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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 25
छत्तीसगढ़ के प्रमुख वाद्ययंत्र

छत्तीसगढ़ के प्रमुख वाद्ययंत्र

लोकगीत, लोकनृत्य और पर्वों की पहचान उनके वाद्यों से होती है। परीक्षा में प्रायः 'किस वाद्य का किस अवसर/गीत/सामग्री से संबंध' पूछा जाता है। यहाँ सभी 16 वाद्य क्रम से हैं।

सभी वाद्ययंत्र

क्र.वाद्यविवरण
1दफड़ा / चांगलकड़ी के गोलाकार व्यास में चमड़ा मढ़कर बनता है; वादक इसे कंधे पर लटकाकर बजाता है।
2नगाड़ाहोली पर फाग गीतों के गायन में प्रयुक्त; लकड़ी के डंडे से बजाया जाता है।
3झांझ व मंजीराबड़े स्वरूप का मंजीरा; मांदर के साथ बजाया जाता है।
4गुदुमबारहसिंगा का सींग लगा होने से सींग बाजा भी कहलाता है; गंड़वा बाजा साज का प्रमुख वाद्ययंत्र।
5ताशाप्रदेश के मुस्लिम समाज में प्रचलित प्रसिद्ध वाद्ययंत्र।
6अलगोजाबांस की बांसुरीनुमा संरचना जिसके दो मुख होते हैं; एक साथ हवा फूंककर बजाया जाता है।
7मोहरीशहनाई का प्रचलित रूप; गंड़वा बाजा का अभिन्न अंग; फूंककर बजाया जाता है; मुख्यतः विवाह के अवसर पर।
8खड़तालपंडवानी में प्रयुक्त प्रमुख वाद्ययंत्र; हाथ की अंगुलियों में फंसाकर बजाया जाता है।
9मांदरलकड़ी के खोखले भाग में दोनों तरफ बकरे का चमड़ा चढ़ाकर बनता है; जनजाति गीतों-नृत्यों के साथ और मातासेवा गीत के समय बजता है।
10बीनसपेरों द्वारा साँप पकड़ने तथा गाँव-गाँव तमाशा दिखाने में प्रयुक्त।
11ढोलकधार्मिक कार्यों जैसे मंदिरों में भजन-कीर्तन के समय प्रयुक्त।
12बांसुरीखोखले बांस का, मुँह से फूंककर बजने वाला; लगभग सभी गीतों में बजाया जाता है।
13इकताराप्रदेश में भरथरी गीत के समय प्रयुक्त।
14टिमटिमीलकड़ी के खोखले भाग पर चमड़े का परत बाँधकर बनता है; होली तथा विवाह के अवसर पर देखा जाता है।
15खंजरीथाप और हाथ हिलाकर बजाई जाती है; टिन के गोलाकार पतले घेरे के एक ओर चमड़ा या पतली झिल्ली मढ़ी होती है; घेरे में 3-4 जोड़ी झांझ लगी होती हैं।
16तमूरासूखे लौकी के खोल से बनता है; तत् वाद्ययंत्र।

गंड़वा बाजा के प्रमुख वाद्य

  • झांझ
  • नगाड़ा
  • मोहरी
  • गुदुम

तुलना एवं संबंध

अवसर / गीतवाद्य
होली / फागनगाड़ा, टिमटिमी
विवाहमोहरी, टिमटिमी
पंडवानीखड़ताल
भरथरी गीतइकतारा
मातासेवा / जनजाति नृत्यमांदर
भजन-कीर्तन (मंदिर)ढोलक
साँप पकड़ना / तमाशाबीन
मुस्लिम समाजताशा

बनावट के आधार पर: तमूरा तत् वाद्य है; बांसुरी, अलगोजा, मोहरी फूंककर बजाए जाते हैं; मांदर, दफड़ा, टिमटिमी, खंजरी में चमड़ा मढ़ा होता है।

याद रखने योग्य बिंदु

  • गुदुम में बारहसिंगा का सींग लगता है; इसे सींग बाजा कहते हैं।
  • गंड़वा बाजा के प्रमुख वाद्य: झांझ, नगाड़ा, मोहरी, गुदुम।
  • नगाड़ा फाग गीतों में, लकड़ी के डंडे से।
  • मोहरी शहनाई का प्रादेशिक रूप है।
  • खड़ताल पंडवानी का प्रमुख वाद्य।
  • इकतारा भरथरी गीत में।
  • तमूरा सूखे लौकी से बनता है, तत् वाद्य।
  • अलगोजा के दो मुख होते हैं।
  • खंजरी में 3-4 जोड़ी झांझ।
  • ताशा मुस्लिम समाज में प्रचलित।

स्मरण सूत्र

  • झांझ-नगाड़ा-मोहरी-गुदुम = गंड़वा चार।
  • पंडवानी-खड़ताल, भरथरी-इकतारा, फाग-नगाड़ा।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: सींग बाजा किसे कहते हैं? उत्तर: गुदुम को।
  2. प्रश्न: पंडवानी का प्रमुख वाद्य? उत्तर: खड़ताल।
  3. प्रश्न: भरथरी में कौन-सा वाद्य? उत्तर: इकतारा।
  4. प्रश्न: तमूरा किससे बनता है? उत्तर: सूखे लौकी के खोल से।
  5. प्रश्न: अलगोजा में कितने मुख? उत्तर: दो।
  6. प्रश्न: सपेरे कौन-सा वाद्य बजाते हैं? उत्तर: बीन।

अभ्यास प्रश्न

  1. पंडवानी लोकगीत में प्रयुक्त होने वाला प्रमुख वाद्ययंत्र निम्न में से कौन-सा है ?

    • (A) अलगोजा
    • (B) खड़ताल
    • (C) मांदर
    • (D) मोहरी
  2. इस राज्य का पीटकर बजाये जाने वाले वाद्य यंत्र जिसमें बारहसिंगा का सींग लगा होता है, उसका नाम है

    • (A) ढोलक
    • (B) नगाड़ा
    • (C) गुदुम
    • (D) दफड़ा
  3. टिमटिमी है

    • (A) वाद्य
    • (B) कला
    • (C) नृत्य
    • (D) लोककला

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (B) - पंडवानी में खड़ताल प्रमुख वाद्य है।
  2. (C) - गुदुम में बारहसिंगा का सींग लगता है (सींग बाजा)।
  3. (A) - टिमटिमी एक वाद्य है, होली-विवाह में देखा जाता है।
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