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छत्तीसगढ़: कला, संस्कृति, जनजाति एवं खेल · Chapter 9
प्रमुख जनजातियाँ
  • गोंड: संख्या में सबसे बड़ी जनजाति; नाम तमिल "कोंड" (पर्वत) से; लगभग 30 शाखाएँ; देव — दूल्हा देव, बड़ा देव।
  • कोरबा: कंदमूल-शिकार; दिहारिया कोरबा खेती करते हैं; पंचायत "मैयारी"; कोलेरियन समूह से संबंध।
  • हल्बा: हलवाहक होने से नाम; कबीरपंथी; मराठी प्रभाव।
  • बैगा: अर्थ पुरोहित; नागा बैगा को पूर्वज मानते हैं; स्थानांतरित खेती।
  • बिंझवार: विंध्यवासिनी देवी; वीर नारायण सिंह इसी समुदाय के।
  • कमार: गोंड वंशज मानते हैं; बाँस-लकड़ी की वस्तुएँ।
  • कंवर: कौरवों से उत्पत्ति; विकसित, स्वच्छता प्रिय; झगड़े पंचायत से।
  • खैरवार: कत्था व्यापार (कथतार)। खड़िया: पालकी ढोना।
  • भतरा: "सेवक" अर्थ; पिट व सन भतरा; भाषा भतरी (उड़िया की बोली)।
  • बिरहोड़: वनचर। बिरजिया: जंगल की मछली। अगरिया: लोहा गलाने वाले, नाम "अग्नि" से।
  • धनवार: धनुष से; विवाह में वर धनुष लेकर आता है। कंध: द्रविड़ "कोंड" (पहाड़ी)।
  • कोया: दोरला/कोयातर। पांडो: पांडवों के वंशज मानते हैं। पारधी: आखेटक, स्वयं को नाहर कहते हैं।
  • प्रधान: गोंड राजाओं के मंत्री/गायक; पटरिया भी। कोल: मुंडारी मूल; "कोल" = पुरुष।
  • ओरांव: स्वयं को कुरुख कहते हैं; देवता धर्मेश; गोदना प्रिय; मुखिया महतो, पुजारी बैगा।
  • मुंडा: बस्तर राजवंश के परंपरागत गायक। नेगसिया: नाग से नाम।
  • अन्य जनजातियाँ (भूमिया, सवरा, मांझी, सहरिया, कोलाम, मावासी, भील, अंध) मूल निवासी श्रेणी में नहीं; सवरा-मांझी-मावासी को छोड़ उपस्थिति नगण्य।
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