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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 8
देवी-देवता, उत्पत्ति, शब्दावली एवं गोत्र चिन्ह

देवी-देवता, मान्यताएँ, उत्पत्ति कथाएँ, शब्दावली एवं गोत्र चिन्ह

जनजातीय जीवन की जड़ में देवता और पूर्वज हैं। कौन-सा देवता किस पेड़ में रहता है, किस नृत्य के पीछे कौन देवता है और कौन-सी जनजाति स्वयं को किस पूर्वज से उत्पन्न मानती है, यह सब परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण है। यह अध्याय देवता, धार्मिक पुजारी, लोक ज्योतिष, उत्पत्ति, शब्दावली और गोत्र (गण चिन्ह) की सभी तालिकाओं को क्रम से देता है। इनमें से अधिकांश प्रश्न "किस जनजाति का कौन-सा देवता" वाले जोड़ी-मिलान होते हैं।

बस्तर के राजदेव और पितृदेव

  • पाटदेव बस्तर के राजदेव हैं। मूल स्थल टीमनार (नारायणपुर) है। जगदलपुर में राजा भैरमदेव द्वारा स्थापित किए गए और बेल की लकड़ी से बने हैं।
  • डूमादेव बस्तर के पितृदेव हैं। सदस्य की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार करके विधिवत डूमादेव के रूप में स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है। गोंडी में डूमा देव पितृ देव को कहा जाता है।

आध्यात्मिक मान्यताएँ

  • बोंगावाद: जनजातियाँ पारलौकिक शक्ति के रूप में बोंगा देव को मानती हैं। वे एक अदृश्य शक्ति पर विश्वास करते हैं, जो स्वप्न या दिवास्वप्न के माध्यम से भावी खतरों से बचाती है।
  • टोटमवाद: जनजाति अपना उद्गम टोटम नामक विशिष्ट तत्व से मानती है। यह मानव, मानव के समान, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे या निर्जीव वस्तु आदि हो सकता है।

जनजाति एवं उनके प्रमुख देवी-देवता

जनजातिप्रमुख देवी-देवता
हल्बादंतेश्वरी माई
मुड़ियाअंगादेव, लिंगोपेन, बुद्धदेव (कोण्डागांव क्षेत्र के)
गोंडदुल्हादेव, लिंगोपेन, नारायण देव (सूर्यदेव)
भतराशिकार देवी, मातीदेव / माटीदेव
अबूझमाड़ियातालूरमुन्ते देवता, तलोक देवी
कमारकचना धुरवा (कमारों के राजा), भीमा देव (सरई वृक्ष के नीचे निवास), हिंगलाज देवी (खैरा-बकरा भेंट), वामनदेव (बड़ादेवता; देव डोंगर की वामन डोंगरी में स्थापित), ठाकुर देवता, शीतला माता (साजा या पीपल के नीचे), छोटेमाई-बड़ेमाई, बुधाराज, पोगरीदेवता (कुल देव), मांगर माटी, गाता डुमा (पूर्वज), शिकार देवता, बहान देव, दुल्हा देव
बिंझवारविन्ध्यवासिनी, बारह भाई बेटकर
कोंधबेला (सूर्यदेव)
मलारलोहा झाड़
बैगाबूढ़ादेव-बूढ़ीमाई (साल वृक्ष में निवास, इसी कारण बैगा साल वृक्ष की पूजा करते हैं); ठाकुरदेव-ठाकुराईनदेवी (भूमि की रक्षा); दूल्हादेव-दुल्हिनदेवी (बीमारियों से रक्षा); राजा नारायणदेव (सूर्यदेव); भीमसेन; धरती माता; बाघदेव; खैरमाई
कोरवाखुड़िया रानी; महादेव; सिंगीर देव
कंवरसगराखण्ड, दूल्हादेव, बहानदेव, शिकारदेव
बिरहोरसूरजदेव (सूर्यदेव)
उराँवसरना देवी, धर्मेश (सूर्यदेव)
खड़ियाबंदा
भारियाबूढ़ादेव, नागदेव, बाघेश्वर देव (बाघ से रक्षा की मान्यता)
नगेशियागौरेयदेव, शिकारी देव, सदना माता, धरती माता, अन्नकुमारी
मुण्डासिंगबोंगा (सूर्यदेव)

नृत्य से जुड़े देवी-देवता

नृत्य / पर्वदेवी-देवता
करमा नृत्यकरम सेनी
ककसार नृत्यलिंगोपेन / लिंगदेव
घोटुल नृत्यलिंगोपेन
माओपाटा नृत्यसिरहा देव
खम्भ स्वांगखण्डरा देव
सैला नृत्यआदिदेव
मड़ई पर्वअंगादेव
मातर त्यौहारखोण्डदेव (यादव समुदाय)
गेंड़ी नृत्यभीमा देव

वृक्षों में निवासित देवी-देवता

देवी / देवतानिवासित वृक्ष
दंतेश्वरी माताबांस, महुआ-तना
शीतला मातामहुआ-तना
रूपसिलाबांस-तना
हिंगलाजिनबांस-तना
सिंगराज, कोंडाराजशीशम-तना
खूंटादेवसाजा-तना
ठाकुरदेवपीपल

ग्राम देवी, ग्राम देवता, लोक ज्योतिष, सूर्य देवता

प्रमुख ग्राम देवियाँ: मणिकेश्वरी, भद्रकाली, कोकई माता, मावली माता, बंजारी, हिंगलाजिन, परदेशिन, जलकन्या, जिमीदारिन / शीतला माता। ग्राम देवता: तलुरमुत्ते, कड़रेंगाल, भीमादेव (खेतीहर देवता)।

लोक ज्योतिषज्ञाता
आड़ी-टेढ़ी रेखा गिनने वालामेढ़ा गंतेया
तंत्र-मंत्र जानने वालासिरहा
उड़िया पंचांग जानने वालापंजियार
चावल द्वारा भविष्य बताने वालाजोगियार
सूर्यदेवताजनजाति
सिंगबोंगामुण्डा
सूरजदेवबिरहोर
धर्मेशउराँव
राजा नारायणदेवबैगा
नारायणदेवगोंड
बेलाकोंध

धार्मिक पूजारी

धार्मिक पूजारीजनजाति
पाहनमुण्डा
पेरूमदोरला (कोयतुर)
गायतामुड़िया / मुरिया
जानीपरजा (धार्मिक कार्य करने वाला)
भटनायकपरजा (शुद्धिकरण करने वाला)

जनजाति एवं उनकी उत्पत्ति

जनजातिउत्पत्ति
बैगानागा बैगा
कमारदेव डोंगर
कोरवाकाग मगोड़ा
अबूझमाड़ियाकुर्सतुरंगा / तुम्बा / कस्तुरनागा
मंझवारमाँझी जनजाति
पंडोपाण्डव
कंवरकौरव
कंडराकांड / बाण
बिंझवारबाराभाई बेटकर
सौंताबालक लोढ़ा
भुंजियाभगवान शिव के चिलम से निकली आग में दो मूर्तियों के जलने से

जनजातियों से संबंधित शब्दावली

शब्दजनजातिअर्थ
माहलामुड़ियासगाई
मोहरियामुड़ियाशहनाई बजाने वाला
सिहारीमाड़ियाजंगल में पृथक झोपड़ी
बरगहल्बाटोटम
ककईपानीहल्बाप्रसूति पश्चात प्रदत्त औषधि पानी
बाकराभतराकमरा
कलतोसनाददोरलासगाई
वेन्टादोरलासामूहिक शिकार
झूंठीबिंझवारगोदना
बानकोलगोत्र को बान कहते हैं

नोट: राज्य में चूरापाट बेर वृक्ष में बांधा जाता है। बस्तर में युद्ध देवी के रूप में कुड़ुम तुला की उपासना की जाती है।

गोत्र / गण चिन्ह

मजूमदार एवं मदान के अनुसार एक गोत्र अधिकांशतः कुल वंशों का योग है और यह अपनी उत्पत्ति एक कल्पित पूर्वज से मानता है, जो मानव, मानव के समान, पशु, पेड़-पौधा या निर्जीव वस्तु तक हो सकता है। फॉक्स का कथन है कि गोत्र एकपक्षीय वंश समूह है। जनजातीय समाज अनेक गण चिन्हों (टोटम) तथा गोत्रों में बँटा है, जिनका विभाजन देवताओं के आधार पर किया जाता है।

समूहअर्थ
नालुंग पेनचार देवताओं को पूजने वाले
सयुंग पेनपाँच देवताओं को पूजने वाले
सारुंग पेनछः देवताओं को पूजने वाले
येरूंग पेनसात देवताओं को पूजने वाले
  • समगोत्र विवाह वर्जित है; गोत्र बहिर्विवाही होता है।
  • गोत्र की विशेषता: बहिर्विवाही, सामान्य पूर्वज, एकपक्षीय प्रकृति।
  • जनजाति समाज में गण चिन्ह का विशेष महत्त्व है।
  • हल्बा में टोटम को बरग और कोल में गोत्र को बान कहते हैं।

कुरुख (उराँव) में पशु, पक्षी, पौधे आदि से संबंधित कुल नाम स्रोत में इस प्रकार दिए गए हैं:

नामकुल नामनामकुल नाम
औषधीय पौधाकुजुरबतखगेड़े
मछलीऐंड, मिंजलंगूरहलमन
बगुलाबकुलाफलकिरो
बरगदबाराहेज-स्पैरोकेरकेट्टा
जंगली कुत्ताबरवा, खोयाकौआखाखा
नमकबेककबूतरखलखो
गिलहरीचिद्रबाघलकड़ा
धानधन, खेसकोबरानाग
माउसएडगोलौहपन्ना
कछुआएक्का, कच्छप

तुलना एवं संबंध

जनजातिपूर्वज / उत्पत्तिमुख्य देवता
बैगानागा बैगाबूढ़ादेव, राजा नारायणदेव
कमारदेव डोंगरकचना धुरवा, भीमा देव
कंवरकौरवसगराखण्ड, दूल्हादेव
पंडोपाण्डव—
बिंझवारबाराभाई बेटकरविन्ध्यवासिनी, बारह भाई बेटकर
कोरवाकाग मगोड़ाखुड़िया रानी
जनजातिसूर्यदेव का नाम
मुण्डासिंगबोंगा
बिरहोरसूरजदेव
उराँवधर्मेश
बैगाराजा नारायणदेव
गोंडनारायणदेव
कोंधबेला

याद रखने योग्य बिंदु

  • पाटदेव बस्तर के राजदेव; डूमादेव पितृदेव।
  • हल्बा की देवी दंतेश्वरी माई।
  • बैगा के प्रमुख देव बूढ़ादेव-बूढ़ीमाई (साल वृक्ष)।
  • कमार के राजा कचना धुरवा; भीमा देव सरई वृक्ष के नीचे।
  • बिंझवार विन्ध्यवासिनी को पूजते हैं।
  • करमा नृत्य के देवता करम सेनी; ककसार-घोटुल के लिंगोपेन।
  • ठाकुरदेव पीपल के तने में निवास करते हैं।
  • सिरहा तंत्र-मंत्र जानने वाला; पंजियार उड़िया पंचांग; जोगियार चावल से भविष्य।
  • पाहन मुण्डा के पुजारी; पेरूम दोरला के; गायता मुड़िया के।
  • कंवर कौरव और पंडो पाण्डव से जुड़े हैं।
  • माहला = सगाई (मुड़िया); ककईपानी = प्रसूति औषधि (हल्बा)।
  • बरग = टोटम (हल्बा); बान = गोत्र (कोल)।
  • गोत्र बहिर्विवाही होता है।
  • चूरापाट बेर वृक्ष में बांधा जाता है।

स्मरण सूत्र

  • "कंवर-कौरव, पंडो-पाण्डव": दोनों महाभारत पक्ष।
  • "पाहन मुण्डा, पेरूम दोरला, गायता मुड़िया": पुजारियों की क्रमिक जोड़ी।
  • "सूरज बिरहोर, सिंग मुण्डा, धर्मेश उराँव": सूर्यदेव की जोड़ी।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

पूल में विन्ध्यवासिनी देवी और बिंझवार, बैगा के प्रमुख देवता तथा मुरिया विवाह में माहला जैसे प्रश्न दिखते हैं। जोड़ी-मिलान की शैली में देवता, पुजारी और सूर्यदेव की तालिकाएँ सबसे अधिक पूछी जाती हैं। कंवर की उत्पत्ति और सैन्य कार्य को मिलाकर भी प्रश्न बनाए गए हैं।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: बस्तर के राजदेव कौन हैं? उत्तर: पाटदेव।
  2. प्रश्न: मुण्डा के धार्मिक पुजारी को क्या कहते हैं? उत्तर: पाहन।
  3. प्रश्न: हल्बा जनजाति में टोटम को क्या कहा जाता है? उत्तर: बरग।
  4. प्रश्न: भीमा देव का निवास किस वृक्ष के नीचे है? उत्तर: सरई वृक्ष (कमार)।
  5. प्रश्न: कौन-सी जनजाति स्वयं को पाण्डव से जोड़ती है? उत्तर: पंडो।

अभ्यास प्रश्न

  1. बैगा जनजाति के मुख्य देवता कौन है?

    • (A) दूल्हा देव
    • (B) बूढ़ा देव
    • (C) बड़ा देव
    • (D) बिलाई माता
  2. विन्ध्यवासिनी देवी की पूजा करने वाली जनजाति है

    • (A) खैरवार
    • (B) भूइया
    • (C) बैगा
    • (D) बिंझवार
  3. , मुरिया विवाह में ‘माहला’ का अर्थ होता है

    • (A) सगाई
    • (B) तेल चढ़ाना
    • (C) टीका लगाना
    • (D) मुकुट बंधन
  4. कौरवों को अपना पूर्वज मानने वाली तथा सैनिक सेवा को अपना परम्परागत व्यवसाय समझने वाली जनजाति छत्तीसगढ़ में कौन- सी है?

    • (A) बैगा
    • (B) कोरबा
    • (C) कंवार
    • (D) खैरवार

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (B) - बैगा के देवताओं की सूची में बूढ़ादेव-बूढ़ीमाई सबसे पहले हैं (साल वृक्ष में निवास)।
  2. (D) - बिंझवार के देवता विन्ध्यवासिनी और बारह भाई बेटकर हैं।
  3. (A) - शब्दावली तालिका में माहला = सगाई (मुड़िया)।
  4. (C) - कंवर को कौरव से जोड़ा गया है और उनका कार्य सैन्य सेवा बताया गया है।
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