ऐतिहासिक, करुणा एवं जाति संबंधी लोकगीत
इस अध्याय में गोपल्ला गीत, बांस गीत, नचौनी, बसदेवा तथा बीरम और देवार गीत हैं। ये गीत वीरता, वियोग और जातिगत पेशे से जुड़े हैं।
ऐतिहासिक लोकगीत: गोपल्ला गीत
- संबंध: कल्चुरी शासक कल्याण साय।
- इसमें गोपालराय मल नामक बहादुर व्यक्ति की वीरता का उल्लेख है, जिन्होंने कल्याण साय को मुगल दरबार की हुजूरी से मुक्ति दिलाई और उनके मान-मर्तबे में वृद्धि की।
करुणा एवं वेदना संबंधी गीत
| बिंदु | बांस गीत |
|---|---|
| गायन | राऊत जाति द्वारा |
| अवसर | दुःख के अवसर |
| गाथागायन | शीत बसंत, मोरध्वज एवं कर्ण |
| प्रधानता | वियोग शृंगार |
| पात्र | रागी, गायक और वादक |
| वाद्य | बांसुरी के समान बनाया वाद्ययंत्र: बांस (मोहराली) |
| गीतकार | केजूराम यादव (ग्राम बासीन), नकुल यादव (खैरागढ़) |
नचौनी गीत नारी के विरह-वेदना और संयोग-वियोग का गीत है।
जाति से संबंधित गीत
बसदेवा गीत
- संबंध: श्रवण कुमार। पौराणिक सरवन गाथा में श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को काँवर में बैठाकर तीर्थयात्रा कराते हैं, किंतु दशरथ के बाण से उनकी मृत्यु हो जाती है।
- गायन: बसदेवा जाति द्वारा।
- उपनाम: जय-गंगान या हरबोला।
बीरम गीत एवं देवार गीत
- देवार जाति द्वारा भिक्षा माँगते समय गाया जाता है।
- देवार स्त्रियों द्वारा गाए जाने वाले गीत बीरम गीत हैं; बीच-बीच में स्त्रियाँ चूड़ियाँ खनकाती हैं।
- घुमक्कड़ स्वभाव के कारण विभिन्न क्षेत्रों की गाथाएँ: चंदा रउताइन, नगेसर कइना, दसमत कइना, सीताराम नायक की पंडवानी (सीताराम बंजारा समुदाय से)।
- गीतकार: रेखा सिंह एवं बद्रीसिंह कटारिया।
तुलना एवं संबंध
| गीत | जाति | विषय |
|---|---|---|
| बांस गीत | राऊत | वियोग, दुःख |
| बसदेवा | बसदेवा | श्रवण कुमार |
| बीरम/देवार | देवार | भिक्षा गाते समय, विविध गाथाएँ |
| गोपल्ला | - | गोपालराय मल और कल्याण साय |
ध्यान दें: मूल पाठ में मड़ई और बांस गीत दोनों राऊत जाति से जुड़े बताए गए हैं।
याद रखने योग्य बिंदु
- गोपल्ला गीत कल्चुरी शासक कल्याण साय से संबंधित है।
- गोपालराय मल ने कल्याण साय को मुगल दरबार की हुजूरी से मुक्त कराया।
- बांस गीत राऊत जाति गाती है, दुःख के अवसर पर।
- बांस गीत में वियोग शृंगार प्रधान है।
- बांस वाद्य को मोहराली कहते हैं।
- बांस गीतकार: केजूराम यादव (बासीन), नकुल यादव (खैरागढ़)।
- नचौनी गीत नारी की विरह-वेदना का है।
- बसदेवा गीत श्रवण कुमार की कथा से जुड़ा है, उपनाम हरबोला।
- बीरम गीत देवार स्त्रियाँ गाती हैं।
- देवार गाथाओं में सीताराम नायक की पंडवानी भी है।
स्मरण सूत्र
- बांस-राऊत-मोहराली।
- बसदेवा-श्रवण-हरबोला।
स्वयं जाँचें
- प्रश्न: गोपल्ला गीत किस शासक से जुड़ा है? उत्तर: कल्याण साय।
- प्रश्न: बांस गीत कौन गाता है? उत्तर: राऊत जाति।
- प्रश्न: बसदेवा गीत का उपनाम क्या है? उत्तर: जय-गंगान या हरबोला।
- प्रश्न: बीरम गीत कौन गाता है? उत्तर: देवार स्त्रियाँ।
- प्रश्न: नचौनी किसका गीत है? उत्तर: नारी के विरह-वेदना का।
- प्रश्न: बांस गीत में कौन-सा रस प्रधान है? उत्तर: वियोग शृंगार।
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