डोरसा, कछार मिट्टी, स्थानीय नाम एवं मृदा-वर्ग
पिछले अध्याय में पाँच प्रमुख मिट्टियों का विवरण पूरा हुआ। इस अध्याय में मिश्रित मिट्टी डोरसा, नदी किनारे की कछार मिट्टी, भूमि के स्थानीय शब्द, उत्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ में ऊँचाई के अनुसार स्थानीय नामों का क्रम, मृदा-वर्ग की तालिकाएँ और मिट्टी-संबंधी अन्य तथ्य हैं।
डोरसा मिट्टी
- निर्माण ग्रेनाइट शैल समूह से; काली-कन्हार तथा हल्की-मटासी का मिश्रण; गहरा भूरा रंग; फसल: धान।
- राज्य की तीसरी महत्वपूर्ण मिट्टी; 30% कृषि इसमें की जाती है।
डोरसा का विस्तार
| क्षेत्र | स्थान |
|---|---|
| महानदी घाटी | राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, महासमुंद, धमतरी, कबीरधाम, दुर्ग, बिलासपुर, रायपुर क्षेत्र |
| पूर्वी बघेलखण्ड | रामानुजगंज, प्रतापपुर, कुसमी |
| दण्डकारण्य | कांकेर बेसिन, शबरी एवं इंद्रावती नदी की घाटियाँ |
| जशपुर-सामरीपाट | जशपुर की नदी घाटियों में |
कछार मिट्टी
नदी के किनारे पाई जाने वाली काप (जलोढ़) मिट्टी, भूरे रंग की, उपजाऊ और अधिक जलधारण क्षमता वाली। नए जमे गाद को भी कछार कहा जाता है। इसके दो प्रकार हैं:
| आधार | पाल कछार | पटपर कछार |
|---|---|---|
| प्राप्ति | नदी के किनारे | सदैव ऊँचे भागों पर |
| उर्वरता | उपजाऊ | अनुपजाऊ |
| जलधारण क्षमता | अधिक | अपेक्षाकृत कम |
स्थानीय शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| परिया | जिस पर खेती न की जा रही हो; अनुपजाऊ भूमि |
| भर्री | उच्च स्थानों में पायी जाने वाली काली मिट्टी |
| बाहरा | गहरी उपजाऊ भूमि; उपरी पहाड़ी क्षेत्रों में कन्हार को बाहरा कहा जाता है |
| भठंगरी | ऊँचाई पर स्थित भूमि जहाँ नमी कम |
स्थानीय मिट्टी का क्रम (ऊँचाई से नीचे)
| उत्तर छ.ग. (सरगुजा) | दक्षिण छ.ग. (बस्तर) |
|---|---|
| टिकरा | मरहान |
| छावर | टिकरा |
| गाद छावर | माल/बाड़ी |
| बाहरा | गभार |
ऊँचे से नीचे की ओर स्थानीय नाम: उत्तर छ.ग. (सरगुजा क्षेत्र) में टिकरा, छावर, गाद छावर, बाहरा; दक्षिण छ.ग. (बस्तर क्षेत्र) में मरहान, टिकरा, माल/बाड़ी, गभार। बस्तर के पठार में क्रम (उच्च से निम्न) मरहान, टिकरा, माल, गभार है।
क्षेत्रवार स्थानीय नाम एवं मृदा वर्ग
| क्षेत्र | मिट्टी का नाम | स्थानीय नाम | मृदा वर्ग |
|---|---|---|---|
| छ.ग. का मैदान | लेटेराइट | भाठा | अल्टीसोल्स |
| छ.ग. का मैदान | लाल-पीली | मटासी | इनसेप्टीसोल्स |
| छ.ग. का मैदान | लाल-पीली एवं काली | डोरसा | अल्फीसोल्स |
| छ.ग. का मैदान | काली | कन्हार | वर्टीसोल्स |
| बस्तर का पठार | खुरदुरी रेत | मरहान | - |
| बस्तर का पठार | रेतीली | टिकरा | अल्टीसोल्स |
| बस्तर का पठार | रेतीली दोमट | माल | अल्फीसोल्स |
| बस्तर का पठार | चिकनी दोमट | गभार | वर्टीसोल्स |
| उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र | - | पहाड़ी | - |
| उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र | रेतीली | टिकरा | अल्टीसोल्स |
| उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र | - | गाद छावर | - |
| उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र | - | बाहरा | वर्टीसोल्स |
मृदा वर्ग के अनुसार क्रम एवं स्थानीय नाम
| क्षेत्र | अल्फीसोल्स | वर्टीसोल्स | अल्टीसोल्स | इनसेप्टीसोल्स | मॉलीसोल्स |
|---|---|---|---|---|---|
| छ.ग. का मैदान | छावर | बाहरा (गाद) | दाढ़ | गादर | - |
| बस्तर का पठार | डोरसा | कन्हार | भाठा | मटासी | - |
| उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र | माल | गभार | टिकरा | मटासी | - |
| कुल का प्रतिशत | 39.0% | 26.4% | 19.5% | 14.8% | 0.3% |
अन्य बिंदु: लेटेराइजेशन का संबंध मिट्टी से है। दण्डकारण्य के उत्तर-पूर्वी तथा दक्षिणी भागों में विषम धरातल के कारण मिट्टी का अवनालिका अपरदन अधिक होता है। राज्य में भूमि की उर्वरक क्षमता घट रही है; मूल पाठ में बताए कारण हैं: रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग, फसल चक्रण विधि का अप्रयोग, अत्यधिक सिंचाई तथा रबी के मौसम में भी धान बोया जाना।
मूल पाठ में विरोधाभास/सावधानी: तालिका में डोरसा को अल्फीसोल्स लिखा गया है, जबकि बस्तर में 'माल' और उत्तरी क्षेत्र में 'माल' भी अल्फीसोल्स हैं; अर्थात एक ही वर्ग के अलग क्षेत्रीय नाम हैं। दोनों तालिकाएँ मिलाकर पढ़ें। मृदा-वर्ग की तालिका के प्रतिशत (39.0+26.4+19.5+14.8+0.3) जोड़ने पर 100 होते हैं।
एक मूल पाठ में मृदा वर्ग के नाम इस प्रकार हैं: टिकरा-अल्फीसॉल, लेटेराइट-एन्टीसॉल, काली-वरटीसॉल, मटासी-इन्सेप्टीसॉल; दूसरे पृष्ठ की तालिकाओं में टिकरा और भाठा अल्टीसोल्स तथा माल/डोरसा अल्फीसोल्स हैं। एक ही वर्ग के अलग क्षेत्रीय नाम हो सकते हैं, इसलिए दोनों तालिकाएँ मिलाकर पढ़ें। मृदा-वर्ग की तालिका के प्रतिशत (39.0+26.4+19.5+14.8+0.3) जोड़ने पर 100 होते हैं।
अन्य तथ्य
- लेटेराइजेशन का संबंध मिट्टी से है।
- दण्डकारण्य के उत्तर-पूर्वी तथा दक्षिणी भागों में विषम धरातल के कारण मिट्टी का अवनालिका अपरदन अधिक होता है।
- राज्य में भूमि की उर्वरक क्षमता घट रही है; मूल पाठ में बताए कारण: रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग, फसल चक्रण विधि का अप्रयोग, अत्यधिक सिंचाई तथा रबी के मौसम में भी धान बोया जाना।
तुलना एवं संबंध
| मिट्टी | रंग | निर्माण | फसल | उर्वरता |
|---|---|---|---|---|
| डोरसा | गहरा भूरा | ग्रेनाइट; कन्हार + मटासी का मिश्रण | धान | तीसरी महत्वपूर्ण; 30% कृषि |
| पाल कछार | भूरा | नदी-जमाव (काप) | - | उपजाऊ; जलधारण अधिक |
| पटपर कछार | भूरा | ऊँचे भागों पर | - | अनुपजाऊ; जलधारण कम |
मृदा वर्ग में सबसे बड़ा हिस्सा अल्फीसोल्स (39.0%) का है, फिर वर्टीसोल्स (26.4%), अल्टीसोल्स (19.5%), इनसेप्टीसोल्स (14.8%) और मॉलीसोल्स (0.3%)। उपजाऊपन का क्रम: काली, लाल-पीली (द्वितीय), डोरसा (तीसरी महत्वपूर्ण)।
याद रखने योग्य बिंदु
- डोरसा प्रदेश की तीसरी महत्वपूर्ण मिट्टी है, 30% कृषि, फसल धान।
- डोरसा = काली-कन्हार + हल्की-मटासी; ग्रेनाइट से; गहरा भूरा रंग।
- कछार दो प्रकार की है: पाल कछार (उपजाऊ, नदी किनारे) और पटपर कछार (अनुपजाऊ, ऊँचे भाग)।
- परिया = खेती न की जा रही अनुपजाऊ भूमि; भर्री = उच्च स्थानों की काली मिट्टी।
- बाहरा = गहरी उपजाऊ भूमि; ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में कन्हार को बाहरा कहते हैं।
- भठंगरी = ऊँचाई पर स्थित कम नमी वाली भूमि।
- बस्तर में क्रम मरहान, टिकरा, माल, गभार (उच्च से निम्न); गभार वर्टीसोल्स है।
- उत्तर छ.ग. में क्रम: टिकरा, छावर, गाद छावर, बाहरा।
- मृदा-वर्ग प्रतिशत: अल्फीसोल्स 39.0, वर्टीसोल्स 26.4, अल्टीसोल्स 19.5, इनसेप्टीसोल्स 14.8, मॉलीसोल्स 0.3।
- दण्डकारण्य में विषम धरातल से अवनालिका अपरदन अधिक।
स्मरण सूत्र
बस्तर की सीढ़ी: म-टि-मा-ग (मरहान, टिकरा, माल, गभार) यानी ऊपर से नीचे। उपजाऊपन का क्रम: काली > मटासी > डोरसा। कछार में पाल = पानी के पास = उपजाऊ; पटपर = ऊँचा = अनुपजाऊ।
स्वयं जाँचें
- प्र. डोरसा में कितने प्रतिशत कृषि होती है? उ. 30%।
- प्र. डोरसा किन दो मिट्टियों का मिश्रण है? उ. काली-कन्हार और हल्की-मटासी।
- प्र. पटपर कछार कहाँ पाई जाती है? उ. सदैव ऊँचे भागों पर; यह अनुपजाऊ है।
- प्र. बस्तर में गभार किस मृदा वर्ग की है? उ. वर्टीसोल्स।
- प्र. भर्री किसे कहते हैं? उ. उच्च स्थानों में पाई जाने वाली काली मिट्टी।
- प्र. मृदा-वर्ग में सबसे अधिक प्रतिशत किसका है? उ. अल्फीसोल्स (39.0%)।
अभ्यास प्रश्न
छत्तीसगढ़ में गाभर मिट्टी कहां पाई जाती है?
- (A) रायपुर
- (B) कबीरधाम
- (C) बस्तर
- (D) बिलासपुर
स्थानीय भाषा में राज्य में पाई जाने वाली जलोढ़ मिट्टी को क्या कहा जाता है?
- (A) कछार
- (B) कन्हार
- (C) रेगुर
- (D) डोरसा
छत्तीसगढ़ में लैटेराइट मिट्टी को स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता है?
- (A) कन्हार
- (B) मटासी
- (C) डोरसा
- (D) भाठा
डोरसा, मटासी, कन्हार, भाठा संबंधित शब्दावली है
- (A) मिट्टी से
- (B) खनिज से
- (C) छत्तीसगढ़ी व्यंजन से
- (D) लोक चित्रकला से
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (C) - बस्तर पठार में गभार (वर्टीसोल्स) मिट्टी बताई गई है।
- (A) - कछार नदी किनारे की काप (जलोढ़) मिट्टी है।
- (D) - लेटेराइट मिट्टी का स्थानीय नाम भाठा है।
- (A) - डोरसा, मटासी, कन्हार, भाठा मिट्टियों के स्थानीय नाम हैं।