मिट्टियों का वर्गीकरण एवं प्रमुख मिट्टियाँ
किसी क्षेत्र की चट्टानें वहाँ की मिट्टी का निर्माण और स्वभाव तय करती हैं। छत्तीसगढ़ प्रायद्वीपीय पठार का हिस्सा है, जहाँ अवशिष्ट प्रकार की मिट्टी मिलती है। चट्टानों के आधार पर मुख्यतः 5 प्रकार की मिट्टी मिलती है: लाल-पीली, लाल रेतीली, लाल दोमट, लेटेराइट और काली। मिट्टी की पहचान उसके बनने की चट्टान, रंग, अम्लीय या क्षारीय प्रकृति (pH), जलधारण क्षमता और फसल से होती है। पटवारी, व्यापम और CGPSC में इनके गुण, रंग, फसल और वितरण के प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। यह अध्याय पाँचों मिट्टियों की तुलना और क्रमवार विवरण देता है; डोरसा, कछार, स्थानीय शब्दावली और मृदा-वर्ग की तालिकाएँ अगले अध्याय में हैं।
पाँच मिट्टियों की तुलनात्मक सारणी
| तथ्य | लाल-पीली | लाल रेतीली | लाल दोमट | लेटेराइट | काली |
|---|---|---|---|---|---|
| स्थानीय नाम | मटासी | टिकरा | परिया | मुरूमी/भाठा/बंजर | कन्हार/भर्री/रेगुर/गभार/चिका |
| निर्माण | ग्रेनाइट-शिस्ट चट्टानों से | आर्कियन व धारवाड़ के अपरदन से | नीस, डायोराइट आदि चिका प्रधान व अम्ल रहित चट्टानों से | निक्षालन (Leaching) से लेटेराइजेशन | बेसाल्ट युक्त लावा चट्टानों के अपरदन से |
| प्रकृति (pH) | अम्लीय (6.8) | अम्लीय (6.6) | अम्लीय (5.2) | उच्च अम्लीय (5.2) | क्षारीय (7.6) |
| जलधारण क्षमता | सीमित | — | न्यूनतम | — | सर्वाधिक |
| प्रतिशत | 50-55% | 25-30% | 10-15% | — | — |
| विस्तार | महानदी बेसिन, पूर्वी बघेलखण्ड, दण्डकारण्य | दंतेवाड़ा, बस्तर, कांकेर, बालोद, मोहला-मानपुर | दंतेवाड़ा, सुकमा | जशपुर सामरी पाट, सीमांत उच्च भूमि | मैकल श्रेणी के पूर्व में, सरगुजा एवं जशपुर |
| उपयुक्त फसल | धान | ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो-कुटकी | मोटे अनाज | चाय एवं बागवानी | कपास, गेहूँ, गन्ना, चना, सोयाबीन |
| अधिकता | लोहा, रेत, चूना | लोहा, रेत, ग्रेनाइट एवं नीस | लोहा, क्ले | कंकड़-पत्थर, आयरन, एल्युमिनियम | लोहा, एल्युमिनियम, चूना, पोटाश, चिका |
| कमी | नाइट्रोजन, ह्यूमस | नाइट्रोजन, ह्यूमस | नाइट्रोजन, ह्यूमस | — | फॉस्फेट, नाइट्रोजन, जीवाश्म |
| उपजाऊपन | द्वितीय उपजाऊ | कम उपजाऊ | अनुपजाऊ | कृषि हेतु अनुपयुक्त | सर्वाधिक उपजाऊ |
| गहराई | द्वितीयक | — | — | तृतीयक | सर्वाधिक |
मृदा वर्ग (नक्शे की तालिका)
| मृदा वर्ग | मिट्टी | स्थानीय नाम |
|---|---|---|
| इन्सेप्टीसॉल | लाल-पीली | मटासी |
| एन्टीसॉल | लेटेराइट | मुरूमी, भाठा |
| अल्फीसॉल | लाल-बलुई | टिकरा |
| वरटीसॉल | काली | कन्हार |
विरोधाभास: नक्शे की तालिका में लेटेराइट को एन्टीसॉल कहा गया है, जबकि मूल पाठ में लेटेराइट मिट्टी को अल्टीसॉल मृदा वर्ग में रखा गया है।
विरोधाभास: नक्शे की तालिका में लेटेराइट को एन्टीसॉल कहा गया है, जबकि मूल पाठ में लेटेराइट मिट्टी को अल्टीसॉल मृदा वर्ग में रखा गया है। अन्य स्थान पर भी लेटेराइट को अल्टीसॉल कहा गया है और टिकरा (रेतीली) को भी अल्टीसॉल; जबकि नक्शे की तालिका में टिकरा (लाल-बलुई) को अल्फीसॉल कहा गया है। यानी मूल पाठ में मृदा वर्ग के नाम एक जैसे नहीं हैं; दोनों रूप याद रखें।
1. लाल-पीली मिट्टी (मटासी)
- निर्माण: ग्रेनाइट-शिष्ट एवं आर्कियन चट्टानों के अपरदन से; अम्लीय, pH 6.8।
- रंग: लाल रंग लोहे (फेरस ऑक्साइड, मूल पाठ में Fe₂O₃ लिखा है) के कारण; पीला रंग फेरिक ऑक्साइड के जलयोजन से (मूल पाठ में Fe₃O₄ लिखा है)। सूत्र मूल पाठ के छपे रूप में दिए हैं।
- रेत अधिक होने से अपवाह अच्छा पर जलधारण सीमित; चिका (क्ले) की मात्रा 35-45 तक।
- राज्य की दूसरी सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी (सर्वाधिक: काली)। फसलें: धान, अलसी, तिल, ज्वार, मक्का। राज्य की 30% कृषि मटासी में।
- अधिकता: चूना, लोहा, रेत; कमी: नाइट्रोजन, ह्यूमस।
- सर्वाधिक क्षेत्र में; कन्हार से अधिक ऊँचाई और भाठा से कम ऊँचाई पर; लगभग 50-55% भाग पर।
| भौतिक विभाग | वितरण |
|---|---|
| महानदी बेसिन | रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, धमतरी, महासमुंद, कोरबा, रायगढ़, कबीरधाम; महानदी-माण्ड घाटी में उत्तम किस्म |
| पूर्वी बघेलखण्ड पठार | पूर्वी सीतापुर, दक्षिणी अम्बिकापुर, मध्य सूरजपुर, प्रतापपुर |
| दण्डकारण्य पठार | कोटरी, इंद्रावती, शबरी, महानदी, गोदावरी के मैदानी क्षेत्र में साधारण उर्वर; ऊँचे भागों में, महानदी तथा गोदावरी मैदान में उपजाऊ |
2. लाल बलुई / लाल रेतीली मिट्टी (टिकरा)
- बस्तर के उच्च भूमि के ढालों पर पायी जाने वाली मिट्टी को टिकरा कहते हैं।
- निर्माण: आर्कियन एवं धारवाड़ चट्टानों के अपरदन से; pH 6.6; रंग लाल (लौह की अधिकता); कम उपजाऊ।
- फसलें: कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा, रागी। अधिकता: लौह तत्व और रेत; ग्रेनाइट व नीस के अवशेष मिश्रित। कमी: नाइट्रोजन, ह्यूमस।
- विस्तार 25-30%: दंतेवाड़ा, बस्तर, कांकेर, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी तथा बालोद के दक्षिणी भाग।
3. लाल दोमट मिट्टी
- निर्माण: नीस, डायोराइट जैसी चिका-प्रधान, अम्ल-रहित चट्टानों से; जनक शैल: आर्कियन एवं ग्रेनाइट; अम्लीय, pH 5.2।
- रंग: लाल (लौह अयस्क की अधिकता), परंतु बेसिन क्षेत्रों में रंगहीन।
- जलधारण न्यूनतम, क्योंकि रचक कण बड़े बोल्डर आकार के होते हैं और बड़े छिद्र बनते हैं; कम आर्द्रताग्राही, इसलिए जल के अभाव में कठोर हो जाती है; कम उपजाऊ।
- अधिकता: लोहा एवं दोमट (क्ले)। एक सारणी में इसे अनुपजाऊ भी कहा गया है।
- विस्तार 10-15%: दंतेवाड़ा एवं सुकमा तथा हसदेव-रामपुर बेसिन के कुछ भाग।
4. लेटेराइट मिट्टी
- स्थानीय नाम: मुरूमी (छोटे पत्थरों के साथ), भाठा, बंजर भूमि (अनुपजाऊ लेटेराइट)।
- निर्माण: निक्षालन (Leaching) विधि / लेटेराइजेशन प्रक्रिया से; जनक शैल: बलुआ पत्थर, डायोराइट, एन्टासाइट। मृदा वर्ग: अल्टीसॉल (इस पर स्रोत का विरोधाभास ऊपर देखें)।
- pH 5.2, उच्च अम्लीय, कृषि के लिए अनुपयुक्त; रंग लाल-भूरी (कत्था)।
- फसलें: बागवानी, चाय, लीची, आलू, टमाटर। अधिकता: कंकड़-पत्थर, आयरन, एल्युमीनियम; इस मिट्टी के नीचे लौह-युक्त चट्टानें।
- एल्युमीनियम और लोहे की अधिकता से कठोर; इसी कठोरपन से भवन एवं ईंट निर्माण में उपयोग; उथली, असंख्य छोटे कंकड़।
- विस्तार: धमतरी, जांजगीर-चांपा, सक्ती, महासमुंद, कोरबा, अंबिकापुर, कोरिया, जशपुर, रायगढ़; कूटकों की शिखर (उच्च भूमि) पर, जहाँ रंग लाल-भूरा होता है; पाट क्षेत्रों (सरगुजा) व जगदलपुर के उच्चावच क्षेत्रों में; हसदो नदी के बायीं ओर जैजैपुर ब्लॉक के एक विस्तृत क्षेत्र में।
5. काली मिट्टी (कन्हार)
- स्थानीय नाम: कन्हार, भर्री, रेगुर, गभार, चिका; उच्च भूमि की काली मिट्टी को भर्री कहते हैं।
- निर्माण: बेसाल्ट युक्त लावा चट्टानों के अपरदन/अपक्षय से (लावा निर्मित मिट्टी); क्षारीय, pH 7.6; गीली होने पर फूलकर मुलायम व चिपचिपी हो जाती है; पानी की कमी से दरारें पड़ती हैं।
- रंग काला (फेरिक टाइटेनियम के कारण); बारीक कणों वाली काली या गहरी भूरी। जलधारण सर्वाधिक; कण अत्यंत बारीक होने से छिद्र कम; चिका 50-55%।
- सबसे उपजाऊ मिट्टी; राज्य की 15-20% कृषि इसमें। फसलें: कपास, चना, गन्ना, गेहूँ, सोयाबीन (रबी)। अधिकता: चूना, पोटाश, एल्युमीनियम, लोहा, चिका।
| भौतिक विभाग | वितरण |
|---|---|
| पूर्वी बघेलखण्ड पठार | अम्बिकापुर, रामानुजगंज, मध्य प्रतापपुर, पूर्वी कुसमी, रिहंद, कन्हार व हसदेव नदी घाटी |
| जशपुर पाट प्रदेश | सरगुजा, जशपुर क्षेत्र की नदी घाटियाँ |
| घाटी क्षेत्र | कवर्धा की चिल्फी घाटी |
| महानदी बेसिन | मुंगेली, बेमेतरा, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, बालोद, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, धरमजयगढ़, रायगढ़ के पश्चिमी भाग |
| दण्डकारण्य | नदी घाटियाँ |
तुलना एवं संबंध
| मिट्टी | रंग | प्रकृति | जलधारण | उर्वरता | मुख्य फसल |
|---|---|---|---|---|---|
| काली | काला/गहरा भूरा | क्षारीय, pH 7.6 | सर्वाधिक | सर्वाधिक | कपास, चना, गन्ना, गेहूँ, सोयाबीन |
| लाल-पीली | लाल-पीला | अम्लीय, pH 6.8 | सीमित | द्वितीय | धान |
| लाल रेतीली | लाल | अम्लीय, pH 6.6 | - | कम | कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा, रागी |
| लाल दोमट | लाल | अम्लीय, pH 5.2 | न्यूनतम | अनुपजाऊ/कम | मोटे अनाज (कोदो, कुटकी आदि) |
| लेटेराइट | लाल-भूरी | उच्च अम्लीय, pH 5.2 | निम्न (कठोर, उथली) | कृषि हेतु अनुपयुक्त | बागवानी, चाय, लीची, आलू, टमाटर |
कारण से परिणाम: कण बारीक, छिद्र कम, जलधारण अधिक (काली)। कण बड़े बोल्डर, छिद्र बड़े, जलधारण न्यूनतम (लाल दोमट)। एल्युमीनियम और लोहे की अधिकता, मिट्टी कठोर, भवन-ईंट में उपयोग (लेटेराइट)। मूल पाठ में कृषि-प्रतिशत के आँकड़े अलग-अलग मिलते हैं: लाल-पीली में 30% कृषि, डोरसा में भी 30%, काली में 15-20%।
याद रखने योग्य बिंदु
- राज्य में 5 प्रमुख मिट्टियाँ; प्रायद्वीपीय पठार के कारण अवशिष्ट मिट्टी।
- लाल-पीली (मटासी) सर्वाधिक 50-55% क्षेत्र में; धान; दूसरी सर्वाधिक उपजाऊ।
- काली मिट्टी (कन्हार) सर्वाधिक उपजाऊ, क्षारीय pH 7.6, कपास-गेहूँ-चना; जलधारण सर्वाधिक; चिका 50-55%।
- काली मिट्टी बेसाल्ट युक्त लावा चट्टानों से बनी; काला रंग फेरिक टाइटेनियम से।
- लाल रेतीली (टिकरा) 25-30%; कोदो-कुटकी; बस्तर के उच्च भूमि के ढाल।
- लाल दोमट 10-15%; दंतेवाड़ा-सुकमा; जलधारण सबसे कम।
- लेटेराइट: मुरूमी/भाठा/बंजर; pH 5.2; चाय, बागवानी; भवन-ईंट में उपयोग।
- लेटेराइट का निर्माण निक्षालन (लेटेराइजेशन) से होता है।
- लाल-पीली में नाइट्रोजन व ह्यूमस की कमी; काली में फॉस्फेट, नाइट्रोजन, जीवाश्म की कमी।
- मृदा वर्ग: मटासी इन्सेप्टीसॉल, कन्हार वरटीसॉल; लेटेराइट एन्टीसॉल (नक्शा) या अल्टीसॉल (अन्य स्थान)।
स्मरण सूत्र
- म-टि-प-मु-क: मटासी, टिकरा, परिया, मुरूमी, कन्हार (लाल-पीली, रेतीली, दोमट, लेटेराइट, काली)।
- क्षार का राजा कन्हार, अम्ल की रानी मुरूमी।
स्वयं जाँचें
- प्र. मटासी किसका स्थानीय नाम है? उ. लाल-पीली मिट्टी।
- प्र. सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी? उ. काली मिट्टी।
- प्र. लेटेराइट का pH और मृदा वर्ग? उ. 5.2; अल्टीसॉल (नक्शे की तालिका में एन्टीसॉल)।
- प्र. टिकरा कहाँ मिलती है? उ. बस्तर के उच्च भूमि के ढालों पर।
- प्र. किस मिट्टी की जलधारण क्षमता सबसे कम है? उ. लाल दोमट।
- प्र. कन्हार की प्रकृति और चट्टान? उ. क्षारीय (pH 7.6); बेसाल्ट युक्त लावा।
अभ्यास प्रश्न
कौन-सी मिट्टी एल्युमीनियम तथा लोहे की अधिकता के कारण सूखने पर कठोर हो जाती है?
- (A) भाठा
- (B) मटासी
- (C) कन्हार
- (D) टिकरा
छत्तीसगढ़ के स्थानीय लोग किस मिट्टी को ‘भरीं या कन्हर’ भी कहते हैं?
- (A) काली मिट्टी
- (B) लाल-पीली मिट्टी
- (C) लाल-बलुई मिट्टी
- (D) लाल-दोमट मिट्टी
किस मिट्टी में जल रोकने की क्षमता अधिक होती है?
- (A) काली मिट्टी
- (B) लाल रेतीली मिट्टी
- (C) लाल-दोमट मिट्टी
- (D) लाल-पीली मिट्टी
किस मिट्टी का विस्तार राज्य में क्षेत्र के अनुसार दूसरे क्रम में है?
- (A) लाल-रेतीली मिट्टी
- (B) काली मिट्टी
- (C) लाल-पीली मिट्टी
- (D) लैटेराइट मिट्टी
छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक पाई जाने वाली मिट्टी है।
- (A) लाल-बलुई मिट्टी
- (B) लाल-पीली मिट्टी
- (C) लाल-दोमट मिट्टी
- (D) लैटेराइट मिट्टी
किन कणों की उपस्थिति के कारण लाल रेतीली मिट्टी का रंग लाल होता है?
- (A) आयरन ऑक्साइड
- (B) सल्फर ऑक्साइड
- (C) नाइट्रस ऑक्साइड
- (D) सिल्वर आयोडाइड
सोयाबीन की फसल लिए कौन-सी मिट्टी उपयोगी है?
- (A) लाल
- (B) पीली
- (C) भुरभुरी
- (D) कन्हार
इस भूमि को सिंचाई की आवश्यकता कम होती है, क्योंकि वह पानी बचाती है. यह कौनसी है
- (A) लाल
- (B) काली
- (C) लेटेराइट
- (D) जलोढ़
काली चीका मिट्टी में किसकी अधिकता पाई जाती है?
- (A) सल्फर
- (B) चूना
- (C) फॉस्फोरस
- (D) ये सभी
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (A) - लेटेराइट (मुरूमी/भाठा) एल्युमीनियम व लोहे की अधिकता से कठोर होती है।
- (A) - काली मिट्टी को कन्हार/भर्री कहते हैं।
- (A) - काली मिट्टी की जलधारण क्षमता सर्वाधिक है।
- (A) - लाल-पीली 50-55% के बाद लाल रेतीली 25-30% है।
- (B) - लाल-पीली मिट्टी सर्वाधिक (50-55%) क्षेत्र में है।
- (A) - लाल रेतीली मिट्टी का लाल रंग लौह की अधिकता से है।
- (D) - कन्हार (काली) मिट्टी में सोयाबीन उपयुक्त फसल है।
- (B) - काली मिट्टी की जलधारण क्षमता सर्वाधिक है, अतः सिंचाई कम चाहिए।
- (B) - काली मिट्टी में चूना, पोटाश, एल्युमीनियम, लोहा, चिका अधिक है।