कुवार से फागुन तक के पर्व
वर्ष के उत्तरार्ध में पर्व फसल कटाई, दीपावली, पशु-पूजा और शिव-पार्वती/गौरा-गौरी से जुड़े हैं। बस्तर की जनजातियों (माड़िया, गोंड, कोरवा) के पर्व भी परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
कुवार / आश्विन (सितम्बर-अक्टूबर)
बेटाजूतिया (जीवित्पुत्रिका व्रत)
- तिथि: आठे (पितर पाख)।
- महिलाएँ पुत्रों की मंगलकामना से व्रत रखती हैं; इस दिन चिटचिटा (एक पौधा) की दातुन करती हैं।
- विशेष: सास के जीवित रहते बहू को यह उपवास आवश्यक नहीं; सास के मरते ही व्रत निभाना पड़ता है।
जोत-जंवारा पर्व
- वर्ष में दो बार, कुवार तथा चैत्र माह में नवरात्रि (जंवारा पर्व) होती है।
- पहले दिन माता के मंदिर में ज्योति स्थापित कर जंवारा बोया जाता है।
भाईजूतिया
- अवसर: दुर्गा अष्टमी।
- बहनें भाई की कल्याण कामना से निर्जला उपवास रखती हैं।
- विशेष: मूढ़र घर में या पुजहाई कुरिया में खांड़ा (तलवार) थापकर जूतिया चढ़ाती हैं।
दशहरा / विजयादशमी
- कुवार शुक्ल पक्ष दशमी; रावण पर राम की विजय के प्रतीक रूप में मनाया जाता है।
शरद पूर्णिमा
- मान्यता: इस दिन आसमान से अमृत बरसता है, जिसे खीर के माध्यम से ग्रहण किया जाता है।
कोरा पर्व
- जनजाति: कोरवा; आश्विन माह (सितम्बर) में।
- कुटकी और गोंदली की फसल काटने के बाद, कृषि के दौरान आदिवासी मनाते हैं।
कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर)
दीपावली
- अवसर: कार्तिक अमावस्या।
- बस्तर क्षेत्र में डंडारी नृत्य होता है।
- लक्ष्मी पूजन को छत्तीसगढ़ में सुरहोती भी कहते हैं।
- गोबर से चित्रांकन की परंपरा है।
दियारी पर्व
- जनजाति: माड़िया; क्षेत्र: बस्तर; अवसर: दीपावली के समय।
- अन्य नाम: दिहाड़ी / पंडुम।
- कार्यक्रम: पशुओं को विशेष व्यंजन खिलाया जाता है; फसल की पूजा होती है।
गौरा / गौरी-गौरा पर्व
- जनजाति: गोंड; समय: दीपावली के समय, कार्तिक अमावस्या से 5-7 दिन पूर्व प्रारंभ।
- रस्में: फूल कुचरना, करसा परघना, अखरा, डड़ैया।
- विशेष: शिव-पार्वती (गौरा-गौरी) का विवाह उत्सव।
गोवर्धन पूजा
- अवसर: कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रथमा।
- गोबर की विशेष आकृतियाँ बनाकर पशुओं के खुर से कुचलवाई जाती हैं और उस गोबर को तिलक के रूप में लगाया जाता है।
मातर त्यौहार
- कार्तिक माह में (गोवर्धन पूजा के बाद); राउत/यादव जाति में प्रचलित।
- राउत लकड़ी से बने खोड़हर देव की पूजा करते हैं; पशुधन को सोहाई बाँधते हैं और दोहा पढ़कर नृत्य करते हैं।
- सोहाई मोर पंख और पलाश से बने धागे जैसी संरचना होती है।
आँवला पूजा (आँवला नवमी)
- कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी; ग्रामीण आँवला पेड़ के नीचे सामूहिक भोज करते हैं।
देवउठनी एकादशी / जेठउनी / तुलसी विवाह
- कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी); तुलसी की पूजा, गन्ने से मण्डप बनाकर।
पौष (दिसम्बर-जनवरी)
बड़े भजन का रामनामी मेला
- पौष/पूस शुक्ल पक्ष एकादशी; क्षेत्र: सारंगढ़, पामगढ़, बिलाईगढ़, कसडोल आदि।
- द्वारा: रामनामी सम्प्रदाय; अवधि: 3 दिन।
छेरछेरा पर्व
- आयोजन: पौष पूर्णिमा; गीत: ‘छेरछेरा कोठी के धान ला हेरते हेरा’।
- धान फसल घर आने के उपलक्ष्य में; बच्चे घर-घर जाकर धान एकत्र करते हैं; लड़कियाँ सुआ नृत्य करती हैं; युवकों की टोलियाँ डंडा नृत्य करती हैं।
छेरता पर्व
- छेरता का अर्थ धरती; जनजाति: गोंड, भूमिका, पनका; पौष पूर्णिमा को।
- कृषक इसी दिन लेखा-जोखा और हिसाब-किताब का बंदोबस्त करते हैं।
माघ (जनवरी-फरवरी): धेरसा पर्व
- जनजाति: कोरवा; माघ माह में।
- सरसों, दलहन आदि की फसल कटाई के बाद, कृषि के दौरान।
फाल्गुन (फरवरी-मार्च): मेघनाथ पर्व
- जनजाति: गोंड, कोरकू; फागुन में होली के दूसरे दिन; प्रमुखतः बस्तर क्षेत्र में।
- गोंड मेघनाथ की स्मृति में स्तंभ स्थापित कर नृत्य करते हैं।
तुलना एवं संबंध
| पर्व | जनजाति/वर्ग | माह |
|---|---|---|
| कोरा | कोरवा | आश्विन |
| दियारी | माड़िया (बस्तर) | कार्तिक (दीपावली) |
| गौरा-गौरी | गोंड | कार्तिक |
| मातर | राउत/यादव | कार्तिक |
| छेरता | गोंड, भूमिका, पनका | पौष |
| धेरसा | कोरवा | माघ |
| मेघनाथ | गोंड, कोरकू | फाल्गुन |
ध्यान दें: छेरछेरा (धान माँगना, पौष पूर्णिमा) और छेरता (जनजातीय लेखा-जोखा, पौष पूर्णिमा) समान तिथि पर हैं, पर अलग पर्व हैं।
याद रखने योग्य बिंदु
- बेटाजूतिया में चिटचिटा की दातुन।
- भाईजूतिया दुर्गा अष्टमी को, बहनें निर्जला रखती हैं।
- सुरहोती = दीपावली का लक्ष्मी पूजन।
- दियारी के अन्य नाम दिहाड़ी/पंडुम।
- गौरा-गौरी शिव-पार्वती का विवाह उत्सव।
- मातर में राउत खोड़हर देव पूजते हैं।
- देवउठनी में गन्ने का मण्डप।
- रामनामी मेला 3 दिन का।
- छेरछेरा में बच्चे धान एकत्र करते हैं।
- छेरता का अर्थ धरती।
- मेघनाथ पर्व होली के दूसरे दिन।
स्मरण सूत्र
‘कोरवा के दो: कोरा (आश्विन), धेरसा (माघ)’। ‘गोंड के तीन: गौरा, छेरता, मेघनाथ (कोरकू साथ)’।
स्वयं जाँचें
- प्र. सुरहोती क्या है? उ. दीपावली का लक्ष्मी पूजन।
- प्र. मातर किस जाति में प्रचलित है? उ. राउत/यादव।
- प्र. दियारी पर्व किस जनजाति का है? उ. माड़िया।
- प्र. रामनामी मेला कितने दिन चलता है? उ. 3 दिन।
- प्र. धेरसा पर्व किसका है? उ. कोरवा जनजाति का।
- प्र. मेघनाथ पर्व कब होता है? उ. फागुन में होली के दूसरे दिन।
अभ्यास प्रश्न
छत्तीसगढ़ के किस पर्व के दौरान 'खोधर देव' की पूजा की जाती है?
- (A) कोरा
- (B) मेघनाथ
- (C) मातर
- (D) कक्सार
Q. बड़े भजन का रामनामी मेला किस माह में लगता है
- (A) पौष
- (B) माघ
- (C) भादों
- (D) फागुन
मातर त्यौहार कब मनाते हैं – (CG PSC-SEE-2017)
- (A) होली के बाद
- (B) गोवर्धन पूजा के बाद
- (C) पोला के बाद
- (D) दशहरा के बाद
ऐसा कौन सा त्योहार है जिसमें बच्चे पौष मास की पूर्णिमा के दिन एक दूसरे के घर धान मांगने जाते हैं?
- (A) आक्ती
- (B) हरेली
- (C) पोला
- (D) छेरछेरा
छेरछेरा किससे सम्बन्धित है?
- (A) दीपावली से
- (B) होली से
- (C) नई फसल के कटने में
- (D) पोला से
छत्तीसगढ़ में इनमें से कौन सा पर्व शिव-पार्वती विवाह से संबंधित है?
- (A) हरेली
- (B) तीजा
- (C) गौरी-गौरा
- (D) अक्ति
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (C) - मातर में राउत खोड़हर देव की पूजा करते हैं।
- (A) - रामनामी बड़े भजन का मेला पौष शुक्ल एकादशी को लगता है।
- (B) - मातर कार्तिक में गोवर्धन पूजा के बाद मनाया जाता है।
- (D) - छेरछेरा पौष पूर्णिमा को बच्चे घर-घर धान एकत्र करते हैं।
- (C) - छेरछेरा धान की फसल घर आने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
- (C) - गौरा-गौरी शिव-पार्वती का विवाह उत्सव है।
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