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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 1
लोकगीत: परिचय एवं वर्गीकरण

लोकगीत: परिचय एवं वर्गीकरण

छत्तीसगढ़ में प्रचलित वह लोक-जीवन कला, जिसे समाज मान्यता देता है, लोक-संस्कृति कहलाती है। रीति-रिवाज के साथ इसमें साहित्य भी आता है। यह राज्य की संस्कृति मुख्यतः प्रकृति से प्रभावित है और लोकगीत तथा लोकनृत्य इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। सीजीपीएससी, व्यापम और पटवारी परीक्षाओं में गीत-वाद्य-गीतकार के जोड़े बार-बार पूछे जाते हैं, इसलिए यह अध्याय आगे के सभी लोकगीत-अध्यायों की नींव है।

लोक-साहित्य के पाँच भाग

  1. लोकगीत
  2. लोकगाथा
  3. लोककथा
  4. लोकनाट्य
  5. लोक सुभाषित

लोक-संस्कृति के अंतर्गत लोकगीत, लोकनृत्य, लोकनाट्य, छत्तीसगढ़ी त्योहार-पर्व, आभूषण एवं व्यंजन का समावेश माना गया है।

लोकगीतों का पाँच वर्गों में विभाजन

वर्गइसके अंतर्गत आने वाले गीत
धर्म एवं पूजा गीतभोजली, जंवारा, मातासेवा, नागपंचमी, गौरा-गौरी, जस गीत (देवी पूजन गीत)
ऋतुओं पर आधारितसवनाही, फाग
उत्सव संबंधी गीतराऊत नाचा के दोहे, सुआ, छेरछेरा
संस्कार गीतविवाह गीत, सोहर, पठौनी
मनोरंजन गीतकरमा, डंडा, ददरिया

ध्यान दें: दूसरी जगह इन्हीं गीतों को नृत्य, प्रणय, पर्व, ऐतिहासिक, करुणा, जाति और संस्कार जैसे विषय-आधारित समूहों में भी बाँटा गया है; उन्हें आगे के खंडों में उसी क्रम से पढ़ेंगे।

गीत, वाद्य और गीतकार: सारणी

गीतवाद्ययंत्रगीतकार / कलाकार
पंडवानीतंबूरा, करताल, खंजरीवेदमती शैली: रितु वर्मा, झाड़ूराम देवांगन, पूनाराम निषाद, रेवाराम साहू; कापालिक शैली: तीजनबाई, शांतिबाई, उषा बारले, प्रतिमा बारले
पंथी गीतमांदर, झांझदेवदास बंजारे
ददरिया(उल्लेख नहीं)लक्ष्मण मस्तुरिया, दिलीप षडंगी, केदार यादव, शेख हुसैन
चंदैनीटिमकी, ढोलकचिन्तादास
भरथरीइकतारा, सारंगीसुरूजबाई खांडे
बांस गीतमोहरालीकेजूराम यादव, नकुल यादव
कबीर गीत(उल्लेख नहीं)भारती बंधु

नारी-प्रधान एवं पुरुष-प्रधान गीत

वर्गनारी-प्रधानपुरुष-प्रधान
संस्कार विषयकजन्म गीत, विवाह गीत-
नृत्य गीतसुआ, भोजलीडंडा, करमा, मड़ई, नाचा
पर्व गीत (पुरुष-प्रधान में जातीय)गौरा, सवनाहीबाँस गीत, देवार गीत, रास (जातीय)
ऋतु गीतबारामासा, ददरियाबारहमासा, वर्षागीत
धार्मिक / अन्यलोरी (अन्य गीत)भजन, जंवारा (धार्मिक)

ध्यान दें: ददरिया नारी-प्रधान ऋतु गीतों में गिना गया है, जबकि पहले उसे प्रणय गीत कहा गया है। बारहमासा (बारामासा से भिन्न वर्तनी में) और वर्षागीत पुरुष-प्रधान ऋतु गीत हैं।

कलाकार-वर्ग के अनुसार गायन

श्रेणीसंबद्ध समूह/गीत
परम्परागत जाति कलाकारबसदेवा, परधान, देवार, भिम्मा
शौकिया गायकी कलाकारकँवर, बंजारा, अहीर
खेल गीतअटकन-बटकन, फुगड़ी, गेड़ी आदि

तुलना एवं संबंध

वर्गउदाहरणभाव/संदर्भ
धर्म-पूजाजंवारा, भोजली, जसदेवी-पूजन, जलदेवी
ऋतुफाग, सवनाहीबसंत/होली, सावन
उत्सवसुआ, छेरछेरादीपावली, पौष पूर्णिमा
संस्कारसोहर, विवाहजन्म, विवाह
मनोरंजनकरमा, डंडा, ददरियानृत्य-गान का आनंद

याद रखने योग्य बिंदु

  • लोक-साहित्य के पाँच भाग हैं: लोकगीत, लोकगाथा, लोककथा, लोकनाट्य, लोक सुभाषित।
  • राज्य की लोक-संस्कृति मुख्यतः प्रकृति से प्रभावित है।
  • लोकगीत के पाँच वर्ग: धर्म-पूजा, ऋतु, उत्सव, संस्कार, मनोरंजन।
  • भरथरी के वाद्य इकतारा और सारंगी हैं; गायिका सुरूजबाई खांडे।
  • पंथी के गीतकार देवदास बंजारे; वाद्य मांदर व झांझ।
  • चंदैनी में टिमकी और ढोलक बजते हैं; बांस गीत का वाद्य मोहराली है।
  • करमा, डंडा और ददरिया मनोरंजन गीत माने गए हैं; सुआ, छेरछेरा और राऊत नाचा के दोहे उत्सव गीत हैं।
  • सुआ और भोजली नारी-प्रधान नृत्य गीत हैं; डंडा, करमा, मड़ई, नाचा पुरुष-प्रधान।
  • गौरा और सवनाही पर्व गीत हैं; बाँस, देवार, रास जातीय गीत हैं; भजन और जंवारा पुरुष-प्रधान धार्मिक गीत हैं।
  • बसदेवा, परधान, देवार, भिम्मा परम्परागत जाति कलाकार; कँवर, बंजारा, अहीर शौकिया कलाकार।
  • अटकन-बटकन, फुगड़ी, गेड़ी खेल गीत हैं; लोरी नारी-प्रधान 'अन्य गीत' है।

स्मरण सूत्र

  • धर्म-ऋतु-उत्सव-संस्कार-मनोरंजन: ‘धऋउसं-म’ की पाँच सीढ़ियाँ।
  • पंडवानी-तंबूरा, भरथरी-इकतारा, पंथी-मांदर, चंदैनी-टिमकी, बांस-मोहराली।
  • ‘सुआ-भोजली नारी की, डंडा-करमा नर की’ - नृत्य गीत का बँटवारा।

स्वयं जाँचें

  • प्रश्न: लोक-साहित्य के कितने भाग हैं? उत्तर: पाँच।
  • प्रश्न: सवनाही और फाग किस वर्ग में हैं? उत्तर: ऋतुओं पर आधारित गीत (सवनाही नारी-प्रधान पर्व गीत भी गिना गया है)।
  • प्रश्न: भरथरी की गायिका कौन हैं? उत्तर: सुरूजबाई खांडे।
  • प्रश्न: चंदैनी के वाद्य कौन से हैं? उत्तर: टिमकी और ढोलक।
  • प्रश्न: रास किस वर्ग में है? उत्तर: पुरुष-प्रधान जातीय गीत।
  • प्रश्न: खेल गीतों के उदाहरण दें। उत्तर: अटकन-बटकन, फुगड़ी, गेड़ी।
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