लौह अयस्क
लौह अयस्क राजस्व में कोयले के बाद दूसरा और रॉयल्टी में पहला खनिज है। बैलाडीला (दंतेवाड़ा) की खानें, NMDC और रावघाट परियोजना इस विषय के प्रमुख प्रश्न-स्रोत हैं।
सामान्य परिचय
- मातृ शैल: धारवाड़ क्रम।
- प्रकार: मुख्यतः हेमेटाइट; मूल पाठ के अनुसार मैग्नेटाइट, हेमेटाइट, लिमोनाइट और सिडेराइट भी गिने गए हैं (चौथा नाम मूल पाठ में आंशिक कटा है)।
- उत्खनन NMDC द्वारा (उप-मुख्यालय दंतेवाड़ा)।
राजस्व और रॉयल्टी
- देश के खनिज मूल्य में लौह अयस्क का योगदान सर्वाधिक (22.63%)।
- राज्य में लोहे का दूसरा सर्वाधिक योगदान (29.51%)।
- रॉयल्टी मूल्य में सर्वाधिक धातु; दूसरा कोयला।
विसंगति: देश के खनिज मूल्य में योगदान एक जगह 22.63% और दूसरी तालिका में 21.10% छपा है।
भंडार और उत्पादन
| बिंदु | भंडार | उत्पादन (2022-23) |
|---|---|---|
| मात्रा | 4592 मिलियन टन (देश के कुल लोहे का पाँचवाँ भाग) | 42,549 हज़ार टन |
| प्रतिशत | 19.09% | 15.90% |
| देश में स्थान | तृतीय (ओडिशा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़) | द्वितीय (ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक) |
| राज्य में | दंतेवाड़ा, कांकेर, कवर्धा | दंतेवाड़ा, कांकेर, बालोद |
जिलेवार लौह क्षेत्र
| जिला | क्षेत्र |
|---|---|
| कबीरधाम | इकलामा/एकलामा, चेलिकलामा, चिल्फीघाटी एवं सिघारी, गोधाटोला, केसदा |
| खै.-छु.-ग. | नचनिया, खारा |
| राजनांदगाँव | तेन्दूभाठा |
| मो.-मा.-अ. | बोरियाटिब्बू, मोहला |
| बालोद | दल्लीराजहरा (भिलाई इस्पात संयंत्र दल्लीराजहरा क्षेत्र का मालिक), डौंडीलोहारा, दुलकी, महामाया, ठाकुरटोला |
| कांकेर | रावघाट (6 निक्षेप), आरीडोंगरी (भानुप्रतापपुर), चारगाँव, मेटाबोदेली, हाहालद्दी, चारामा, कोलमसार, कोदापाख, कोण्डापारवा, कुरसुबोरी, कलवर |
| नारायणपुर | छोटे डोंगर क्षेत्र, आमदई घाटी, अंजरेल |
| दंतेवाड़ा | मालेंगर क्षेत्र, किरंदुल, बचेली, बैलाडीला |
| महासमुंद | सरगुणभाटा |
| गरियाबंद | मछुआ बहल, बिन्द्रानवागढ़, देवरी |
धमतरी, दुर्ग और कोरिया में लौह अयस्क के साक्ष्य नहीं मिले हैं।
दंतेवाड़ा और बैलाडीला
- बैलाडीला में लौह अयस्क का सर्वाधिक विस्तृत भंडार क्षेत्र है; यहाँ नवरत्न कंपनी NMDC खनन करती है और अयस्क विशाखापट्टनम बंदरगाह से जापान भेजा जाता है।
- पहली इकाई निक्षेप क्रमांक 14, किरंदुल में 1968; दूसरी निक्षेप क्रमांक 5, बचेली (1980); तीसरी बैलाडीला (1988) में।
- बैलाडीला में 14 निक्षेप हैं; सबसे बड़ा निक्षेप क्रमांक 5; निक्षेप 13 और 14 मालेंगर नदी घाटी में।
- बैलाडीला भारत की सबसे बड़ी मशीनीकृत खान है।
- छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक लौह उत्पादन दंतेवाड़ा जिले में होता है।
NMDC को आबंटित 4 निक्षेप
- आरीडोंगरी (कांकेर)
- कवर्धा (कबीरधाम)
- बैलाडीला निक्षेप क्षेत्र-4 (दंतेवाड़ा)
- बैलाडीला निक्षेप क्षेत्र-13 (दंतेवाड़ा)
दल्लीराजहरा खान से पहले भिलाई इस्पात संयंत्र को अयस्क मिलता था; वर्तमान में आपूर्ति रावघाट माइंस से होती है। रावघाट परियोजना कांकेर और नारायणपुर जिले में फैली है।
तुलना एवं संबंध
| खनिज | मातृ चट्टान | खनन संस्था | शीर्ष जिला |
|---|---|---|---|
| कोयला | गोंडवाना | SECL | कोरबा/रायगढ़ |
| लौह अयस्क | धारवाड़ | NMDC | दंतेवाड़ा |
याद रखने योग्य बिंदु
- मातृ शैल धारवाड़।
- रॉयल्टी में पहला खनिज।
- भंडार 4592 मि. टन (19.09%), देश में तृतीय।
- उत्पादन 42,549 हज़ार टन (15.90%), देश में द्वितीय।
- किरंदुल पहली इकाई 1968 (निक्षेप 14)।
- बचेली 1980 (निक्षेप 5); बैलाडीला 1988।
- बैलाडीला में 14 निक्षेप; सबसे बड़ा क्र. 5।
- निक्षेप 13-14 मालेंगर घाटी में।
- रावघाट कांकेर व नारायणपुर में; अब भिलाई को आपूर्ति।
- दल्लीराजहरा बालोद में।
- धमतरी, दुर्ग, कोरिया में लौह नहीं।
स्मरण सूत्र
"किरन-बच-बैला" = 1968, 1980, 1988 (किरंदुल, बचेली, बैलाडीला की इकाइयाँ)।
स्वयं जाँचें
- प्र. लौह अयस्क की मातृ शैल? उ. धारवाड़ क्रम।
- प्र. बैलाडीला में कितने निक्षेप हैं? उ. 14।
- प्र. पहली NMDC इकाई कहाँ और कब? उ. किरंदुल, 1968।
- प्र. अयस्क किस बंदरगाह से जापान जाता है? उ. विशाखापट्टनम।
- प्र. भिलाई को अब आपूर्ति किस खदान से? उ. रावघाट।
- प्र. लौह अयस्क उत्पादन का देश में स्थान? उ. द्वितीय।
अभ्यास प्रश्न
इस राज्य के निम्नलिखित में से किस स्थान में लौह अयस्क के सर्वाधिक विस्तृत भंडार विद्यमान है?
- (A) रावघाट
- (B) छोटे डोंगर
- (C) बैलाडीला
- (D) राजहरा
छत्तीसगढ़ के किस जिले में लौह अयस्क का सबसे अधिक उत्पादन होता है ?
- (A) दंतेवाड़ा
- (B) बस्तर
- (C) कांकेर
- (D) दुर्ग
बस्तर का लौह अयस्क मुख्यतः किस प्रकार का है?
- (A) हेमेटाइट
- (B) मैग्नेटाइट
- (C) पाइरोलुसाइट
- (D) लैटेराइट
आरीडोंगरी लौह अयस्क परियोजना किस जिले में स्थित है?
- (A) कोण्डागांव
- (B) नारायणपुर
- (C) बस्तर
- (D) कांकेर
बैलाडीला का लौह-अयस्क किस देश को निर्यात किया जाता है?
- (A) जापान
- (B) रूस
- (C) सिंगापुर
- (D) मलेशिया
छत्तीसगढ़ में प्रमुखता किस प्रकार का लौह अयस्क प्राप्त होता है ?
- (A) मैग्नेटाइट
- (B) हेमेटाइट
- (C) लाइमोनाईट
- (D) साइडेराइट
छत्तीसगढ़ में कौन सा क्षेत्र लौह अयस्क में समृध्द है?
- (A) सतपुड़ा
- (B) बैलाडीला
- (C) चिरमिरी
- (D) मैकाल
इकलामा लौह अयस्क क्षेत्र किस जिले में स्थित है
- (A) राजनांदगाँव
- (B) काँकेर
- (C) दुर्ग
- (D) कबीरधाम
कांकेर जिले की अरो डोगरी पहाड़ी से लौह-अयस्क का उत्पादन किया जाता है। यह किस तहसील में है?
- (A) भानुप्रतापपुर
- (B) नाहरपुर
- (C) अन्तागढ़
- (D) कांकेर
लौह अयस्क की विश्व प्रसिद्ध खदान छत्तीसगढ़ में कहाँ स्थित है?
- (A) बारसूर
- (B) दंतेवाड़ा
- (C) बैलाडीला
- (D) कुटुम्बसर
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (C) - बैलाडीला में लौह अयस्क का सर्वाधिक विस्तृत भंडार क्षेत्र है।
- (A) - सर्वाधिक लौह उत्पादन दंतेवाड़ा जिले में होता है।
- (A) - राज्य में लौह अयस्क मुख्यतः हेमेटाइट है।
- (D) - आरीडोंगरी कांकेर (भानुप्रतापपुर) में है।
- (A) - अयस्क विशाखापट्टनम से जापान भेजा जाता है।
- (B) - प्रकार: मुख्यतः हेमेटाइट।
- (B) - बैलाडीला (दंतेवाड़ा) लौह अयस्क का विस्तृत भंडार क्षेत्र है।
- (D) - इकलामा क्षेत्र कबीरधाम जिले में है।
- (A) - आरीडोंगरी भानुप्रतापपुर (कांकेर) में है।
- (C) - बैलाडीला में नवरत्न NMDC खनन करती है।