उत्तर सांस्कृतिक क्षेत्र (सरगुजा संभाग) की जनजातियाँ, जनजातीय समस्याएँ एवं संवैधानिक प्रावधान
उत्तर सांस्कृतिक क्षेत्र में सरगुजा संभाग के सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी, बलरामपुर, जशपुर तथा बिलासपुर संभाग के रायगढ़ एवं कोरबा जिलों के पहाड़ी क्षेत्र आते हैं। संपर्क बोली सदरी और सरगुजिया है। इस क्षेत्र में कोरवा, खड़िया, खैरवार, भारिया, माझी, मझवार, मुण्डा, नगेशिया, पण्डो, बियार, उरांव, बिरहोर आदि निवास करते हैं।
इस अध्याय में खड़िया, खैरवार, भारिया, मझवार, माझी, नगेशिया, कोरकू, मुण्डा, बियार और भील का विवरण है। अंत में पुस्तक की जनजातीय समस्याएँ (विस्थापन आदि) तथा अनुसूचित जनजातियों से जुड़े संवैधानिक अनुच्छेद तालिका में दिए गए हैं, जो CGPSC मुख्य और प्रारंभिक दोनों में उपयोगी हैं।
1. खड़िया
खड़िया को पुस्तक में आदि कोलारियन जनजाति कहा गया है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | रायगढ़, जशपुर, रायपुर, महासमुंद व सरगुजा |
| बोली | खड़िया |
| प्रमुख पर्व | पूस-पुन्नी व करमा |
| प्रमुख देवता | बंदा |
| कार्य | पालकी ढोना |
| विशेष | आदि कोलारियन जनजाति |
2. खैरवार
खैरवार का पारंपरिक कार्य खैर वृक्ष से कत्था निकालना है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, बिलासपुर |
| अन्य नाम | खरवार / खरिया / खैरया |
| कार्य | खैर वृक्ष से कत्था निकालना |
| नृत्य | जदुरा (दीपावली), डंडा (होली) |
3. भारिया
भारिया जनजाति बिलासपुर, कोरबा और जांजगीर-चांपा में रहती है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | बिलासपुर, कोरबा एवं जांजगीर-चांपा |
| निवास स्थान | ढाना |
| बोली | भरनोटी या भारियाटी |
| युवागृह | घासरवासा |
| विशेष | साँप और मोर के मांस में विशेष रुचि |
| ग्राम सीमा | मुठवा बाबा का चबूतरा |
4. मझवार
मझवार को मिश्रित जनजाति बताया गया है और वे स्वयं को होर कहते हैं।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | सरगुजा, बलरामपुर, कोरबा एवं रायगढ़ |
| पंचायत प्रमुख | गौंटिया |
| बोली में स्वयं को | होर |
| उत्पत्ति | मिश्रित जनजाति; गोंड, मुंडा और कंवर से |
5. माझी
माझी शब्द के अर्थ को लेकर पुस्तक में दो मत हैं: आर.वी. रसेल की पुस्तक (1916) के अनुसार गोंड, मुंडा और कंवर के पूर्वजों से उत्पत्ति; विलियम क्रुक्स के अनुसार केंवट, धीवर, मल्लाह जैसे आर्यन समूह नदी की मझधार पार करने से माझी कहलाए। इस विषय में पुस्तक दोनों मत देती है, हम भी दोनों रख रहे हैं।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | रायगढ़, जशपुर, कोरबा, बलरामपुर, सरगुजा |
| रसेल के अनुसार | द ट्राइब्स एंड कास्ट ऑफ सेंट्रल प्रोविन्सेस ऑफ इंडिया (1916): गोंड, मुण्डा और कंवर के पूर्वजों से |
| क्रुक्स के अनुसार | केंवट, धीवर, मल्लाह आदि, मझधार पार करने से |
| उपजाति | 3: कोल माझी, डोरबटा/तुरिया माझी, किसान माझी |
| पंचायत प्रमुख | सियान |
6. नगेशिया
नगेशिया का नाम नाग सर्प द्वारा रक्षा की किंवदंती से जोड़ा गया है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर और रायगढ़ |
| बोली | सदरी |
| उत्पत्ति (किंवदंती) | नाग सर्प द्वारा रक्षा किए जाने के कारण |
| उपजाति | सेन्दुरिया, तेलहा, धुरिया |
| विशेष | स्वयं को किसान कहते हैं; इस जनजाति में गोत्र नहीं पाए जाते |
7. कोरकू (Korku)
कोरकू का शाब्दिक अर्थ जमीन खोदने वाला है और यह मुख्यतः मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र की जनजाति है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | कोरिया, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर |
| मूलतः | मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की जनजाति |
| उत्पत्ति (किंवदंती) | महादेव से |
| शाब्दिक अर्थ | जमीन खोदने वाला |
| पारंपरिक पेशा | भूमि खोदना |
| प्रमुख नृत्य | थापड़ी (आषाढ़ माह), ढांढल नृत्य |
| उपजाति | बावरिया, बोपची, माक्सी निहाल, बेंडिया |
| पुनर्विवाह | पाटो विवाह (स्त्री पति को छोड़कर अन्य से विवाह) |
| निवास स्थान | ढाना |
| मृतक संस्कार | सिडोली प्रथा: मृतकों को दफनाया जाता है और लकड़ी का स्तंभ गाड़ते हैं |
| जनजाति नाट्य | खंभस्वांग |
| पर्व | गाँव के बाहर ऊँचा खंभा मेघनाथ त्योहार मनाने हेतु गाड़ा जाता है |
8. मुण्डा
मुण्डा झारखंड की प्रमुख जनजाति है, इसलिए छत्तीसगढ़ में झारखंड से लगे जिलों में रहती है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | जशपुर एवं बलरामपुर |
| अन्य नाम | होरोहान या मुरा (अर्थ: गाँव का मुखिया) |
| साथ रहने वाले | उरांव, कंवर, नगेसिया, भुईहर आदि |
| बोली | मुण्डारी |
| धार्मिक पुजारी | पाहन (मृत्यु के 10वें दिन पूर्वजों की पूजा करता है) |
9. बियार
बियार छत्तीसगढ़ की एक अल्पसंख्यक जनजाति है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | सरगुजा क्षेत्र (कोरिया एवं मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी) |
| उपजातियाँ | बरहरिया (सोन नदी के उत्तर से उत्पत्ति); दखिनाहा (सोन नदी के दक्षिण से उत्पत्ति) |
| विशेष | गोंड एवं खैरवार के साथ रहते हैं; अल्पसंख्यक जनजाति |
10. भील
भील शब्द को द्रविड़ भाषा के बिल्लु (बाण या तीर) से माना गया है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | कोरिया एवं मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी |
| प्रथा | गोल गधेड़ों |
| उत्पत्ति | द्रविड़ शब्द बिल्लु (बाण/तीर) से |
| भागवत पुराण | वेण राजा की संतान |
| विवाह | हरण विवाह (मिहिजम्बु), परीक्षा विवाह (गोल गधेड़ों), हठ विवाह (उदाड़ी), घरजमाई (खंदाणिया), विनिमय (हाठपाठ) |
| उल्लेख | रामायण में शबरी भीलनी; महाभारत में एकलव्य भील |
जनजातीय समस्याएँ
पुस्तक के अनुसार विस्थापन जनजातियों की प्रमुख समस्या है। पर-संस्कृति ग्रहण तथा पृथक्करण का प्रभाव भी शीर्षक के रूप में दिए गए हैं।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| प्रभाव | जीवन-शैली में बदलाव; आर्थिक समस्याएँ; संस्कृति का क्षरण |
| कारण | उद्योगों की स्थापना हेतु गाँवों के लोगों को हटाया गया; राष्ट्रीय उद्यानों व अभ्यारण्यों के कारण जनजातीय समुदायों को विस्थापित होना पड़ा |
| अन्य शीर्षक | पर-संस्कृति ग्रहण; पृथक्करण का प्रभाव |
अनुसूचित जनजाति संबंधी संवैधानिक प्रावधान
| अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|
| 15 (4) | जनजातियों का सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से विकास का प्रावधान |
| 16 (4) | सरकारी नौकरी में प्रतिनिधित्व हेतु आरक्षण का अधिकार राज्य को |
| 23 | दुर्व्यवहार, बेगार, बंधक मजदूरी का निषेध |
| 24 | बाल श्रम निषेध |
| 29 | अपनी भाषा, बोली एवं संस्कृति सुरक्षित रखने का अधिकार |
| 46 | शैक्षणिक व आर्थिक विकास के विषय में सुरक्षा |
| 164 | जनजाति समाज के लिए प्रशासनिक व्यवस्था |
| 164 (A) | छ.ग., म.प्र., ओडिशा एवं झारखंड में अनुसूचित क्षेत्रों के राज्यों में जनजाति मंत्री के प्रावधान का उल्लेख |
| 244 | छठवीं अनुसूची के अंतर्गत स्वशासन की व्यवस्था (पुस्तक के अनुसार) |
| 275 | जनजाति क्षेत्रों के लिए विशेष अनुदान |
| 330 व 332 | लोकसभा (330) एवं राज्य विधानसभा (332) में आरक्षण |
| 335 | संघ व राज्य सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण |
| 338 (A) | 89वें संविधान संशोधन के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग |
| 342 | अनुसूचित जनजातियों के संबंध में राष्ट्रपति का अधिकार |
| 366 (25) | अनुसूचित जनजाति की परिभाषा; अनुच्छेद 342 के अधीन समझी जाने वाली जनजातियाँ |
टिप्पणी: अनुच्छेद 244 के संबंध में पुस्तक छठवीं अनुसूची कहती है। यह तथ्य पुस्तक के अनुसार ही रखा गया है; परीक्षा में इसे संविधान के मानक पाठ से मिलाकर देखें।
तुलना एवं संबंध
| जनजाति | पेशा | विशेष |
|---|---|---|
| खड़िया | पालकी ढोना | बंदा; पूस-पुन्नी, करमा |
| खैरवार | कत्था निकालना | जदुरा, डंडा नृत्य |
| भारिया | साँप-मोर मांस रुचि | युवागृह घासरवासा |
| कोरकू | भूमि खोदना | थापड़ी, ढांढल; खंभस्वांग |
| मुण्डा | (पेशा नहीं दिया) | पाहन पुजारी; मुण्डारी |
| भील | (पेशा नहीं दिया) | गोल गधेड़ों प्रथा |
याद रखने योग्य बिंदु
- खड़िया आदि कोलारियन जनजाति है; देवता बंदा।
- खैरवार खैर से कत्था निकालते हैं; नृत्य जदुरा और डंडा।
- भारिया का युवागृह घासरवासा; बोली भरनोटी/भारियाटी।
- मझवार स्वयं को होर कहते हैं।
- माझी के 3 उपभाग: कोल, डोरबटा/तुरिया, किसान।
- माझी का पंचायत प्रमुख सियान।
- नगेशिया नाग से रक्षा की किंवदंती; गोत्र नहीं।
- कोरकू = जमीन खोदने वाला; नृत्य थापड़ी, ढांढल।
- कोरकू नाट्य खंभस्वांग; पुनर्विवाह पाटो।
- मुण्डा का पुजारी पाहन; बोली मुण्डारी।
- बियार की उपजातियाँ बरहरिया और दखिनाहा।
- भील में गोल गधेड़ों प्रथा।
- अनुच्छेद 338A राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग।
- अनुच्छेद 342 राष्ट्रपति का अधिकार।
स्मरण सूत्र
- खैरवार खैर, खड़िया खटिया-पालकी: दोनों 'ख' से; कत्था और पालकी।
- कोरकू = कोड़ना (खोदना); थापड़ी = थाप।
- अनुच्छेद 23-24: बेगार और बाल श्रम; 330-332: लोकसभा-विधानसभा।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
पूल में इस भाग से कोरकू के नृत्य जैसे प्रश्न मिलते हैं; अन्य पूल प्रश्न प्रायः इन पृष्ठों से जाँचे नहीं जा सके।
जनजाति-निवास जिला, पेशा, पंचायत प्रमुख के नाम और उपजातियों की संख्या पूछी जाती है।
संवैधानिक अनुच्छेदों में मिलान प्रश्न आम हैं।
स्वयं जाँचें
- प्रश्न: कोरकू का शाब्दिक अर्थ? उत्तर: जमीन खोदने वाला।
- प्रश्न: भारिया का युवागृह? उत्तर: घासरवासा।
- प्रश्न: मुण्डा के पुजारी को क्या कहते हैं? उत्तर: पाहन।
- प्रश्न: अनुच्छेद 338 (A) क्या है? उत्तर: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग।
- प्रश्न: नगेशिया में क्या नहीं पाया जाता? उत्तर: गोत्र।
अभ्यास प्रश्न
Which dance is associated with the Korku tribe?
- (A) Gaur
- (B) Thapti
- (C) Kaksar
- (D) Faag
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (B) - कोरकू जनजाति का प्रमुख नृत्य थापड़ी (आषाढ़ माह) बताया गया है।