गतिमान आवेश और चुंबकत्व
याद रखने योग्य बातें
- चुंबकीय बल (magnetic force) केवल गतिमान आवेश पर लगता है: F = q v × B, परिमाण F = qvB sinθ। यह v और B दोनों के लंबवत होता है, इसलिए कोई कार्य नहीं करता और चाल कभी नहीं बदलता।
- एकसमान क्षेत्र में B के लंबवत गतिमान आवेश r = mv/qB त्रिज्या के वृत्त में चलता है और उसका आवर्तकाल T = 2πm/qB होता है। आवर्तकाल चाल या त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता।
- ऐम्पियर का परिपथीय नियम लंबे सीधे तार के लिए B = μ₀I/2πr और लंबी परिनालिका के भीतर B = μ₀nI देता है। एक ही दिशा में धारा ले जाने वाले दो समांतर तार एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
- गैल्वेनोमीटर के समांतर छोटा शंट लगाने पर वह ऐमीटर बनता है और श्रेणी में बड़ा प्रतिरोध लगाने पर वोल्टमीटर। लूप पर बल-आघूर्ण τ = NIAB sinθ = m B sinθ होता है।
ऑर्स्टेड का प्रयोग और गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल
ऑर्स्टेड (Oersted) ने देखा कि जब तार में धारा प्रवाहित होती है तो उसके पास रखी दिक्सूचक सुई विक्षेपित हो जाती है। धारा को उलटने पर सुई विपरीत दिशा में मुड़ती है। इससे सिद्ध हुआ कि विद्युत धारा अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) उत्पन्न करती है।
चुंबकीय क्षेत्र B में वेग v से गतिमान आवेश q पर चुंबकीय बल
F = q (v × B), परिमाण F = q v B sinθ
लगता है, जहाँ θ, v और B के बीच का कोण है। B का मात्रक टेस्ला (tesla) है (T = N A⁻¹ m⁻¹ = Wb m⁻²)। धनावेश के लिए F की दिशा दाएँ हाथ के नियम से मिलती है: उँगलियों को v की दिशा में रखिए, उन्हें छोटे कोण से B की ओर मोड़िए, तब अँगूठा F की दिशा बताता है। ऋणावेश के लिए बल विपरीत दिशा में होता है।
सूत्र से निकलने वाले तथ्य:
- यदि आवेश विराम में है (v = 0), तो F = 0।
- यदि v, B के समांतर या प्रति-समांतर है (θ = 0° या 180°), तो F = 0।
- यदि v, B के लंबवत है (θ = 90°), तो F का मान अधिकतम qvB होता है।
- F, v के लंबवत है, इसलिए बल कोई कार्य नहीं करता। आवेश की गतिज ऊर्जा और चाल स्थिर रहती है। केवल गति की दिशा बदलती है।
जब विद्युत क्षेत्र E और चुंबकीय क्षेत्र B दोनों उपस्थित हों, तो कुल बल लोरेंज बल (Lorentz force) होता है: F = q (E + v × B)।
B की विमा: [M T⁻² A⁻¹]। एक गौस = 10⁻⁴ टेस्ला।
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र तथा संयुक्त क्षेत्रों में आवेश की गति
तालिका वेग की प्रत्येक दिशा के लिए पथ दर्शाती है।
| v की दिशा | बल | पथ |
|---|---|---|
| B के समांतर या प्रति-समांतर | शून्य | सरल रेखा, चाल अपरिवर्तित |
| B के लंबवत | qvB, केंद्र की ओर | B के लंबवत तल में वृत्त |
| B से θ कोण पर (0° < θ < 90°) | केवल लंबवत घटक पर लगता है | B के अनुदिश कुंडलिनी (helix) पथ |
| विराम में आवेश | शून्य | विराम में ही रहता है |
वृत्ताकार पथ। चुंबकीय बल अभिकेंद्र बल (centripetal force) प्रदान करता है: qvB = mv²/r। अतः
- त्रिज्या r = mv/(qB) = p/(qB), जहाँ p संवेग है,
- कोणीय आवृत्ति ω = v/r = qB/m,
- आवर्तकाल T = 2πm/(qB), आवृत्ति ν = qB/(2πm)।
T और ν चाल या त्रिज्या पर निर्भर नहीं करते। अधिक चाल वाला कण बड़े वृत्त में चलता है, पर प्रत्येक चक्कर में उतना ही समय लेता है। साथ ही, किसी दिए गए कण के लिए r चाल के समानुपाती होता है। भारी कण या अधिक चाल वाले कण की त्रिज्या अधिक होती है। यदि कण को विराम से विभवांतर V द्वारा त्वरित किया जाए, तो mv²/2 = qV और r = (1/B) √(2mV/q)।
कुंडलिनी पथ। v को v∥ (B के अनुदिश) और v⊥ (B के लंबवत) में वियोजित कीजिए। घटक v⊥ त्रिज्या r = mv⊥/(qB) का वृत्ताकार गति देता है। घटक v∥ अपरिवर्तित रहता है और आवेश को B के अनुदिश ले जाता है। एक चक्कर में तय की गई दूरी (पिच) p = v∥ T = 2πm v∥/(qB) होती है।
वेग वरणकर्ता (velocity selector)। विद्युत क्षेत्र E और चुंबकीय क्षेत्र B को परस्पर लंबवत लीजिए, और दोनों को पुंज के भी लंबवत। आवेश तब बिना विक्षेपित हुए चलता है जब विद्युत और चुंबकीय बल बराबर और विपरीत हों: qE = qvB, अतः
v = E/B।
यह चाल आवेश या द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती और धन तथा ऋण आवेशों के लिए समान होती है। अन्य चाल वाले आवेश विक्षेपित हो जाते हैं और संकीर्ण झिरी द्वारा हटा दिए जाते हैं।
#### धारावाही चालक पर चुंबकीय बल
एकसमान क्षेत्र B में धारा I ले जाने वाले l लंबाई के सीधे चालक पर बल
F = I (l × B), परिमाण F = B I l sinθ
लगता है, जहाँ सदिश l धारा की दिशा में है। बल तब अधिकतम (BIl) होता है जब तार B के लंबवत हो और तब शून्य होता है जब वह B के समांतर हो। दिशा वही दाएँ हाथ का नियम देता है जो गतिमान आवेश के लिए है, जिसमें धारा की दिशा को धनावेश की गति की दिशा माना जाता है। यह बल तार में गतिमान आवेश वाहकों पर लगे बलों का योग है।
बायो-सावर्ट नियम और वृत्ताकार लूप का क्षेत्र
किसी छोटे धारा खंड I dl से स्थिति सदिश r पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र dB है
dB = (μ₀/4π) I dl × r / r³, अतः परिमाण dB = (μ₀/4π) I dl sinθ / r²
जहाँ μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹ मुक्त आकाश की चुंबकशीलता (permeability of free space) है। क्षेत्र I और dl के समानुपाती तथा दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसकी दिशा dl और r दोनों के लंबवत होती है। धारा खंड की रेखा के अनुदिश (θ = 0) धारा खंड का क्षेत्र शून्य होता है।
त्रिज्या R, N फेरों और धारा I वाला वृत्ताकार लूप।
- केंद्र से x दूरी पर अक्ष पर: B = μ₀ N I R² / [2 (R² + x²)^(3/2)]।
- केंद्र पर (x = 0): B = μ₀ N I / (2R)।
- दूर (x ≫ R): B = μ₀ N I R² / (2x³), जो 1/x³ की तरह घटता है।
अक्ष पर क्षेत्र की दिशा दाएँ हाथ के अँगूठे के नियम से मिलती है: दाएँ हाथ की उँगलियों को लूप में धारा की दिशा में मोड़िए, तब अँगूठा B की दिशा में होता है। लूप के पास क्षेत्र रेखाएँ तार के चारों ओर वृत्त होती हैं और अक्ष के पास लगभग सीधी होती हैं।
ऐम्पियर का परिपथीय नियम और उसके अनुप्रयोग
ऐम्पियर का परिपथीय नियम: किसी भी बंद पथ के अनुदिश B का रेखा-समाकल उस पथ द्वारा परिबद्ध कुल धारा का μ₀ गुना होता है।
∮ B · dl = μ₀ I(enclosed)
यह तब उपयोगी है जब स्थिति में सममिति हो।
लंबा सीधा तार। तार के चारों ओर r त्रिज्या का वृत्त लीजिए। इस वृत्त पर B नियत है और उसकी स्पर्श रेखा के अनुदिश है, अतः B (2πr) = μ₀ I और
B = μ₀ I / (2π r)।
क्षेत्र रेखाएँ तार के चारों ओर वृत्त होती हैं। दिशा दाएँ हाथ के अँगूठे के नियम से मिलती है: अँगूठा धारा की दिशा में, और मुड़ी उँगलियाँ B की दिशा दर्शाती हैं।
लंबी परिनालिका (solenoid)। प्रति एकांक लंबाई में n फेरों वाली और धारा I ले जाने वाली परिनालिका के लिए, भीतर (सिरों से दूर) क्षेत्र एकसमान और अक्ष के समांतर होता है:
B = μ₀ n I
आदर्श लंबी परिनालिका के बाहर क्षेत्र बहुत कम होता है (शून्य माना जाता है)। भीतर का मान व्यास या भीतर बिंदु की स्थिति पर निर्भर नहीं करता। यह परिणाम पाने के लिए आयताकार ऐम्पियरी लूप लीजिए जिसकी एक भुजा भीतर हो।
दो समांतर धाराओं के बीच बल और ऐम्पियर की परिभाषा
d दूरी पर स्थित दो लंबे समांतर तारों में धाराएँ I₁ और I₂ हैं। तार 1 का तार 2 पर क्षेत्र μ₀I₁/(2πd) है। अतः प्रत्येक तार पर प्रति एकांक लंबाई बल
f = μ₀ I₁ I₂ / (2π d)
- धाराएँ एक ही दिशा में: तार एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
- धाराएँ विपरीत दिशाओं में: तार एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
- दोनों बल परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते हैं।
ऐम्पियर की परिभाषा। एक ऐम्पियर वह धारा है जो निर्वात में 1 m की दूरी पर रखे दो अनंत लंबाई वाले, पतले, समांतर तारों में से प्रत्येक में प्रवाहित होने पर प्रत्येक तार की प्रति मीटर लंबाई पर 2 × 10⁻⁷ N का बल उत्पन्न करती है।
धारा लूप पर बल-आघूर्ण और चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण
भुजाओं a और b वाले, N फेरों के आयताकार लूप में धारा I है और वह एकसमान क्षेत्र B में है। लूप पर नेट बल शून्य होता है। दोनों भुजाओं पर लगे बल एक बल-युग्म बनाते हैं, अतः बल-आघूर्ण
τ = N I A B sinθ, जहाँ A = ab क्षेत्रफल है।
यहाँ θ, B और लूप के तल के अभिलंब के बीच का कोण है। बल-आघूर्ण तब शून्य होता है जब तल B के लंबवत हो (θ = 0°, अभिलंब B के अनुदिश) और तब अधिकतम, NIAB, होता है जब तल B के समांतर हो (θ = 90°)।
लूप का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण (magnetic dipole moment) m = N I A है। यह सदिश है जो लूप के अभिलंब के अनुदिश, दाएँ हाथ के अँगूठे के नियम से मिली दिशा में होता है। इसका मात्रक A m² है। तब τ = m × B, परिमाण mB sinθ। परिक्रमा करता आवेश या धारा लूप एक छोटे छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करता है।
चल कुंडली गैल्वेनोमीटर, ऐमीटर और वोल्टमीटर
चल कुंडली गैल्वेनोमीटर (moving coil galvanometer) में N फेरों और क्षेत्रफल A की कुंडली होती है, जो नरम लोहे के बेलनाकार क्रोड वाले स्थायी चुंबक के ध्रुवों के बीच कीलकित रहती है। क्षेत्र त्रिज्य होता है, इसलिए कुंडली का तल सदैव B के समांतर रहता है और प्रत्येक विक्षेप के लिए बल-आघूर्ण NIAB होता है। कमानी प्रत्यानयन बल-आघूर्ण kφ देती है, जहाँ φ विक्षेप है और k मरोड़ नियतांक है। साम्य पर
NIAB = kφ, अतः φ = (NAB/k) I।
- धारा सुग्राहिता = φ/I = NAB/k।
- वोल्टता सुग्राहिता = φ/V = NAB/(kR), जहाँ R कुंडली का प्रतिरोध है।
- फेरों की संख्या बढ़ाने से धारा सुग्राहिता बढ़ती है, लेकिन प्रतिरोध भी बढ़ता है, इसलिए वोल्टता सुग्राहिता उसी अनुपात में नहीं बढ़ती।
गैल्वेनोमीटर का रूपांतरण। मान लीजिए गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध G है और पूर्ण पैमाने के विक्षेप के लिए धारा I_g है।
| उपकरण | संयोजन | सूत्र | उपकरण का प्रतिरोध |
|---|---|---|---|
| ऐमीटर (परास 0 से I) | G के समांतर शंट S | S = I_g G / (I − I_g) | S से कम और बहुत छोटा |
| वोल्टमीटर (परास 0 से V) | G के श्रेणी में प्रतिरोध R | R = V/I_g − G | बड़ा, G + R |
ऐमीटर को परिपथ में श्रेणी में जोड़ा जाता है और आदर्श ऐमीटर का प्रतिरोध शून्य होता है। वोल्टमीटर को अवयव के सिरों पर समांतर में जोड़ा जाता है और आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत होता है।
#### हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1. एक प्रोटॉन (m = 1.6 × 10⁻²⁷ kg, q = 1.6 × 10⁻¹⁹ C) 0.2 T के क्षेत्र के लंबवत 2 × 10⁵ m s⁻¹ से चलता है। त्रिज्या और आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
r = mv/(qB) = (1.6 × 10⁻²⁷ × 2 × 10⁵)/(1.6 × 10⁻¹⁹ × 0.2) = 1 × 10⁻² m = 1 cm।
T = 2πm/(qB) = 2π × 1.6 × 10⁻²⁷/(1.6 × 10⁻¹⁹ × 0.2) = π × 10⁻⁷ s, लगभग 3.1 × 10⁻⁷ s।
उदाहरण 2. एक परिनालिका में प्रति मीटर 500 फेरे हैं और उसमें 4 A धारा प्रवाहित है। उसके भीतर क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
B = μ₀ n I = 4π × 10⁻⁷ × 500 × 4 = 8π × 10⁻⁴ T, लगभग 2.5 × 10⁻³ T।
उदाहरण 3. 90 Ω प्रतिरोध वाला एक गैल्वेनोमीटर 10 mA पर पूर्ण पैमाने का विक्षेप देता है। इसे 0 से 100 mA परास के ऐमीटर में और 0 से 10 V परास के वोल्टमीटर में बदलिए।
शंट: S = I_g G/(I − I_g) = (10 × 90)/(100 − 10) = 10 Ω, समांतर में।
श्रेणी प्रतिरोध: R = V/I_g − G = 10/0.01 − 90 = 1000 − 90 = 910 Ω।
उदाहरण 4. 100 फेरों और 0.01 m² क्षेत्रफल की कुंडली में 2 A धारा है और उसका तल 0.5 T के क्षेत्र के समांतर है। बल-आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
τ = N I A B = 100 × 2 × 0.01 × 0.5 = 1 N m।
#### सूत्र सारांश
| राशि | सूत्र | प्रतीक और मात्रक |
|---|---|---|
| गतिमान आवेश पर बल | F = qvB sinθ | q (C में), v (m s⁻¹ में), B (T में) |
| वृत्ताकार पथ की त्रिज्या | r = mv/(qB) | m (kg में), r (m में) |
| परिक्रमण का आवर्तकाल | T = 2πm/(qB) | T (s में) |
| कुंडलिनी की पिच | p = 2πm v cosθ/(qB) | θ, v का B से कोण है |
| वेग वरणकर्ता | v = E/B | E (V m⁻¹ में) |
| तार पर बल | F = BIl sinθ | l (m में), I (A में) |
| लंबे तार का क्षेत्र | B = μ₀I/(2πr) | r (m में) |
| लूप के केंद्र पर क्षेत्र | B = μ₀NI/(2R) | R (m में) |
| परिनालिका में क्षेत्र | B = μ₀nI | n (फेरे m⁻¹ में) |
| समांतर तारों में प्रति लंबाई बल | f = μ₀I₁I₂/(2πd) | N m⁻¹ |
| लूप पर बल-आघूर्ण | τ = NIAB sinθ = mB sinθ | N m |
| चुंबकीय आघूर्ण | m = NIA | A m² |
| शंट | S = I_g G/(I − I_g) | Ω |
| श्रेणी प्रतिरोध | R = V/I_g − G | Ω |
नियतांक: μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹, e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C, mₑ = 9.1 × 10⁻³¹ kg।
NEET में होने वाली भूलें
- 1. चुंबकीय बल कोई कार्य नहीं करता, इसलिए वह गतिज ऊर्जा नहीं बदल सकता। विद्युत बल बदल सकता है।
- 2. B के समांतर गतिमान आवेश पर बल शून्य होता है, अधिकतम नहीं। अधिकतम बल 90° पर होता है।
- 3. आवर्तकाल T = 2πm/qB चाल पर निर्भर नहीं करता। त्रिज्या r = mv/qB निर्भर करती है।
- 4. ऋणावेश उसी क्षेत्र में धनावेश की विपरीत दिशा में चक्कर लगाता है। बराबर |q|, m और v के लिए त्रिज्या का परिमाण समान होता है।
- 5. वेग वरणकर्ता की चाल E/B आवेश और द्रव्यमान से स्वतंत्र है। अन्य चाल वाले कण विक्षेपित हो जाते हैं।
- 6. एक ही दिशा में धारा वाले समांतर तार आकर्षित करते हैं। साथ-साथ एक ही दिशा में गतिमान आवेश समांतर स्थिर विद्युत आवेशों की तरह व्यवहार नहीं करते, जो प्रतिकर्षित करते हैं।
- 7. शंट समांतर में और छोटा होता है। वोल्टमीटर का प्रतिरोध श्रेणी में और बड़ा होता है। इन्हें आपस में न बदलें।
- 8. ऐमीटर का प्रतिरोध उस गैल्वेनोमीटर से कम होता है जिससे वह बना है। वोल्टमीटर का प्रतिरोध अधिक होता है।
- 9. लूप पर बल-आघूर्ण तब अधिकतम होता है जब उसका तल B के समांतर हो (अभिलंब B के लंबवत), और तब शून्य होता है जब तल B के लंबवत हो।
- 10. आदर्श परिनालिका के भीतर का क्षेत्र व्यास या भीतर के बिंदु पर निर्भर नहीं करता। बाहर का क्षेत्र लगभग शून्य होता है।
एक पंक्ति के तथ्य
- 1. ऑर्स्टेड ने दिखाया कि धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।
- 2. चुंबकीय क्षेत्र का SI मात्रक टेस्ला है; 1 T = 10⁴ गौस।
- 3. विराम में आवेश पर चुंबकीय बल शून्य होता है।
- 4. चुंबकीय बल सदैव वेग के लंबवत होता है।
- 5. एकसमान क्षेत्र में B के लंबवत गतिमान आवेश वृत्त में चलता है।
- 6. जिस आवेश के वेग का एक घटक B के अनुदिश हो, वह कुंडलिनी पथ पर चलता है।
- 7. वृत्ताकार पथ की त्रिज्या mv/qB होती है।
- 8. परिक्रमण की आवृत्ति qB/2πm होती है।
- 9. वेग वरणकर्ता E/B चाल वाले आवेशों को पार जाने देता है।
- 10. क्षेत्र में तार पर बल BIl sinθ होता है।
- 11. μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹।
- 12. लंबे तार का क्षेत्र 1/r की तरह घटता है।
- 13. लंबी परिनालिका के भीतर क्षेत्र μ₀nI होता है।
- 14. समांतर तारों में विपरीत दिशाओं की धाराएँ प्रतिकर्षित करती हैं।
- 15. आघूर्ण m वाला धारा लूप क्षेत्र B में mB sinθ बल-आघूर्ण अनुभव करता है।
अभ्यास प्रश्न
आवेश q का कोई कण वेग v से एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B से θ कोण पर गतिमान है। उस पर चुंबकीय बल का परिमाण है
- qvB
- qv sinθ / B
- qvB cosθ
- qvB sinθ
उत्तर
D. qvB sinθ
F = q v B sinθ, F = q v × B से।
A particle of charge q moves with velocity v at an angle θ to a uniform magnetic field B. The magnitude of the magnetic force on it is
- qvB
- qv sinθ / B
- qvB cosθ
- qvB sinθ
द्रव्यमान m और आवेश q का एक आवेशित कण चाल v से एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B के लंबवत गतिमान है। उसके वृत्ताकार पथ की त्रिज्या है
- qB/(mv)
- qvB/m
- mv/(qB)
- mv²/(qB)
उत्तर
C. mv/(qB)
चुंबकीय बल अभिकेंद्र बल प्रदान करता है: qvB = mv²/r, अतः r = mv/(qB)।
A charged particle of mass m and charge q moves with speed v perpendicular to a uniform magnetic field B. The radius of its circular path is
- qB/(mv)
- qvB/m
- mv/(qB)
- mv²/(qB)
एक प्रोटॉन (द्रव्यमान 1.6 × 10⁻²⁷ kg, आवेश 1.6 × 10⁻¹⁹ C) 0.2 T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत 2 × 10⁵ m s⁻¹ से गतिमान है। उसके पथ की त्रिज्या है
- 1 cm
- 2 cm
- 10 cm
- 0.5 cm
उत्तर
A. 1 cm
r = mv/(qB) = (1.6 × 10⁻²⁷ × 2 × 10⁵)/(1.6 × 10⁻¹⁹ × 0.2) = 10⁻² m = 1 cm।
A proton (mass 1.6 × 10⁻²⁷ kg, charge 1.6 × 10⁻¹⁹ C) moves at 2 × 10⁵ m s⁻¹ perpendicular to a uniform magnetic field of 0.2 T. The radius of its path is
- 1 cm
- 2 cm
- 10 cm
- 0.5 cm
एक लंबे सीधे तार में 10 A धारा है। μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹ लेने पर तार से 0.2 m दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र है
- 5 × 10⁻⁶ T
- 1 × 10⁻⁵ T
- 2 × 10⁻⁵ T
- 1 × 10⁻⁴ T
उत्तर
B. 1 × 10⁻⁵ T
B = μ₀I/(2πr) = 2 × 10⁻⁷ × 10/0.2 = 1 × 10⁻⁵ T।
A long straight wire carries a current of 10 A. Using μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹, the magnetic field at a distance of 0.2 m from the wire is
- 5 × 10⁻⁶ T
- 1 × 10⁻⁵ T
- 2 × 10⁻⁵ T
- 1 × 10⁻⁴ T
एक लंबी परिनालिका में प्रति मीटर 2000 फेरे हैं और उसमें 0.5 A धारा है। μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹ लेने पर सिरों से दूर उसके भीतर चुंबकीय क्षेत्र है
- 8π × 10⁻⁴ T
- 2π × 10⁻⁴ T
- 4π × 10⁻⁴ T
- 4π × 10⁻⁷ T
उत्तर
C. 4π × 10⁻⁴ T
B = μ₀nI = 4π × 10⁻⁷ × 2000 × 0.5 = 4π × 10⁻⁴ T।
A long solenoid has 2000 turns per metre and carries a current of 0.5 A. Using μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹, the magnetic field inside it, far from the ends, is
- 8π × 10⁻⁴ T
- 2π × 10⁻⁴ T
- 4π × 10⁻⁴ T
- 4π × 10⁻⁷ T
0.1 m की दूरी पर स्थित दो लंबे समांतर तारों में 5 A और 10 A की धाराएँ एक ही दिशा में प्रवाहित हैं। μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹ लेने पर उनके बीच प्रति एकांक लंबाई बल है
- 5 × 10⁻⁵ N m⁻¹
- 1 × 10⁻³ N m⁻¹
- 2 × 10⁻⁴ N m⁻¹
- 1 × 10⁻⁴ N m⁻¹
उत्तर
D. 1 × 10⁻⁴ N m⁻¹
f = μ₀I₁I₂/(2πd) = 2 × 10⁻⁷ × 5 × 10/0.1 = 1 × 10⁻⁴ N m⁻¹ (आकर्षण)।
Two long parallel wires 0.1 m apart carry currents of 5 A and 10 A in the same direction. Using μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹, the force per unit length between them is
- 5 × 10⁻⁵ N m⁻¹
- 1 × 10⁻³ N m⁻¹
- 2 × 10⁻⁴ N m⁻¹
- 1 × 10⁻⁴ N m⁻¹
20 फेरों और 0.2 m त्रिज्या की एक वृत्ताकार कुंडली में 5 A धारा है। μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹ लेने पर उसके केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र है
- π × 10⁻⁴ T
- 2π × 10⁻⁴ T
- (π/2) × 10⁻⁴ T
- π × 10⁻³ T
उत्तर
A. π × 10⁻⁴ T
B = μ₀NI/(2R) = 4π × 10⁻⁷ × 20 × 5/(2 × 0.2) = π × 10⁻⁴ T।
A circular coil of 20 turns and radius 0.2 m carries a current of 5 A. Using μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹, the magnetic field at its centre is
- π × 10⁻⁴ T
- 2π × 10⁻⁴ T
- (π/2) × 10⁻⁴ T
- π × 10⁻³ T
99 Ω प्रतिरोध वाला एक गैल्वेनोमीटर 10 mA धारा पर पूर्ण पैमाने का विक्षेप देता है। इसे 0 से 1 A परास के ऐमीटर में बदलने के लिए आवश्यक शंट प्रतिरोध है
- 99 Ω
- 1 Ω
- 0.99 Ω
- 10 Ω
उत्तर
B. 1 Ω
S = I_gG/(I − I_g) = (0.01 × 99)/(1 − 0.01) = 0.99/0.99 = 1 Ω। जाँच: G के सिरों पर वोल्टता 0.99 V है, इसलिए 1 Ω के शंट में 0.99 A धारा बहती है।
A galvanometer of resistance 99 Ω gives full-scale deflection for a current of 10 mA. The shunt resistance needed to convert it into an ammeter of range 0 to 1 A is
- 99 Ω
- 1 Ω
- 0.99 Ω
- 10 Ω
100 Ω प्रतिरोध वाला एक गैल्वेनोमीटर 5 mA पर पूर्ण पैमाने का विक्षेप देता है। इसे 0 से 5 V परास का वोल्टमीटर बनाने के लिए आवश्यक श्रेणी प्रतिरोध है
- 1000 Ω
- 500 Ω
- 1100 Ω
- 900 Ω
उत्तर
D. 900 Ω
R = V/I_g − G = 5/0.005 − 100 = 1000 − 100 = 900 Ω। जाँच: कुल प्रतिरोध 1000 Ω पर 5 mA से 5 V मिलता है।
A galvanometer of resistance 100 Ω gives full-scale deflection for 5 mA. The series resistance needed to make it a voltmeter of range 0 to 5 V is
- 1000 Ω
- 500 Ω
- 1100 Ω
- 900 Ω
50 फेरों और 10 cm × 20 cm भुजाओं की एक आयताकार कुंडली में 2 A धारा है। उसका तल 0.5 T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के समांतर है। कुंडली पर बल-आघूर्ण है
- 0.5 N m
- 0
- 1.0 N m
- 2.0 N m
उत्तर
C. 1.0 N m
A = 0.02 m²। τ = NIAB sinθ, जहाँ B और अभिलंब के बीच θ = 90° है, = 50 × 2 × 0.02 × 0.5 = 1.0 N m।
A rectangular coil of 50 turns and sides 10 cm × 20 cm carries a current of 2 A. Its plane is parallel to a uniform magnetic field of 0.5 T. The torque on the coil is
- 0.5 N m
- 0
- 1.0 N m
- 2.0 N m
2 × 10⁴ V m⁻¹ के एकसमान विद्युत क्षेत्र और उसके लंबवत 0.4 T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र वाले क्षेत्र में एक आवेशित कण बिना विक्षेप के निकल जाता है। उसकी चाल है
- 5 × 10⁴ m s⁻¹
- 5 × 10³ m s⁻¹
- 5 × 10⁵ m s⁻¹
- 8 × 10³ m s⁻¹
उत्तर
A. 5 × 10⁴ m s⁻¹
विक्षेप न होने के लिए qE = qvB, अतः v = E/B = 2 × 10⁴/0.4 = 5 × 10⁴ m s⁻¹।
In a region with a uniform electric field of 2 × 10⁴ V m⁻¹ perpendicular to a uniform magnetic field of 0.4 T, a charged particle passes undeflected. Its speed is
- 5 × 10⁴ m s⁻¹
- 5 × 10³ m s⁻¹
- 5 × 10⁵ m s⁻¹
- 8 × 10³ m s⁻¹
एक आवेशित कण एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गतिमान है। गति करते समय उसकी गतिज ऊर्जा
- लगातार बढ़ती है
- स्थिर रहती है
- लगातार घटती है
- शून्य और अधिकतम के बीच दोलन करती है
उत्तर
B. स्थिर रहती है
चुंबकीय बल वेग के लंबवत है, इसलिए वह कोई कार्य नहीं करता और चाल स्थिर रहती है।
A charged particle moves perpendicular to a uniform magnetic field. As it moves, its kinetic energy
- increases continuously
- remains constant
- decreases continuously
- oscillates between zero and a maximum
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में वृत्त में गतिमान आवेशित कण का आवर्तकाल निर्भर करता है
- केवल उसके द्रव्यमान, आवेश और चुंबकीय क्षेत्र पर
- केवल उसकी चाल पर
- उसकी चाल और वृत्त की त्रिज्या पर
- उसकी गतिज ऊर्जा और आवेश पर
उत्तर
A. केवल उसके द्रव्यमान, आवेश और चुंबकीय क्षेत्र पर
T = 2πm/(qB) में चाल या त्रिज्या नहीं है।
The time period of a charged particle moving in a circle in a uniform magnetic field depends on
- its mass, its charge and the magnetic field only
- its speed only
- its speed and the radius of the circle
- its kinetic energy and its charge
0.2 m भुजा के एक वर्गाकार लूप में 10 फेरे हैं और उसमें 3 A धारा है। उसके चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण का परिमाण है
- 6.0 A m²
- 0.12 A m²
- 1.2 A m²
- 0.6 A m²
उत्तर
C. 1.2 A m²
m = NIA = 10 × 3 × (0.2)² = 1.2 A m²।
A square loop of side 0.2 m has 10 turns and carries a current of 3 A. The magnitude of its magnetic dipole moment is
- 6.0 A m²
- 0.12 A m²
- 1.2 A m²
- 0.6 A m²
0.5 m लंबाई के एक तार में 4 A धारा है और वह 0.3 T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में है। तार क्षेत्र से 30° का कोण बनाता है। तार पर बल है
- 0.52 N
- 0.6 N
- 0.15 N
- 0.3 N
उत्तर
D. 0.3 N
F = BIl sinθ = 0.3 × 4 × 0.5 × 0.5 = 0.3 N।
A wire of length 0.5 m carries a current of 4 A in a uniform magnetic field of 0.3 T. The wire makes an angle of 30° with the field. The force on the wire is
- 0.52 N
- 0.6 N
- 0.15 N
- 0.3 N
एक प्रोटॉन और एक ऐल्फा कण (द्रव्यमान प्रोटॉन का चार गुना, आवेश दो गुना) को विराम से समान विभवांतर द्वारा त्वरित किया जाता है और वे एक ही एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में उसके लंबवत प्रवेश करते हैं। प्रोटॉन के पथ की त्रिज्या और ऐल्फा कण के पथ की त्रिज्या का अनुपात है
- 1 : 2
- 1 : √2
- √2 : 1
- 2 : 1
उत्तर
B. 1 : √2
r = (1/B)√(2mV/q), अतः r ∝ √(m/q)। प्रोटॉन के लिए m/q = 1 इकाई, ऐल्फा कण के लिए 4/2 = 2 इकाई। अनुपात = 1 : √2।
A proton and an alpha particle (mass four times, charge twice that of a proton) are accelerated from rest through the same potential difference and enter the same uniform magnetic field perpendicular to it. The ratio of the radius of the proton path to that of the alpha particle path is
- 1 : 2
- 1 : √2
- √2 : 1
- 2 : 1
निम्नलिखित दो कथन दिए गए हैं: कथन I: विराम में स्थित आवेश पर चुंबकीय क्षेत्र में चुंबकीय बल शून्य होता है। कथन II: चुंबकीय क्षेत्र के समांतर गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल शून्य होता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
A. कथन I और कथन II दोनों सही हैं
F = qvB sinθ, v = 0 और θ = 0° के लिए शून्य है।
Given below are two statements: Statement I: The magnetic force on a charge at rest in a magnetic field is zero. Statement II: The magnetic force on a charge moving parallel to the magnetic field is zero.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
निम्नलिखित दो कथन दिए गए हैं: कथन I: चुंबकीय बल आवेशित कण की चाल बढ़ा सकता है। कथन II: गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल सदैव उसके वेग के लंबवत होता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
D. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
बल v के लंबवत है, इसलिए वह कोई कार्य नहीं करता और चाल नहीं बदल सकता।
Given below are two statements: Statement I: A magnetic force can increase the speed of a charged particle. Statement II: The magnetic force on a moving charge is always perpendicular to its velocity.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
निम्नलिखित दो कथन दिए गए हैं: कथन I: लंबी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान होता है और परिनालिका के व्यास के साथ बढ़ता है। कथन II: आदर्श लंबी परिनालिका के बाहर चुंबकीय क्षेत्र लगभग शून्य होता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
D. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
B = μ₀nI व्यास पर निर्भर नहीं करता, इसलिए कथन I गलत है। बाहर का क्षेत्र लगभग शून्य होता है।
Given below are two statements: Statement I: The magnetic field inside a long solenoid is uniform and increases with the diameter of the solenoid. Statement II: The magnetic field outside an ideal long solenoid is nearly zero.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
निम्नलिखित दो कथन दिए गए हैं: कथन I: एक ही दिशा में धारा ले जाने वाले दो लंबे समांतर तार एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। कथन II: विपरीत दिशाओं में धारा ले जाने वाले दो लंबे समांतर तार एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
C. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
एक ही दिशा: आकर्षण। विपरीत दिशाएँ: प्रतिकर्षण।
Given below are two statements: Statement I: Two long parallel wires carrying currents in the same direction attract each other. Statement II: Two long parallel wires carrying currents in opposite directions attract each other.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
निम्नलिखित दो कथन दिए गए हैं: कथन I: चल कुंडली गैल्वेनोमीटर की धारा सुग्राहिता NAB/k होती है। कथन II: वोल्टता सुग्राहिता NAB/k होती है और कुंडली के प्रतिरोध पर निर्भर नहीं करती।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
C. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
वोल्टता सुग्राहिता φ/V = NAB/(kR) है, जो कुंडली के प्रतिरोध R पर निर्भर करती है।
Given below are two statements: Statement I: The current sensitivity of a moving coil galvanometer is NAB/k. Statement II: The voltage sensitivity is NAB/k and does not depend on the resistance of the coil.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. गैल्वेनोमीटर के समांतर छोटा प्रतिरोध जोड़कर ऐमीटर बनाया जाता है। 2. गैल्वेनोमीटर के समांतर बड़ा प्रतिरोध जोड़कर वोल्टमीटर बनाया जाता है। 3. आदर्श ऐमीटर का प्रतिरोध शून्य होता है।
- 1 और 2 केवल
- 2 और 3 केवल
- 1 और 3 केवल
- 1, 2 और 3
उत्तर
C. 1 और 3 केवल
वोल्टमीटर के लिए श्रेणी में बड़ा प्रतिरोध चाहिए, इसलिए कथन 2 गलत है। कथन 1 और 3 सही हैं।
Which of the following statements are correct? 1. An ammeter is made by connecting a small resistance in parallel with a galvanometer. 2. A voltmeter is made by connecting a large resistance in parallel with a galvanometer. 3. An ideal ammeter has zero resistance.
- 1 and 2 only
- 2 and 3 only
- 1 and 3 only
- 1, 2 and 3
निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. एकसमान क्षेत्र में धारा लूप पर बल-आघूर्ण शून्य होता है जब उसका तल क्षेत्र के लंबवत हो। 2. एकसमान क्षेत्र में धारा लूप पर नेट बल शून्य होता है। 3. धारा लूप पर बल-आघूर्ण अधिकतम होता है जब उसका तल क्षेत्र के लंबवत हो।
- 2 और 3 केवल
- 1 और 2 केवल
- 1 और 3 केवल
- 1, 2 और 3
उत्तर
B. 1 और 2 केवल
τ = NIAB sinθ, जहाँ θ, B से अभिलंब तक मापा गया है। यह तब शून्य होता है जब तल B के लंबवत हो और तब अधिकतम होता है जब तल B के समांतर हो। अतः 3 गलत है।
Which of the following statements are correct? 1. The torque on a current loop in a uniform field is zero when its plane is perpendicular to the field. 2. The net force on a current loop in a uniform field is zero. 3. The torque on a current loop is maximum when its plane is perpendicular to the field.
- 2 and 3 only
- 1 and 2 only
- 1 and 3 only
- 1, 2 and 3
निम्नलिखित दो कथन दिए गए हैं: कथन I: एक ऐम्पियर वह धारा है जो निर्वात में 1 cm की दूरी पर स्थित दो लंबे समांतर तारों में प्रत्येक तार की प्रति मीटर लंबाई पर 2 × 10⁻⁷ N का बल देती है। कथन II: दो लंबे समांतर तारों के बीच प्रति एकांक लंबाई बल μ₀I₁I₂/(2πd) होता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
D. कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
परिभाषा में तार 1 m की दूरी पर लिए जाते हैं, इसलिए कथन I गलत है। कथन II सही सूत्र है।
Given below are two statements: Statement I: One ampere is the current that, in two long parallel wires 1 cm apart in vacuum, gives a force of 2 × 10⁻⁷ N on each metre of wire. Statement II: The force per unit length between two long parallel wires is μ₀I₁I₂/(2πd).
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
निम्नलिखित दो कथन दिए गए हैं: कथन I: वेग वरणकर्ता में चाल E/B वाले आवेशित कण आवेश के चिह्न से निरपेक्ष बिना विक्षेप के निकल जाते हैं। कथन II: वेग वरणकर्ता में बिना विक्षेप की चाल कण के आवेश और द्रव्यमान पर निर्भर करती है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
C. कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
v = E/B, q और m से स्वतंत्र है, इसलिए कथन II गलत है।
Given below are two statements: Statement I: In a velocity selector, charged particles of speed E/B pass undeflected whatever the sign of their charge. Statement II: The undeflected speed in a velocity selector depends on the charge and the mass of the particle.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
निम्नलिखित दो कथन दिए गए हैं: कथन I: एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के समांतर गतिमान आवेश वृत्ताकार पथ पर चलता है। कथन II: एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गतिमान आवेश सरल रेखा में चलता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं
- कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
- कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
- कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
उत्तर
B. कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
पहला सरल रेखा में और दूसरा वृत्त में चलता है, इसलिए दोनों कथन गलत हैं।
Given below are two statements: Statement I: A charge moving parallel to a uniform magnetic field follows a circular path. Statement II: A charge moving perpendicular to a uniform magnetic field follows a straight line.
- Both Statement I and Statement II are correct
- Both Statement I and Statement II are incorrect
- Statement I is correct but Statement II is incorrect
- Statement I is incorrect but Statement II is correct
अभिकथन (A): एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गतिमान आवेशित कण की गतिज ऊर्जा स्थिर रहती है। कारण (R): कण पर चुंबकीय बल उसके वेग के लंबवत होता है और कोई कार्य नहीं करता।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
A. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
कोई कार्य नहीं होता, इसलिए गतिज ऊर्जा स्थिर रहती है। R, A की व्याख्या करता है।
Assertion (A): A charged particle moving perpendicular to a uniform magnetic field has constant kinetic energy. Reason (R): The magnetic force on the particle is perpendicular to its velocity and does no work.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में आवेशित कण के परिक्रमण की आवृत्ति उसकी चाल पर निर्भर नहीं करती। कारण (R): आवेश पर चुंबकीय बल उसके वेग के लंबवत होता है।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
B. A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
आवृत्ति qB/(2πm) है, जो चाल से स्वतंत्र है। R सत्य है, किंतु चाल से स्वतंत्रता का कारण यह है कि r ∝ v, केवल बल की दिशा नहीं।
Assertion (A): The frequency of revolution of a charged particle in a uniform magnetic field does not depend on its speed. Reason (R): The magnetic force on a charge is perpendicular to its velocity.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में धारा लूप पर बल-आघूर्ण लगता है, पर नेट बल नहीं लगता। कारण (R): लूप की सम्मुख भुजाओं पर लगे बल बराबर और विपरीत होते हैं, पर एक ही रेखा के अनुदिश नहीं होते।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
A. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
बराबर और विपरीत बल नेट बल शून्य देते हैं। उनकी पृथक क्रिया-रेखाएँ बल-युग्म देती हैं।
Assertion (A): A current loop in a uniform magnetic field experiences a torque but no net force. Reason (R): The forces on opposite sides of the loop are equal and opposite but do not act along the same line.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): गैल्वेनोमीटर के समांतर जुड़ा शंट प्रतिरोध उसे ऐमीटर में बदल देता है। कारण (R): शंट का प्रतिरोध गैल्वेनोमीटर की तुलना में बहुत अधिक होता है।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
C. A सत्य है लेकिन R असत्य है
शंट का प्रतिरोध बहुत छोटा होता है, इसलिए R असत्य है।
Assertion (A): A shunt resistance connected in parallel with a galvanometer converts it into an ammeter. Reason (R): The shunt has a very high resistance compared with the galvanometer.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
अभिकथन (A): चुंबकीय क्षेत्र में विराम में स्थित आवेश पर चुंबकीय बल लगता है। कारण (R): आवेश पर चुंबकीय बल उसके वेग पर निर्भर करता है।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है लेकिन R असत्य है
- A असत्य है लेकिन R सत्य है
उत्तर
D. A असत्य है लेकिन R सत्य है
v = 0 पर F = qvB sinθ शून्य है, इसलिए A असत्य है; R सत्य है।
Assertion (A): A stationary charge experiences a magnetic force in a magnetic field. Reason (R): The magnetic force on a charge depends on its velocity.
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. चुंबकीय क्षेत्र में आवेश के वृत्ताकार पथ की त्रिज्या b. परिक्रमण का आवर्तकाल c. लंबी परिनालिका के भीतर क्षेत्र d. लंबे सीधे तार से दूरी r पर क्षेत्र। सूची II: i. μ₀nI ii. μ₀I/(2πr) iii. mv/(qB) iv. 2πm/(qB)
- a-iii, b-iv, c-i, d-ii
- a-iii, b-iv, c-ii, d-i
- a-i, b-iv, c-iii, d-ii
- a-iv, b-iii, c-i, d-ii
उत्तर
A. a-iii, b-iv, c-i, d-ii
त्रिज्या mv/qB; आवर्तकाल 2πm/qB; परिनालिका μ₀nI; तार μ₀I/2πr।
Match List I with List II. List I: a. Radius of circular path of a charge in a magnetic field b. Time period of revolution c. Field inside a long solenoid d. Field at distance r from a long straight wire. List II: i. μ₀nI ii. μ₀I/(2πr) iii. mv/(qB) iv. 2πm/(qB)
- a-iii, b-iv, c-i, d-ii
- a-iii, b-iv, c-ii, d-i
- a-i, b-iv, c-iii, d-ii
- a-iv, b-iii, c-i, d-ii
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. चुंबकीय क्षेत्र b. चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण c. मुक्त आकाश की चुंबकशीलता d. बल-आघूर्ण। सूची II: i. A m² ii. T m A⁻¹ iii. Wb m⁻² iv. N m
- a-i, b-iii, c-ii, d-iv
- a-iii, b-i, c-ii, d-iv
- a-iii, b-i, c-iv, d-ii
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
उत्तर
B. a-iii, b-i, c-ii, d-iv
B का मात्रक Wb m⁻² (टेस्ला) है; m का A m²; μ₀ का T m A⁻¹; बल-आघूर्ण का N m।
Match List I with List II. List I: a. Magnetic field b. Magnetic dipole moment c. Permeability of free space d. Torque. List II: i. A m² ii. T m A⁻¹ iii. Wb m⁻² iv. N m
- a-i, b-iii, c-ii, d-iv
- a-iii, b-i, c-ii, d-iv
- a-iii, b-i, c-iv, d-ii
- a-ii, b-i, c-iii, d-iv
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. ऐमीटर b. वोल्टमीटर c. वेग वरणकर्ता d. चल कुंडली गैल्वेनोमीटर। सूची II: i. परस्पर लंबवत विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र ii. श्रेणी में उच्च प्रतिरोध iii. समांतर में निम्न प्रतिरोध iv. त्रिज्य चुंबकीय क्षेत्र और कीलकित कुंडली
- a-iii, b-ii, c-iv, d-i
- a-ii, b-iii, c-i, d-iv
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-iii, b-ii, c-i, d-iv
उत्तर
D. a-iii, b-ii, c-i, d-iv
ऐमीटर: समांतर में शंट। वोल्टमीटर: श्रेणी प्रतिरोध। वेग वरणकर्ता: परस्पर लंबवत E और B। गैल्वेनोमीटर: त्रिज्य क्षेत्र।
Match List I with List II. List I: a. Ammeter b. Voltmeter c. Velocity selector d. Moving coil galvanometer. List II: i. Crossed electric and magnetic fields ii. High resistance in series iii. Low resistance in parallel iv. Radial magnetic field and a pivoted coil
- a-iii, b-ii, c-iv, d-i
- a-ii, b-iii, c-i, d-iv
- a-i, b-ii, c-iii, d-iv
- a-iii, b-ii, c-i, d-iv
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. B के समांतर वेग b. B के लंबवत वेग c. B से 0° और 90° के बीच किसी कोण पर वेग d. विराम में आवेश। सूची II: i. कुंडलिनी ii. विराम में रहता है iii. वृत्त iv. सरल रेखा
- a-iv, b-iii, c-i, d-ii
- a-iv, b-i, c-iii, d-ii
- a-iii, b-iv, c-i, d-ii
- a-ii, b-iii, c-i, d-iv
उत्तर
A. a-iv, b-iii, c-i, d-ii
समांतर: कोई बल नहीं, सरल रेखा। लंबवत: वृत्त। तिर्यक: कुंडलिनी। विराम: कोई बल नहीं।
Match List I with List II. List I: a. Velocity parallel to B b. Velocity perpendicular to B c. Velocity at an angle between 0° and 90° to B d. Charge at rest. List II: i. Helix ii. Stays at rest iii. Circle iv. Straight line
- a-iv, b-iii, c-i, d-ii
- a-iv, b-i, c-iii, d-ii
- a-iii, b-iv, c-i, d-ii
- a-ii, b-iii, c-i, d-iv
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। L लंबाई का एक सीधा तार एकसमान क्षेत्र B में धारा I ले जाता है। सूची I: a. L = 1 m, I = 2 A, B = 0.5 T, तार B के लंबवत b. वही तार B से 30° पर c. वही तार B के समांतर d. L = 2 m, I = 2 A, B = 0.5 T, तार B के लंबवत। सूची II: i. 0.5 N ii. 2 N iii. 0 iv. 1 N
- a-iv, b-iii, c-i, d-ii
- a-i, b-iv, c-iii, d-ii
- a-iv, b-i, c-iii, d-ii
- a-iv, b-i, c-ii, d-iii
उत्तर
C. a-iv, b-i, c-iii, d-ii
F = BIL sinθ: (a) 0.5 × 2 × 1 = 1 N; (b) 0.5 N; (c) 0; (d) 0.5 × 2 × 2 = 2 N।
Match List I with List II. A straight wire of length L carries current I in a uniform field B. List I: a. L = 1 m, I = 2 A, B = 0.5 T, wire perpendicular to B b. Same wire at 30° to B c. Same wire parallel to B d. L = 2 m, I = 2 A, B = 0.5 T, wire perpendicular to B. List II: i. 0.5 N ii. 2 N iii. 0 iv. 1 N
- a-iv, b-iii, c-i, d-ii
- a-i, b-iv, c-iii, d-ii
- a-iv, b-i, c-iii, d-ii
- a-iv, b-i, c-ii, d-iii
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए। सूची I: a. ऑर्स्टेड का प्रयोग b. बायो-सावर्ट नियम c. ऐम्पियर का परिपथीय नियम d. लोरेंज बल। सूची II: i. बंद पथ के अनुदिश B का रेखा-समाकल परिबद्ध धारा का μ₀ गुना होता है ii. धारावाही तार द्वारा दिक्सूचक सुई विक्षेपित होती है iii. विद्युत और चुंबकीय दोनों क्षेत्रों में आवेश पर बल iv. छोटे धारा खंड का क्षेत्र
- a-ii, b-iv, c-iii, d-i
- a-i, b-iv, c-ii, d-iii
- a-iv, b-ii, c-i, d-iii
- a-ii, b-iv, c-i, d-iii
उत्तर
D. a-ii, b-iv, c-i, d-iii
प्रत्येक नाम का उसके कथन से सीधा सुमेलन।
Match List I with List II. List I: a. Oersted's experiment b. Biot–Savart law c. Ampere's circuital law d. Lorentz force. List II: i. Line integral of B around a closed path equals μ₀ times the enclosed current ii. A compass needle is deflected by a current-carrying wire iii. Force on a charge in both electric and magnetic fields iv. Field of a small current element
- a-ii, b-iv, c-iii, d-i
- a-i, b-iv, c-ii, d-iii
- a-iv, b-ii, c-i, d-iii
- a-ii, b-iv, c-i, d-iii
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान एक आवेशित कण के वेग का क्षेत्र के अनुदिश घटक 3 × 10⁵ m s⁻¹ है और वह 2 × 10⁻⁷ s में एक वृत्त का चक्कर पूरा करता है। उसके कुंडलिनी पथ की पिच है
- 0.06 m
- 0.03 m
- 0.6 m
- 0.12 m
उत्तर
A. 0.06 m
पिच = v∥T = 3 × 10⁵ × 2 × 10⁻⁷ = 0.06 m।
A charged particle moving in a uniform magnetic field has a velocity component along the field of 3 × 10⁵ m s⁻¹ and goes round a circle in 2 × 10⁻⁷ s. The pitch of its helical path is
- 0.06 m
- 0.03 m
- 0.6 m
- 0.12 m
2 × 10⁻²⁶ kg द्रव्यमान और 1.6 × 10⁻¹⁹ C आवेश का एक आयन 0.4 T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में 0.5 m त्रिज्या के वृत्त पर गतिमान है। उसकी चाल है
- 8 × 10⁵ m s⁻¹
- 1.6 × 10⁶ m s⁻¹
- 3.2 × 10⁶ m s⁻¹
- 1.6 × 10⁷ m s⁻¹
उत्तर
B. 1.6 × 10⁶ m s⁻¹
v = qBr/m = 1.6 × 10⁻¹⁹ × 0.4 × 0.5/(2 × 10⁻²⁶) = 1.6 × 10⁶ m s⁻¹।
An ion of mass 2 × 10⁻²⁶ kg and charge 1.6 × 10⁻¹⁹ C moves on a circle of radius 0.5 m in a uniform magnetic field of 0.4 T. Its speed is
- 8 × 10⁵ m s⁻¹
- 1.6 × 10⁶ m s⁻¹
- 3.2 × 10⁶ m s⁻¹
- 1.6 × 10⁷ m s⁻¹
100 Ω प्रतिरोध वाला एक गैल्वेनोमीटर 2 mA पर पूर्ण पैमाने का विक्षेप दिखाता है। इससे 20 V तक पढ़ने के लिए उसे श्रेणी में जोड़ना चाहिए प्रतिरोध
- 900 Ω
- 10100 Ω
- 9900 Ω
- 10000 Ω
उत्तर
C. 9900 Ω
R = V/I_g − G = 20/0.002 − 100 = 10000 − 100 = 9900 Ω।
A galvanometer of resistance 100 Ω shows full-scale deflection for 2 mA. To read up to 20 V, it should be connected in series with a resistance of
- 900 Ω
- 10100 Ω
- 9900 Ω
- 10000 Ω
45 Ω प्रतिरोध वाले एक गैल्वेनोमीटर को इस प्रकार शंट किया गया है कि कुल धारा का केवल दसवाँ भाग उससे होकर जाता है। शंट प्रतिरोध है
- 0.5 Ω
- 5 Ω
- 4.5 Ω
- 9 Ω
उत्तर
B. 5 Ω
गैल्वेनोमीटर में धारा = I/10, शंट में धारा = 9I/10। विभवांतर समान: (I/10) × 45 = (9I/10) × S, अतः S = 5 Ω।
A galvanometer of resistance 45 Ω is shunted so that only one tenth of the total current passes through it. The shunt resistance is
- 0.5 Ω
- 5 Ω
- 4.5 Ω
- 9 Ω
10 cm की दूरी पर स्थित दो लंबे समांतर तारों में 6 A और 4 A की धाराएँ विपरीत दिशाओं में प्रवाहित हैं। μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹ लेने पर उनके बीच प्रति एकांक लंबाई बल है
- 4.8 × 10⁻⁵ N m⁻¹, प्रतिकर्षण
- 2.4 × 10⁻⁵ N m⁻¹, प्रतिकर्षण
- 4.8 × 10⁻⁵ N m⁻¹, आकर्षण
- 9.6 × 10⁻⁵ N m⁻¹, आकर्षण
उत्तर
A. 4.8 × 10⁻⁵ N m⁻¹, प्रतिकर्षण
f = 2 × 10⁻⁷ × 6 × 4/0.1 = 4.8 × 10⁻⁵ N m⁻¹। विपरीत धाराएँ प्रतिकर्षित करती हैं।
Two long parallel wires 10 cm apart carry currents of 6 A and 4 A in opposite directions. Using μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹, the force per unit length between them is
- 4.8 × 10⁻⁵ N m⁻¹, repulsive
- 2.4 × 10⁻⁵ N m⁻¹, repulsive
- 4.8 × 10⁻⁵ N m⁻¹, attractive
- 9.6 × 10⁻⁵ N m⁻¹, attractive
0.2 m की दूरी पर स्थित दो लंबे सीधे समांतर तारों में प्रत्येक में 5 A धारा विपरीत दिशाओं में है। μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹ लेने पर उनके मध्य बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र है
- 1 × 10⁻⁵ T
- 0
- 4 × 10⁻⁵ T
- 2 × 10⁻⁵ T
उत्तर
D. 2 × 10⁻⁵ T
मध्य बिंदु पर प्रत्येक तार 2 × 10⁻⁷ × 5/0.1 = 1 × 10⁻⁵ T देता है। विपरीत धाराओं के लिए तारों के बीच दोनों क्षेत्र एक ही दिशा में होते हैं, इसलिए जुड़ते हैं: 2 × 10⁻⁵ T।
Two long straight parallel wires 0.2 m apart each carry 5 A, in opposite directions. Using μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m A⁻¹, the magnetic field at the midpoint between them is
- 1 × 10⁻⁵ T
- 0
- 4 × 10⁻⁵ T
- 2 × 10⁻⁵ T
200 फेरों और 5 × 10⁻⁴ m² क्षेत्रफल की कुंडली में 0.1 A धारा है और वह 0.2 T के त्रिज्य चुंबकीय क्षेत्र में है, जिससे उसका तल सदैव क्षेत्र के समांतर रहता है। उस पर बल-आघूर्ण है
- 1 × 10⁻³ N m
- 2 × 10⁻³ N m
- 4 × 10⁻³ N m
- 2 × 10⁻⁵ N m
उत्तर
B. 2 × 10⁻³ N m
τ = NIAB = 200 × 0.1 × 5 × 10⁻⁴ × 0.2 = 2 × 10⁻³ N m।
A coil of 200 turns and area 5 × 10⁻⁴ m² carries 0.1 A in a radial magnetic field of 0.2 T, so that its plane is always parallel to the field. The torque on it is
- 1 × 10⁻³ N m
- 2 × 10⁻³ N m
- 4 × 10⁻³ N m
- 2 × 10⁻⁵ N m