जनजातियों के पर्व-त्यौहार एवं पण्डुम
छत्तीसगढ़ की जनजातियों के त्यौहार ऋतु, खेती और देवताओं से जुड़े हैं। पुस्तक इन्हें चैत्र से फाल्गुन तक माह-क्रम में देती है, फिर अन्य प्रमुख त्यौहार, जनजाति-आधारित सूची, पण्डुम (गोंड़ी पर्व) और बैगा जनजाति के त्यौहारों को अलग से बताती है। परीक्षा में त्यौहार का माह, जनजाति और विशेषता तीनों पूछे जाते हैं।
माह-क्रम से त्यौहार
| माह | त्यौहार | जनजाति | विशेष |
|---|---|---|---|
| चैत्र | सरहुल त्यौहार | उराँव | सरगुजा अंचल; साल वृक्ष के नीचे; उराँव का प्रमुख त्यौहार |
| चैत्र | बीज पुटनी त्यौहार | - | पृथ्वी देवी की पूजा |
| चैत्र | गोबर बोहरानी | - | छिंदगढ़ विकासखण्ड (सुकमा) क्षेत्र |
| चैत्र | चैतरई पर्व | - | बस्तर संभाग |
| चैत्र | माटी त्यौहार | गोंड़/भतरा | बस्तर संभाग; इसे बीज पण्डुम/बीज कुटनी भी कहते हैं; भोपालपट्टनम एवं बीजापुर क्षेत्र में बैशाख या ज्येष्ठ में |
| बैशाख | अरवा तीज | - | - |
| ज्येष्ठ | भीमा जतरा | - | भीमा-भीमसेन (इन्द्रदेव) की पूजा अच्छी वर्षा की कामना हेतु |
| आषाढ़ | गोंचा पर्व | माड़िया | बस्तर; आषाढ़ माह; शुरूआतकर्ता पुरूषोत्तमदेव; भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा; तुपकी का विशेष महत्व |
| आषाढ़ | बीज बोहनी | कोरवा | कृषि के दौरान |
| सावन/श्रावण | अमुस त्यौहार | गोंड़, भतरा | श्रावण अमावस्या; जनजातियों का प्रथम त्यौहार; औषधि प्रयोग की परम्परा को जीवंत रखने हेतु |
| भादो | तीजा जगार | भतरा, हल्बा | बस्तर; वाद्य धनकुल; भादो शुक्ल पक्ष तृतीया; गायन हल्बी में; बस्तर की लोकगाथा पर आधारित; धान की बाली को कन्या (माता लक्ष्मी) का प्रतिरूप मानकर जगार घर में स्थापित विष्णु के प्रतीक नारियल से विवाह कराया जाता है |
| भादो | करमा | उराँव आदि | बैगा, उराँव, गोंड़, बिंझवार, मुण्डा, कमार, कंवर, पण्डो, बिरहोर आदि; प्रायः भादो एकादशी (धान रोपाई व कटाई के मध्य); सरगुजा में भादो में; सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ (उत्तर में अधिक); करम वृक्ष या उसकी टहनी को रोपा जाता है |
| भादो | नावाखानी | गोंड़ | नई फसल आने पर; उपनाम पण्डुम/कोडता तिन्तुम |
| कुवाँर | कोरा | कोरवा | फसल काटने के पश्चात |
| कुवाँर | चऊँर धोनी पर्व | बिंझवार | दशहरा में |
| कार्तिक | दियारी | माड़िया, भतरा | पशुओं को खाना खिलाया जाता है |
| कार्तिक | गौरा-गौरी | गोंड़ | शिव-पार्वती की पूजा (दीपावली के समय) |
| अगहन | लक्ष्मी जगार | भतरा | बस्तर; धनकुल; शीत ऋतु में धान की फसल कटाई के समय; हल्बी में गायन |
| पौष | पुपुलसाड़ | गोंड | पौष माह में |
| पौष | तारा, छेरता पर्व | - | बस्तर अंचल |
| माघ | धेरसा | कोरवा | कृषि के दौरान |
| माघ | आमाखाई | गोंड, धुरवा, परजा | बस्तर; आम फलने के अवसर पर |
| फाल्गुन | मेघनाथ पर्व | गोंड़ | माह फाल्गुन |
पुस्तक-विसंगति: तीजा जगार की तालिका (पृष्ठ 396-397) में भादो शुक्ल पक्ष तृतीया दी गई है, जबकि पृष्ठ 393 की धनकुल सूची में इसे सामान्य जगार के रूप में गिना गया है; दोनों का संबंध धनकुल वाद्य से है। इसी तरह माटी त्यौहार बस्तर में चैत्र वर्ग में रखा गया है परंतु नोट में बैशाख-ज्येष्ठ का उल्लेख भी है।
अन्य प्रमुख त्यौहार
| त्यौहार | जनजाति | विशेष |
|---|---|---|
| ककसाड़ परब | मुड़िया, अबूझमाड़िया | बस्तर; अबूझमाड़ियों का विशेष पर्व |
| ककसाड़/करसाड़/खरसाड़ | मुरिया | गोत्र देवता मंडादेव का जातरा/जात्रा पर्व |
| मड़ई | मुड़िया, माड़िया | अंगादेव (काष्ठ से निर्मित) की पूजा |
| बाली परब | हल्बा और भतरा | भीमा देव को समर्पित; तीन माह तक चलने वाला पर्व |
| भगोरिया त्यौहार | भील | भक्त नृत्य देवता की पूजा हेतु |
| लारूकाज | गोंड | विवाह के अवसर पर; लारू = दूल्हा, काज = अनुष्ठान; बकरे और सुअर की बलि |
| रसनवा/रतौना पर्व | बैगा | 9 वर्ष में एक बार; आदिदेव नागा बैगा का पूजन |
| पोहचानी पर्व | गोंड | देवी प्रकोप से बचने हेतु विभिन्न चरणों में |
जनजाति के अनुसार त्यौहार
| जनजाति | पर्व-त्यौहार |
|---|---|
| उराँव | सरहुल त्यौहार, करमा पर्व |
| गोंड | माटी त्यौहार, गौरा-गौरी, मेघनाथ पर्व, लारूकाज, पुपुल साड़, नावाखानी, पोहचानी पर्व |
| गोंड, भतरा | अमुस त्यौहार |
| गोंड, धुरवा, परजा | आमाखाई |
| माड़िया | गोंचा पर्व, मड़ई पर्व |
| अबूझमाड़िया | ककसाड़ परब (ककसाड़/करसाड़/खरसाड़ नृत्य - मुरिया/मुड़िया) |
| माड़िया, भतरा | दियारी |
| कोरवा | बीजबोहनी, कोरा, धेरसा |
| भतरा, हल्बा | लक्ष्मी जगार, बाली परब |
| भील | भगोरिया त्यौहार |
| बैगा | रसनवा पर्व |
विसंगति: ककसाड़ को एक जगह "मुड़िया, अबूझमाड़िया" और दूसरी जगह "मुरिया" के साथ तथा जनजाति-सूची में केवल अबूझमाड़िया के साथ रखा गया है। इसलिए विकल्पों में दोनों नाम हों तो प्रश्न अस्पष्ट रहता है।
पण्डुम संबंधी पर्व
बस्तर की गोंड़ जनजाति में नवाखाई त्यौहार को पण्डुम कहते हैं। पण्डुम शब्द के साथ जुड़े त्यौहार तालिका में हैं।
| पण्डुम | विवरण |
|---|---|
| उराड पंडुम (उरांड) | महुआ के फूल बीनने जंगल जाने पर; महुआ और उससे बनी शराब का विशेष महत्व |
| नुनानारे दाना पण्डुम | गोटुल में अक्टूबर माह में; गोटुल की सभी मोटियारियाँ दूसरे गोटुल में जाती हैं |
| कप्पल पण्डुम | दोरला जनजाति द्वारा अच्छी वर्षा की कामना हेतु पूजा |
| मरका पण्डुम | आम की नई फसल आने पर |
| इरपु पण्डुम | महुआ बीनने जाने पर |
| कुरूम पण्डुम | छोटे अनाज/बाजरा के भोजन के समय |
| कोरता/पुना पण्डुम | नया चावल खाने पर |
| भीमूल पण्डुम | वर्षा के देवता संबंधित त्यौहार |
| कारे पण्डुम | वृक्ष काटने, जलाने का परब / घास एवं बाँस काटने के समय |
| पच्चिम पण्डुम | बियासी परब भी; बीज अंकुरित होने पर |
| बोटिगटी पण्डुम | बीज बोने का पर्व |
| तोरम पण्डुम | कटाई परब |
| विज्जा पण्डुम | बीज उत्सव |
| नुकु नार्दन पण्डुम | दशहरा के समय |
| जाता पण्डुम | सरसों की फसल काटने पर |
| मीनुल पण्डुम | मीनुल देव की पूजा के दौरान (वर्षा कराने के लिए) |
| बीज पण्डुम | चैत्रमास में बीज बोने के दौरान |
| रिक्का/सुकुड़ पण्डुम | सेम एवं नया दाल खाने पर |
| पेन पण्डुम | दोरला जनजाति द्वारा गोत्र देव की पूजा के दौरान |
| पीड़म पण्डुम | गाँव की रक्षा से संबंधित पर्व |
| वर्ग | पर्व |
|---|---|
| महुआ से संबंधित | उराड पण्डुम, इरपु पण्डुम |
| बीज से संबंधित | पच्चिम पण्डुम (बियारी परब), विज्जा पण्डुम, बीज पोंदम, बोटिगटी पण्डुम |
| कटाई से संबंधित | कारे पण्डुम, तोरम, जाता पण्डुम |
बैगा जनजाति के तीज-त्यौहार
| क्र. | त्यौहार | अवसर | माह |
|---|---|---|---|
| 1 | जवारा (नवरात्र) | निरोगी हेतु | चैत्र |
| 2 | अक्ती | बारिश का अनुमान | बैशाख |
| 3 | बिदरी | फसल बोआई | बैशाख एवं जेठ के अक्ती के बाद |
| 4 | हरेली | पशु, घर एवं ग्राम सुरक्षा | सावन |
| 5 | देवली | फसलों को कीटों से बचाने या निरोगी रखने | सावन |
| 6 | पंचमी नवाखाई | कृषि उपज | भादो |
| 7 | नवाखाई | कृषि उपज | भादो |
| 8 | देवारी (गोवर्धन पूजा) | फसल की कटाई | कार्तिक |
| 9 | मोहती नवाखाई | जंगली जानवर एवं जहरीले जन्तुओं से सुरक्षा | कार्तिक माह एवं 9 वर्षाकाल बीतने पर, लगभग 9 वर्ष में एक बार |
| 10 | छेरता | फसल की कटाई, उत्सव तथा मड़ई | पुष माह |
| 11 | दशेला नाचा | कृषि उपज | कुंवार से पुष |
| 12 | मड़ई | उत्सव | - |
| 13 | फाग नाचा | वनोपज संकलन के प्रारंभ | फागुन |
तुलना एवं संबंध
| जगार / परब | जनजाति | माह | विशेष |
|---|---|---|---|
| तीजा जगार | भतरा, हल्बा | भादो शुक्ल तृतीया | धान की बाली का नारियल से विवाह |
| लक्ष्मी जगार | भतरा | अगहन | धान कटाई का समय |
| बाली परब | हल्बा, भतरा | - | भीमा देव; तीन माह |
| गोंचा | माड़िया | आषाढ़ | जगन्नाथ रथ यात्रा; तुपकी |
| त्यौहार | संबंधित पूजा/देवता |
|---|---|
| सरहुल | साल वृक्ष |
| बीज पुटनी | पृथ्वी देवी |
| भीमा जतरा | भीमा-भीमसेन (इन्द्रदेव) |
| गौरा-गौरी | शिव-पार्वती |
| रसनवा | नागा बैगा |
| ककसाड़ (मुरिया) | मंडादेव |
| मड़ई | अंगादेव |
याद रखने योग्य बिंदु
- अमुस श्रावण अमावस्या को गोंड़-भतरा मनाते हैं; जनजातियों का प्रथम त्यौहार।
- गोंचा पर्व माड़िया का, आषाढ़ में, पुरूषोत्तमदेव, जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी।
- तीजा जगार भादो शुक्ल तृतीया, लक्ष्मी जगार अगहन में।
- करमा भादो एकादशी के आसपास; करम वृक्ष की टहनी रोपी जाती है।
- नावाखानी गोंड़ का; उपनाम पण्डुम/कोडता तिन्तुम।
- कोरा कोरवा, कुवाँर, फसल काटने के बाद।
- दियारी में पशुओं को खाना खिलाया जाता है।
- गौरा-गौरी कार्तिक में शिव-पार्वती पूजा (गोंड़)।
- पुपुलसाड़ पौष माह, गोंड।
- आमाखाई: गोंड, धुरवा, परजा; आम फलने पर।
- मेघनाथ पर्व फाल्गुन में गोंड़ों का।
- रसनवा/रतौना 9 वर्ष में एक बार, बैगा, नागा बैगा।
- लारूकाज विवाह पर, बकरे-सुअर की बलि।
- बाली परब हल्बा-भतरा, भीमा देव, तीन माह।
- महुआ के पर्व: उराड और इरपु पण्डुम; कटाई के: कारे, तोरम, जाता।
स्मरण सूत्र
- "अमुस पहला, अमावस पर" = अमुस श्रावण अमावस्या और पहला त्यौहार।
- "गोंचा-गोंड़ नहीं, माड़िया" = गोंचा माड़िया का है, गोंड़ का नहीं।
- "रस-नवा नौ वर्ष" = रसनवा 9 वर्ष में।
- "उराड-इरपु महुआ, कारे-तोरम-जाता कटाई" = पण्डुम का वर्गीकरण।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
जनजाति-त्यौहार का जोड़ा सबसे सामान्य रूप है (जैसे रसनवा-बैगा, मेघनाथ-गोंड़)।
पूल में रसनवा, माटी त्यौहार और मेघनाथ पर्व पर सीधे प्रश्न हैं।
पण्डुम शब्द के साथ अवसर (महुआ, बीज, कटाई) मिलाकर पूछा जाता है।
ऐसे विकल्प जिनमें एक ही त्यौहार दो जनजातियों से जुड़ा हो, वहाँ पुस्तक की विसंगति ध्यान में रखें।
स्वयं जाँचें
- रसनवा पर्व कौन मनाता है और कितने वर्ष में? बैगा; 9 वर्ष में एक बार।
- गोंचा पर्व का आरंभकर्ता कौन? पुरूषोत्तमदेव।
- माटी त्यौहार का दूसरा नाम? बीज पण्डुम/बीज कुटनी।
- अमुस किस दिन मनाया जाता है? श्रावण अमावस्या।
- मेघनाथ पर्व किस माह में? फाल्गुन।
अभ्यास प्रश्न
“माटी” त्यौहार किस संभाग की जनजातियां मनाती है?
- (A) बस्तर संभाग
- (B) सरगुजा संभाग
- (C) बिलासपुर संभाग
- (D) रायपुर संभाग
मेघनाद पर्व से सम्बन्धित छत्तीसगढ़ की कौन-सी जनजाति है ?
- (A) बैगा
- (B) गोण्ड
- (C) अबुसमारिया
- (D) दोरला
रसनवा पर्व कौन-सी जनजाति मनाती है?
- (A) गोण्ड
- (B) बैगा
- (C) सन्थाल
- (D) उराँव
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (A) - माटी त्यौहार गोंड़/भतरा द्वारा बस्तर संभाग में मनाया जाता है।
- (B) - पुस्तक की तालिका में मेघनाथ पर्व फाल्गुन माह में गोंड़ जनजाति का है।
- (B) - रसनवा/रतौना पर्व बैगा जनजाति का 9 वर्ष में एक बार होने वाला पर्व है, जिसमें नागा बैगा का पूजन होता है।