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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 23
उत्तर सांस्कृतिक क्षेत्र की जनजातियाँ, समस्याएँ एवं संवैधानिक प्रावधान

उत्तर सांस्कृतिक क्षेत्र (सरगुजा संभाग) की जनजातियाँ, जनजातीय समस्याएँ एवं संवैधानिक प्रावधान

उत्तर सांस्कृतिक क्षेत्र में सरगुजा संभाग के सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी, बलरामपुर, जशपुर तथा बिलासपुर संभाग के रायगढ़ एवं कोरबा जिलों के पहाड़ी क्षेत्र आते हैं। संपर्क बोली सदरी और सरगुजिया है। इस क्षेत्र में कोरवा, खड़िया, खैरवार, भारिया, माझी, मझवार, मुण्डा, नगेशिया, पण्डो, बियार, उरांव, बिरहोर आदि निवास करते हैं।

इस अध्याय में खड़िया, खैरवार, भारिया, मझवार, माझी, नगेशिया, कोरकू, मुण्डा, बियार और भील का विवरण है। अंत में पुस्तक की जनजातीय समस्याएँ (विस्थापन आदि) तथा अनुसूचित जनजातियों से जुड़े संवैधानिक अनुच्छेद तालिका में दिए गए हैं, जो CGPSC मुख्य और प्रारंभिक दोनों में उपयोगी हैं।

1. खड़िया

खड़िया को पुस्तक में आदि कोलारियन जनजाति कहा गया है।

बिंदुविवरण
निवासरायगढ़, जशपुर, रायपुर, महासमुंद व सरगुजा
बोलीखड़िया
प्रमुख पर्वपूस-पुन्नी व करमा
प्रमुख देवताबंदा
कार्यपालकी ढोना
विशेषआदि कोलारियन जनजाति

2. खैरवार

खैरवार का पारंपरिक कार्य खैर वृक्ष से कत्था निकालना है।

बिंदुविवरण
निवाससरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, बिलासपुर
अन्य नामखरवार / खरिया / खैरया
कार्यखैर वृक्ष से कत्था निकालना
नृत्यजदुरा (दीपावली), डंडा (होली)

3. भारिया

भारिया जनजाति बिलासपुर, कोरबा और जांजगीर-चांपा में रहती है।

बिंदुविवरण
निवासबिलासपुर, कोरबा एवं जांजगीर-चांपा
निवास स्थानढाना
बोलीभरनोटी या भारियाटी
युवागृहघासरवासा
विशेषसाँप और मोर के मांस में विशेष रुचि
ग्राम सीमामुठवा बाबा का चबूतरा

4. मझवार

मझवार को मिश्रित जनजाति बताया गया है और वे स्वयं को होर कहते हैं।

बिंदुविवरण
निवाससरगुजा, बलरामपुर, कोरबा एवं रायगढ़
पंचायत प्रमुखगौंटिया
बोली में स्वयं कोहोर
उत्पत्तिमिश्रित जनजाति; गोंड, मुंडा और कंवर से

5. माझी

माझी शब्द के अर्थ को लेकर पुस्तक में दो मत हैं: आर.वी. रसेल की पुस्तक (1916) के अनुसार गोंड, मुंडा और कंवर के पूर्वजों से उत्पत्ति; विलियम क्रुक्स के अनुसार केंवट, धीवर, मल्लाह जैसे आर्यन समूह नदी की मझधार पार करने से माझी कहलाए। इस विषय में पुस्तक दोनों मत देती है, हम भी दोनों रख रहे हैं।

बिंदुविवरण
निवासरायगढ़, जशपुर, कोरबा, बलरामपुर, सरगुजा
रसेल के अनुसारद ट्राइब्स एंड कास्ट ऑफ सेंट्रल प्रोविन्सेस ऑफ इंडिया (1916): गोंड, मुण्डा और कंवर के पूर्वजों से
क्रुक्स के अनुसारकेंवट, धीवर, मल्लाह आदि, मझधार पार करने से
उपजाति3: कोल माझी, डोरबटा/तुरिया माझी, किसान माझी
पंचायत प्रमुखसियान

6. नगेशिया

नगेशिया का नाम नाग सर्प द्वारा रक्षा की किंवदंती से जोड़ा गया है।

बिंदुविवरण
निवाससरगुजा, जशपुर, बलरामपुर और रायगढ़
बोलीसदरी
उत्पत्ति (किंवदंती)नाग सर्प द्वारा रक्षा किए जाने के कारण
उपजातिसेन्दुरिया, तेलहा, धुरिया
विशेषस्वयं को किसान कहते हैं; इस जनजाति में गोत्र नहीं पाए जाते

7. कोरकू (Korku)

कोरकू का शाब्दिक अर्थ जमीन खोदने वाला है और यह मुख्यतः मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र की जनजाति है।

बिंदुविवरण
निवासकोरिया, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर
मूलतःमध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की जनजाति
उत्पत्ति (किंवदंती)महादेव से
शाब्दिक अर्थजमीन खोदने वाला
पारंपरिक पेशाभूमि खोदना
प्रमुख नृत्यथापड़ी (आषाढ़ माह), ढांढल नृत्य
उपजातिबावरिया, बोपची, माक्सी निहाल, बेंडिया
पुनर्विवाहपाटो विवाह (स्त्री पति को छोड़कर अन्य से विवाह)
निवास स्थानढाना
मृतक संस्कारसिडोली प्रथा: मृतकों को दफनाया जाता है और लकड़ी का स्तंभ गाड़ते हैं
जनजाति नाट्यखंभस्वांग
पर्वगाँव के बाहर ऊँचा खंभा मेघनाथ त्योहार मनाने हेतु गाड़ा जाता है

8. मुण्डा

मुण्डा झारखंड की प्रमुख जनजाति है, इसलिए छत्तीसगढ़ में झारखंड से लगे जिलों में रहती है।

बिंदुविवरण
निवासजशपुर एवं बलरामपुर
अन्य नामहोरोहान या मुरा (अर्थ: गाँव का मुखिया)
साथ रहने वालेउरांव, कंवर, नगेसिया, भुईहर आदि
बोलीमुण्डारी
धार्मिक पुजारीपाहन (मृत्यु के 10वें दिन पूर्वजों की पूजा करता है)

9. बियार

बियार छत्तीसगढ़ की एक अल्पसंख्यक जनजाति है।

बिंदुविवरण
निवाससरगुजा क्षेत्र (कोरिया एवं मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी)
उपजातियाँबरहरिया (सोन नदी के उत्तर से उत्पत्ति); दखिनाहा (सोन नदी के दक्षिण से उत्पत्ति)
विशेषगोंड एवं खैरवार के साथ रहते हैं; अल्पसंख्यक जनजाति

10. भील

भील शब्द को द्रविड़ भाषा के बिल्लु (बाण या तीर) से माना गया है।

बिंदुविवरण
निवासकोरिया एवं मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी
प्रथागोल गधेड़ों
उत्पत्तिद्रविड़ शब्द बिल्लु (बाण/तीर) से
भागवत पुराणवेण राजा की संतान
विवाहहरण विवाह (मिहिजम्बु), परीक्षा विवाह (गोल गधेड़ों), हठ विवाह (उदाड़ी), घरजमाई (खंदाणिया), विनिमय (हाठपाठ)
उल्लेखरामायण में शबरी भीलनी; महाभारत में एकलव्य भील

जनजातीय समस्याएँ

पुस्तक के अनुसार विस्थापन जनजातियों की प्रमुख समस्या है। पर-संस्कृति ग्रहण तथा पृथक्करण का प्रभाव भी शीर्षक के रूप में दिए गए हैं।

विषयविवरण
प्रभावजीवन-शैली में बदलाव; आर्थिक समस्याएँ; संस्कृति का क्षरण
कारणउद्योगों की स्थापना हेतु गाँवों के लोगों को हटाया गया; राष्ट्रीय उद्यानों व अभ्यारण्यों के कारण जनजातीय समुदायों को विस्थापित होना पड़ा
अन्य शीर्षकपर-संस्कृति ग्रहण; पृथक्करण का प्रभाव

अनुसूचित जनजाति संबंधी संवैधानिक प्रावधान

अनुच्छेदप्रावधान
15 (4)जनजातियों का सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से विकास का प्रावधान
16 (4)सरकारी नौकरी में प्रतिनिधित्व हेतु आरक्षण का अधिकार राज्य को
23दुर्व्यवहार, बेगार, बंधक मजदूरी का निषेध
24बाल श्रम निषेध
29अपनी भाषा, बोली एवं संस्कृति सुरक्षित रखने का अधिकार
46शैक्षणिक व आर्थिक विकास के विषय में सुरक्षा
164जनजाति समाज के लिए प्रशासनिक व्यवस्था
164 (A)छ.ग., म.प्र., ओडिशा एवं झारखंड में अनुसूचित क्षेत्रों के राज्यों में जनजाति मंत्री के प्रावधान का उल्लेख
244छठवीं अनुसूची के अंतर्गत स्वशासन की व्यवस्था (पुस्तक के अनुसार)
275जनजाति क्षेत्रों के लिए विशेष अनुदान
330 व 332लोकसभा (330) एवं राज्य विधानसभा (332) में आरक्षण
335संघ व राज्य सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण
338 (A)89वें संविधान संशोधन के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग
342अनुसूचित जनजातियों के संबंध में राष्ट्रपति का अधिकार
366 (25)अनुसूचित जनजाति की परिभाषा; अनुच्छेद 342 के अधीन समझी जाने वाली जनजातियाँ

टिप्पणी: अनुच्छेद 244 के संबंध में पुस्तक छठवीं अनुसूची कहती है। यह तथ्य पुस्तक के अनुसार ही रखा गया है; परीक्षा में इसे संविधान के मानक पाठ से मिलाकर देखें।

तुलना एवं संबंध

जनजातिपेशाविशेष
खड़ियापालकी ढोनाबंदा; पूस-पुन्नी, करमा
खैरवारकत्था निकालनाजदुरा, डंडा नृत्य
भारियासाँप-मोर मांस रुचियुवागृह घासरवासा
कोरकूभूमि खोदनाथापड़ी, ढांढल; खंभस्वांग
मुण्डा(पेशा नहीं दिया)पाहन पुजारी; मुण्डारी
भील(पेशा नहीं दिया)गोल गधेड़ों प्रथा

याद रखने योग्य बिंदु

  • खड़िया आदि कोलारियन जनजाति है; देवता बंदा।
  • खैरवार खैर से कत्था निकालते हैं; नृत्य जदुरा और डंडा।
  • भारिया का युवागृह घासरवासा; बोली भरनोटी/भारियाटी।
  • मझवार स्वयं को होर कहते हैं।
  • माझी के 3 उपभाग: कोल, डोरबटा/तुरिया, किसान।
  • माझी का पंचायत प्रमुख सियान।
  • नगेशिया नाग से रक्षा की किंवदंती; गोत्र नहीं।
  • कोरकू = जमीन खोदने वाला; नृत्य थापड़ी, ढांढल।
  • कोरकू नाट्य खंभस्वांग; पुनर्विवाह पाटो।
  • मुण्डा का पुजारी पाहन; बोली मुण्डारी।
  • बियार की उपजातियाँ बरहरिया और दखिनाहा।
  • भील में गोल गधेड़ों प्रथा।
  • अनुच्छेद 338A राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग।
  • अनुच्छेद 342 राष्ट्रपति का अधिकार।

स्मरण सूत्र

  • खैरवार खैर, खड़िया खटिया-पालकी: दोनों 'ख' से; कत्था और पालकी।
  • कोरकू = कोड़ना (खोदना); थापड़ी = थाप।
  • अनुच्छेद 23-24: बेगार और बाल श्रम; 330-332: लोकसभा-विधानसभा।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

पूल में इस भाग से कोरकू के नृत्य जैसे प्रश्न मिलते हैं; अन्य पूल प्रश्न प्रायः इन पृष्ठों से जाँचे नहीं जा सके।

जनजाति-निवास जिला, पेशा, पंचायत प्रमुख के नाम और उपजातियों की संख्या पूछी जाती है।

संवैधानिक अनुच्छेदों में मिलान प्रश्न आम हैं।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: कोरकू का शाब्दिक अर्थ? उत्तर: जमीन खोदने वाला।
  2. प्रश्न: भारिया का युवागृह? उत्तर: घासरवासा।
  3. प्रश्न: मुण्डा के पुजारी को क्या कहते हैं? उत्तर: पाहन।
  4. प्रश्न: अनुच्छेद 338 (A) क्या है? उत्तर: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग।
  5. प्रश्न: नगेशिया में क्या नहीं पाया जाता? उत्तर: गोत्र।

अभ्यास प्रश्न

  1. Which dance is associated with the Korku tribe?

    • (A) Gaur
    • (B) Thapti
    • (C) Kaksar
    • (D) Faag

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (B) - कोरकू जनजाति का प्रमुख नृत्य थापड़ी (आषाढ़ माह) बताया गया है।
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