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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 8
लोक-नृत्य: राउत नाचा, सुआ, पंथी, तेराताली, झिरलिटी

छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोक-नृत्य: राउत नाचा, सुआ, पंथी, तेराताली, झिरलिटी

लोक-नृत्य पर्व, जाति और पूजा-परंपरा से जुड़े हैं। परीक्षा में अवसर, कलाकार, वाद्य और विशेष रस्म-आधारित प्रश्न आते हैं।

राउत नाचा

बिंदुविवरण
अन्य नामगहिरा नाच / अहीरा नाच
अवसरदीपावली उत्सव के दौरान; कार्तिक प्रबोधिनी एकादशी से प्रारंभ होकर एक पखवाड़े तक
प्रतीकभगवान कृष्ण की पूजा के प्रतीक रूप में; कंस वध के बाद विजय के प्रतीक रूप में प्रारंभ (पौराणिक कथा)
वाद्यगड़वा बाजा
कलाकारराउत जाति; केवल पुरुष, पुरुष महिला वेश भी धारण करते हैं
विशेषसजी हुई लाठी लिए टोली में गाना-नाचना; पैरों की थिरकन व लय महत्त्वपूर्ण
संदर्भदोहे शृंगार, प्रेम, हास्य तथा पौराणिक संदर्भ वाले
प्रदर्शनशौर्य कलात्मक
रस्ममातर त्यौहार; सुहई बाँधना (पलाश व मोर पंख से बनी रस्सीनुमा संरचना, जानवरों के गले में बाँधी जाती है)

नृत्य में एक व्यक्ति दोहा बोलता है और अन्य दोहराते हुए गड़वा बाजा की धुन पर नाचते हैं।

राउत नाचा महोत्सव

  • प्रारंभ: 1978 से
  • स्थान: लालबहादुर शास्त्री स्कूल मैदान, बिलासपुर
  • अवसर: कार्तिक माह में देवउठनी एकादशी के समय
  • वर्तमान में 47वाँ क्रम (2024)

सुआ नृत्य / गौरा नृत्य

बिंदुविवरण
अन्य नामगौरा नृत्य / तोता नृत्य; मुकुटधर पाण्डेय ने इसे छ.ग. का गरबा नृत्य कहा
अवसरदीपावली के समय; कार्तिक कृष्ण पक्ष से आरंभ होकर दीवाली के पूर्व तक
कलाकारकेवल महिलाएँ
विधिमिट्टी के तोते बनाकर चारों ओर थपड़ी बजाकर नृत्य; दोनों तोते शिव-पार्वती के प्रतीक

ध्यान दें बॉक्स के अनुसार: द गौर = द बाईसन हार्न नृत्य; गौरा = सुआ नृत्य; गौरा-गौरी = गोंड़ों का एक पर्व। सुआ गीत की पंक्तियाँ 'तरी हरी नहा नरी ना ना रे सुअना' से आरंभ होती हैं।

पंथी नृत्य

बिंदुविवरण
संबंधसंत गुरु घासीदास
द्वारासतनाम पंथ के अनुयायी
शुरुआतगुरु वंदना से
प्रमुख कलाकारस्व. देवदास बंजारे; राधेश्याम बारले (2021 में पद्मश्री)
वाद्यमांदर व झाँझ
विशेषकलाबाजी, पिरामिड; गति-लय का समन्वय; मुख्य नर्तक गीत की कड़ी उठाता, अन्य दोहराते हुए तेजी से नाचते हैं

तेराताली नृत्य

  • महिला नर्तकों द्वारा।
  • पूरे शरीर पर मंजीरा नामक वाद्य बाँधकर नृत्य।
  • पूरे अनुष्ठान में ताली/थाप बजाई जाती है।

झिरलिटी नृत्य

  • बस्तर क्षेत्र का लोकनृत्य।
  • समान्यतः बच्चों द्वारा।
  • फटे-पुराने घिसे-पिटे परिधान पहनकर, चेहरे रंगकर, गाँव के सभी घरों के सामने मण्डलियों में नृत्य।

तुलना एवं संबंध

नृत्यकलाकारवाद्य/विशेष
राउत नाचाराउत जाति पुरुषगड़वा बाजा, लाठी
सुआमहिलाएँथपड़ी, मिट्टी के तोते
पंथीसतनामीमांदर-झाँझ, पिरामिड
तेरातालीमहिलाएँमंजीरा
झिरलिटीबच्चेबस्तर

याद रखने योग्य बिंदु

  • राउत नाचा का एक नाम अहीरा नाच है।
  • राउत नाचा महोत्सव 1978 से बिलासपुर में होता है।
  • मातर त्यौहार राउत मनाते हैं।
  • सुहई पलाश और मोर पंख से बनती है।
  • सुआ नृत्य में केवल महिलाएँ भाग लेती हैं।
  • सुआ के दो तोते शिव-पार्वती के प्रतीक हैं।
  • पंथी घासीदास से संबंधित है।
  • पंथी की शुरुआत गुरु वंदना से होती है।
  • राधेश्याम बारले 2021 में पद्मश्री।
  • तेराताली में मंजीरा बाँधा जाता है।
  • झिरलिटी बस्तर का बाल नृत्य है।

स्मरण सूत्र

'राउत-लाठी, सुआ-तोता, पंथी-पिरामिड, तेरा-मंजीरा।'

स्वयं जाँचें

  1. प्र. राउत नाचा का प्रमुख वाद्य? उ. गड़वा बाजा।
  2. प्र. सुआ नृत्य कब चलता है? उ. कार्तिक कृष्ण पक्ष से दीवाली से पूर्व तक।
  3. प्र. पंथी के वाद्य? उ. मांदर व झाँझ।
  4. प्र. सुहई क्या है? उ. पलाश व मोर पंख की रस्सीनुमा संरचना।
  5. प्र. राउत नाचा महोत्सव कहाँ होता है? उ. बिलासपुर, लालबहादुर शास्त्री स्कूल मैदान।
  6. प्र. झिरलिटी कौन करता है? उ. बच्चे।

अभ्यास प्रश्न

  1. राज्य के किस नृत्य में नर्तक कलाबाजी करते है और पिरामिड बनाते है ?

    • (A) करमा नृत्य
    • (B) पंथी नृत्य
    • (C) रावत नाचा
    • (D) सुआ नृत्य
  2. बिलासपुर में “राउत नाच महोत्सव” लोक नृत्य उत्सव का आयोजन कब से किया जा रहा है?

    • (A) 1973
    • (B) 1974
    • (C) 1976
    • (D) 1978
  3. सन् 1978 से इस राज्य के किस स्थान पर राउत नाच महोत्सव आयोजित होता है ?

    • (A) रायपुर
    • (B) बिलासपुर
    • (C) जगदलपुर
    • (D) राजनांदगाँव
  4. इस राज्य का निम्नलिखित में से कौन-सा लोकनृत्य विशेष रूप से दीवाली के अवसर पर पूर्णतया महिलाओं एवं बालिकाओं द्वारा किया जाता है ?

    • (A) हरेली
    • (B) करमा
    • (C) पंथी
    • (D) सुआ
  5. राउत नाचा किस उत्सव पर गाया जाता है?

    • (A) होली
    • (B) पोला
    • (C) दीपावली
    • (D) विवाह

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (B) - पंथी नृत्य में कलाबाजी और पिरामिड बनाए जाते हैं।
  2. (D) - राउत नाचा महोत्सव 1978 से बिलासपुर में होता है।
  3. (B) - राउत नाचा महोत्सव 1978 से बिलासपुर में आयोजित होता है।
  4. (D) - सुआ नृत्य दीपावली के समय केवल महिलाएँ करती हैं।
  5. (C) - राउत नाचा दीपावली उत्सव के दौरान होता है।
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