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छत्तीसगढ़ का भूगोल (भाग 1): राज्य, धरातल, नदियाँ एवं जलवायु · Chapter 6
छत्तीसगढ़ के प्राचीन नाम

छत्तीसगढ़ के प्राचीन नाम

छत्तीसगढ़ आज के नाम से बहुत बाद में जाना गया। अलग-अलग कालों और लेखकों ने इस भू-भाग को अलग नामों से पुकारा है। परीक्षा में प्रायः 'किस काल में कौन-सा नाम' पूछा जाता है, इसलिए नीचे पूरी सूची काल के क्रम में दी गई है। यह अध्याय CGPSC, व्यापम और पटवारी परीक्षाओं के लिए तालिका-आधारित तथ्य देता है।

काल के अनुसार नामों की तालिका

मूल पाठ की तालिका में दो स्तंभ हैं: मध्य छत्तीसगढ़ (मैदानी भाग) और बस्तर (दक्षिण छत्तीसगढ़) के लिए प्रयुक्त नाम। जहाँ खाना खाली है, वहाँ उस काल के लिए मूल पाठ में कोई नाम नहीं दिया गया।

क्रमकाल / स्रोतमध्य छत्तीसगढ़बस्तर (दक्षिण)
1वैदिक कालकोई नाम नहीं दियादक्षिण दिशा (दक्षिण दिक)
2रामायण कालदक्षिण कोसलदण्डकारण्य
3महाभारत कालकोसल / प्राक्कोसलकान्तार
4महाजनपद कालचेदिसगढ़कोई नाम नहीं दिया
5टॉलमी (सातवाहन काल)अधिष्ठी (छपाई के अनुसार)कोई नाम नहीं दिया
6रघुवंश (कालिदास)कोसल एवं उत्तर कोसलकोई नाम नहीं दिया
7गुप्त कालकोसल / दक्षिणापथमहाकान्तार
8ह्वेनसांग (चीनी यात्री)किया-स-लोकोई नाम नहीं दिया
9कल्चुरी कालदक्षिण कोसलकोई नाम नहीं दिया
10मुगल कालरतनपुर राज्यकोई नाम नहीं दिया
11ब्रिटिश कालछत्तीसगढ़कोई नाम नहीं दिया
12कनिंघम के अनुसारमहाकोसलदण्डकारण्य

तालिका की व्याख्या

  • कोसल से जुड़े नाम: रामायण, महाभारत, रघुवंश, गुप्त और कल्चुरी, सभी में कोसल शब्द किसी रूप में आता है (दक्षिण कोसल, प्राक्कोसल, उत्तर कोसल)। यह भू-भाग की पहचान का मूल धागा है।
  • बस्तर के नाम: दण्डकारण्य (रामायण और कनिंघम), कान्तार (महाभारत) और महाकान्तार (गुप्त) वन-प्रधान क्षेत्र को बताते हैं।
  • विदेशी विवरण: टॉलमी और चीनी यात्री ह्वेनसांग के नाम अलग-अलग रूप में मिलते हैं।
  • मध्यकाल: मुगल काल में रतनपुर राज्य और ब्रिटिश काल में 'छत्तीसगढ़' नाम मिलता है।

तुलना एवं संबंध

नामकिस काल/मूल पाठ मेंक्षेत्र
दण्डकारण्यरामायण काल; कनिंघमबस्तर
कान्तारमहाभारत कालबस्तर
महाकान्तारगुप्त कालबस्तर
दक्षिण कोसलरामायण काल; कल्चुरी कालमध्य छत्तीसगढ़
महाकोसलकनिंघममध्य छत्तीसगढ़

याद रखने योग्य बिंदु

  • रामायण काल में मध्य भाग दक्षिण कोसल और बस्तर दण्डकारण्य था।
  • महाभारत काल में बस्तर का नाम कान्तार था।
  • गुप्त काल में बस्तर के लिए महाकान्तार नाम आया।
  • महाजनपद काल का नाम चेदिसगढ़ बताया गया है।
  • ह्वेनसांग ने इसे किया-स-लो कहा।
  • कालिदास के रघुवंश में कोसल एवं उत्तर कोसल मिलता है।
  • मुगल काल में रतनपुर राज्य नाम मिलता है।
  • कनिंघम ने महाकोसल नाम दिया।
  • वैदिक काल में बस्तर के लिए केवल दक्षिण दिशा का उल्लेख है।
  • तालिका के बारह कालों में से केवल रामायण और कनिंघम में बस्तर का नाम एक ही (दण्डकारण्य) है।

स्मरण सूत्र

'रा-म-गु': रामायण = दण्ड, महाभारत = कान्तार, गुप्त = महाकान्तार। बस्तर के तीनों वन-नाम इसी क्रम में याद करें।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: रामायण काल में बस्तर क्षेत्र का नाम? उत्तर: दण्डकारण्य।
  2. प्रश्न: महाभारत काल में बस्तर को क्या कहा गया? उत्तर: कान्तार।
  3. प्रश्न: गुप्त काल में बस्तर का नाम? उत्तर: महाकान्तार।
  4. प्रश्न: ह्वेनसांग ने क्षेत्र को क्या नाम दिया? उत्तर: किया-स-लो।
  5. प्रश्न: मुगल काल में मध्य छत्तीसगढ़ का नाम? उत्तर: रतनपुर राज्य।
  6. प्रश्न: कनिंघम के अनुसार नाम? उत्तर: महाकोसल।
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