←
छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 5
पर्व-त्योहार एवं ऋतु संबंधी लोकगीत

पर्व-त्योहार एवं ऋतु संबंधी लोकगीत

छत्तीसगढ़ के लोकगीत त्योहारों से गहरे जुड़े हैं: भोजली, जंवारा, गौरा, सेवा, फाग, सवनाही, मड़ई, नागमथ, डंडा और छेरछेरा। यहाँ हर गीत का अवसर, समुदाय और पूजा-विधि तालिका में मिलेगी।

भोजली गीत

बिंदुविवरण
अवसररक्षाबंधन के दूसरे दिन, भादो माह के कृष्णपक्ष प्रथमा
उल्लेखगंगा का नाम बार-बार आता है
गीतआ हो देवी गंगा, ओ देवी लहर तुरंगा
संबंधभूमि-जल से संबंधित गीत
अन्य प्रचलनबुंदेलखंड और उत्तरप्रदेश क्षेत्र में कजली पर्व
पूजाभोजली को गंगा-देवी व साक्षात अन्नपूर्णा मानकर पूजा
विशेषमहिलाएँ टोकरी में खाद-मिट्टी रखकर धान, गेहूँ, जौ या उड़द के दाने बोती हैं; पौधे उगने पर उसे भोजली कहते हैं; अंकुरण से विसर्जन तक के गीत भोजली गीत

जंवारा गीत

  • चैत्र नवरात्रि में जंवारा बोया और निकाला जाता है; गीत में दुर्गा देवी के रूप का नाम बार-बार आता है।
  • बोए जाने वाले बीजों को एक दिन पहले भिगोकर रखा जाता है, जिसे बिरही कहते हैं।
  • नवरात्रि के प्रथम दिन बोया जाता है और नवमी के दिन विसर्जन होता है।
आधारजसगीतपचरा गीतविसर्जन गीत
अन्य नामएक प्रकार का देवी पूजन गीतउत्था गीतउम्हा गीत
अवधिबिरही डालने के दिन से सप्तमी तकनवरात्रि के प्रथम दिवस से सप्तमी तकअष्टमी के हवन के उपरांत
उल्लेखदेवी का यशोगान, स्तुति, महत्ता, शृंगार, भोजन, निवास, वाहनदेवी के वीर भावों का वर्णनस्तुति, आभार प्रदर्शन, विदाई एवं विसर्जन

गौरा / गौरी-गौरा गीत

  • अवसर: दीवाली; गोंड समुदाय, प्रमुखतः गोंड स्त्रियों का गीत।
  • शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर विवाह की रस्म पूरी कर पूजा-अर्चना की जाती है।
  • गौरा चौरा नामक स्थान पर मूर्ति प्रतिष्ठित कर महिलाएँ गौरा जगाने का गीत गाती हैं।
  • विशेष राग-रागिनी की धुन में मातृ शक्ति की स्तुति सुनकर श्रोता मुग्ध होकर नाचने लगते हैं, जिसे ‘झुपना’ कहते हैं।
  • ‘अँखरा’ गीत में करुणा जागती है; ‘कड़इया’ गीत में नारी शक्ति अर्धांगिनी की महत्ता का बखान होता है।
  • आरंभ में देवी-देवताओं को जगाने का गीत गाते हैं, उसी प्रकार विसर्जन के बाद सुलाने का गीत गाते हैं।

सेवा, फाग और सवनाही गीत

गीतअवसर/समयअन्य तथ्य
सेवा गीतनवरात्रि में देवी पूजा परदेवी सेवा का गीत
फाग गीतफाल्गुन माह (होली), बसंत ऋतुप्रधानता शृंगार रस; गीतकार अरुण यादव; राधा-कृष्ण का वर्णन
सवनाही गीतसावन माह, वर्षा ऋतु का प्रमुख गीतआषाढ़ के अंतिम रविवार या सावन के प्रथम रविवार को सवनाही त्योहार; जादू-टोना और बीमारी से गाँव के लोगों व पशुओं की सुरक्षा हेतु बैगा द्वारा सवनाही देवी की पूजा; घर की दीवारों पर गोबर से आकृतियाँ बनाई जाती हैं

मड़ई, नागमथ, डंडा और छेरछेरा

गीतअवसरविशेष
मड़ई गीतकार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तकराऊत जाति के पुरुष गाते हैं; मड़ई मयूर पंख व कौड़ियों से सजा बांस का स्तंभ; ढोल वाद्य; गो-पूजन का त्योहार; श्रीकृष्ण के गोवर्धन धारण व इंद्र का मान-मर्दन के बाद गोप-ग्वालों के आनंद उत्सव से आविर्भाव माना जाता है
नागमथनागपंचमीनागदेव की पूजा-अर्चना
डंडा गीतकार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी) से फाल्गुन पूर्णिमा तकछत्तीसगढ़ का रासगीत; युवक-युवतियाँ वृत्ताकार घूम-घूम कर हाथ में छोटी डंडा लिए नाचते हैं; पहले देवता का सुमिरन, फिर गीत
छेरछेरापौष पूर्णिमा पर छेरछेरा पर्वपंक्ति: छेरिक छेरा छेर बरकनीन छेर छेरा, माई कोठी के धान ला हेर हेरा

तुलना एवं संबंध

गीतसंबद्ध देव/तत्वसमुदाय/द्वारा
भोजलीगंगा, अन्नपूर्णामहिलाएँ
जंवारादुर्गानवरात्रि पूजक
गौराशिव-पार्वतीगोंड स्त्रियाँ
सवनाहीसवनाही देवीबैगा
मड़ईगो-पूजन, कृष्णराऊत पुरुष
फागराधा-कृष्णहोली

ध्यान दें: मूल पाठ में सुआ और गौरा दोनों दीपावली से जुड़ा और गोंड स्त्रियों का गीत बताया गया है।

याद रखने योग्य बिंदु

  • भोजली रक्षाबंधन के अगले दिन (भादो कृष्ण प्रथमा) से जुड़ी है।
  • भोजली गीत में गंगा का नाम बार-बार आता है।
  • जंवारा चैत्र नवरात्रि में बोया, नवमी को विसर्जित।
  • भिगोए बीज को बिरही कहते हैं।
  • जसगीत, पचरा, विसर्जन (उम्हा) जंवारा के तीन प्रकार हैं।
  • गौरा गीत में गोंड स्त्रियाँ गाती हैं; उत्साह की अवस्था झुपना।
  • फाग शृंगार रस प्रधान, बसंत/फाल्गुन में गाया जाता है।
  • सवनाही की पूजा बैगा करता है और दीवार पर गोबर की आकृतियाँ बनती हैं।
  • मड़ई गीत राऊत पुरुष गाते हैं; वाद्य ढोल।
  • डंडा गीत को छत्तीसगढ़ का रासगीत कहा गया है।

स्मरण सूत्र

  • भोजली-गंगा, जंवारा-दुर्गा, गौरा-गौरी, मड़ई-राऊत।
  • देवउठनी से होली तक डंडा घूमे।

स्वयं जाँचें

  • प्रश्न: भोजली के गीत में किसका नाम बार-बार आता है? उत्तर: गंगा।
  • प्रश्न: जंवारा के बिना अंकुरित भीगे बीज क्या कहलाते हैं? उत्तर: बिरही।
  • प्रश्न: डंडा गीत की संज्ञा क्या है? उत्तर: छत्तीसगढ़ का रासगीत।
  • प्रश्न: सवनाही की पूजा कौन करता है? उत्तर: बैगा।
  • प्रश्न: मड़ई किससे सजा बांस का स्तंभ है? उत्तर: मयूर पंख व कौड़ियों से।
  • प्रश्न: छेरछेरा किस माह की पूर्णिमा से जुड़ा है? उत्तर: पौष।

अभ्यास प्रश्न

  1. ‘ओ देवी गंगा, लहर तुरंगा’ नामक गीत किस पर्व पर गाया जाता है?

    • (A) छेरछेरा
    • (B) गौरी-गौरा
    • (C) करमा
    • (D) भोजली
  2. छत्तीसगढ में बसंत ऋतु में गाया जाने वाला प्रमुख लोकगीत है–

    • (A) बारामासी
    • (B) सवनाही
    • (C) फाग
    • (D) सुआगीत
  3. किस पारम्परिक “छत्तीसगढ़ी लोकगीत (CG Lokgeet)” में “गंगा” का नाम बार-बार आता है?

    • (A) जवारा
    • (B) भोजली
    • (C) सोहर
    • (D) सुआ
  4. वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला छत्तीसगढ़ी गीत है। imp

    • (A) बारामासी
    • (B) फाग
    • (C) सवनाही
    • (D) इनमें से कोई नहीं
  5. छत्तीसगढ़ में “गौरा गीत कब गाते है

    • (A) दीपावली
    • (B) नवरात्रि
    • (C) तीजा
    • (D) होली
  6. जसगीत क्या है ? (Vyapam-RBOS-2017)

    • (A) जन्म गीत
    • (B) विवाह गीत
    • (C) दीपावली गीत
    • (D) देवी पूजन

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (D) - भोजली गीत में गंगा का नाम बार-बार आता है (आ हो देवी गंगा, ओ देवी लहर तुरंगा)।
  2. (C) - फाग गीत फाल्गुन/बसंत ऋतु में गाया जाता है।
  3. (B) - भोजली गीत में गंगा का नाम बार-बार आता है।
  4. (C) - सवनाही सावन माह, वर्षा ऋतु का प्रमुख गीत है।
  5. (A) - गौरा गीत दीवाली के अवसर पर गाया जाता है।
  6. (D) - जस गीत देवी पूजन गीत है।
Page 1 of 1
‹
›