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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 24
छत्तीसगढ़ के व्यंजन (कलेवा)

छत्तीसगढ़ के व्यंजन (कलेवा)

छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजन मुख्यतः चावल आटा, गेहूँ आटा, बेसन और मैदा से बनते हैं। छत्तीसगढ़ी रसोई के पकवान नमकीन, मीठे और दोनों रूप वाले होते हैं। परीक्षा में व्यंजन का कच्चा माल, स्वाद और अवसर पूछे जाते हैं। (एक पृष्ठ-समूह के अनुसार कुछ व्यंजनों के अवसर/विवरण भिन्न हैं; उन्हें संबंधित पंक्ति और "स्रोत के अलग-अलग विवरण" में दिया गया है।)

चावल आटे से बने व्यंजन

नामसामग्रीस्वादअवसर/विशेष
बासीपके चावल (भात) और माँड़नमकीनरात के बचे भात को पानी में भिगोकर खाया जाता है
चीलाचावल आटानमकीन (नमक वाला = नुनहा; गुड़ वाला = गुरहा, मीठा)हरतालिका पर्व
चौसेलाचावल आटानमकीन (दूसरे मूल पाठ में नमकीन व मीठा दोनों)सामान्य अवसर; हरेली, पोरा और छेरछेरा में भी बनता है
पिड़ियाचावल आटा व शक्करमीठाराजीव लोचन मंदिर में प्रसाद
चाँउर कुसलीचावल आटामीठातीजा (दूसरे मूल पाठ में कुसली = गुझिया)
दूध फराचावल आटा, दूधमीठा-
फराचावल आटानमकीन (दूसरे मूल पाठ में नमकीन व मीठा दोनों)सामान्य अवसर
हथफोड़वाचावल आटानमकीन-
खपुर्री रोटीचावल आटा, पका चावलनमकीननाश्ते में
मुठियाचावल आटा, पका चावलनमकीन-
अंगाकर/पानारोटीचावल आटा, पका चावलनमकीनपत्तों से लिपटी मोटी रोटी
महेरीपके हुए चावलमट्ठा (खट्टा)-
अईरसाचावल आटा + गुड़मीठादीपावली व होली
देहरौरी (देशी रसगुल्ला)दरदरे चावल आटा + गुड़ (दूसरे मूल पाठ में: दरदरा चावल, चाशनी)मीठारसगुल्ले का देसी रूप
तसमई (खीर जैसा)दूध, चावल, शक्करमीठासामान्य अवसर

गेहूँ आटे से बने व्यंजन

नामसामग्रीस्वादअवसर
गुलगुलागेहूँ आटा + गुड़/शक्करमीठाअतिथि सत्कार
सोहारीगेहूँ आटानमकीनविवाह, भोज; पतली बड़ी पूरी
खपुर्रीगेहूँ आटानमकीनसादी सेंकी हुई रोटी
बोबरागेहूँ आटा + गुड़/शक्करमीठामातृ नवमी को बनाते हैं

चावल एवं गेहूँ आटे के मिश्रण से

नामसामग्रीस्वादअवसर
खुरमीगेहूँ + चावल आटामीठातीजा-पोला
पपची/पपचचावल + गेहूँ आटा एवं गुड़मीठाशादी के अवसर

बेसन / दाल से बने व्यंजन

नामसामग्रीस्वादअवसर
ठेठरीचना बेसननमकीनतीजा-पोला
भजियाचना बेसननमकीनअतिथि सत्कार
करी/मोटा सेवबेसननमकीन-
करी लाडूबेसन, गुड़मीठाविवाह, मृत्यु भोज
बूंदी लाडूबेसन, शक्करमीठा-
बरा/बड़ाउड़द दालनमकीनसामान्य, पितर, शादी-ब्याह (विवाह व पितर में)
मुंगौड़ी बड़ामूंग दालनमकीन-

मैदा से बने व्यंजन

नामसामग्रीस्वादअवसर
गुझियामैदा, सूजी आटा, शक्करमीठातीजा (कुसली को भी गुझिया कहा गया है)
कटवा रोटी/काटेमैदामीठा, नमकीन-

अन्य व्यंजन

नामसामग्रीस्वादअवसर
चकोलीचावल का मुरकूनमकीन-
बिनसापेऊस + गुड़/शक्कर (दूसरे मूल पाठ में: फटे दूध से)मीठा-
लाटा (देशी लालीपाप)इमली, नमक, मिर्च, धनिया आदिनमकीनसामान्य अवसर
जौ का लड्डूजौ का आटामीठाबहुरा चौथ
कथिलाचावल, मूंग दालनमकीनकनकी की कढ़ी
बिजौरीतिल + रखिया बीजनमकीनसामान्य अवसर
बताशाशक्करमीठाहोली
बोइर मुठियाबेरतीखा-
बफोरीअरबी, बेसननमकीन-
तिखुरतिखुर कंद, शक्करमीठाउपवास
इड़हरकोचई पत्ते, पीठी युक्त भजियाखट्टा-

पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन गढ़कलेवा रायपुर एवं बिलासपुर में है। पिड़िया राजीव लोचन मंदिर में प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है।

स्रोत के अलग-अलग विवरण

  • एक मूल पाठ में चौसेला और फरा केवल नमकीन हैं, दूसरे पर दोनों (नमकीन व मीठे) रूप में।
  • एक मूल पाठ में बिनसा की सामग्री पेऊस + गुड़/शक्कर है, दूसरे पर फटे दूध से बना।
  • एक मूल पाठ में चाँउर कुसली चावल आटे का मीठा व्यंजन (तीजा) है, दूसरे पर कुसली = गुझिया।
  • देहरौरी: एक पर दरदरे चावल आटे + गुड़ से, दूसरे पर दरदरे चावल + चाशनी से।

तुलना एवं संबंध

पर्वव्यंजन
तीजा-पोलाखुरमी, ठेठरी
हरतालिकाचीला
दीपावली-होलीअईरसा
होलीबताशा
बहुरा चौथजौ का लड्डू
मातृ नवमीबोबरा
हरेली, पोरा, छेरछेराचौसेला
सामग्रीव्यंजन
बेसनठेठरी
उड़द दालबरा
गेहूँ + चावल का आटाखुरमी
चावल आटा + गुड़अईरसा
दरदरा चावल + चाशनीदेहरौरी
फटा दूधबिनसा

मूल पाठ में खुरमी की सामग्री में गेहूँ + चावल आटा है, पर तीजा-पोला के प्रसंग में उसे अलग सारणी में रखा गया है।

याद रखने योग्य बिंदु

  • बासी रात के बचे भात से बनती है।
  • पिड़िया राजीव लोचन मंदिर का प्रसाद।
  • देहरौरी को देशी रसगुल्ला कहा गया है।
  • तसमई = खीर।
  • लाटा = देशी लालीपाप।
  • तिखुर उपवास में।
  • अंगाकर पत्तों में लिपटी मोटी रोटी।
  • गढ़कलेवा रायपुर व बिलासपुर में।
  • महेरी खट्टी है।
  • चीला: नमक वाला नुनहा, गुड़ वाला गुरहा।
  • चौसेला हरेली, पोरा और छेरछेरा में बनता है।
  • कुसली को गुझिया कहा गया है; सोहारी पतली बड़ी पूरी है।

स्मरण सूत्र

‘ठे-बेसन, खु-मिश्रण’: ठेठरी बेसन की, खुरमी चावल-गेहूँ की।

चीला: "नमक-नुनहा, गुड़-गुरहा।" सामग्री: "ठेठरी-बेसन, बरा-उड़द, अइरसा-गुड़।"

स्वयं जाँचें

  1. प्र. देशी रसगुल्ला किसे कहा गया है? उ. देहरौरी।
  2. प्र. जौ का लड्डू कब बनता है? उ. बहुरा चौथ पर।
  3. प्र. पिड़िया कहाँ प्रसाद है? उ. राजीव लोचन मंदिर।
  4. प्र. तसमई क्या है? उ. खीर।
  5. प्र. गुड़ वाला चीला क्या कहलाता है? उ. गुरहा (नमक वाला नुनहा)।
  6. प्र. चौसेला किन अवसरों पर बनता है? उ. हरेली, पोरा और छेरछेरा में।
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