छत्तीसगढ़ के प्रमुख आभूषण
पारंपरिक गहनों को शरीर के अंग के अनुसार याद किया जाता है। परीक्षा में अंग-गहना मिलान और पाँव से सिर के क्रम वाले प्रश्न आते हैं।
अंग-अनुसार आभूषण
| अंग | आभूषण |
|---|---|
| पैर | बिच्छवा, पैरी/पायल/साँटी, लच्छा, टोड़ा, चुटकी, देवरहा, कटकर, नेवरी, गठिया झाँझर |
| कमर | करधन/करधनी (चाँदी), कमरपट्टा |
| उंगली | मुंदरी, नग, छल्ला |
| कलाई | ऐंठी, चुरी, कंकनी, पटा, पटला, बनुरिया |
| बाँह | बाजूबंद, बहुँटा, पहुंची (नांगमोरी), हरईया, केयुर, खग्गा |
| गला | मुंगामाला, सुतिया/सुता/सुर्रा, दुलरी, तिलरी, हंसली, पुतरी, ढोलकी, ताबीज, मोहर, कलदार, कंठा, हमेल, बंधा, फुलसंकरी, औरीदाना, पंचलड़, बिचौली, कटवा, बजरबट्टू |
| कान | खिनवा, तरकी, लुरकी, तितरी, खूंटी, लवंग, खोटिला, करनफूल, ढार, ऐरिंग, बाली, पूलसंकरी |
| नाक | खेनवा, बुलाक, बेसर, लवंगफूल, नथ, नथनी, फुल्ली, रवाह, सरजा, गोलफूल |
| माथा | टिकली, बिंदिया |
| सिर | मांगमोती, पटिया, शीशफुल, लाछा, बेनी, कड़ई, कंघी, खोचनी, (बाल में) ककवा, छाबा |
चित्र में कुछ और नाम भी दिखते हैं: सिंगी, बेनीफूल/जंगलीफूल, कौड़िया, झूमका, द्विलरी, सकरी, कौड़ी आभूषण, कोतरी, बिछिया। चित्र में बाँह के नीचे बहुँटा-पहुंची तथा नांगमोरी अलग-अलग लिखे हैं, जबकि सारणी में पहुंची के आगे नांगमोरी कोष्ठक में है। यह मूल पाठ का अंतर है। (कुछ नाम सारणी में छपे रूप के अनुसार लिखे गए हैं।)
बच्चों के गहने
कुंदरूफर, गठुला, ताबीज, ठुमरा, चन्दरमा।
महिला वस्त्र
- लुगरा: साड़ी।
- पोलखा: ब्लाउज।
- साया: साड़ी के नीचे कमर में पहना जाने वाला वस्त्र।
गोदना
- जनजातीय स्त्रियाँ पवित्रता की भावना एवं सौंदर्य के लिए गोदना गोदवाती हैं।
- जनजातीय आभूषणों पर गोत्र चिह्न अंकित करने की परंपरा है।
- लोकगीतों में आभूषणों का रोचक उल्लेख है, जैसे सुआ गीत की पंक्ति: ‘दे तो दाई तोर गोड़ के पैरी सुआ नाचे बर जाबोन’।
तुलना एवं संबंध: समोच्चारणात्मक (मिलते-जुलते नाम)
| कान | नाक / अन्य |
|---|---|
| कान-खिनवा | नाक-खेनवा |
| कान-तितरी | गला-तिलरी |
| बाँह-पहुंची | गला-पुतरी |
| कान-लवंग | नाक-लवंगफूल |
| गला-सकरी | कान-पूलसंकरी |
| सिर-पटिया | कलाई-पटा, पटला |
एक पूर्व-प्रश्न: पाँव से सिर के क्रम में कंकनी (कलाई), टोड़ा (पैर), सूर्रा (गला), पटिया (सिर) को सही क्रम में रखें तो उत्तर है टोड़ा, कंकनी, सूर्रा, पटिया।
याद रखने योग्य बिंदु
- करधनी कमर का चाँदी का गहना है।
- टोड़ा पैर का गहना है।
- पहुंची बाँह का।
- पटिया सिर का, खोचनी भी सिर का।
- खिनवा कान का; खेनवा नाक का।
- फुल्ली नाक का।
- तिलरी, पुतरी, हंसली, सुतिया गले के।
- लुगरा साड़ी, पोलखा ब्लाउज।
- गोदना पवित्रता और सौंदर्य हेतु।
- जनजातीय गहनों पर गोत्र चिह्न।
स्मरण सूत्र
‘खिनवा कान, खेनवा नाक’; ‘पा-क-सू-प’ = पाँव, कलाई, सूर्रा (गला), पटिया (सिर)।
स्वयं जाँचें
- प्र. लुगरा क्या है? उ. साड़ी।
- प्र. पोलखा क्या है? उ. ब्लाउज।
- प्र. साया कहाँ पहना जाता है? उ. साड़ी के नीचे कमर में।
- प्र. करधनी कहाँ पहनी जाती है? उ. कमर में।
- प्र. नाक का एक गहना बताइए। उ. फुल्ली।
- प्र. गोदना क्यों गोदवाया जाता है? उ. पवित्रता व सौंदर्य के लिए।
अभ्यास प्रश्न
'मोहर' आभूषण शरीर के किस अंग में पहना जाता है?
- (A) कलाई
- (B) गला
- (C) कान
- (D) नाक
‘बनवरिया’ कहाँ पहना जाता है ?
- (A) गला
- (B) नाक
- (C) कान
- (D) कलाई
‘साँटी’ नाम का आभूषण शरीर के किस हिस्से में पहना जाता है ?
- (A) गले में
- (B) पैर में
- (C) क़लाई में
- (D) बाँह में
कौन सा “छत्तीसगढ़ आभूषण (CG Jewellery)” गले में पहनते हैं ?
- (A) नांगमोरी
- (B) ऐठी
- (C) सुतिया
- (D) तरकी
आदिवासी समाज में ‘बेसर’ नामक आभूषण है।
- (A) नाक में पहनने का
- (B) सिर पर धारण करने का
- (C) हाथ में पहनने का
- (D) इनमें से कोई नहीं
छत्तीसगढ़ में ‘हमेल’, ‘दुलरी’एवं ‘तिजरी’आदि क्या हैं?
- (A) पकवान
- (B) आभूषण
- (C) गोदना
- (D) कहानी
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (B) - मोहर गले का आभूषण है।
- (D) - बनुरिया कलाई का आभूषण है।
- (B) - साँटी पैर का आभूषण है।
- (C) - सुतिया गले का आभूषण है।
- (A) - बेसर नाक का आभूषण है।
- (B) - हमेल, दुलरी आदि गले के आभूषण हैं।