छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा छत्तीसगढ़ की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक भर्ती परीक्षा मानी जाती है। जिस अभ्यर्थी का सपना उप-कलेक्टर, पुलिस उप-अधीक्षक या राज्य के किसी अन्य राजपत्रित अधिकारी पद पर पहुँचने का है, उसके लिए यही मुख्य रास्ता है। हर चक्र में लाखों स्नातक फ़ॉर्म भरते हैं, जिनमें बड़ी संख्या रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग जैसे शहरों के साथ-साथ बस्तर, सरगुजा और कोरबा जैसे इलाक़ों के उन युवाओं की होती है जो नौकरी या पढ़ाई के साथ तैयारी करते हैं।
यह लेख साइट का सबसे विस्तृत गाइड है और इसे इस तरह लिखा गया है कि आप शुरू से पढ़कर एक पूरी रणनीति बना सकें। इसमें आयोग की भूमिका, भर्ती चक्र, पात्रता, आवेदन, तीनों चरण, विषयवार सिलेबस, छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान का लंबा खंड, करंट अफेयर्स और उत्तर-लेखन की रणनीति, हल किए हुए अभ्यास प्रश्न, 12 महीने और 6 महीने की योजना, पुस्तकें, आम गलतियाँ, तुलना और FAQ शामिल हैं। एक बात शुरू में ही साफ़ कर देनी ज़रूरी है: रिक्तियों की संख्या, तिथियाँ, शुल्क, आयु-सीमा, अंक-विभाजन और परीक्षा की अवधि हर अधिसूचना में तय होती है और बदलती भी रही है। इसलिए जहाँ भी संख्या का प्रश्न है, वहाँ यह लेख आपको "अधिसूचना में जाँचें" कहेगा, और ग़लत संख्या देने के बजाय स्थिर ढाँचा समझाएगा। आधिकारिक जानकारी के लिए आयोग की वेबसाइट cgpsc.gov.in ही अंतिम स्रोत है।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग: परिचय और भूमिका
छत्तीसगढ़ 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर देश का 26वाँ राज्य बना। नए राज्य को अपने राजपत्रित अधिकारी चुनने के लिए अपना आयोग चाहिए था, और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का गठन इसी क्रम में हुआ। भारतीय संविधान का भाग 14 (अनुच्छेद 315 से 323) संघ और राज्यों के लोक सेवा आयोगों की व्यवस्था करता है। अनुच्छेद 315 आयोग की स्थापना का प्रावधान देता है, अनुच्छेद 316 सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल बताता है, अनुच्छेद 317 हटाए जाने की प्रक्रिया और अनुच्छेद 320 आयोग के कार्य बताता है। राज्य आयोग का मुख्यालय रायपुर में है।
आयोग का काम सरकार के अधीन सेवाओं में भर्ती के लिए परीक्षाएँ और साक्षात्कार आयोजित करना है। इसके अलावा वह भर्ती नियमों, पदोन्नति, अनुशासनात्मक मामलों और कुछ अन्य विषयों पर सरकार को परामर्श देता है। यह परामर्श सामान्यतः बाध्यकारी नहीं होता, पर आयोग की स्वायत्तता ही उसकी विश्वसनीयता का आधार है। राज्य आयोग के सदस्यों का कार्यकाल संविधान के अनुसार छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो पहले आए, तक रहता है, जबकि संघ आयोग में यह सीमा 65 वर्ष है। परीक्षा में इस तरह के सांविधानिक तथ्य अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें सरसरी तौर पर न पढ़ें।
छत्तीसगढ़ राज्य सेवा परीक्षा को सामान्य भाषा में "सीजीपीएससी" या "स्टेट पीसीएस" कह दिया जाता है। यहाँ "राज्य सेवा" शब्द का मतलब वह संयुक्त परीक्षा है जिसके ज़रिये आयोग कई अलग-अलग विभागों के पदों को एक ही प्रक्रिया से भरता है। बाक़ी परीक्षाएँ, जैसे सहायक प्राध्यापक, सहायक अभियंता, राज्य वन सेवा या सिविल जज, अलग-अलग विज्ञापनों से चलती हैं और उनके लिए अलग लेख हैं (नीचे "संबंधित लेख" देखें)।
नवीनतम अधिसूचना और भर्ती चक्र कैसे काम करता है
भर्ती की शुरुआत विभागों से होती है। विभिन्न विभाग रिक्तियों की जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से आयोग को भेजते हैं। इसके बाद आयोग विज्ञापन जारी करता है जिसमें सेवाओं की सूची, पदों की संख्या, पात्रता, परीक्षा योजना और आवेदन की अवधि होती है। चक्र का सामान्य क्रम नीचे तालिका में है।
| चरण | क्या होता है |
|---|---|
| विज्ञापन/अधिसूचना | सेवाएँ, पद, पात्रता और परीक्षा योजना प्रकाशित होती है |
| ऑनलाइन आवेदन | आयोग के पोर्टल पर पंजीयन और फ़ॉर्म जमा करना |
| प्रारंभिक परीक्षा | वस्तुनिष्ठ परीक्षा; रिक्तियों के कई गुना अभ्यर्थी आगे बढ़ते हैं |
| प्रारंभिक परिणाम | मुख्य परीक्षा के लिए पात्र अभ्यर्थियों की सूची |
| मुख्य परीक्षा | कई दिनों में लिखित वर्णनात्मक प्रश्नपत्र |
| साक्षात्कार | आयोग के बोर्ड के सामने व्यक्तित्व परीक्षण |
| अंतिम परिणाम | मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों से मेरिट, फिर पसंद के आधार पर सेवा आवंटन |
पिछले चक्रों में परीक्षा हमेशा एक तय वार्षिक कैलेंडर पर नहीं चली। कई बार प्रारंभिक, मुख्य और अंतिम परिणाम के बीच लंबा अंतराल रहा, कभी परीक्षा के आकार के कारण, तो कभी न्यायालय में चुनौतियों के कारण। इसका सीधा सबक यह है कि तैयारी किसी एक तारीख़ के भरोसे न करें। अगर आपकी तैयारी अच्छी है तो तारीख़ें खिसकने से नुक़सान कम होगा। अगर आप किसी अनुमानित तारीख़ पर "पीक" करने की योजना बनाते हैं और वह बदल जाए, तो लगातार दबाव में रहना पड़ता है। इसलिए रोलिंग योजना बनाएँ, जिसमें हर महीने पुनरावृत्ति और अभ्यास स्थायी रूप से शामिल हो।
एक व्यावहारिक आदत: आयोग की वेबसाइट पर "विज्ञापन", "परीक्षा कैलेंडर" और "नोटिस" वाले खंड हफ़्ते में एक बार देख लें। समाचार के लिए pareeksha.in/news पर भी नज़र रख सकते हैं, पर किसी भी तारीख़ या शुल्क की पुष्टि आयोग की वेबसाइट से ही करें।
पदों का परिचय: राज्य सेवा परीक्षा से कौन-से करियर खुलते हैं
राज्य सेवा परीक्षा का विज्ञापन हर बार अलग सेवाओं की सूची लेकर आता है। जो पद पिछले चक्रों में सामान्यतः शामिल रहे हैं, उनमें उप-कलेक्टर (राजस्व/सामान्य प्रशासन शाखा) और पुलिस उप-अधीक्षक (DSP) सबसे चर्चित हैं। इनके साथ वाणिज्यिक कर, आबकारी, सहकारिता, जेल, परिवहन, नगरीय प्रशासन और अन्य विभागों के अधिकारी-स्तर के पद शामिल रहे हैं। क्योंकि हर वर्ष की सूची भिन्न होती है, इसलिए किसी एक पद के बारे में यह मान लेना कि वह इस बार भी होगा, जोखिम भरा है। जिन सेवाओं के बारे में हम निश्चित नहीं हैं, उन्हें इस लेख में "अधिसूचना में सूचीबद्ध सेवाएँ" ही कहा गया है।
उप-कलेक्टर
उप-कलेक्टर राजस्व और सामान्य प्रशासन की धुरी है। सामान्यतः वह अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), अर्थात SDM के रूप में एक अनुविभाग की ज़िम्मेदारी संभालता है। इसमें भू-राजस्व और सीमांकन-नामांतरण के विवाद, अर्ध-न्यायिक सुनवाई, चुनाव कार्य, आपदा प्रबंधन, प्रमाणपत्र जारी करने की निगरानी और योजनाओं का क्रियान्वयन आता है। कई वर्षों की सेवा के बाद राज्य की चयन प्रक्रिया से भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति का रास्ता भी है, जो इस पद को लोकप्रिय बनाता है। यह पदोन्नति मिलना निश्चित नहीं होता, वह वरिष्ठता और रिक्तियों पर निर्भर करती है।
पुलिस उप-अधीक्षक (DSP)
DSP अनुविभाग स्तर पर थानों की निगरानी करता है, जाँच की गुणवत्ता देखता है, क़ानून-व्यवस्था बनाए रखता है और पुलिस अधीक्षक की सहायता करता है। इस पद के लिए शारीरिक और चिकित्सीय मानक अलग से लागू होते हैं, जो अधिसूचना में दिए जाते हैं। अगर आपका लक्ष्य पुलिस सेवा है, तो ऊँचाई, सीने और आँखों की शर्तें शुरू में ही अधिसूचना से देख लें, ताकि तैयारी के बाद आश्चर्य न हो। पुलिस भर्ती के निचले स्तरों के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस सब-इंस्पेक्टर और आरक्षक की गाइड अलग हैं।
वाणिज्यिक कर और अन्य वित्तीय/तकनीकी सेवाएँ
वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारी राज्य कर, जैसे वस्तु एवं सेवा कर के प्रशासन, ऑडिट, निर्धारण और अपील से जुड़ा काम देखते हैं। यहाँ काम में लेखा और क़ानून की समझ ज़्यादा लगती है, फ़ील्ड प्रशासन कम। आबकारी, सहकारिता जैसे विभागों में भी अपनी-अपनी तरह की विनियामक ज़िम्मेदारियाँ हैं।
पोस्टिंग और कामकाज का स्वरूप
राज्य सेवा में पोस्टिंग पूरे राज्य में कहीं भी हो सकती है, चाहे रायपुर हो या बस्तर और सरगुजा के दूरस्थ अंचल। आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों में काम करना सेवा का सामान्य हिस्सा है। कई अधिकारी बताते हैं कि यही वर्ष सबसे अर्थपूर्ण रहे, क्योंकि वहाँ सीधे योजनाओं का असर दिखता है। दूसरी ओर, अगर आप सिर्फ़ शहर की पोस्टिंग की अपेक्षा रखते हैं तो यह नौकरी उस अपेक्षा से मेल नहीं खाती। इसे अपनी पसंद-सूची भरते समय ध्यान में रखें।
पदों और रिक्तियों की संरचना
रिक्तियाँ अधिसूचना में सेवा-वार दी जाती हैं। वे अनारक्षित वर्ग और आरक्षित वर्गों में बाँटी जाती हैं और फिर महिलाओं, दिव्यांगजनों, पूर्व सैनिकों आदि के लिए क्षैतिज आरक्षण राज्य के नियमों के अनुसार लगता है। छत्तीसगढ़ में आरक्षण का ढाँचा अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग जैसे वर्गों के लिए है, और राज्य में जनजातीय आबादी के अनुपात के कारण अनुसूचित जनजाति की भूमिका बड़ी है। हाल के वर्षों में आरक्षण के प्रतिशत को लेकर न्यायालयीन और नीतिगत घटनाक्रम रहे हैं, इसलिए सोशल मीडिया पर घूमती हुई कोई भी तालिका न मानें। केवल उसी अधिसूचना की तालिका पर भरोसा करें जो आपके चक्र पर लागू है, और यह भी देखें कि पिछली बार से किसी वर्ग का नियम बदला तो नहीं है।
पात्रता
शैक्षणिक योग्यता
बुनियादी योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय की स्नातक डिग्री है। कई बार अंतिम वर्ष के अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा में बैठने की अनुमति इस शर्त पर मिलती है कि वे अधिसूचना में बताई तारीख़ तक डिग्री का प्रमाण देंगे। कुछ विशेष सेवाओं के लिए अतिरिक्त योग्यता माँगी जा सकती है, इसलिए पद-वार तालिका ध्यान से पढ़ें।
आयु सीमा
न्यूनतम आयु सामान्यतः 21 वर्ष रही है। ऊपरी सीमा के बारे में पिछले कुछ चक्रों में छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए अन्य कई राज्यों की तुलना में अधिक छूट रही है, और आरक्षित वर्गों तथा अन्य श्रेणियों के लिए अतिरिक्त छूट का प्रावधान रहा है। लेकिन ऊपरी सीमा और आयु की गणना की तिथि, दोनों अतीत में बदले हैं, इसलिए दोनों वर्तमान विज्ञापन से लें। अगर आप सीमा के पास हैं तो यह और भी ज़रूरी है, क्योंकि तकनीकी चूक पर दूसरा मौक़ा नहीं मिलता।
मूल निवास, नागरिकता और भाषा
अभ्यर्थी का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। आरक्षण के लाभ के लिए छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना और उसका सही प्रमाण-पत्र महत्त्वपूर्ण है, और राज्य के नियम इस पर बहुत सटीक हैं कि कौन मूल निवासी माना जाएगा और कौन-से दस्तावेज़ मान्य हैं। देवनागरी लिपि में हिंदी का ज्ञान सामान्यतः अपेक्षित होता है। छत्तीसगढ़ी का ज्ञान साक्षात्कार और वास्तविक प्रशासन में लाभ देता है, हालाँकि लिखित प्रश्नपत्र अधिसूचना के अनुसार हिंदी और अंग्रेज़ी में होते हैं।
शारीरिक मानक
DSP और कुछ अन्य पदों के लिए ऊँचाई, सीना और दृष्टि की सीमाएँ अधिसूचना में दी जाती हैं। ये संख्याएँ यहाँ जानबूझकर नहीं लिखी गई हैं, क्योंकि उनमें वर्ग और लिंग के अनुसार अंतर होता है और वे संशोधित हो सकती हैं।
सामान्य पात्रता की जाँच-सूची
आवेदन से पहले पाँच बातें देखें: डिग्री और उसका परिणाम-वर्ष, आयु की गणना-तिथि पर आपकी आयु, जाति और मूल निवास प्रमाण-पत्र की वैधता, नाम और जन्मतिथि की वर्तनी सभी दस्तावेज़ों में एक जैसी होना, तथा जिस सेवा को आप चाहते हैं उसके शारीरिक मानक। इनमें से एक भी अधूरा हो तो पहले उसे ठीक करवाएँ, क्योंकि प्रमाण-पत्र बनवाने में सप्ताह लग सकते हैं।
आवेदन प्रक्रिया
- आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर ऐसे मोबाइल नंबर और ईमेल से खाता बनाएँ जो आप कई वर्षों तक रखेंगे।
- आवेदन पत्र भरें। नाम, जन्मतिथि और श्रेणी वैसी ही लिखें जैसी कक्षा 10वीं और स्नातक के प्रमाण-पत्रों में है।
- सेवाएँ और पद चुनें, वर्ग तथा क्षैतिज आरक्षण के दावे भरें।
- फ़ोटो, हस्ताक्षर और माँगे गए दस्तावेज़ निर्धारित आकार में अपलोड करें।
- शुल्क ऑनलाइन जमा करें। शुल्क वर्ग के अनुसार बदलता है और केवल अधिसूचना से लिया जाना चाहिए।
- फ़ॉर्म का पूर्वावलोकन देखकर जमा करें और पुष्टि की प्रति सुरक्षित रखें।
- प्रवेश पत्र जारी होने पर डाउनलोड करें और परीक्षा केंद्र की जानकारी समय रहते जाँच लें।
अगर सुधार की खिड़की दी गई हो तो उसका सावधानी से उपयोग करें। वर्ग या मूल निवास के दावे की ग़लती वह आम कारण है जिससे अच्छा अभ्यर्थी प्रक्रिया के बाद के चरण में अवसर गँवा देता है। आवेदन अंतिम दिन से पहले भरें, क्योंकि आख़िरी घंटों में पोर्टल धीमा पड़ सकता है।
चयन के चरण
प्रारंभिक परीक्षा
प्रारंभिक परीक्षा वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय होती है और सामान्यतः दो प्रश्नपत्रों में ली जाती रही है: एक सामान्य अध्ययन का और दूसरा अभिरुचि/समझ (सीसैट-शैली) का। दोनों पत्र मेरिट में गिने जाते हैं या दूसरा केवल अर्हकारी होता है, प्रत्येक पत्र में कितने प्रश्न, कितने अंक और कितना समय है, तथा ग़लत उत्तर पर कितना अंक कटता है, यह हर अधिसूचना में तय होता है। पिछले चक्रों में दूसरे पत्र में न्यूनतम अर्हता अंक तय होने की व्यवस्था रही है, पर इसे आप वर्तमान विज्ञापन में ज़रूर पढ़ें। प्रारंभिक परीक्षा केवल यह तय करती है कि कौन आगे बढ़ेगा, और इसके अंक सामान्यतः अंतिम मेरिट में नहीं जुड़ते।
मुख्य परीक्षा
मुख्य परीक्षा लिखित और वर्णनात्मक होती है और कई दिनों में कई प्रश्नपत्रों में ली जाती है। इसमें सामान्य अध्ययन के पत्र प्रमुख होते हैं, और छत्तीसगढ़ से संबंधित सामग्री इन्हीं पत्रों का निर्धारित हिस्सा है, जैसा कि इस परीक्षा में सामान्यतः बताया जाता है। हिंदी भाषा की क्षमता भी किसी न किसी रूप में परखी जाती है, या तो अलग पत्र में या उत्तरों की भाषा के माध्यम से। पुरानी योजनाओं में वैकल्पिक विषय हुआ करते थे और बाद में योजना में बदलाव आए, इसलिए यह तय करने से पहले कि आपको कोई वैकल्पिक विषय चुनना है या नहीं, वर्तमान विज्ञापन और सिलेबस पढ़ें। अंतिम रैंक का सबसे बड़ा हिस्सा मुख्य परीक्षा के अंक तय करते हैं, इसलिए तैयारी का आधा से ज़्यादा समय इसी पर लगना चाहिए।
साक्षात्कार
साक्षात्कार आयोग के बोर्ड के सामने होने वाला व्यक्तित्व परीक्षण है। इसमें आपकी पृष्ठभूमि, जानकारी, निर्णय-क्षमता, संवाद और प्रशासनिक दृष्टिकोण परखा जाता है। इसके अंक मुख्य परीक्षा से कम होते हैं, पर एक ही मेरिट-बैंड में उनका असर रैंक को साफ़ बदल सकता है। सटीक अंक-भार अधिसूचना से देखें।
अंतिम मेरिट और सेवा आवंटन
मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के अंक मिलाकर मेरिट बनती है। इसके बाद रैंक और आपकी सेवा-पसंद के आधार पर सेवा का आवंटन होता है। इसलिए पसंद-क्रम भरते समय ईमानदारी से सोचें कि आप किस काम में टिकेंगे, सिर्फ़ यह नहीं कि किस पद की चर्चा ज़्यादा है।
परीक्षा पैटर्न (सामान्य ढाँचा, अधिसूचना में जाँचें)
| चरण | स्वरूप | सामान्य विशेषताएँ |
|---|---|---|
| प्रारंभिक पेपर 1 | वस्तुनिष्ठ, सामान्य अध्ययन | लगभग सौ प्रश्न; इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और छत्तीसगढ़ |
| प्रारंभिक पेपर 2 | वस्तुनिष्ठ, अभिरुचि/सीसैट | बोधन, तर्कशक्ति, आधारभूत गणित, आँकड़ा विश्लेषण; अक्सर अर्हकारी, जाँचें |
| मुख्य परीक्षा | वर्णनात्मक | सामान्य अध्ययन के कई पत्र, छत्तीसगढ़ आधारित सामग्री और भाषा का आकलन |
| साक्षात्कार | मौखिक | आयोग का बोर्ड; व्यक्तित्व और जागरूकता |
ऋणात्मक अंकन, यदि लागू हो, पिछले चक्रों में प्रति प्रश्न के अंकों का एक भाग रहा है। जिस चक्र के लिए आप तैयारी कर रहे हैं, उसके निर्देश-पत्र में इसे देखें, क्योंकि ऋणात्मक अंकन के अनुसार आपकी "अंदाज़ा लगाने" की रणनीति बदलेगी। सामान्य नियम यह है कि अगर आप दो विकल्प निश्चित रूप से काट सकते हैं तो अनुमान से उत्तर दें, अन्यथा उसे छोड़ दें।
वेतनमान और करियर ग्रोथ
राजपत्रित अधिकारी के पदों का वेतन राज्य सरकार के वेतनमान और वर्तमान वेतन संरचना के अनुसार तय होता है, और विभाग तथा पद के अनुसार अलग-अलग रहता है। सटीक वेतन-स्तर इस लेख में नहीं दिया जा रहा, क्योंकि वह पे-कमीशन के संशोधन और पद के ग्रेड पर निर्भर करता है। इसे विज्ञापन के "वेतनमान" खंड में देखें। करियर ग्रोथ के लिए सामान्य क्रम यह है कि परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर स्थायीकरण होता है, फिर वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नतियाँ मिलती हैं। कुछ सेवाओं में केंद्र की सेवाओं में शामिल होने का चयन मार्ग भी है, जैसे उप-कलेक्टर से IAS और DSP से IPS। यह मार्ग सबको नहीं मिलता, वरिष्ठता, रिक्तियों और चयन समिति पर निर्भर है, इसलिए इसे वादे के रूप में न समझें।
विस्तृत सिलेबस और हर हिस्से की तैयारी कैसे करें
आयोग का आधिकारिक सिलेबस ही अंतिम है। नीचे का ढाँचा उसी की सामान्य विषय-सूची के अनुसार बनाया गया है, और हर विषय के साथ यह भी बताया गया है कि किस तरह पढ़ना सबसे कारगर रहता है। तैयारी शुरू करने से पहले सिलेबस को प्रिंट करके हर टॉपिक के आगे "पढ़ा", "दोहराया", "टेस्ट में परखा" के कॉलम बनाएँ।
इतिहास (भारत)
प्राचीन भारत। सिंधु घाटी सभ्यता से गुप्त-उत्तर काल तक: स्थल, नगर-योजना, वैदिक समाज, महाजनपद, मौर्य और गुप्त प्रशासन, धार्मिक आंदोलन (बौद्ध, जैन), कला-स्थापत्य। यहाँ तारीख़ें कम और प्रवृत्तियाँ ज़्यादा पूछी जाती हैं, जैसे किसी काल की अर्थव्यवस्था कैसी थी, समाज कैसे बदला।
मध्यकालीन भारत। दिल्ली सल्तनत, मुग़ल प्रशासन, भक्ति और सूफ़ी आंदोलन, क्षेत्रीय राज्य, कृषि-व्यापार और वास्तुकला। मराठा शक्ति का उभार इसलिए ज़रूरी है कि छत्तीसगढ़ ने बाद में भोंसले शासन का दौर देखा।
आधुनिक भारत। यूरोपीय आगमन, 1857, सामाजिक-धार्मिक सुधार, राष्ट्रीय आंदोलन के चरण (नरम दल, उग्र दल, गांधी युग, क्रांतिकारी आंदोलन, संवैधानिक विकास), स्वतंत्रता और विभाजन। संवैधानिक विकास (1909, 1919, 1935 के अधिनियम) को एक तालिका में रखकर याद करें।
कैसे पढ़ें: एनसीईआरटी का इतिहास पढ़कर आधार बनाएँ, फिर एक प्रतियोगी स्तर की पुस्तक से गहराई में जाएँ। हर अध्याय के अंत में तीन "क्यों" वाले प्रश्न बनाकर उत्तर लिखें, यह मुख्य परीक्षा की सीधी तैयारी है।
भूगोल (भारत और विश्व)
भौतिक भूगोल में भू-आकृतियाँ, जलवायु, मानसून की क्रियाविधि, मृदा, वनस्पति। भारत में नदी तंत्र, कृषि, खनिज और उद्योग, परिवहन। विश्व भूगोल में प्रमुख महासागर, जलवायु प्रदेश और संसाधन। नक़्शे पर काम किए बिना यह विषय अधूरा है। हर दिन 10 मिनट खाली नक़्शे पर नदियाँ, खनिज-पट्टियाँ और राष्ट्रीय उद्यान भरने की आदत बहुत काम आती है।
भारतीय राजव्यवस्था और शासन
प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व, मौलिक कर्तव्य, संसद, राष्ट्रपति, राज्यपाल, मंत्रिपरिषद, न्यायपालिका, संघवाद, आपातकाल, संशोधन प्रक्रिया, संवैधानिक निकाय और पंचायती राज। शासन के हिस्से में सूचना का अधिकार, ई-गवर्नेंस, सामाजिक अंकेक्षण, नागरिक घोषणा-पत्र और शिकायत निवारण प्रणाली आती है।
कैसे पढ़ें: अनुच्छेदों की संख्याएँ रटने से पहले उनका तर्क समझें, जैसे मौलिक अधिकार क्यों न्यायालय में लागू कराए जा सकते हैं और नीति निदेशक तत्व क्यों नहीं। फिर हर बड़े संवैधानिक निकाय (चुनाव आयोग, वित्त आयोग, लोक सेवा आयोग, नियंत्रक-महालेखा परीक्षक) की नियुक्ति-कार्य-हटाने की प्रक्रिया की एक पंक्ति लिखें।
अर्थव्यवस्था
वृद्धि और विकास, मुद्रास्फीति के प्रकार, मौद्रिक और राजकोषीय नीति, बैंकिंग, बजट की शब्दावली, कराधान (GST सहित), योजना आयोग से नीति आयोग तक, कृषि, ग़रीबी और बेरोज़गारी, वित्तीय समावेशन। हर साल का आर्थिक सर्वेक्षण और बजट का सार पढ़ना करंट अफेयर्स और मुख्य परीक्षा दोनों में काम आता है।
सामान्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण
स्कूल-स्तर का भौतिक, रसायन और जीव विज्ञान, मानव स्वास्थ्य और रोग, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, रक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी के हाल के अनुप्रयोग। पर्यावरण में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, संरक्षित क्षेत्र, प्रदूषण और सतत विकास। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में खनन, वन और आदिवासी आजीविका के टकराव मुख्य परीक्षा और निबंध के स्वाभाविक विषय हैं।
सीसैट (अभिरुचि पत्र)
- बोधन (हिंदी/अंग्रेज़ी): अनुच्छेद पढ़कर निष्कर्ष, मुख्य विचार और लेखक के दृष्टिकोण वाले प्रश्न। रोज़ दो अनुच्छेद हल करें।
- तार्किक और विश्लेषणात्मक क्षमता: श्रृंखला, कोडिंग-डिकोडिंग, रक्त-संबंध, दिशा, बैठक-व्यवस्था, कथन-निष्कर्ष।
- आधारभूत गणित: संख्या पद्धति, प्रतिशत, अनुपात, औसत, समय-कार्य, समय-दूरी, लाभ-हानि, ब्याज, क्षेत्रमिति (कक्षा 10 तक का स्तर)।
- आँकड़ा विश्लेषण: तालिका, ग्राफ़ और चार्ट से तुलना और प्रतिशत निकालना।
- निर्णय-क्षमता और अंतर-वैयक्तिक कौशल: कुछ चक्रों में परिस्थिति-आधारित प्रश्न आते हैं।
कैसे पढ़ें: यह पत्र अक्सर अर्हकारी होता है, फिर भी इसे हल्के में लेना अभ्यर्थियों को अचानक बाहर कर देता है, विशेषकर विज्ञान/मानविकी की पृष्ठभूमि वाले जो गणित से डरते हैं। सप्ताह में तीन दिन 45 मिनट गणित और रोज़ 30 मिनट बोधन पर्याप्त होता है।
हिंदी भाषा और निबंध/सामान्य लेखन
मुख्य परीक्षा में भाषा की परख अक्सर निबंध, सारांश, पत्र-लेखन, अनुवाद और व्याकरण की शुद्धता से होती है। शब्द-शुद्धि, वाक्य-रचना, मुहावरे और लोकोक्तियाँ, तथा प्रशासनिक पत्राचार का प्रारूप देखें। यहाँ जो अंक आपकी लेखन-शैली से आते हैं, वे तेज़ी से जुड़ते हैं, इसलिए हफ़्ते में एक निबंध लिखकर किसी से जँचवाना बहुत कारगर है।
मुख्य परीक्षा में विषयों का बँटवारा (समझने के लिए)
मुख्य परीक्षा में इन्हीं विषयों को गहराई और विश्लेषण के साथ पूछा जाता है। सामान्यतः इतिहास-संस्कृति, राजव्यवस्था-प्रशासन, अर्थव्यवस्था-भूगोल-पर्यावरण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और एक निर्धारित हिस्सा छत्तीसगढ़ आधारित सामग्री का होता है, पर कौन-सा पत्र किन खंडों का है, किसमें कितने अंक और कितना समय है, यह वर्तमान अधिसूचना का सिलेबस तय करता है। अगर विज्ञापन में कोई वैकल्पिक विषय हो तो वही विषय चुनें जिसमें आपकी स्नातक की पृष्ठभूमि हो, जिसका सिलेबस छोटा और अद्यतन हो, और जिसके लिए आपको अच्छे नोट्स या मार्गदर्शन मिल सकें। अगर योजना में वैकल्पिक विषय नहीं है, तो उसकी जगह सामान्य अध्ययन का अभ्यास बढ़ाएँ।
छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान: विस्तृत खंड
राज्य सेवा परीक्षा में छत्तीसगढ़ का हिस्सा वही जगह है जहाँ स्थानीय अभ्यर्थी को बढ़त मिलती है, बशर्ते वह इसे व्यवस्थित ढंग से पढ़े। नीचे दिए गए तथ्य वे हैं जो व्यापक रूप से स्थापित हैं। जहाँ संख्याएँ बदलती रहती हैं (ज़िलों की संख्या, योजनाएँ, आँकड़े), वहाँ यह स्पष्ट लिखा है कि उन्हें अद्यतन स्रोत से जाँचें।
प्राचीन इतिहास: दक्षिण कोसल
प्राचीन काल में आज के छत्तीसगढ़ के बड़े हिस्से को दक्षिण कोसल कहा जाता था। यह नाम उत्तर कोसल (अयोध्या क्षेत्र) से इसे अलग दिखाने के लिए प्रयुक्त होता है। पौराणिक परंपरा में इसे भगवान राम की माता कौशल्या के मायके से जोड़ा जाता है, और इसी कारण छत्तीसगढ़ में राम को "भांजा" कहने की परंपरा है। यह परंपरा सांस्कृतिक मान्यता के रूप में परीक्षा में पूछी जाती है, इसे इतिहास के प्रमाण की तरह न लिखें, बल्कि "परंपरा के अनुसार" लिखें।
ऐतिहासिक काल के कुछ प्रमुख राजवंश और उनसे जुड़े क्षेत्र इस प्रकार हैं:
| राजवंश/काल | संबंधित क्षेत्र या पहचान |
|---|---|
| शरभपुरीय वंश | प्रारंभिक ऐतिहासिक काल का क्षेत्रीय वंश; ताम्रपत्र और सिक्के |
| पांडुवंश (सोमवंश) | श्रीपुर (सिरपुर) को राजधानी बनाने के लिए प्रसिद्ध; महाशिवगुप्त बालार्जुन प्रमुख शासक |
| नलवंश | बस्तर अंचल (कोरापुट-बस्तर क्षेत्र) में; बाद के काल के प्रसिद्ध शासन-क्षेत्रों में से एक |
| कलचुरि वंश | रतनपुर और रायपुर शाखाएँ; मध्यकाल में छत्तीसगढ़ का बड़ा भाग |
| नागवंश | कवर्धा-भोरमदेव क्षेत्र; भोरमदेव मंदिर से जुड़े |
| बस्तर के काकतीय/चालुक्य वंशी शासक | बस्तर रियासत की परंपरा; दंतेश्वरी देवी की उपासना |
इस तालिका में विद्वानों के बीच कुछ वंशों की तिथियों और शासकों पर मतभेद हैं। इसलिए परीक्षा-तैयारी में किसी मानक पाठ्य-पुस्तक में दिया गया क्रम ही याद रखें, और निबंध या मुख्य परीक्षा के उत्तर में स्थापित बातें ही लिखें।
सिरपुर। महासमुंद ज़िले में महानदी के किनारे स्थित श्रीपुर पांडुवंशी काल का बड़ा केंद्र था। यहाँ ईंटों से बना लक्ष्मण मंदिर प्रसिद्ध है, जिसे भारत में ईंट-मंदिर वास्तुकला के श्रेष्ठ उदाहरणों में गिना जाता है। साथ ही यहाँ बौद्ध विहारों और स्थापत्य के अवशेष मिले हैं, जो इसे बौद्ध और शैव, दोनों परंपराओं का महत्त्वपूर्ण स्थल बनाते हैं। चीनी यात्री ह्वेनसांग के दक्षिण कोसल आने का उल्लेख भी इस काल के संदर्भ में किया जाता है।
भोरमदेव। कबीरधाम (कवर्धा) ज़िले में स्थित भोरमदेव का शिव मंदिर नागवंशी काल का माना जाता है और अपनी पत्थर की नक़्क़ाशी के कारण इसे "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" कहा जाता है। "भोरमदेव" नाम गोंड जनजाति के देवता "भोरम" या महादेव से जुड़ा बताया जाता है।
मल्हार और अन्य स्थल। बिलासपुर के पास मल्हार प्राचीन बस्ती और मंदिर-अवशेषों का बड़ा केंद्र है, जिसे पातालेश्वर मंदिर और डिंडेश्वरी देवी की मूर्ति से भी जोड़ा जाता है। रतनपुर कलचुरि राजधानी और महामाया मंदिर के लिए जाना जाता है। राजिम को "छत्तीसगढ़ का प्रयाग" कहा जाता है, क्योंकि यहाँ महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का संगम है, और यहाँ राजीव लोचन मंदिर तथा माघ पूर्णिमा का प्रसिद्ध मेला है।
मध्यकाल और मराठा शासन
कलचुरियों के पतन के बाद 18वीं सदी के मध्य में नागपुर के भोंसले शासकों ने छत्तीसगढ़ पर नियंत्रण स्थापित किया। इस अवधि में प्रशासन में स्थानीय ज़मींदारियों की भूमिका बड़ी रही। 1854 के आसपास अंतिम भोंसले शासक के निधन के बाद अंग्रेज़ों ने डलहौज़ी की व्यपगत नीति के तहत क्षेत्र का अधिग्रहण किया। इस क्रम में तिथियाँ याद रखने के लिए अपनी मानक पुस्तक का ही सहारा लें, क्योंकि स्रोतों में एक-दो वर्षों का अंतर मिल सकता है।
स्वतंत्रता आंदोलन में छत्तीसगढ़
- वीर नारायण सिंह। सोनाखान के ज़मींदार, जिन्हें 1857 के संघर्ष में छत्तीसगढ़ का पहला शहीद माना जाता है। कहा जाता है कि अकाल के समय उन्होंने व्यापारी के अनाज-भंडार से अनाज बाँटा, जिसके बाद ब्रिटिश प्रशासन से टकराव हुआ। उन्हें दिसंबर 1857 में रायपुर में फाँसी दी गई।
- भूमकाल आंदोलन (1910)। बस्तर के आदिवासियों का ब्रिटिश-विरोधी और शोषण-विरोधी आंदोलन, जिसके नेतृत्व के रूप में गुंडाधूर का नाम लिया जाता है। इसके कारणों में वन नीति, बेगारी और स्थानीय शोषण की चर्चा की जाती है।
- कंडेल नहर सत्याग्रह (1920)। धमतरी के कंडेल गाँव में सिंचाई कर के नाम पर अनुचित वसूली के विरोध में हुआ आंदोलन, जिसका नेतृत्व पंडित सुंदरलाल शर्मा और बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव जैसे नेताओं से जोड़ा जाता है। इसी दौर में गांधी जी का छत्तीसगढ़ आगमन हुआ।
- राजनांदगाँव का मज़दूर आंदोलन। इस क्षेत्र की मिल में मज़दूरों की हड़ताल 1920 के आसपास के दौर की प्रमुख घटना मानी जाती है, जिसमें ठाकुर प्यारेलाल सिंह का नाम आता है।
- अन्य प्रमुख व्यक्तित्व। पंडित सुंदरलाल शर्मा को छत्तीसगढ़ में सामाजिक सुधार, विशेषकर अस्पृश्यता-निवारण, के लिए भी याद किया जाता है। डॉ. खूबचंद बघेल और पंडित रविशंकर शुक्ल जैसे नाम भी क्षेत्रीय राजनीति और आंदोलन के संदर्भ में आते हैं।
पृथक राज्य की माँग और गठन
अलग छत्तीसगढ़ की माँग बीसवीं सदी में बार-बार उठी और 1990 के दशक में एक संगठित जन-आंदोलन के रूप में मज़बूत हुई। संसद ने मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 पारित किया और 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ भारत का 26वाँ राज्य बना। पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी थे। राजधानी रायपुर है, और उसके पास नया रायपुर (अटल नगर) प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। उच्च न्यायालय बिलासपुर में है। विधानसभा में 90 सीटें हैं, लोकसभा में राज्य की 11 सीटें और राज्यसभा में 5 सीटें हैं। संदर्भ के लिए 1 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस मनाया जाता है।
भूगोल: भौतिक विभाग
छत्तीसगढ़ का क्षेत्रफल लगभग 1.35 लाख वर्ग किलोमीटर है और यह क्षेत्रफल में देश के शीर्ष दस राज्यों में गिना जाता है। जनगणना 2011 के अनुसार राज्य की जनसंख्या लगभग 2.55 करोड़ थी। कर्क रेखा राज्य के उत्तरी भाग, सरगुजा अंचल, से गुज़रती है। परीक्षा के लिए राज्य को तीन बड़े भौतिक भागों में समझना सुविधाजनक है:
- छत्तीसगढ़ का मैदान। मध्य भाग का उपजाऊ मैदान, जो महानदी और उसकी सहायक नदियों से बना है और धान की खेती के लिए जाना जाता है।
- उत्तर का पठारी क्षेत्र। सरगुजा और आसपास का पठारी-पहाड़ी भाग, जिसमें मैनपाट, सामरी पाट जैसे पाट क्षेत्र और घने वन हैं।
- दक्षिण का दंडकारण्य/बस्तर पठार। दक्षिणी भाग में बस्तर का पठारी और वनाच्छादित क्षेत्र, जिसमें बैलाडीला की पहाड़ियाँ और इंद्रावती का प्रवाह क्षेत्र आता है।
नदियाँ और जल-संसाधन
- महानदी। राज्य की सबसे प्रमुख नदी। इसका उद्गम धमतरी ज़िले के सिहावा क्षेत्र में माना जाता है, और यह आगे ओडिशा से होकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। हसदेव, शिवनाथ, अरपा, पैरी, सोंढूर, जोंक और कुछ अन्य इसकी सहायक नदियाँ हैं। छत्तीसगढ़ की नदियों में महानदी की लंबाई और जलग्रहण क्षेत्र सबसे अधिक है।
- शिवनाथ। महानदी की एक प्रमुख सहायक नदी, जो राजनांदगाँव-दुर्ग के मैदान से गुज़रती है।
- हसदेव। उत्तरी क्षेत्र में बहने वाली नदी, जिस पर बांगो बाँध (मिनीमाता बांगो बाँध) है। हसदेव क्षेत्र कोयला-खनन और वनों को लेकर चर्चा में रहता है।
- इंद्रावती। बस्तर की प्रमुख नदी, जो गोदावरी नदी तंत्र में मिलती है। चित्रकोट जलप्रपात इसी नदी पर है।
- अन्य। अरपा (बिलासपुर), खारून (रायपुर), पैरी और सोंढूर (राजिम क्षेत्र), तथा गोदावरी बेसिन की सबरी (कोलाब) जैसी नदियाँ।
राज्य की नदियाँ दो बड़े तंत्रों में आती हैं, यानी महानदी तंत्र और गोदावरी तंत्र, साथ ही उत्तर के एक हिस्से में गंगा तंत्र की सहायक नदियाँ भी हैं। परीक्षा में अक्सर "कौन-सी नदी किस बेसिन में जाती है" पूछा जाता है, इसलिए एक छोटा नक़्शा बनाकर पक्का कर लें। प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में गंगरेल बाँध (रविशंकर सागर, धमतरी) और दुधावा, तथा हसदेव-बांगो का नाम आता है।
वन, वन्यजीव और संरक्षित क्षेत्र
राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग चौथाई से अधिक हिस्सा वन-आच्छादित है, और अभिलिखित वन क्षेत्र इससे भी ज़्यादा है। आँकड़े हर द्विवार्षिक वन स्थिति रिपोर्ट में बदलते हैं, इसलिए नवीनतम प्रतिशत उसी रिपोर्ट से देखें। राज्य के प्रमुख संरक्षित क्षेत्र इस प्रकार हैं:
- इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिज़र्व (बीजापुर क्षेत्र), जो जंगली भैंसे के लिए जाना जाता है।
- कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (बस्तर), जिसमें कुटुमसर गुफा, तीरथगढ़ जलप्रपात और बस्तर की पहाड़ी मैना का आवास आता है।
- गुरु घासीदास (तमोर पिंगला) राष्ट्रीय उद्यान (उत्तरी क्षेत्र)।
- अचानकमार-अमरकंटक और उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व, जो बाघ संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
राज्य के प्रतीक: राज्य पशु वन भैंसा (जंगली भैंसा), राज्य पक्षी बस्तर की पहाड़ी मैना, और राज्य वृक्ष साल (सरई) है। राज्यगीत "अरपा पैरी के धार" है, जिसके रचयिता नरेंद्र देव वर्मा हैं।
खनिज और उद्योग
खनिज संसाधन राज्य की आर्थिक रीढ़ में गिने जाते हैं। कोयला मुख्यतः कोरबा, रायगढ़ और सरगुजा-कोरिया क्षेत्र में, लौह अयस्क बैलाडीला (दंतेवाड़ा-बीजापुर) और दल्ली-राजहरा (बालोद) में मिलता है। चूना-पत्थर और डोलोमाइट, बॉक्साइट तथा अन्य खनिज भी मिलते हैं। टिन के संदर्भ में यह कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ देश का इकलौता टिन-अयस्क उत्पादक राज्य है, जिसके भंडार बस्तर क्षेत्र में हैं। बैलाडीला के लौह अयस्क का बड़ा हिस्सा निर्यात होता रहा है।
उद्योग के मुख्य केंद्र: दुर्ग ज़िले के भिलाई में सार्वजनिक क्षेत्र का भिलाई इस्पात संयंत्र, जिसकी स्थापना सोवियत संघ के सहयोग से हुई और जो 1950 के दशक के उत्तरार्ध में शुरू हुआ। कोरबा में ताप विद्युत संयंत्र और एल्युमीनियम उत्पादन का बड़ा केंद्र है, जिसके कारण कोरबा को राज्य की "ऊर्जा राजधानी" कहा जाता है। रायगढ़ और बिलासपुर क्षेत्र में स्टील और सीमेंट के उद्योग हैं, और चाँपा-रायगढ़ क्षेत्र कोसा रेशम के लिए जाना जाता है।
कृषि और अर्थव्यवस्था
धान राज्य की प्रमुख फ़सल है और छत्तीसगढ़ को "धान का कटोरा" कहा जाता है। धान के साथ मक्का, दलहन (अरहर, चना, उड़द), तिलहन तथा कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाज (मिलेट) उगाए जाते हैं। सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की सरकारी ख़रीद करती है, और उसका एक भाग सार्वजनिक वितरण प्रणाली में जाता है। राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अन्य राज्यों के लिए उदाहरण के रूप में चर्चा में रखा जाता है। लघु वनोपज, जैसे तेंदूपत्ता, महुआ, लाख, चिरौंजी और इमली, आदिवासी अर्थव्यवस्था का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं, और इनके संग्रहण-विपणन में राज्य लघु वनोपज संघ की भूमिका है।
राज्य की कल्याणकारी योजनाएँ सरकार बदलने के साथ बदलती रहती हैं। पिछले वर्षों में महतारी वंदन योजना, धान ख़रीदी की बढ़ी क़ीमत और पिछली सरकार की गोधन न्याय योजना जैसी योजनाएँ ख़बरों में रहीं। इनकी सही राशि, पात्रता और स्थिति पर परीक्षा के लिए केवल नवीनतम बजट भाषण और सरकारी पोर्टल पर भरोसा करें, पुरानी किताब पर नहीं। परीक्षा में योजनाओं से जुड़ा प्रश्न अक्सर "किस विभाग की", "लाभार्थी कौन" या "उद्देश्य क्या" जैसा होता है।
जनजातियाँ और समाज
छत्तीसगढ़ में जनजातीय जनसंख्या का प्रतिशत देश के औसत से काफ़ी अधिक है, और 2011 की जनगणना में यह लगभग 30 प्रतिशत के आसपास था। गोंड सबसे बड़ी जनजाति है। अन्य प्रमुख जनजातियों में कंवर, उरांव, हल्बा, बिंझवार, मुरिया, माड़िया, भतरा, बैगा और कमार आते हैं। विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (PVTG) में कमार, अबूझमाड़िया, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर और बैगा जैसे समूहों का नाम लिया जाता है। PVTG की सटीक सूची और संख्या किसी अद्यतन सरकारी स्रोत से मिलान करके ही याद करें। समाज में गोदना (टैटू) की परंपरा, घोटुल जैसी संस्थाओं की चर्चा (जो अब बदलते रूप में हैं), और सामुदायिक अधिकार और पर्व-आधारित जीवन विशिष्ट पहचान हैं।
भाषा, कला और साहित्य
- भाषा। छत्तीसगढ़ी राज्य की प्रमुख भाषा है, जिसे 2007 में राज्य की राजभाषा घोषित करने का क़ानून बना, और बाद में राजभाषा आयोग गठित हुआ। बोलियों में हल्बी, गोंडी, कुड़ुख (उरांव), सादरी और सरगुजिहा का नाम प्रमुखता से आता है।
- लोक नृत्य और गायन। पंथी (सतनामी समाज का नृत्य, गुरु घासीदास के संदेश से जुड़ा), पंडवानी (महाभारत की कथा का गायन, तीजन बाई इसकी सबसे प्रसिद्ध कलाकार), राउत नाचा (यादव समुदाय का दिवाली के आसपास का नृत्य), कर्मा, सुआ (महिलाओं का दिवाली के आसपास का नृत्य) और गौर माड़िया नृत्य।
- शिल्प। बस्तर का ढोकरा (धातु ढलाई) शिल्प, बेलमेटल, कोंडागाँव का लकड़ी और टेराकोटा का काम, और कोसा रेशम।
- पर्व और मेले। बस्तर दशहरा (लगभग 75 दिनों का असामान्य रूप से लंबा पर्व, जिसका संबंध रावण-दहन से नहीं बल्कि स्थानीय देवी और रथ-यात्रा से है), हरेली (कृषि-पर्व), तीजा, पोला, गोंचा (बस्तर की रथ यात्रा), राजिम कुंभ/माघी पुन्नी मेला और मड़ई।
- साहित्य। आधुनिक हिंदी साहित्य में गजानन माधव मुक्तिबोध और पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी छत्तीसगढ़ से जुड़े बड़े नाम हैं, और विनोद कुमार शुक्ल को हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। छत्तीसगढ़ी साहित्य में पंडित सुंदरलाल शर्मा की "दानलीला" प्रारंभिक कृतियों में मानी जाती है।
प्रशासनिक ढाँचा
राज्य में संभागों की परंपरागत संख्या पाँच रही है: रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा। ज़िलों की संख्या गठन के समय 16 थी, जो नए ज़िलों के बनने से कई बार बढ़ी है और वर्तमान संख्या तथा नवगठित ज़िलों के मुख्यालय आपको किसी ताज़ा सरकारी सूची से देखने चाहिए, क्योंकि यह अक्सर बदले जाने वाला और अक्सर पूछा जाने वाला विषय है। प्रशासन की इकाइयाँ हैं संभाग (आयुक्त), ज़िला (कलेक्टर), अनुविभाग (SDM), तहसील और ग्राम स्तर पर पटवारी हलका। पटवारी की भर्ती के बारे में व्यापम पटवारी गाइड देख सकते हैं।
पंचायती राज
संविधान का 73वाँ संशोधन (1992) पंचायतों को सांविधानिक दर्जा देता है, जो 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ। इसके तहत भाग 9 और अनुच्छेद 243 से 243-O तक की व्यवस्था है। छत्तीसगढ़ में त्रिस्तरीय व्यवस्था है: ग्राम पंचायत (गाँव), जनपद पंचायत (विकासखंड) और ज़िला पंचायत (ज़िला)। राज्य में पंचायत राज अधिनियम, 1993 (मध्य प्रदेश के अधिनियम से विरासत में मिला) लागू रहा है और उसमें समय-समय पर संशोधन हुए हैं। ग्राम सभा इसकी बुनियाद है। अनुसूचित क्षेत्रों के लिए पेसा अधिनियम, 1996 ग्राम सभा को विशेष अधिकार देता है, जैसे लघु वनोपज और भूमि-हस्तांतरण जैसे मामलों में। पाँचवीं अनुसूची के अनुसार राज्य के बड़े जनजातीय क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र हैं। इसके साथ वन अधिकार अधिनियम, 2006 पढ़ें, जो वन में रहने वालों के व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकार मान्य करता है। राज्य ने पेसा के नियम बनाए हैं, और उनके प्रावधान समय के साथ बदले हैं, इसलिए ताज़ा जानकारी देखें।
छत्तीसगढ़ पढ़ने का तरीक़ा
इस पूरे खंड को चार परतों में पढ़ें। पहली परत: इतिहास की समयरेखा और भूगोल का नक़्शा। दूसरी परत: संस्कृति, कला और स्थलों की सूची। तीसरी परत: अर्थव्यवस्था और योजनाओं की अद्यतन जानकारी। चौथी परत: प्रश्नों से जोड़ना, यानी हर विषय के लिए पाँच संभावित प्रश्न बनाना। एक कॉपी में "छत्तीसगढ़ एक पेज पर" तैयार करें, जिसमें एक ही तालिका में ज़िले, नदियाँ, खनिज-क्षेत्र, प्रमुख स्थल और व्यक्तित्व हों। यह पेज परीक्षा से पहले के दो हफ़्तों में सबसे ज़्यादा काम आता है।
करंट अफेयर्स की रणनीति
करंट अफेयर्स राज्य सेवा परीक्षा में तीन स्तरों पर चलता है: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाएँ, राज्य की घटनाएँ, और विषय-आधारित मुद्दे जो मुख्य परीक्षा में विश्लेषण के रूप में पूछे जाते हैं। ज़्यादातर अभ्यर्थी इसे "ख़बरें पढ़ना" मान लेते हैं और महीनों बाद पाते हैं कि कुछ याद नहीं। इसे नियमित प्रक्रिया बनाएँ।
दैनिक 40 मिनट। एक हिंदी या अंग्रेज़ी का अच्छा अख़बार पढ़ें, संपादकीय पृष्ठ और राज्य पृष्ठ ख़ासकर। नोट्स तीन शीर्षकों में बनाएँ: तथ्य (जो प्रारंभिक में काम आएँगे), विश्लेषण (कारण-परिणाम-समाधान जो मुख्य में काम आएँगे), और छत्तीसगढ़ (राज्य से जुड़ी हर ख़बर)। ख़बरों का संकलन pareeksha.in/news पर भी देख सकते हैं, पर उससे नोट्स की जगह न लें।
साप्ताहिक पुनरावृत्ति। हर रविवार एक घंटा उस हफ़्ते के नोट्स को तीन पंक्तियों में समेटें। मासिक संकलन पूरा होने पर उसके 30 प्रश्न बनाकर खुद हल करें।
किन विषयों को प्राथमिकता दें। सरकारी योजनाएँ (विभाग, उद्देश्य, लाभार्थी), नई नियुक्तियाँ और पुरस्कार, रिपोर्ट और सूचकांक (जारीकर्ता संस्था और भारत/छत्तीसगढ़ की स्थिति), अंतरराष्ट्रीय संगठन और समझौते, विज्ञान-प्रौद्योगिकी की उपलब्धियाँ, खेल की बड़ी घटनाएँ, और छत्तीसगढ़ में नए ज़िले, बजट, बड़ी परियोजनाएँ, संरक्षण घोषणाएँ और आदिवासी कल्याण से जुड़े निर्णय।
समय-सीमा। प्रारंभिक परीक्षा के लिए सामान्यतः परीक्षा से पिछले 12 महीने और मुख्य के लिए 12 से 18 महीने का करंट पर्याप्त माना जाता है, पर अधिसूचना की तारीख़ खिसकने पर यह खिड़की भी खिसकेगी।
उत्तर-लेखन की रणनीति (मुख्य परीक्षा)
मुख्य परीक्षा में अच्छे अंक वही अभ्यर्थी लाते हैं जिन्होंने लिखने का अभ्यास किया हो, चाहे उनकी जानकारी दूसरों जितनी ही क्यों न हो। इसलिए तैयारी के छठे महीने से ही हफ़्ते में कम से कम दो उत्तर-लेखन सत्र रखें।
उत्तर का सामान्य ढाँचा
- भूमिका (2 से 3 पंक्तियाँ): प्रश्न की मुख्य अवधारणा को परिभाषित करें या एक प्रासंगिक तथ्य/आँकड़े से शुरू करें।
- मुख्य भाग: बिंदुओं या छोटे अनुच्छेदों में तर्क दें, हर बिंदु के साथ एक उदाहरण, संवैधानिक प्रावधान या छत्तीसगढ़ का संदर्भ जोड़ें।
- आलोचना/चुनौतियाँ (जहाँ प्रश्न पूछे): संतुलित दृष्टि रखें।
- निष्कर्ष: आगे का रास्ता या सकारात्मक समाधान, 2 पंक्तियों में।
प्रश्न के निर्देशात्मक शब्द
- "वर्णन कीजिए": तथ्यों को क्रम से बताएँ।
- "विश्लेषण कीजिए": कारण, प्रभाव और संबंधों को खोलकर लिखें।
- "आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए": पक्ष-विपक्ष दोनों रखें और निष्कर्ष दें।
- "चर्चा कीजिए": विभिन्न दृष्टिकोण रखें, फिर अपनी संतुलित राय दें।
समय और शब्द-सीमा
प्रश्नपत्र में प्रत्येक प्रश्न के लिए शब्द-सीमा दी होगी। शब्द-सीमा से अत्यधिक बाहर जाने पर समय कम पड़ता है। अभ्यास में हर प्रश्न को घड़ी लगाकर लिखें और अंत में देखें कि कितनी पंक्तियाँ लिखीं, ताकि वास्तविक परीक्षा के लिए अंदाज़ा बन जाए। हस्तलेख साफ़ रखें, शीर्षक रेखांकित करें और बिंदुओं का उपयोग करें ताकि परीक्षक को उत्तर आसानी से पढ़ने को मिले।
छत्तीसगढ़ आधारित उत्तरों के लिए सुझाव
छत्तीसगढ़ के प्रश्नों में उदाहरण और स्थानीय नाम अंक बढ़ाते हैं, इसलिए हर विषय के लिए दो-तीन स्थानीय उदाहरण अपनी नोटबुक में रखें। उदाहरण के लिए "जनजातीय विकास" पर उत्तर में पेसा, वन अधिकार अधिनियम, लघु वनोपज संग्रहण और विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों के विकास का उल्लेख उत्तर को ठोस बनाता है। पर जो तथ्य पक्का नहीं है, उसे लिखने के बजाय सामान्य रूप में लिखें, क्योंकि ग़लत तथ्य से अंक कट सकते हैं।
हल किए हुए अभ्यास प्रश्न
नीचे के प्रश्न प्रारंभिक परीक्षा के स्तर के हैं, और हर उत्तर के साथ व्याख्या है। आयोग के असली प्रश्नपत्र की भाषा भिन्न हो सकती है, पर विचार-पद्धति वही रहती है।
प्रश्न 1. छत्तीसगढ़ किस तिथि को भारत का 26वाँ राज्य बना? (क) 15 अगस्त 2000 (ख) 1 नवंबर 2000 (ग) 9 नवंबर 2000 (घ) 26 जनवरी 2001 उत्तर: (ख)। मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के अंतर्गत 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया। 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड (तब उत्तरांचल) बना था, इसलिए (ग) वह भ्रम पैदा करने वाला विकल्प है।
प्रश्न 2. महानदी का उद्गम स्थल किस ज़िले के सिहावा क्षेत्र में माना जाता है? (क) बस्तर (ख) धमतरी (ग) कोरबा (घ) सरगुजा उत्तर: (ख) धमतरी। महानदी धमतरी ज़िले के सिहावा की पहाड़ियों से निकलती है। हसदेव कोरबा-सरगुजा क्षेत्र की नदी है और बस्तर में इंद्रावती बहती है।
प्रश्न 3. इंद्रावती नदी किस नदी-तंत्र से जुड़ती है? (क) महानदी (ख) नर्मदा (ग) गोदावरी (घ) गंगा उत्तर: (ग) गोदावरी। इंद्रावती बस्तर से बहकर गोदावरी में मिलती है, जबकि महानदी बंगाल की खाड़ी में जाने वाला अलग तंत्र है।
प्रश्न 4. 1857 के संघर्ष में छत्तीसगढ़ का पहला शहीद किसे माना जाता है? (क) गुंडाधूर (ख) वीर नारायण सिंह (ग) पंडित सुंदरलाल शर्मा (घ) ठाकुर प्यारेलाल सिंह उत्तर: (ख) वीर नारायण सिंह। सोनाखान के ज़मींदार। गुंडाधूर का संबंध 1910 के भूमकाल से है, और शेष दोनों 20वीं सदी के आंदोलनों से जुड़े नाम हैं।
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन-सा घटनाक्रम कंडेल नहर सत्याग्रह से संबंधित है? (क) 1910, बस्तर (ख) 1920, धमतरी (ग) 1930, रायपुर (घ) 1942, बिलासपुर उत्तर: (ख) 1920, धमतरी। यह सिंचाई कर के विरोध का आंदोलन था। 1910 का बस्तर भूमकाल आंदोलन है।
प्रश्न 6. सिरपुर का प्रसिद्ध ईंटों से बना मंदिर कौन-सा है? (क) भोरमदेव मंदिर (ख) महामाया मंदिर (ग) लक्ष्मण मंदिर (घ) राजीव लोचन मंदिर उत्तर: (ग) लक्ष्मण मंदिर। यह पांडुवंशी काल का ईंट का मंदिर है। भोरमदेव पत्थर का नागवंशी शिव मंदिर है, महामाया रतनपुर में है और राजीव लोचन राजिम में।
प्रश्न 7. छत्तीसगढ़ के संबंध में "देश का इकलौता टिन उत्पादक राज्य" किस क्षेत्र के भंडार के आधार पर कहा जाता है? (क) सरगुजा (ख) बस्तर (ग) रायगढ़ (घ) दुर्ग उत्तर: (ख) बस्तर। टिन अयस्क का भंडार बस्तर क्षेत्र में माना जाता है। कोयला सरगुजा-कोरबा-रायगढ़ में और लौह अयस्क बैलाडीला-दल्ली राजहरा में है।
प्रश्न 8. भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना में किस देश का सहयोग रहा? (क) ब्रिटेन (ख) जर्मनी (ग) सोवियत संघ (घ) अमेरिका उत्तर: (ग) सोवियत संघ। भिलाई (सोवियत सहयोग), राउरकेला (जर्मनी), दुर्गापुर (ब्रिटेन) का मिलान परीक्षा का पुराना पसंदीदा प्रश्न है।
प्रश्न 9. पंडवानी किस विषय की कथा-गायन शैली है, और इसकी सबसे प्रसिद्ध कलाकार कौन हैं? (क) रामायण, मीराबाई (ख) महाभारत, तीजन बाई (ग) महाभारत, सुरैया (घ) कृष्णलीला, तीजन बाई उत्तर: (ख)। पंडवानी महाभारत के पांडवों की कथा का गायन है, और तीजन बाई इसकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कलाकार हैं।
प्रश्न 10. छत्तीसगढ़ का राज्य पक्षी कौन-सा है? (क) मोर (ख) बस्तर की पहाड़ी मैना (ग) नीलकंठ (घ) सारस उत्तर: (ख)। मोर देश का राष्ट्रीय पक्षी है। राज्य पशु वन भैंसा और राज्य वृक्ष साल (सरई) हैं।
प्रश्न 11. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्य लोक सेवा आयोगों की स्थापना का प्रावधान करता है? (क) अनुच्छेद 312 (ख) अनुच्छेद 315 (ग) अनुच्छेद 324 (घ) अनुच्छेद 280 उत्तर: (ख) अनुच्छेद 315। अनुच्छेद 312 अखिल भारतीय सेवाओं से, 324 चुनाव आयोग से और 280 वित्त आयोग से संबंधित है। ज़रूरी बात: राज्य आयोग के सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक होता है।
प्रश्न 12. पंचायती राज को सांविधानिक दर्जा देने वाला संशोधन कौन-सा है? (क) 42वाँ (ख) 44वाँ (ग) 73वाँ (घ) 86वाँ उत्तर: (ग) 73वाँ। 1992 का यह संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ और संविधान में भाग 9 जोड़ा। नगरपालिकाओं के लिए 74वाँ संशोधन है।
प्रश्न 13. पाँचवीं अनुसूची किससे संबंधित है? (क) असम आदि के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से (ख) अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से (ग) राज्यों की भाषाओं से (घ) केंद्र-राज्य शक्तियों के बँटवारे से उत्तर: (ख)। छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्र पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं। छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों के लिए है।
प्रश्न 14 (गणित/सीसैट). किसी वस्तु की क़ीमत पहले 20% बढ़ाई गई और फिर नई क़ीमत पर 20% घटाई गई। मूल क़ीमत की तुलना में शुद्ध परिवर्तन क्या हुआ? (क) कोई परिवर्तन नहीं (ख) 4% वृद्धि (ग) 4% कमी (घ) 2% कमी उत्तर: (ग) 4% कमी। मूल क़ीमत 100 लें। 20% बढ़ने पर 120। अब 120 का 20% यानी 24 घटाने पर 96। शुद्ध परिवर्तन 100 से 96, यानी 4% की कमी।
प्रश्न 15 (गणित). एक रेलगाड़ी 72 किमी/घंटा की चाल से चल रही है। उसकी चाल मीटर/सेकंड में कितनी है, और वह 200 मीटर लंबे प्लेटफ़ॉर्म को पूरी तरह पार करने में 15 सेकंड लेती है, तो गाड़ी की लंबाई कितनी है? (क) 80 मी (ख) 100 मी (ग) 120 मी (घ) 150 मी उत्तर: (ख) 100 मी। 72 × 5/18 = 20 मी/से। 15 सेकंड में तय दूरी = 20 × 15 = 300 मी। यह गाड़ी की लंबाई और प्लेटफ़ॉर्म की लंबाई का योग है, इसलिए गाड़ी की लंबाई = 300 − 200 = 100 मी।
प्रश्न 16 (तर्कशक्ति). श्रृंखला 2, 6, 12, 20, 30, ? में अगली संख्या क्या होगी? (क) 38 (ख) 40 (ग) 42 (घ) 44 उत्तर: (ग) 42। क्रमागत अंतर 4, 6, 8, 10 हैं, इसलिए अगला अंतर 12 होगा और 30 + 12 = 42। वैकल्पिक रूप में ये n(n+1) हैं: 1×2, 2×3, 3×4, 4×5, 5×6, तो अगला 6×7 = 42।
प्रश्न 17 (भूगोल). कर्क रेखा छत्तीसगढ़ के किस अंचल से होकर गुज़रती है? (क) दक्षिणी बस्तर (ख) उत्तरी सरगुजा अंचल (ग) मध्य का मैदान (घ) कहीं से नहीं उत्तर: (ख)। कर्क रेखा राज्य के उत्तरी भाग से गुज़रती है, इसीलिए वह आसपास के राज्यों से जुड़े प्रश्नों में भी पूछी जाती है।
प्रश्न 18 (कथन-निष्कर्ष). कथन: सभी अधिकारी प्रशिक्षित हैं। कुछ प्रशिक्षित लोग अनुभवी हैं। निष्कर्ष I: कुछ अधिकारी अनुभवी हैं। निष्कर्ष II: कुछ अनुभवी लोग प्रशिक्षित हैं। (क) केवल I सही (ख) केवल II सही (ग) दोनों सही (घ) दोनों ग़लत उत्तर: (ख)। "कुछ प्रशिक्षित अनुभवी हैं" का उलटा "कुछ अनुभवी प्रशिक्षित हैं" सदैव सही है, इसलिए II सही है। पर वे "कुछ प्रशिक्षित" अधिकारियों में आते ही हों, यह ज़रूरी नहीं, इसलिए I निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।
मुख्य परीक्षा शैली के तीन प्रश्न और उत्तर की रूपरेखा
प्रश्न A. "छत्तीसगढ़ में खनन और आदिवासी आजीविका के बीच संतुलन की चुनौती का विश्लेषण कीजिए।" रूपरेखा: (1) भूमिका: राज्य के खनिज संसाधन और जनजातीय-वन क्षेत्र अक्सर एक ही भूगोल में हैं। (2) खनन के लाभ: राजस्व, रोज़गार, ऊर्जा और उद्योग। (3) चिंता: विस्थापन, वन-कटाई, जल-स्रोतों पर असर, लघु वनोपज पर निर्भर आजीविका का नुक़सान। (4) कानूनी ढाँचा: पाँचवीं अनुसूची, पेसा में ग्राम सभा की भूमिका, वन अधिकार अधिनियम में अधिकार-मान्यता, खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए ज़िला खनिज संस्थान न्यास (इसका उपयोग कितना प्रभावी है, यह एक बहस है)। (5) आगे का रास्ता: पूर्व-सहमति, पुनर्वास, खनन के बाद भूमि का पुनर्स्थापन, स्थानीय कौशल-विकास और निगरानी। (6) निष्कर्ष: विकास और सुरक्षा एक-दूसरे के विरोधी नहीं होने चाहिए, पर संतुलन पारदर्शी प्रक्रिया से आएगा।
प्रश्न B. "पेसा अधिनियम, 1996 का उद्देश्य और छत्तीसगढ़ में उसके क्रियान्वयन की चुनौतियाँ बताइए।" रूपरेखा: (1) उद्देश्य: 73वें संशोधन को अनुसूचित क्षेत्रों तक पहुँचाना और ग्राम सभा को परंपरागत रूप से सशक्त बनाना। (2) प्रमुख प्रावधान: ग्राम सभा की भूमिका, लघु वनोपज पर अधिकार, भूमि-हस्तांतरण की रोकथाम, स्थानीय योजनाओं की स्वीकृति। (3) चुनौतियाँ: राज्य के क़ानूनों में पेसा के अनुरूप बदलाव की गति, जानकारी और प्रशिक्षण की कमी, अन्य क़ानूनों (खनन, भूमि अधिग्रहण) से टकराव। (4) सुझाव: नियमों का स्पष्ट क्रियान्वयन, ग्राम सभा का क्षमता-निर्माण, और न्यायिक-प्रशासनिक निगरानी।
प्रश्न C. "बस्तर दशहरा की विशिष्टता और उसका सांस्कृतिक महत्त्व समझाइए।" रूपरेखा: (1) भूमिका: लगभग 75 दिन चलने वाला पर्व, जो रावण-वध की कथा के बजाय बस्तर की स्थानीय देवी दंतेश्वरी और रथ यात्रा की परंपरा पर टिका है। (2) विशेषताएँ: विशाल लकड़ी के रथ का निर्माण और संचालन, अलग-अलग जनजातीय समुदायों की भागीदारी और भूमिकाएँ, स्थानीय देवताओं का समागम। (3) महत्त्व: सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक अस्मिता, पर्यटन और कारीगरों की आजीविका। (4) चुनौतियाँ: परंपरा को बचाते हुए सुविधाओं और सुरक्षा का प्रबंधन। (5) निष्कर्ष: यह बस्तर की जीवित सांस्कृतिक धरोहर है।
अपने उत्तर लिखकर देखें और यह जाँचें कि आपने कम से कम एक संवैधानिक/कानूनी संदर्भ, एक स्थानीय उदाहरण और एक आगे-का-रास्ता वाला बिंदु जोड़ा या नहीं।
पिछले वर्षों का ट्रेंड (गुणात्मक)
पिछले चक्रों के प्रश्नपत्र देखकर कुछ प्रवृत्तियाँ सामान्यतः दिखती हैं, पर यहाँ जानबूझकर कोई कट-ऑफ अंक नहीं दिया जा रहा, क्योंकि वह हर चक्र, श्रेणी और प्रश्नपत्र की कठिनाई पर निर्भर रहा है और उसे वर्तमान परिणाम-पत्र से ही देखना चाहिए। प्रवृत्तियाँ ये हैं:
- प्रारंभिक परीक्षा में इतिहास, भूगोल और राजव्यवस्था का सम्मिलित हिस्सा बड़ा रहता है, और छत्तीसगढ़ से संबंधित प्रश्न स्थिर रूप से आते हैं।
- प्रश्नों का स्तर सीधे तथ्य से हटकर कथन-आधारित और "सही/ग़लत कथन चुनिए" वाले प्रारूप की ओर गया है, जिसमें आधी-अधूरी जानकारी काम नहीं आती।
- छत्तीसगढ़ के प्रश्नों में इतिहास, संस्कृति, जनजातियाँ, खनिज और योजनाएँ स्थायी विषय रहे हैं, और नए ज़िलों तथा हाल की घटनाओं से भी प्रश्न बने हैं।
- मुख्य परीक्षा में समकालीन मुद्दों (जनजातीय अधिकार, पर्यावरण, शासन, स्थानीय स्वशासन) पर विश्लेषणात्मक प्रश्नों का वज़न बढ़ता दिखा है।
- साक्षात्कार में गृह ज़िले, स्नातक विषय, राज्य की समस्याओं और नीतिगत निर्णयों पर प्रश्न सामान्य रहे हैं।
12 महीने की तैयारी योजना
यह योजना मानती है कि आप लगभग शून्य से शुरू कर रहे हैं और रोज़ 5 से 7 घंटे दे सकते हैं। कामकाजी अभ्यर्थी इसी क्रम को रखकर समय को 1.5 गुना खींच सकते हैं।
| माह | मुख्य फ़ोकस | साथ में |
|---|---|---|
| 1 | सिलेबस और पिछले प्रश्नपत्रों का विश्लेषण; एनसीईआरटी इतिहास (प्राचीन-मध्यकाल) | अख़बार पढ़ने की आदत, सीसैट की बुनियादी गणित |
| 2 | आधुनिक भारत का इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन | बोधन का दैनिक अभ्यास, प्रतिशत-अनुपात |
| 3 | भारतीय भूगोल और नक़्शे | खाली नक़्शे पर अभ्यास, मासिक करंट संकलन |
| 4 | राजव्यवस्था: संविधान, संसद, न्यायपालिका | अनुच्छेद तालिका, तर्कशक्ति |
| 5 | पंचायती राज, शासन, अर्थव्यवस्था का पहला भाग | बजट-सर्वेक्षण का सार, आँकड़ा विश्लेषण |
| 6 | अर्थव्यवस्था का दूसरा भाग, विज्ञान और पर्यावरण | पहला पूर्ण प्रारंभिक मॉक, उत्तर-लेखन शुरू |
| 7 | छत्तीसगढ़ इतिहास और संस्कृति | कला, जनजाति, स्थल की तालिकाएँ |
| 8 | छत्तीसगढ़ भूगोल, अर्थव्यवस्था, योजनाएँ, प्रशासन | नए ज़िले की सूची, नक़्शा, "एक पेज पर छत्तीसगढ़" |
| 9 | पहली पूर्ण पुनरावृत्ति, साप्ताहिक मॉक | कमज़ोर विषयों की पहचान और समय-सारणी |
| 10 | मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन पर केंद्रित; निबंध और हिंदी | हर हफ़्ते 4 उत्तर, 1 निबंध |
| 11 | दूसरी पुनरावृत्ति और मॉक की संख्या बढ़ाना | करंट का संकलित संशोधन, ग़लतियों की कॉपी |
| 12 | अंतिम पुनरावृत्ति, प्रारंभिक मॉक, साक्षात्कार की पहचान | स्वास्थ्य, नींद, सिर्फ़ पुनरावृत्ति |
इस योजना को कैसे चलाएँ
हर महीने के अंत में दो घंटे का खुद का मूल्यांकन रखें: कौन-से टॉपिक तैयार हैं, किसमें ग़लतियाँ हैं, और अगला महीना कैसे बदलेगा। योजना पत्थर की लकीर नहीं है, अगर आपने किसी माह में राजव्यवस्था में ज़्यादा समय लिया तो उसकी क़ीमत किसी और विषय के समय से दें, पर पुनरावृत्ति का समय न घटाएँ।
6 महीने की तेज़ योजना
यह योजना उनके लिए है जिन्होंने पहले पढ़ाई की है और एक बार पुनरावृत्ति के साथ लक्ष्य बनाना चाहते हैं। इसमें गहराई कम करने का ख़तरा है, इसलिए केवल अनुभवी अभ्यर्थी अपनाएँ।
| माह | फ़ोकस |
|---|---|
| 1 | सिलेबस-विश्लेषण, इतिहास (प्राचीन से आधुनिक) का तेज़ पुनर्पाठ, साथ में सीसैट की गणित |
| 2 | भूगोल और राजव्यवस्था; रोज़ नक़्शा और अनुच्छेद तालिका |
| 3 | अर्थव्यवस्था, विज्ञान-पर्यावरण, पंचायती राज, और पहला मॉक |
| 4 | छत्तीसगढ़: इतिहास, भूगोल, संस्कृति, अर्थव्यवस्था का सघन अध्ययन |
| 5 | पूरे पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति, साप्ताहिक मॉक, उत्तर-लेखन |
| 6 | मॉक, कमज़ोरियों पर काम, करंट का अंतिम संशोधन |
6 महीने की योजना में प्रत्येक दिन कम से कम 7 घंटे की ज़रूरत होगी, और उत्तर-लेखन का अभ्यास पहले से ही शुरू करना पड़ेगा, क्योंकि मुख्य परीक्षा की तैयारी प्रारंभिक के बाद अलग से शुरू करने का समय शायद न मिले।
साक्षात्कार की तैयारी
साक्षात्कार की तैयारी मुख्य परीक्षा के बाद के इंतज़ार में शुरू न करें। पूरी तैयारी के दौरान इसके लिए तीन चीज़ें साथ-साथ बनाते चलें। पहली, अपना विस्तृत परिचय-फ़ॉर्म: गृह ज़िले की जानकारी (इतिहास, नदियाँ, उद्योग, प्रमुख समस्याएँ), स्नातक का विषय और उसके व्यावहारिक उपयोग, अपनी रुचियाँ, और आपने सेवा क्यों चुनी। दूसरी, राज्य के दस-बारह बड़े मुद्दों पर आपकी संतुलित राय: आदिवासी विकास, नक्सलवाद और उसका असर (सुरक्षा, विकास और संवाद के दृष्टिकोण से), खनन और पर्यावरण, ग्रामीण रोज़गार, महिला सशक्तीकरण, धान-किसान अर्थव्यवस्था, शहरीकरण। तीसरी, बोलने का अभ्यास: किसी मित्र के साथ मॉक साक्षात्कार, अपनी रिकॉर्डिंग सुनना और भाषा सुधारना। बोर्ड आपके जवाबों की ईमानदारी और संतुलन देखता है, इसलिए जो न आता हो उसे विनम्रता से "मुझे इसकी पूरी जानकारी नहीं है" कहना ग़लत उत्तर से बेहतर है।
पुस्तकें और संसाधन
पुस्तकों के नाम अक्सर संस्करण के साथ बदलते हैं, इसलिए यहाँ विषय-वार प्रकार बताए गए हैं। जो भी पुस्तक चुनें, उसके नवीनतम संस्करण को देखें और एक ही पुस्तक से बार-बार दोहराएँ।
- इतिहास: एनसीईआरटी की कक्षा 6 से 12 की इतिहास पुस्तकें, और एक मानक प्रतियोगी आधुनिक भारत की पुस्तक।
- भूगोल: एनसीईआरटी और एक भारतीय भूगोल की मानक पुस्तक, साथ में एटलस।
- राजव्यवस्था: एक प्रचलित संवैधानिक पुस्तक (जैसे लक्ष्मीकांत की भारतीय राजव्यवस्था), साथ में संविधान का मूल पाठ।
- अर्थव्यवस्था: एनसीईआरटी की अर्थशास्त्र की पुस्तकें, आर्थिक सर्वेक्षण और बजट का सार।
- छत्तीसगढ़: आयोग के सिलेबस के अनुरूप एक व्यापक छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान की पुस्तक, राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग और आधिकारिक पोर्टल, और नवीनतम बजट के दस्तावेज़। पुरानी पुस्तकों में ज़िलों और योजनाओं की सूची अक्सर पुरानी हो जाती है।
- करंट अफेयर्स: एक अख़बार, एक मासिक संकलन, और राज्य समाचार।
- अभ्यास: आयोग के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र और मॉक टेस्ट। इसके लिए pareeksha.in पर उपलब्ध मॉक टेस्ट भी उपयोग कर सकते हैं।
आम गलतियाँ
- अधिसूचना का इंतज़ार करते-करते तैयारी टालना। पाठ्यक्रम व्यापक है, और तैयारी अधिसूचना आने के बाद शुरू करने का मतलब है कि आप जल्दबाज़ी में पढ़ेंगे।
- सिर्फ़ रटना। मुख्य परीक्षा तथ्यों को जोड़ने और विश्लेषण करने की माँग करती है, इसलिए हर तथ्य के साथ "क्यों" पूछना ज़रूरी है।
- सीसैट को हल्के में लेना। अर्हकारी पत्र में असफलता का मतलब पूरे सामान्य अध्ययन में अच्छे अंक होने के बावजूद बाहर होना है।
- छत्तीसगढ़ को आख़िरी में पढ़ना। यह वही हिस्सा है जो आपके पक्ष में सबसे मज़बूत हो सकता है, और इसकी सामग्री अलग-अलग जगह बिखरी है, इसलिए इसे जल्दी शुरू करें।
- पुरानी योजनाओं और आँकड़ों पर भरोसा। ज़िलों की संख्या, योजनाओं की राशि और नीतियाँ बदलती रहती हैं।
- उत्तर-लेखन का अभ्यास न करना। जानकारी होते हुए भी लिखने में समय और अंक खोना बहुत आम है।
- केवल एक स्रोत या केवल कोचिंग नोट्स पर निर्भर रहना। मूल स्रोत से जाँच ज़रूरी है।
- आवेदन में वर्ग या मूल निवास की ग़लती। दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें।
- मॉक टेस्ट को केवल अंक देखने का साधन मानना। असल फ़ायदा ग़लतियों के विश्लेषण में है: क्या ग़लती जानकारी की थी, पढ़ने की या समय-प्रबंधन की?
- स्वास्थ्य और नींद को अनदेखा करना। लंबी तैयारी में नियमित नींद और व्यायाम ही टिकाऊपन देते हैं।
यूपीएससी और अन्य राज्य पीसीएस से तुलना
| पहलू | सीजीपीएससी राज्य सेवा | यूपीएससी सिविल सेवा | अन्य राज्य पीसीएस |
|---|---|---|---|
| आयोजक | छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग | संघ लोक सेवा आयोग | संबंधित राज्य आयोग |
| सेवाएँ | राज्य की राजपत्रित सेवाएँ | IAS, IPS, IFS आदि अखिल भारतीय और केंद्रीय सेवाएँ | संबंधित राज्य की सेवाएँ |
| चरण | प्रारंभिक, मुख्य, साक्षात्कार | प्रारंभिक, मुख्य, साक्षात्कार | ज़्यादातर तीन चरण |
| क्षेत्रीय पाठ्यक्रम | छत्तीसगढ़ का निश्चित हिस्सा | राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दायरा | अपने राज्य का हिस्सा |
| प्रतिस्पर्धा | बड़ी, पर राज्य-केंद्रित | बहुत बड़ी, राष्ट्रीय | राज्य के अनुसार भिन्न |
| ट्रांसफ़र/पोस्टिंग | राज्य के भीतर | पूरा देश, कैडर आवंटन के अनुसार | अपने राज्य में |
व्यावहारिक निष्कर्ष यह है कि दोनों के सिलेबस का बड़ा हिस्सा साझा है, यानी इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था, इसलिए जो अभ्यर्थी दोनों की तैयारी करना चाहते हैं, उनके लिए बुनियादी तैयारी एक ही रह सकती है। अंतर छत्तीसगढ़ के भाग और परीक्षा के स्तर (यूपीएससी में अधिक गहराई और अंतरराष्ट्रीय दायरा) का है। दूसरे राज्यों के पीसीएस से तुलना करते समय उनके पात्रता नियम और मूल निवास की शर्त देखें, क्योंकि कई राज्य दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों को अलग तरह से मानते हैं।
छत्तीसगढ़ की अन्य परीक्षाओं से तुलना
राज्य सेवा परीक्षा राज्य की सबसे ऊँची और लंबी प्रक्रिया है, और इसका सिलेबस राज्य की बाक़ी भर्तियों की तैयारी का भी आधार बन सकता है। अगर आप एक साथ कई विकल्प रखना चाहते हैं, तो तालिका देखें।
| परीक्षा | संचालक | प्रकृति |
|---|---|---|
| राज्य सेवा परीक्षा | CGPSC | अधिकारी पद, तीन चरण, वर्णनात्मक मुख्य परीक्षा |
| पटवारी | छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) | वस्तुनिष्ठ, ग्राम-स्तर का राजस्व पद |
| शिक्षक भर्ती | व्यापम | विषय और शिक्षण-अभिवृत्ति आधारित |
| सब-इंस्पेक्टर | पुलिस भर्ती बोर्ड | लिखित, शारीरिक और अन्य चरण |
| सहायक प्राध्यापक, सहायक अभियंता, राज्य वन सेवा, सिविल जज | CGPSC | अलग विज्ञापन, अपने विषय-आधारित |
जो अभ्यर्थी अभी स्नातक के बाद तैयारी शुरू कर रहे हैं, उनके लिए राज्य सेवा का सिलेबस पढ़ना कई अन्य परीक्षाओं में भी सामान्य ज्ञान की मज़बूत नींव देता है। पर हर परीक्षा का अपना पैटर्न और चयन-प्रक्रिया है, इसलिए एक साथ कई लक्ष्य रखने पर हर परीक्षा के ख़ास हिस्से (जैसे पुलिस के लिए शारीरिक, शिक्षक भर्ती के लिए शिक्षण-शास्त्र) का समय अलग रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. सीजीपीएससी राज्य सेवा परीक्षा कौन आयोजित करता है? छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC), जिसका मुख्यालय रायपुर में है। यह मध्य प्रदेश का व्यापम या संघ लोक सेवा आयोग नहीं है।
2. परीक्षा कितने चरणों में होती है? सामान्यतः तीन: प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। अंतिम मेरिट सामान्यतः मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों से बनती है, पर अंक-भार अधिसूचना में देखें।
3. क्या प्रारंभिक परीक्षा के अंक अंतिम मेरिट में जुड़ते हैं? पिछले चक्रों में सामान्यतः नहीं, यह केवल छँटनी का चरण रहा है। फिर भी वर्तमान अधिसूचना में इसकी पुष्टि करें।
4. न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता क्या है? किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय की स्नातक डिग्री। अंतिम वर्ष के अभ्यर्थियों को कुछ चक्रों में शर्तों के साथ अनुमति मिली है, इसलिए सूचना देखें।
5. आयु सीमा कितनी है? न्यूनतम सामान्यतः 21 वर्ष है। ऊपरी सीमा और आयु-गणना की तिथि अधिसूचना पर निर्भर करती है और छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों तथा आरक्षित वर्गों के लिए छूट के प्रावधान अलग हैं।
6. क्या दूसरे राज्य का अभ्यर्थी आवेदन कर सकता है? पात्रता के नियम अधिसूचना और राज्य के भर्ती नियमों से तय होते हैं। मूल निवास से जुड़ी छूट और आरक्षण केवल छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए हैं, इसलिए अपनी स्थिति की पुष्टि अधिसूचना से करें।
7. क्या सीसैट (दूसरा पत्र) अर्हकारी है? पिछले चक्रों में इसके लिए न्यूनतम अर्हता अंक की व्यवस्था रही है। यह वर्तमान विज्ञापन में जाँचें और इसे हल्के में न लें।
8. क्या मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय है? पुरानी योजनाओं में था और बाद में योजना बदली, इसलिए वर्तमान अधिसूचना के अनुसार ही निर्णय लें।
9. छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान की तैयारी कब शुरू करें? तैयारी के तीसरे-चौथे महीने तक। अगर आप अभी तैयारी में हैं तो इसे राष्ट्रीय विषयों के साथ समानांतर रूप से पढ़ना बेहतर है।
10. क्या छत्तीसगढ़ी भाषा आना ज़रूरी है? लिखित पत्र हिंदी और अंग्रेज़ी में होते हैं। छत्तीसगढ़ी आना आवश्यक नहीं बताया गया, पर साक्षात्कार और वास्तविक प्रशासन में उपयोगी है।
11. एक साल की तैयारी पर्याप्त है? कई अभ्यर्थियों के लिए 10 से 14 महीने की सुनियोजित तैयारी काम की रही है, पर यह आपकी पृष्ठभूमि, समय और लगन पर निर्भर है। कोई गारंटी नहीं होती, पर नियमित पुनरावृत्ति और मॉक अभ्यास सबसे भरोसेमंद तरीक़ा है।
12. क्या यही परीक्षा डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी दोनों के लिए है? राज्य सेवा परीक्षा के विज्ञापन में जो सेवाएँ सूचीबद्ध होती हैं, उन्हीं के लिए संयुक्त प्रक्रिया चलती है। किसी विशेष चक्र में कौन-सी सेवाएँ शामिल हैं, यह उसी अधिसूचना में देखें।
13. रिक्तियाँ कितनी होती हैं? हर चक्र में अलग। सोशल मीडिया की संख्याओं पर न जाएँ, आधिकारिक विज्ञापन देखें।
14. मॉक टेस्ट कब शुरू करें? सिलेबस की पहली पूर्ण पुनरावृत्ति के बाद, यानी लगभग छठे-सातवें महीने से, फिर आख़िरी तीन महीनों में साप्ताहिक।
15. बिना कोचिंग के तैयारी संभव है? हाँ, पर इसके लिए अनुशासित समय-सारणी, अच्छे स्रोत और उत्तर-लेखन का अभ्यास चाहिए। कोचिंग कुछ लोगों को अनुशासन और मार्गदर्शन देती है, पर जो हिस्सा आपको ख़ुद करना है, वह कोई और नहीं कर सकता।
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अंतिम बात
राज्य सेवा परीक्षा लंबी दौड़ है, और उसमें सबसे कारगर चीज़ है नियमितता। सिलेबस को समझें, छत्तीसगढ़ के हिस्से को जल्दी शुरू करें, हर हफ़्ते लिखें और हर महीने मॉक के नतीजों से अपनी योजना सुधारें। तारीख़ों, रिक्तियों और शुल्क की पुष्टि हमेशा आयोग की वेबसाइट से करें। अभ्यास के लिए pareeksha.in के मॉक टेस्ट और प्रश्न-अभ्यास का उपयोग अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं, पर तैयारी का असली आधार आपकी अपनी पुनरावृत्ति और लेखन का अभ्यास ही रहेगा।

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