प्रागैतिहासिक काल
- बस्तर में वीर नायकों की स्मृति में काष्ठ स्तंभ: मसेनार, डिलमिली, चित्रकूट, किलेपाल, चिंगेनार, तारागाँव।
- चितवा डोंगरी के शैलचित्र: भगवान सिंह बघेल व डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र ने उजागर किए।
- धनोरा के महापाषाण स्मारकों का सर्वेक्षण: प्रो. जे. आर. काम्बले और डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र। धनोरा उत्खनन से लगभग 500 महापाषाण स्मारक मिले।
- पूर्व पाषाण: महानदी घाटी, सिंघनपुर।
- मध्य पाषाण: रायगढ़ का कबरा पहाड़ (लंबे फलक, अर्द्धचंद्राकार लघु औजार)।
- उत्तर पाषाण: बिलासपुर का धनपुर और रायगढ़ का सिंघनपुर (चित्रित शैलाश्रय के पास)।
- नवपाषाण (चित्रित हथौड़े): अर्जुनी (दुर्ग), चितवा डोंगरी व बोनटीला (राजनांदगांव), टेरम (रायगढ़)।
- लौह युग: करहीभदर, चिरचारी, सोरर में पाषाण घेरे; करकाभाटा (दुर्ग) से घेरे, लोहे के औजार व मृदभांड।
वैदिक, रामायण, महाभारत काल
- ऋग्वैदिक काल में छत्तीसगढ़ का स्पष्ट उल्लेख नहीं (आर्य यहाँ तक नहीं आए थे)।
- उत्तर वैदिक: कौषीतकी उपनिषद में विंध्य पर्वत; नर्मदा का नाम 'रेवा'।
- रामायण: राम की माता कौशल्या राजा भानुमंत की पुत्री। कोसल के दो भाग: दक्षिण कोसल (राजधानी श्रावस्ती) और उत्तर कोसल (राजधानी साकेत)। भानुमंत का पुत्र नहीं था, राज्य दशरथ को मिला।
- लोक मान्यता: शिवरीनारायण, खरौद रामकथा से जुड़े; तुरतुरिया (सिरपुर के पास) में वाल्मीकि आश्रम, लव-कुश का जन्म। राम के बाद उत्तर कोसल लव को, दक्षिण कोसल (राजधानी कुशस्थली) कुश को मिला।
- महाभारत: सहदेव द्वारा जीते राज्यों में 'प्राक्कोसल'; बस्तर का वन क्षेत्र 'कांतार'; कर्ण की दिग्विजय में कोसल।
- ऋषभतीर्थ = गुंजी (सक्ती के पास, जांजगीर-चांपा); मोरध्वज-ताम्रध्वज की राजधानी मणिपुर = रतनपुर; बभ्रुवाहन (अर्जुन-पुत्र) की राजधानी सिरपुर (चित्रांगदपुर)।
- पुराणों में इक्ष्वाकु वंश का उल्लेख।
महाजनपद, मौर्य, सातवाहन
- महाजनपद काल = बुद्ध-महावीर का काल; 16 महाजनपदों का वर्णन बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय व जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में। छत्तीसगढ़ = (दक्षिण) कोसल, अलग प्रशासनिक इकाई; मौर्य-पूर्व सिक्के इसकी पुष्टि करते हैं।
- 'अवदान शतक' के अनुसार बुद्ध दक्षिण कोसल आए, लगभग तीन माह राजधानी में रहे; ह्वेनसांग के 'सी-यू-की' में भी संकेत।
- मौर्य काल: दक्षिण कोसल संभवतः मौर्य साम्राज्य का अंग (ह्वेनसांग)। सिक्के: अकलतरा, ठठारी, बार, बिलासपुर। सरगुजा के रामगढ़ में जोगीमारा व सीताबेंगरा गुफाएँ; सीताबेंगरा = विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला मानी जाती है।
- सातवाहन: मौर्य पतन के बाद; राजा अपीलक की एकमात्र मुद्रा बालपुर (रायगढ़ के पास) से। नागार्जुन प्रथम सदी में आए; ह्वेनसांग के अनुसार राजधानी के निकट पर्वत पर सुरंग खुदवाकर पाँच मंज़िला संघाराम बनवाया गया।
- याद रखें: सीताबेंगरा = प्राचीनतम नाट्यशाला; अपीलक की मुद्रा = बालपुर।
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