छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोक-नृत्य: राउत नाचा, सुआ, पंथी, तेराताली, झिरलिटी
लोक-नृत्य पर्व, जाति और पूजा-परंपरा से जुड़े हैं। परीक्षा में अवसर, कलाकार, वाद्य और विशेष रस्म-आधारित प्रश्न आते हैं।
राउत नाचा
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अन्य नाम | गहिरा नाच / अहीरा नाच |
| अवसर | दीपावली उत्सव के दौरान; कार्तिक प्रबोधिनी एकादशी से प्रारंभ होकर एक पखवाड़े तक |
| प्रतीक | भगवान कृष्ण की पूजा के प्रतीक रूप में; कंस वध के बाद विजय के प्रतीक रूप में प्रारंभ (पौराणिक कथा) |
| वाद्य | गड़वा बाजा |
| कलाकार | राउत जाति; केवल पुरुष, पुरुष महिला वेश भी धारण करते हैं |
| विशेष | सजी हुई लाठी लिए टोली में गाना-नाचना; पैरों की थिरकन व लय महत्त्वपूर्ण |
| संदर्भ | दोहे शृंगार, प्रेम, हास्य तथा पौराणिक संदर्भ वाले |
| प्रदर्शन | शौर्य कलात्मक |
| रस्म | मातर त्यौहार; सुहई बाँधना (पलाश व मोर पंख से बनी रस्सीनुमा संरचना, जानवरों के गले में बाँधी जाती है) |
नृत्य में एक व्यक्ति दोहा बोलता है और अन्य दोहराते हुए गड़वा बाजा की धुन पर नाचते हैं।
राउत नाचा महोत्सव
- प्रारंभ: 1978 से
- स्थान: लालबहादुर शास्त्री स्कूल मैदान, बिलासपुर
- अवसर: कार्तिक माह में देवउठनी एकादशी के समय
- वर्तमान में 47वाँ क्रम (2024)
सुआ नृत्य / गौरा नृत्य
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अन्य नाम | गौरा नृत्य / तोता नृत्य; मुकुटधर पाण्डेय ने इसे छ.ग. का गरबा नृत्य कहा |
| अवसर | दीपावली के समय; कार्तिक कृष्ण पक्ष से आरंभ होकर दीवाली के पूर्व तक |
| कलाकार | केवल महिलाएँ |
| विधि | मिट्टी के तोते बनाकर चारों ओर थपड़ी बजाकर नृत्य; दोनों तोते शिव-पार्वती के प्रतीक |
ध्यान दें बॉक्स के अनुसार: द गौर = द बाईसन हार्न नृत्य; गौरा = सुआ नृत्य; गौरा-गौरी = गोंड़ों का एक पर्व। सुआ गीत की पंक्तियाँ 'तरी हरी नहा नरी ना ना रे सुअना' से आरंभ होती हैं।
पंथी नृत्य
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संबंध | संत गुरु घासीदास |
| द्वारा | सतनाम पंथ के अनुयायी |
| शुरुआत | गुरु वंदना से |
| प्रमुख कलाकार | स्व. देवदास बंजारे; राधेश्याम बारले (2021 में पद्मश्री) |
| वाद्य | मांदर व झाँझ |
| विशेष | कलाबाजी, पिरामिड; गति-लय का समन्वय; मुख्य नर्तक गीत की कड़ी उठाता, अन्य दोहराते हुए तेजी से नाचते हैं |
तेराताली नृत्य
- महिला नर्तकों द्वारा।
- पूरे शरीर पर मंजीरा नामक वाद्य बाँधकर नृत्य।
- पूरे अनुष्ठान में ताली/थाप बजाई जाती है।
झिरलिटी नृत्य
- बस्तर क्षेत्र का लोकनृत्य।
- समान्यतः बच्चों द्वारा।
- फटे-पुराने घिसे-पिटे परिधान पहनकर, चेहरे रंगकर, गाँव के सभी घरों के सामने मण्डलियों में नृत्य।
तुलना एवं संबंध
| नृत्य | कलाकार | वाद्य/विशेष |
|---|---|---|
| राउत नाचा | राउत जाति पुरुष | गड़वा बाजा, लाठी |
| सुआ | महिलाएँ | थपड़ी, मिट्टी के तोते |
| पंथी | सतनामी | मांदर-झाँझ, पिरामिड |
| तेराताली | महिलाएँ | मंजीरा |
| झिरलिटी | बच्चे | बस्तर |
याद रखने योग्य बिंदु
- राउत नाचा का एक नाम अहीरा नाच है।
- राउत नाचा महोत्सव 1978 से बिलासपुर में होता है।
- मातर त्यौहार राउत मनाते हैं।
- सुहई पलाश और मोर पंख से बनती है।
- सुआ नृत्य में केवल महिलाएँ भाग लेती हैं।
- सुआ के दो तोते शिव-पार्वती के प्रतीक हैं।
- पंथी घासीदास से संबंधित है।
- पंथी की शुरुआत गुरु वंदना से होती है।
- राधेश्याम बारले 2021 में पद्मश्री।
- तेराताली में मंजीरा बाँधा जाता है।
- झिरलिटी बस्तर का बाल नृत्य है।
स्मरण सूत्र
'राउत-लाठी, सुआ-तोता, पंथी-पिरामिड, तेरा-मंजीरा।'
स्वयं जाँचें
- प्र. राउत नाचा का प्रमुख वाद्य? उ. गड़वा बाजा।
- प्र. सुआ नृत्य कब चलता है? उ. कार्तिक कृष्ण पक्ष से दीवाली से पूर्व तक।
- प्र. पंथी के वाद्य? उ. मांदर व झाँझ।
- प्र. सुहई क्या है? उ. पलाश व मोर पंख की रस्सीनुमा संरचना।
- प्र. राउत नाचा महोत्सव कहाँ होता है? उ. बिलासपुर, लालबहादुर शास्त्री स्कूल मैदान।
- प्र. झिरलिटी कौन करता है? उ. बच्चे।
अभ्यास प्रश्न
राज्य के किस नृत्य में नर्तक कलाबाजी करते है और पिरामिड बनाते है ?
- (A) करमा नृत्य
- (B) पंथी नृत्य
- (C) रावत नाचा
- (D) सुआ नृत्य
बिलासपुर में “राउत नाच महोत्सव” लोक नृत्य उत्सव का आयोजन कब से किया जा रहा है?
- (A) 1973
- (B) 1974
- (C) 1976
- (D) 1978
सन् 1978 से इस राज्य के किस स्थान पर राउत नाच महोत्सव आयोजित होता है ?
- (A) रायपुर
- (B) बिलासपुर
- (C) जगदलपुर
- (D) राजनांदगाँव
इस राज्य का निम्नलिखित में से कौन-सा लोकनृत्य विशेष रूप से दीवाली के अवसर पर पूर्णतया महिलाओं एवं बालिकाओं द्वारा किया जाता है ?
- (A) हरेली
- (B) करमा
- (C) पंथी
- (D) सुआ
राउत नाचा किस उत्सव पर गाया जाता है?
- (A) होली
- (B) पोला
- (C) दीपावली
- (D) विवाह
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (B) - पंथी नृत्य में कलाबाजी और पिरामिड बनाए जाते हैं।
- (D) - राउत नाचा महोत्सव 1978 से बिलासपुर में होता है।
- (B) - राउत नाचा महोत्सव 1978 से बिलासपुर में आयोजित होता है।
- (D) - सुआ नृत्य दीपावली के समय केवल महिलाएँ करती हैं।
- (C) - राउत नाचा दीपावली उत्सव के दौरान होता है।