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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 15
जनजातियों के पर्व-त्यौहार एवं पण्डुम

जनजातियों के पर्व-त्यौहार एवं पण्डुम

छत्तीसगढ़ की जनजातियों के त्यौहार ऋतु, खेती और देवताओं से जुड़े हैं। पुस्तक इन्हें चैत्र से फाल्गुन तक माह-क्रम में देती है, फिर अन्य प्रमुख त्यौहार, जनजाति-आधारित सूची, पण्डुम (गोंड़ी पर्व) और बैगा जनजाति के त्यौहारों को अलग से बताती है। परीक्षा में त्यौहार का माह, जनजाति और विशेषता तीनों पूछे जाते हैं।

माह-क्रम से त्यौहार

माहत्यौहारजनजातिविशेष
चैत्रसरहुल त्यौहारउराँवसरगुजा अंचल; साल वृक्ष के नीचे; उराँव का प्रमुख त्यौहार
चैत्रबीज पुटनी त्यौहार-पृथ्वी देवी की पूजा
चैत्रगोबर बोहरानी-छिंदगढ़ विकासखण्ड (सुकमा) क्षेत्र
चैत्रचैतरई पर्व-बस्तर संभाग
चैत्रमाटी त्यौहारगोंड़/भतराबस्तर संभाग; इसे बीज पण्डुम/बीज कुटनी भी कहते हैं; भोपालपट्टनम एवं बीजापुर क्षेत्र में बैशाख या ज्येष्ठ में
बैशाखअरवा तीज--
ज्येष्ठभीमा जतरा-भीमा-भीमसेन (इन्द्रदेव) की पूजा अच्छी वर्षा की कामना हेतु
आषाढ़गोंचा पर्वमाड़ियाबस्तर; आषाढ़ माह; शुरूआतकर्ता पुरूषोत्तमदेव; भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा; तुपकी का विशेष महत्व
आषाढ़बीज बोहनीकोरवाकृषि के दौरान
सावन/श्रावणअमुस त्यौहारगोंड़, भतराश्रावण अमावस्या; जनजातियों का प्रथम त्यौहार; औषधि प्रयोग की परम्परा को जीवंत रखने हेतु
भादोतीजा जगारभतरा, हल्बाबस्तर; वाद्य धनकुल; भादो शुक्ल पक्ष तृतीया; गायन हल्बी में; बस्तर की लोकगाथा पर आधारित; धान की बाली को कन्या (माता लक्ष्मी) का प्रतिरूप मानकर जगार घर में स्थापित विष्णु के प्रतीक नारियल से विवाह कराया जाता है
भादोकरमाउराँव आदिबैगा, उराँव, गोंड़, बिंझवार, मुण्डा, कमार, कंवर, पण्डो, बिरहोर आदि; प्रायः भादो एकादशी (धान रोपाई व कटाई के मध्य); सरगुजा में भादो में; सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ (उत्तर में अधिक); करम वृक्ष या उसकी टहनी को रोपा जाता है
भादोनावाखानीगोंड़नई फसल आने पर; उपनाम पण्डुम/कोडता तिन्तुम
कुवाँरकोराकोरवाफसल काटने के पश्चात
कुवाँरचऊँर धोनी पर्वबिंझवारदशहरा में
कार्तिकदियारीमाड़िया, भतरापशुओं को खाना खिलाया जाता है
कार्तिकगौरा-गौरीगोंड़शिव-पार्वती की पूजा (दीपावली के समय)
अगहनलक्ष्मी जगारभतराबस्तर; धनकुल; शीत ऋतु में धान की फसल कटाई के समय; हल्बी में गायन
पौषपुपुलसाड़गोंडपौष माह में
पौषतारा, छेरता पर्व-बस्तर अंचल
माघधेरसाकोरवाकृषि के दौरान
माघआमाखाईगोंड, धुरवा, परजाबस्तर; आम फलने के अवसर पर
फाल्गुनमेघनाथ पर्वगोंड़माह फाल्गुन

पुस्तक-विसंगति: तीजा जगार की तालिका (पृष्ठ 396-397) में भादो शुक्ल पक्ष तृतीया दी गई है, जबकि पृष्ठ 393 की धनकुल सूची में इसे सामान्य जगार के रूप में गिना गया है; दोनों का संबंध धनकुल वाद्य से है। इसी तरह माटी त्यौहार बस्तर में चैत्र वर्ग में रखा गया है परंतु नोट में बैशाख-ज्येष्ठ का उल्लेख भी है।

अन्य प्रमुख त्यौहार

त्यौहारजनजातिविशेष
ककसाड़ परबमुड़िया, अबूझमाड़ियाबस्तर; अबूझमाड़ियों का विशेष पर्व
ककसाड़/करसाड़/खरसाड़मुरियागोत्र देवता मंडादेव का जातरा/जात्रा पर्व
मड़ईमुड़िया, माड़ियाअंगादेव (काष्ठ से निर्मित) की पूजा
बाली परबहल्बा और भतराभीमा देव को समर्पित; तीन माह तक चलने वाला पर्व
भगोरिया त्यौहारभीलभक्त नृत्य देवता की पूजा हेतु
लारूकाजगोंडविवाह के अवसर पर; लारू = दूल्हा, काज = अनुष्ठान; बकरे और सुअर की बलि
रसनवा/रतौना पर्वबैगा9 वर्ष में एक बार; आदिदेव नागा बैगा का पूजन
पोहचानी पर्वगोंडदेवी प्रकोप से बचने हेतु विभिन्न चरणों में

जनजाति के अनुसार त्यौहार

जनजातिपर्व-त्यौहार
उराँवसरहुल त्यौहार, करमा पर्व
गोंडमाटी त्यौहार, गौरा-गौरी, मेघनाथ पर्व, लारूकाज, पुपुल साड़, नावाखानी, पोहचानी पर्व
गोंड, भतराअमुस त्यौहार
गोंड, धुरवा, परजाआमाखाई
माड़ियागोंचा पर्व, मड़ई पर्व
अबूझमाड़ियाककसाड़ परब (ककसाड़/करसाड़/खरसाड़ नृत्य - मुरिया/मुड़िया)
माड़िया, भतरादियारी
कोरवाबीजबोहनी, कोरा, धेरसा
भतरा, हल्बालक्ष्मी जगार, बाली परब
भीलभगोरिया त्यौहार
बैगारसनवा पर्व

विसंगति: ककसाड़ को एक जगह "मुड़िया, अबूझमाड़िया" और दूसरी जगह "मुरिया" के साथ तथा जनजाति-सूची में केवल अबूझमाड़िया के साथ रखा गया है। इसलिए विकल्पों में दोनों नाम हों तो प्रश्न अस्पष्ट रहता है।

पण्डुम संबंधी पर्व

बस्तर की गोंड़ जनजाति में नवाखाई त्यौहार को पण्डुम कहते हैं। पण्डुम शब्द के साथ जुड़े त्यौहार तालिका में हैं।

पण्डुमविवरण
उराड पंडुम (उरांड)महुआ के फूल बीनने जंगल जाने पर; महुआ और उससे बनी शराब का विशेष महत्व
नुनानारे दाना पण्डुमगोटुल में अक्टूबर माह में; गोटुल की सभी मोटियारियाँ दूसरे गोटुल में जाती हैं
कप्पल पण्डुमदोरला जनजाति द्वारा अच्छी वर्षा की कामना हेतु पूजा
मरका पण्डुमआम की नई फसल आने पर
इरपु पण्डुममहुआ बीनने जाने पर
कुरूम पण्डुमछोटे अनाज/बाजरा के भोजन के समय
कोरता/पुना पण्डुमनया चावल खाने पर
भीमूल पण्डुमवर्षा के देवता संबंधित त्यौहार
कारे पण्डुमवृक्ष काटने, जलाने का परब / घास एवं बाँस काटने के समय
पच्चिम पण्डुमबियासी परब भी; बीज अंकुरित होने पर
बोटिगटी पण्डुमबीज बोने का पर्व
तोरम पण्डुमकटाई परब
विज्जा पण्डुमबीज उत्सव
नुकु नार्दन पण्डुमदशहरा के समय
जाता पण्डुमसरसों की फसल काटने पर
मीनुल पण्डुममीनुल देव की पूजा के दौरान (वर्षा कराने के लिए)
बीज पण्डुमचैत्रमास में बीज बोने के दौरान
रिक्का/सुकुड़ पण्डुमसेम एवं नया दाल खाने पर
पेन पण्डुमदोरला जनजाति द्वारा गोत्र देव की पूजा के दौरान
पीड़म पण्डुमगाँव की रक्षा से संबंधित पर्व
वर्गपर्व
महुआ से संबंधितउराड पण्डुम, इरपु पण्डुम
बीज से संबंधितपच्चिम पण्डुम (बियारी परब), विज्जा पण्डुम, बीज पोंदम, बोटिगटी पण्डुम
कटाई से संबंधितकारे पण्डुम, तोरम, जाता पण्डुम

बैगा जनजाति के तीज-त्यौहार

क्र.त्यौहारअवसरमाह
1जवारा (नवरात्र)निरोगी हेतुचैत्र
2अक्तीबारिश का अनुमानबैशाख
3बिदरीफसल बोआईबैशाख एवं जेठ के अक्ती के बाद
4हरेलीपशु, घर एवं ग्राम सुरक्षासावन
5देवलीफसलों को कीटों से बचाने या निरोगी रखनेसावन
6पंचमी नवाखाईकृषि उपजभादो
7नवाखाईकृषि उपजभादो
8देवारी (गोवर्धन पूजा)फसल की कटाईकार्तिक
9मोहती नवाखाईजंगली जानवर एवं जहरीले जन्तुओं से सुरक्षाकार्तिक माह एवं 9 वर्षाकाल बीतने पर, लगभग 9 वर्ष में एक बार
10छेरताफसल की कटाई, उत्सव तथा मड़ईपुष माह
11दशेला नाचाकृषि उपजकुंवार से पुष
12मड़ईउत्सव-
13फाग नाचावनोपज संकलन के प्रारंभफागुन

तुलना एवं संबंध

जगार / परबजनजातिमाहविशेष
तीजा जगारभतरा, हल्बाभादो शुक्ल तृतीयाधान की बाली का नारियल से विवाह
लक्ष्मी जगारभतराअगहनधान कटाई का समय
बाली परबहल्बा, भतरा-भीमा देव; तीन माह
गोंचामाड़ियाआषाढ़जगन्नाथ रथ यात्रा; तुपकी
त्यौहारसंबंधित पूजा/देवता
सरहुलसाल वृक्ष
बीज पुटनीपृथ्वी देवी
भीमा जतराभीमा-भीमसेन (इन्द्रदेव)
गौरा-गौरीशिव-पार्वती
रसनवानागा बैगा
ककसाड़ (मुरिया)मंडादेव
मड़ईअंगादेव

याद रखने योग्य बिंदु

  • अमुस श्रावण अमावस्या को गोंड़-भतरा मनाते हैं; जनजातियों का प्रथम त्यौहार।
  • गोंचा पर्व माड़िया का, आषाढ़ में, पुरूषोत्तमदेव, जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी।
  • तीजा जगार भादो शुक्ल तृतीया, लक्ष्मी जगार अगहन में।
  • करमा भादो एकादशी के आसपास; करम वृक्ष की टहनी रोपी जाती है।
  • नावाखानी गोंड़ का; उपनाम पण्डुम/कोडता तिन्तुम।
  • कोरा कोरवा, कुवाँर, फसल काटने के बाद।
  • दियारी में पशुओं को खाना खिलाया जाता है।
  • गौरा-गौरी कार्तिक में शिव-पार्वती पूजा (गोंड़)।
  • पुपुलसाड़ पौष माह, गोंड।
  • आमाखाई: गोंड, धुरवा, परजा; आम फलने पर।
  • मेघनाथ पर्व फाल्गुन में गोंड़ों का।
  • रसनवा/रतौना 9 वर्ष में एक बार, बैगा, नागा बैगा।
  • लारूकाज विवाह पर, बकरे-सुअर की बलि।
  • बाली परब हल्बा-भतरा, भीमा देव, तीन माह।
  • महुआ के पर्व: उराड और इरपु पण्डुम; कटाई के: कारे, तोरम, जाता।

स्मरण सूत्र

  • "अमुस पहला, अमावस पर" = अमुस श्रावण अमावस्या और पहला त्यौहार।
  • "गोंचा-गोंड़ नहीं, माड़िया" = गोंचा माड़िया का है, गोंड़ का नहीं।
  • "रस-नवा नौ वर्ष" = रसनवा 9 वर्ष में।
  • "उराड-इरपु महुआ, कारे-तोरम-जाता कटाई" = पण्डुम का वर्गीकरण।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

जनजाति-त्यौहार का जोड़ा सबसे सामान्य रूप है (जैसे रसनवा-बैगा, मेघनाथ-गोंड़)।

पूल में रसनवा, माटी त्यौहार और मेघनाथ पर्व पर सीधे प्रश्न हैं।

पण्डुम शब्द के साथ अवसर (महुआ, बीज, कटाई) मिलाकर पूछा जाता है।

ऐसे विकल्प जिनमें एक ही त्यौहार दो जनजातियों से जुड़ा हो, वहाँ पुस्तक की विसंगति ध्यान में रखें।

स्वयं जाँचें

  1. रसनवा पर्व कौन मनाता है और कितने वर्ष में? बैगा; 9 वर्ष में एक बार।
  2. गोंचा पर्व का आरंभकर्ता कौन? पुरूषोत्तमदेव।
  3. माटी त्यौहार का दूसरा नाम? बीज पण्डुम/बीज कुटनी।
  4. अमुस किस दिन मनाया जाता है? श्रावण अमावस्या।
  5. मेघनाथ पर्व किस माह में? फाल्गुन।

अभ्यास प्रश्न

  1. “माटी” त्यौहार किस संभाग की जनजातियां मनाती है?

    • (A) बस्तर संभाग
    • (B) सरगुजा संभाग
    • (C) बिलासपुर संभाग
    • (D) रायपुर संभाग
  2. मेघनाद पर्व से सम्बन्धित छत्तीसगढ़ की कौन-सी जनजाति है ?

    • (A) बैगा
    • (B) गोण्ड
    • (C) अबुसमारिया
    • (D) दोरला
  3. रसनवा पर्व कौन-सी जनजाति मनाती है?

    • (A) गोण्ड
    • (B) बैगा
    • (C) सन्थाल
    • (D) उराँव

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (A) - माटी त्यौहार गोंड़/भतरा द्वारा बस्तर संभाग में मनाया जाता है।
  2. (B) - पुस्तक की तालिका में मेघनाथ पर्व फाल्गुन माह में गोंड़ जनजाति का है।
  3. (B) - रसनवा/रतौना पर्व बैगा जनजाति का 9 वर्ष में एक बार होने वाला पर्व है, जिसमें नागा बैगा का पूजन होता है।
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