चैत्र से आषाढ़ के प्रमुख पर्व: विस्तृत वर्णन
पिछली तालिका के प्रमुख पर्वों का यहाँ क्षेत्र, जनजाति, अवसर और रीति सहित विवरण है। ये पर्व सीधे परीक्षा-प्रश्न बनते हैं, जैसे "सरहुल किसका पर्व", "गोंचा कहाँ", "अक्ती पर क्या परंपरा"।
चैत्र माह (मार्च-अप्रैल)
| पर्व | विवरण |
|---|---|
| सरहुल | क्षेत्र: सरगुजा; जनजाति: उराँव; अवसर: चैत्र पूर्णिमा; साल वृक्ष में फूल आने पर सूर्यदेव (धर्मेश) और धरती माता के विवाह आयोजन के रूप में |
| माटी तिहार/बीजपुटनी | बस्तर अंचल में; चैत्र माह से आरंभ; पृथ्वी की पूजा; भोपालपट्टनम एवं बीजापुर में यह बैशाख या ज्येष्ठ माह में मनाया जाता है |
| गोबर बोहरानी | अप्रैल माह में; क्षेत्र: छिंदगढ़ विकासखण्ड (सुकमा); शस्त्र पूजा एवं आखेट पर आधारित पर्व |
| चैतरई | जनजाति: परजा-धुरवा; चैत्र माह; जनश्रुति अनुसार सुअर और मुर्गे की बलि चढ़ाई जाती है; प्रसिद्ध धुरवा नृत्य किया जाता है |
| चैत नवरात्रि | चैत्र शुक्ल प्रथमा से नवमी तक; देवी शक्तियों की उपासना |
| रामनवमी | चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी (श्रीराम जन्मोत्सव); डभरा (सक्ती) में मेला |
| बासी तिहार | अप्रैल माह में; जनजातियों में वर्ष का अंतिम पर्व |
चैत नवरात्रि की विशेषताएँ
- प्रमुख देवियाँ: बम्लेश्वरी, दंतेश्वरी, चन्द्रहासिनी, विन्ध्यवासिनी, बिलाईमाता, महामाया, अंगारमोती एवं गंगाई माता।
- बिरही फिलोना: चैत्र शुक्ल प्रथमा को गेहूँ के दाने को विधि-विधान से भिगोया जाता है।
- प्रथा: जंवारा खींचकर मितान (मित्र) बनते हैं।
- वाद्ययंत्र: चांग एवं मांदर।
बैशाख माह (अप्रैल-मई)
- अक्षय तृतीया (अक्ती): बैसाख शुक्ल पक्ष तृतीया; जल दान की परंपरा; ग्राम देवता की पूजा कर पलाश पत्ते (परसा पान) के दोने में धान भरकर माता देवाला में भेंट चढ़ाने की परंपरा।
- इस दौरान पुतरा-पुतरी का विवाह करते हैं; मान्यता है कि इस दिन किया गया शुभ कार्य अक्षय फल देता है।
- अरवा तीज: बैशाख माह; अविवाहित लड़कियाँ आम की डाली से मण्डप बनाती हैं और विवाह का स्वरूप लिए हुए विभिन्न रस्मों को निभाती हैं।
ज्येष्ठ माह (मई-जून)
- भीमा जतरा: बस्तर एवं दंतेवाड़ा क्षेत्र में; ज्येष्ठ माह; भीम-भीमसेन को इन्द्रदेव के रूप में तथा ग्राम देव की पूजा।
- अच्छी फसल, बारिश, कृषि में विघ्न न होने और खुशहाली की कामना; जनश्रुति के अनुसार अच्छी वर्षा हेतु मेंढ़का-मेंढ़की का विवाह किया जाता है।
- भीमा देव को खेतिहर देवता कहा जाता है।
- गंगा दशहरा: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी; मान्यता कि गंगा माता स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई; सरगुजा अंचल में बैकुंठपुर एवं चिरमिरी में मेला; जल स्रोतों एवं नदियों की सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक महत्ता रेखांकित; लोग तालाब-पोखर पर स्नान कर पूजा-पाठ करते हैं।
आषाढ़ माह (जून-जुलाई)
- गोंचा पर्व: बस्तर क्षेत्र में; आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया; स्थान: जगदलपुर (बस्तर); पूजा: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा; आराध्य देवी: गूंडाचा देवी।
- बीज बोहनी: कोरवा जनजाति; आषाढ़ माह; मुख्यतः कृषि के दौरान और कई क्षेत्रों में बीज बोने से पूर्व मनाई जाती है।
- रथ द्वितीया (रथयात्रा): आषाढ़ शुक्ल द्वितीया; काष्ठ से निर्मित भगवान जगन्नाथ की मूर्ति की पूजा; शोभायात्रा में जगन्नाथ, बलभद्र (बलराम) और सुभद्रा; प्रसाद गजा मूंग; गजा मूंग खिलाकर मितान बदलने की प्रथा।
तुलना एवं संबंध
| पर्व | क्षेत्र/जनजाति | माह |
|---|---|---|
| सरहुल | सरगुजा, उराँव | चैत्र |
| माटी तिहार | बस्तर | चैत्र (भोपालपट्टनम-बीजापुर में बैशाख/ज्येष्ठ) |
| गोबर बोहरानी | छिंदगढ़, सुकमा | चैत्र/अप्रैल |
| चैतरई | परजा-धुरवा | चैत्र |
| भीमा जतरा | बस्तर, दंतेवाड़ा | ज्येष्ठ |
| गोंचा | जगदलपुर | आषाढ़ |
| बीज बोहनी | कोरवा | आषाढ़ |
मूल पाठ में भिन्नता: सारणी में सरहुल को चैत्र माह के अंतर्गत सरगुजा में और विस्तृत वर्णन में चैत्र पूर्णिमा को बताया गया है; माटी तिहार के लिए भोपालपट्टनम-बीजापुर में अलग माह कहा गया है। भीमा जात्रा को एक जगह केवल बस्तर तथा दूसरी जगह बस्तर-दंतेवाड़ा में बताया गया है।
याद रखने योग्य बिंदु
- सरहुल: उराँव, सरगुजा, सूर्यदेव-धरती माता का विवाह।
- माटी तिहार का दूसरा नाम बीजपुटनी है।
- गोबर बोहरानी: छिंदगढ़ (सुकमा), शस्त्र पूजा और आखेट।
- चैतरई: परजा-धुरवा, धुरवा नृत्य।
- बिरही फिलोना नवरात्रि के प्रथम दिन गेहूँ भिगोने की रस्म है।
- अक्ती पर पुतरा-पुतरी विवाह और जल दान।
- अरवा तीज में लड़कियाँ आम की डाली का मण्डप बनाती हैं।
- भीमा देव खेतिहर देवता; इंद्रदेव के रूप में पूजा।
- गंगा दशहरा मेला: बैकुंठपुर एवं चिरमिरी।
- गोंचा की देवी गूंडाचा; प्रसाद गजा मूंग।
स्मरण सूत्र
"सरहुल-उराँव-सूर्य", "गोंचा=गजा" (गोंचा का प्रसाद गजा मूंग)।
स्वयं जाँचें
- प्रश्न: सरहुल किस जनजाति का पर्व है? उत्तर: उराँव।
- प्रश्न: गोबर बोहरानी किस क्षेत्र में मनाया जाता है? उत्तर: छिंदगढ़ विकासखण्ड, सुकमा।
- प्रश्न: चैतरई में कौन-सा नृत्य होता है? उत्तर: धुरवा नृत्य।
- प्रश्न: अक्ती किस तिथि को मनाई जाती है? उत्तर: बैसाख शुक्ल पक्ष तृतीया।
- प्रश्न: भीमा देव को क्या कहा जाता है? उत्तर: खेतिहर देवता।
- प्रश्न: गोंचा पर्व का प्रसाद क्या है? उत्तर: गजा मूंग।
अभ्यास प्रश्न
Q. गंगा दशहरा कब मनाया जाता है ?
- (A) चैत्र
- (B) वैशाख
- (C) ज्येष्ठ
- (D) आषाढ़
गोबर बोहरानी का प्रचलन है:
- (A) माकडी
- (B) फरसगांव
- (C) छिंदगढ़
- (D) कटेकल्याण Q. किस पर्व मे सूर्यदेव एवं धरती माता का प्रतिकात्मक विवाह रचाया जाता
छत्तीसगढ़ में किस जनजाति में सरहुल लोक नृत्य प्रचलित है?
- (A) बैंगा
- (B) परधान
- (C) कोरवा
- (D) उराँव
बस्तर का गोंचा पर्व क्या है ?
- (A) भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा
- (B) मावली देवी की पूजा
- (C) बस्तर राज्य का महोत्सव
- (D) बस्तर की मड़ाई
गोंचा पर्व किस माह में मनाया जाता है – (CG PSC-Pre-2014)
- (A) ज्येष्ठ
- (B) आषाढ़
- (C) श्रावण
- (D) भाद्रपद
कौन-सा पर्व सरगुजा क्षेत्र में गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है?
- (A) लारूकाज
- (B) गंगा दशमी
- (C) नवरात्रि
- (D) इनमें से कोई नहीं
बस्तर संभाग में कौन सा पर्व मुख्य रूप से जगदलपुर प्रक्षेत्र में विशेष लोकप्रिय है?
- (A) लक्ष्मी जगार
- (B) अमँस तिहार
- (C) चरू जातरा
- (D) गोंचा पर्व
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (C) - गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी को मनाया जाता है।
- (C) - गोबर बोहरानी का प्रचलन छिंदगढ़ विकासखण्ड (सुकमा) में है।
- (D) - सरहुल उराँव जनजाति का पर्व है।
- (A) - गोंचा पर्व भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा है।
- (B) - गोंचा पर्व आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है।
- (B) - सरगुजा क्षेत्र में गंगा दशहरा गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की मान्यता से जुड़ा है।
- (D) - गोंचा पर्व जगदलपुर (बस्तर) में मनाया जाता है।