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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 3
जनजातीय बोलियाँ, भाषा-परिवार और उपजातियाँ

जनजातीय बोलियाँ, भाषा-परिवार और उपजातियाँ

जनजातियों की पहचान में उनकी बोली का बड़ा हाथ है। यह अध्याय बताता है कि कौन-सी जनजाति कौन-सी बोली बोलती है, उन बोलियों का भाषा-परिवारों (मुण्डा, आर्य, द्रविड़) के अनुसार वर्गीकरण क्या है, और प्रमुख जनजातियों की उपजातियाँ तथा उपसमूहों की संख्या क्या है।

परीक्षा में 'X की बोली', 'कुडुख किसकी भाषा' या 'हल्बी किस परिवार की' जैसे प्रश्न आते हैं। सबसे उपयोगी बात है तीन संपर्क बोलियों (हल्बी, सदरी और दोरली) का विशेष स्थान समझ लेना।

प्रजाति और तीन विशेष बोलियाँ

स्रोत के अनुसार प्रदेश के जनजातीय समुदाय अपनी प्रजातीय विशिष्टता के आधार पर प्रोटो-आस्ट्रेलाइट प्रजाति में शामिल किए जाते हैं। इसके बाद कुछ बोलियों की विशेष स्थिति बताई गई है।

बोलीविशेष स्थिति
हल्बीबस्तर अंचल की संपर्क बोली; बस्तर क्षेत्र में सर्वाधिक बोली जाती है। इसकी उत्पत्ति छत्तीसगढ़ी से हुई मानी गई है, जिसमें मराठी और तेलुगू के साथ संस्कृत का भी समावेश है। यह आर्य भाषा परिवार के अंतर्गत आती है
भतरीओड़िया एवं हल्बी का मिश्रित रूप
सदरीसरगुजा अंचल की संपर्क बोली; जशपुर क्षेत्र की बोली
दोरलीदोरला जनजाति सुकमा में रहती है, इसलिए यह बोली सुकमा क्षेत्र में बोली जाती है और तेलुगू भाषा से प्रभावित है

जनजाति, बोली और क्षेत्र: पूरी तालिका

स्रोत की तालिका में 29 जनजातियों के नाम, बोली और क्षेत्र हैं। सभी को नीचे रखा गया है।

क्र.जनजातिबोलीक्षेत्र
1हल्बाहल्बीबालोद, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, बीजापुर, नारायणपुर
2मुरियाकोईतुरकोंडागांव, बस्तर, नारायणपुर
3माड़ियाभरोटीबस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर
4अबूझमाड़ियामाड़ीनारायणपुर
5धुरवाधुरवीबस्तर
6परजापरजीबस्तर
7भतराभतरीबस्तर
8गदबागदबीबस्तर
9गोंडगोंड़ीदक्षिण छत्तीसगढ़
10राजगोंडगोंड़ीसम्पूर्ण छत्तीसगढ़
11दण्डामी माड़ियागोंडी, माड़ीदंतेवाड़ा, नारायणपुर
12दोरलादोरलीबीजापुर, सुकमा
13बैगाबैगानीमैकल पर्वत श्रृंखला, कवर्धा
14परधानगोंड़ीकवर्धा, बिलासपुर, बलौदाबाजार
15कमारकमारीगरियाबंद, महासमुंद, धमतरी
16कण्डराछत्तीसगढ़ीगरियाबंद, रायपुर, धमतरी
17सौंरासबरमहासमुंद, रायगढ़, कोरबा, सारंगढ़-बिलाईगढ़
18कोंधकुईमहासमुंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़
19बिंझवारसबरी / बिंझाल्टीबलौदाबाजार, महासमुंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़
20बिरहोरबिरहोरीरायगढ़, जशपुर, सरगुजा
21नगेशियासदरीरायगढ़, जशपुर, सरगुजा
22कोरवाकोरवीकोरबा, सरगुजा, जशपुर
23उराँवकुडुख, सदरीजशपुर, सरगुजा, कोरबा, बलरामपुर
24पण्डोपण्डोपसूरजपुर, सरगुजा, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
25सौंताओड़ियासरगुजा, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
26कोलकोलीकोरिया
27भारियाभसोटी / भरियारीसरगुजा
28धांगड़कुडुखउत्तर छत्तीसगढ़
29कंवरछत्तीसगढ़ी, सदरीमध्य छत्तीसगढ़

ध्यान दें: तालिका में एक ही बोली कई जनजातियों के सामने आती है (गोंड़ी: गोंड, राजगोंड, परधान; सदरी: नगेशिया, उराँव, कंवर; कुडुख: उराँव, धांगड़)। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जैसे नाम स्रोत के अनुसार लिखे हैं।

भाषायी आधार पर वर्गीकरण: तीन भाषा-परिवार

छत्तीसगढ़ की आदिवासी आबादी मूल रूप से तीन भाषा-परिवारों में बाँटी गई है।

भाषा परिवारनिवास क्षेत्रसंबंधित जनजातिसंबंधित बोली
मुण्डामुख्यतः उत्तर छ.ग. (सरगुजा संभाग + कोरबा + रायगढ़)गदबा (अपवाद), कोरकू, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, नगेशिया, संवरा, सौंता, निहाल, खड़िया, माझी, कोल, मझवारतुरी, सिंगरी, मुंडारी, खड़िया, हो, मांझी
आर्यमुख्यतः मध्य छ.ग. (बिलासपुर + रायपुर + दुर्ग संभाग)हल्बा (अपवाद), भतरा (अपवाद), पंडो (अपवाद), कमार, कंवर, बिंझवार, भुंजिया, धनवार, भैना, बैगा, धाकड़, बैगानी, देवार, मरारहल्बी, भतरी, पंडोप, सदरी, छत्तीसगढ़ी
द्रविड़मुख्यतः दक्षिण छ.ग. (बस्तर संभाग)उरांव (अपवाद), कोंध (अपवाद), परजा, मुड़िया, माड़िया, गोंड़, दोरला, अबूझमाड़िया, धुरवा, दण्डामी माड़ियाकुडुख, कुई, परजी कोया, दोरली, गोंड़ी

ध्यान दें: जो जनजाति अपने क्षेत्र के परिवार से अलग परिवार की है, उसके आगे 'अपवाद' लिखा गया है। जैसे गदबा (बस्तर में रहती है) मुण्डा परिवार में, हल्बा-भतरा (बस्तर में) आर्य परिवार में, और उरांव-कोंध (उत्तर/मध्य में) द्रविड़ परिवार में हैं।

जनजातियों की उपजातियाँ (Sub-Tribes)

स्रोत में लिखा है कि प्रदेश में प्रमुखतः 42 प्रकार की जनजातियाँ हैं जिनकी 161 उपजातियाँ हैं, और सर्वाधिक गोंड समुदाय की 41 उपजातियाँ तथा 30 शाखाएँ हैं। (पिछले अध्याय में गिनी गई 43 और यहाँ की 42 संख्या में अंतर है, इसे स्रोत की असंगति समझें।)

जनजातिउपजातियाँ
उराँवकुडास, किसान, धांगड़, धनका, कुडुक
गोंडअबूझमाड़िया, मुड़िया/मुरिया, कमार, माड़िया, पांडल, अगरिया, दोरला, कंतरा/कंडरा, परधान, ओझा, कोइकपाल, धुरवा, कोया, कोयतुर, ढुलिया, असुर, बड्डे
कंवरतंवर, पैंकरा, राठिया, चेरवा, दुधकंवर, छत्री
बैगाबिंझवार, भरौतिया, नरौतिया, राई, कोडवन, कुंडी, रैभैना, बादभैना, नाहर, भैना, कुरका बैगा, सावत बैगा
हल्बाछत्तीसगढ़िया, बस्तरिया, मरेठिया
भुंजियाचौखुटिया, चिन्दाभुंजिया
बिंझवारसोनझरा, बिरजिया, बिंझिया
गदबाबोदो, कथेरा, पारंगी, कापू
कंडराझरिया तथा कनौजिया
मुरियागोटुल मुरिया, राजा मुरिया, झोरिया मुरिया
बियारबहरिया, दखिनाहा
कोलगवठिया, भूमिया
सौंताछत्तीसगढ़िया सौंता, ओड़िया सौंता
कोंधडोंगरिया, कुटिया, पेंगा, जामिया
अगरियापथारिया, खूंटियाँ

ध्यान दें: कमार, अबूझमाड़िया, मुड़िया-मुरिया और परधान गोंड की उपजातियों में भी गिने गए हैं, जबकि कमार और अबूझमाड़िया अलग से विशेष पिछड़ी जनजाति भी हैं। 'बिंझवार' बैगा की उपजातियों में भी और अलग समूह के रूप में भी दिखता है।

उपसमूहों की संख्या

जनजातिउपसमूहजनजातिउपसमूह
अबूझमाड़िया2मुरिया3
पण्डो2हल्बा3
बियार2सौंता3
कोरवा2बिंझवार4
अगरिया2कोयतुर4
बिरहोर2भतरा4
कमार2गदबा4
भुंजिया2गोंड30

इसलिए गोंड सबसे अधिक उपसमूहों वाली जनजाति है। ध्यान रखें कि उपसमूह-तालिका में गोंड के 30 उपसमूह हैं, जबकि पिछले पैराग्राफ में उसकी 41 उपजातियाँ और 30 शाखाएँ बताई गई हैं।

तुलना एवं संबंध

भाषा-परिवारक्षेत्रमुख्य उदाहरणअपवाद
मुण्डाउत्तरकोरवा, बिरहोर, खड़ियागदबा
आर्यमध्यकंवर, कमार, बैगाहल्बा, भतरा, पंडो
द्रविड़दक्षिणगोंड, माड़िया, दोरलाउरांव, कोंध
संपर्क बोलीक्षेत्रसंबंध
हल्बीबस्तरआर्य परिवार; मराठी-तेलुगू-संस्कृत का समावेश
भतरीबस्तरओड़िया + हल्बी
सदरीसरगुजा/जशपुरआर्य परिवार में सूचीबद्ध

याद रखने योग्य बिंदु

  • राज्य की जनजातियाँ प्रोटो-आस्ट्रेलाइट प्रजाति में गिनी जाती हैं।
  • हल्बी बस्तर की संपर्क बोली है और आर्य परिवार में आती है।
  • भतरी = ओड़िया + हल्बी।
  • सदरी सरगुजा की संपर्क बोली है; जशपुर की बोली भी।
  • दोरली सुकमा क्षेत्र में बोली जाती है और तेलुगू से प्रभावित है।
  • उराँव की बोली कुडुख (कुडुख/कुरूख) है।
  • कोंध की बोली कुई है।
  • बैगा की बोली बैगानी है, कमार की कमारी।
  • तीन परिवार: मुण्डा (उत्तर), आर्य (मध्य), द्रविड़ (दक्षिण)।
  • हल्बा, भतरा, पण्डो आर्य परिवार में अपवाद हैं; उराँव और कोंध द्रविड़ में अपवाद।
  • गोंड की सर्वाधिक उपजातियाँ (41) और उपसमूह (30)।
  • धनका उराँव की उपजाति है।
  • कंवर की उपजातियाँ: तंवर, पैंकरा, राठिया, चेरवा, दुधकंवर, छत्री।
  • भुंजिया की उपजातियाँ: चौखुटिया, चिन्दाभुंजिया।

स्मरण सूत्र

  • 'तीन परिवार, तीन दिशाएँ': उत्तर = मुण्डा, मध्य = आर्य, दक्षिण = द्रविड़ (द से दक्षिण)।
  • 'हल्बी-भतरी-सदरी': हल्बी बस्तर, भतरी बस्तर की मिश्रित, सदरी सरगुजा। 'ह-भ-स' का क्रम याद रखें।
  • 'उराँव: कुडास, किसान, धांगड़, धनका, कुडुक' पाँचों 'क' और 'ध' से चलते हैं।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

बोली से जनजाति या भाषा परिवार पूछने वाले प्रश्न आम हैं (कुडुख/कुरूख, हल्बी, सदरी, दोरली, गोंड़ी)।

'कौन-सी भाषा द्रविड़ समूह की नहीं है' जैसे नकारात्मक प्रश्न विकल्प देखकर हल किए जाते हैं।

उपजाति का प्रश्न सीधा होता है: धनका किसकी उपजाति, गोंड की उपजातियाँ, कंवर की उपजातियाँ।

संख्या वाले प्रश्न (161, 41, 30) भी आते हैं।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: हल्बी किस भाषा परिवार की बोली है? उत्तर: आर्य भाषा परिवार।
  2. प्रश्न: कुडुख किस जनजाति की बोली है? उत्तर: उराँव (धांगड़ भी)।
  3. प्रश्न: भतरी किन दो का मिश्रण है? उत्तर: ओड़िया एवं हल्बी।
  4. प्रश्न: गोंड के उपसमूह कितने हैं? उत्तर: 30।
  5. प्रश्न: सदरी किस अंचल की संपर्क बोली है? उत्तर: सरगुजा अंचल।

अभ्यास प्रश्न

  1. धनका किस जनजाति की प्रमुख उपजाति है?

    • (A) उराँव
    • (B) कोरबा
    • (C) भतरा
    • (D) कमार
  2. निम्न में से कौन-सी एक भाषा द्रविड़ समूह की भाषा नहीं है?

    • (A) गोण्डी
    • (B) हल्बी
    • (C) अबूझमाड़िया
    • (D) परजी
  3. कुरूख किस जनजाति की भाषा है?

    • (A) बिंझवार
    • (B) गोंड़
    • (C) ओंराव
    • (D) बैगा

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (A) - उपजाति-तालिका में उराँव के आगे कुडास, किसान, धांगड़, धनका और कुडुक दिए हैं।
  2. (B) - हल्बी आर्य भाषा परिवार में आती है; गोंड़ी, परजी और अबूझमाड़िया (माड़ी) द्रविड़ वर्ग से जुड़ी हैं।
  3. (C) - बोली-तालिका में उराँव की बोली कुडुख (कुरूख) दी गई है।
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