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छत्तीसगढ़ का भूगोल (भाग 1): राज्य, धरातल, नदियाँ एवं जलवायु · Chapter 22
दण्डकारण्य का पठार

दण्डकारण्य का पठार

दण्डकारण्य छत्तीसगढ़ का दक्षिणी पठारी भाग है, जो खनिजों से समृद्ध है। यह अपवाह की दृष्टि से गोदावरी तंत्र का क्षेत्र है और बस्तर संभाग की भू-आकृति समझने की कुंजी है। CGPSC प्रारंभिक और व्यापम की परीक्षाओं में इसके उप-विभाग, चोटियाँ और घाटियाँ खूब पूछी जाती हैं।

परिचय

  • दण्डकारण्य का विस्तार छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश एवं ओड़िशा में है; इसका उत्तरी भाग छत्तीसगढ़ में है।
  • कांकेर के पखांजुर में पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) के विस्थापितों को बसाने हेतु भारत सरकार द्वारा दण्डकारण्य परियोजना (1971) चलाई गई थी (मूल पाठ के अनुसार)।
  • धारवाड़युगीन शैल, ग्रेनाइट और नीस से समृद्ध होने से लोहा, टिन, कोरंडम, अभ्रक, हीरा आदि खनिज मिलते हैं; इसलिए इसे खनिजों की भूमि कहा जाता है।
बिंदुविवरण
विस्तारसुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोण्डागांव, बीजापुर, बस्तर, दंतेवाड़ा तथा मोहला तहसील (मो-मा-अ)
उत्तरमहानदी का मैदान
दक्षिणगोदावरी घाटी
पूर्वओड़िशा का कोरापुट पठार एवं शबरी नदी घाटी
पश्चिमवेनगंगा व गोदावरी नदी घाटी
क्षेत्रफल39,060 वर्ग किमी; 28.91 प्रतिशत
ढालदक्षिण की ओर
अपवाहगोदावरी नदी अपवाह तंत्र; गोदावरी-शबरी का जलग्रहण क्षेत्र
प्रमुख नदियाँकोटरी (उत्तर-पश्चिम), इन्द्रावती (मध्य), नारंगी, डंकिनी-शंखिनी, शबरी
चोटीनंदीराज (1210 मी.): प्रदेश की दूसरी ऊँची चोटी और दक्षिण छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची
शैलआर्कियन तथा धारवाड़
प्रमुख खनिजलौह अयस्क, टिन
वनसाल (साल वनों का द्वीप)

प्रमुख उप-विभाग

मूल पाठ में उप-विभागों की सूची पाँच बताई गई है (कोटरी-महानदी का मैदान/कांकेर बेसिन, अबूझमाड़, उत्तर-पूर्वी पठार, दक्षिण का पठार, गोदावरी-शबरी का मैदान), पर सारणी में कोटरी नदी बेसिन को अलग पंक्ति देने से छह पंक्तियाँ हैं।

उप-विभागविस्तार/स्थितिऊँचाईविशेषताएँ
1. कोटरी-महानदी का मैदान (कांकेर बेसिन)कांकेर बेसिन के उत्तर में महानदी बेसिन; दण्डकारण्य के उत्तरी भाग में; पश्चिम में कोटरी नदी उत्तर से दक्षिण बहती हैऔसत 300-500 मी.; अधिकतम चौड़ाई लगभग 60 किमीप्रदेश के उत्तरी भाग में प्रवेश द्वार; महानदी व गोदावरी बेसिन के बीच पठार
2. कोटरी नदी बेसिनछत्तीसगढ़ के दक्षिण-पश्चिम भाग में--
3. अबूझमाड़ की पहाड़ीनारायणपुर (दण्डकारण्य के दक्षिण-पश्चिम भू-भाग में)औसत 600-800 मी. (शिखर 1076 मी.)ग्रेनाइट और नाइस से निर्मित; बस्तर पठार का सर्वाधिक ऊँचा क्षेत्र
4. उत्तर-पूर्वी पठार (बस्तर का पठार)उत्तर में कोण्डागांव से दक्षिण-पूर्व में जगदलपुर तहसील तकलगभग 800 मी.गुम्बदाकार; ग्रेनाइट-नीस
5. दक्षिण का पठारबीजापुर, सुकमा के कोंटा तहसील के ऊपरी भाग; अबूझमाड़ और उत्तर-पूर्वी पठार के दक्षिण में-ग्रेनाइट व नाइस; मध्य में बैलाडीला की पहाड़ी
6. गोदावरी-शबरी का मैदान (उर्मील बेसिन)उत्तर में बीजापुर तहसील से दक्षिण में कोंटा तहसील तक300 मी. से कमटिन की प्राप्ति

अबूझमाड़ की पहाड़ी

  • अर्थ: अबूझ = जिसे बूझा न जा सके, अज्ञात; माड़ = पर्वत।
  • स्थिति: उत्तर में कोटरी नदी मैदान; उत्तर-पूर्व में रावघाट की पहाड़ी; दक्षिण में इंद्रावती नदी; पूर्व में बोरडिंग नदी (इंद्रावती की सहायक)।
  • उपनाम: छत्तीसगढ़ का चेरापूंजी (187 सेमी), अधिकतम वर्षा के कारण; नारायणपुर सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्र में आता है।
  • उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी सीमा पर धारवाड़ तथा कड़प्पा शैलें।
  • खुरसेल घाटी: यहाँ सर्वोच्च किस्म के सागौन वन मिलते हैं।
  • जनजाति: अबूझमाड़िया।
  • जाटलूर नदी में प्राकृतिक रूप से मगरमच्छ पाए जाते हैं।
  • सोनपुर की घाटी इसके उत्तरी सीमावर्ती भाग को शेष भाग से अलग करती है; इंद्रावती नदी घाटी अबूझमाड़ को दक्षिण की ओर सीमांकित करती है।

उत्तर-पूर्वी पठार, दक्षिण का पठार और गोदावरी-शबरी मैदान

दिशा (उत्तर-पूर्वी पठार की)घाटी/डोंगर
उत्तरतेलिन घाटी
उत्तर-पश्चिममतला घाटी
दक्षिणतुलसी डोंगर (दरभा घाटी)
दक्षिण-पश्चिमटंगरी डोंगर (बस्तानार)
  • दक्षिण के पठार के पूर्व में सुकमा घाटी; दक्षिण-पूर्व में टिकनपल्ली की पहाड़ी (सुकमा)।
  • गोदावरी-शबरी मैदान को उर्मील बेसिन भी कहते हैं।
  • शबरी घाटी की मिट्टी लाल-दोमट किन्तु अनुपजाऊ है।
  • उत्तर में अलबका की पहाड़ियाँ; बीजापुर तहसील के पश्चिम में उसुर की पहाड़ी।

दण्डकारण्य की अन्य स्थलाकृतियाँ

स्थलाकृतिजिला/स्थितिविवरण
रावघाट की पहाड़ीअबूझमाड़ के उत्तर-पूर्व में; कांकेरलौह अयस्क के 6 निक्षेप; भिलाई स्टील प्लांट को आपूर्ति
आरीडोंगरी पहाड़ीभानुप्रतापपुर तहसील (कांकेर)लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध
गढ़िया पहाड़ीकांकेरसितम्बर में गढ़िया महोत्सव; रूपई एवं सोनई तालाब (राजा की दोनों बेटियों की डूबने से मृत्यु के नाम पर); जुड़ीपगार / छुरीपगार गुफा
केशकाल घाटीकोण्डागांवकेशलु नामक व्यक्ति शेर से युद्ध में मारा गया था; बस्तर का प्रवेश द्वार; बॉक्साइट; साल वन; हिल स्टेशन टाटामारी
मलाजकुण्डम पहाड़ीकांकेरदूध नदी का उद्गम; मलाजकुण्डम जलप्रपात
बैलाडीला पहाड़ीदंतेवाड़ानन्दीराज 1210 मी.; बरहाडोंगरी शाखा (बीजापुर व दंतेवाड़ा)
अलबका पहाड़ीबीजापुर-
अलबामा हिल्सबीजापुर के दक्षिण-पश्चिम-
उसूर की पहाड़ीबीजापुर, तहसील के पश्चिमकड़प्पा शैलों से निर्मित
गोलापल्ली की पहाड़ीकोंटा तहसील के दक्षिणलगभग 950 मी.
बस्तर का पठारबस्तर एवं सुकमा क्षेत्रझीरमघाटी (सुकमा) एवं दरभाघाटी (बस्तर)

केशकाल घाटी

  • दो घाटियाँ: तेलिन घाटी (कोण्डागांव; तेलिन माता का मंदिर, सती माता को समर्पित; तेलिन माता का महोत्सव) और केशकाल घाटी (जल विभाजक)।
  • जल विभाजक: गोदावरी नदी प्रणाली एवं महानदी प्रणाली के बीच; छ.ग. बेसिन और बस्तर पठार के बीच सीमा; महानदी एवं इन्द्रावती के बीच।
  • उपनाम: छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जल विभाजक पर्वत।

बैलाडीला पहाड़ी

  • नंदीराज/नंदराज (1210 मी.): छ.ग. की दूसरी सबसे ऊँची चोटी और दक्षिण छ.ग. की सर्वोच्च।
  • बनावट: पुरातन शैलों (आर्कियन + धारवाड़) से।
  • उद्गम: मल्गोर नदी (मल्गोर घाटी) और शंखिनी नदी (नंदीराज की चोटी) का।
  • निक्षेप: लौह अयस्क के 14 निक्षेप; प्रकार हेमेटाइट (द्वितीय श्रेणी); उत्खनन NMDC द्वारा।
  • निर्यात: विशाखापट्टनम बंदरगाह से जापान भेजा जाता है।
  • एशिया का सबसे बड़ा लौह अयस्क भण्डारण; इसी कारण दंतेवाड़ा लौह अयस्क के भण्डार और उत्पादन में प्रथम है।
  • ऊपरी भाग आकाश नगर कहलाता है; पहाड़ी इन्द्रावती के दक्षिण में स्थित है।

तुलना एवं संबंध

अबूझमाड़बैलाडीलाकेशकाल घाटी
जिलानारायणपुरदंतेवाड़ाकोण्डागांव
पहचानचेरापूंजी, सागौन, अबूझमाड़ियालौह अयस्क, नंदीराजबस्तर का प्रवेश द्वार, जल विभाजक
ऊँचाईऔसत 600-800 मी.; शिखर 1076 मी.1210 मी. (शिखर)-

टिप्पणी: अबूझमाड़ की शिखर ऊँचाई (1076 मी., प्रमुख पर्वतों की तालिका) और औसत ऊँचाई (600-800 मी. इस सारणी में; अन्यत्र 600-900 मी.) अलग मापदंड हैं।

याद रखने योग्य बिंदु

  • दण्डकारण्य 39,060 वर्ग किमी, प्रदेश का 28.91 प्रतिशत; ढाल दक्षिण, अपवाह गोदावरी।
  • मूल पाठ की सूची में पाँच उप-विभाग; कोटरी-महानदी मैदान उत्तर का प्रवेश द्वार।
  • अबूझमाड़ = छत्तीसगढ़ का चेरापूंजी (187 सेमी); खुरसेल घाटी में उत्तम सागौन।
  • उत्तर-पूर्वी पठार गुम्बदाकार, लगभग 800 मी.।
  • बैलाडीला: 14 निक्षेप, हेमेटाइट, NMDC, विशाखापट्टनम से जापान; एशिया का सबसे बड़ा भण्डार।
  • नंदीराज 1210 मी.: प्रदेश की दूसरी सबसे ऊँची चोटी।
  • रावघाट: 6 निक्षेप, भिलाई को आपूर्ति।
  • केशकाल घाटी: महानदी और इन्द्रावती (गोदावरी) के बीच जल विभाजक।
  • गोदावरी-शबरी मैदान = उर्मील बेसिन, 300 मी. से कम; टिन।
  • मलाजकुण्डम से दूध नदी का उद्गम।

स्मरण सूत्र

उप-विभाग क्रम: को-अ-उ-द-गो (कोटरी, अबूझमाड़, उत्तर-पूर्वी, दक्षिण, गोदावरी-शबरी)। "आठ सौ का गुम्बद, छह-आठ की अबूझ": उत्तर-पूर्वी 800 मी., अबूझमाड़ 600-800 मी.।

स्वयं जाँचें

  1. प्र. दण्डकारण्य का क्षेत्रफल कितना है? उ. 39,060 वर्ग किमी।
  2. प्र. अबूझमाड़ को क्या उपनाम मिला है? उ. छत्तीसगढ़ का चेरापूंजी।
  3. प्र. बैलाडीला के लौह अयस्क का उत्खनन कौन करता है? उ. NMDC।
  4. प्र. केशकाल घाटी किन दो नदी प्रणालियों को बाँटती है? उ. गोदावरी और महानदी प्रणाली।
  5. प्र. उर्मील बेसिन किसे कहते हैं? उ. गोदावरी-शबरी के मैदान को।
  6. प्र. रावघाट में लौह अयस्क के कितने निक्षेप हैं? उ. 6।

अभ्यास प्रश्न

  1. अबूझमाड़ की पहाड़ियाँ कहाँ हैं?

    • (A) . दंडकारण्य के उत्तर में
    • (B) दंडकारण्य के दक्षिण-पश्चिम में
    • (C) दंडकारण्य के पूर्व में
    • (D) दंडकारण्य के उत्तर-पूर्व में
  2. बस्तर का पठार छत्तीसगढ़ के किस भाग में है?

    • (A) उत्तरी
    • (B) पूर्वी
    • (C) दक्षिणी
    • (D) मध्य
  3. अबूझमाड़ का क्या अर्थ होता है?

    • (A) अज्ञात
    • (B) मेताभुम
    • (C) पहाड़ी
    • (D) अनपढ़

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (B) - अबूझमाड़ की पहाड़ी दण्डकारण्य के दक्षिण-पश्चिम भू-भाग में है।
  2. (C) - दण्डकारण्य/बस्तर का पठार छ.ग. का दक्षिणी पठारी भाग है।
  3. (A) - अबूझ = जिसे बूझा न जा सके, अज्ञात; माड़ = पर्वत।
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