रहस एवं गम्मत
रहस और गम्मत छत्तीसगढ़ के अन्य प्रमुख लोकनाट्य हैं। रहस राधा-कृष्ण की रासलीला पर आधारित है, जबकि गम्मत हास्य-व्यंग्य शैली है जो नाचा का ही भाग है।
रहस
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अन्य नाम | रहस लीला, रास लीला, यज्ञ |
| प्रतीक | छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपरा का |
| प्रभावित | उत्तरप्रदेश की रासलीला से |
| अवसर | होली के समय |
| विषयवस्तु | राधा-कृष्ण की रासलीला का छत्तीसगढ़ी रूपांतरण; पौराणिक चरित्रों की 'मानव आकार प्रतिमाएँ'; बाबू रेवाराम रचित रहस की पाण्डुलिपियाँ प्रचलित |
| स्वर्णिम काल | रतनपुर में हैहयवंशी राजाओं के शासनकाल में |
| कलाकार | विदूषक की भूमिका हास्य कलाकार; प्रमुख: कौशल सिंह, बिसेसर सिंह, केसरी सिंह, बिलासपुर के मंझला महाराज |
| प्रचलन | बिलासपुर संभाग में सर्वाधिक |
| नृत्य | धमतरी जिले में रहस के दौरान मुख्यतः रहस नृत्य |
| मंच | रंगमंच को बेड़ा/रासबेड़ा; संचालन रासधारी; प्रारंभ से पहले थुन्ह खम्भ स्थापित; चितेर जाति पौराणिक मूर्तियाँ स्थापित करती है |
| आयोजन | गाँव में सामान्यतः 7-9 दिन |
| गायन | गायक रासबेड़ा की प्रदक्षिणा करते हुए गाते हैं; अर्थ बताने वाला 'गुटकहा', नृत्य करने वाला 'नचकरहा', रासधारी 'पंडित' |
रहस के स्वरूप
| आधार | सवर्ण रहस | सतनामी रहस |
|---|---|---|
| अवधि | 9 दिन | 10 दिन |
| प्रधानता | भक्ति की | भक्ति के साथ मनोरंजन भी |
| व्यास | ब्राह्मण | जाति का शिक्षित व्यक्ति |
| प्रतिमा | राधा-कृष्ण | राधा-कृष्ण के साथ गणेश व रिद्धि-सिद्धि |
मूल पाठ में सामान्य आयोजन 7-9 दिन बताया गया है, जबकि सतनामी रहस 10 दिन का; दोनों संदर्भ अलग हैं।
गम्मत
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| शैली | हास्य-व्यंग्य |
| काल | भोंसले शासनकाल में अति लोकप्रिय |
| भाग | नाचा का ही एक भाग |
| विषय | सामाजिक कुरीतियों व विषमता पर प्रहार; प्रहसन के माध्यम से कृष्ण लीला का मंचन |
| कलाकार | नर्तक भी पुरुष; विदूषक के रूप में जोक्कड़ एवं परी |
| आयोजन | खुले मंच पर |
गम्मत के स्वरूप
| आधार | खड़े साज | बैठे साज |
|---|---|---|
| अन्य नाम | खड़ी गम्मत | रतनपुरिहा गम्मत |
| प्रणेता | — | बाबू रेवाराम |
| प्रक्रिया | गायन, वादन, अभिनय, नृत्य खड़े होकर | कलाकार अभिनय व गायन बैठकर |
गम्मत में दो पात्रों का संवाद गम्मतिहा कहलाता है; गम्मतिहा लोकनृत्य दुर्ग जिले से संबंधित है। दण्डामी माड़िया क्षेत्र में गाड़ा लोग गम्मत प्रदर्शित करते हैं।
तुलना एवं संबंध
| पहलू | रहस | गम्मत |
|---|---|---|
| आधार | रासलीला, राधा-कृष्ण | हास्य-व्यंग्य, नाचा का भाग |
| बाबू रेवाराम | पाण्डुलिपियाँ | बैठे साज प्रणेता |
| क्षेत्र | बिलासपुर संभाग | गम्मतिहा: दुर्ग |
याद रखने योग्य बिंदु
- रहस होली के समय होता है।
- रहस के मंच को रासबेड़ा कहते हैं।
- संचालन रासधारी करता है।
- थुन्ह खम्भ पहले स्थापित होता है।
- चितेर जाति मूर्तियाँ स्थापित करती है।
- सवर्ण रहस 9 दिन, सतनामी 10 दिन।
- गुटकहा अर्थ बताने वाला है।
- गम्मत नाचा का भाग है।
- रतनपुरिहा गम्मत = बैठे साज।
- गम्मतिहा दो पात्रों का संवाद है।
स्मरण सूत्र
'रहस-रास-राधा-होली; गम्मत-हँसी-नाचा की टोली।'
स्वयं जाँचें
- प्र. रहस किससे प्रभावित? उ. उत्तरप्रदेश की रासलीला से।
- प्र. गुटकहा कौन? उ. बीच-बीच में अर्थ बताने वाला।
- प्र. रतनपुरिहा गम्मत के प्रणेता? उ. बाबू रेवाराम।
- प्र. सतनामी रहस कितने दिन? उ. 10 दिन।
- प्र. रहस का स्वर्णिम काल? उ. रतनपुर में हैहयवंशी राजाओं का शासन।
- प्र. गम्मत का प्रचलित काल? उ. भोंसले शासनकाल।
अभ्यास प्रश्न
रास का छत्तीसगढ़ी रूपान्तरण कौन-सा लोकनाट्य है?
- (A) नाचा
- (B) गम्मत
- (C) पण्डवानी
- (D) रहस
इस राज्य का निम्नलिखित में से कौन-सा लोक-नाट्य उत्तरप्रदेश की रासलीला से अधिक प्रभावित है?
- (A) चंदैनी-गोंदा
- (B) रहस
- (C) नाचा
- (D) गम्मत
छत्तीसगढ़ी आदिवासी समाज में थुन्ह (खम्थ) किस लोकनाट्य का प्रतीक है?
- (A) दहिकान्दो
- (B) पण्डवानी
- (C) गम्मत
- (D) रहस
प्रसिद्ध कलाकार रेवाराम का सम्बन्ध किससे है?
- (A) रहस
- (B) नाचा
- (C) भतरानाट
- (D) पण्डवानी
Q, छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध ‘रहस’ क्या है?
- (A) प्रसिद्ध रास-लीला
- (B) लोक गीत
- (C) साप्ताहिक पत्रिका
- (D) छत्तीसगढ़ी व्यंजन
‘रहस’ का आयोजन किया जाता है।
- (A) बेड़ा
- (B) अम्बिकापुर
- (C) भरतानाट
- (D) हेमारू
‘रहस अनुष्ठानिक नाट्य विद्या किस संभाग में सर्वाधिक लोकप्रिय है?
- (A) रायपुर
- (B) बस्तर
- (C) बिलासपुर
- (D) कोरिया
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (D) - रहस राधा-कृष्ण की रासलीला का छत्तीसगढ़ी रूपांतरण है।
- (B) - रहस उत्तरप्रदेश की रासलीला से प्रभावित है।
- (D) - रहस में पहले थुन्ह खम्भ स्थापित किया जाता है।
- (A) - रहस की पाण्डुलिपियाँ बाबू रेवाराम द्वारा रचित हैं।
- (A) - रहस रास लीला ही है।
- (A) - रहस का मंच बेड़ा/रासबेड़ा कहलाता है।
- (C) - रहस का प्रचलन बिलासपुर संभाग में सर्वाधिक है।