छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक इकाइयाँ: संभाग, जिला, अनुविभाग, तहसील, विकासखंड
राज्य के प्रशासन की सीढ़ी संभाग से शुरू होकर जिला, अनुविभाग, तहसील और विकासखंड तक जाती है। इन सबकी वर्तमान संख्या, इतिहास और अधिकारी परीक्षा के प्रिय विषय हैं।
वर्तमान स्थिति एक नज़र में
| इकाई | संख्या/स्थिति |
|---|---|
| संभाग | 5 |
| जिला | 33 |
| अनुविभाग | 117 |
| तहसील | 251 |
| विकासखंड | 146 |
| अनुसूचित विकासखंड | 85 (5050 ग्राम पंचायत) |
| अनुसूचित क्षेत्र (पूर्ण रूप से) | 17 जिले |
| अनुसूचित क्षेत्र (आंशिक रूप से) | 4 जिले |
| आकांक्षी जिला | 10 (पूरे भारत में 112) |
गठन की शक्ति
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 13 के अंतर्गत संभाग, जिले, उपखंड (अनुविभाग) और तहसीलों के नाम, क्षेत्र व सीमा बदलने, नई रचना करने या समाप्त करने की शक्ति राज्य सरकार के पास है।
संभाग
प्रदेश को प्रशासकीय दृष्टि से 5 संभागों में बाँटा गया है और प्रत्येक पर संभागायुक्त का पद है। संभाग का उद्देश्य अपने अधीन जिलों, अनुविभागों, तहसीलों और जनपद स्तर के अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्यों पर नियंत्रण रखना और समय-समय पर उनकी समीक्षा करना है।
संभागों का इतिहास
- राज्य बनने के समय तीन संभाग थे: रायपुर (1862, प्रदेश का पहला संभाग), बिलासपुर (1956) और बस्तर (1981)।
- मूल पाठ के अनुसार राज्य निर्माण के कुछ समय बाद संभागीय इकाई समाप्त कर दी गई थी और अप्रैल 2008 में फिर लाई गई। (मूल पाठ में समाप्ति का वर्ष नहीं दिया गया है।)
- अप्रैल 2008 में संभाग फिर बने और सरगुजा को चौथा संभाग बनाया गया (1 अप्रैल 2008)।
- 15 अगस्त 2013 को दुर्ग को नया संभाग बनाने की घोषणा हुई; रायपुर से अलग कर सितम्बर 2013 में दुर्ग पाँचवाँ और वर्तमान का नवीनतम संभाग बना।
पाँचों संभाग
| संभाग | स्थापना | मुख्यालय | जिले | विशेष |
|---|---|---|---|---|
| रायपुर | 1862 | रायपुर | 5: रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद | प्राचीनतम संभाग; सबसे कम जिलों वाला |
| बिलासपुर | 1956 | बिलासपुर | 8: बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा, सक्ती, जाँजगीर–चांपा, रायगढ़, सारंगढ़, गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही | जनसंख्या की दृष्टि से बड़ा; सर्वाधिक जिलों वाला |
| बस्तर | 1981 | जगदलपुर | 7: बस्तर, कोण्डागांव, कांकेर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर | क्षेत्रफल में बड़ा; जनसंख्या में छोटा |
| सरगुजा | 1 अप्रैल 2008 | अम्बिकापुर | 6: सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, जशपुर, मनेन्द्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर | राज्य गठन के बाद बना संभाग |
| दुर्ग | सितम्बर 2013 | दुर्ग | 7: दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, कबीरधाम, राजनांदगांव, मोहला–मानपुर–अम्बागढ़ चौकी, खैरागढ़–छुईखदान–गंडई | नवीनतम संभाग; क्षेत्रफल में सबसे छोटा |
जिले
- कलेक्टर जिले का शीर्ष अधिकारी है, जो कानून-व्यवस्था, विकास और समन्वय का कार्य देखता है।
- राज्य निर्माण (2000) के समय 16 राजस्व जिले थे।
- 1 मई 2007 को नारायणपुर और बीजापुर बने, संख्या 18 हुई।
- 1 जनवरी 2012 से 9 नए जिले बने, संख्या 27 हुई।
- 10 फरवरी 2020 को गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही बना, संख्या 28 हुई।
- 9 सितम्बर 2022 को 5 नए जिले बनने के बाद संख्या 33 हुई।
| वर्ष | घटना | कुल जिले |
|---|---|---|
| 2000 | राज्य निर्माण | 16 |
| 1 मई 2007 | नारायणपुर, बीजापुर | 18 |
| 1 जनवरी 2012 | 9 नए जिले | 27 |
| 10 फरवरी 2020 | गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही | 28 |
| 9 सितम्बर 2022 | 5 नए जिले | 33 |
अनुविभाग
जिले में प्रभावी शासन के लिए जिलों को अनुविभागों में बाँटा जाता है। प्रमुख अधिकारी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), यानी SDM/SDO होता है, जो राज्य प्रशासनिक सेवा (सामान्यतः डिप्टी कलेक्टर) संवर्ग का अधिकारी है। कुल अनुविभाग 117 हैं।
तहसील
- तहसील राजस्व संग्रहण की भौगोलिक इकाई है; गठन का अधिकार राज्य सरकार के पास है।
- जिला अनेक राजस्व तहसीलों में बँटा है; मुख्य राजस्व अधिकारी तहसीलदार है।
- राजस्व विभाग के प्रशासकीय प्रतिवेदन 2023-24 के अनुसार तहसीलों की संख्या 251 है।
विकासखंड
- विकासखंड ग्रामीण विकास की भौगोलिक इकाई है।
- विकासखंड गठन का अधिकार केन्द्र के पास बताया गया है (तहसील/जिले की तरह राज्य के पास नहीं)।
- कुल 146 विकासखंड हैं, इनमें 85 आदिवासी विकासखंड हैं जिनमें 5050 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
- विकासखंड राजस्व प्रशासन की इकाई नहीं है।
संभागवार तुलनात्मक सारणी
| संभाग | जिले | विकासखंड | तहसील | नगर निगम | नगर पालिका | नगर पंचायत |
|---|---|---|---|---|---|---|
| रायपुर | 5 | 23 | 37 | 3 | 10 | 23 |
| बिलासपुर | 8 | 34 | 68 | 3 | 13 | 36 |
| बस्तर | 7 | 32 | 51 | 1 | 8 | 14 |
| दुर्ग | 7 | 25 | 46 | 5 | 11 | 29 |
| सरगुजा | 6 | 32 | 49 | 2 | 6 | 19 |
| योग | 33 | 146 | 251 | 14 | 48 | 122 |
स्रोत-विसंगति: नगर पंचायतों की पाँच संभागीय संख्याओं (23+36+14+29+19) का जोड़ 121 आता है, जबकि सारणी में योग 122 छपा है। बाकी सभी स्तंभों के जोड़ मिलते हैं।
तुलना एवं संबंध
- प्राचीनतम संभाग रायपुर (1862) ↔ नवीनतम दुर्ग (2013)।
- सर्वाधिक जिले/तहसील वाला बिलासपुर (8 जिले, 68 तहसील) ↔ सबसे कम जिलों वाला रायपुर (5)।
- सर्वाधिक नगर निगम दुर्ग संभाग (5) में, बस्तर में केवल 1।
- राजस्व इकाइयाँ (जिला, अनुविभाग, तहसील) राज्य की शक्ति से बनती हैं; विकासखंड ग्रामीण विकास इकाई है।
याद रखने योग्य बिंदु
- 5 संभाग, 33 जिले, 117 अनुविभाग, 251 तहसील, 146 विकासखंड।
- पहला संभाग रायपुर 1862, बिलासपुर 1956, बस्तर 1981।
- सरगुजा संभाग 1 अप्रैल 2008 और दुर्ग संभाग सितम्बर 2013 में बना।
- बस्तर का मुख्यालय जगदलपुर, सरगुजा का अम्बिकापुर।
- राज्य बनने पर 16 जिले थे; अब 33।
- 2007: +2, 2012: +9, 2020: +1, 2022: +5 जिले।
- बिलासपुर संभाग में सर्वाधिक 8 जिले हैं।
- अनुविभाग का मुखिया SDM/SDO है।
- तहसील का मुखिया तहसीलदार है।
- विकासखंड राजस्व प्रशासन की इकाई नहीं।
स्मरण सूत्र
संभागों का क्रम (पुराने से नए): "रा-बि-ब-स-दु" = रायपुर, बिलासपुर, बस्तर, सरगुजा, दुर्ग। जिले 16→18→27→28→33: "सोलह, अठारह, सत्ताईस, अट्ठाईस, तैंतीस"।
स्वयं जाँचें
- प्र. राज्य का पहला संभाग कौन-सा है? उ. रायपुर (1862)।
- प्र. राज्य का नवीनतम संभाग? उ. दुर्ग (सितम्बर 2013)।
- प्र. सर्वाधिक जिलों वाला संभाग? उ. बिलासपुर (8)।
- प्र. 9 नए जिले किस तारीख से बने? उ. 1 जनवरी 2012 से, संख्या 27 हुई।
- प्र. अनुविभाग का प्रमुख अधिकारी कौन? उ. SDM/SDO।
- प्र. बस्तर संभाग का मुख्यालय? उ. जगदलपुर।