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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 7
छत्तीसगढ़ की प्रमुख लोकगाथाएँ

छत्तीसगढ़ की प्रमुख लोकगाथाएँ

लोकगाथाओं में कथानक की प्रधानता होती है, साथ ही गेयता (गीत) भी शामिल रहती है। विषय विविध हैं, फिर भी प्रेम तत्त्व प्रमुख है; जीवन के संघर्ष, वीरता, चमत्कार और अलौकिकता का रोचक वर्णन भी मिलता है। परीक्षा में गाथा-प्रकार-पात्र का मिलान सबसे अधिक पूछा जाता है।

गाथाओं की तालिका

लोकगाथाप्रकारप्रधान पात्रअन्य प्रमुख पात्र
अहिमन रानीस्त्री प्रधान प्रेमगाथाअहिमन रानीराजा वीरसिंह
केवला रानीस्त्री प्रधान प्रेमगाथाकेवला रानीराजा मदन सिंह (हरदी के राजा)
रेवा रानीस्त्री प्रधान प्रेमगाथारेवा रानी (पवन रेखा)राजा उग्रसेन, दुमदुमी राक्षस
दसमत कइनास्त्री प्रधान प्रेमगाथादसमत ओड़निनदुर्ग के राजा महमदेव
फूलकुंवर की गाथास्त्री प्रधान वीरगाथावीरागना फूलकुंवरराजा जगत
राजा वीरसिंहपुरुष प्रधान प्रेमगाथाराजा वीरसिंहजादूगर योगी
ढोला-मारूपुरुष प्रधान प्रेमगाथानायक ढोला, नायिका मारूजादूगरनी रेवा
लोरिक-चंदापुरुष प्रधान प्रेमगाथानायक लोरिक (रीवा), नायिका चंदा (आरंग)बावनवीर, बंठवा
फूलबासनपौराणिक लोकगाथामाता सीता एवं लक्ष्मणभौरागढ़ के राजा साल केवरा
सरवन गाथापौराणिक लोकगाथासरवन कुमारराजा दशरथ
पंडवानीपौराणिक लोकगाथाभीमकुंती, द्रौपदी, शेष पाण्डव एवं कौरव
भरथरीपौराणिक लोकगाथाराजा भरथरी एवं रानी पिंगला—
कल्याण साय की गाथावीरगाथाकल्याण सायगोपाल राय, मुगल सम्राट जहांगीर
गोपल्ला गीतवीरगाथावीर गोपाल रायकल्याण साय, मुगल सम्राट अकबर
गुजरी गहिरिन की गाथावीरगाथागुजरी एवं चंद्रावलमिर्जा पठान
सीताराम नायक-नगेसर कइनावीरगाथासीताराम नायक, नगेसर कइनारतनपुर एवं मल्हार का वर्णन
कुंवर अछरियावीरगाथाकुंवर अछरिया, साँवर कैनाकनवा दिगम्बर
रायसिंह का पवारावीरगाथारायसिंधकोकराय लक्ष्मी नारायण (लच्छू नेंगी)
आल्हा-उदल (घोड़ा नाच)वीरगाथाआल्हा और उदलआल्हा-उदल के भाई
देवी गाथाधार्मिक लोकगाथादेवी की महिमामुगल सम्राट अकबर एवं बीरबल
लछमन जतीअद्भुत लोकगाथालक्ष्मणइंद्र की बेटी कंवला

कालानुसार वर्गीकरण

आदिकालीन लोकगाथाएँ

वर्गगाथाएँ
प्रेमप्रधानअहिमन रानी, केवला रानी, रेवा रानी
वीरगाथाराजा वीर सिंह की गाथा
धार्मिक एवं पौराणिकफूलबासन की गाथा, पंडवानी की गाथा

फूलबासन की गाथा में लक्ष्मण को 'जती जोगी' कहा गया है, जो बारह बरस जोग करते हैं; उनके लिए सात दोहरे का भोजन, बिना जोते खेत का चावल और हरी मूंग की दाल पकाने का वर्णन आता है।

मध्यकालीन लोकगाथाएँ

वर्गगाथाएँ
प्रेमप्रधानलोरिक-चंदा, ढोला-मारू
वीरगाथाफूलकुँवर गाथा, गोपल्ला गीत
धार्मिक एवं पौराणिकदेवी की गाथा, सरवन, नगेसर कइना, दसमत कइना, कल्याण साय, रायसिंह का पवारा, आल्हा-उदल, सीताराम नायक, भैरव, रसालू

मूल पाठ में विरोध

ऊपर की तालिका और कालानुसार चित्र में वर्गीकरण मेल नहीं खाता: राजा वीरसिंह तालिका में 'पुरुष प्रधान प्रेमगाथा' है, पर चित्र में आदिकालीन वीरगाथा; कल्याण साय, रायसिंह, आल्हा-उदल, सीताराम नायक तालिका में वीरगाथा हैं, पर चित्र में 'धार्मिक एवं पौराणिक' सूची में हैं; फूलकुंवर तालिका में स्त्री-प्रधान वीरगाथा है, चित्र में मध्यकालीन वीरगाथा। परीक्षा में प्रश्न के संदर्भ के अनुसार उत्तर दें।

तुलना एवं संबंध

प्रकारगाथाएँ
स्त्री प्रधान प्रेमगाथाअहिमन रानी, केवला रानी, रेवा रानी, दसमत कइना
पुरुष प्रधान प्रेमगाथाराजा वीरसिंह, ढोला-मारू, लोरिक-चंदा
पौराणिकफूलबासन, सरवन, पंडवानी, भरथरी
अद्भुतलछमन जती

याद रखने योग्य बिंदु

  • रेवा रानी का दूसरा नाम पवन रेखा है।
  • दसमत कइना की नायिका दसमत ओड़निन है; राजा महमदेव दुर्ग के थे।
  • लोरिक रीवा का और चंदा आरंग की नायिका है।
  • पंडवानी का प्रधान पात्र भीम है।
  • भरथरी में राजा भरथरी और रानी पिंगला हैं।
  • सरवन गाथा में राजा दशरथ अन्य पात्र हैं।
  • कल्याण साय की गाथा में जहांगीर आता है।
  • गोपल्ला गीत में गोपाल राय और अकबर का उल्लेख है।
  • गुजरी गहिरिन की गाथा में मिर्जा पठान अन्य पात्र है।
  • सीताराम नायक-नगेसर कइना में रतनपुर और मल्हार का वर्णन है।
  • आल्हा-उदल का संबंध घोड़ा नाच से बताया गया है।
  • लछमन जती अद्भुत लोकगाथा है; कंवला इंद्र की बेटी है।

स्मरण सूत्र

'अहिमन-केवला-रेवा' तीनों रानियाँ = स्त्री प्रधान प्रेम। 'ढोला-लोरिक-वीरसिंह' = पुरुष प्रधान प्रेम।

स्वयं जाँचें

  1. प्र. पंडवानी का प्रधान पात्र? उ. भीम।
  2. प्र. ढोला-मारू में जादूगरनी कौन है? उ. रेवा।
  3. प्र. केवला रानी के साथ किस राजा का नाम है? उ. मदन सिंह (हरदी के राजा)।
  4. प्र. रायसिंह का पवारा किस प्रकार की गाथा है? उ. वीरगाथा (तालिका में)।
  5. प्र. फूलबासन के अन्य पात्र राजा कौन? उ. भौरागढ़ के राजा साल केवरा।
  6. प्र. लछमन जती में इंद्र की बेटी का नाम? उ. कंवला।
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