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छत्तीसगढ़ का भूगोल (भाग 2): कृषि, वन, खनिज, उद्योग, परिवहन एवं जनसंख्या · Chapter 2
भू-जल की स्थिति

भू-जल की स्थिति

यह अध्याय बताता है कि छत्तीसगढ़ के पास कितना भूमिगत जल है, उसका कितना उपयोग हो रहा है और कौन-से ब्लॉक सुरक्षित, अर्द्ध-गंभीर या संकटपूर्ण हैं। भू-जल के आँकड़े जिलेवार तालिका से पूछे जाते हैं, इसलिए CGPSC, व्यापम और पटवारी परीक्षाओं में यह अंक दिलाने वाला विषय है।

भू-जल की मात्रा और उपयोग

आधारभू-गर्भीय जल
मात्रा11,630 घन मि.मी.
उपयोग में लाया गयालगभग 49.50%
भारत के जल का प्रतिशत3.17%

अन्य मूल पाठ में केंद्रीय भू-बोर्ड के अनुसार भू-गर्भिक जल का उपयोग लगभग 44 प्रतिशत बताया गया है, जबकि ऊपर की तालिका में 49.50% है; मूल पाठ अंतर का कारण नहीं बताती।

भू-जल क्षमता (नवीनतम आकलन)

  • राज्य की कुल भू-जल क्षमता 13.68 बी.सी.एम. (बिलियन क्यूबिक मीटर) है।
  • इसमें से 10.67 बी.सी.एम. जल, यानी लगभग 60 प्रतिशत, सुरक्षित एवं उपयोग योग्य माना गया है।
  • राज्य में भू-जल का विकास उथले जल-भृत (aquifer) क्षेत्र तक सीमित है।
  • उथली संरचनाएँ: 50 मीटर के भीतर खोदे गए कुएँ, कठोर चट्टान वाले क्षेत्रों में बोरवेल, तथा जलोढ़ इलाके में उथले ट्यूबवेल और फिल्टर पॉइंट ट्यूबवेल। ये अधिकतर सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र में हैं।
  • मध्यम ट्यूबवेल जलोढ़ क्षेत्रों में लगभग 40-50 मीटर औसत गहराई तक बनाए जाते हैं।
  • भू-जल खोज का वर्तमान स्तर 20 प्रतिशत है और भविष्य में विस्तार की और गुंजाइश है।

ब्लॉकों का वर्गीकरण

नवीनतम आकलन:

कुल ब्लॉकसुरक्षित (Safe)अर्द्ध-गंभीर (Semi Critical)गंभीर (Critical)अति-शोषितअन्य
146138 (94%)8 (6%)0 (0%)0 (0%)0 (0%)

अर्द्ध-गंभीर श्रेणी के 8 विकास खंड: गुरूर, बालोद, साजा, धमधा, पाटन, दुर्ग, धमतरी और बिल्हा। इस सूची में बेरला नहीं है (पूर्व परीक्षा में इसी आधार पर प्रश्न आया)।

2017 का आकलन (146 विकासखण्ड): सुरक्षित 116, आंशिक संकटपूर्ण 24, संकटपूर्ण 6 (जोड़ 146)। यह नवीनतम आकलन (138 सुरक्षित, 8 अर्द्ध-गंभीर) से अलग वर्ष का आँकड़ा है।

जिलेवार भू-जल तालिका (16 जिलों के आधार पर, इकाई हेक्टेयर मीटर)

स्तंभ क्रम: (क) शुद्ध वार्षिक भू-जल उपलब्धता, (ख) सिंचाई हेतु मौजूदा सकल ड्राफ्ट, (ग) घरेलू व औद्योगिक जलापूर्ति हेतु ड्राफ्ट, (घ) सभी उपयोगों हेतु सकल ड्राफ्ट, (ङ) अगले 25 वर्ष के घरेलू-औद्योगिक हेतु आबंटन, (च) भविष्य के सिंचाई विकास हेतु शुद्ध उपलब्धता, (छ) भू-जल विकास का स्तर (%)।

जिलाकखगघङचछ %
बस्तर181706866530071167342231688186
बिलासपुर665051812846102273876614071734
दंतेवाड़ा17550324901650413922651707482
धमतरी371821354016411518124242121841
दुर्ग776584431964735079291262421365
जांजगीर-चांपा469251206130471510843933047032
जशपुर874011459216921628422307057919
कांकेर909876871152183922317817999
कवर्धा2631077411333907517761679334
कोरबा4655439922363635535883897414
कोरिया3122039091350525918982541217
महासमुंद780701641519331834823445931124
रायगढ़639191316529271609242254652925
रायपुर138949223296989293181017510644321
राजनांदगांव651381685129611981142134407430
सरगुजा15445526326463930965730212082720
राज्य कुल (हेक्टेयर मीटर)13684822313944813627953070160106692420
राज्य कुल (बी.सी.एम.)13.682.310.482.800.7010.6720

यह तालिका पुराने 16 जिलों के आधार पर है। इसमें शुद्ध वार्षिक भू-जल उपलब्धता सबसे कम कवर्धा (26,310) और सबसे अधिक बस्तर (1,81,706) में दिखती है; दंतेवाड़ा (1,75,503) दूसरे स्थान पर है। विकास स्तर सबसे ऊँचा दुर्ग (65%) और सबसे नीचा दंतेवाड़ा (2%) का है।

तुलना एवं संबंध

बिंदुअधिकतमन्यूनतम
शुद्ध वार्षिक भू-जल उपलब्धताबस्तरकवर्धा
भू-जल विकास स्तरदुर्ग (65%)दंतेवाड़ा (2%)

कारण-परिणाम: दुर्ग में सिंचाई ड्राफ्ट सबसे अधिक (44,319) है, इसीलिए उसका विकास स्तर सबसे ऊँचा और भविष्य की उपलब्धता कम है; दंतेवाड़ा में ड्राफ्ट बहुत कम है, इसलिए विस्तार की गुंजाइश बड़ी है।

याद रखने योग्य बिंदु

  • भू-जल क्षमता 13.68 बी.सी.एम.; उपयोग योग्य 10.67 (लगभग 60%)।
  • भू-गर्भीय जल 11,630 घन मि.मी.; उपयोग लगभग 49.50% (केंद्रीय भू-बोर्ड: लगभग 44%)।
  • भू-जल खोज का वर्तमान स्तर 20%।
  • 146 ब्लॉक: 138 सुरक्षित, 8 अर्द्ध-गंभीर, शेष श्रेणियाँ शून्य।
  • अर्द्ध-गंभीर 8: गुरूर, बालोद, साजा, धमधा, पाटन, दुर्ग, धमतरी, बिल्हा (बेरला नहीं)।
  • 2017: 116 सुरक्षित, 24 आंशिक संकटपूर्ण, 6 संकटपूर्ण।
  • भू-जल विकास: दुर्ग 65% सर्वाधिक, दंतेवाड़ा 2% न्यूनतम।
  • कवर्धा में शुद्ध वार्षिक भू-जल उपलब्धता सबसे कम; बस्तर में सर्वाधिक।
  • भारत के भू-जल का 3.17% छत्तीसगढ़ में।

स्मरण सूत्र

  • '116 + 24 + 6 = 146': 2017 में सुरक्षित, आंशिक, संकटपूर्ण विकासखण्ड।
  • अर्द्ध-गंभीर 8: 'गुरू बालोद साजा धमधा, पाटन दुर्ग धमतरी बिल्हा' को एक पंक्ति में रट लें।

स्वयं जाँचें

  1. प्र. राज्य की भू-जल क्षमता कितनी है? उ. 13.68 बी.सी.एम.
  2. प्र. अर्द्ध-गंभीर ब्लॉक कितने हैं? उ. 8 (6%)
  3. प्र. भू-जल विकास सबसे कम किस जिले में? उ. दंतेवाड़ा (2%)
  4. प्र. 2017 के आकलन में संकटपूर्ण विकासखण्ड कितने थे? उ. 6
  5. प्र. कवर्धा में क्या सबसे कम है? उ. शुद्ध वार्षिक भू-जल उपलब्धता
  6. प्र. भू-जल विकास स्तर सबसे ऊँचा किस जिले में? उ. दुर्ग (65%)
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