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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 6
पाँचवीं अनुसूची, जनजातीय सलाहकार परिषद एवं आदिवासी उपयोजना

पाँचवीं अनुसूची, जनजातीय सलाहकार परिषद एवं आदिवासी उपयोजना

संविधान की पाँचवीं अनुसूची उन राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन की व्यवस्था करती है जो पूर्वोत्तर के चार राज्यों में नहीं आते। छत्तीसगढ़ का बड़ा भू-भाग इसी अनुसूचित क्षेत्र में है। इसी आधार पर जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) और आदिवासी उपयोजना जैसी संस्थाएँ काम करती हैं। इस अध्याय में तारीखें, संख्याएँ, जिलों की सूची और सदस्य-संख्या का हिसाब है। इसलिए यह अध्याय गणना-आधारित प्रश्नों के लिए बहुत उपयोगी है: कितने जिले, कितने विकासखण्ड, कितना क्षेत्रफल, कितने सदस्य।

पाँचवीं अनुसूची: परिचय

  • पाँचवीं अनुसूची का वर्णन भारतीय संविधान के भाग 10 में है।
  • अनुसूचित क्षेत्र को पहली बार 1950 में अधिसूचित किया गया था।
  • अनुच्छेद 244(1) के तहत पाँचवीं अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम को छोड़कर अन्य राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन तथा नियंत्रण का उपबंध है।

वर्तमान में पाँचवीं अनुसूची के तहत 10 राज्य शामिल हैं। सूची क्रम से इस प्रकार है:

क्र.राज्यक्र.राज्य
1छत्तीसगढ़6महाराष्ट्र
2झारखण्ड7मध्यप्रदेश
3ओडिशा8राजस्थान
4आंध्रप्रदेश9गुजरात
5तेलंगाना10हिमाचल प्रदेश

छत्तीसगढ़ में अनुसूचित क्षेत्र

छत्तीसगढ़ में अनुसूचित क्षेत्र 20 फरवरी 2003 को राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित किया गया। स्रोत के अनुसार 33 जिलों के आधार पर छत्तीसगढ़ के 17 जिले पूर्ण रूप से तथा 4 जिले आंशिक रूप से अनुसूचित क्षेत्र में शामिल हैं। इसके अंतर्गत 85 विकासखण्ड के 5050 ग्राम पंचायत आते हैं।

वर्ष 2023-24 की सारणी के आँकड़े नीचे दिए हैं। ध्यान दें कि सारणी में "राजस्व जिला" 28 लिखा है, जबकि ऊपर के वाक्य में 33 जिलों का आधार बताया गया है। स्रोत में यह अंतर स्वयं दिखता है, इसलिए परीक्षा में प्रश्न के संदर्भ (सारणी या जिला-गणना) को देखकर उत्तर दें।

विवरण2023-24
राज्य का क्षेत्रफल1,35,192 वर्ग कि.मी.
राज्य का अनुसूचित क्षेत्र81,861.88 वर्ग कि.मी.
राज्य का आदिवासी उपयोजना क्षेत्र91,253 वर्ग कि.मी.
कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में उपयोजना क्षेत्र का प्रतिशत67.50%
राजस्व जिले28
पूर्णतः अनुसूचित क्षेत्र में शामिल जिले17
आंशिक रूप से अनुसूचित क्षेत्र में शामिल शेष जिले04
आदिवासी उपयोजना क्षेत्र में शामिल जिले28
आदिवासी विकासखण्ड85
एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना19
माडा पॉकेट09
लघु अंचल02
विशेष रूप से कमज़ोर जनजाति समूह अभिकरण (पण्डो एवं भुंजिया सहित)08 (6 + 2)
विशेष रूप से कमज़ोर जनजाति समूह प्रकोष्ठ10

जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC)

जनजातीय सलाहकार परिषद का गठन 23 जुलाई 2019 को हुआ और इसका पुनर्गठन 22 जुलाई 2022 को किया गया। इसका संबंध संविधान की पाँचवीं अनुसूची, अनुसूचित क्षेत्र और आदिवासी क्षेत्र से है। इसका गठन राष्ट्रपति के निर्देश पर होता है। स्रोत के अनुसार ऐसे गैर-अनुसूचित क्षेत्र वाले राज्य, जिनमें अनुसूचित जनजाति का निवास है, उनमें भी राष्ट्रपति के आदेश से यह परिषद बनाई जा सकती है। सदस्य संख्या 20 से अधिक नहीं होनी चाहिए।

पदव्यक्ति
अध्यक्षमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (पदेन)
उपाध्यक्षरामविचार नेताम (पदेन)
सचिवअमिताभ जैन, छत्तीसगढ़ शासन; श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आदिम जाति कल्याण विकास विभाग (दोनों नाम सूची में क्रमांक 3 पर हैं)

सूची में सदस्यों के रूप में ये नाम और क्षेत्र दिए गए हैं:

सदस्यविधानसभा क्षेत्र
रेणुका सिंहभरतपुर-सोनहट
शकुन्तला सिंह पोर्तेप्रतापपुर
उद्धेश्वरी पैकरासामरी
रायमुनी भगतजशपुर
गोमती सायपत्थलगांव
लता उसेंडीकोण्डागांव
रामकुमार टोप्पोसीतापुर
प्रणव कुमार मरपचीमरवाही
विक्रम उसेंडीअंतागढ़
आशाराम नेतामकांकेर
नीलकंठ टेकामकेशकाल
विनायक गोयलजशपुर
चैतराम अटामीदंतेवाड़ा
केदार कश्यपनारायणपुर
रामनाथ कश्यप(क्षेत्र नहीं दिया)
रघुराज सिंह उईके(क्षेत्र नहीं दिया)
वेदप्रकाश भगत(क्षेत्र नहीं दिया)
कृष्णकुमार वैष्णव(क्षेत्र नहीं दिया)

गिनती पर ध्यान दें: सूची में कुल 21 क्रमांक छपे हैं, जबकि नियम 20 से अधिक न होने का है। स्रोत में यह विसंगति है, इसलिए हम कोई एक संख्या नहीं थोप रहे। परीक्षा में नियम वाली संख्या (अधिकतम 20) ही पूछी जाती है।

परिषद की शर्तें

  • कुल सदस्यों में से 3/4 सदस्य अनुसूचित जनजाति वर्ग के विधानसभा सदस्य होने चाहिए।
  • विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधियों से मनोनीत सदस्य तब तक परिषद के सदस्य रहेंगे जब तक वे विधानसभा के सदस्य रहेंगे।
  • अन्य सदस्य मनोनयन की तिथि से 1 वर्ष की अवधि तक सदस्य रहेंगे।

तीन सलाहकार परिषदों की तुलना

आधारअनुसूचित जनजाति सलाहकार परिषदअनुसूचित जाति सलाहकार परिषदअन्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद
गठन23 जुलाई 20196 सितम्बर 20226 सितम्बर 2022
अधिकतम सदस्य202040
शर्त3/4 सदस्य (15) अनुसूचित जनजाति वर्ग के विधानसभा सदस्यकम से कम 5 सदस्य अनुसूचित जाति वर्ग के विधानसभा सदस्यकम से कम 10 सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग के विधानसभा सदस्य
अध्यक्षमुख्यमंत्रीमुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री
उपाध्यक्षविभागीय मंत्रीभारसाधक मंत्रीभारसाधक मंत्री
सचिवआदिम जाति तथा अनुसूचित जनजाति मंत्रालय के सचिवआदिम जाति तथा अनुसूचित जाति मंत्रालय के सचिवभारसाधक सचिव

जनजातीय उपयोजना / आदिवासी उपयोजना

आदिवासी उपयोजना का प्रारंभ पंचम पंचवर्षीय योजना (1974-79) में हुआ; तालिका में नीचे तीर से 1976-77 भी लिखा है। यह जनजाति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई। इसका क्षेत्रफल 91,253 वर्ग कि.मी. है, जो राज्य के क्षेत्रफल का 67.50% है। इसके दो उद्देश्य हैं: जनजातियों का एकीकृत ढंग से सर्वांगीण विकास करना और उनकी सुरक्षा तथा शोषणमुक्ति सुनिश्चित करना।

उपयोजना के तहत आदिवासी बहुल क्षेत्रों में तीन तरह की इकाइयाँ बनाई गई हैं: एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (19), माडा पॉकेट (9) और लघु अंचल (2)। उपयोजना क्षेत्र में शामिल जिले 28 हैं। दो विशेष बातें: उपयोजना क्षेत्र की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई विकासखण्ड होती है, और एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना में सहायक परियोजना अधिकारी विभागीय दायित्वों के निर्वहन के लिए पदस्थ रहता है।

जिलावार परियोजना सूची

सारणी का नक्शा (एकीकृत परियोजना) उन क्षेत्रों को दिखाता है जिनकी सूची नीचे है। मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, गौरेला, डौण्डीलोहारा जैसे नए जिलों के नाम भी इसमें हैं। गौरेला परियोजना अकेली तीन जिलों (मुंगेली, बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) को कवर करती है।

जिलाएकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (19)माडा पॉकेट (9)लघु अंचल (2)
कांकेरभानुप्रतापपुर——
कोण्डागांवकोण्डागांव——
बस्तरजगदलपुर——
दन्तेवाड़ादन्तेवाड़ा——
सुकमाकोंटा——
नारायणपुरनारायणपुर——
बीजापुरबीजापुर——
धमतरीनगरीगंगरेल—
गरियाबन्दगरियाबन्द——
महासमुंद—महासमुंद-1, महासमुंद-2—
बलौदाबाजार—बलौदाबाजारधुर्रीबंधा
बालोदडौण्डीलोहारा——
मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकीमोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी——
कबीरधाम—कबीरधाम—
मुंगेली, बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाहीगौरेला (तीनों जिलों के लिए एक)——
कोरबाकोरबा——
सक्ती—रूगजा—
रायगढ़धरमजयगढ़गोपालपुर—
कोरियाबैकुण्ठपुर——
सूरजपुरसूरजपुर——
सरगुजाअंबिकापुर——
बलरामपुरपाल——
जशपुरजशपुरनगर——
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई—नचनियांबछेराभांटा
सारंगढ़—सारंगढ़—

संख्या जाँच: एकीकृत परियोजना 19, माडा पॉकेट 9 (गंगरेल, महासमुंद-1, महासमुंद-2, बलौदाबाजार, कबीरधाम, रूगजा, गोपालपुर, नचनियां, सारंगढ़) और लघु अंचल 2 (धुर्रीबंधा, बछेराभांटा)। नचनियां, बछेराभांटा और सारंगढ़ के जिले स्कैन की पंक्ति-स्थिति से पढ़े गए हैं, इसलिए पंक्ति-मिलान में सावधानी रखें।

तुलना एवं संबंध

इकाईसंख्या
पाँचवीं अनुसूची वाले राज्य10
पूर्ण अनुसूचित जिले17
आंशिक अनुसूचित जिले4
आदिवासी विकासखण्ड85
ग्राम पंचायत5050
एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना19
माडा पॉकेट9
लघु अंचल2
परिषद / योजनागठन / प्रारंभअध्यक्ष / द्वारा
जनजातीय सलाहकार परिषद23 जुलाई 2019 (पुनर्गठन 22 जुलाई 2022)मुख्यमंत्री (पदेन अध्यक्ष)
अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद6 सितम्बर 2022मुख्यमंत्री
आदिवासी उपयोजनापंचम पंचवर्षीय योजना (1974-79)जनजाति मंत्रालय, भारत सरकार

याद रखने योग्य बिंदु

  • पाँचवीं अनुसूची संविधान के भाग 10 में है।
  • अनुसूचित क्षेत्र पहली बार 1950 में अधिसूचित हुआ।
  • छत्तीसगढ़ का अनुसूचित क्षेत्र 20 फरवरी 2003 को अधिसूचित हुआ।
  • 17 जिले पूर्ण और 4 जिले आंशिक अनुसूचित क्षेत्र में हैं।
  • 85 विकासखण्ड और 5050 ग्राम पंचायत अनुसूचित क्षेत्र में हैं।
  • अनुसूचित क्षेत्र 81,861.88 वर्ग कि.मी.; उपयोजना क्षेत्र 91,253 वर्ग कि.मी. (67.50%)।
  • TAC का गठन 23 जुलाई 2019; पुनर्गठन 22 जुलाई 2022।
  • TAC में अधिकतम 20 सदस्य; 3/4 अनुसूचित जनजाति के विधायक।
  • TAC का अध्यक्ष मुख्यमंत्री; उपाध्यक्ष विभागीय मंत्री।
  • SC और OBC सलाहकार परिषदों का गठन 6 सितम्बर 2022 को हुआ; OBC परिषद में अधिकतम 40 सदस्य।
  • उपयोजना की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई विकासखण्ड है।
  • आदिवासी उपयोजना का उद्देश्य एकीकृत विकास तथा सुरक्षा एवं शोषणमुक्ति है।
  • एकीकृत परियोजना में सहायक परियोजना अधिकारी पदस्थ होता है।
  • धुर्रीबंधा और बछेराभांटा लघु अंचल हैं।

स्मरण सूत्र

  • "19-9-2": परियोजना 19, माडा 9, लघु अंचल 2।
  • "17 पूरे, 4 अधूरे": पूर्ण और आंशिक अनुसूचित जिले।
  • "तीन-पौन-बीस": TAC में 3/4 सदस्य और अधिकतम 20।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

यह हिस्सा संख्याओं और तारीखों पर टिका है। जिस पृष्ठ में सारणियाँ हैं, वहाँ छपे परीक्षा-संदर्भ बताते हैं कि आदिवासी उपयोजना क्षेत्र का क्षेत्रफल, बलौदाबाजार जैसे जिलों में कौन-सी इकाई है और TAC का संबंध पूछा गया है। पूल के प्रश्नों में इस विषय पर सीधे प्रश्न मुझे नहीं मिले जो पन्नों से पुष्ट हों, इसलिए इस अध्याय में अभ्यास प्रश्न नहीं दिए गए हैं। नीचे के स्वयं-जाँच प्रश्न ही अभ्यास का काम करें।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: छत्तीसगढ़ में अनुसूचित क्षेत्र किस तारीख को अधिसूचित हुआ? उत्तर: 20 फरवरी 2003।
  2. प्रश्न: कितने जिले पूर्ण रूप से अनुसूचित क्षेत्र में हैं? उत्तर: 17।
  3. प्रश्न: आदिवासी उपयोजना का क्षेत्रफल कितना है? उत्तर: 91,253 वर्ग कि.मी. (67.50%)।
  4. प्रश्न: TAC में अनुसूचित जनजाति के कितने विधायक अनिवार्य हैं? उत्तर: 3/4 सदस्य।
  5. प्रश्न: लघु अंचल कौन-से हैं? उत्तर: धुर्रीबंधा और बछेराभांटा।
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