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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 19
विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTG): अबूझमाड़िया, बैगा, कोरवा, बिरहोर, कमार, भुंजिया एवं पण्डो

विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTG): अबूझमाड़िया, बैगा, कोरवा, बिरहोर, कमार, भुंजिया एवं पण्डो

पुस्तक के अनुसार भारतीय संविधान के तहत राष्ट्रपति द्वारा छत्तीसगढ़ की 5 जनजातियों को विशेष पिछड़ी जनजाति के रूप में शामिल किया गया है: अबूझमाड़िया, बैगा, कोरवा (पहाड़ी कोरवा), बिरहोर और कमार। इनके अलावा छत्तीसगढ़ में विशेष पिछड़ी जनजातियों की कुल संख्या 07 बताई गई है; शेष दो, पण्डो और भुंजिया, को राज्य शासन ने वर्ष 2002-03 में विशेष पिछड़ी जनजाति समूह के रूप में मान्यता दी।

यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रश्न प्रायः यही पूछते हैं: कौन-सी जनजाति किस जिले में रहती है, किसका पेय, युवागृह, विवाह-प्रकार, पंचायत प्रमुख, पुस्तक और अभिकरण क्या है। नीचे हर जनजाति को एक ही ढाँचे में रखा गया है ताकि तुलना आसान हो।

वर्गजनजातियाँमान्यता
राष्ट्रपति द्वारा (5)अबूझमाड़िया, बैगा, कोरवा (पहाड़ी कोरवा), बिरहोर, कमारसंविधान के तहत राष्ट्रपति
राज्य शासन द्वारा (2)पण्डो, भुंजियावर्ष 2002-03, छत्तीसगढ़ शासन

1. अबूझमाड़िया

नाम का अर्थ एवं जीवन-पद्धति

"अबूझमाड़" का अर्थ पुस्तक में "अज्ञात" बताया गया है। अबूझमाड़िया अबूझमाड़ क्षेत्र को "मेटाभूम" (अर्थात पर्वतीय भूमि) कहते हैं और स्वयं को "मेटा कोईतोर" (अर्थात पर्वतीय भूमि के निवासी)। ये अभी भी एक आदिम जीवन-शैली अपनाए हुए हैं और अन्य जनजातियों से अलग रहते हैं। ब्लॉक मुख्यालय ओरछा को अबूझमाड़ का प्रवेश द्वार कहा गया है।

इतिहास एवं अध्ययन के संदर्भ

व्यक्तिवर्षयोगदान
कैप्टन सी.एल.आर. ग्लासफर्ड1866-67अपनी रिपोर्ट में "उबूझमार्ड" शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग
ग्रांट1870गजेटियर में "माड़ियान" या "अबूझमाड़" शब्द
हिस्लॉप1876"हिंदू ट्राइब्स एण्ड कॉस्ट्स भाग-2" में "अबूझमाड़ / माड़ियान"
डब्ल्यू. वी. ग्रिगसन1938"हिल माड़िया" नाम दिया
पं. केदारनाथ ठाकुर1908"बस्तर भूषण" पुस्तक में माड़िया जनजाति का विस्तृत वर्णन

पं. केदारनाथ ठाकुर के अनुसार माड़ियों का आदि वासस्थान बैलाडीला पहाड़ के आसपास है, अब भी वे वहीं रहते हैं। उन्होंने माड़ियों के तीन प्रकार बताए: वर्तमान अबूझमाड़िया, कुवाकोंडा हल्के के माड़िये और तेलंगे माड़िये (यहाँ माड़िया का अर्थ कोया दिया गया है); ये लोग गोंड हैं।

सामान्य परिचय

बिंदुविवरण
निवासओरछा (अबूझमाड़) तहसील, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर
जनसंख्या1931 में (सर डब्ल्यू. वी. ग्रिगसन के कार्यकाल में) पहली जनगणना: 11,500; 1941 में वेरियर एल्विन के अनुसार लगभग 13,000; वर्तमान में 23,330
बोलीमाड़ी (द्रविड़ भाषा शैली); गोंडी बोली का स्थानीय रूप
नृत्यककसाड़ / काकसाड़; कोटकी घोड़ा नृत्य
कृषिपेद्दा (ढलानों पर); कृषि भूमि को कघई कहते हैं; दिप्पा कृषि (पहाड़ों के नीचे समतल क्षेत्रों में)
युवागृहकोसी गोटुल / गोटुल
उपजातिगोंड जनजाति की उपजाति
अभिकरणअबूझमाड़िया विकास अभिकरण, नारायणपुर; स्थापना 13 जून 1978 (पाँचवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान)
संगठनपारा/टोला (पंच/पारा मुखिया) → ग्राम (पटेल) → परगना (परगना माँझी)

विवाह, संस्कार एवं गोत्र

  • प्रचलित विवाह: बिधेर/बिथेर (घर से भागकर), ओड़ियत्ता (घुसपैठ या घर में घुसकर), चूड़ी पहनना (विधवा, परित्यक्ता या पुनर्विवाह), तालको वायता (सहमति विवाह), लामड़े वायता (लमसेना विवाह)।
  • कौमार्य संस्कार: कांडाबरा (पुष्प विवाह), जिसे कांड विवाह भी कहते हैं।
  • गोत्र: कट्टा गोत्र में अनेक वंश आते हैं; गोत्र एवं गोत्र-चिह्न (टोटम) मिलते हैं। नाम: करमा, दोरपा, जाटा, वड्डे, कोर्राम, दोदी, अक्का, मंडावी, उसेंडी, अटमी आदि।
  • मृतक स्तंभ: मृत्यु पर लकड़ी का खंभा (अनाल गठ्या) गाड़ा जाता है।
  • गोदना: स्त्रियाँ गोदना को स्थायी गहना मानती हैं; मस्तक, नाक, हथेली, ठुड्ढी आदि पर गोदवाती हैं।

पर्व, देवी-देवता एवं धार्मिक जीवन

श्रेणीविवरण
काकसाड़गोत्र देव की पूजा का पर्व
विजा कोड़ताँगहरियाली का पर्व
जोन्ना कोड़ताँगमक्का खाने का त्यौहार
वन्जा कोड़ताँगनवाखानी
कोहलानया कोसरा खाने का पर्व
देवी-देवताठाकुरदेव (टालुभेंट), बुढ़ी माई/बुढ़ी डोकरी, घर के देवता (छोटा पेन, मेंझला पेन, बड़ा पेन)
ग्राम स्तरतलुर मुत्ते / तलोक देवी की पूजा
पुजारीतंत्र-मंत्र का जानकार गायता / सिरहा

तुम्बे का विशेष महत्व होता है (पिछले अध्याय में तुम्बा शिल्प का उल्लेख देखें)।

विभाजन, शब्दावली, वस्त्र और साक्षरता

  • विभाजन: विलफ्रिड ग्रिगसन ने निवास-स्तर के आधार पर दो भाग बताए: हिल माड़िया (अबूझमाड़ पर्वतों के निवासी) और बॉयसन हार्न माड़िया (इंद्रावती नदी के दक्षिण भाग में निवासरत)।
  • पुस्तकें: "द अबूझमारियास" (टी.बी. नायक); "The Maria Gonds of Bastar" (1938, विलफ्रिड ग्रिगसन)।
  • शब्दावली: लोन (आवास), अगली (बरामदा), गुड़नद (शयन कक्ष), अंगादी/आंगड़ी (रसोईघर), हानाल कोली (पूर्वजों का कक्ष या भंडार, "बाडड तास्ना कोली" के साथ), मंडा (अनाज भंडार गृह), उबिंग (सिक्कों की माला), अगहा (बैठक), पोवई (चटाई), अल्पांजी (सोने के लिए सामान), लोनू (संग्रहण कक्ष/कुल देवता का निवास स्थान)।
  • वैन्डू कुरमा: आवास से कुछ दूर एक कमरा, जहाँ रजस्वला तथा प्रसूता स्त्री को रखा जाता है; प्रसव गृह का नाम "कुरमा लोन" भी दिया गया है।
  • वस्त्र: पुरुष - लंगोटी, लुंगी, पंछा, पगड़ी; महिला - लुगरा को कमर से घुटने तक लपेट कर।
  • साक्षरता: पुस्तक में एक जगह इन्हें राज्य की सबसे कम साक्षरता वाली जनजाति कहा गया है; उसी के साथ कोष्ठक में लिखा है कि आयोग ने सबसे कम साक्षरता (19%) बिरहोर जनजाति को लिया है। इस प्रकार स्रोत में ही दो बातें हैं (अबूझमाड़िया बनाम बिरहोर), इसलिए प्रश्न में विकल्प देखकर ही उत्तर चुनें।

2. बैगा

सामान्य परिचय

बिंदुविवरण
उपजातियाँनाहर, बिंझवार, नरौतिया, भरौतिया, रै-भैना, ताड़ भैना, कट भैना, दुध भैना, कुरका बैगा, सावत बैगा
बोलीबैगानी
उत्पत्ति (किंवदंती)ब्रह्मा ने दो व्यक्ति बनाए: नांगर (हल) और टंगिया (कुल्हाड़ी) लेने वाला। नांगर वाले गोंड कहलाए, टंगिया वाले नागा बैगा। बैगा नागा बैगा को अपना पूर्वज मानते हैं
भाषा-परिवारआर्यभाषा परिवार
पेयताड़ी (ताड़ वृक्ष से)
रसोईघररांधड़ घर
जनसंख्या88,317 - विशेष पिछड़ी जनजातियों में सर्वाधिक
निवासमैकल पर्वत श्रेणी: राजनांदगाँव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कवर्धा, मुंगेली, बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरिया; सर्वाधिक जनसंख्या कबीरधाम जिले में; प्रमुखतः मध्य क्षेत्र
अभिकरणबैगा विकास अभिकरण, कवर्धा; बैगा विकास अभिकरण, गौ.-पे.-म.
प्रकोष्ठबैगा विकास प्रकोष्ठ: राजनांदगाँव, मुंगेली, बेकुंठपुर

संस्कार, भोजन, कृषि और पर्व

  • प्रसव कराने वाली दाई: "गौंजी"/सुनमाई।
  • विवाह: दुकू, उढ़रिया, गोलत (विनिमय प्रथा), चूड़ी पहनना; विवाह संपन्न कराने वाला व्यक्ति दोषी कहलाता है।
  • पुनर्विवाह: खड़ोनी। मृत्यु-शुद्धिकरण संस्कार: मादी।
  • कार्य: गोंडों के पुजारी (पुरोहित); पारंपरिक वैद्य के रूप में प्रसिद्ध।
  • वस्त्र: कपची - महिलाओं का वस्त्र; चौखाना-मुंगी - परंपरागत वस्त्र।
  • भोजन: पहला भोजन बासी, दोपहर का पेजा/पेज और रात का बियारी।
  • स्थानांतरित कृषि: बेवार / बेवरा / बेवर। प्रमुख भाजी: केवलाल वृक्ष की पत्ती।
  • नृत्य: करमा, बिलमा, सैला, फाग, परघौनी, झटपट नाच (दशहरा)। नृत्य नाटिका: छेरता। गीत: परघौनी, फाग, करमा, ददरिया, सुआ।
  • वृक्ष पूजा: साल (सोरिया रोबस्टा)। पुजारी: भुमका (भूत-प्रेत भगाने वाला, देवी-देवता की पूजा करने वाला)। पर्व: रसनवा पर्व (9 वर्ष में एक बार)।
  • पुस्तकें: द बैगॉस (वेरियर एल्विन); द ट्राइबल इकोनॉमी (दयाशंकर नाग)।

गोदना - बैगा की विशेष पहचान

पुस्तक बैगा को "विश्व की सर्वाधिक गोदना प्रिय जनजाति" कहती है, जबकि सर्वाधिक गोदना गोदवाने वाली जनजाति के रूप में कमार को बताती है (कमार का अंश आगे आएगा)। बैगाओं के गोदने को झेला गोदना कहते हैं और स्थानीय "बादी" जाति की महिलाओं से गोदना गोदवाया जाता है।

गोदनाविवरण
कपाल गोदनामाथे (भौंहों के बीच) में "V" आकृति; 8 वर्ष की आयु में लड़कियों के लिए अनिवार्य
पृष्ठ गोदनापुखड़ा गोदाय भी कहते हैं; 15-16 वर्ष की आयु में
वक्ष गोदनाफूल, टिक्का, पुतरी की आकृति
बांह गोदनामछली काँटा, बिच्छू आदि की आकृति; "पोरी गोदाय" भी कहते हैं
जांघ गोदनालड़कियों में विवाह से पूर्व अनिवार्य
पछाड़ी गोदायजांघ के पीछे वाले भाग में

3. कोरवा

बिंदुविवरण
निवासमुख्यतः कोरबा, जशपुर, अम्बिकापुर, बलरामपुर
उत्पत्तिकर्नल डॉल्टन ने कोलारियन समूह से उत्पन्न माना
उप-समूह1. पहाड़ी कोरवा - पेड़ों के ऊपर मचान बनाकर रहते, शिकार व वनोपज की तलाश में घुमंतू जीवन; विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल। 2. दिहाड़ी कोरवा - मैदानी क्षेत्र में; डिह (गाँव) में स्थायी रूप से रहने से डिहारी कोरवा भी कहलाते हैं
नृत्य"दमनच" - भय उत्पादक नृत्य, विवाह के समय
पंचायतमयारी (अन्य पृष्ठ पर "मेयारी" छपा है); पंचायत प्रमुख मुखिया; कई गाँवों की जाति पंचायत का प्रमुख "टोलादार"
पेयहंडिया (चावल से बनता है)
विवाहदुकू, गुरावट (विनिमय), लमसेना (सेवा विवाह), उढ़रिया (सह-पलायन), मंगी, पैठू (घुसपैठ); बड़ विवाह, ढोल कड़ही विवाह, बैलकर विवाह
मृत संस्कार"नवाधाती"/नवाधानी - शोक 10 दिन तक; क्रियाकर्म में "कुमारी भात" की परंपरा
झोपड़ीकुम्बा (प्रसव के लिए निर्मित); स्थानीय दाई "डोंगिन"/दगरिन
चिन्हशरीर पर आग से दाग कर निशान "दरहा" (पाँच वर्ष की आयु में 10-16 निशान)
त्यौहारसिंगरी - प्रत्येक 5 वर्ष में
अभिकरणकोरवा विकास अभिकरण, अंबिकापुर; कोरवा एवं बिरहोर विकास अभिकरण, जशपुर
प्रकोष्ठपहाड़ी कोरवा विकास प्रकोष्ठ, बलरामपुर; पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर विकास प्रकोष्ठ, कोरबा

पुस्तक में दरहा परंपरा को कोरवा जनजाति की और "मेयारी" की परंपरा को पहाड़ी कोरवा की बताया गया है। परीक्षा में "भयोत्पादक नृत्य" पूछा जाए तो कोरवा (कोरबा) का दमनच ही उत्तर होगा।

4. बिरहोर

बिंदुविवरण
अर्थबनचर; "बिर" = जंगल/झाड़ी और "होर" = आदमी, अर्थात जंगल का आदमी/जंगल काटने वाला
अवधारणास्वयं को जंगल का मानव और कोलारियन समूह का मानते हैं; बिरहोर प्रोटोऑस्ट्रेलाइड समूह के अंतर्गत
निवास क्षेत्ररायगढ़ (धरमजयगढ़, लैलूंगा, तमनार); जशपुर (बगीचा, कांसाबेल, दुलदुला, पत्थलगाँव); कोरिया; कोरबा (कोरबा, पोंड़ी-उपरोड़ा, पाली)
निवास स्थानटांडा
युवागृहगितिओना / गोतिहारा
कार्यमोहलाइन की छाल से रस्सी; बाँस शिल्प (जैसे बर्तन बनाना)
प्रकार1. उथलु या भुलिया - घुमंतू जीवन; 2. जंगही या धानिया - स्थायी कुड़िया बनाकर गाँव के पास
विवाहदुकू, उढ़रिया (सह-पलायन), गोलत (विनिमय); विवाहिता को दूसरे व्यक्ति के साथ चूड़ी पहनने (पुनर्विवाह) की अनुमति
पंचायत प्रमुखमालिक
देवतासूरजदेव (सूर्य देव)
गोत्रए.सी. राय के अनुसार 37 गोत्र (नीचे पुस्तक के लेखक का नाम "एस.सी. राय" छपा है; स्रोत में नाम-अक्षर भिन्न हैं)
पुस्तक"द बिरहोर" (एस.सी. राय)
अभिकरण / प्रकोष्ठकोरवा एवं बिरहोर विकास अभिकरण, जशपुर; बिरहोर विकास प्रकोष्ठ - धरमजयगढ़, बिलासपुर; पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर विकास प्रकोष्ठ, कोरबा

5. कमार

बिंदुविवरण
आदिपुरुषकचना धुरवा
उपजातिगोंड की उपजाति
निवासगरियाबंद एवं आंशिक रूप से धमतरी, महासमुंद; रायपुर संभाग की विशेष पिछड़ी जनजाति
प्रमुख कार्यबाँस शिल्प (आजीविका प्रधान); बाँस शिल्पकला में सबसे निपुण
जात्रा उत्सवपूर्वजों की आत्मा की शांति के उद्देश्य से
पुस्तकद कमार (श्यामाचरण दुबे - 1951)
पंचायत प्रधानकुरहा
प्रकारबुधरजिया (बंदर मांस नहीं खाते) और मकाड़िया (बंदर मांस खाते हैं)
देवी-देवताकचना धुरवा, वामन देव, हिंगलाज, गुरमाती, मागरमाती, माताडूमा
विशेष पूजालोहे की पूजा, जिसे वे दुर्गा देवी की पूजा मानते हैं
पुजारीझाँखर
निषेधघोड़ा छूना निषेध
गोदनासर्वाधिक गोदना गोदवाने वाली जनजाति; स्थानीय देवार जाति से गोदवाती हैं
घर त्यागघर में मृत्यु होने पर घर त्याग कर नया घर बना लेते हैं
लोक नृत्यतेरताली
त्यौहारमाता पहुँचानी - आषाढ़ माह में
विवाहगुरांवट, घरजमाई, पैठू (घुसपैठ), उढ़रिया (सह-पलायन), विधवा विवाह
अभिकरण / प्रकोष्ठकमार विकास अभिकरण, गरियाबंद; प्रकोष्ठ: नगरी, भानुप्रतापपुर, महासमुंद

6. भुंजिया

बिंदुविवरण
नामकरणकिंवदंती के अनुसार आग में जलने के कारण भुंजिया कहा गया
निवासगरियाबंद, महासमुंद एवं धमतरी
उपजातिचौखुंटिया भुंजिया एवं चिंदाभुंजिया
रसोईघरलाल बंगला - इनका पवित्र स्थान; रामायणकालीन सीताहरण के अध्याय से जुड़ता बताया गया है
वस्त्रविवाहित महिलाएँ सफेद साड़ी पहनती हैं
चामबंदीजन्म के सातवें दिन शिशु का मुण्डन और उसी दिन कमर में काले रंग का धागा; यह मृत्यु के बाद ही निकाला जाता है
कांड विवाहकांड (बाण) से विवाह; बालिका के प्रथम मासिक स्त्राव (माहवारी) से पूर्व अनिवार्य; इसे कांडाबरा भी कहते हैं। यदि कन्या कांड विवाह से पहले रजस्वला हो जाए तो हल्दी विवाह नहीं, चूड़ी विवाह होता है
अन्य विवाहदूध लौटावा, चूड़ी, विधवा, पैठू, पलायन, लमसेना
त्यौहारनावाखायी (भाद्र माह की प्रथमा/तृतीया, नई फसल); डूमा पितर (अगहन माह, चंउर धोनी/रोटी खानी; बस्तर में पितृ देव को डूमा देव कहते हैं); देवारी (पशुओं की पूजा)
देवी-देवताठाकुरदेव, शीतला माता, माटीदाई; कछुवा विशेष पूजनीय
अभिकरणभुंजिया विकास अभिकरण, गरियाबंद
विशेषरोग का इलाज तपते लोहे से दाग कर करते हैं

7. पण्डो

बिंदुविवरण
निवाससरगुजा, सूरजपुर (अम्बिकापुर), कोरिया एवं बलरामपुर
पूर्वजपाण्डव (उपसमूह - सरगुजिहा और उतरांश)
विवाह पद्धतिबरोखी - धनराशि के अभाव में वर, वधू को अँगूठी पहनाकर घर ले आता है
बोलीपण्डोप
देवी-देवतावागेश्वर देव, बरहिया देव, महामाई, अन्न कुमारी
अभिकरणपण्डो विकास अभिकरण, सूरजपुर (2002-03)

तुलना एवं संबंध

जनजातिनिवास (प्रमुख)युवागृह / पंचायत प्रमुखपुस्तकअभिकरण
अबूझमाड़ियाओरछा, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुरगोटुल; पारा मुखिया-पटेल-परगना माँझीद अबूझमारियास (टी.बी. नायक); The Maria Gonds of Bastar (ग्रिगसन)नारायणपुर (1978)
बैगामैकल श्रेणी; कबीरधाम सर्वाधिकपुजारी भुमकाद बैगॉस (एल्विन); द ट्राइबल इकोनॉमी (नाग)कवर्धा; गौ.-पे.-म.
कोरवाकोरबा, जशपुर, अम्बिकापुर, बलरामपुरपंचायत मयारी; मुखिया/टोलादारपृष्ठ पर नहीं दी गईअंबिकापुर; जशपुर
बिरहोररायगढ़, जशपुर, कोरिया, कोरबागितिओना/गोतिहारा; मालिकद बिरहोर (एस.सी. राय)जशपुर
कमारगरियाबंद, धमतरी, महासमुंदपंचायत प्रधान कुरहाद कमार (श्यामाचरण दुबे, 1951)गरियाबंद
भुंजियागरियाबंद, महासमुंद, धमतरीरसोई लाल बंगलापृष्ठ पर नहीं दी गईगरियाबंद
पण्डोसरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुरपृष्ठ पर नहीं दियापृष्ठ पर नहीं दी गईसूरजपुर (2002-03)
विवाह-प्रकारजनजाति (पुस्तक के अनुसार)
बिधेर/बिथेर, ओड़ियत्ता, तालको वायता, लामड़े वायताअबूझमाड़िया
दुकू, उढ़रिया, गोलत, चूड़ीबैगा
दुकू, गुरावट, लमसेना, उढ़रिया, मंगी, पैठूकोरवा
दुकू, उढ़रिया, गोलतबिरहोर
गुरांवट, घरजमाई, पैठू, उढ़रिया, विधवा विवाहकमार
कांड विवाह (कांडाबरा), दूध लौटावा आदिभुंजिया
बरोखीपण्डो
बिंदुगोदना से जुड़ी बात
बैगाविश्व की सर्वाधिक गोदना प्रिय जनजाति; झेला गोदना; बादी जाति से
कमारसर्वाधिक गोदना गोदवाने वाली; देवार जाति से
अबूझमाड़ियास्त्रियाँ गोदना को स्थायी गहना मानती हैं

याद रखने योग्य बिंदु

  • राष्ट्रपति द्वारा घोषित 5 PVTG: अबूझमाड़िया, बैगा, कोरवा, बिरहोर, कमार; राज्य द्वारा (2002-03): पण्डो, भुंजिया।
  • ओरछा को अबूझमाड़ का प्रवेश द्वार कहा गया है।
  • अबूझमाड़िया विकास अभिकरण नारायणपुर में 13 जून 1978 को बना।
  • अबूझमाड़िया की खेती पेद्दा है; कृषि भूमि को कघई कहते हैं।
  • बैगा सबसे अधिक जनसंख्या वाली PVTG (88,317); सबसे अधिक कबीरधाम जिले में।
  • बैगा की स्थानांतरित कृषि बेवार/बेवरा/बेवर है; मृत्यु संस्कार मादी; पुनर्विवाह खड़ोनी।
  • बैगा के पुजारी भुमका; सुनमाई/गौंजी दाई; रसनवा पर्व 9 वर्ष में एक बार।
  • कोरवा का नृत्य दमनच (भयोत्पादक); पेय हंडिया; मृत संस्कार नवाधाती/नवाधानी (10 दिन)।
  • पहाड़ी कोरवा मचान बनाकर रहते हैं; दिहाड़ी कोरवा मैदानी क्षेत्र में।
  • बिरहोर = बिर (जंगल) + होर (आदमी); युवागृह गितिओना/गोतिहारा; देवता सूरजदेव।
  • कमार का पंचायत प्रधान कुरहा; प्रकार बुधरजिया और मकाड़िया; त्यौहार माता पहुँचानी (आषाढ़)।
  • भुंजिया का रसोईघर लाल बंगला; कांड विवाह; चामबंदी (काला धागा); रोग का इलाज तपते लोहे से दाग।
  • पण्डो की विवाह पद्धति बरोखी; पूर्वज पाण्डव; पण्डो अभिकरण सूरजपुर।
  • पुस्तकें: द कमार - श्यामाचरण दुबे (1951); द बैगॉस - एल्विन; द बिरहोर - एस.सी. राय।
  • कांडाबरा/कांड विवाह अबूझमाड़िया के कौमार्य संस्कार और भुंजिया - दोनों के संदर्भ में आता है।

स्मरण सूत्र

  • PVTG (5 + 2): "अबू-बै-को-बि-क" + "पं-भुं" = "अबूझ, बैगा, कोरवा, बिरहोर, कमार; पण्डो-भुंजिया"।
  • विवाह-पहचान: "भुंजिया = कांड, पण्डो = बरोखी, कोरवा = मंगी/बैलकर, बैगा = गोलत/चूड़ी"।
  • निवास-जोड़ी: "बैगा-कबीरधाम, कमार-गरियाबंद, पण्डो-सरगुजा-सूरजपुर, बिरहोर-रायगढ़-जशपुर, कोरवा-कोरबा"।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

  • PVTG में कौन शामिल नहीं है, यह पूछकर भतरा, परजा जैसी जनजातियाँ विकल्प में रखी जाती हैं।
  • किसी जनजाति की विशेषता (बाँस, गोदना, भयोत्पादक नृत्य, गर्म लोहे से दाग) पूछकर नाम चुनवाया जाता है।
  • अबूझमाड़ की स्थिति (नारायणपुर, बस्तर) और पेद्दा कृषि किसकी है - यह भी बार-बार आता है।
  • पूल में कई प्रश्नों के उत्तर पुस्तक से टकराए (जैसे बैगा की स्थानांतरित कृषि, कमार का निवास); ऐसे प्रश्न अस्वीकार किए गए। परीक्षा में भी विकल्पों को पुस्तक-तथ्य से मिलाकर ही उत्तर चुनें।

स्वयं जाँचें

  1. राष्ट्रपति द्वारा घोषित छत्तीसगढ़ की कौन-सी पाँच जनजातियाँ PVTG हैं? उत्तर: अबूझमाड़िया, बैगा, कोरवा (पहाड़ी), बिरहोर, कमार।
  2. भुंजिया का रसोईघर किस नाम से जाना जाता है? उत्तर: लाल बंगला।
  3. कोरवा जनजाति का भयोत्पादक नृत्य कौन-सा है? उत्तर: दमनच।
  4. बैगा की स्थानांतरित कृषि क्या कहलाती है? उत्तर: बेवार / बेवरा / बेवर।
  5. पण्डो में धन के अभाव में होने वाला विवाह कौन-सा है? उत्तर: बरोखी।

अभ्यास प्रश्न

  1. अबूझमाड़ क्षेत्र किस जिले में स्थित है?

    • (A) रायपुर में
    • (B) सरगुजा में
    • (C) बस्तर (नारायणपुर) में
    • (D) दुर्ग में
  2. छत्तीसगढ़ में झूमिंग अथवा पेदाडाही कृषि किस जनजाति के लोग करते हैं?

    • (A) परजा
    • (B) दोरजी
    • (C) माड़िया
    • (D) बिंझवार
  3. निम्न में कौन सी जनजाति विशेष पिछड़ी जनजाति नहीं है?

    • (A) अबूझमाड़िया
    • (B) बैगा
    • (C) बिरहोर
    • (D) भतरा
  4. निम्नलिखित में से किसे इस राज्य की अति पिछड़ी जनजाति के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है ?

    • (A) परजा
    • (B) कमार
    • (C) बिरहोर
    • (D) बैगा
  5. किस जनजाति को सर्वाधिक गोदना प्रिय जनजाति कहा जाता है ?

    • (A) पण्डो
    • (B) बैगा
    • (C) भुंजिया
    • (D) कमार
  6. जनजातियों का अमर शृंगारिक गहना है

    • (A) मंगलसूत्र
    • (B) गोदना
    • (C) मांगटीका
    • (D) इनमें से कोई नहीं
  7. किस जनजाति की आजीविका पारंपरिक रूप से “बाँस” पर आधारित है

    • (A) बिंझवार
    • (B) कवर
    • (C) कमार
    • (D) सवरा
  8. छत्तीसगढ़ की कौन-सी जनजाति टोकरी निर्माण के लिए प्रसिद्ध है?

    • (A) उराँव
    • (B) बिंझवार
    • (C) कमार
    • (D) अबूझमाड़िया
  9. छत्तीसगढ़ में कौन सी जनजाति अपने रोगों का इलाज गर्म लोहे से शरीर को दाग कर करती है?

    • (A) धनवार
    • (B) नगेशिया
    • (C) मंझवार
    • (D) भुंजिया
  10. राज्य की किस जनजाति का नृत्य भयोत्पादक होता है?

    • (A) बैगा
    • (B) कोरबा
    • (C) कमार
    • (D) खैरवार

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (C) - पुस्तक के अनुसार अबूझमाड़ क्षेत्र में ओरछा तहसील, नारायणपुर आदि आते हैं, अर्थात यह बस्तर (नारायणपुर) में है।
  2. (C) - पेद्दा (झूमिंग/पेदाडाही जैसी अस्थायी) खेती माड़िया जनजाति की बताई गई है; अबूझमाड़िया के लिए भी पेद्दा है, पर विकल्पों में माड़िया ही आता है।
  3. (D) - भतरा PVTG की सूची (5 राष्ट्रपति द्वारा + पण्डो, भुंजिया) में नहीं है।
  4. (A) - परजा इस सूची में नहीं है; कमार, बिरहोर और बैगा सूची में हैं।
  5. (B) - पुस्तक बैगा को विश्व की सर्वाधिक गोदना प्रिय जनजाति कहती है (कमार को सर्वाधिक गोदना गोदवाने वाली)।
  6. (B) - पुस्तक के अनुसार स्त्रियाँ गोदना को स्थायी गहना मानती हैं।
  7. (C) - कमार की आजीविका बाँस शिल्प पर आधारित है।
  8. (C) - बाँस की टुकनी/टोकरी शिल्प में कमार सबसे निपुण जनजाति हैं।
  9. (D) - भुंजिया रोग का इलाज तपते लोहे से दाग कर करते हैं।
  10. (B) - कोरवा (कोरबा) का दमनच नृत्य भय उत्पन्न करने वाला है।
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