छत्तीसगढ़ के प्रमुख वाद्ययंत्र
लोकगीत, लोकनृत्य और पर्वों की पहचान उनके वाद्यों से होती है। परीक्षा में प्रायः 'किस वाद्य का किस अवसर/गीत/सामग्री से संबंध' पूछा जाता है। यहाँ सभी 16 वाद्य क्रम से हैं।
सभी वाद्ययंत्र
| क्र. | वाद्य | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | दफड़ा / चांग | लकड़ी के गोलाकार व्यास में चमड़ा मढ़कर बनता है; वादक इसे कंधे पर लटकाकर बजाता है। |
| 2 | नगाड़ा | होली पर फाग गीतों के गायन में प्रयुक्त; लकड़ी के डंडे से बजाया जाता है। |
| 3 | झांझ व मंजीरा | बड़े स्वरूप का मंजीरा; मांदर के साथ बजाया जाता है। |
| 4 | गुदुम | बारहसिंगा का सींग लगा होने से सींग बाजा भी कहलाता है; गंड़वा बाजा साज का प्रमुख वाद्ययंत्र। |
| 5 | ताशा | प्रदेश के मुस्लिम समाज में प्रचलित प्रसिद्ध वाद्ययंत्र। |
| 6 | अलगोजा | बांस की बांसुरीनुमा संरचना जिसके दो मुख होते हैं; एक साथ हवा फूंककर बजाया जाता है। |
| 7 | मोहरी | शहनाई का प्रचलित रूप; गंड़वा बाजा का अभिन्न अंग; फूंककर बजाया जाता है; मुख्यतः विवाह के अवसर पर। |
| 8 | खड़ताल | पंडवानी में प्रयुक्त प्रमुख वाद्ययंत्र; हाथ की अंगुलियों में फंसाकर बजाया जाता है। |
| 9 | मांदर | लकड़ी के खोखले भाग में दोनों तरफ बकरे का चमड़ा चढ़ाकर बनता है; जनजाति गीतों-नृत्यों के साथ और मातासेवा गीत के समय बजता है। |
| 10 | बीन | सपेरों द्वारा साँप पकड़ने तथा गाँव-गाँव तमाशा दिखाने में प्रयुक्त। |
| 11 | ढोलक | धार्मिक कार्यों जैसे मंदिरों में भजन-कीर्तन के समय प्रयुक्त। |
| 12 | बांसुरी | खोखले बांस का, मुँह से फूंककर बजने वाला; लगभग सभी गीतों में बजाया जाता है। |
| 13 | इकतारा | प्रदेश में भरथरी गीत के समय प्रयुक्त। |
| 14 | टिमटिमी | लकड़ी के खोखले भाग पर चमड़े का परत बाँधकर बनता है; होली तथा विवाह के अवसर पर देखा जाता है। |
| 15 | खंजरी | थाप और हाथ हिलाकर बजाई जाती है; टिन के गोलाकार पतले घेरे के एक ओर चमड़ा या पतली झिल्ली मढ़ी होती है; घेरे में 3-4 जोड़ी झांझ लगी होती हैं। |
| 16 | तमूरा | सूखे लौकी के खोल से बनता है; तत् वाद्ययंत्र। |
गंड़वा बाजा के प्रमुख वाद्य
- झांझ
- नगाड़ा
- मोहरी
- गुदुम
तुलना एवं संबंध
| अवसर / गीत | वाद्य |
|---|---|
| होली / फाग | नगाड़ा, टिमटिमी |
| विवाह | मोहरी, टिमटिमी |
| पंडवानी | खड़ताल |
| भरथरी गीत | इकतारा |
| मातासेवा / जनजाति नृत्य | मांदर |
| भजन-कीर्तन (मंदिर) | ढोलक |
| साँप पकड़ना / तमाशा | बीन |
| मुस्लिम समाज | ताशा |
बनावट के आधार पर: तमूरा तत् वाद्य है; बांसुरी, अलगोजा, मोहरी फूंककर बजाए जाते हैं; मांदर, दफड़ा, टिमटिमी, खंजरी में चमड़ा मढ़ा होता है।
याद रखने योग्य बिंदु
- गुदुम में बारहसिंगा का सींग लगता है; इसे सींग बाजा कहते हैं।
- गंड़वा बाजा के प्रमुख वाद्य: झांझ, नगाड़ा, मोहरी, गुदुम।
- नगाड़ा फाग गीतों में, लकड़ी के डंडे से।
- मोहरी शहनाई का प्रादेशिक रूप है।
- खड़ताल पंडवानी का प्रमुख वाद्य।
- इकतारा भरथरी गीत में।
- तमूरा सूखे लौकी से बनता है, तत् वाद्य।
- अलगोजा के दो मुख होते हैं।
- खंजरी में 3-4 जोड़ी झांझ।
- ताशा मुस्लिम समाज में प्रचलित।
स्मरण सूत्र
- झांझ-नगाड़ा-मोहरी-गुदुम = गंड़वा चार।
- पंडवानी-खड़ताल, भरथरी-इकतारा, फाग-नगाड़ा।
स्वयं जाँचें
- प्रश्न: सींग बाजा किसे कहते हैं? उत्तर: गुदुम को।
- प्रश्न: पंडवानी का प्रमुख वाद्य? उत्तर: खड़ताल।
- प्रश्न: भरथरी में कौन-सा वाद्य? उत्तर: इकतारा।
- प्रश्न: तमूरा किससे बनता है? उत्तर: सूखे लौकी के खोल से।
- प्रश्न: अलगोजा में कितने मुख? उत्तर: दो।
- प्रश्न: सपेरे कौन-सा वाद्य बजाते हैं? उत्तर: बीन।
अभ्यास प्रश्न
पंडवानी लोकगीत में प्रयुक्त होने वाला प्रमुख वाद्ययंत्र निम्न में से कौन-सा है ?
- (A) अलगोजा
- (B) खड़ताल
- (C) मांदर
- (D) मोहरी
इस राज्य का पीटकर बजाये जाने वाले वाद्य यंत्र जिसमें बारहसिंगा का सींग लगा होता है, उसका नाम है
- (A) ढोलक
- (B) नगाड़ा
- (C) गुदुम
- (D) दफड़ा
टिमटिमी है
- (A) वाद्य
- (B) कला
- (C) नृत्य
- (D) लोककला
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (B) - पंडवानी में खड़ताल प्रमुख वाद्य है।
- (C) - गुदुम में बारहसिंगा का सींग लगता है (सींग बाजा)।
- (A) - टिमटिमी एक वाद्य है, होली-विवाह में देखा जाता है।
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