पंडवानी एवं लोकगीत के प्रमुख कलाकार
छत्तीसगढ़ की गायन-परंपरा को देश-विदेश तक पहुँचाने वाले कलाकारों के जन्म, निवास, गायन-शैली और सम्मान बार-बार परीक्षा में पूछे जाते हैं। इस अध्याय में पंडवानी (कापालिक एवं वेदमती शैली), भरथरी गायन, पंथी नृत्य और लोकगीत-लेखन से जुड़े प्रमुख नाम व्यवस्थित रूप से दिए गए हैं। CGPSC, व्यापम और पटवारी स्तर की परीक्षाओं में "कौन-सी शैली, कौन-सा सम्मान, कौन-सा गाँव" जैसे प्रश्न आम हैं।
तीजन बाई
- जन्म वर्ष: 1956; निवासी: पाटन (जिला दुर्ग)।
- 1973 से पंडवानी गायन प्रारंभ किया।
- पंडवानी की कापालिक शैली से संबंधित हैं।
- उनकी पंडवानी संबंधी संस्था का नाम मनमोहना है।
- 1985 में फ्रांस में हुए भारत महोत्सव में भाग लिया।
- मॉरीशस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी सहित अन्य देशों में पंडवानी प्रस्तुत की; पंडवानी को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका।
- श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित धारावाहिक "भारत एक खोज" में पंडवानी गायन किया।
तीजन बाई को प्राप्त सम्मान
| सम्मान | वर्ष |
|---|---|
| पद्मश्री | 1987 |
| पद्म भूषण | 2003 |
| पद्म विभूषण | 2019 |
| फुकुओका सम्मान, जापान | 2018 |
| संगीत नाटक अकादमी सम्मान | वर्ष मूल पाठ में उल्लिखित नहीं |
| संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप सम्मान | 2022 |
| अहिल्या बाई सम्मान (अविभाजित मध्यप्रदेश) | वर्ष उल्लिखित नहीं |
झाड़ूराम देवांगन
- उपाधि: छत्तीसगढ़ में पंडवानी के गुरु।
- जन्म 1927; निवासी: ग्राम बासिन (भिलाई)।
- प्रेरणा: छत्तीसगढ़ी महाभारत से।
- वेदमती शैली के प्रसिद्ध गायक; किशोरावस्था से ही पंडवानी गायन प्रारंभ किया।
- पंडवानी को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई; राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के समक्ष भी गायन किया।
- प्रमुख शिष्य: पूनाराम निषाद, चेतनराम एवं प्रभा यादव।
ऋतु वर्मा और उषा बारले
- ऋतु वर्मा: जन्म 1979; निवासी रुआबांधा, भिलाई (दुर्ग); पंडवानी की वेदमती शैली की गायिका।
- उषा बारले: निवासी भिलाई, दुर्ग; पंडवानी की कापालिक शैली की गायिका; पद्मश्री पुरस्कार 2023।
स्व. सूरूजबाई खांडे
- गायिका: भरथरी, ढोला-मारू एवं चंदैनी।
- आल्हा-उदल तथा निर्गुण मार्ग के भजनों में निपुण।
- उपलब्धि: अमेरिका, जर्मनी एवं इंग्लैण्ड में भरथरी गायन किया।
- हबीब तनवीर की मंडली के साथ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मंचन किया।
स्व. देवदास बंजारे
- जन्म: साँकरा ग्राम (धमतरी)।
- पंथी नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने में अहम योगदान।
स्व. लक्ष्मण मस्तुरिया
- प्रसिद्धि: गीतकार के रूप में; प्रसिद्ध गीत 'मोर संग चलव रे'।
- छत्तीसगढ़ी निबंध: 'माटी कहे कुम्हार से'।
- राज्य सरकार द्वारा कला क्षेत्र में योगदान हेतु उनके नाम पर "लक्ष्मण मस्तुरिया लोक गीत पुरस्कार" देने की घोषणा की गई है।
तुलना एवं संबंध
| कलाकार | शैली/विधा | निवास/जन्मस्थान | विशेष |
|---|---|---|---|
| तीजन बाई | पंडवानी (कापालिक) | पाटन, दुर्ग | पद्मश्री 1987, पद्म भूषण 2003, पद्म विभूषण 2019 |
| झाड़ूराम देवांगन | पंडवानी (वेदमती) | बासिन, भिलाई | पंडवानी के गुरु |
| ऋतु वर्मा | पंडवानी (वेदमती) | रुआबांधा, भिलाई | जन्म 1979 |
| उषा बारले | पंडवानी (कापालिक) | भिलाई, दुर्ग | पद्मश्री 2023 |
| सूरूजबाई खांडे | भरथरी, ढोला-मारू, चंदैनी | — | अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैण्ड में गायन |
| देवदास बंजारे | पंथी नृत्य | साँकरा, धमतरी | पंथी को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति |
| लक्ष्मण मस्तुरिया | लोकगीत/गीतकार | — | 'मोर संग चलव रे'] |
याद रखने योग्य बिंदु
- कापालिक शैली: तीजन बाई और उषा बारले।
- वेदमती शैली: झाड़ूराम देवांगन और ऋतु वर्मा।
- तीजन बाई की संस्था का नाम मनमोहना है।
- तीजन बाई ने 1985 के भारत महोत्सव (फ्रांस) में भाग लिया।
- तीजन बाई: पद्मश्री 1987, पद्म भूषण 2003, पद्म विभूषण 2019।
- फुकुओका सम्मान (जापान) तीजन बाई को 2018 में मिला।
- झाड़ूराम देवांगन के शिष्य: पूनाराम निषाद, चेतनराम, प्रभा यादव।
- उषा बारले को पद्मश्री 2023 में मिला।
- सूरूजबाई खांडे भरथरी गायिका थीं और हबीब तनवीर की मंडली से जुड़ी रहीं।
- देवदास बंजारे का नाम पंथी नृत्य से जुड़ा है।
- 'मोर संग चलव रे' के रचनाकार लक्ष्मण मस्तुरिया हैं।
स्मरण सूत्र
"का-ती, वे-झा" — कापालिक: तीजन (और उषा); वेदमती: झाड़ूराम (और ऋतु)। दूसरा सूत्र: पद्म क्रम 87-03-19 = पद्मश्री, भूषण, विभूषण (तीजन बाई)।
स्वयं जाँचें
- प्रश्न: तीजन बाई कहाँ की निवासी हैं? उत्तर: पाटन (दुर्ग)।
- प्रश्न: झाड़ूराम देवांगन किस शैली के गायक थे? उत्तर: वेदमती शैली।
- प्रश्न: उषा बारले को पद्मश्री किस वर्ष मिला? उत्तर: 2023।
- प्रश्न: सूरूजबाई खांडे किस गायन के लिए प्रसिद्ध थीं? उत्तर: भरथरी।
- प्रश्न: पंथी नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति किसने दिलाई? उत्तर: देवदास बंजारे।
- प्रश्न: 'माटी कहे कुम्हार से' किसकी रचना है? उत्तर: लक्ष्मण मस्तुरिया।
अभ्यास प्रश्न
छत्तीसगढ़ की सुप्रसिध्द पंडवानी कलाकार तीजन बाई को पद्म विभूषण से कब सम्मानित किया गया?
- (A) 2017
- (B) 2018
- (C) 2019
- (D) 2020
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध मनमोहना सांस्कृतिक कार्यक्रम मंडली किसकी है?
- (A) झाडूराम देवांगन
- (B) शांति बाई
- (C) ऋतु वर्मा
- (D) तीजन बाई
प्रसिद्ध कलाकार देवदास बंजारे की ख्याति किस कला क्षेत्र में है?
- (A) पंथी नृत्य
- (B) लोक- गायक
- (C) पंडवानी- गायक
- (D) रंझु बजइया
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध गायिका तीजनबाई पंडवानी किस शैली में गाती हैं?
- (A) कापालिक
- (B) वेदमती
- (C) वेदमती एवं कापालिक दोनों में
- (D) इनमें से कोई नहीं
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पण्डवानी गायिका
- (A) तीजन बाई
- (B) सूरज सिंह
- (C) वाणी राव
- (D) गायत्री सिंह
सुरूज बाई खांडे किस लोकगायन से संबद्ध हैं?
- (A) पंडवानी
- (B) भरथरी
- (C) चंदैनी
- (D) बांसगीत
निम्न में से कौन पंडवानी गायन से संबंधित हैं?
- (A) लक्ष्मण मस्तुरिया
- (B) जवाहर लाल बघेल
- (C) ऋतु वर्मा
- (D) मंढला महाराज
निम्नांकित में से छत्तीसगढ़ी गीतकार कौन हैं ?
- (A) श्रीकांत वर्मा
- (B) लक्ष्मण मस्तुरिया
- (C) भालराव तैलंग
- (D) प्यारेलाल गुप्त
विश्व प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी लोक गोयिका तीजनबाई, लोक संगीत की किस शैली का प्रतिनिधित्व करती है ?
- (A) लावणी
- (B) गोंधल
- (C) पंडवानी
- (D) भारूड
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (C) - तीजन बाई को पद्म विभूषण 2019 में मिला।
- (D) - तीजन बाई की संस्था मनमोहना है।
- (A) - देवदास बंजारे ने पंथी नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाई।
- (A) - तीजन बाई पंडवानी की कापालिक शैली से संबंधित हैं।
- (A) - तीजन बाई प्रसिद्ध पंडवानी गायिका हैं।
- (B) - सूरूजबाई खांडे भरथरी गायिका थीं।
- (C) - ऋतु वर्मा पंडवानी की वेदमती शैली की गायिका हैं।
- (B) - लक्ष्मण मस्तुरिया गीतकार हैं।
- (C) - तीजन बाई पंडवानी शैली की प्रतिनिधि हैं।