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छत्तीसगढ़ का भूगोल (भाग 1): राज्य, धरातल, नदियाँ एवं जलवायु · Chapter 28
महानदी की अन्य सहायक नदियाँ : हसदेव, मांड, केलो, ईब, बोरई

महानदी की अन्य सहायक नदियाँ : हसदेव, मांड, केलो, ईब, बोरई

हसदेव, मांड, केलो और ईब महानदी की बाईं ओर की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। हसदेव कोयला-क्षेत्र और बाँध के कारण, मांड और केलो कोयला/शहरों के कारण तथा ईब सोने के कणों के कारण चर्चित हैं। परीक्षा में इनके उद्गम, लंबाई, जलप्रपात और संगम स्थल पूछे जाते हैं।

हसदेव नदी

बिंदुविवरण
प्राचीन नाममहानद (मार्कण्डेय, वायु, ब्राह्मण, मत्स्य पुराण); हस्तिसोमा/हस्तुसोमा (महाभारत व पद्म पुराण); हर्षदेव
उद्गमदेवगढ़ पहाड़ी, सोनहत पठार (कोरिया व मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर)
विसर्जनमहानदी (केरा-सिलादेही / महुआडीह)
लंबाई176 किमी
जलप्रपातअमृतधारा, गावरघाट, अकुरीनाला
प्रवाह क्षेत्रकोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा
तटीय शहरमनेन्द्रगढ़, कोरबा, चांपा, पीथमपुर (जांजगीर-चांपा); कटघोरा और छूरी अहिरन के तट पर
मंदिरपीथमपुर में कलेश्वर महादेव मंदिर
परियोजनामिनीमाता (हसदेव बांगो) परियोजना 1967, माचाडोली (कोरबा)
  • सहायक नदियाँ: तान, झींग, उतेंग, गेज (सबसे लंबी सहायक), अहिरन (जटाशंकरी), चोरनई, हंसिया, केवई।
  • हसदेव नदी घाटी कोयला खदानों के लिए प्रसिद्ध है; हसदेव-रामपुर कोयला क्षेत्र सरगुजा तक फैला है।
  • अहिरन और खारंग को नदी जोड़ो परियोजना के तहत जोड़ा जा रहा है।

हसदेव की सहायक नदियाँ

नदीउद्गमअन्य
हंसियाफाटपानी की पहाड़ी, घुटरा ग्रामहसदेव (म.चि.भ.) में विसर्जन; लंबाई 30.6 किमी; कर्मघोघा जलप्रपात
केवईबैरागी की पहाड़ी (म.चि.भ.)प्रवाह: छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश; लंबाई 36 किमी

गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क

  • स्थान: आमाखेरवा, मनेन्द्रगढ़ (म.चि.भ.); हसदेव और हंसिया के संगम पर।
  • विस्तार लगभग 1 किमी क्षेत्र; जीवाश्म 25 करोड़ वर्ष पुराने; चट्टान: गोंडवाना सुपर ग्रुप।
  • राज्य सरकार ने इसे संरक्षित बायोडायवर्सिटी हैरिटेज साइट बनाने का निर्णय लिया।
  • यह एशिया का सबसे बड़ा और छत्तीसगढ़ का पहला समुद्री फॉसिल्स पार्क है तथा भारत का 5वाँ।

बोरई, मांड, केलो, ईब

नदीउद्गमविसर्जनलंबाईविशेष
बोरईकोरबा पठारमहानदी--
मांडमैनपाट (सरगुजा); प्राचीन नाम मंदवाहिनी, मंदगाचंद्रपुर के समीप महानदी में (महानदी+मांड+लात)155 किमीप्रवाह: सरगुजा, रायगढ़, सक्ती; दाईं ओर से कोईराज, चिन्दई; बाईं ओर से कुरकुट; सरभंजा जलप्रपात; घाटी में कोयला; चंद्रहासिनी देवी मंदिर संगम पर; चंवरढाल पहाड़ी से प्रवाहित
केलोलुड़ेग पहाड़ी, लैलूंगा तहसील (रायगढ़)महानदी (ओडिशा में महादेवपाली के समीप)97 किमीसहायक कोलडेगा और राजर; रायगढ़ की जीवन रेखा; बहाव भालूमार अभ्यारण्य, तराईमाल अभ्यारण्य, गजमार पहाड़ी से; केलो नदी परियोजना / स्व. दिलीप सिंह जूदेव परियोजना
ईबखुरजा पहाड़ी, रानीझूला, पंडरापाट (जशपुर)संबलपुर (ओडिशा) में महानदी202 किमी (छ.ग. में 87 किमी)सहायक: सिरी, खोरूंग, डोरकी, मैनी; जलप्रपात: गुल्लू, बेने, छुरी (जशपुर); रेत में सोने के कण

तुलना एवं संबंध

नदीलंबाईमहत्व
हसदेव176कोयला, बांगो बाँध
मांड155कोयला, चंद्रहासिनी संगम
केलो97रायगढ़ की जीवन रेखा
ईब202 (87 छ.ग.)सोने के कण

कारण-प्रभाव: गोंडवाना चट्टानों वाली हसदेव और मांड घाटियाँ कोयला-समृद्ध हैं; इसलिए इनके किनारे खदानें और ताप-क्षेत्र हैं।

याद रखने योग्य बिंदु

  • हसदेव 176 किमी; उद्गम सोनहत पठार।
  • हसदेव की सबसे लंबी सहायक गेज है।
  • हसदेव-बांगो परियोजना 1967, माचाडोली (कोरबा)।
  • हसदेव का प्राचीन नाम महानद/हस्तिसोमा।
  • गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क आमाखेरवा में; जीवाश्म 25 करोड़ वर्ष पुराने।
  • मांड का संगम चंद्रपुर में; चंद्रहासिनी मंदिर वहीं।
  • मांड 155 किमी।
  • केलो रायगढ़ की जीवन रेखा; 97 किमी।
  • ईब नदी की रेत में सोने के कण; कुल 202 किमी, छ.ग. में 87 किमी।
  • बोरई का उद्गम कोरबा पठार।

स्मरण सूत्र

"हस-मां-के-ई" = हसदेव 176, मांड 155, केलो 97, ईब 202 (छ.ग. में 87)। "मांड-चंद्र" = मांड का संगम चंद्रपुर।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: हसदेव का उद्गम कहाँ है? उत्तर: देवगढ़ पहाड़ी, सोनहत पठार।
  2. प्रश्न: हसदेव की सबसे लंबी सहायक नदी? उत्तर: गेज।
  3. प्रश्न: मांड और महानदी का संगम कहाँ? उत्तर: चंद्रपुर।
  4. प्रश्न: रायगढ़ की जीवन रेखा कौन सी नदी? उत्तर: केलो।
  5. प्रश्न: ईब की रेत में क्या मिलता है? उत्तर: सोने के कण।
  6. प्रश्न: मरीन फॉसिल पार्क किन नदियों के संगम पर है? उत्तर: हसदेव और हंसिया।
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