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छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कला, साहित्य एवं खेल · Chapter 15
चैत्र से आषाढ़ के प्रमुख पर्व: विस्तृत वर्णन

चैत्र से आषाढ़ के प्रमुख पर्व: विस्तृत वर्णन

पिछली तालिका के प्रमुख पर्वों का यहाँ क्षेत्र, जनजाति, अवसर और रीति सहित विवरण है। ये पर्व सीधे परीक्षा-प्रश्न बनते हैं, जैसे "सरहुल किसका पर्व", "गोंचा कहाँ", "अक्ती पर क्या परंपरा"।

चैत्र माह (मार्च-अप्रैल)

पर्वविवरण
सरहुलक्षेत्र: सरगुजा; जनजाति: उराँव; अवसर: चैत्र पूर्णिमा; साल वृक्ष में फूल आने पर सूर्यदेव (धर्मेश) और धरती माता के विवाह आयोजन के रूप में
माटी तिहार/बीजपुटनीबस्तर अंचल में; चैत्र माह से आरंभ; पृथ्वी की पूजा; भोपालपट्टनम एवं बीजापुर में यह बैशाख या ज्येष्ठ माह में मनाया जाता है
गोबर बोहरानीअप्रैल माह में; क्षेत्र: छिंदगढ़ विकासखण्ड (सुकमा); शस्त्र पूजा एवं आखेट पर आधारित पर्व
चैतरईजनजाति: परजा-धुरवा; चैत्र माह; जनश्रुति अनुसार सुअर और मुर्गे की बलि चढ़ाई जाती है; प्रसिद्ध धुरवा नृत्य किया जाता है
चैत नवरात्रिचैत्र शुक्ल प्रथमा से नवमी तक; देवी शक्तियों की उपासना
रामनवमीचैत्र शुक्ल पक्ष नवमी (श्रीराम जन्मोत्सव); डभरा (सक्ती) में मेला
बासी तिहारअप्रैल माह में; जनजातियों में वर्ष का अंतिम पर्व

चैत नवरात्रि की विशेषताएँ

  • प्रमुख देवियाँ: बम्लेश्वरी, दंतेश्वरी, चन्द्रहासिनी, विन्ध्यवासिनी, बिलाईमाता, महामाया, अंगारमोती एवं गंगाई माता।
  • बिरही फिलोना: चैत्र शुक्ल प्रथमा को गेहूँ के दाने को विधि-विधान से भिगोया जाता है।
  • प्रथा: जंवारा खींचकर मितान (मित्र) बनते हैं।
  • वाद्ययंत्र: चांग एवं मांदर।

बैशाख माह (अप्रैल-मई)

  • अक्षय तृतीया (अक्ती): बैसाख शुक्ल पक्ष तृतीया; जल दान की परंपरा; ग्राम देवता की पूजा कर पलाश पत्ते (परसा पान) के दोने में धान भरकर माता देवाला में भेंट चढ़ाने की परंपरा।
  • इस दौरान पुतरा-पुतरी का विवाह करते हैं; मान्यता है कि इस दिन किया गया शुभ कार्य अक्षय फल देता है।
  • अरवा तीज: बैशाख माह; अविवाहित लड़कियाँ आम की डाली से मण्डप बनाती हैं और विवाह का स्वरूप लिए हुए विभिन्न रस्मों को निभाती हैं।

ज्येष्ठ माह (मई-जून)

  • भीमा जतरा: बस्तर एवं दंतेवाड़ा क्षेत्र में; ज्येष्ठ माह; भीम-भीमसेन को इन्द्रदेव के रूप में तथा ग्राम देव की पूजा।
  • अच्छी फसल, बारिश, कृषि में विघ्न न होने और खुशहाली की कामना; जनश्रुति के अनुसार अच्छी वर्षा हेतु मेंढ़का-मेंढ़की का विवाह किया जाता है।
  • भीमा देव को खेतिहर देवता कहा जाता है।
  • गंगा दशहरा: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी; मान्यता कि गंगा माता स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई; सरगुजा अंचल में बैकुंठपुर एवं चिरमिरी में मेला; जल स्रोतों एवं नदियों की सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक महत्ता रेखांकित; लोग तालाब-पोखर पर स्नान कर पूजा-पाठ करते हैं।

आषाढ़ माह (जून-जुलाई)

  • गोंचा पर्व: बस्तर क्षेत्र में; आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया; स्थान: जगदलपुर (बस्तर); पूजा: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा; आराध्य देवी: गूंडाचा देवी।
  • बीज बोहनी: कोरवा जनजाति; आषाढ़ माह; मुख्यतः कृषि के दौरान और कई क्षेत्रों में बीज बोने से पूर्व मनाई जाती है।
  • रथ द्वितीया (रथयात्रा): आषाढ़ शुक्ल द्वितीया; काष्ठ से निर्मित भगवान जगन्नाथ की मूर्ति की पूजा; शोभायात्रा में जगन्नाथ, बलभद्र (बलराम) और सुभद्रा; प्रसाद गजा मूंग; गजा मूंग खिलाकर मितान बदलने की प्रथा।

तुलना एवं संबंध

पर्वक्षेत्र/जनजातिमाह
सरहुलसरगुजा, उराँवचैत्र
माटी तिहारबस्तरचैत्र (भोपालपट्टनम-बीजापुर में बैशाख/ज्येष्ठ)
गोबर बोहरानीछिंदगढ़, सुकमाचैत्र/अप्रैल
चैतरईपरजा-धुरवाचैत्र
भीमा जतराबस्तर, दंतेवाड़ाज्येष्ठ
गोंचाजगदलपुरआषाढ़
बीज बोहनीकोरवाआषाढ़

मूल पाठ में भिन्नता: सारणी में सरहुल को चैत्र माह के अंतर्गत सरगुजा में और विस्तृत वर्णन में चैत्र पूर्णिमा को बताया गया है; माटी तिहार के लिए भोपालपट्टनम-बीजापुर में अलग माह कहा गया है। भीमा जात्रा को एक जगह केवल बस्तर तथा दूसरी जगह बस्तर-दंतेवाड़ा में बताया गया है।

याद रखने योग्य बिंदु

  • सरहुल: उराँव, सरगुजा, सूर्यदेव-धरती माता का विवाह।
  • माटी तिहार का दूसरा नाम बीजपुटनी है।
  • गोबर बोहरानी: छिंदगढ़ (सुकमा), शस्त्र पूजा और आखेट।
  • चैतरई: परजा-धुरवा, धुरवा नृत्य।
  • बिरही फिलोना नवरात्रि के प्रथम दिन गेहूँ भिगोने की रस्म है।
  • अक्ती पर पुतरा-पुतरी विवाह और जल दान।
  • अरवा तीज में लड़कियाँ आम की डाली का मण्डप बनाती हैं।
  • भीमा देव खेतिहर देवता; इंद्रदेव के रूप में पूजा।
  • गंगा दशहरा मेला: बैकुंठपुर एवं चिरमिरी।
  • गोंचा की देवी गूंडाचा; प्रसाद गजा मूंग।

स्मरण सूत्र

"सरहुल-उराँव-सूर्य", "गोंचा=गजा" (गोंचा का प्रसाद गजा मूंग)।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: सरहुल किस जनजाति का पर्व है? उत्तर: उराँव।
  2. प्रश्न: गोबर बोहरानी किस क्षेत्र में मनाया जाता है? उत्तर: छिंदगढ़ विकासखण्ड, सुकमा।
  3. प्रश्न: चैतरई में कौन-सा नृत्य होता है? उत्तर: धुरवा नृत्य।
  4. प्रश्न: अक्ती किस तिथि को मनाई जाती है? उत्तर: बैसाख शुक्ल पक्ष तृतीया।
  5. प्रश्न: भीमा देव को क्या कहा जाता है? उत्तर: खेतिहर देवता।
  6. प्रश्न: गोंचा पर्व का प्रसाद क्या है? उत्तर: गजा मूंग।

अभ्यास प्रश्न

  1. Q. गंगा दशहरा कब मनाया जाता है ?

    • (A) चैत्र
    • (B) वैशाख
    • (C) ज्येष्ठ
    • (D) आषाढ़
  2. गोबर बोहरानी का प्रचलन है:

    • (A) माकडी
    • (B) फरसगांव
    • (C) छिंदगढ़
    • (D) कटेकल्याण Q. किस पर्व मे सूर्यदेव एवं धरती माता का प्रतिकात्मक विवाह रचाया जाता
  3. छत्तीसगढ़ में किस जनजाति में सरहुल लोक नृत्य प्रचलित है?

    • (A) बैंगा
    • (B) परधान
    • (C) कोरवा
    • (D) उराँव
  4. बस्तर का गोंचा पर्व क्या है ?

    • (A) भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा
    • (B) मावली देवी की पूजा
    • (C) बस्तर राज्य का महोत्सव
    • (D) बस्तर की मड़ाई
  5. गोंचा पर्व किस माह में मनाया जाता है – (CG PSC-Pre-2014)

    • (A) ज्येष्ठ
    • (B) आषाढ़
    • (C) श्रावण
    • (D) भाद्रपद
  6. कौन-सा पर्व सरगुजा क्षेत्र में गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है?

    • (A) लारूकाज
    • (B) गंगा दशमी
    • (C) नवरात्रि
    • (D) इनमें से कोई नहीं
  7. बस्तर संभाग में कौन सा पर्व मुख्य रूप से जगदलपुर प्रक्षेत्र में विशेष लोकप्रिय है?

    • (A) लक्ष्मी जगार
    • (B) अमँस तिहार
    • (C) चरू जातरा
    • (D) गोंचा पर्व

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (C) - गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी को मनाया जाता है।
  2. (C) - गोबर बोहरानी का प्रचलन छिंदगढ़ विकासखण्ड (सुकमा) में है।
  3. (D) - सरहुल उराँव जनजाति का पर्व है।
  4. (A) - गोंचा पर्व भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा है।
  5. (B) - गोंचा पर्व आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है।
  6. (B) - सरगुजा क्षेत्र में गंगा दशहरा गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की मान्यता से जुड़ा है।
  7. (D) - गोंचा पर्व जगदलपुर (बस्तर) में मनाया जाता है।
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