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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 1
छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ: सामान्य परिचय, संवैधानिक आधार एवं सूची

छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ: सामान्य परिचय, संवैधानिक आधार एवं सूची

छत्तीसगढ़ को देश के उन राज्यों में गिना जाता है जहाँ अनुसूचित जनजातियों का हिस्सा बहुत बड़ा है। इस अध्याय में पहले भारत और छत्तीसगढ़ की जनजातियों की आधारभूत तुलना दी गई है, फिर संविधान और अधिनियम से जुड़ा प्रावधान, राज्य के शोध संस्थान और संग्रहालय, और अंत में राज्य की अनुसूची में शामिल जनजातियों की पूरी सूची।

CGPSC, व्यापम और पटवारी जैसी परीक्षाओं में संख्याएँ (43, 161, 30.62%, 78.22 लाख), संस्थानों की स्थापना-तिथियाँ और सूची के नाम बार-बार पूछे जाते हैं। इसलिए यहाँ हर आँकड़े को तालिका में अलग रखा गया है, ताकि तुलना करके याद करना आसान रहे।

ध्यान दें: स्रोत पुस्तक में राज्य की जनजातियों की संख्या एक जगह 43 और अन्यत्र 'मुख्यतः 42' बताई गई है। दोनों अंक इस अध्याय और अगले अध्यायों में उसी संदर्भ के साथ दिए गए हैं।

भारत बनाम छत्तीसगढ़: आधारभूत तुलना

नीचे की तालिका में स्रोत के अनुसार आठ आधारों पर देश और राज्य की जनजातीय स्थिति की तुलना है। दोनों का संवैधानिक आधार एक ही है: अनुच्छेद 342।

आधारभारत की जनजातियाँछत्तीसगढ़ की जनजातियाँ
प्रावधानअनुच्छेद-342अनुच्छेद-342
प्रकार (कुल जनजातियाँ)70643
विशेष पिछड़ी जनजाति7505 (केंद्र सरकार) + 02 (राज्य सरकार)
कुल जनसंख्या10.42 करोड़78.22 लाख
जनसंख्या प्रतिशत8.6%30.62%
जनजाति संख्या का क्रमभील > गोंड > संथालगोंड > कंवर > उराँव
जनसंख्या में क्रममध्यप्रदेश > महाराष्ट्र > ओडिशाजशपुर > बस्तर > रायगढ़
प्रतिशत में क्रममिजोरम > नागालैंड > मेघालयसुकमा > बीजापुर > नारायणपुर

पढ़ने का तरीका: संख्या के क्रम में राज्य की सबसे बड़ी जनजाति गोंड है, उसके बाद कंवर और फिर उराँव। जनसंख्या वाली पंक्ति में देश के स्तर पर राज्यों का क्रम दिया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ के स्तर पर जिलों का क्रम (जशपुर, बस्तर, रायगढ़) दिया गया है। प्रतिशत के क्रम में सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर आगे हैं, अर्थात इन जिलों की कुल आबादी में जनजातियों का अनुपात सबसे अधिक है।

संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधान

जनजाति की सूची से जुड़ा प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 में है। छत्तीसगढ़ में जनजातियों की सूची 'मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000' में दी गई है, और इस संदर्भ में स्रोत ने धारा 20 का उल्लेख किया है।

  • प्रावधान: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 342
  • सूची: मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000
  • धारा: धारा 20
  • प्रकार: छत्तीसगढ़ में 43 प्रकार की जनजातियाँ पायी जाती हैं
  • विभाजन: ये 161 उपसमूहों में विभाजित हैं

इन्हीं जनजातियों में से पाँच को केंद्र सरकार ने और दो को राज्य सरकार ने विशेष पिछड़ी जनजाति के रूप में मान्यता दी है (विस्तार चौथे अध्याय में)। यहाँ एक विरोधाभास भी ध्यान रखें: इसी स्रोत में एक अन्य पृष्ठ पर 'प्रमुखतः 42 प्रकार की जनजातियाँ' और उनकी 161 उपजातियाँ लिखी गई हैं। सूची की क्रमसंख्या 43 तक जाती है, इसलिए तालिका के अनुसार 43 गिनना उपयुक्त है, पर परीक्षा में विकल्पों को देखकर ही निर्णय लें।

जनजातीय अनुसंधान केंद्र

राज्य में जनजातियों के अध्ययन के लिए 'छत्तीसगढ़ में जनजातीय अनुसंधान केन्द्र' स्थापित है।

बिंदुविवरण
स्थाननवा रायपुर, अटल नगर
स्थापना2 सितम्बर, 2004
क्रमदेश में 15वें क्रम का

नृजातीय म्यूजियम (Anthropological Museum), जगदलपुर

जगदलपुर में स्थित यह संग्रहालय जनजातीय जीवन को समझने का प्रमुख केंद्र है।

बिंदुविवरण
स्थापना1972
स्थानधरमपुरा (जगदलपुर)
संचालनएन्थ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया द्वारा
उद्देश्यजनजातियों से संबंधित अध्ययन करना

दोनों संस्थानों को साथ याद रखें: अनुसंधान केंद्र रायपुर क्षेत्र (नवा रायपुर) में 2004 में बना, जबकि संग्रहालय बस्तर के जगदलपुर में 1972 से है और उसका संचालन केंद्रीय संस्था करती है।

क्षेत्रीय बँटवारा: उत्तर, मध्य और दक्षिण

जनजातीय जनसंख्या और निवास के आधार पर राज्य को तीन सांस्कृतिक क्षेत्रों में बाँटा गया है। मध्य छत्तीसगढ़ की तुलना में उत्तर और दक्षिण में जनजातियाँ अधिक संख्या में रहती हैं। बस्तर को 'जनजातियों की भूमि' कहा जाता है।

क्षेत्रसंभाग
उत्तर सांस्कृतिक क्षेत्रसरगुजा संभाग
मध्य सांस्कृतिक क्षेत्रबिलासपुर + दुर्ग + रायपुर संभाग
दक्षिण सांस्कृतिक क्षेत्रबस्तर संभाग

राज्य की अनुसूचित जनजातियों की सूची (क्रम 1 से 43)

नीचे राज्य की जनजातीय समुदायों की सूची अपने रूप में दी गई है। प्रत्येक क्रमांक के आगे वे अन्य नाम भी हैं जो उसी समुदाय के लिए सूची में साथ-साथ लिखे गए हैं। स्रोत के अनुसार यह सूची राज्य के जनजाति आयोग की वेबसाइट से ली गई है।

क्र.मुख्य नामअन्य नाम / पर्याय
1अगरिया-
2अंध-
3बैगा-
4भैना-
5भारिया भूमियाभुईहर भूमिया, भूमियाँ, भारिया, पालिहा, पण्डो
6भतरा-
7भीलभिलाला, बारेला, पटेलिया
8भील मीना-
9भुंजिया-
10बियारबीयार
11बिंझवार-
12बिरहुलबिरहोर
13डामोरडामरिया
14धनवार-
15गदबागदाबा
16गोंडअरख, अर्राख, अगरिया, असुर, बड़ी/बड़ा मारिया, भटोला, भीम्मा, भूता, कोयला भूता, भार, बाइसन हार्न मारिया, छोटा मारिया, दंडामी मारिया, धुरू, धुरवा, धोबा, धुलिया, दोरला, गायकी, गट्टा, गट्टी, गैटा, गोंड गोवारी, हिल मारिया, कंडरा, कलंगा, खटोला, कोयतर, कोया, खिरवार, खिरवारा, कुचा मारिया, कुचकी मारिया, माडिया, मारिया, माना, मनेवार, मोघ्या, मोघया, मोगिया, मोंघया, मुडिया, मुरिया, नगारची, नागवंशी, ओझा, राजगोंड, सोनझरी, झरेका, थाटिया, थोट्या, बड़े मारिया, बड्डे मारिया, दरोई
17हल्बाहल्बी
18कमार-
19कारकू-
20कंवरकवर, कौर, चेरवा, तंवर, छत्री
21खैरवारकोंदर
22खड़िया-
23कोंधखोंड, कंध
24कोल-
25कोलम-
26कोरकूबोपची, मोआसी, निहाल, नाहुल, बोन्धी, बोन्देया
27कोरवाकोडाकू
28माझी-
29मझवार-
30मवासी-
31मुण्डा-
32नगेशियानगाशिया
33उरांवधनका, धनगड़
34पाव-
35परधानपथारी, सरोती
36पारधीबहेलिया, बहेल्लिया, चीता पारधी, लंगोली पारधी, फांस पारधी, शिकारी, टकनकर, टकिया
37परजा-
38सहरियासहरिया, सेहारिया, सोसिया, सेहरिया, सोर
39साओतसौंता
40सौर-
41सवरसवरा
42सोंर-
43बिंझिया-

ध्यान दें कि कई नाम एक से अधिक जगह आते हैं: जैसे 'अगरिया' अलग क्रमांक 1 पर है और गोंड के पर्यायों में भी है; 'भारिया भूमिया' समूह में पण्डो भी गिना गया है, जबकि पण्डो को अलग से भी पहचाना जाता है। सबसे लंबा समूह गोंड (क्रम 16) है, जिसमें मारिया, माड़िया, मुरिया, दोरला, कोया जैसे नाम सूची में शामिल हैं।

वर्तनी सुधार से जुड़े समावेश

सूची में एक अलग बॉक्स है जिसका शीर्षक नवीन वर्तनी-त्रुटि सुधार से सम्मिलित जनजातियों का है (शीर्षक में संख्या 12 लिखी है, जबकि तालिका में 9 पंक्तियाँ दिखती हैं)। इसमें बताया गया है कि किस लिखावट वाली जनजाति को किस नाम में गिना जाएगा:

शामिल जनजाति (पुरानी वर्तनी)पर्याय (मान्य नाम)
भूईया, भूईयां, भूयांभारिया, भूमियां
भरियाभारिया
पंडो, पण्डो, पन्डोपांडो
धनुहार, धनुवारधनवार
गोंड़गदबा, गोंड
कोंदकौंध
कोड़ाकूकोडाकू
किसाननगेशिया, नागासिया
धांगड़धनगढ़

इसका आशय यह है कि नाम की वर्तनी अलग-अलग लिखी होने से किसी व्यक्ति का जनजातीय दर्जा प्रभावित न हो। परीक्षा की दृष्टि से इतना याद रखें कि धांगड़ का पर्याय धनगढ़ है, और उराँव के पर्यायों में धनका और धनगड़ भी आते हैं (सूची क्रम 33)।

तुलना एवं संबंध

बिंदुअनुसंधान केंद्रनृजातीय म्यूजियम
स्थाननवा रायपुर, अटल नगरधरमपुरा, जगदलपुर
स्थापना2 सितम्बर 20041972
विशेषदेश में 15वाँएन्थ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया द्वारा संचालित
क्षेत्रसंभागटिप्पणी
उत्तरसरगुजाजनजातियाँ अधिक
मध्यबिलासपुर, रायपुर, दुर्गअपेक्षाकृत कम
दक्षिणबस्तरजनजातियों की भूमि

याद रखने योग्य बिंदु

  • जनजाति की सूची का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 342 है।
  • राज्य की सूची मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 (धारा 20) में है।
  • राज्य में 43 प्रकार की जनजातियाँ, जो 161 उपसमूहों में बँटी हैं।
  • राज्य की जनजातीय जनसंख्या 78.22 लाख, यानी 30.62%।
  • देश में जनजातियाँ 706 प्रकार की, 10.42 करोड़, 8.6%।
  • राज्य में संख्या का क्रम: गोंड, कंवर, उराँव।
  • देश में संख्या का क्रम: भील, गोंड, संथाल।
  • प्रतिशत में आगे: सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर।
  • जनजातीय अनुसंधान केंद्र: नवा रायपुर, 2 सितम्बर 2004, देश में 15वाँ।
  • नृजातीय म्यूजियम: धरमपुरा जगदलपुर, 1972, संचालक एन्थ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया।
  • तीन क्षेत्र: उत्तर (सरगुजा), मध्य (बिलासपुर+दुर्ग+रायपुर), दक्षिण (बस्तर)।
  • बस्तर को जनजातियों की भूमि कहा जाता है।
  • राज्य में विशेष पिछड़ी जनजातियाँ 5 केंद्र + 2 राज्य = 7 हैं।
  • देश में विशेष पिछड़ी जनजातियाँ 75 हैं।

स्मरण सूत्र

  • 'अनुच्छेद 342, 43, 30.62%': 3 संख्याएँ, 3 बातें: सूची, प्रकार, प्रतिशत।
  • अनुसंधान केंद्र = 2004, नृजातीय म्यूजियम = 1972: 'म्यूजियम पुराना, केंद्र नया'।
  • गोंड-कंवर-उराँव का पहला अक्षर 'गो-कं-उ' (गोकुल), भील-गोंड-संथाल 'भी-गो-सं' (भीगो संग)।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

इस भाग से सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न आँकड़ों और संस्थानों पर होते हैं: सूची किस अधिनियम में है, राज्य में कितनी जनजातियाँ हैं, अनुसंधान केंद्र कहाँ और कब बना, म्यूजियम कहाँ है और किसके द्वारा संचालित है।

जनजाति संख्या के क्रम पर तुलनात्मक प्रश्न बनते हैं, जैसे राज्य में सबसे अधिक जनसंख्या वाली जनजाति कौन-सी है।

जिला-क्रम (जशपुर, बस्तर, रायगढ़) और प्रतिशत-क्रम (सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर) में भ्रम पैदा करने वाले विकल्प दिए जाते हैं।

पुस्तक के प्रश्न-संदर्भ इस भाग से प्रश्नों की एक अच्छी संख्या दर्शाते हैं, पर कोई प्रतिशत यहाँ नहीं बताया जा रहा।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: छत्तीसगढ़ में जनजातियों की सूची किस अधिनियम में है? उत्तर: मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 में।
  2. प्रश्न: राज्य की जनजातीय जनसंख्या का प्रतिशत कितना है? उत्तर: 30.62%।
  3. प्रश्न: नृजातीय म्यूजियम कहाँ है? उत्तर: धरमपुरा, जगदलपुर।
  4. प्रश्न: जनजातीय अनुसंधान केंद्र कब बना? उत्तर: 2 सितम्बर 2004 (नवा रायपुर)।
  5. प्रश्न: प्रतिशत में पहले तीन जिले कौन-से हैं? उत्तर: सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर।

अभ्यास प्रश्न

इस अध्याय के तथ्यों से पूरी तरह सत्यापित होने योग्य प्रश्न उपलब्ध संग्रह में नहीं मिले, इसलिए इस अध्याय में अभ्यास प्रश्न नहीं दिए गए हैं। स्वयं जाँचें खंड से अभ्यास करें।

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