पर्व-त्योहार एवं ऋतु संबंधी लोकगीत
छत्तीसगढ़ के लोकगीत त्योहारों से गहरे जुड़े हैं: भोजली, जंवारा, गौरा, सेवा, फाग, सवनाही, मड़ई, नागमथ, डंडा और छेरछेरा। यहाँ हर गीत का अवसर, समुदाय और पूजा-विधि तालिका में मिलेगी।
भोजली गीत
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अवसर | रक्षाबंधन के दूसरे दिन, भादो माह के कृष्णपक्ष प्रथमा |
| उल्लेख | गंगा का नाम बार-बार आता है |
| गीत | आ हो देवी गंगा, ओ देवी लहर तुरंगा |
| संबंध | भूमि-जल से संबंधित गीत |
| अन्य प्रचलन | बुंदेलखंड और उत्तरप्रदेश क्षेत्र में कजली पर्व |
| पूजा | भोजली को गंगा-देवी व साक्षात अन्नपूर्णा मानकर पूजा |
| विशेष | महिलाएँ टोकरी में खाद-मिट्टी रखकर धान, गेहूँ, जौ या उड़द के दाने बोती हैं; पौधे उगने पर उसे भोजली कहते हैं; अंकुरण से विसर्जन तक के गीत भोजली गीत |
जंवारा गीत
- चैत्र नवरात्रि में जंवारा बोया और निकाला जाता है; गीत में दुर्गा देवी के रूप का नाम बार-बार आता है।
- बोए जाने वाले बीजों को एक दिन पहले भिगोकर रखा जाता है, जिसे बिरही कहते हैं।
- नवरात्रि के प्रथम दिन बोया जाता है और नवमी के दिन विसर्जन होता है।
| आधार | जसगीत | पचरा गीत | विसर्जन गीत |
|---|---|---|---|
| अन्य नाम | एक प्रकार का देवी पूजन गीत | उत्था गीत | उम्हा गीत |
| अवधि | बिरही डालने के दिन से सप्तमी तक | नवरात्रि के प्रथम दिवस से सप्तमी तक | अष्टमी के हवन के उपरांत |
| उल्लेख | देवी का यशोगान, स्तुति, महत्ता, शृंगार, भोजन, निवास, वाहन | देवी के वीर भावों का वर्णन | स्तुति, आभार प्रदर्शन, विदाई एवं विसर्जन |
गौरा / गौरी-गौरा गीत
- अवसर: दीवाली; गोंड समुदाय, प्रमुखतः गोंड स्त्रियों का गीत।
- शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर विवाह की रस्म पूरी कर पूजा-अर्चना की जाती है।
- गौरा चौरा नामक स्थान पर मूर्ति प्रतिष्ठित कर महिलाएँ गौरा जगाने का गीत गाती हैं।
- विशेष राग-रागिनी की धुन में मातृ शक्ति की स्तुति सुनकर श्रोता मुग्ध होकर नाचने लगते हैं, जिसे ‘झुपना’ कहते हैं।
- ‘अँखरा’ गीत में करुणा जागती है; ‘कड़इया’ गीत में नारी शक्ति अर्धांगिनी की महत्ता का बखान होता है।
- आरंभ में देवी-देवताओं को जगाने का गीत गाते हैं, उसी प्रकार विसर्जन के बाद सुलाने का गीत गाते हैं।
सेवा, फाग और सवनाही गीत
| गीत | अवसर/समय | अन्य तथ्य |
|---|---|---|
| सेवा गीत | नवरात्रि में देवी पूजा पर | देवी सेवा का गीत |
| फाग गीत | फाल्गुन माह (होली), बसंत ऋतु | प्रधानता शृंगार रस; गीतकार अरुण यादव; राधा-कृष्ण का वर्णन |
| सवनाही गीत | सावन माह, वर्षा ऋतु का प्रमुख गीत | आषाढ़ के अंतिम रविवार या सावन के प्रथम रविवार को सवनाही त्योहार; जादू-टोना और बीमारी से गाँव के लोगों व पशुओं की सुरक्षा हेतु बैगा द्वारा सवनाही देवी की पूजा; घर की दीवारों पर गोबर से आकृतियाँ बनाई जाती हैं |
मड़ई, नागमथ, डंडा और छेरछेरा
| गीत | अवसर | विशेष |
|---|---|---|
| मड़ई गीत | कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक | राऊत जाति के पुरुष गाते हैं; मड़ई मयूर पंख व कौड़ियों से सजा बांस का स्तंभ; ढोल वाद्य; गो-पूजन का त्योहार; श्रीकृष्ण के गोवर्धन धारण व इंद्र का मान-मर्दन के बाद गोप-ग्वालों के आनंद उत्सव से आविर्भाव माना जाता है |
| नागमथ | नागपंचमी | नागदेव की पूजा-अर्चना |
| डंडा गीत | कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी) से फाल्गुन पूर्णिमा तक | छत्तीसगढ़ का रासगीत; युवक-युवतियाँ वृत्ताकार घूम-घूम कर हाथ में छोटी डंडा लिए नाचते हैं; पहले देवता का सुमिरन, फिर गीत |
| छेरछेरा | पौष पूर्णिमा पर छेरछेरा पर्व | पंक्ति: छेरिक छेरा छेर बरकनीन छेर छेरा, माई कोठी के धान ला हेर हेरा |
तुलना एवं संबंध
| गीत | संबद्ध देव/तत्व | समुदाय/द्वारा |
|---|---|---|
| भोजली | गंगा, अन्नपूर्णा | महिलाएँ |
| जंवारा | दुर्गा | नवरात्रि पूजक |
| गौरा | शिव-पार्वती | गोंड स्त्रियाँ |
| सवनाही | सवनाही देवी | बैगा |
| मड़ई | गो-पूजन, कृष्ण | राऊत पुरुष |
| फाग | राधा-कृष्ण | होली |
ध्यान दें: मूल पाठ में सुआ और गौरा दोनों दीपावली से जुड़ा और गोंड स्त्रियों का गीत बताया गया है।
याद रखने योग्य बिंदु
- भोजली रक्षाबंधन के अगले दिन (भादो कृष्ण प्रथमा) से जुड़ी है।
- भोजली गीत में गंगा का नाम बार-बार आता है।
- जंवारा चैत्र नवरात्रि में बोया, नवमी को विसर्जित।
- भिगोए बीज को बिरही कहते हैं।
- जसगीत, पचरा, विसर्जन (उम्हा) जंवारा के तीन प्रकार हैं।
- गौरा गीत में गोंड स्त्रियाँ गाती हैं; उत्साह की अवस्था झुपना।
- फाग शृंगार रस प्रधान, बसंत/फाल्गुन में गाया जाता है।
- सवनाही की पूजा बैगा करता है और दीवार पर गोबर की आकृतियाँ बनती हैं।
- मड़ई गीत राऊत पुरुष गाते हैं; वाद्य ढोल।
- डंडा गीत को छत्तीसगढ़ का रासगीत कहा गया है।
स्मरण सूत्र
- भोजली-गंगा, जंवारा-दुर्गा, गौरा-गौरी, मड़ई-राऊत।
- देवउठनी से होली तक डंडा घूमे।
स्वयं जाँचें
- प्रश्न: भोजली के गीत में किसका नाम बार-बार आता है? उत्तर: गंगा।
- प्रश्न: जंवारा के बिना अंकुरित भीगे बीज क्या कहलाते हैं? उत्तर: बिरही।
- प्रश्न: डंडा गीत की संज्ञा क्या है? उत्तर: छत्तीसगढ़ का रासगीत।
- प्रश्न: सवनाही की पूजा कौन करता है? उत्तर: बैगा।
- प्रश्न: मड़ई किससे सजा बांस का स्तंभ है? उत्तर: मयूर पंख व कौड़ियों से।
- प्रश्न: छेरछेरा किस माह की पूर्णिमा से जुड़ा है? उत्तर: पौष।
अभ्यास प्रश्न
‘ओ देवी गंगा, लहर तुरंगा’ नामक गीत किस पर्व पर गाया जाता है?
- (A) छेरछेरा
- (B) गौरी-गौरा
- (C) करमा
- (D) भोजली
छत्तीसगढ में बसंत ऋतु में गाया जाने वाला प्रमुख लोकगीत है–
- (A) बारामासी
- (B) सवनाही
- (C) फाग
- (D) सुआगीत
किस पारम्परिक “छत्तीसगढ़ी लोकगीत (CG Lokgeet)” में “गंगा” का नाम बार-बार आता है?
- (A) जवारा
- (B) भोजली
- (C) सोहर
- (D) सुआ
वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला छत्तीसगढ़ी गीत है। imp
- (A) बारामासी
- (B) फाग
- (C) सवनाही
- (D) इनमें से कोई नहीं
छत्तीसगढ़ में “गौरा गीत कब गाते है
- (A) दीपावली
- (B) नवरात्रि
- (C) तीजा
- (D) होली
जसगीत क्या है ? (Vyapam-RBOS-2017)
- (A) जन्म गीत
- (B) विवाह गीत
- (C) दीपावली गीत
- (D) देवी पूजन
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (D) - भोजली गीत में गंगा का नाम बार-बार आता है (आ हो देवी गंगा, ओ देवी लहर तुरंगा)।
- (C) - फाग गीत फाल्गुन/बसंत ऋतु में गाया जाता है।
- (B) - भोजली गीत में गंगा का नाम बार-बार आता है।
- (C) - सवनाही सावन माह, वर्षा ऋतु का प्रमुख गीत है।
- (A) - गौरा गीत दीवाली के अवसर पर गाया जाता है।
- (D) - जस गीत देवी पूजन गीत है।
Page 1 of 1