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छत्तीसगढ़ का भूगोल (भाग 1): राज्य, धरातल, नदियाँ एवं जलवायु · Chapter 15
छत्तीसगढ़ की भू-गर्भिक संरचना

छत्तीसगढ़ की भू-गर्भिक संरचना

भू-गर्भिक संरचना वह विशिष्ट संरचना है जो भूमि के गर्भ में विभिन्न शैल समूहों से बनती है। इसी से धरातल का स्वरूप, मिट्टी का प्रकार, खनिज, वनों की विविधता और कृषि योग्य भूमि की गुणवत्ता तय होती है। राज्य में 6 शैल समूह मिलते हैं। यह अध्याय CGPSC में खनिज, मिट्टी और स्थलाकृति के प्रश्नों की नींव है।

भारत में चट्टानों का क्रम और हॉलैण्ड का वर्गीकरण

भारत में पृथ्वी के लगभग सभी भू-वैज्ञानिक कालों की चट्टानें मिलती हैं। निर्माण का क्रम: 1. आर्कियन, 2. धारवाड़, 3. कडप्पा, 4. विंध्यन, 5. गोंडवाना, 6. दक्कन ट्रेप, 7. टर्शियरी।

महाकल्प (टी. एस. हॉलैण्ड)उप-विभाग
आद्य महाकल्प / आर्कियनआर्कियन, धारवाड़
पुराण महाकल्प / पुराना संघकडप्पा, विंध्यन
आर्य महाकल्पगोंडवाना, दक्कन

छत्तीसगढ़ में क्रमानुसार 6 शैल समूह हैं: आर्कियन, धारवाड़, कडप्पा, विंध्यन, गोंडवाना, दक्कन ट्रेप। (मूल पाठ का सूत्र: आधा कवि गोद में।)

छह शैल समूह: सार तालिका

शैल समूहखनिजचट्टाननिर्माणविस्तार
आर्कियनक्वार्ट्ज, फेल्सपारग्रेनाइट, नीस, शिष्टतप्त व पिघली मैग्मा के ठंडे होने से50%
धारवाड़लौह अयस्क, टिन, कोरण्डम, क्वार्टजाइट, कांग्लोमेरेटनाइस, ग्रेनाइट, साइनाइटआर्कियन के नीस व शिष्ट के अपरदन से3%
कडप्पाचूना पत्थर, बलुआ पत्थर, डोलोमाइट, क्वार्ट्जअवसादी चट्टानग्रेनाइट चट्टानों के अपरदन से25-30%
विंध्यनचूना पत्थर—कडप्पा चट्टानों के अवसादों के निक्षेपण से0.005%
गोंडवानाकोयला, बेरिल—नदियों के अवसादों में जमे वनस्पति व जीवों के अवशेषों से17%
दक्कन ट्रेपबॉक्साइट—दरारी ज्वालामुखी से निकले बेसाल्ट युक्त लावा सेउच्च प्रदेशों में

मूल पाठ की सारणी में आर्कियन 50% (सम्पूर्ण छत्तीसगढ़), कडप्पा 25-30% (महानदी बेसिन) और गोंडवाना 17% (बघेलखण्ड का पठार) दिया है; धारवाड़ का 3% और विंध्यन का 0.005% अंतिम सारांश तालिका में मिलता है।

1. आर्कियन / आद्य महाकल्पीय शैल समूह

  • अर्थ: आर्कियन का अर्थ 'सर्वाधिक प्राचीन'।
  • निर्माण: तप्त व पिघली पृथ्वी (मैग्मा) के ठंडे होने से।
  • जीवाश्म रहित शैल समूह; अध्ययन जे. डी. डाना (1782)।
  • प्रकार: अंतर्वेधीय आग्नेय चट्टानें, जो ग्रेनाइट, क्वार्ट्ज, फेल्सपार, अभ्रक और हार्नब्लेंड से बनी हैं।
  • सबसे प्राचीन तथा राज्य की धरातलीय बनावट में प्रमुख; लगभग 50% क्षेत्र में विस्तार।
  • बैलाडीला की पहाड़ियाँ सबसे पुरानी चट्टानों से बनी हैं।

आर्कियन का वितरण

भौतिक विभागविस्तार
महानदी बेसिनरायगढ़ बेसिन, बिलासपुर का कोटा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, मुंगेली का लोरमी, कवर्धा का पण्डरिया, बालोद (डौंडीलोहारा), गरियाबंद (राजिम), महासमुंद, धमतरी आदि; महानदी घाटी की सीमांत उच्च भूमि में सर्वाधिक; कोरबा बेसिन की चट्टानों का ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर।
दण्डकारण्य75% भू-भाग आर्कियन की आद्य ग्रेनाइट चट्टानों से निर्मित; कांकेर (भानुप्रतापपुर, चारामा), कोण्डागांव, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा। बस्तर पठार का अधिकांश भाग आर्कियन। अबूझमाड़ पहाड़ी का मध्य भाग, नारायणपुर के उत्तरी भाग, प्रतापपुर व कोयलीबेड़ा के नीचे का कुछ भाग प्राचीन लावा के बेसॉल्ट चट्टान हैं।
जशपुर सामरीपाटबलरामपुर जिले का सामरी, सरगुजा के लुण्ड्रा व सीतापुर, जशपुर जिले के जशपुर, बगीचा, कुनकुरी और पत्थलगांव तहसील।
पूर्वी बघेलखण्ड का पठारअम्बिकापुर के समीपस्थ क्षेत्र।

आर्कियन की प्रमुख चट्टानें

  • ग्रेनाइट: उर्दना (रायगढ़ क्षेत्र) और लामीदरहा के चारों ओर; सारंगढ़ के दक्षिण-पूर्व में; रायगढ़ व जशपुर के अधिकांश भागों में; कहीं-कहीं लौह अयस्क की मात्रा; डोंगरगढ़ के आसपास गुलाबी रंग की ग्रेनाइट।
  • नीस-शिष्ट: कोरबा शहर के कुछ किमी दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में।
  • क्वार्टजाइट: माण्ड नदीघाटी एवं धुरिया के समीप।
  • नीस-पट्टी: दो पट्टियाँ: पहली में उत्तर में चिल्फी घाटी की पुरानी नीस शैलें और पहाड़ी भागों की नीस; दूसरी उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व दिशा में। रायगढ़ और कोरबा घाटी में भी नीस दिखती है।

2. धारवाड़ शैल समूह

  • युग: प्री-कैम्ब्रियन; चट्टान: नीस/नाइस, ग्रेनाइट; सबसे प्राचीन अवसादी चट्टान।
  • निर्माण: 2.50 करोड़ वर्ष पूर्व (आर्कियन के नीस व शिष्ट के अपरदन से) — यह आँकड़ा मूल पाठ में इसी रूप में छपा है।
  • नामकरण: कर्नाटक के धारवाड़ जिले में सर्वप्रथम प्राप्ति; अध्ययन वी. पी. वाडिया।
  • फैलाव आर्कियन के ऊपर; जीवाश्म नहीं; खनिज: लौह अयस्क, टिन, कोरण्डम।
भौतिक विभागविस्तार
पूर्वी बघेलखण्डबलरामपुर जिले के रामानुजगंज, वाड्रफनगर
छ.ग. का मैदानकबीरधाम, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, रायपुर, मोहला, गरियाबंद, धमतरी, बलौदाबाजार के कसडोल, कवर्धा के पंडरिया एवं मुंगेली
दण्डकारण्यबस्तर संभाग के जगदलपुर, भानुप्रतापपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर

नोट: धारवाड़ का विस्तार जशपुर सामरीपाट में नहीं है, शेष तीनों भौतिक विभागों में है।

धारवाड़ की सीरीज

क्षेत्रसीरीज
दुर्ग संभागचिल्फी घाटी सीरीज
रायपुर संभागसोनाखान सीरीज
बस्तर क्षेत्रलौह अयस्क सीरीज
  • सोनाखान संस्तर: सोनाखान की पहाड़ियों में विकसित श्रेणियों को 1899 में भू-वैज्ञानिक एफ. एच. स्मिथ ने यह नाम दिया; चट्टानें गुलाबी डाईक के रूप में; चिल्फी घाटी और साकोली श्रेणी के समान; सोनाखान पर्वत से महानदी के दक्षिण तक धारवाड़ का ऊपरी परत साकोली संस्तर कहलाता है।
  • चन्द्रपुर संस्तर: महानदी के मैदान में शैल एवं चूनापत्थर से कांप मिट्टी अलग करती है।
  • मध्यवर्ती घाटी: मृदु चिकनी काली स्लेट, कहीं-कहीं क्वार्टजाइट की शिराएँ; झारामक्का और शाकरीटोला के आसपास रायोलाइट (धूसर, गुलाबी, पीले रंग की अदृश्य क्रिस्टलीय चट्टानें)।
  • प्रमुख चट्टान: हेमेटाइट-क्वार्टजाइट (अत्यधिक कठोर); गहरी काली लौहमय हल्की सिलिका परतें, दल्लीराजहरा क्षेत्र में; राजनांदगांव और खैरागढ़ श्रेणी में विभाजित; नाइस चट्टान लाफागढ़ एवं पोंड़ी-उपरोड़ा के मध्य।

3. कडप्पा शैल समूह

  • अन्य नाम: पुराना संघ; नामकरण: आंध्रप्रदेश के कडप्पा जिले के नाम पर।
  • निर्माण: प्री-कैम्ब्रियन के पश्चात ग्रेनाइट चट्टानों के अपरदन से; क्षैतिज अवसादी शैलों पर महानदी मैदान का निर्माण।
  • खनिज: चूना पत्थर, डोलोमाइट, क्वार्ट्ज; बलुआ पत्थर, एस्बेस्टस और संगमरमर के लिए प्रसिद्ध; चूना पत्थर सीमेंट ग्रेड का, जिस पर सीमेंट उद्योग विकसित है।
  • विस्तार: महानदी बेसिन / छत्तीसगढ़ बेसिन; 25-30% (आर्कियन के बाद दूसरा सर्वाधिक); आधारी संस्तर: बैंगनी बलुआ पत्थर, जो संजारी बालोद में मिलता है।
भौतिक विभागविस्तार
छ.ग. का मैदानमहानदी बेसिन व मध्यवर्ती मैदान में लगभग 50% चट्टानें; रायगढ़, सक्ती, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, बिलासपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, बलौदाबाजार-भाटापारा, बेमेतरा, दुर्ग, बालोद, रायपुर उच्चभूमि, महासमुंद। ऊपरी कडप्पा: सारंगढ़ व रायगढ़ का मैदान (रायगढ़ का चूना पत्थर क्षेत्र); निचली कडप्पा: सक्ती क्षेत्र। क्वार्टजाइट चट्टान चंवरढाल, कबरा पहाड़ तथा खरसिया के दक्षिण-पूर्व तक।
दण्डकारण्यपूर्वी बस्तर (जगदलपुर) व पश्चिमी बीजापुर (भोपालपट्टनम) में सर्वाधिक विस्तार

नोट: पूर्वी बघेलखण्ड का पठार एवं जशपुर सामरीपाट में कडप्पा का विस्तार नहीं है।

4. विंध्यन शैल समूह

  • निर्माण: प्री-कैम्ब्रियन के बाद कडप्पा चट्टानों पर अवसादों के निक्षेपण से; नामकरण विंध्य पर्वत के कारण।
  • रायगढ़ नगर के आसपास ग्रेनाइट तथा नीस पर निम्न विंध्यन चट्टानें।
  • राज्य का चूना पत्थर निम्न विंध्यन काल में निर्मित।
  • विस्तार नगण्य/कम: कांकेर, कोण्डागांव, जगदलपुर, रायपुर, खैरागढ़, गुंडरदेही आदि; अंशतः है; प्रमुख विस्तार चिल्फी घाटी क्षेत्र में।

5. गोंडवाना शैल समूह

  • नामकरण मध्यप्रदेश के गोंडवाना क्षेत्र के कारण; मेटलीक कांट द्वारा (1872)।
  • युग: कार्बोनीफेरस से जुरासिक।
  • निर्माण: कार्बोनीफेरस में प्रायद्वीपीय भारत में अनेक दरारें बनीं; उन गर्तों में वनस्पति दबने और ताप-दाब से कोयला बना; नदियों के अवसादों में जमे वनस्पति-जीव अवशेषों से।
  • विस्तार: सरगुजा बेसिन / बघेलखण्ड का पठार; 17%।
  • खनिज: बलुआ पत्थर तथा शैल संस्तरों के बीच कोयले की परतें।
  • दृश्यांकन: हसदो, केलो और माण्ड नदी घाटियों में बाराकर सीरीज; राज्य में तालचेर और बाराकर क्रम का प्रतिनिधित्व।
क्रमविस्तार
ऊपरी गोंडवानाजनकपुर, मनेन्द्रगढ़, प्रतापपुर, बैकुण्ठपुर, सूरजपुर
मध्य गोंडवानाछत्तीसगढ़ में अधिक विकास नहीं हुआ
निचली गोंडवाना (तालचेर, बाराकर, कामठी)मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर का दक्षिणी भाग, सरगुजा का दक्षिणी भाग, कटघोरा, कोरबा (छुरी पहाड़ी), खरसिया, धरमजयगढ़, रायगढ़ एवं माण्ड नदी घाटी

6. दक्कन ट्रेप शैल समूह

  • युग: मेसोजोइक के अंत में, क्रिटेशियस काल में।
  • निर्माण: दरारी ज्वालामुखी से निकले बेसाल्ट युक्त लावा से; सीढ़ीनुमा रचना।
  • खनिज: बॉक्साइट; मिट्टी: काली, लमेटा/लेटराइट (जशपुर सामरी क्षेत्र)।
  • विस्तार: मैकल श्रेणी क्षेत्र के पूर्वी भाग, कोरबा, कबीरधाम, सरगुजा, जशपुर; औरापानी के पश्चिम में 800 मी. ऊँचे पठार में उत्तर-पश्चिम की ओर।
  • जशपुर-सामरी क्षेत्र का दक्कन ट्रेप लमेटा/लेटराइट में रूपांतरित; बेसाल्ट के अपरदन से काली मिट्टी बनती है।

तुलना एवं संबंध

शैल समूहखास पहचानखनिज
आर्कियनसबसे प्राचीन, आग्नेय, 50%क्वार्ट्ज, फेल्सपार
धारवाड़सबसे प्राचीन अवसादीलौह अयस्क, टिन
कडप्पासीमेंट ग्रेड चूना पत्थरचूना पत्थर, डोलोमाइट
गोंडवानाकोयला परतेंकोयला
दक्कन ट्रेपबेसाल्ट लावाबॉक्साइट

याद रखने योग्य बिंदु

  • राज्य में 6 शैल समूह: आर्कियन, धारवाड़, कडप्पा, विंध्यन, गोंडवाना, दक्कन ट्रेप।
  • आर्कियन 50%, सबसे प्राचीन; बैलाडीला सबसे पुरानी चट्टानों की।
  • धारवाड़: सबसे प्राचीन अवसादी; लौह अयस्क, टिन, कोरण्डम।
  • धारवाड़ की तीन सीरीज: चिल्फी घाटी, सोनाखान, लौह अयस्क।
  • सोनाखान संस्तर नाम 1899 में एफ. एच. स्मिथ ने दिया।
  • कडप्पा 25-30%, दूसरा सर्वाधिक; सीमेंट ग्रेड चूना पत्थर।
  • विंध्यन का चूना पत्थर निम्न विंध्यन काल का।
  • गोंडवाना 17%, कोयला, नामकरण मेटलीक कांट (1872)।
  • गोंडवाना में तालचेर और बाराकर क्रम।
  • दक्कन ट्रेप: बॉक्साइट; बेसाल्ट से काली मिट्टी; जशपुर में लेटराइट।

स्मरण सूत्र

  • आधा कवि गोद में: आर्कियन, धारवाड़, कडप्पा, विंध्यन, गोंडवाना, दक्कन।

स्वयं जाँचें

  • प्र. सबसे प्राचीन शैल समूह? उ. आर्कियन।
  • प्र. कोयला किस शैल समूह में? उ. गोंडवाना।
  • प्र. बॉक्साइट किसमें? उ. दक्कन ट्रेप।
  • प्र. कडप्पा का नामकरण कहाँ के आधार पर? उ. आंध्रप्रदेश के कडप्पा जिले।
  • प्र. सोनाखान संस्तर किसने नामित किया? उ. एफ. एच. स्मिथ (1899)।
  • प्र. धारवाड़ का विस्तार किस विभाग में नहीं? उ. जशपुर सामरीपाट।
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