नृत्य एवं प्रणय संबंधी लोकगीत
इस अध्याय में वे गीत हैं जिनके साथ नृत्य जुड़ा है या जो प्रेम-भाव के हैं: सुआ, पंथी, ददरिया, चंदैनी, ढोला-मारू, भरथरी और फणी गीत। प्रत्येक के अवसर, रस, वाद्य और गीतकार याद रखने पर प्रश्न आसानी से हल होते हैं।
सुआ / गौरा गीत
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अवसर | सुआ नृत्य के समय |
| पर्व | दीपावली |
| समापन | शिव-गौरा विवाह के पश्चात |
| प्रतीक | शिव और गौरी |
| गीत की पंक्ति | तरि हरि नहा नरि ना ना रे सुअना |
| रस | शृंगार रस |
| द्वारा | केवल महिलाओं द्वारा; महिला प्रधान गीत; प्रमुखतः गोंड स्त्रियों का नृत्य गीत |
| उद्देश्य | किशोरियाँ अपने प्रेमी को सुआ (तोते) के माध्यम से संदेश भेजती हैं; नारी जीवन के सुख-दुःख और प्रेम प्रधान करुण गीत |
| वाद्ययंत्र | कोई भी वाद्ययंत्र नहीं बजता |
पंथी गीत
- सतनाम पंथ के अनुयायियों द्वारा गाया जाता है।
- वाद्ययंत्र: मांदर, झांझ आदि।
- गीतकार: स्वर्गीय देवदास बंजारे।
- पंथी नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने का श्रेय देवदास बंजारे को है।
ददरिया
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| उपाधि | लोकगीतों का राजा |
| अन्य नाम | श्रम गीत भी कहा जाता है |
| संज्ञा | प्रेमगीत / प्रणय गीत (Love Song) |
| शैली | सवाल-जवाब शैली पर आधारित |
| रस | शृंगार रस |
| अवसर | सामान्यतः वर्षा ऋतु में खुशी के मौके पर, फसल बोते समय, युवक-युवतियों द्वारा |
| रूप | पठारी और कछारी |
| गीतकार | लक्ष्मण मस्तुरिया, दिलीप षडंगी, केदार यादव, शेख हुसैन |
| विशेष | बैगा जनजाति ददरिया गीत के साथ नृत्य भी करती है |
चंदैनी गायन
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| आधार | लोरिक और चंदा के प्रेम प्रसंग |
| निवासी | लोरिक: रीवा ग्राम (रायपुर); चंदा: आरंग |
| कलाकार | चिन्तादास |
| वाद्य | टिमकी, ढोलक |
| गायन | मूल रूप से राऊत जाति द्वारा |
| शैली | गाथामयी शैली: लोरिक; गीतमय शैली: चंदैनी |
ढोला-मारू
- मूलतः राजस्थानी लोकगीत, ढोला और मारू के प्रेम प्रसंग पर आधारित।
- कलाकार: सुरूजबाई खांडे एवं जगन्नाथ कुम्हार।
- नायक: ढोला (नरवर के राजकुमार); नायिका: मारू (पुंगल देश की राजकुमारी); खलनायिका: रेवा (जादूगरनी)।
भरथरी गीत
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| आधार | राजा भरथरी (राजा विक्रमादित्य के छोटे भाई) और रानी पिंगला के वैराग्य जीवन की गाथा गाने की परंपरा |
| गायिका | सुरूजबाई खांडे |
| वाद्य | इकतारा व सारंगी; प्रारंभ में खंजरी बजाकर गाया जाता था |
| प्रचलन | उज्जैन (मालवा) में लोकगाथा के रूप में जन्म |
| विधा | लोकगीत विधा |
| गायक | गीत में स्वयं को ‘योगी’ कहता है; प्रायः नाथपंथी गायक गाते हैं |
डॉ. रामकुमार वर्मा के अनुसार कथा: राजा भरथरी शिकार पर गए, देखा कि एक आदमी की चिता में उसकी पत्नी ने कूदकर प्राण दे दिए। घर आकर उन्होंने रानी पिंगला की परीक्षा ली। रानी ने कहा कि भरथरी की मृत्यु का समाचार ही उनकी जान ले लेगा। भरथरी ने झूठा समाचार भेजा और रानी मर गईं। गोरखनाथ ने रानी को जीवित किया और भरथरी उनके शिष्य बनकर वैराग्य ले लेते हैं।
फणी गीत
यह व्यंग्य और हास्य पर आधारित गीत है।
तुलना एवं संबंध
| गीत | रस/भाव | किससे जुड़ा |
|---|---|---|
| सुआ | शृंगार, करुण | गोंड स्त्रियाँ, दीपावली, बिना वाद्य |
| ददरिया | शृंगार | वर्षा, फसल बोना, सवाल-जवाब |
| चंदैनी | प्रेम गाथा | लोरिक-चंदा, राऊत |
| भरथरी | वैराग्य | भरथरी-पिंगला |
| पंथी | भक्ति | सतनाम पंथ |
याद रखने योग्य बिंदु
- सुआ गीत में कोई वाद्य नहीं बजता; यह महिलाओं का गीत है।
- सुआ के माध्यम से किशोरियाँ प्रेमी को संदेश भेजती हैं।
- पंथी गीत सतनाम पंथ के अनुयायी गाते हैं।
- ददरिया को लोकगीतों का राजा कहा गया है।
- ददरिया सवाल-जवाब शैली का शृंगार रस प्रधान गीत है।
- चंदैनी लोरिक (रीवा, रायपुर) और चंदा (आरंग) की प्रेमकथा है।
- चंदैनी के कलाकार चिन्तादास हैं।
- ढोला नरवर का राजकुमार और मारू पुंगल देश की राजकुमारी हैं; खलनायिका रेवा।
- भरथरी की गायिका सुरूजबाई खांडे; वाद्य इकतारा-सारंगी।
- फणी गीत व्यंग्य-हास्य पर आधारित है.
स्मरण सूत्र
- सुआ-सुनसान: सुआ में वाद्य नहीं।
- ददरिया-दरबार का राजा: लोकगीतों का राजा।
स्वयं जाँचें
- प्रश्न: सुआ गीत किस पर्व से जुड़ा है? उत्तर: दीपावली।
- प्रश्न: ददरिया की उपाधि क्या है? उत्तर: लोकगीतों का राजा।
- प्रश्न: चंदैनी में चंदा किस स्थान की है? उत्तर: आरंग।
- प्रश्न: ढोला किस स्थान का राजकुमार है? उत्तर: नरवर।
- प्रश्न: भरथरी के गुरु कौन थे? उत्तर: गोरखनाथ।
- प्रश्न: पंथी को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति किसने दिलाई? उत्तर: देवदास बंजारे।
अभ्यास प्रश्न
Q. छत्तीसगढ़ के लोकगीतों का राजा किस गीत को कहा जाता है?
- (A) ददरिया
- (B) भरथरी
- (C) पंथी
- (D) चंदैनी गायन
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध रानी पिंगला की कथा का गायन किस प्रसिद्ध लोकगीत में होता है?
- (A) चंदैनी गीत
- (B) ददरिया गीत
- (C) बांस गीत
- (D) भरथरी
छत्तीसगढ़ राज्य का कौन सा लोकगीत (CG Folk Song) ‘‘प्रेम गीत‘‘ के रूप में जाना जाता है ?
- (A) ददरिया
- (B) भरथरी
- (C) ढोला मारू
- (D) जसगीत
छत्तीसगढ़ी ‘पन्थी लोकनृत्य’ को देश-विदेश में किसने स्थापित किया?
- (A) देवदास बंजारे
- (B) लोरिक चन्दा
- (C) चिन्तादास
- (D) इनमें से कोई नहीं
छत्तीसगढ़ में लोरिक और चंदा की प्रेम कथा का गायन जाना जाता है–
- (A) चंदैनी
- (B) रहस
- (C) नाचा
- (D) पंथी
सुआ गीत किस अवसर के समय गाया जाता है ?
- (A) होली के समय
- (B) नई फसल के स्वागतम में
- (C) दीपावली के समय
- (D) विवाह के समय
‘चंदैनी’ लोक गायन के प्रमुख पात्र कौन है
- (A) रांझा-हीर
- (B) दुष्यंत-शकुन्तला
- (C) लोरिक चंदा
- (D) नल-दमयन्ती
भरथरी गीत का मुख्य वाद्य क्या है?
- (A) सारंगी
- (B) तम्बूरा
- (C) वीणा
- (D) नारंगी
इस राज्य के निम्न लिखित में से किस लोक गीत में ‘सारंगी‘ या ‘इकतारा‘ का संगीत वाद्य के रूप में प्रयोग किया जाता है ?
- (A) भरथरी
- (B) सुआ
- (C) पंथीगीत
- (D) बांसगीत
“संदेशी गीत” में संदेश वाहक होता है
- (A) सुआ
- (B) कबूतर
- (C) चिड़िया
- (D) ये सभी
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (A) - ददरिया को लोकगीतों का राजा कहा गया है।
- (D) - राजा भरथरी और रानी पिंगला की गाथा भरथरी गीत में गाई जाती है।
- (A) - ददरिया को प्रेमगीत/प्रणय गीत (Love Song) कहा गया है।
- (A) - पंथी को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाने का श्रेय देवदास बंजारे को है।
- (A) - चंदैनी लोरिक और चंदा के प्रेम प्रसंग पर आधारित है।
- (C) - सुआ नृत्य/गीत दीपावली के समय का है।
- (C) - चंदैनी के आधार पात्र लोरिक और चंदा हैं।
- (A) - भरथरी के वाद्य इकतारा और सारंगी हैं।
- (A) - भरथरी में इकतारा व सारंगी वाद्य बजते हैं।
- (A) - सुआ के माध्यम से किशोरियाँ प्रेमी को संदेश भेजती हैं।