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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 16
हरेली: छत्तीसगढ़ का प्रथम पर्व

हरेली: छत्तीसगढ़ का प्रथम पर्व

हरेली कृषि-संस्कृति का त्यौहार है, जिसमें औज़ारों की पूजा, गेंड़ी और खेल-प्रतियोगिताएँ होती हैं। इसकी रीतियाँ, देवता और मान्यताएँ बहुधा पूछी जाती हैं।

मूल परिचय

बिंदुविवरण
संज्ञाछत्तीसगढ़ अंचल में प्रथम पर्व के रूप में मनाया जाता है
आयोजनसावन/श्रावण अमावस्या
उपनामगेंड़ी पर्व; इस दिन बच्चों के लिए गेंड़ी का निर्माण किया जाता है
द्वारामुख्य रूप से किसानों द्वारा
नृत्यगेंड़ी नृत्य
व्यंजनगुड़ चीला
बस्तरबस्तर क्षेत्र की जनजातियाँ इसे अमुस त्यौहार के रूप में मनाती हैं

खेल और गीत

  • खेल: नारियल फेंक प्रतियोगिता, कबड्डी प्रतियोगिता, गेंड़ी दौड़ प्रतियोगिता, रस्साकशी, फुगड़ी।
  • गीत की पंक्तियाँ: "आये हरेली खपाये गेंड़ी, गेंड़ी चघे-चघे देखे लोहारा भेंड़ी"।

पूजाकार्य

  • कुटकी देवी की पूजा-अर्चना।
  • गोरइंया देव (पशु के रक्षक देवता) की पूजा।
  • किसान लौह उपकरण/कृषि उपकरणों, औजारों की पूजा करते हैं।

मान्यताएँ और बचाव के उपाय

माना जाता है कि इस दिन दुष्ट आत्माएँ या बुरी शक्तियाँ अधिक प्रभावशाली हो जाती हैं, अतः बचाव के लिए निम्न कार्य किए जाते हैं।

  • सवनाही: महिलाएँ घर की मुख्य दीवार पर गोबर से चित्र बनाती हैं; घर के बाहर गोबर से प्रेत बनाया जाता है।
  • राउत (यादव) अपने मालिकों के घर के दरवाजे में गोंसाईंज या नीम की पत्ती लगाते (खोंचते) हैं।
  • लोहार अपने मालिकों के द्वार में कील ठोंकते हैं।
  • घर की दीवारों पर आदिवासी अमुस खुटा लगाते हैं, जो तेंदू, सदावरी की डाली के होते हैं।

तुलना एवं संबंध

व्यक्ति/समूहहरेली में भूमिका
किसानकृषि औजारों की पूजा
महिलाएँगोबर से सवनाही चित्र
राउतनीम/गोंसाईंज की पत्ती दरवाजे में
लोहारद्वार में कील ठोंकना
बच्चेगेंड़ी बनाना और चढ़ना
बस्तर की जनजातियाँअमुस त्यौहार

मूल पाठ में दोहरा नामकरण: हरेली को गेंड़ी पर्व और बस्तर में अमुस त्यौहार कहा गया है; पूजा-पात्र के रूप में एक जगह कुटकी देवी और दूसरी जगह गोरइंया देव का उल्लेख है, दोनों अलग-अलग पूजाएँ हैं।

याद रखने योग्य बिंदु

  • हरेली सावन अमावस्या को होती है।
  • छत्तीसगढ़ का प्रथम पर्व माना जाता है।
  • उपनाम: गेंड़ी पर्व।
  • गेंड़ी दौड़, नारियल फेंक, कबड्डी, रस्साकशी, फुगड़ी: प्रमुख खेल।
  • कुटकी देवी और गोरइंया देव की पूजा।
  • सवनाही: गोबर से दीवार पर चित्र।
  • राउत नीम की पत्ती लगाते हैं; लोहार कील ठोंकते हैं।
  • बस्तर में यह अमुस त्यौहार है; अमुस खुटा तेंदू-सदावरी की डाली का।
  • प्रमुख व्यंजन गुड़ चीला।

स्मरण सूत्र

"हरे गेंड़ी, गोबर सवनाही": हरेली = गेंड़ी + गोबर का सवनाही; राउत-नीम, लोहार-कील।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: हरेली किस तिथि को मनाई जाती है? उत्तर: सावन/श्रावण अमावस्या।
  2. प्रश्न: हरेली का उपनाम क्या है? उत्तर: गेंड़ी पर्व।
  3. प्रश्न: गोरइंया देव किसके रक्षक हैं? उत्तर: पशुओं के।
  4. प्रश्न: सवनाही क्या है? उत्तर: महिलाओं द्वारा घर की मुख्य दीवार पर गोबर से बनाया चित्र।
  5. प्रश्न: बस्तर में हरेली को क्या कहते हैं? उत्तर: अमुस त्यौहार।
  6. प्रश्न: हरेली का प्रमुख व्यंजन कौन-सा है? उत्तर: गुड़ चीला।

अभ्यास प्रश्न

  1. छत्तीसगढ़ के निम्नलिखित में से किस त्यौहार के अवसर पर ग्रामीणों द्वारा घर के बाहर गोबर से प्रेत का चित्र बनाया जाता है ? (CG PSC-ADVNS-2013)

    • (A) दीपावली
    • (B) मातर
    • (C) गोवर्धन पूजा
    • (D) हरेली
  2. छत्तीसगढ़ में अच्छी फसल के लिए मानसून हेतु कौन सा त्यौहार मनाया जाता है, जिसमें देवी ‘‘कुटकी दाई‘‘ की पूजा-अर्चना की जाती है ?

    • (A) हरेली
    • (B) मडई
    • (C) भगोरिया
    • (D) नवाखाना
  3. बच्चे गेंड़ी कौन से त्यौहार पर चढ़ते हैं

    • (A) हरेली
    • (B) पोला
    • (C) अक्ती
    • (D) हलषष्ठी
  4. किस त्योहार में छत्तीसगढ के किसान अपने कृषि औजारों की पूजा करते हैं ?

    • (A) हरेली
    • (B) दशहरा
    • (C) दीपावली (CG PSC-ADS-2017)
    • (D) होली
  5. छत्तीसगढ़ में “हरेली” नामक पर्व निम्नलिखित में से किसके द्वारा मनाया जाता है?

    • (A) किसान
    • (B) व्यापारी
    • (C) जुलाहे
    • (D) साहूकार
  6. निम्न में से कौन एक लोकनृत्य छत्तीसगढ़ का है?

    • (A) गिद्धा
    • (B) कालबेलिया
    • (C) तमाशा
    • (D) गेंड़ी
  7. छत्तीसगढ़ में “हरेली’ त्यौहार में किसकी पूजा करते हैं

    • (A) गाय
    • (B) बैल
    • (C) भैंस
    • (D) कृषि उपकरण
  8. ‘हरेली’ त्यौहार किस पर आधारित पर्व है ?

    • (A) दशहरा
    • (B) दीवाली
    • (C) कृषि
    • (D) होली

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (D) - हरेली पर घर के बाहर गोबर से प्रेत बनाया जाता है।
  2. (A) - हरेली में कुटकी देवी की पूजा-अर्चना की जाती है।
  3. (A) - हरेली पर बच्चे गेंड़ी बनाते और चढ़ते हैं।
  4. (A) - हरेली में किसान कृषि औजारों की पूजा करते हैं।
  5. (A) - हरेली मुख्य रूप से किसानों द्वारा मनाई जाती है।
  6. (D) - गेंड़ी नृत्य हरेली से जुड़ा नृत्य है।
  7. (D) - हरेली में कृषि उपकरणों/औजारों की पूजा होती है।
  8. (C) - हरेली कृषि-संस्कृति का त्यौहार है।
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