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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 18
कुवार से फागुन तक के पर्व (आश्विन, कार्तिक, पौष, माघ, फाल्गुन)

कुवार से फागुन तक के पर्व

वर्ष के उत्तरार्ध में पर्व फसल कटाई, दीपावली, पशु-पूजा और शिव-पार्वती/गौरा-गौरी से जुड़े हैं। बस्तर की जनजातियों (माड़िया, गोंड, कोरवा) के पर्व भी परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।

कुवार / आश्विन (सितम्बर-अक्टूबर)

बेटाजूतिया (जीवित्पुत्रिका व्रत)

  • तिथि: आठे (पितर पाख)।
  • महिलाएँ पुत्रों की मंगलकामना से व्रत रखती हैं; इस दिन चिटचिटा (एक पौधा) की दातुन करती हैं।
  • विशेष: सास के जीवित रहते बहू को यह उपवास आवश्यक नहीं; सास के मरते ही व्रत निभाना पड़ता है।

जोत-जंवारा पर्व

  • वर्ष में दो बार, कुवार तथा चैत्र माह में नवरात्रि (जंवारा पर्व) होती है।
  • पहले दिन माता के मंदिर में ज्योति स्थापित कर जंवारा बोया जाता है।

भाईजूतिया

  • अवसर: दुर्गा अष्टमी।
  • बहनें भाई की कल्याण कामना से निर्जला उपवास रखती हैं।
  • विशेष: मूढ़र घर में या पुजहाई कुरिया में खांड़ा (तलवार) थापकर जूतिया चढ़ाती हैं।

दशहरा / विजयादशमी

  • कुवार शुक्ल पक्ष दशमी; रावण पर राम की विजय के प्रतीक रूप में मनाया जाता है।

शरद पूर्णिमा

  • मान्यता: इस दिन आसमान से अमृत बरसता है, जिसे खीर के माध्यम से ग्रहण किया जाता है।

कोरा पर्व

  • जनजाति: कोरवा; आश्विन माह (सितम्बर) में।
  • कुटकी और गोंदली की फसल काटने के बाद, कृषि के दौरान आदिवासी मनाते हैं।

कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर)

दीपावली

  • अवसर: कार्तिक अमावस्या।
  • बस्तर क्षेत्र में डंडारी नृत्य होता है।
  • लक्ष्मी पूजन को छत्तीसगढ़ में सुरहोती भी कहते हैं।
  • गोबर से चित्रांकन की परंपरा है।

दियारी पर्व

  • जनजाति: माड़िया; क्षेत्र: बस्तर; अवसर: दीपावली के समय।
  • अन्य नाम: दिहाड़ी / पंडुम।
  • कार्यक्रम: पशुओं को विशेष व्यंजन खिलाया जाता है; फसल की पूजा होती है।

गौरा / गौरी-गौरा पर्व

  • जनजाति: गोंड; समय: दीपावली के समय, कार्तिक अमावस्या से 5-7 दिन पूर्व प्रारंभ।
  • रस्में: फूल कुचरना, करसा परघना, अखरा, डड़ैया।
  • विशेष: शिव-पार्वती (गौरा-गौरी) का विवाह उत्सव।

गोवर्धन पूजा

  • अवसर: कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रथमा।
  • गोबर की विशेष आकृतियाँ बनाकर पशुओं के खुर से कुचलवाई जाती हैं और उस गोबर को तिलक के रूप में लगाया जाता है।

मातर त्यौहार

  • कार्तिक माह में (गोवर्धन पूजा के बाद); राउत/यादव जाति में प्रचलित।
  • राउत लकड़ी से बने खोड़हर देव की पूजा करते हैं; पशुधन को सोहाई बाँधते हैं और दोहा पढ़कर नृत्य करते हैं।
  • सोहाई मोर पंख और पलाश से बने धागे जैसी संरचना होती है।

आँवला पूजा (आँवला नवमी)

  • कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी; ग्रामीण आँवला पेड़ के नीचे सामूहिक भोज करते हैं।

देवउठनी एकादशी / जेठउनी / तुलसी विवाह

  • कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी); तुलसी की पूजा, गन्ने से मण्डप बनाकर।

पौष (दिसम्बर-जनवरी)

बड़े भजन का रामनामी मेला

  • पौष/पूस शुक्ल पक्ष एकादशी; क्षेत्र: सारंगढ़, पामगढ़, बिलाईगढ़, कसडोल आदि।
  • द्वारा: रामनामी सम्प्रदाय; अवधि: 3 दिन।

छेरछेरा पर्व

  • आयोजन: पौष पूर्णिमा; गीत: ‘छेरछेरा कोठी के धान ला हेरते हेरा’।
  • धान फसल घर आने के उपलक्ष्य में; बच्चे घर-घर जाकर धान एकत्र करते हैं; लड़कियाँ सुआ नृत्य करती हैं; युवकों की टोलियाँ डंडा नृत्य करती हैं।

छेरता पर्व

  • छेरता का अर्थ धरती; जनजाति: गोंड, भूमिका, पनका; पौष पूर्णिमा को।
  • कृषक इसी दिन लेखा-जोखा और हिसाब-किताब का बंदोबस्त करते हैं।

माघ (जनवरी-फरवरी): धेरसा पर्व

  • जनजाति: कोरवा; माघ माह में।
  • सरसों, दलहन आदि की फसल कटाई के बाद, कृषि के दौरान।

फाल्गुन (फरवरी-मार्च): मेघनाथ पर्व

  • जनजाति: गोंड, कोरकू; फागुन में होली के दूसरे दिन; प्रमुखतः बस्तर क्षेत्र में।
  • गोंड मेघनाथ की स्मृति में स्तंभ स्थापित कर नृत्य करते हैं।

तुलना एवं संबंध

पर्वजनजाति/वर्गमाह
कोराकोरवाआश्विन
दियारीमाड़िया (बस्तर)कार्तिक (दीपावली)
गौरा-गौरीगोंडकार्तिक
मातरराउत/यादवकार्तिक
छेरतागोंड, भूमिका, पनकापौष
धेरसाकोरवामाघ
मेघनाथगोंड, कोरकूफाल्गुन

ध्यान दें: छेरछेरा (धान माँगना, पौष पूर्णिमा) और छेरता (जनजातीय लेखा-जोखा, पौष पूर्णिमा) समान तिथि पर हैं, पर अलग पर्व हैं।

याद रखने योग्य बिंदु

  • बेटाजूतिया में चिटचिटा की दातुन।
  • भाईजूतिया दुर्गा अष्टमी को, बहनें निर्जला रखती हैं।
  • सुरहोती = दीपावली का लक्ष्मी पूजन।
  • दियारी के अन्य नाम दिहाड़ी/पंडुम।
  • गौरा-गौरी शिव-पार्वती का विवाह उत्सव।
  • मातर में राउत खोड़हर देव पूजते हैं।
  • देवउठनी में गन्ने का मण्डप।
  • रामनामी मेला 3 दिन का।
  • छेरछेरा में बच्चे धान एकत्र करते हैं।
  • छेरता का अर्थ धरती।
  • मेघनाथ पर्व होली के दूसरे दिन।

स्मरण सूत्र

‘कोरवा के दो: कोरा (आश्विन), धेरसा (माघ)’। ‘गोंड के तीन: गौरा, छेरता, मेघनाथ (कोरकू साथ)’।

स्वयं जाँचें

  1. प्र. सुरहोती क्या है? उ. दीपावली का लक्ष्मी पूजन।
  2. प्र. मातर किस जाति में प्रचलित है? उ. राउत/यादव।
  3. प्र. दियारी पर्व किस जनजाति का है? उ. माड़िया।
  4. प्र. रामनामी मेला कितने दिन चलता है? उ. 3 दिन।
  5. प्र. धेरसा पर्व किसका है? उ. कोरवा जनजाति का।
  6. प्र. मेघनाथ पर्व कब होता है? उ. फागुन में होली के दूसरे दिन।

अभ्यास प्रश्न

  1. छत्तीसगढ़ के किस पर्व के दौरान 'खोधर देव' की पूजा की जाती है?

    • (A) कोरा
    • (B) मेघनाथ
    • (C) मातर
    • (D) कक्सार
  2. Q. बड़े भजन का रामनामी मेला किस माह में लगता है

    • (A) पौष
    • (B) माघ
    • (C) भादों
    • (D) फागुन
  3. मातर त्यौहार कब मनाते हैं – (CG PSC-SEE-2017)

    • (A) होली के बाद
    • (B) गोवर्धन पूजा के बाद
    • (C) पोला के बाद
    • (D) दशहरा के बाद
  4. ऐसा कौन सा त्योहार है जिसमें बच्चे पौष मास की पूर्णिमा के दिन एक दूसरे के घर धान मांगने जाते हैं?

    • (A) आक्ती
    • (B) हरेली
    • (C) पोला
    • (D) छेरछेरा
  5. छेरछेरा किससे सम्बन्धित है?

    • (A) दीपावली से
    • (B) होली से
    • (C) नई फसल के कटने में
    • (D) पोला से
  6. छत्तीसगढ़ में इनमें से कौन सा पर्व शिव-पार्वती विवाह से संबंधित है?

    • (A) हरेली
    • (B) तीजा
    • (C) गौरी-गौरा
    • (D) अक्ति

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (C) - मातर में राउत खोड़हर देव की पूजा करते हैं।
  2. (A) - रामनामी बड़े भजन का मेला पौष शुक्ल एकादशी को लगता है।
  3. (B) - मातर कार्तिक में गोवर्धन पूजा के बाद मनाया जाता है।
  4. (D) - छेरछेरा पौष पूर्णिमा को बच्चे घर-घर धान एकत्र करते हैं।
  5. (C) - छेरछेरा धान की फसल घर आने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
  6. (C) - गौरा-गौरी शिव-पार्वती का विवाह उत्सव है।
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