सावन-भादो के पर्व: नागपंचमी से नवाखानी तक
छत्तीसगढ़ के लोक-पर्व खेती, पशुधन, संतान और परिवार से जुड़े हैं। सावन (जुलाई-अगस्त) और भादो (अगस्त-सितम्बर) में सबसे अधिक व्रत-पर्व आते हैं। परीक्षाओं में प्रायः पर्व का माह/तिथि, व्रत रखने वाला वर्ग, विशेष व्यंजन, गीत और उसका उद्देश्य पूछा जाता है। यहाँ सभी पर्व क्रम से दिए गए हैं।
सावन माह के पर्व
नागपंचमी (नगपांचे)
- अवसर: सावन शुक्ल पक्ष पंचमी।
- आयोजन: दलहा पहाड़ (जिला जांजगीर-चांपा) में मेला लगता है।
- गायन: नगमत गीत गाए जाते हैं।
- खेल: कुश्ती का आयोजन होता है तथा बिरौंछा खेल खेला जाता है।
कजरी त्यौहार
- तिथि: सावन शुक्ल नवमी से सावन पूर्णिमा तक।
- पूजा: देवी भगवती की; उपासना केवल संतानवती माताएँ करती हैं।
- कामना: अच्छी उपज की।
- इसी पर्व से गेहूँ और जौ की बुवाई की शुरुआत मानी जाती है।
राखी / रक्षाबंधन
- अवसर: सावन पूर्णिमा।
- प्रतीक: भाई-बहन के प्रेम का।
भादो (भाद्र) माह के पर्व
भोजली पर्व
- आयोजन: भादो कृष्ण पक्ष का प्रथम दिन। भोजली को सावन शुक्ल नवमी के दिन बोया जाता है और भादो कृष्ण प्रथमा को विसर्जित किया जाता है।
- गीत की पंक्ति: ‘अहो देवी गंगा, लहर तुरंगा, हमर भोजली दाई के भीजे आठों अंगा’। इस गीत में गंगा का उल्लेख बार-बार आता है।
- कामना: भूमि के जल से युक्त (हरी-भरी) होने की।
- प्रतीक: प्रकृति-पूजा और मित्रता का। इस दिन मितान (मित्र) बनाने की परंपरा छत्तीसगढ़ में चिरकाल से चली आ रही है।
- अन्य नाम: भोजली, महाप्रसाद, गंगाजल और गुईंया।
- बीज: भोजली में पाँच प्रकार के बीज बोए जाते हैं: धान, गेहूँ, चना, उड़द तथा कोदो।
- विसर्जन: भोजली विसर्जन को छत्तीसगढ़ी में सरोना या उजेना कहते हैं।
बहुरा चौथ
- आयोजन: भादो कृष्ण चतुर्थी।
- व्रत: माता अपनी संतान की हितकामना के लिए व्रत रखती है।
- पूजा: सिंह तथा गाय-बछड़े की।
हलषष्ठी
- अन्य नाम: खमरछठ, कमरछठ, हलछठ।
- आयोजन: भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी।
- द्वारा: केवल संतानवती माताएँ (कुँवारी कन्या, सुहागिन स्त्रियाँ या विधवा महिलाएँ नहीं)।
- उद्देश्य: पुत्र की लम्बी आयु के लिए व्रत।
- संबंध: महाभारत से।
- सेवन: पसहर चावल, अर्थात् बिना हल की जुती भूमि पर उगने वाला अनाज।
जन्माष्टमी (आठे कन्हैया पर्व)
- नाम का कारण: भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी (आठे) को हुआ, इसलिए आठे कन्हैया।
- आयोजन: कृष्ण पक्ष अष्टमी।
- मेला: रायगढ़ के गौरीशंकर मंदिर में विशेष मेला।
- नृत्य: कदम्ब या किसी वृक्ष के नीचे राधा-कृष्ण की मूर्ति रखकर उसके चारों ओर नृत्य।
- विशेष: रसोईघर की दीवारों पर आठे कन्हैया का चित्र बनाकर पूजा-अर्चना और फलाहार किया जाता है। अगले दिन कृष्ण की बाल-लीला व दही-लूट का उत्सव होता है।
- दहिकाँदो नृत्य करमा और रास का संकरित (मिश्रित) रूप है।
पोला
- आयोजन: भाद्रपद अमावस्या।
- व्यंजन: ठेठरी (पार्वती का प्रतीक) और खुरमी (शिव का प्रतीक)।
- मान्यता: इस दिन धान की फसल में गर्भधारण (गभोट आना) माना जाता है।
- प्रतियोगिता: बैल दौड़।
- विशेष: मिट्टी के बैलों की पूजा पोरा-जांता नामक मिट्टी के बर्तन में व्यंजन रखकर की जाती है; किसान बैलों को सजाते हैं; इसी दिन गेंड़ी का विसर्जन होता है।
तीजा / हरतालिका
- आयोजन: भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया।
- कार्यक्रम: विवाहित महिलाएँ मायके जाकर पति के दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। मायके में केले के पत्तों से मंडप बनाकर उसमें गौरी-शंकर की प्रतिमा रख पूजा की जाती है।
- विशेष: तीजा के पहले दिन महिलाएँ करू भात खाती हैं, फिर अगले दिन निर्जला उपवास रखती हैं।
धनकुल / तीजा जगार
- जनजाति: हल्बा और भतरा।
- अवसर: भादो शुक्ल पक्ष तृतीया (तीजा पर्व के दौरान)।
- गायन की भाषा: हल्बी।
- वाद्य: धनकुल, जो मटकी, बाँस की खपच्ची, सूपा और धनुष से बनता है।
- विशेष: महिलाएँ पति की दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए गौरी या लक्ष्मी की आराधना करते हुए गुरुमाय से धनकुल कथा या जगार गीत सुनती हैं। इसे तीजा जगार भी कहते हैं।
गणेश चतुर्थी
- अवसर: भादो शुक्ल पक्ष चतुर्थी।
- विशेष: इस दिन रायगढ़ के रामलीला मैदान में चक्रधर समारोह होता है, जिसका शुभारंभ राजा भूपदेव ने किया था; इसे पहले गणेश उत्सव के नाम से जाना जाता था। शासन द्वारा राजकीय महोत्सव के रूप में पुनः प्रारंभ 1985 में हुआ। 2024 में आयोजित चक्रधर समारोह 39वाँ क्रम था।
नवाखानी
- जनजाति: गोंड।
- अवसर: भादो माह में शुक्ल पक्ष से पूर्णिमा तक, नई फसल आने पर।
- विशेष: पूर्वजों को नई फसल व मदिरा अर्पित की जाती है।
तुलना एवं संबंध
| पर्व | कौन/किसके लिए | विशेष वस्तु |
|---|---|---|
| हलषष्ठी | संतानवती माता, पुत्र की आयु | पसहर चावल |
| बहुरा चौथ | माता, संतान की हितकामना | सिंह व गाय-बछड़े की पूजा |
| तीजा | विवाहित स्त्री, पति की आयु | करू भात, निर्जला उपवास |
| पोला | किसान, बैल | ठेठरी-खुरमी |
| भोजली | मित्रता/भूमि का जल | पाँच बीज |
याद रखने योग्य बिंदु
- नागपंचमी का मेला दलहा पहाड़ (जांजगीर-चांपा) में लगता है।
- कजरी से गेहूँ-जौ की बुवाई शुरू होती है।
- भोजली बोने के पाँच बीज: धान, गेहूँ, चना, उड़द, कोदो।
- भोजली विसर्जन = सरोना/उजेना।
- हलषष्ठी के अन्य नाम खमरछठ, कमरछठ, हलछठ।
- हलषष्ठी में पसहर चावल खाया जाता है।
- ठेठरी पार्वती और खुरमी शिव का प्रतीक।
- तीजा में पहले दिन करू भात, फिर निर्जला उपवास।
- धनकुल हल्बा-भतरा का वाद्य, भाषा हल्बी।
- चक्रधर समारोह: राजा भूपदेव द्वारा शुभारंभ; 1985 में राजकीय; 2024 में 39वाँ।
- नवाखानी गोंड जनजाति का पर्व है।
स्मरण सूत्र
‘भोजली में पाँच: धान-गेहूँ-चना-उड़द-कोदो’ (धा-गे-च-उ-को)। ‘ठे-पार्वती, खु-शिव’: ठेठरी पार्वती, खुरमी शिव।
स्वयं जाँचें
- प्र. कजरी पर्व किस माह में है? उ. सावन शुक्ल नवमी से पूर्णिमा तक।
- प्र. भोजली विसर्जन को छत्तीसगढ़ी में क्या कहते हैं? उ. सरोना या उजेना।
- प्र. हलषष्ठी में कौन-सा चावल खाया जाता है? उ. पसहर चावल।
- प्र. पोला में किसकी पूजा होती है? उ. मिट्टी के बैलों की।
- प्र. धनकुल किस भाषा में गाया जाता है? उ. हल्बी।
- प्र. चक्रधर समारोह का शुभारंभ किसने किया? उ. राजा भूपदेव ने।
अभ्यास प्रश्न
छत्तीसगढ़ में पुत्र की लंबी आयु की कामना किस पर्व पर विशेष रूप से की जाती है?
- (A) हलषष्ठी
- (B) तीजा
- (C) भोजली
- (D) पोला
बस्तर के ‘तीजा जगार’ के पारम्परिक गीत प्रमुख रुप से निम्नलिखित में से किस लोक भाषा में गाए जाते हैं?
- (A) गोंडी
- (B) हल्बी
- (C) भतरी
- (D) दोर्ली
इस राज्य में भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को मनाने वाला त्योहार कौन-सा है ?
- (A) पोला
- (B) हरेली
- (C) तीजा
- (D) भोजली
छत्तीसगढ़ में विवाहित महिलाएं अपने पति के दीर्घाय के कौन सा व्रत करती है
- (A) जन्माष्टमी
- (B) तीजा
- (C) कमरछठ
- (D) रामनवमी
किस पर्व में मिट्टी के बैल की पूजा होती है?
- (A) हरेली
- (B) पोला
- (C) अक्ति
- (D) हलषष्ठी
हलषष्ठी त्यौहार क्यों मनाया जाता है?
- (A) अच्छी फसल के लिए
- (B) पति की दीर्घायु के लिए
- (C) पुत्र की दीर्घायु के लिए
- (D) सुख-संपत्ति के लिए
भादो मास में छत्तीसगढ़ में मनाए जाने वाले निम्नलिखित में से किस त्यौहार में विवाहित स्त्रियां अपने मायके जाकर उपवास रखती हैं – (CG PSC-Mains-2008)
- (A) गौरा-गौरी
- (B) तीजा
- (C) छेरछेरा
- (D) हरेली जोड़ी
निम्नलिखित कथनों को ध्यानपूर्वक पढिये– 293. छत्तीसगढ़ में पति के लिए किया जाने वाला व्रत है–
- (A) हलषट्ठी खमरछट
- (B) बहला चौथ
- (C) तीजा
- (D) इनमें से कोई नहीं
छत्तीसगढ़ में पोला त्यौहार में किस पशु की पूजा की जाती है ?
- (A) बैल
- (B) सिंहनी
- (C) गाय
- (D) बिल्ली
किस त्यौहार में पसहर चावल का उपयोग अनिवार्य होता है ? (CG PSC-SEE-2016)
- (A) नवरात्रि
- (B) रक्षाबंधन
- (C) नवाखाई
- (D) कमरछठ
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (A) - हलषष्ठी का व्रत पुत्र की लम्बी आयु के लिए है।
- (B) - धनकुल/तीजा जगार गायन की भाषा हल्बी है।
- (C) - तीजा भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाया जाता है।
- (B) - तीजा में विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं।
- (B) - पोला में मिट्टी के बैलों की पूजा होती है।
- (C) - हलषष्ठी पुत्र की लम्बी आयु के लिए व्रत है।
- (B) - तीजा में विवाहित महिलाएँ मायके जाकर व्रत रखती हैं।
- (C) - तीजा पति की आयु के लिए किया जाने वाला व्रत है।
- (A) - पोला में बैलों की पूजा होती है।
- (D) - हलषष्ठी (कमरछठ) में पसहर चावल खाया जाता है।