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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 2
जन्म-संस्कार, विवाह गीत एवं विवाह की रस्में

जन्म-संस्कार, विवाह गीत एवं विवाह की रस्में

छत्तीसगढ़ में जन्म से विवाह तक हर संस्कार के अपने गीत हैं। सोहर गीत के कई भेद हैं और विवाह की हर रस्म का अलग गीत या विधि है। विवाह गीतों का क्रम तथा रस्मों का उद्देश्य परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।

सोहर गीत के भेद

सुकुन गीत, सधौरी गीत, व्यथा गीत, भारपीड़ा गीत, प्रसव गीत, मधु पीपर गीत, देवरानी-जेठानी गीत।

जन्म संबंधी गीत

गीतविवरण
सधौरीपहली बार गर्भवती होने पर सातवें माह के बाद और नौवें के पूर्व शुभ दिन संस्कार; मायके वाले वस्त्र, आभूषण, पकवान लाते हैं; मायके से सात प्रकार के पकवान आते हैं
सोहरबच्चे के जन्म के समय
बधाईशिशु के जन्म के छठें दिन बधाई संस्कार (छठी संस्कार); स्त्रियाँ बधाई गीत गाती हैं
लोरीबच्चों को सुलाते समय
बरुआउपनयन संस्कार के समय

विवाह गीत

तीन दिन में संपन्न विवाह को ‘तीनतेलिया’ और पाँच दिन में संपन्न को ‘पाँचतेलिया’ कहते हैं।

क्र.रस्म/गीतविवरण
1चुलमाटीविवाह का प्रारंभ; सुवासिनें (वर की भाभी, बहनें, बुआ) चूल्हों के लिए मिट्टी लाने नदी या तालाब के किनारे जाती हैं और मिट्टी खोदते समय गीत गाती हैं
2मंगरोहनविवाह की साक्षी; मंगल काष्ठ को मंडप के नीचे गाड़ते समय गीत; मैदानी इलाके में महुआ वृक्ष की डाली
3तेलचघीचुलमाटी के बाद हरिद्रालेपन; वर-वधू दोनों पक्षों द्वारा
4मायन गीतमायन के समय; कुल देवी-देवताओं की पूजा
5नहडोरीनहलाने के बाद डोरी (कंकन) बाँधना; सिर पर पर्रा में पानी भरा सात चुकिया रखकर हिलाते हैं
6मौर सौंपनीबारात प्रस्थान से पूर्व; दीपक को साक्षी मानकर मौर-मुकुट में हाथ रख दूल्हे को आशीर्वाद
7बारात प्रस्थानसुवासिनें विदाई गीत गाती हैं; वर के पूर्वानुराग का चित्रण
8नकटा नाचबारात प्रस्थान की रात वर के घर महिलाओं द्वारा; पुरुष वर्जित; महिलाएँ पुरुष रूप धरकर हास-परिहास
9परघौनीबारात के स्वागत के समय
10भडौनीखाने के समय वर/वधू पक्ष द्वारा हास-परिहास हेतु
11टिकावननव-दंपति को उपहार; वधू के मामा पक्ष द्वारा पँचहर दाईज (पीतल और काँसे के पाँच प्रकार के बर्तन) भेंट
12भाँवरफेरा लेते समय; सात फेरों के पड़ते ही विवाह संपन्न; पंडित मंत्रोच्चार करता है
13बिदाई या गौनापठौनी गीत; कन्या और परिजनों की मनोदशा
14पहमी गीतविवाह के समय गाया जाने वाला प्रमुख संस्कार गीत

मूल पाठ के अनुसार राज्य के विवाह संस्कार गीतों का क्रम है: परघौनी, भडौनी, टिकावन, भाँवर।

विवाह संबंधी अन्य रस्में

रस्मविवरण
देवतेला/देवतलालोक देव को हल्दी चढ़ाने जाते हैं ताकि विवाह निर्विघ्न हो
मायमौरीमातृ पूजन के लिए पकवान बनाना; पितरों का स्मरण कर पकवान चढ़ाना
हरदियाहीपूरे गाँव को आमंत्रण, सब एक-दूसरे पर हल्दी और रंग लगाते हैं
परछनबारात प्रस्थान के पहले; महिलाएँ वर को आशीर्वाद देती हैं
चौथियावधू पक्ष के लोग अपने संबंधियों को लेकर वर पक्ष के यहाँ जाते हैं

हरदियाही में ‘हरदियाही’ खेलने के लिए पूरे गाँव को आमंत्रण दिया जाता है। देवतेला के लिए देवतेला घूमते हैं।

तुलना एवं संबंध

चरणविवाह से पहलेविवाह के दिनविवाह के बाद
रस्मेंचुलमाटी, तेलचघी, मायन, नहडोरीपरघौनी, भडौनी, टिकावन, भाँवरबिदाई/गौना, पठौनी

याद रखने योग्य बिंदु

  • तीन दिन का विवाह तीनतेलिया, पाँच दिन का पाँचतेलिया।
  • चुलमाटी विवाह का प्रारंभ है।
  • मंगरोहन विवाह की साक्षी; मैदानी क्षेत्र में महुआ की डाली।
  • नकटा नाच में पुरुष प्रवेश वर्जित।
  • टिकावन में मामा पक्ष का पँचहर दाईज शुभ माना जाता है।
  • भाँवर में सात फेरों से विवाह संपन्न।
  • बिदाई पर पठौनी गीत गाया जाता है।
  • सधौरी सातवें से नौवें माह के बीच होती है।
  • बधाई गीत छठे दिन (छठी संस्कार) पर; बरुआ गीत उपनयन संस्कार पर।
  • परछन बारात प्रस्थान से पहले होता है; हरदियाही में हल्दी और रंग लगाया जाता है।
  • मायमौरी में मातृ पूजन हेतु पकवान बनते हैं; चौथिया में वधू पक्ष वर पक्ष के यहाँ जाता है।

स्मरण सूत्र

  • चुल-मंग-तेल-मायन-नह: पहली पाँच रस्में।
  • परघौनी-भडौनी-टिकावन-भाँवर: ‘पर भ टि भाँ’।
  • अन्य रस्में: ‘देव-माय-हरदी-परछन-चौथिया’।

स्वयं जाँचें

  • प्रश्न: बधाई संस्कार किस दिन होता है? उत्तर: शिशु जन्म के छठे दिन।
  • प्रश्न: मंगरोहन किस पेड़ की डाली से बनता है (मैदानी क्षेत्र)? उत्तर: महुआ।
  • प्रश्न: नकटा नाच में कौन भाग लेती हैं? उत्तर: केवल महिलाएँ।
  • प्रश्न: टिकावन में क्या भेंट दिया जाता है? उत्तर: पँचहर दाईज।
  • प्रश्न: परछन कब होता है? उत्तर: बारात प्रस्थान से पहले।
  • प्रश्न: मायमौरी में क्या किया जाता है? उत्तर: मातृ पूजन के लिए पकवान बनाते और पितरों को चढ़ाते हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. उपनयन संस्कार के समय गाया जाने वाला गीत

    • (A) बरुआ गीत
    • (B) देवार गान
    • (C) लेजागीत
    • (D) सधौरी गीत
  2. सोहर गीत का सम्बन्ध है

    • (A) बिहाव गीत से
    • (B) बपठौनी गीत से
    • (C) भड़ौनी गीत से
    • (D) नवजात शिशु के जन्म से
  3. 'सोहर गीत इस अवसर पर गाया जाता है?

    • (A) विवाह
    • (B) दीपावली
    • (C) सगाई
    • (D) बच्चे के जन्म पर

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (A) - बरुआ गीत उपनयन संस्कार के समय गाया जाता है।
  2. (D) - सोहर बच्चे के जन्म के समय की बधाई है।
  3. (D) - सोहर गीत बच्चे के जन्म के समय गाया जाता है।
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