दण्डकारण्य का पठार
दण्डकारण्य छत्तीसगढ़ का दक्षिणी पठारी भाग है, जो खनिजों से समृद्ध है। यह अपवाह की दृष्टि से गोदावरी तंत्र का क्षेत्र है और बस्तर संभाग की भू-आकृति समझने की कुंजी है। CGPSC प्रारंभिक और व्यापम की परीक्षाओं में इसके उप-विभाग, चोटियाँ और घाटियाँ खूब पूछी जाती हैं।
परिचय
- दण्डकारण्य का विस्तार छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश एवं ओड़िशा में है; इसका उत्तरी भाग छत्तीसगढ़ में है।
- कांकेर के पखांजुर में पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) के विस्थापितों को बसाने हेतु भारत सरकार द्वारा दण्डकारण्य परियोजना (1971) चलाई गई थी (मूल पाठ के अनुसार)।
- धारवाड़युगीन शैल, ग्रेनाइट और नीस से समृद्ध होने से लोहा, टिन, कोरंडम, अभ्रक, हीरा आदि खनिज मिलते हैं; इसलिए इसे खनिजों की भूमि कहा जाता है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| विस्तार | सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोण्डागांव, बीजापुर, बस्तर, दंतेवाड़ा तथा मोहला तहसील (मो-मा-अ) |
| उत्तर | महानदी का मैदान |
| दक्षिण | गोदावरी घाटी |
| पूर्व | ओड़िशा का कोरापुट पठार एवं शबरी नदी घाटी |
| पश्चिम | वेनगंगा व गोदावरी नदी घाटी |
| क्षेत्रफल | 39,060 वर्ग किमी; 28.91 प्रतिशत |
| ढाल | दक्षिण की ओर |
| अपवाह | गोदावरी नदी अपवाह तंत्र; गोदावरी-शबरी का जलग्रहण क्षेत्र |
| प्रमुख नदियाँ | कोटरी (उत्तर-पश्चिम), इन्द्रावती (मध्य), नारंगी, डंकिनी-शंखिनी, शबरी |
| चोटी | नंदीराज (1210 मी.): प्रदेश की दूसरी ऊँची चोटी और दक्षिण छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची |
| शैल | आर्कियन तथा धारवाड़ |
| प्रमुख खनिज | लौह अयस्क, टिन |
| वन | साल (साल वनों का द्वीप) |
प्रमुख उप-विभाग
मूल पाठ में उप-विभागों की सूची पाँच बताई गई है (कोटरी-महानदी का मैदान/कांकेर बेसिन, अबूझमाड़, उत्तर-पूर्वी पठार, दक्षिण का पठार, गोदावरी-शबरी का मैदान), पर सारणी में कोटरी नदी बेसिन को अलग पंक्ति देने से छह पंक्तियाँ हैं।
| उप-विभाग | विस्तार/स्थिति | ऊँचाई | विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| 1. कोटरी-महानदी का मैदान (कांकेर बेसिन) | कांकेर बेसिन के उत्तर में महानदी बेसिन; दण्डकारण्य के उत्तरी भाग में; पश्चिम में कोटरी नदी उत्तर से दक्षिण बहती है | औसत 300-500 मी.; अधिकतम चौड़ाई लगभग 60 किमी | प्रदेश के उत्तरी भाग में प्रवेश द्वार; महानदी व गोदावरी बेसिन के बीच पठार |
| 2. कोटरी नदी बेसिन | छत्तीसगढ़ के दक्षिण-पश्चिम भाग में | - | - |
| 3. अबूझमाड़ की पहाड़ी | नारायणपुर (दण्डकारण्य के दक्षिण-पश्चिम भू-भाग में) | औसत 600-800 मी. (शिखर 1076 मी.) | ग्रेनाइट और नाइस से निर्मित; बस्तर पठार का सर्वाधिक ऊँचा क्षेत्र |
| 4. उत्तर-पूर्वी पठार (बस्तर का पठार) | उत्तर में कोण्डागांव से दक्षिण-पूर्व में जगदलपुर तहसील तक | लगभग 800 मी. | गुम्बदाकार; ग्रेनाइट-नीस |
| 5. दक्षिण का पठार | बीजापुर, सुकमा के कोंटा तहसील के ऊपरी भाग; अबूझमाड़ और उत्तर-पूर्वी पठार के दक्षिण में | - | ग्रेनाइट व नाइस; मध्य में बैलाडीला की पहाड़ी |
| 6. गोदावरी-शबरी का मैदान (उर्मील बेसिन) | उत्तर में बीजापुर तहसील से दक्षिण में कोंटा तहसील तक | 300 मी. से कम | टिन की प्राप्ति |
अबूझमाड़ की पहाड़ी
- अर्थ: अबूझ = जिसे बूझा न जा सके, अज्ञात; माड़ = पर्वत।
- स्थिति: उत्तर में कोटरी नदी मैदान; उत्तर-पूर्व में रावघाट की पहाड़ी; दक्षिण में इंद्रावती नदी; पूर्व में बोरडिंग नदी (इंद्रावती की सहायक)।
- उपनाम: छत्तीसगढ़ का चेरापूंजी (187 सेमी), अधिकतम वर्षा के कारण; नारायणपुर सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्र में आता है।
- उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी सीमा पर धारवाड़ तथा कड़प्पा शैलें।
- खुरसेल घाटी: यहाँ सर्वोच्च किस्म के सागौन वन मिलते हैं।
- जनजाति: अबूझमाड़िया।
- जाटलूर नदी में प्राकृतिक रूप से मगरमच्छ पाए जाते हैं।
- सोनपुर की घाटी इसके उत्तरी सीमावर्ती भाग को शेष भाग से अलग करती है; इंद्रावती नदी घाटी अबूझमाड़ को दक्षिण की ओर सीमांकित करती है।
उत्तर-पूर्वी पठार, दक्षिण का पठार और गोदावरी-शबरी मैदान
| दिशा (उत्तर-पूर्वी पठार की) | घाटी/डोंगर |
|---|---|
| उत्तर | तेलिन घाटी |
| उत्तर-पश्चिम | मतला घाटी |
| दक्षिण | तुलसी डोंगर (दरभा घाटी) |
| दक्षिण-पश्चिम | टंगरी डोंगर (बस्तानार) |
- दक्षिण के पठार के पूर्व में सुकमा घाटी; दक्षिण-पूर्व में टिकनपल्ली की पहाड़ी (सुकमा)।
- गोदावरी-शबरी मैदान को उर्मील बेसिन भी कहते हैं।
- शबरी घाटी की मिट्टी लाल-दोमट किन्तु अनुपजाऊ है।
- उत्तर में अलबका की पहाड़ियाँ; बीजापुर तहसील के पश्चिम में उसुर की पहाड़ी।
दण्डकारण्य की अन्य स्थलाकृतियाँ
| स्थलाकृति | जिला/स्थिति | विवरण |
|---|---|---|
| रावघाट की पहाड़ी | अबूझमाड़ के उत्तर-पूर्व में; कांकेर | लौह अयस्क के 6 निक्षेप; भिलाई स्टील प्लांट को आपूर्ति |
| आरीडोंगरी पहाड़ी | भानुप्रतापपुर तहसील (कांकेर) | लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध |
| गढ़िया पहाड़ी | कांकेर | सितम्बर में गढ़िया महोत्सव; रूपई एवं सोनई तालाब (राजा की दोनों बेटियों की डूबने से मृत्यु के नाम पर); जुड़ीपगार / छुरीपगार गुफा |
| केशकाल घाटी | कोण्डागांव | केशलु नामक व्यक्ति शेर से युद्ध में मारा गया था; बस्तर का प्रवेश द्वार; बॉक्साइट; साल वन; हिल स्टेशन टाटामारी |
| मलाजकुण्डम पहाड़ी | कांकेर | दूध नदी का उद्गम; मलाजकुण्डम जलप्रपात |
| बैलाडीला पहाड़ी | दंतेवाड़ा | नन्दीराज 1210 मी.; बरहाडोंगरी शाखा (बीजापुर व दंतेवाड़ा) |
| अलबका पहाड़ी | बीजापुर | - |
| अलबामा हिल्स | बीजापुर के दक्षिण-पश्चिम | - |
| उसूर की पहाड़ी | बीजापुर, तहसील के पश्चिम | कड़प्पा शैलों से निर्मित |
| गोलापल्ली की पहाड़ी | कोंटा तहसील के दक्षिण | लगभग 950 मी. |
| बस्तर का पठार | बस्तर एवं सुकमा क्षेत्र | झीरमघाटी (सुकमा) एवं दरभाघाटी (बस्तर) |
केशकाल घाटी
- दो घाटियाँ: तेलिन घाटी (कोण्डागांव; तेलिन माता का मंदिर, सती माता को समर्पित; तेलिन माता का महोत्सव) और केशकाल घाटी (जल विभाजक)।
- जल विभाजक: गोदावरी नदी प्रणाली एवं महानदी प्रणाली के बीच; छ.ग. बेसिन और बस्तर पठार के बीच सीमा; महानदी एवं इन्द्रावती के बीच।
- उपनाम: छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जल विभाजक पर्वत।
बैलाडीला पहाड़ी
- नंदीराज/नंदराज (1210 मी.): छ.ग. की दूसरी सबसे ऊँची चोटी और दक्षिण छ.ग. की सर्वोच्च।
- बनावट: पुरातन शैलों (आर्कियन + धारवाड़) से।
- उद्गम: मल्गोर नदी (मल्गोर घाटी) और शंखिनी नदी (नंदीराज की चोटी) का।
- निक्षेप: लौह अयस्क के 14 निक्षेप; प्रकार हेमेटाइट (द्वितीय श्रेणी); उत्खनन NMDC द्वारा।
- निर्यात: विशाखापट्टनम बंदरगाह से जापान भेजा जाता है।
- एशिया का सबसे बड़ा लौह अयस्क भण्डारण; इसी कारण दंतेवाड़ा लौह अयस्क के भण्डार और उत्पादन में प्रथम है।
- ऊपरी भाग आकाश नगर कहलाता है; पहाड़ी इन्द्रावती के दक्षिण में स्थित है।
तुलना एवं संबंध
| अबूझमाड़ | बैलाडीला | केशकाल घाटी | |
|---|---|---|---|
| जिला | नारायणपुर | दंतेवाड़ा | कोण्डागांव |
| पहचान | चेरापूंजी, सागौन, अबूझमाड़िया | लौह अयस्क, नंदीराज | बस्तर का प्रवेश द्वार, जल विभाजक |
| ऊँचाई | औसत 600-800 मी.; शिखर 1076 मी. | 1210 मी. (शिखर) | - |
टिप्पणी: अबूझमाड़ की शिखर ऊँचाई (1076 मी., प्रमुख पर्वतों की तालिका) और औसत ऊँचाई (600-800 मी. इस सारणी में; अन्यत्र 600-900 मी.) अलग मापदंड हैं।
याद रखने योग्य बिंदु
- दण्डकारण्य 39,060 वर्ग किमी, प्रदेश का 28.91 प्रतिशत; ढाल दक्षिण, अपवाह गोदावरी।
- मूल पाठ की सूची में पाँच उप-विभाग; कोटरी-महानदी मैदान उत्तर का प्रवेश द्वार।
- अबूझमाड़ = छत्तीसगढ़ का चेरापूंजी (187 सेमी); खुरसेल घाटी में उत्तम सागौन।
- उत्तर-पूर्वी पठार गुम्बदाकार, लगभग 800 मी.।
- बैलाडीला: 14 निक्षेप, हेमेटाइट, NMDC, विशाखापट्टनम से जापान; एशिया का सबसे बड़ा भण्डार।
- नंदीराज 1210 मी.: प्रदेश की दूसरी सबसे ऊँची चोटी।
- रावघाट: 6 निक्षेप, भिलाई को आपूर्ति।
- केशकाल घाटी: महानदी और इन्द्रावती (गोदावरी) के बीच जल विभाजक।
- गोदावरी-शबरी मैदान = उर्मील बेसिन, 300 मी. से कम; टिन।
- मलाजकुण्डम से दूध नदी का उद्गम।
स्मरण सूत्र
उप-विभाग क्रम: को-अ-उ-द-गो (कोटरी, अबूझमाड़, उत्तर-पूर्वी, दक्षिण, गोदावरी-शबरी)। "आठ सौ का गुम्बद, छह-आठ की अबूझ": उत्तर-पूर्वी 800 मी., अबूझमाड़ 600-800 मी.।
स्वयं जाँचें
- प्र. दण्डकारण्य का क्षेत्रफल कितना है? उ. 39,060 वर्ग किमी।
- प्र. अबूझमाड़ को क्या उपनाम मिला है? उ. छत्तीसगढ़ का चेरापूंजी।
- प्र. बैलाडीला के लौह अयस्क का उत्खनन कौन करता है? उ. NMDC।
- प्र. केशकाल घाटी किन दो नदी प्रणालियों को बाँटती है? उ. गोदावरी और महानदी प्रणाली।
- प्र. उर्मील बेसिन किसे कहते हैं? उ. गोदावरी-शबरी के मैदान को।
- प्र. रावघाट में लौह अयस्क के कितने निक्षेप हैं? उ. 6।
अभ्यास प्रश्न
अबूझमाड़ की पहाड़ियाँ कहाँ हैं?
- (A) . दंडकारण्य के उत्तर में
- (B) दंडकारण्य के दक्षिण-पश्चिम में
- (C) दंडकारण्य के पूर्व में
- (D) दंडकारण्य के उत्तर-पूर्व में
बस्तर का पठार छत्तीसगढ़ के किस भाग में है?
- (A) उत्तरी
- (B) पूर्वी
- (C) दक्षिणी
- (D) मध्य
अबूझमाड़ का क्या अर्थ होता है?
- (A) अज्ञात
- (B) मेताभुम
- (C) पहाड़ी
- (D) अनपढ़
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (B) - अबूझमाड़ की पहाड़ी दण्डकारण्य के दक्षिण-पश्चिम भू-भाग में है।
- (C) - दण्डकारण्य/बस्तर का पठार छ.ग. का दक्षिणी पठारी भाग है।
- (A) - अबूझ = जिसे बूझा न जा सके, अज्ञात; माड़ = पर्वत।