छत्तीसगढ़ के प्राचीन नाम
छत्तीसगढ़ आज के नाम से बहुत बाद में जाना गया। अलग-अलग कालों और लेखकों ने इस भू-भाग को अलग नामों से पुकारा है। परीक्षा में प्रायः 'किस काल में कौन-सा नाम' पूछा जाता है, इसलिए नीचे पूरी सूची काल के क्रम में दी गई है। यह अध्याय CGPSC, व्यापम और पटवारी परीक्षाओं के लिए तालिका-आधारित तथ्य देता है।
काल के अनुसार नामों की तालिका
मूल पाठ की तालिका में दो स्तंभ हैं: मध्य छत्तीसगढ़ (मैदानी भाग) और बस्तर (दक्षिण छत्तीसगढ़) के लिए प्रयुक्त नाम। जहाँ खाना खाली है, वहाँ उस काल के लिए मूल पाठ में कोई नाम नहीं दिया गया।
| क्रम | काल / स्रोत | मध्य छत्तीसगढ़ | बस्तर (दक्षिण) |
|---|---|---|---|
| 1 | वैदिक काल | कोई नाम नहीं दिया | दक्षिण दिशा (दक्षिण दिक) |
| 2 | रामायण काल | दक्षिण कोसल | दण्डकारण्य |
| 3 | महाभारत काल | कोसल / प्राक्कोसल | कान्तार |
| 4 | महाजनपद काल | चेदिसगढ़ | कोई नाम नहीं दिया |
| 5 | टॉलमी (सातवाहन काल) | अधिष्ठी (छपाई के अनुसार) | कोई नाम नहीं दिया |
| 6 | रघुवंश (कालिदास) | कोसल एवं उत्तर कोसल | कोई नाम नहीं दिया |
| 7 | गुप्त काल | कोसल / दक्षिणापथ | महाकान्तार |
| 8 | ह्वेनसांग (चीनी यात्री) | किया-स-लो | कोई नाम नहीं दिया |
| 9 | कल्चुरी काल | दक्षिण कोसल | कोई नाम नहीं दिया |
| 10 | मुगल काल | रतनपुर राज्य | कोई नाम नहीं दिया |
| 11 | ब्रिटिश काल | छत्तीसगढ़ | कोई नाम नहीं दिया |
| 12 | कनिंघम के अनुसार | महाकोसल | दण्डकारण्य |
तालिका की व्याख्या
- कोसल से जुड़े नाम: रामायण, महाभारत, रघुवंश, गुप्त और कल्चुरी, सभी में कोसल शब्द किसी रूप में आता है (दक्षिण कोसल, प्राक्कोसल, उत्तर कोसल)। यह भू-भाग की पहचान का मूल धागा है।
- बस्तर के नाम: दण्डकारण्य (रामायण और कनिंघम), कान्तार (महाभारत) और महाकान्तार (गुप्त) वन-प्रधान क्षेत्र को बताते हैं।
- विदेशी विवरण: टॉलमी और चीनी यात्री ह्वेनसांग के नाम अलग-अलग रूप में मिलते हैं।
- मध्यकाल: मुगल काल में रतनपुर राज्य और ब्रिटिश काल में 'छत्तीसगढ़' नाम मिलता है।
तुलना एवं संबंध
| नाम | किस काल/मूल पाठ में | क्षेत्र |
|---|---|---|
| दण्डकारण्य | रामायण काल; कनिंघम | बस्तर |
| कान्तार | महाभारत काल | बस्तर |
| महाकान्तार | गुप्त काल | बस्तर |
| दक्षिण कोसल | रामायण काल; कल्चुरी काल | मध्य छत्तीसगढ़ |
| महाकोसल | कनिंघम | मध्य छत्तीसगढ़ |
याद रखने योग्य बिंदु
- रामायण काल में मध्य भाग दक्षिण कोसल और बस्तर दण्डकारण्य था।
- महाभारत काल में बस्तर का नाम कान्तार था।
- गुप्त काल में बस्तर के लिए महाकान्तार नाम आया।
- महाजनपद काल का नाम चेदिसगढ़ बताया गया है।
- ह्वेनसांग ने इसे किया-स-लो कहा।
- कालिदास के रघुवंश में कोसल एवं उत्तर कोसल मिलता है।
- मुगल काल में रतनपुर राज्य नाम मिलता है।
- कनिंघम ने महाकोसल नाम दिया।
- वैदिक काल में बस्तर के लिए केवल दक्षिण दिशा का उल्लेख है।
- तालिका के बारह कालों में से केवल रामायण और कनिंघम में बस्तर का नाम एक ही (दण्डकारण्य) है।
स्मरण सूत्र
'रा-म-गु': रामायण = दण्ड, महाभारत = कान्तार, गुप्त = महाकान्तार। बस्तर के तीनों वन-नाम इसी क्रम में याद करें।
स्वयं जाँचें
- प्रश्न: रामायण काल में बस्तर क्षेत्र का नाम? उत्तर: दण्डकारण्य।
- प्रश्न: महाभारत काल में बस्तर को क्या कहा गया? उत्तर: कान्तार।
- प्रश्न: गुप्त काल में बस्तर का नाम? उत्तर: महाकान्तार।
- प्रश्न: ह्वेनसांग ने क्षेत्र को क्या नाम दिया? उत्तर: किया-स-लो।
- प्रश्न: मुगल काल में मध्य छत्तीसगढ़ का नाम? उत्तर: रतनपुर राज्य।
- प्रश्न: कनिंघम के अनुसार नाम? उत्तर: महाकोसल।
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