए यह विरचन की अच्छी विधि नहीं है।
ऐल्कीनों में HX का योगCH₃CH=CH₂ + HBr → CH₃CHBrCH₃ (मार्कोनिकोव)। परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr का योग प्रति-मार्कोनिकोव होता है: उत्पाद CH₃CH₂CH₂Br है।
ऐल्कीनों में X₂ का योगCH₂=CH₂ + Br₂ → BrCH₂CH₂Br (एक विसिनल डाइब्रोमाइड)।
फ़िंकेलस्टाइन अभिक्रियाR–Cl या R–Br + शुष्क ऐसीटोन में NaI → R–I + NaCl या NaBr। NaCl और NaBr ऐसीटोन में अविलेय हैं, इसलिए अवक्षेपित हो जाते हैं और अभिक्रिया को आगे बढ़ाते हैं।
स्वार्ट्स अभिक्रियाR–Br + AgF → R–F + AgBr। Hg₂F₂, CoF₂ या SbF₃ का भी प्रयोग हो सकता है।

ऐल्केन का प्रत्यक्ष आयोडीनीकरण उत्क्रमणीय है, क्योंकि बना हुआ HI ऐल्किल आयोडाइड को अपचयित कर पुनः ऐल्केन बना देता है। यह केवल HNO₃ या HIO₃ जैसे ऑक्सीकारक की उपस्थिति में होता है, जो HI को नष्ट कर देता है। प्रत्यक्ष फ़्लुओरीनीकरण बहुत तीव्र होता है।

हैलोऐरीनों का विरचन

  • 1. इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन: बेन्ज़ीन + Cl₂ या Br₂, Fe या FeCl₃ (लूइस अम्ल) के साथ → क्लोरोबेन्ज़ीन या ब्रोमोबेन्ज़ीन। टॉलूईन से ऑर्थो और पैरा उत्पादों का मिश्रण बनता है। आयोडीनीकरण के लिए HNO₃ जैसे ऑक्सीकारक की आवश्यकता होती है; फ़्लुओरो यौगिक इस विधि से नहीं बनते।
  • 2. सैंडमेयर अभिक्रिया: बेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम लवण, Cu₂Cl₂/HCl या Cu₂Br₂/HBr से अभिक्रिया कर N₂ मुक्त करते हुए क्लोरोबेन्ज़ीन या ब्रोमोबेन्ज़ीन देता है। Cu चूर्ण और HCl या HBr के साथ (गाटरमान अभिक्रिया) वही उत्पाद बनते हैं, परंतु लब्धि कम होती है।
  • 3. आयोडोबेन्ज़ीन डाइऐज़ोनियम लवण को KI के साथ केवल गर्म करने से बनती है; ताँबे की आवश्यकता नहीं होती।

हैलोऐल्केनों में नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन

नाभिकस्नेही (Nu⁻) हैलाइड आयन को प्रतिस्थापित करता है: R–X + Nu⁻ → R–Nu + X⁻। हैलाइड को निर्गामी समूह (leaving group) कहते हैं।

अभिकर्मकउत्पाद
जलीय KOHऐल्कोहॉल, R–OH
NaOR′ईथर, R–O–R′
KCN (ऐल्कोहॉलीय)नाइट्राइल, R–CN
AgCNआइसोसायनाइड, R–NC
KNO₂ऐल्किल नाइट्राइट, R–O–N=O
AgNO₂नाइट्रोऐल्केन, R–NO₂
NH₃ऐमीन, R–NH₂

सायनाइड और नाइट्राइट आयन उभयदंती नाभिकस्नेही (ambident nucleophile) हैं; ये दो भिन्न परमाणुओं से आक्रमण कर सकते हैं। KCN और KNO₂ मुख्यतः आयनिक हैं, इसलिए आयन का अधिक विद्युतऋणात्मक परमाणु आक्रमण करता है (KCN में सामान्यतः CN⁻ का C; KNO₂ में NO₂⁻ का O), जिससे R–CN और R–ONO बनते हैं। AgCN और AgNO₂ सहसंयोजी हैं, इसलिए N पर स्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म प्रयुक्त होता है और उत्पाद R–NC और R–NO₂ होते हैं।

SN2 (द्विअणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन, substitution nucleophilic bimolecular)

  • एक पद। नाभिकस्नेही निर्गामी समूह के विपरीत पार्श्व से (पश्च-आक्रमण) आक्रमण करता है, एक संक्रमण अवस्था से होकर जिसमें कार्बन आंशिक रूप से Nu और X दोनों से बँधा होता है।
  • वेग = k[R–X][Nu⁻]; कुल मिलाकर द्वितीय कोटि।
  • कार्बन पर विन्यास प्रतिलोमित हो जाता है (वाल्डन प्रतिलोमन), जैसे छाता उलट जाता है।
  • भारी समूह पश्च-आक्रमण को रोकते हैं, इसलिए क्रम CH₃X > 1° > 2° > 3° होता है।

SN1 (एकाणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन, substitution nucleophilic unimolecular)

  • दो पद। पद 1 (मंद, वेग-निर्धारक): R–X → R⁺ + X⁻। पद 2 (तीव्र): R⁺ + Nu⁻ → R–Nu।
  • वेग = k[R–X]; प्रथम कोटि।
  • कार्बोनियम आयन समतलीय होता है, इसलिए नाभिकस्नेही किसी भी फलक से आक्रमण कर सकता है। प्रकाशिक सक्रिय हैलाइड से रेसिमिक मिश्रण बनता है।
  • क्रम 3° > 2° > 1° > CH₃X होता है, जो कार्बोनियम आयन के स्थायित्व (अतिसंयुग्मन और +I प्रभाव) के अनुसार है। ध्रुवीय प्रोटिक विलायक SN1 को अनुकूल बनाते हैं।
  • ऐलिलिक और बेन्ज़िलिक हैलाइड दोनों क्रियाविधियों से तीव्र अभिक्रिया करते हैं क्योंकि उनके कार्बोनियम आयन अनुनाद द्वारा स्थायी होते हैं।
लक्षणSN1SN2
पददोएक
वेग नियमk[RX]k[RX][Nu⁻]
मध्यवर्तीकार्बोनियम आयनकोई नहीं (केवल संक्रमण अवस्था)
त्रिविम रसायनरेसिमीकरणप्रतिलोमन
सर्वोत्तम क्रियाधार3°CH₃X और 1°

समान ऐल्किल समूह के लिए प्रतिस्थापन की दर निर्गामी समूह के क्रम R–I > R–Br > R–Cl > R–F के अनुसार होती है।

त्रिविम रसायन की मूल बातें

  • चार भिन्न समूहों से बँधा कार्बन किरेल (असममित) कार्बन (chiral carbon) कहलाता है। 2-ब्रोमोब्यूटेन, CH₃CHBrCH₂CH₃, में एक किरेल कार्बन होता है।
  • प्रतिबिंबरूप (enantiomer) एक-दूसरे के अध्यारोपण-अयोग्य दर्पण प्रतिबिंब होते हैं। ये समतल-ध्रुवित प्रकाश को समान कोण से विपरीत दिशाओं में घुमाते हैं, दक्षिणावर्त (+) या वामावर्त (–)।
  • रेसिमिक मिश्रण (racemic mixture) में दोनों प्रतिबिंबरूप बराबर मात्रा में होते हैं। यह प्रकाशिक निष्क्रिय होता है क्योंकि घूर्णन एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं (बाह्य प्रतिकारण)।
  • विन्यास की धारण (retention) का अर्थ है कि अभिक्रिया के दौरान त्रिविम केंद्र के चारों ओर का स्थानिक विन्यास अपरिवर्तित रहता है (उस कार्बन से कोई आबंध नहीं टूटता)। प्रतिलोमन (inversion) का अर्थ है कि विन्यास विपरीत हो जाता है। ये शब्द केवल ज्यामिति बताते हैं; ये यह नहीं बताते कि घूर्णन का चिह्न (+) से (–) में बदलता है या नहीं।

विलोपन और धातुओं के साथ अभिक्रियाएँ

विलोपन (विहाइड्रोहैलोजनीकरण)। β-हाइड्रोजन युक्त हैलोऐल्केन को ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म करने पर आसन्न कार्बनों से H और X निकल जाते हैं और ऐल्कीन बनती है। जलीय KOH प्रतिस्थापन को और ऐल्कोहॉलीय KOH विलोपन को अनुकूल बनाता है।

सैत्ज़ेफ़ (ज़ैत्सेव) नियम (Saytzeff rule)। जब एक से अधिक ऐल्कीन बन सकती हों, तो अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन मुख्य उत्पाद होती है। 2-ब्रोमोब्यूटेन + ऐल्कोहॉलीय KOH → ब्यूट-2-ईन (मुख्य) + ब्यूट-1-ईन (गौण)।

ग्रिन्यार अभिकर्मक। R–X + Mg (शुष्क ईथर) → R–MgX। नमी का अभाव आवश्यक है, क्योंकि RMgX + H₂O → R–H + Mg(OH)X। Mg से जुड़ा कार्बन कार्बऋणायन की भाँति व्यवहार करता है।

वुर्ट्ज़ अभिक्रिया। 2 R–X + 2 Na (शुष्क ईथर) → R–R + 2 NaX। उदाहरण: 2 CH₃Br + 2 Na → CH₃CH₃ + 2 NaBr।

हैलोऐरीनों की अभिक्रियाएँ

नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन में कम अभिक्रियाशीलता। तीन कारण:

  • 1. अनुनाद: हैलोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म वलय में विस्थानित हो जाता है, जिससे C–X आबंध में आंशिक द्विआबंध लक्षण आ जाता है। क्लोरोबेन्ज़ीन में C–Cl आबंध लगभग 169 pm का है, जो क्लोरोमेथेन के लगभग 177 pm से छोटा है, इसलिए इसे तोड़ना कठिन है।
  • 2. कार्बन sp² संकरित है। यह sp³ कार्बन से अधिक विद्युतऋणात्मक है, इसलिए आबंध युग्म को अधिक कसकर पकड़े रखता है।
  • 3. फेनिल धनायन अनुनाद द्वारा स्थायी नहीं होता, इसलिए SN1 संभव नहीं है; इलेक्ट्रॉन-समृद्ध वलय SN2 में आने वाले नाभिकस्नेही को प्रतिकर्षित भी करता है।

क्लोरोबेन्ज़ीन केवल कठोर परिस्थितियों में फ़ीनॉल देती है: जलीय NaOH, 623 K और 300 atm, फिर अम्लीकरण।

–NO₂ समूह का प्रभाव। ऑर्थो या पैरा स्थिति पर –NO₂ समूह इलेक्ट्रॉन खींचता है और ऋणावेशित मध्यवर्ती को अनुनाद द्वारा स्थायी करता है, इसलिए प्रतिस्थापन सरल हो जाता है।

यौगिकजलीय NaOH या जल के साथ अभिक्रिया की परिस्थिति
क्लोरोबेन्ज़ीन623 K, 300 atm
1-क्लोरो-4-नाइट्रोबेन्ज़ीनलगभग 443 K
1-क्लोरो-2,4-डाइनाइट्रोबेन्ज़ीन368 K
1-क्लोरो-2,4,6-ट्राइनाइट्रोबेन्ज़ीनगुनगुना जल; उत्पाद 2,4,6-ट्राइनाइट्रोफ़ीनॉल (पिक्रिक अम्ल) है

मेटा स्थिति पर –NO₂ समूह यह अनुनाद स्थायित्व नहीं देता, इसलिए वह अभिक्रिया में उसी प्रकार सहायक नहीं होता।

इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन। हैलोजन प्रेरणिक प्रभाव से इलेक्ट्रॉन खींचता है, इसलिए वलय बेन्ज़ीन से कम अभिक्रियाशील (निष्क्रियित) होता है। इसका एकाकी युग्म अनुनाद द्वारा ऑर्थो और पैरा स्थितियों को दान होता है, इसलिए आने वाला समूह मुख्यतः ऑर्थो और पैरा पर जाता है। उदाहरण: क्लोरोबेन्ज़ीन का क्लोरीनीकरण, नाइट्रीकरण, सल्फोनीकरण और फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रियाएँ मुख्यतः पैरा और कुछ ऑर्थो उत्पाद देती हैं; पैरा समावयवी मुख्य होता है।

फ़िटिग अभिक्रिया। 2 Ar–X + 2 Na (शुष्क ईथर) → Ar–Ar + 2 NaX। ब्रोमोबेन्ज़ीन के दो अणु बाइफेनिल देते हैं।

वुर्ट्ज़-फ़िटिग अभिक्रिया। Ar–X + R–X + 2 Na (शुष्क ईथर) → Ar–R + 2 NaX। ब्रोमोबेन्ज़ीन + CH₃Br + 2 Na → टॉलूईन + 2 NaBr।

ग्रिन्यार अभिकर्मक। ब्रोमोबेन्ज़ीन + Mg (शुष्क ईथर) → C₆H₅MgBr; जल के साथ यह बेन्ज़ीन देता है।

पॉलीहैलोजन यौगिक

यौगिकउपयोगहानिकारक प्रभाव या टिप्पणी
डाइक्लोरोमेथेन (CH₂Cl₂)विलायक, पेंट हटाने वाला, ऐरोसॉल प्रणोदक, धातु की सफ़ाईउच्च स्तर के संपर्क में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को हानि पहुँचाता है; त्वचा और आँखों को उत्तेजित करता है
क्लोरोफ़ॉर्म (CHCl₃)वसा और तेलों का विलायक, पहले निश्चेतक, प्रशीतक का कच्चा मालप्रकाश में वायु द्वारा ऑक्सीकृत होकर विषैली फ़ॉस्जीन (COCl₂) बनाता है; गहरे भूरे, पूरी तरह भरे बोतलों में रखा जाता है; यकृत को हानि पहुँचाता है
आयोडोफ़ॉर्म (CHI₃)प्रतिरोधी (antiseptic)मुक्त आयोडीन निकालकर कार्य करता है; विशिष्ट गंध वाला पीला ठोस
टेट्राक्लोरोमेथेन (CCl₄)प्रशीतक और प्रणोदक बनाना, अग्निशामक, सफ़ाई का विलायकयकृत को हानि पहुँचाता है; ओज़ोन परत को हानि पहुँचाता है
फ़्रेऑन (क्लोरोफ़्लुओरोकार्बन, जैसे CCl₂F₂)प्रशीतक, ऐरोसॉल प्रणोदकसमताप मंडल में क्लोरीन परमाणु मुक्त करते हैं जो ओज़ोन को नष्ट करते हैं
DDT (p,p′-डाइक्लोरोडाइफेनिलट्राइक्लोरोएथेन)मच्छरों और फ़सल कीटों के विरुद्ध कीटनाशकउपापचयित नहीं होता, वसीय ऊतक में संचित होता है, मछलियों और पक्षियों को हानि पहुँचाता है; कई देशों में इसका प्रयोग प्रतिबंधित है

NEET के जाल

  • 1. नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन में क्लोरोबेन्ज़ीन, क्लोरोमेथेन से कम अभिक्रियाशील होती है, अधिक नहीं।
  • 2. SN2 प्रतिलोमन का अर्थ यह नहीं कि घूर्णन का चिह्न सदैव (+) से (–) में बदल जाए। प्रतिलोमन ज्यामिति का वर्णन करता है।
  • 3. SN1 से रेसिमीकरण तभी होता है जब हैलाइड प्रकाशिक सक्रिय हो और कार्बन किरेल हो; जो 3° हैलाइड किरेल नहीं है, उसमें कोई त्रिविम परिवर्तन दिखाई नहीं देता।
  • 4. KCN से R–CN बनता है लेकिन AgCN से R–NC; KNO₂ से R–ONO बनता है लेकिन AgNO₂ से R–NO₂।
  • 5. जलीय KOH से ऐल्कोहॉल बनता है (प्रतिस्थापन); ऐल्कोहॉलीय KOH से ऐल्कीन बनती है (विलोपन)।
  • 6. हैलोजन वलय को निष्क्रिय करते हैं फिर भी ऑर्थो-पैरा निर्देशी होते हैं। इन्हें मेटा निर्देशी न कहें।
  • 7. मेटा –NO₂ समूह क्लोरोबेन्ज़ीन को नाभिकस्नेही आक्रमण के प्रति सक्रिय नहीं करता; ऑर्थो और पैरा करते हैं।
  • 8. फ़िंकेलस्टाइन अभिक्रिया में विलायक शुष्क ऐसीटोन होना चाहिए; अवक्षेपित NaCl या NaBr अभिक्रिया को आगे बढ़ाता है।
  • 9. ऐल्केन का मुक्त मूलक क्लोरीनीकरण स्वच्छ विरचन नहीं है क्योंकि अनेक उत्पाद बनते हैं।
  • 10. HBr का प्रति-मार्कोनिकोव योग परॉक्साइड माँगता है; HCl और HI उसी प्रकार परॉक्साइड प्रभाव नहीं दिखाते।

एक पंक्ति में

  • 1. C–X आबंध में कार्बन δ⁺ और हैलोजन δ⁻ होता है।
  • 2. आबंध लंबाई क्रम: C–F < C–Cl < C–Br < C–I।
  • 3. आबंध एन्थैल्पी क्रम: C–F > C–Cl > C–Br > C–I।
  • 4. समान ऐल्किल समूह के लिए क्वथनांक क्रम: RI > RBr > RCl > RF।
  • 5. समावयवी हैलोऐल्केनों में शाखन बढ़ने पर क्वथनांक घटता है।
  • 6. ऐल्कोहॉल को क्लोरोऐल्केन में बदलने के लिए थायोनिल क्लोराइड को वरीयता दी जाती है क्योंकि उप-उत्पाद गैसें हैं।
  • 7. स्वार्ट्स अभिक्रिया ऐल्किल फ़्लुओराइड बनाती है।
  • 8. सैंडमेयर अभिक्रिया में डाइऐज़ोनियम लवण के साथ क्यूप्रस हैलाइड प्रयुक्त होता है।
  • 9. SN2 द्वितीय कोटि बलगतिकी और वाल्डन प्रतिलोमन दिखाता है।
  • 10. SN1 प्रथम कोटि बलगतिकी और रेसिमीकरण दिखाता है।
  • 11. सैत्ज़ेफ़ नियम के अनुसार अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन मुख्य उत्पाद होती है।
  • 12. ग्रिन्यार अभिकर्मक शुष्क ईथर में ही बनाना चाहिए।
  • 13. फ़िटिग अभिक्रिया दो ऐरिल हैलाइडों को जोड़ती है; वुर्ट्ज़-फ़िटिग ऐरिल हैलाइड को ऐल्किल हैलाइड से जोड़ती है।
  • 14. फ़ॉस्जीन बनने से रोकने के लिए क्लोरोफ़ॉर्म गहरे भूरे बोतलों में रखा जाता है।
  • 15. DDT और फ़्रेऑन पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं; DDT वसा में संचित होता है और फ़्रेऑन ओज़ोन का क्षय करते हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. किस अभिकर्मक से एथेनॉल (ethanol) क्लोरोएथेन (chloroethane) में बदलता है और उप-उत्पाद केवल गैसें होती हैं?

    1. निर्जल ZnCl₂ के साथ HCl
    2. SOCl₂
    3. PCl₃
    4. PCl₅
    उत्तर

    B. SOCl₂

    SOCl₂ से SO₂ और HCl बनते हैं, दोनों गैसें हैं, इसलिए क्लोरोऐल्केन शुद्ध रूप में मिलता है।

    Which reagent converts ethanol into chloroethane with only gaseous by-products?

    1. HCl with anhydrous ZnCl₂
    2. SOCl₂
    3. PCl₃
    4. PCl₅
  2. शुष्क ऐसीटोन में CH₃Br की NaI के साथ फ़िंकेलस्टाइन अभिक्रिया (Finkelstein reaction) में जो ठोस पृथक होता है, वह है

    1. NaI
    2. AgBr
    3. CH₃I
    4. NaBr
    उत्तर

    D. NaBr

    NaBr शुष्क ऐसीटोन में अविलेय है और अवक्षेपित हो जाता है, जिससे अभिक्रिया आगे बढ़ती है।

    In the Finkelstein reaction of CH₃Br with NaI in dry acetone, the solid that separates out is

    1. NaI
    2. AgBr
    3. CH₃I
    4. NaBr
  3. स्वार्ट्स अभिक्रिया (Swarts reaction) में ऐल्किल ब्रोमाइड को ऐल्किल फ़्लुओराइड में बदलने के लिए किस अभिकर्मक का प्रयोग होता है?

    1. AgF
    2. KCN
    3. शुष्क ऐसीटोन में NaI
    4. Cu₂Cl₂
    उत्तर

    A. AgF

    स्वार्ट्स अभिक्रिया में AgF, Hg₂F₂, CoF₂ या SbF₃ जैसे धात्विक फ़्लुओराइड का प्रयोग होता है।

    Which reagent is used in the Swarts reaction to convert an alkyl bromide into an alkyl fluoride?

    1. AgF
    2. KCN
    3. NaI in dry acetone
    4. Cu₂Cl₂
  4. बेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड को Cu₂Cl₂ और HCl के साथ गर्म करने पर क्लोरोबेन्ज़ीन प्राप्त होती है। इस अभिक्रिया को कहते हैं

    1. स्वार्ट्स अभिक्रिया
    2. फ़िंकेलस्टाइन अभिक्रिया
    3. सैंडमेयर अभिक्रिया (Sandmeyer reaction)
    4. वुर्ट्ज़-फ़िटिग अभिक्रिया
    उत्तर

    C. सैंडमेयर अभिक्रिया (Sandmeyer reaction)

    क्यूप्रस क्लोराइड द्वारा डाइऐज़ोनियम समूह का Cl से प्रतिस्थापन सैंडमेयर अभिक्रिया है।

    Chlorobenzene is obtained from benzenediazonium chloride by heating with Cu₂Cl₂ and HCl. This reaction is called the

    1. Swarts reaction
    2. Finkelstein reaction
    3. Sandmeyer reaction
    4. Wurtz-Fittig reaction
  5. CH₃CH₂Cl, CH₃CH₂Br, CH₃CH₂I और CH₃CH₂F में नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन सबसे तेज़ किसमें होता है?

    1. CH₃CH₂Cl
    2. CH₃CH₂I
    3. CH₃CH₂Br
    4. CH₃CH₂F
    उत्तर

    B. CH₃CH₂I

    I⁻ सर्वोत्तम निर्गामी समूह है क्योंकि C–I आबंध सबसे दुर्बल है।

    Among CH₃CH₂Cl, CH₃CH₂Br, CH₃CH₂I and CH₃CH₂F, the fastest nucleophilic substitution is shown by

    1. CH₃CH₂Cl
    2. CH₃CH₂I
    3. CH₃CH₂Br
    4. CH₃CH₂F
  6. निम्नलिखित क्लोराइडों की SN2 अभिक्रिया के प्रति अभिक्रियाशीलता का सही क्रम है

    1. CH₃Cl < CH₃CH₂Cl < (CH₃)₂CHCl < (CH₃)₃CCl
    2. (CH₃)₂CHCl < (CH₃)₃CCl < CH₃Cl < CH₃CH₂Cl
    3. CH₃CH₂Cl < CH₃Cl < (CH₃)₃CCl < (CH₃)₂CHCl
    4. (CH₃)₃CCl < (CH₃)₂CHCl < CH₃CH₂Cl < CH₃Cl
    उत्तर

    D. (CH₃)₃CCl < (CH₃)₂CHCl < CH₃CH₂Cl < CH₃Cl

    SN2 अभिक्रियाशीलता त्रिविम अवरोध बढ़ने के साथ घटती है: CH₃Cl > 1° > 2° > 3°।

    The correct order of reactivity of the following chlorides towards SN2 reaction is

    1. CH₃Cl < CH₃CH₂Cl < (CH₃)₂CHCl < (CH₃)₃CCl
    2. (CH₃)₂CHCl < (CH₃)₃CCl < CH₃Cl < CH₃CH₂Cl
    3. CH₃CH₂Cl < CH₃Cl < (CH₃)₃CCl < (CH₃)₂CHCl
    4. (CH₃)₃CCl < (CH₃)₂CHCl < CH₃CH₂Cl < CH₃Cl
  7. 2-ब्रोमोब्यूटेन को ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म करने पर मुख्यतः बनता है

    1. ब्यूट-2-ईन
    2. ब्यूटेन-2-ऑल
    3. ब्यूटेन
    4. ब्यूट-1-ईन
    उत्तर

    A. ब्यूट-2-ईन

    सैत्ज़ेफ़ नियम (Saytzeff rule) के अनुसार अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन, ब्यूट-2-ईन, मुख्य उत्पाद है।

    Heating 2-bromobutane with alcoholic KOH gives mainly

    1. but-2-ene
    2. butan-2-ol
    3. butane
    4. but-1-ene
  8. ऐल्किल हैलाइड को मैग्नीशियम के साथ किसमें अभिकृत करने पर ग्रिन्यार अभिकर्मक (Grignard reagent) बनता है?

    1. जलीय एथेनॉल
    2. तनु HCl
    3. शुष्क ईथर
    4. जल
    उत्तर

    C. शुष्क ईथर

    अभिक्रिया के लिए नमी-रहित ईथर चाहिए क्योंकि RMgX जल से नष्ट हो जाता है।

    A Grignard reagent is prepared by treating an alkyl halide with magnesium in

    1. aqueous ethanol
    2. dilute HCl
    3. dry ether
    4. water
  9. एथिल ब्रोमाइड की AgNO₂ से अभिक्रिया पर मुख्यतः बनता है

    1. CH₂=CH₂
    2. CH₃CH₂OH
    3. CH₃CH₂NO₂
    4. CH₃CH₂ONO
    उत्तर

    C. CH₃CH₂NO₂

    AgNO₂ सहसंयोजी है; N पर स्थित एकाकी युग्म आक्रमण करता है, जिससे नाइट्रोऐल्केन CH₃CH₂NO₂ बनता है।

    Ethyl bromide reacts with AgNO₂ to give mainly

    1. CH₂=CH₂
    2. CH₃CH₂OH
    3. CH₃CH₂NO₂
    4. CH₃CH₂ONO
  10. एथिल ब्रोमाइड की AgCN से अभिक्रिया पर मुख्यतः बनता है

    1. CH₃CH₂NC
    2. CH₃CH₂OH
    3. CH₃CH₂CN
    4. CH₃CH₂NH₂
    उत्तर

    A. CH₃CH₂NC

    AgCN सहसंयोजी है, इसलिए N आक्रमण करता है और आइसोसायनाइड CH₃CH₂NC बनता है (KCN से CH₃CH₂CN बनता)।

    Ethyl bromide reacts with AgCN to give mainly

    1. CH₃CH₂NC
    2. CH₃CH₂OH
    3. CH₃CH₂CN
    4. CH₃CH₂NH₂
  11. क्लोरोफ़ॉर्म (chloroform) को गहरे भूरे बोतलों में किनारे तक भरकर रखा जाता है ताकि वायु और प्रकाश द्वारा उसके धीमे ऑक्सीकरण से निम्न न बने

    1. डाइक्लोरोमेथेन
    2. फ़ॉस्जीन (phosgene)
    3. कार्बन टेट्राक्लोराइड
    4. फ़ॉर्मेल्डिहाइड
    उत्तर

    B. फ़ॉस्जीन (phosgene)

    वायु और प्रकाश CHCl₃ को विषैली गैस फ़ॉस्जीन, COCl₂, में ऑक्सीकृत कर देते हैं।

    Chloroform is stored in dark brown bottles filled to the brim to prevent its slow oxidation by air and light to

    1. dichloromethane
    2. phosgene
    3. carbon tetrachloride
    4. formaldehyde
  12. ट्राइआयोडोमेथेन का उपयोग किस रूप में होता है?

    1. निश्चेतक
    2. प्रशीतक
    3. कीटनाशक
    4. प्रतिरोधी (antiseptic)
    उत्तर

    D. प्रतिरोधी (antiseptic)

    CHI₃ मुक्त आयोडीन निकालता है और प्रतिरोधी के रूप में कार्य करता है।

    Triiodomethane is used as an

    1. anaesthetic
    2. refrigerant
    3. insecticide
    4. antiseptic
  13. दो प्रतिबिंबरूपों (enantiomers) का सममोलर मिश्रण होता है

    1. प्रकाशिक सक्रिय और दक्षिणधूर्णी
    2. प्रकाशिक सक्रिय और वामधूर्णी
    3. प्रकाशिक निष्क्रिय और रेसिमिक मिश्रण कहलाता है
    4. प्रकाशिक निष्क्रिय क्योंकि यह मीसो यौगिक है
    उत्तर

    C. प्रकाशिक निष्क्रिय और रेसिमिक मिश्रण कहलाता है

    बराबर और विपरीत घूर्णन एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं, इसलिए रेसिमिक मिश्रण प्रकाशिक निष्क्रिय होता है।

    An equimolar mixture of two enantiomers is

    1. optically active and dextrorotatory
    2. optically active and laevorotatory
    3. optically inactive and called a racemic mixture
    4. optically inactive because it is a meso compound
  14. निम्नलिखित में से किस आबंध की लंबाई सबसे अधिक है?

    1. C–I
    2. C–Cl
    3. C–Br
    4. C–F
    उत्तर

    A. C–I

    समूह में नीचे जाने पर आबंध लंबाई बढ़ती है: C–I सबसे लंबा है।

    Which of the following bonds has the greatest length?

    1. C–I
    2. C–Cl
    3. C–Br
    4. C–F
  15. ब्रोमोबेन्ज़ीन, ब्रोमोमेथेन और सोडियम की शुष्क ईथर में अभिक्रिया से मुख्यतः बनता है

    1. बेन्ज़ीन
    2. टॉलूईन
    3. एथेन
    4. बाइफेनिल
    उत्तर

    B. टॉलूईन

    यह वुर्ट्ज़-फ़िटिग अभिक्रिया है, जो ऐरिल और ऐल्किल समूह को जोड़ती है: C₆H₅CH₃।

    Bromobenzene, bromomethane and sodium in dry ether react to give mainly

    1. benzene
    2. toluene
    3. ethane
    4. biphenyl
  16. निम्नलिखित समावयवी क्लोराइडों में से किसका क्वथनांक सबसे अधिक है?

    1. 2-क्लोरोब्यूटेन
    2. 1-क्लोरो-2-मेथिलप्रोपेन
    3. 2-क्लोरो-2-मेथिलप्रोपेन
    4. 1-क्लोरोब्यूटेन
    उत्तर

    D. 1-क्लोरोब्यूटेन

    सीधी श्रृंखला वाले समावयवियों में पृष्ठ संपर्क अधिक होता है; शाखन से क्वथनांक घटता है, इसलिए 1-क्लोरोब्यूटेन का क्वथनांक सबसे अधिक है।

    Which of the following isomeric chlorides has the highest boiling point?

    1. 2-chlorobutane
    2. 1-chloro-2-methylpropane
    3. 2-chloro-2-methylpropane
    4. 1-chlorobutane
  17. नीचे दो कथन दिए गए हैं। कथन I: SN1 द्वारा अभिक्रिया करने वाला प्रकाशिक सक्रिय हैलाइड रेसिमिक मिश्रण देता है। कथन II: SN2 अभिक्रियाएँ विन्यास के प्रतिलोमन के साथ होती हैं।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    A. कथन I और कथन II दोनों सही हैं

    SN1 में समतलीय कार्बोनियम आयन पर दोनों फलकों से आक्रमण होता है; SN2 में पश्च-आक्रमण से विन्यास प्रतिलोमित हो जाता है। दोनों सही हैं।

    Given below are two statements. Statement I: An optically active halide reacting by SN1 gives a racemic mixture. Statement II: SN2 reactions proceed with inversion of configuration.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  18. नीचे दो कथन दिए गए हैं। कथन I: नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति क्लोरोबेन्ज़ीन, क्लोरोमेथेन से अधिक अभिक्रियाशील है। कथन II: क्लोरोबेन्ज़ीन में C–Cl आबंध में आंशिक द्विआबंध लक्षण होता है।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    D. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है

    अनुनाद के कारण क्लोरोबेन्ज़ीन बहुत कम अभिक्रियाशील है, इसलिए कथन I गलत है; कथन II सही है।

    Given below are two statements. Statement I: Chlorobenzene is more reactive than chloromethane towards nucleophilic substitution. Statement II: The C–Cl bond in chlorobenzene has partial double bond character.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  19. नीचे दो कथन दिए गए हैं। कथन I: C–F से C–I की ओर C–X आबंध एन्थैल्पी घटती है। कथन II: हैलोऐल्केनों में नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति C–F आबंध सबसे अधिक अभिक्रियाशील है।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    C. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है

    पहला सही है; C–F सबसे प्रबल आबंध है और सबसे कम अभिक्रियाशील है, इसलिए II गलत है।

    Given below are two statements. Statement I: C–X bond enthalpy decreases from C–F to C–I. Statement II: Among haloalkanes, the C–F bond is the most reactive in nucleophilic substitution.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  20. नीचे दो कथन दिए गए हैं। कथन I: हैलोऐल्केन जल में सरलता से घुलते हैं क्योंकि वे जल के साथ हाइड्रोजन आबंध बनाते हैं। कथन II: समान आण्विक द्रव्यमान वाले ऐल्केनों की तुलना में हैलोऐल्केनों के क्वथनांक अधिक होते हैं।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    D. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है

    हैलोऐल्केन जल के साथ हाइड्रोजन आबंध नहीं बना सकते और केवल अल्प विलेय हैं; द्विध्रुव-द्विध्रुव बलों के कारण II सही है।

    Given below are two statements. Statement I: Haloalkanes dissolve readily in water because they form hydrogen bonds with water. Statement II: Haloalkanes have higher boiling points than alkanes of comparable molecular mass.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  21. निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. फ़िंकेलस्टाइन अभिक्रिया द्वारा ऐल्किल क्लोराइडों से ऐल्किल आयोडाइड बनाए जा सकते हैं। 2. स्वार्ट्स अभिक्रिया द्वारा ऐल्किल फ़्लुओराइड बनाए जा सकते हैं। 3. केवल I₂ द्वारा ऐल्केनों का प्रत्यक्ष आयोडीनीकरण ऐल्किल आयोडाइड बनाने की दक्ष विधि है।

    1. 1 और 2 केवल
    2. 1 और 3 केवल
    3. 2 और 3 केवल
    4. 1, 2 और 3
    उत्तर

    A. 1 और 2 केवल

    कथन 1 और 2 सही हैं। केवल I₂ से आयोडीनीकरण उत्क्रमणीय है क्योंकि HI उत्पाद को अपचयित कर देता है, इसलिए 3 गलत है।

    Which of the following statements are correct? 1. Alkyl iodides can be prepared from alkyl chlorides by the Finkelstein reaction. 2. Alkyl fluorides can be prepared by the Swarts reaction. 3. Direct iodination of alkanes with I₂ alone is an efficient method of preparing alkyl iodides.

    1. 1 and 2 only
    2. 1 and 3 only
    3. 2 and 3 only
    4. 1, 2 and 3
  22. नीचे दो कथन दिए गए हैं। कथन I: मेटा स्थिति पर –NO₂ समूह जलीय NaOH द्वारा नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति क्लोरोबेन्ज़ीन की अभिक्रियाशीलता बढ़ाता है। कथन II: मेटा –NO₂ समूह मध्यवर्ती के ऋणावेश को अनुनाद द्वारा स्थायी करता है।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    B. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं

    केवल ऑर्थो और पैरा –NO₂ समूह ऋणावेश को विस्थानित कर सकते हैं; मेटा नहीं कर सकता। दोनों कथन गलत हैं।

    Given below are two statements. Statement I: A –NO₂ group at the meta position increases the reactivity of chlorobenzene towards nucleophilic substitution by aqueous NaOH. Statement II: A meta –NO₂ group stabilises the negative charge of the intermediate by resonance.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  23. निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. फ़्रेऑन ओज़ोन परत का क्षय करते हैं। 2. DDT शरीर में सरलता से विघटित हो जाता है और संचित नहीं होता। 3. टेट्राक्लोरोमेथेन यकृत को हानि पहुँचा सकता है।

    1. 1 और 2 केवल
    2. 1 और 3 केवल
    3. 2 और 3 केवल
    4. 1, 2 और 3
    उत्तर

    B. 1 और 3 केवल

    DDT उपापचयित नहीं होता और वसीय ऊतक में संचित होता है, इसलिए 2 गलत है; 1 और 3 सही हैं।

    Which of the following statements are correct? 1. Freons deplete the ozone layer. 2. DDT is readily broken down in the body and does not accumulate. 3. Tetrachloromethane can damage the liver.

    1. 1 and 2 only
    2. 1 and 3 only
    3. 2 and 3 only
    4. 1, 2 and 3
  24. नीचे दो कथन दिए गए हैं। कथन I: ग्रिन्यार अभिकर्मक जल से अभिक्रिया करके ऐल्केन बनाता है। कथन II: ग्रिन्यार अभिकर्मक जलीय विलयन में सर्वोत्तम रूप से बनता है।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    C. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है

    RMgX + H₂O → RH + Mg(OH)X, इसलिए I सही है; इसे शुष्क ईथर में बनाना चाहिए, इसलिए II गलत है।

    Given below are two statements. Statement I: A Grignard reagent reacts with water to form an alkane. Statement II: A Grignard reagent is best prepared in aqueous solution.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  25. नीचे दो कथन दिए गए हैं। कथन I: (+)-2-ब्रोमोब्यूटेन की SN2 अभिक्रिया सदैव (–) उत्पाद देती है। कथन II: विन्यास का प्रतिलोमन स्थानिक विन्यास का वर्णन करता है और ध्रुवण घूर्णन का चिह्न नहीं बताता।

    1. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
    2. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
    3. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
    4. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
    उत्तर

    D. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है

    घूर्णन का चिह्न प्रतिलोमन या धारण से अनुमानित नहीं होता। कथन I गलत है, II सही है।

    Given below are two statements. Statement I: An SN2 reaction of (+)-2-bromobutane always gives a (–) product. Statement II: Inversion of configuration describes the spatial arrangement and does not predict the sign of optical rotation.

    1. Both Statement I and Statement II are correct
    2. Both Statement I and Statement II are incorrect
    3. Statement I is correct but Statement II is incorrect
    4. Statement I is incorrect but Statement II is correct
  26. अभिकथन (A): तृतीयक-ब्यूटिल ब्रोमाइड, मेथिल ब्रोमाइड से तेज़ SN1 अभिक्रिया करता है। कारण (R): तृतीयक-ब्यूटिल कार्बोनियम आयन तीन मेथिल समूहों के अतिसंयुग्मन और +I प्रभाव से स्थायी होता है।

    1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
    2. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
    3. A सत्य है लेकिन R असत्य है
    4. A असत्य है लेकिन R सत्य है
    उत्तर

    A. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है

    कार्बोनियम आयन का अधिक स्थायित्व तेज़ SN1 की व्याख्या करता है।

    Assertion (A): tert-Butyl bromide undergoes SN1 reaction faster than methyl bromide. Reason (R): The tert-butyl carbocation is stabilised by hyperconjugation and the +I effect of three methyl groups.

    1. Both A and R are true and R is the correct explanation of A
    2. Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
    3. A is true but R is false
    4. A is false but R is true
  27. अभिकथन (A): ऐल्किल हैलाइडों के क्वथनांक का क्रम RI > RBr > RCl है। कारण (R): ऐल्किल हैलाइड ध्रुवीय यौगिक हैं।

    1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
    2. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
    3. A सत्य है लेकिन R असत्य है
    4. A असत्य है लेकिन R सत्य है
    उत्तर

    B. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है

    दोनों सत्य हैं, परंतु यह क्रम बढ़ते आकार और वान डर वाल्स बलों से आता है, केवल ध्रुवता से नहीं।

    Assertion (A): The boiling points of alkyl halides follow the order RI > RBr > RCl. Reason (R): Alkyl halides are polar compounds.

    1. Both A and R are true and R is the correct explanation of A
    2. Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
    3. A is true but R is false
    4. A is false but R is true
  28. अभिकथन (A): एथिल क्लोराइड को ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म करने पर एथीन बनती है। कारण (R): ऐल्कोहॉलीय KOH प्रतिस्थापन को अनुकूल बनाता है और मुख्य उत्पाद एथेनॉल होता है।

    1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
    2. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
    3. A सत्य है लेकिन R असत्य है
    4. A असत्य है लेकिन R सत्य है
    उत्तर

    C. A सत्य है लेकिन R असत्य है

    A सत्य है; ऐल्कोहॉलीय KOH विलोपन को अनुकूल बनाता है, इसलिए R असत्य है।

    Assertion (A): Ethyl chloride on heating with alcoholic KOH gives ethene. Reason (R): Alcoholic KOH favours substitution to give ethanol as the main product.

    1. Both A and R are true and R is the correct explanation of A
    2. Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
    3. A is true but R is false
    4. A is false but R is true
  29. अभिकथन (A): क्लोरोबेन्ज़ीन में हैलोजन परमाणु इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति वलय को सक्रिय करते हैं। कारण (R): हैलोजन प्रेरणिक प्रभाव से इलेक्ट्रॉन खींचते हैं।

    1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
    2. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
    3. A सत्य है लेकिन R असत्य है
    4. A असत्य है लेकिन R सत्य है
    उत्तर

    D. A असत्य है लेकिन R सत्य है

    हैलोजन वलय को निष्क्रिय करते हैं, इसलिए A असत्य है; R सत्य है।

    Assertion (A): Halogen atoms in chlorobenzene activate the ring towards electrophilic substitution. Reason (R): Halogens withdraw electrons by the inductive effect.

    1. Both A and R are true and R is the correct explanation of A
    2. Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
    3. A is true but R is false
    4. A is false but R is true
  30. अभिकथन (A): हैलोऐल्केनों की SN1 अभिक्रियाएँ ध्रुवीय प्रोटिक विलायकों द्वारा अनुकूलित होती हैं। कारण (R): SN1 अभिक्रियाएँ दो पदों में होती हैं।

    1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
    2. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
    3. A सत्य है लेकिन R असत्य है
    4. A असत्य है लेकिन R सत्य है
    उत्तर

    B. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है

    दोनों सत्य हैं; वास्तविक कारण आयनों का विलायक द्वारा स्थायीकरण है, इसलिए R, A की व्याख्या नहीं करता।

    Assertion (A): SN1 reactions of haloalkanes are favoured by polar protic solvents. Reason (R): SN1 reactions occur in two steps.

    1. Both A and R are true and R is the correct explanation of A
    2. Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
    3. A is true but R is false
    4. A is false but R is true
  31. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. फ़िंकेलस्टाइन अभिक्रिया b. स्वार्ट्स अभिक्रिया c. सैंडमेयर अभिक्रिया d. वुर्ट्ज़ अभिक्रिया सूची II: i. शुष्क ईथर में 2 R–X + 2 Na → R–R ii. ArN₂⁺Cl⁻ + Cu₂Cl₂ → ArCl iii. शुष्क ऐसीटोन में R–Cl + NaI iv. R–Br + AgF

    1. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
    2. a-ii, b-i, c-iv, d-iii
    3. a-iii, b-iv, c-ii, d-i
    4. a-iv, b-iii, c-i, d-ii
    उत्तर

    C. a-iii, b-iv, c-ii, d-i

    फ़िंकेलस्टाइन-NaI/ऐसीटोन (iii); स्वार्ट्स-धात्विक फ़्लुओराइड (iv); सैंडमेयर-Cu₂Cl₂ (ii); वुर्ट्ज़-Na/ईथर (i)।

    Match List I with List II. List I: a. Finkelstein reaction b. Swarts reaction c. Sandmeyer reaction d. Wurtz reaction List II: i. 2 R–X + 2 Na in dry ether → R–R ii. ArN₂⁺Cl⁻ + Cu₂Cl₂ → ArCl iii. R–Cl + NaI in dry acetone iv. R–Br + AgF

    1. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
    2. a-ii, b-i, c-iv, d-iii
    3. a-iii, b-iv, c-ii, d-i
    4. a-iv, b-iii, c-i, d-ii
  32. CH₃CH₂Br के साथ सूची I के अभिकर्मक को सूची II के मुख्य उत्पाद से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. जलीय KOH b. ऐल्कोहॉलीय KOH c. KCN d. AgNO₂ सूची II: i. CH₃CH₂NO₂ ii. CH₃CH₂CN iii. CH₂=CH₂ iv. CH₃CH₂OH

    1. a-iv, b-iii, c-ii, d-i
    2. a-iii, b-iv, c-ii, d-i
    3. a-iv, b-iii, c-i, d-ii
    4. a-iv, b-ii, c-iii, d-i
    उत्तर

    A. a-iv, b-iii, c-ii, d-i

    जलीय KOH से ऐल्कोहॉल (iv); ऐल्कोहॉलीय KOH से एथीन (iii); KCN से नाइट्राइल (ii); AgNO₂ से नाइट्रोऐल्केन (i)।

    Match the reagent (with CH₃CH₂Br) in List I with the main product in List II. List I: a. aqueous KOH b. alcoholic KOH c. KCN d. AgNO₂ List II: i. CH₃CH₂NO₂ ii. CH₃CH₂CN iii. CH₂=CH₂ iv. CH₃CH₂OH

    1. a-iv, b-iii, c-ii, d-i
    2. a-iii, b-iv, c-ii, d-i
    3. a-iv, b-iii, c-i, d-ii
    4. a-iv, b-ii, c-iii, d-i
  33. सूची I के यौगिक को सूची II के उपयोग या प्रभाव से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. CHI₃ b. CCl₄ c. CCl₂F₂ d. DDT सूची II: i. कीटनाशक ii. प्रतिरोधी iii. प्रशीतक जो ओज़ोन का क्षय करता है iv. अग्निशामक और सफ़ाई का विलायक

    1. a-iv, b-ii, c-i, d-iii
    2. a-ii, b-iii, c-iv, d-i
    3. a-ii, b-iv, c-iii, d-i
    4. a-i, b-iv, c-iii, d-ii
    उत्तर

    C. a-ii, b-iv, c-iii, d-i

    CHI₃ प्रतिरोधी (ii); CCl₄ अग्निशामक (iv); CCl₂F₂ प्रशीतक (iii); DDT कीटनाशक (i)।

    Match the compound in List I with its use or effect in List II. List I: a. CHI₃ b. CCl₄ c. CCl₂F₂ d. DDT List II: i. insecticide ii. antiseptic iii. refrigerant that depletes ozone iv. fire extinguisher and cleaning solvent

    1. a-iv, b-ii, c-i, d-iii
    2. a-ii, b-iii, c-iv, d-i
    3. a-ii, b-iv, c-iii, d-i
    4. a-i, b-iv, c-iii, d-ii
  34. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. SN1 b. SN2 c. सैत्ज़ेफ़ विलोपन d. वुर्ट्ज़-फ़िटिग अभिक्रिया सूची II: i. विन्यास का प्रतिलोमन ii. रेसिमीकरण iii. अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन का बनना iv. ऐल्किलबेन्ज़ीन का बनना

    1. a-ii, b-i, c-iv, d-iii
    2. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
    3. a-iii, b-i, c-ii, d-iv
    4. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
    उत्तर

    B. a-ii, b-i, c-iii, d-iv

    SN1-रेसिमीकरण (ii); SN2-प्रतिलोमन (i); सैत्ज़ेफ़-अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन (iii); वुर्ट्ज़-फ़िटिग-ऐल्किलबेन्ज़ीन (iv)।

    Match List I with List II. List I: a. SN1 b. SN2 c. Saytzeff elimination d. Wurtz-Fittig reaction List II: i. inversion of configuration ii. racemisation iii. formation of the more substituted alkene iv. formation of an alkylbenzene

    1. a-ii, b-i, c-iv, d-iii
    2. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
    3. a-iii, b-i, c-ii, d-iv
    4. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
  35. सूची I के विरचन को सूची II के परिणाम से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. ऐल्कोहॉल + SOCl₂ b. परॉक्साइड की उपस्थिति में प्रोपीन + HBr c. बेन्ज़ीन + Cl₂/FeCl₃ d. UV प्रकाश में एथेन + Cl₂ सूची II: i. क्लोरोबेन्ज़ीन ii. गैसीय उप-उत्पादों वाला ऐल्किल क्लोराइड iii. प्रति-मार्कोनिकोव उत्पाद iv. उत्पादों का मिश्रण

    1. a-i, b-iii, c-ii, d-iv
    2. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
    3. a-iii, b-ii, c-i, d-iv
    4. a-ii, b-iii, c-i, d-iv
    उत्तर

    D. a-ii, b-iii, c-i, d-iv

    SOCl₂-गैसीय उप-उत्पाद (ii); परॉक्साइड प्रभाव-प्रति-मार्कोनिकोव (iii); Fe-उत्प्रेरित क्लोरीनीकरण-क्लोरोबेन्ज़ीन (i); मुक्त मूलक क्लोरीनीकरण-मिश्रण (iv)।

    Match the preparation in List I with the result in List II. List I: a. alcohol with SOCl₂ b. propene with HBr in presence of peroxide c. benzene with Cl₂/FeCl₃ d. ethane with Cl₂ under UV light List II: i. chlorobenzene ii. alkyl chloride with gaseous by-products iii. anti-Markovnikov product iv. mixture of products

    1. a-i, b-iii, c-ii, d-iv
    2. a-ii, b-i, c-iii, d-iv
    3. a-iii, b-ii, c-i, d-iv
    4. a-ii, b-iii, c-i, d-iv
  36. सूची I की हैलोऐरीन अभिक्रिया को सूची II के उत्पाद से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. 623 K, 300 atm पर क्लोरोबेन्ज़ीन + NaOH, फिर H⁺ b. 368 K पर 1-क्लोरो-2,4-डाइनाइट्रोबेन्ज़ीन + जलीय NaOH c. 1-क्लोरो-2,4,6-ट्राइनाइट्रोबेन्ज़ीन + गुनगुना जल d. शुष्क ईथर में क्लोरोबेन्ज़ीन + Na सूची II: i. 2,4,6-ट्राइनाइट्रोफ़ीनॉल ii. बाइफेनिल iii. फ़ीनॉल iv. 2,4-डाइनाइट्रोफ़ीनॉल

    1. a-iii, b-iv, c-i, d-ii
    2. a-iii, b-iv, c-ii, d-i
    3. a-iii, b-i, c-iv, d-ii
    4. a-iv, b-iii, c-i, d-ii
    उत्तर

    A. a-iii, b-iv, c-i, d-ii

    a से फ़ीनॉल (iii); b से 2,4-डाइनाइट्रोफ़ीनॉल (iv); c से पिक्रिक अम्ल (i); d फ़िटिग अभिक्रिया है जो बाइफेनिल (ii) देती है।

    Match the haloarene reaction in List I with the product in List II. List I: a. chlorobenzene + NaOH at 623 K, 300 atm, then H⁺ b. 1-chloro-2,4-dinitrobenzene + aqueous NaOH at 368 K c. 1-chloro-2,4,6-trinitrobenzene + warm water d. chlorobenzene + Na in dry ether List II: i. 2,4,6-trinitrophenol ii. biphenyl iii. phenol iv. 2,4-dinitrophenol

    1. a-iii, b-iv, c-i, d-ii
    2. a-iii, b-iv, c-ii, d-i
    3. a-iii, b-i, c-iv, d-ii
    4. a-iv, b-iii, c-i, d-ii
  37. प्रकाशिक शुद्ध (+)-2-ब्रोमोब्यूटेन जल के साथ पूर्णतः SN1 मार्ग से अभिक्रिया करता है। बना हुआ ब्यूटेन-2-ऑल है

    1. धारित विन्यास वाला शुद्ध प्रतिबिंबरूप
    2. ब्यूट-2-ईन
    3. प्रकाशिक निष्क्रिय रेसिमिक मिश्रण
    4. प्रतिलोमित विन्यास वाला शुद्ध प्रतिबिंबरूप
    उत्तर

    C. प्रकाशिक निष्क्रिय रेसिमिक मिश्रण

    समतलीय कार्बोनियम आयन पर दोनों फलकों से समान रूप से आक्रमण होता है, जिससे रेसिमिक, प्रकाशिक निष्क्रिय मिश्रण बनता है।

    Optically pure (+)-2-bromobutane reacts completely by the SN1 pathway with water. The butan-2-ol formed is

    1. a pure enantiomer with retained configuration
    2. but-2-ene
    3. an optically inactive racemic mixture
    4. a pure enantiomer with inverted configuration
  38. C₄H₉Br सूत्र वाले एक तृतीयक ब्रोमाइड को ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म किया जाता है। बनने वाला हाइड्रोकार्बन है

    1. 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल
    2. ब्यूट-2-ईन
    3. ब्यूट-1-ईन
    4. 2-मेथिलप्रोपीन
    उत्तर

    D. 2-मेथिलप्रोपीन

    तृतीयक ब्रोमाइड 2-ब्रोमो-2-मेथिलप्रोपेन है; विलोपन से केवल 2-मेथिलप्रोपीन बनती है।

    A tertiary bromide of formula C₄H₉Br is heated with alcoholic KOH. The hydrocarbon formed is

    1. 2-methylpropan-2-ol
    2. but-2-ene
    3. but-1-ene
    4. 2-methylpropene
  39. 368 K पर जलीय NaOH के साथ कौन-सा यौगिक सबसे तेज़ अभिक्रिया करता है?

    1. क्लोरोबेन्ज़ीन
    2. 1-क्लोरो-2,4-डाइनाइट्रोबेन्ज़ीन
    3. 1-क्लोरो-3-नाइट्रोबेन्ज़ीन
    4. 1-क्लोरो-4-नाइट्रोबेन्ज़ीन
    उत्तर

    B. 1-क्लोरो-2,4-डाइनाइट्रोबेन्ज़ीन

    ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर दो नाइट्रो समूह मध्यवर्ती को सबसे अधिक स्थायित्व देते हैं।

    Which compound reacts fastest with aqueous NaOH at 368 K?

    1. chlorobenzene
    2. 1-chloro-2,4-dinitrobenzene
    3. 1-chloro-3-nitrobenzene
    4. 1-chloro-4-nitrobenzene
  40. प्रोपेन-1-ऑल को प्रोपीन से 1-ब्रोमोप्रोपेन के माध्यम से बनाना है। प्रोपीन में HBr जोड़कर 1-ब्रोमोप्रोपेन देने वाला अभिकर्मक है

    1. परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr
    2. परॉक्साइड की अनुपस्थिति में HBr
    3. जलीय KBr
    4. CCl₄ में Br₂
    उत्तर

    A. परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr

    परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr प्रति-मार्कोनिकोव ढंग से जुड़ता है और Br को सिरे वाले कार्बन पर रखता है।

    Propan-1-ol needs to be made from propene via 1-bromopropane. The reagent that adds HBr to propene to give 1-bromopropane is

    1. HBr in the presence of peroxide
    2. HBr in the absence of peroxide
    3. aqueous KBr
    4. Br₂ in CCl₄
  41. क्लोरोबेन्ज़ीन के नाइट्रीकरण से मुख्यतः बनता है

    1. केवल 1-क्लोरो-3-नाइट्रोबेन्ज़ीन
    2. नाइट्रोबेन्ज़ीन
    3. 1-क्लोरो-4-नाइट्रोबेन्ज़ीन के साथ कुछ 1-क्लोरो-2-नाइट्रोबेन्ज़ीन
    4. 1,3-डाइनाइट्रोबेन्ज़ीन
    उत्तर

    C. 1-क्लोरो-4-नाइट्रोबेन्ज़ीन के साथ कुछ 1-क्लोरो-2-नाइट्रोबेन्ज़ीन

    क्लोरीन ऑर्थो-पैरा निर्देशी है; पैरा उत्पाद मुख्य होता है।

    Nitration of chlorobenzene gives mainly

    1. 1-chloro-3-nitrobenzene only
    2. nitrobenzene
    3. 1-chloro-4-nitrobenzene with some 1-chloro-2-nitrobenzene
    4. 1,3-dinitrobenzene
  42. ब्रोमोबेन्ज़ीन को शुष्क ईथर में मैग्नीशियम के साथ और फिर जल के साथ अभिकृत किया जाता है। अंतिम कार्बनिक उत्पाद है

    1. ब्रोमोबेन्ज़ीन
    2. बेन्ज़ीन
    3. फ़ीनॉल
    4. बाइफेनिल
    उत्तर

    B. बेन्ज़ीन

    C₆H₅MgBr + H₂O → C₆H₆ + Mg(OH)Br।

    Bromobenzene is treated with magnesium in dry ether, and then with water. The final organic product is

    1. bromobenzene
    2. benzene
    3. phenol
    4. biphenyl
  43. बेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड से आयोडोबेन्ज़ीन प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त अभिकर्मक है

    1. Cu₂Cl₂/HCl
    2. Cu₂Br₂/HBr
    3. AgF
    4. KI
    उत्तर

    D. KI

    KI के साथ केवल गर्म करने पर आयोडाइड डाइऐज़ोनियम समूह को प्रतिस्थापित कर देता है; ताँबे का उत्प्रेरक नहीं चाहिए।

    To obtain iodobenzene from benzenediazonium chloride, the reagent used is

    1. Cu₂Cl₂/HCl
    2. Cu₂Br₂/HBr
    3. AgF
    4. KI
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