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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 12
पंडवानी एवं लोकगीत के प्रमुख कलाकार

पंडवानी एवं लोकगीत के प्रमुख कलाकार

छत्तीसगढ़ की गायन-परंपरा को देश-विदेश तक पहुँचाने वाले कलाकारों के जन्म, निवास, गायन-शैली और सम्मान बार-बार परीक्षा में पूछे जाते हैं। इस अध्याय में पंडवानी (कापालिक एवं वेदमती शैली), भरथरी गायन, पंथी नृत्य और लोकगीत-लेखन से जुड़े प्रमुख नाम व्यवस्थित रूप से दिए गए हैं। CGPSC, व्यापम और पटवारी स्तर की परीक्षाओं में "कौन-सी शैली, कौन-सा सम्मान, कौन-सा गाँव" जैसे प्रश्न आम हैं।

तीजन बाई

  • जन्म वर्ष: 1956; निवासी: पाटन (जिला दुर्ग)।
  • 1973 से पंडवानी गायन प्रारंभ किया।
  • पंडवानी की कापालिक शैली से संबंधित हैं।
  • उनकी पंडवानी संबंधी संस्था का नाम मनमोहना है।
  • 1985 में फ्रांस में हुए भारत महोत्सव में भाग लिया।
  • मॉरीशस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी सहित अन्य देशों में पंडवानी प्रस्तुत की; पंडवानी को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका।
  • श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित धारावाहिक "भारत एक खोज" में पंडवानी गायन किया।

तीजन बाई को प्राप्त सम्मान

सम्मानवर्ष
पद्मश्री1987
पद्म भूषण2003
पद्म विभूषण2019
फुकुओका सम्मान, जापान2018
संगीत नाटक अकादमी सम्मानवर्ष मूल पाठ में उल्लिखित नहीं
संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप सम्मान2022
अहिल्या बाई सम्मान (अविभाजित मध्यप्रदेश)वर्ष उल्लिखित नहीं

झाड़ूराम देवांगन

  • उपाधि: छत्तीसगढ़ में पंडवानी के गुरु।
  • जन्म 1927; निवासी: ग्राम बासिन (भिलाई)।
  • प्रेरणा: छत्तीसगढ़ी महाभारत से।
  • वेदमती शैली के प्रसिद्ध गायक; किशोरावस्था से ही पंडवानी गायन प्रारंभ किया।
  • पंडवानी को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई; राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के समक्ष भी गायन किया।
  • प्रमुख शिष्य: पूनाराम निषाद, चेतनराम एवं प्रभा यादव।

ऋतु वर्मा और उषा बारले

  • ऋतु वर्मा: जन्म 1979; निवासी रुआबांधा, भिलाई (दुर्ग); पंडवानी की वेदमती शैली की गायिका।
  • उषा बारले: निवासी भिलाई, दुर्ग; पंडवानी की कापालिक शैली की गायिका; पद्मश्री पुरस्कार 2023।

स्व. सूरूजबाई खांडे

  • गायिका: भरथरी, ढोला-मारू एवं चंदैनी।
  • आल्हा-उदल तथा निर्गुण मार्ग के भजनों में निपुण।
  • उपलब्धि: अमेरिका, जर्मनी एवं इंग्लैण्ड में भरथरी गायन किया।
  • हबीब तनवीर की मंडली के साथ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मंचन किया।

स्व. देवदास बंजारे

  • जन्म: साँकरा ग्राम (धमतरी)।
  • पंथी नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने में अहम योगदान।

स्व. लक्ष्मण मस्तुरिया

  • प्रसिद्धि: गीतकार के रूप में; प्रसिद्ध गीत 'मोर संग चलव रे'।
  • छत्तीसगढ़ी निबंध: 'माटी कहे कुम्हार से'।
  • राज्य सरकार द्वारा कला क्षेत्र में योगदान हेतु उनके नाम पर "लक्ष्मण मस्तुरिया लोक गीत पुरस्कार" देने की घोषणा की गई है।

तुलना एवं संबंध

कलाकारशैली/विधानिवास/जन्मस्थानविशेष
तीजन बाईपंडवानी (कापालिक)पाटन, दुर्गपद्मश्री 1987, पद्म भूषण 2003, पद्म विभूषण 2019
झाड़ूराम देवांगनपंडवानी (वेदमती)बासिन, भिलाईपंडवानी के गुरु
ऋतु वर्मापंडवानी (वेदमती)रुआबांधा, भिलाईजन्म 1979
उषा बारलेपंडवानी (कापालिक)भिलाई, दुर्गपद्मश्री 2023
सूरूजबाई खांडेभरथरी, ढोला-मारू, चंदैनी—अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैण्ड में गायन
देवदास बंजारेपंथी नृत्यसाँकरा, धमतरीपंथी को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति
लक्ष्मण मस्तुरियालोकगीत/गीतकार—'मोर संग चलव रे']

याद रखने योग्य बिंदु

  • कापालिक शैली: तीजन बाई और उषा बारले।
  • वेदमती शैली: झाड़ूराम देवांगन और ऋतु वर्मा।
  • तीजन बाई की संस्था का नाम मनमोहना है।
  • तीजन बाई ने 1985 के भारत महोत्सव (फ्रांस) में भाग लिया।
  • तीजन बाई: पद्मश्री 1987, पद्म भूषण 2003, पद्म विभूषण 2019।
  • फुकुओका सम्मान (जापान) तीजन बाई को 2018 में मिला।
  • झाड़ूराम देवांगन के शिष्य: पूनाराम निषाद, चेतनराम, प्रभा यादव।
  • उषा बारले को पद्मश्री 2023 में मिला।
  • सूरूजबाई खांडे भरथरी गायिका थीं और हबीब तनवीर की मंडली से जुड़ी रहीं।
  • देवदास बंजारे का नाम पंथी नृत्य से जुड़ा है।
  • 'मोर संग चलव रे' के रचनाकार लक्ष्मण मस्तुरिया हैं।

स्मरण सूत्र

"का-ती, वे-झा" — कापालिक: तीजन (और उषा); वेदमती: झाड़ूराम (और ऋतु)। दूसरा सूत्र: पद्म क्रम 87-03-19 = पद्मश्री, भूषण, विभूषण (तीजन बाई)।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: तीजन बाई कहाँ की निवासी हैं? उत्तर: पाटन (दुर्ग)।
  2. प्रश्न: झाड़ूराम देवांगन किस शैली के गायक थे? उत्तर: वेदमती शैली।
  3. प्रश्न: उषा बारले को पद्मश्री किस वर्ष मिला? उत्तर: 2023।
  4. प्रश्न: सूरूजबाई खांडे किस गायन के लिए प्रसिद्ध थीं? उत्तर: भरथरी।
  5. प्रश्न: पंथी नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति किसने दिलाई? उत्तर: देवदास बंजारे।
  6. प्रश्न: 'माटी कहे कुम्हार से' किसकी रचना है? उत्तर: लक्ष्मण मस्तुरिया।

अभ्यास प्रश्न

  1. छत्तीसगढ़ की सुप्रसिध्द पंडवानी कलाकार तीजन बाई को पद्म विभूषण से कब सम्मानित किया गया?

    • (A) 2017
    • (B) 2018
    • (C) 2019
    • (D) 2020
  2. छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध मनमोहना सांस्कृतिक कार्यक्रम मंडली किसकी है?

    • (A) झाडूराम देवांगन
    • (B) शांति बाई
    • (C) ऋतु वर्मा
    • (D) तीजन बाई
  3. प्रसिद्ध कलाकार देवदास बंजारे की ख्याति किस कला क्षेत्र में है?

    • (A) पंथी नृत्य
    • (B) लोक- गायक
    • (C) पंडवानी- गायक
    • (D) रंझु बजइया
  4. छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध गायिका तीजनबाई पंडवानी किस शैली में गाती हैं?

    • (A) कापालिक
    • (B) वेदमती
    • (C) वेदमती एवं कापालिक दोनों में
    • (D) इनमें से कोई नहीं
  5. छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पण्डवानी गायिका

    • (A) तीजन बाई
    • (B) सूरज सिंह
    • (C) वाणी राव
    • (D) गायत्री सिंह
  6. सुरूज बाई खांडे किस लोकगायन से संबद्ध हैं?

    • (A) पंडवानी
    • (B) भरथरी
    • (C) चंदैनी
    • (D) बांसगीत
  7. निम्न में से कौन पंडवानी गायन से संबंधित हैं?

    • (A) लक्ष्मण मस्तुरिया
    • (B) जवाहर लाल बघेल
    • (C) ऋतु वर्मा
    • (D) मंढला महाराज
  8. निम्नांकित में से छत्तीसगढ़ी गीतकार कौन हैं ?

    • (A) श्रीकांत वर्मा
    • (B) लक्ष्मण मस्तुरिया
    • (C) भालराव तैलंग
    • (D) प्यारेलाल गुप्त
  9. विश्व प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी लोक गोयिका तीजनबाई, लोक संगीत की किस शैली का प्रतिनिधित्व करती है ?

    • (A) लावणी
    • (B) गोंधल
    • (C) पंडवानी
    • (D) भारूड

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (C) - तीजन बाई को पद्म विभूषण 2019 में मिला।
  2. (D) - तीजन बाई की संस्था मनमोहना है।
  3. (A) - देवदास बंजारे ने पंथी नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाई।
  4. (A) - तीजन बाई पंडवानी की कापालिक शैली से संबंधित हैं।
  5. (A) - तीजन बाई प्रसिद्ध पंडवानी गायिका हैं।
  6. (B) - सूरूजबाई खांडे भरथरी गायिका थीं।
  7. (C) - ऋतु वर्मा पंडवानी की वेदमती शैली की गायिका हैं।
  8. (B) - लक्ष्मण मस्तुरिया गीतकार हैं।
  9. (C) - तीजन बाई पंडवानी शैली की प्रतिनिधि हैं।
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