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छत्तीसगढ़ का भूगोल (भाग 2): कृषि, वन, खनिज, उद्योग, परिवहन एवं जनसंख्या · Chapter 15
वनोपज के प्रकार

वनोपज के प्रकार

वनों से मिलने वाले संसाधन मुख्य वनोपज और लघु/गौण वनोपज में बँटते हैं। आदिवासी अर्थव्यवस्था, तेंदूपत्ता, बाँस और लाख से जुड़े तथ्य CGPSC और व्यापम में लगातार आते हैं।

वनोपज का ढाँचा

श्रेणीराष्ट्रीयकृतअराष्ट्रीयकृत
मुख्य वनोपजसाल/सरई, सागौन, साजा, बीजा, खैर, शीशमआँवला, तेंदू वृक्ष, कर्रा, महुआ वृक्ष
लघु/गौण वनोपजतेंदूपत्ता, धवड़ा गोंद, कुल्लू गोंदहर्रा बीज, साल बीज, इमली आदि

मुख्य वनोपज

इसमें काष्ठ उत्पाद व जलाऊ लकड़ी हैं, जिन्हें इमारती लकड़ी भी कहते हैं। देश में 13 प्रजातियाँ इमारती लकड़ी घोषित हैं, जिनमें से 6 राष्ट्रीयकृत प्रजातियाँ छत्तीसगढ़ में पाई जाती हैं।

वृक्षवैज्ञानिक नाम
साल/सरईShorea Robusta
सागौनTectona Grandis
साजाTerminelia Toment
बीजाCpterocarpus Marsupiur
खैरAcacia Catechu
शीशमDalbergia

खैर: इसके वृक्ष से कत्था मिलता है। सरगुजा की खैरवार जनजाति परंपरागत रूप से कत्था निकालती है; कत्था निकालने हेतु अम्बिकापुर में सरगुजा वुड प्रोडक्ट संचालित है।

लघु वनोपज

बाँस, तेंदूपत्ता, इमली, महुआ, चिरौंजी आदि। इनके क्रय मूल्य निर्धारण हेतु कलेक्टर की अध्यक्षता में अपेक्स समिति बनती है; संग्रहण वन विभाग के नियंत्रण में प्राथमिक लघु वनोपज समितियों व वन समितियों द्वारा होता है।

बाँस वन

  • क्षेत्रफल 6,556 वर्ग कि.मी., 11 प्रतिशत; राज्य के सीमावर्ती जिलों में।
  • सर्वाधिक विस्तार लाठी बाँस (Dendrocalamus strictus) या नर बाँस का; सरगुजा संभाग में कटंग बाँस।
  • वन राजस्व में बाँस का हिस्सा 12%, लघु वनोपज राजस्व में 20%।
  • बाँस को आदिवासियों का हरा सोना कहा गया है (पत्ते में हरा सोना तेंदूपत्ता)।
  • ISFR 2021 के अनुसार 10,467 वर्ग कि.मी. पर बाँस वन (6,556 से भिन्न, मूल पाठ में दोनों आँकड़े हैं)।

तेंदूपत्ता

बिंदुविवरण
उपनामहरा सोना
हिस्सादेश के कुल तेंदूपत्ता का 17%
क्षेत्रबस्तर और सरगुजा
प्रकारराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज; समर्थन मूल्य पर संग्रहण
MSPमानक बोरा 5500 रु.
संख्याएक मानक बोरे में 50,000 पत्ते (50 पत्ते x 1000 बंडल)
उत्पादन2023-24 में 12.94 लाख मानक बैग

अन्य लघु वनोपज

  • रतनजोत (Jatropha) व करंज: इनसे बायोडीजल प्राप्त होता है।
  • लाख: पलाश, बेर व कुसुम में लाख का कीट; भारत में छत्तीसगढ़ दूसरा लाख उत्पादक राज्य (प्रथम झारखंड)।
  • महुआ: बहुउद्देशीय वृक्ष (पत्ती से दोना-पत्तल, फूल से मदिरा, बीज से तेल); जनजातीय संस्कृति में फूलों के कारण महत्त्व।

राष्ट्रीयकृत लघु वनोपज: तेंदूपत्ता, धावड़ा गोंद, कुल्लू गोंद। बाँस को हाल ही में इस श्रेणी से हटाया गया है।

तुलना एवं संबंध

वनोपजविशेष पहचान
तेंदूपत्ताहरा सोना (पत्ता); राष्ट्रीयकृत
बाँसआदिवासियों का हरा सोना (वृक्ष); अब राष्ट्रीयकृत नहीं
खैरकत्था; खैरवार जनजाति
लाखपलाश-बेर-कुसुम; दूसरा स्थान

याद रखने योग्य बिंदु

  • 13 इमारती प्रजातियों में 6 छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीयकृत।
  • राष्ट्रीयकृत मुख्य वनोपज: साल, सागौन, साजा, बीजा, खैर, शीशम।
  • आँवला, तेंदू, कर्रा, महुआ अराष्ट्रीयकृत मुख्य वनोपज।
  • राष्ट्रीयकृत लघु वनोपज तीन: तेंदूपत्ता, धावड़ा गोंद, कुल्लू गोंद।
  • तेंदूपत्ता मानक बोरा 5500 रु.; 50,000 पत्ते।
  • देश का 17% तेंदूपत्ता यहाँ।
  • लाख में देश में दूसरा स्थान।
  • लाठी बाँस सर्वाधिक।
  • खैर से कत्था; सरगुजा वुड प्रोडक्ट अम्बिकापुर।
  • रतनजोत व करंज से बायोडीजल।

स्मरण सूत्र

  • सा-सा-सा-बी-खै-शी: साल, सागौन, साजा, बीजा, खैर, शीशम।
  • ते-धा-कु: तेंदू, धावड़ा, कुल्लू (राष्ट्रीयकृत लघु)।

स्वयं जाँचें

  • प्रश्न: तेंदूपत्ता का मानक बोरा कितने पत्तों का? उत्तर: 50,000।
  • प्रश्न: हरा सोना किसे कहते हैं? उत्तर: तेंदूपत्ता (पत्तों में) और बाँस (आदिवासियों का)।
  • प्रश्न: कत्था किससे मिलता है? उत्तर: खैर वृक्ष से।
  • प्रश्न: लाख में छत्तीसगढ़ का स्थान? उत्तर: दूसरा।
  • प्रश्न: बायोडीजल किन पौधों से? उत्तर: रतनजोत और करंज।
  • प्रश्न: अपेक्स समिति किसकी अध्यक्षता में? उत्तर: कलेक्टर।

अभ्यास प्रश्न

  1. किस जनजाति का मुख्य व्यवसाय खैर वृक्ष से कत्था निकालना है?

    • (A) धनवार
    • (B) खैरवार
    • (C) कोरकू
    • (D) सहारिया
  2. पान में प्रयुक्त कत्था अथवा कटाचु निम्न में से किस पौधे/वृक्ष से उत्पादित होता है?

    • (A) वट वृक्ष
    • (B) पीपल वृक्ष
    • (C) साल वृक्ष
    • (D) खैर वृक्ष
  3. जनजाति महत्व का वृक्ष है

    • (A) आँवला
    • (B) महुआ
    • (C) बरगद
    • (D) आम

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (B) - सरगुजा की खैरवार जनजाति परंपरागत रूप से खैर वृक्ष से कत्था निकालती है।
  2. (D) - खैर के वृक्ष से कत्था मिलता है।
  3. (B) - जनजातीय संस्कृति में महुआ के फूलों के कारण महत्त्व है।
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