महानदी की अन्य सहायक नदियाँ : हसदेव, मांड, केलो, ईब, बोरई
हसदेव, मांड, केलो और ईब महानदी की बाईं ओर की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। हसदेव कोयला-क्षेत्र और बाँध के कारण, मांड और केलो कोयला/शहरों के कारण तथा ईब सोने के कणों के कारण चर्चित हैं। परीक्षा में इनके उद्गम, लंबाई, जलप्रपात और संगम स्थल पूछे जाते हैं।
हसदेव नदी
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| प्राचीन नाम | महानद (मार्कण्डेय, वायु, ब्राह्मण, मत्स्य पुराण); हस्तिसोमा/हस्तुसोमा (महाभारत व पद्म पुराण); हर्षदेव |
| उद्गम | देवगढ़ पहाड़ी, सोनहत पठार (कोरिया व मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) |
| विसर्जन | महानदी (केरा-सिलादेही / महुआडीह) |
| लंबाई | 176 किमी |
| जलप्रपात | अमृतधारा, गावरघाट, अकुरीनाला |
| प्रवाह क्षेत्र | कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा |
| तटीय शहर | मनेन्द्रगढ़, कोरबा, चांपा, पीथमपुर (जांजगीर-चांपा); कटघोरा और छूरी अहिरन के तट पर |
| मंदिर | पीथमपुर में कलेश्वर महादेव मंदिर |
| परियोजना | मिनीमाता (हसदेव बांगो) परियोजना 1967, माचाडोली (कोरबा) |
- सहायक नदियाँ: तान, झींग, उतेंग, गेज (सबसे लंबी सहायक), अहिरन (जटाशंकरी), चोरनई, हंसिया, केवई।
- हसदेव नदी घाटी कोयला खदानों के लिए प्रसिद्ध है; हसदेव-रामपुर कोयला क्षेत्र सरगुजा तक फैला है।
- अहिरन और खारंग को नदी जोड़ो परियोजना के तहत जोड़ा जा रहा है।
हसदेव की सहायक नदियाँ
| नदी | उद्गम | अन्य |
|---|---|---|
| हंसिया | फाटपानी की पहाड़ी, घुटरा ग्राम | हसदेव (म.चि.भ.) में विसर्जन; लंबाई 30.6 किमी; कर्मघोघा जलप्रपात |
| केवई | बैरागी की पहाड़ी (म.चि.भ.) | प्रवाह: छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश; लंबाई 36 किमी |
गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क
- स्थान: आमाखेरवा, मनेन्द्रगढ़ (म.चि.भ.); हसदेव और हंसिया के संगम पर।
- विस्तार लगभग 1 किमी क्षेत्र; जीवाश्म 25 करोड़ वर्ष पुराने; चट्टान: गोंडवाना सुपर ग्रुप।
- राज्य सरकार ने इसे संरक्षित बायोडायवर्सिटी हैरिटेज साइट बनाने का निर्णय लिया।
- यह एशिया का सबसे बड़ा और छत्तीसगढ़ का पहला समुद्री फॉसिल्स पार्क है तथा भारत का 5वाँ।
बोरई, मांड, केलो, ईब
| नदी | उद्गम | विसर्जन | लंबाई | विशेष |
|---|---|---|---|---|
| बोरई | कोरबा पठार | महानदी | - | - |
| मांड | मैनपाट (सरगुजा); प्राचीन नाम मंदवाहिनी, मंदगा | चंद्रपुर के समीप महानदी में (महानदी+मांड+लात) | 155 किमी | प्रवाह: सरगुजा, रायगढ़, सक्ती; दाईं ओर से कोईराज, चिन्दई; बाईं ओर से कुरकुट; सरभंजा जलप्रपात; घाटी में कोयला; चंद्रहासिनी देवी मंदिर संगम पर; चंवरढाल पहाड़ी से प्रवाहित |
| केलो | लुड़ेग पहाड़ी, लैलूंगा तहसील (रायगढ़) | महानदी (ओडिशा में महादेवपाली के समीप) | 97 किमी | सहायक कोलडेगा और राजर; रायगढ़ की जीवन रेखा; बहाव भालूमार अभ्यारण्य, तराईमाल अभ्यारण्य, गजमार पहाड़ी से; केलो नदी परियोजना / स्व. दिलीप सिंह जूदेव परियोजना |
| ईब | खुरजा पहाड़ी, रानीझूला, पंडरापाट (जशपुर) | संबलपुर (ओडिशा) में महानदी | 202 किमी (छ.ग. में 87 किमी) | सहायक: सिरी, खोरूंग, डोरकी, मैनी; जलप्रपात: गुल्लू, बेने, छुरी (जशपुर); रेत में सोने के कण |
तुलना एवं संबंध
| नदी | लंबाई | महत्व |
|---|---|---|
| हसदेव | 176 | कोयला, बांगो बाँध |
| मांड | 155 | कोयला, चंद्रहासिनी संगम |
| केलो | 97 | रायगढ़ की जीवन रेखा |
| ईब | 202 (87 छ.ग.) | सोने के कण |
कारण-प्रभाव: गोंडवाना चट्टानों वाली हसदेव और मांड घाटियाँ कोयला-समृद्ध हैं; इसलिए इनके किनारे खदानें और ताप-क्षेत्र हैं।
याद रखने योग्य बिंदु
- हसदेव 176 किमी; उद्गम सोनहत पठार।
- हसदेव की सबसे लंबी सहायक गेज है।
- हसदेव-बांगो परियोजना 1967, माचाडोली (कोरबा)।
- हसदेव का प्राचीन नाम महानद/हस्तिसोमा।
- गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क आमाखेरवा में; जीवाश्म 25 करोड़ वर्ष पुराने।
- मांड का संगम चंद्रपुर में; चंद्रहासिनी मंदिर वहीं।
- मांड 155 किमी।
- केलो रायगढ़ की जीवन रेखा; 97 किमी।
- ईब नदी की रेत में सोने के कण; कुल 202 किमी, छ.ग. में 87 किमी।
- बोरई का उद्गम कोरबा पठार।
स्मरण सूत्र
"हस-मां-के-ई" = हसदेव 176, मांड 155, केलो 97, ईब 202 (छ.ग. में 87)। "मांड-चंद्र" = मांड का संगम चंद्रपुर।
स्वयं जाँचें
- प्रश्न: हसदेव का उद्गम कहाँ है? उत्तर: देवगढ़ पहाड़ी, सोनहत पठार।
- प्रश्न: हसदेव की सबसे लंबी सहायक नदी? उत्तर: गेज।
- प्रश्न: मांड और महानदी का संगम कहाँ? उत्तर: चंद्रपुर।
- प्रश्न: रायगढ़ की जीवन रेखा कौन सी नदी? उत्तर: केलो।
- प्रश्न: ईब की रेत में क्या मिलता है? उत्तर: सोने के कण।
- प्रश्न: मरीन फॉसिल पार्क किन नदियों के संगम पर है? उत्तर: हसदेव और हंसिया।
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