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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 22
छत्तीसगढ़ की लोक-चित्रकला एवं चित्रकार

छत्तीसगढ़ की लोक-चित्रकला

लोक-चित्र प्रायः पर्व, पूजा और विवाह के अवसर पर दीवारों, आँगन और मिट्टी के बर्तनों पर बनाए जाते हैं। परीक्षा में कला का नाम, अवसर, बनाने वाले और माध्यम (गोबर, चावल आटा, मिट्टी) पूछे जाते हैं।

प्रमुख लोक-चित्रकलाएँ

कलाअवसरद्वाराविशेष
सवनाहीसावन में हरेली के अवसर परमहिलाएँघर के मुख्य द्वार की दीवारों पर गोबर से विविध चित्र
गोबर चित्रकारीदीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजामहिलाएँअन्न-धन भंडार की समृद्धि हेतु प्रायः धान की कोठी में अनेक चित्र
हरतालिकातीजा पर्व, शिव-पार्वती पूजा-पूजा के अवसर पर बनाया जाता है
बालपुर चित्रकला-चितेर जनजातिपौराणिक चित्र
चौक पुरनाविभिन्न अनुष्ठानिक कार्यक्रम-चावल के आटे से बेल-बूटे व पदचिह्न; परछी (बरामदा) से गली तक; अब रंगोली को प्राथमिकता बढ़ रही है
आठे कन्हैयाजन्माष्टमी-घर की दीवार पर 8 पुतलिका बनाकर पूजा
नोहडोरा (उरेखण कला)नए घर में प्रवेश से पूर्व-दीवारों पर मिट्टी की कलात्मक कृतियाँ, जीव-जन्तु, बेल-बूटे; वर्षों टिकती हैं; छत्तीसगढ़ी में ‘नोहडोरा डालना’
पिथौरा-भील जनजातिउद्गम मध्यप्रदेश का पिथौरा क्षेत्र; घरों की दीवारों, कागज़, कपड़ों पर
नारदशिल्प--चिड़ियों, साँपों, हाथियों, घोड़ों आदि के चित्र

अन्य उल्लेख: त्यौहारों और विवाह पर दीवारों पर अनेक प्रकार के चित्र बनते हैं; मिट्टी के बर्तनों पर भी यह कला आदिवासियों के घरों में दिखती है।

छत्तीसगढ़ के चित्रकार

  • गणेश राम मिश्र: रायपुर में रहकर चित्र-साधना; चित्र माधुरी तथा शारदा जैसी पत्रिकाओं में छपे।
  • लक्ष्मीनारायण पचौरी: धमतरी जिले के प्रमुख चित्रकार; आचार्य नंदलाल बसु की शैली में चित्रांकन; कला में बसु का प्रतिबिम्ब; 1966 ई. में शांति निकेतन से चित्रकला की शिक्षा प्राप्त की।
  • अन्य: कल्याण प्रसाद शर्मा, ए. के. मुखर्जी, निरंजन महावर, ए. के. दानी।

तुलना एवं संबंध

सामग्रीकला
गोबरसवनाही, गोबर चित्रकारी
चावल का आटाचौक पुरना
मिट्टीनोहडोरा

याद रखने योग्य बिंदु

  • सवनाही हरेली पर महिलाएँ गोबर से बनाती हैं।
  • गोबर चित्रकारी गोवर्धन पूजा पर।
  • बालपुर कला चितेर जनजाति की।
  • चौक पुरना चावल-आटे से; रंगोली आगे आ रही है।
  • आठे कन्हैया में 8 पुतलिकाएँ।
  • नोहडोरा नए घर से पहले।
  • पिथौरा भील; उद्गम मध्यप्रदेश।
  • पचौरी धमतरी के, नंदलाल बसु शैली।
  • गणेश राम मिश्र के चित्र माधुरी, शारदा में।

स्मरण सूत्र

‘गो-बर = सवनाही + गोवर्धन; चौ-क = चावल; नो-मिट्टी’।

स्वयं जाँचें

  1. प्र. सवनाही कब बनती है? उ. सावन में हरेली पर।
  2. प्र. बालपुर चित्रकला किसकी है? उ. चितेर जनजाति की।
  3. प्र. पिथौरा किस जनजाति की कला है? उ. भील।
  4. प्र. चौक पुरना किससे बनता है? उ. चावल के आटे से।
  5. प्र. पचौरी ने 1966 में कहाँ से शिक्षा ली? उ. शांति निकेतन।
  6. प्र. नोहडोरा कब बनाया जाता है? उ. नए घर में प्रवेश से पहले।
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