दक्षिण क्षेत्र की अन्य जनजातियाँ: माड़िया, हल्बा, भतरा, दोरला, गदबा एवं परजा
यह अध्याय बस्तर अंचल की छह जनजातियों को एक साथ रखता है। इनमें से अधिकांश कोण्डागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर क्षेत्र में बसी हैं। प्रत्येक जनजाति का नाम कैसे पड़ा, किस देवता को मानती है, कौन-सा नृत्य करती है, उसकी बोली क्या है और विवाह की कौन-सी रीतियाँ हैं, ये सब तथ्य CGPSC, व्यापम और पटवारी परीक्षाओं में जोड़ी मिलाने तथा सही कथन चुनने के रूप में बार-बार पूछे जाते हैं।
नीचे हर जनजाति की जानकारी तालिका में दी गई है ताकि तथ्य एक नज़र में मिल जाएँ। तालिका के बाद छोटी टिप्पणी दी गई है जो तथ्यों को आपस में जोड़ती है।
1. माड़िया (दंडामी माड़िया / बायसन हार्न माड़िया)
माड़िया जनजाति को गोंड की उपजाति बताया गया है। इसके पुरुष गौर (जंगली भैंसे) के सींग लगे मुकुट पहनकर नृत्य करते हैं, इसीलिए इसे बायसन हार्न माड़िया नाम मिला है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| उपनाम | बायसन हार्न माड़िया (पुरुष सदस्य गौरसींग युक्त मुकुट धारण करते हैं) |
| उपजाति | गोंड की उपजाति |
| उत्पत्ति की मान्यता | भीमुलदेव (भीमादेव) के आशीर्वाद से |
| बोली | गोंडी (इस जनजाति की विशेष बोली); कोयतुर भी गोंडी का ही एक प्रकार बताया गया है |
| भाषा परिवार | द्रविड़ भाषा परिवार |
| कृषि | पेद्दा खेती (अस्थायी कृषि पद्धति) |
| पेय पदार्थ | सल्फी |
| पुस्तक | द गौर (वेरियर एल्विन) |
| मकान | वैडु कुरमा |
| निवास क्षेत्र | कोण्डागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर; छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में भी |
| सिहारी | जंगल में अलग झोपड़ी बनाकर रहने की व्यवस्था; ऐसी झोपड़ी को सिहारी कहते हैं |
| रांधालोना / लोना | रांधालोना = रसोईघर; लोना = आवास |
| माने कोट्टाम / ओसेर / पटानद | माने कोट्टाम = बैठक कक्ष; ओसेर = बरामदा; पटानद = शयनकक्ष |
| विस्क बट / विज्जा लोना | विस्क बट = श्मशान; विज्जा लोना = धान भंडार कक्ष |
| गोदमाल / वेटा | गोदमाल = गोदना गोदवाने की प्रथा; वेटा = शिकार |
| कूटेह (मृत्यु संस्कार) | तीसरे दिन या कुछ दिनों बाद किया जाता है; मृतात्मा को घर के पूजा कक्ष में पीतर (पितर) देवों के लिए स्थापित अनाल कुंडा में लाया जाता है |
| स्मृति स्तंभ | मृतक के प्रति श्रद्धा और स्नेह व्यक्त करने तथा उसे चिरकाल तक याद रखने के लिए बनाया जाता है; इसे हनालगट्टा, मृतक स्तंभ या गायता पखना भी कहते हैं; कूटेह के दिन स्थापित होता है |
| स्मृति स्तंभ के प्रकार | उर्से कल्ल, दान्या कल्ल और मठ; ये लकड़ी और पत्थर दोनों से बनते हैं (दंडामी माड़िया में) |
| गोटुल | माड़िया जनजाति में गोटुल का संचालन विधुर एवं परित्यक्त व्यक्ति करता है |
| लांदा | चावल की शराब, विवाह के समय उपयोग होती है |
| प्रमुख त्योहार | अमुस (हरियाली/हरेली), कोड़ता (नवाखानी), नुका नोरदा नाद (नया चावल धोने का पर्व), दियारी, ककसाड़ जात्रा (गोत्र देव की पूजा का पर्व) |
| नृत्य | बायसनहार्न नृत्य या गौर नृत्य (भैंस के सींग जैसी टोपी पहनकर); जात्रा पर्व के दौरान; दंडामी माड़िया भी करते हैं; वेरियर एल्विन ने इसे विश्व का सबसे सुंदर नृत्य कहा |
| देवी-देवता | दंतेश्वरी देवी, मावली देवी, भैरम देव, परदेशीन माता, बंजारिन माता, गोत्र पेन तथा पूर्वज देव |
| गीत | पेंडुम पाटा (विवाह गीत), करसार पाटा (गोत्र देव यात्रा के गीत), अनाल पाटा (मृत्यु संस्कार गीत), पेद्दाड़ा पाटा (नामकरण संस्कार के लिए) |
ध्यान दें कि स्मृति स्तंभ की परंपरा पुस्तक में दंडामी माड़िया के संदर्भ में बताई गई है और कूटेह के दिन ही स्तंभ स्थापित होता है। इसी प्रकार कूटेह और अनाल पाटा दोनों मृत्यु से जुड़े हैं, जबकि पेंडुम पाटा विवाह से जुड़ा है।
2. हल्बा (Halba)
हल्बा जनजाति बस्तर तथा उससे लगे अनेक क्षेत्रों में फैली है। पुस्तक इसे आर्थिक रूप से सबसे समृद्ध जनजाति बताती है और साक्षरता में यह सबसे आगे है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास क्षेत्र | धमतरी, बस्तर, कोंडागांव, कांकेर, बालोद, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, राजनांदगांव क्षेत्र |
| बोली | हल्बी |
| उपजाति | बस्तरिया, छत्तीसगढ़िया तथा मरेठिया हल्बा |
| मुख्य व्यवसाय | कृषि कार्य; पोहा/चिवड़ा बनाने का कार्य भी करते हैं |
| आर्थिक स्थिति | आर्थिक रूप से सबसे समृद्ध जनजाति |
| टोटम | बस्तर में हल्बा जनजाति टोटम को बरग कहती है |
| ककई पानी | प्रसूता को प्रसूति के बाद दिया जाने वाला औषधीय पानी |
| साक्षरता (जनगणना 2011) | हल्बा 76.2 प्रतिशत, परधान 70.7 प्रतिशत, उरांव 68.9 प्रतिशत; यानी हल्बा > परधान > उरांव |
| धार्मिक प्रभाव | कबीर पंथ का प्रभाव; सवंता संप्रदाय का प्रभाव |
हल्बा जनजाति की उपजातियाँ तीन हैं और उनके नाम स्थान (बस्तर, छत्तीसगढ़) तथा मराठी क्षेत्र (मरेठिया) से जुड़े दिखाई देते हैं। साक्षरता वाली पंक्ति पर परीक्षाओं में विशेष ध्यान रहता है।
3. भतरा (Bhatra)
भतरा शब्द का अर्थ सेवक बताया गया है। यह जनजाति बस्तर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा और सुकमा क्षेत्र में रहती है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अर्थ | सेवक |
| बोली | भतरी (उड़िया और हल्बी का मिश्रण) |
| निवास | बस्तर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा, सुकमा क्षेत्र |
| जनजाति देवता | शिकार देवी; मातीदेव / माटीदेव |
| आगमन | चौदहवीं शताब्दी में काकतीय वंश के संस्थापक राजा अन्नमदेव के साथ वारंगल से बस्तर आए |
| नाट्य | भतरानाट |
| विशेष | इस जनजाति में बाकरा का अर्थ कमरा होता है |
4. दोरला (कोया / कोयतूर)
दोरला जनजाति का नाम मुखिया के अर्थ वाले शब्द दोरा से जुड़ा बताया गया है। यह मुख्यतः बस्तर, बीजापुर और सुकमा अंचल तथा गोदावरी अंचल में निवास करती है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| नामकरण | रियासत काल में कोया जाति समुदाय के मुखिया को दोरा कहा जाता था; इसी से कोया जाति समूह को दोराकोया कहा जाने लगा, जो आगे चलकर दोरला बना। लाला जगदलपुरी के अनुसार दोरला में दोरा का अर्थ जाति का मुखिया/श्रेष्ठ व्यक्ति है |
| पूर्व नाम | कोया, कोयतुर |
| मुख्य संकेन्द्रण | बस्तर, बीजापुर, सुकमा अंचल; गोदावरी अंचल में भी (स्वयं को वारंगल से आया कहते हैं) |
| स्थानीय नाम | कोंटा क्षेत्र के दोरला को दोर्राकोया या दोयाकोयर; बीजापुर क्षेत्र में कोया या कोयर भी कहते हैं |
| बोली | डोरली / दोरली (सुकमा क्षेत्र में) |
| नृत्य | पैडुल नृत्य (विवाह नृत्य) |
| अन्य नृत्य/गीत | पेंडुल पाटा, कोंडता पाटा, कुर्रम पाटा, आना पाटा आदि |
| उप-शाखाएँ | 4: गुमिनोर, पार्मिलोर, तोगुतोर, मन्नोतोर |
| उपजाति संबंध | गोंड (कोयतोर या कोइतुर) की उपजाति |
| विनिमय विवाह | कुण्ड मारपुर |
| परीक्षा विवाह | इलेटाम |
| मंगनी विवाह | तरपील |
| सगाई | कलतोसनाद |
| रसोई | ओजल |
| पुनर्विवाह | मोगनाल मिरतोर (पलायन विवाह); मुंडराल पिल (पुनर्विवाह विधि) |
| सामूहिक शिकार | गर्मियों में विज्जा पंडुम त्योहार में सामूहिक शिकार वेन्टा |
| ग्राम देवी-देवता | गामम |
| धार्मिक पुजारी | पेरूम |
| ऐतिहासिक संकेत | एक मृत्यु गीत में कलेगीराजू अर्थात कलिंग राजा का उल्लेख मिलता है |
| त्योहार | बारिश न होने पर कप्पल पंडुम (मेढकों का विवाह त्योहार) स्त्रियाँ मनाती हैं; अन्य: जिरा पण्डुम, कोल पण्डुम, चिकुर पण्डुम |
दोरला की विवाह-शब्दावली पुस्तक में सबसे अधिक है, इसलिए जोड़ी मिलाने वाले प्रश्नों की संभावना यहाँ अधिक रहती है। ध्यान रखें कि विनिमय विवाह का नाम कुण्ड मारपुर तथा परीक्षा विवाह का नाम इलेटाम दिया गया है।
5. गदबा या गड़बा
गदबा जनजाति मूलतः ओडिशा की मानी गई है और बस्तर में निवास करती है। जनश्रुति के अनुसार इसे राजा के पालकी ढोने के काम के लिए लाया गया था।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | बस्तर (मूलतः ओडिशा के) |
| प्रमुख देवी | बूढ़ी देवी या ठकुरानी माता |
| उपजाति | बोदो, कथेरा, पारंगी, कापू |
| जनश्रुति | काकतीय शासक महिपाल देव द्वारा पालकी ढोने के कार्य के लिए लाया गया |
| नामकरण | गोदावरी से संलग्नता के कारण गदबा नाम पड़ा |
| संस्कृति | धुरवा जनजाति से मिलती-जुलती संस्कृति |
| विशेष | इस जनजाति में भी घोड़े को छूना पाप माना जाता है |
6. परजा
परजा शब्द संस्कृत के प्रजा से बना बताया गया है। बस्तर में यही जनजाति धुरवा नाम से जानी जाती है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | बस्तर, कोण्डागांव, सुकमा व दंतेवाड़ा क्षेत्र |
| उत्पत्ति | संस्कृत शब्द परजा (अर्थ प्रजा) से |
| युवागृह | धांगाबक्सर |
| बोली | परिज / परजी |
| ग्राम मुखिया | मड़ूली (उसके घर के सामने पत्थर का देवता निशान मुण्डा होता है, जहाँ पंचायत/चौपाल लगती है) |
| चौपाल | बिरयना मुण्डा / वेरना मुण्डा |
| धार्मिक कार्य | करने वाला जानी; शुद्धिकरण करने वाला भटनायक |
| अन्य नाम | बस्तर में धुरवा नाम से जानी जाती है |
तुलना एवं संबंध
| जनजाति | बोली | आजीविका/पहचान | देवता/विशेष |
|---|---|---|---|
| माड़िया | गोंडी / कोयतुर | सल्फी, पेद्दा खेती | भीमुलदेव; दंतेश्वरी, मावली |
| हल्बा | हल्बी | कृषि, पोहा-चिवड़ा | बरग टोटम; कबीर पंथ |
| भतरा | भतरी (उड़िया+हल्बी) | सेवक | शिकार देवी, माटीदेव; भतरानाट |
| दोरला | डोरली / दोरली | विवाह के अनेक रूप | गामम, पेरूम; कप्पल पंडुम |
| गदबा | (पुस्तक में अलग बोली नहीं दी गई) | पालकी ढोना (जनश्रुति) | बूढ़ी देवी / ठकुरानी माता |
| परजा | परिज / परजी | बस्तर में धुरवा | युवागृह धांगाबक्सर; जानी, भटनायक |
दूसरी तुलना युवागृह और मुखिया के नामों की है: परजा में युवागृह धांगाबक्सर है और मुखिया मड़ूली; माड़िया में गोटुल विधुर तथा परित्यक्त व्यक्ति चलाता है। गदबा और परजा की तुलना धुरवा से की गई है: गदबा की संस्कृति धुरवा से मिलती है, जबकि परजा को बस्तर में धुरवा ही कहा जाता है।
याद रखने योग्य बिंदु
- माड़िया गोंड की उपजाति है और गौर सींग का मुकुट पहनती है।
- माड़िया का पेय सल्फी है और मकान वैडु कुरमा।
- वेरियर एल्विन की पुस्तक द गौर माड़िया से जुड़ी है।
- हल्बा की बोली हल्बी है; टोटम को बरग कहते हैं।
- साक्षरता क्रम: हल्बा 76.2, परधान 70.7, उरांव 68.9।
- हल्बा में कबीर पंथ और सवंता संप्रदाय का प्रभाव है।
- भतरा का अर्थ सेवक; बोली भतरी।
- भतरा शिकार देवी और माटीदेव को मानते हैं।
- भतरा राजा अन्नमदेव के साथ वारंगल से आए।
- दोरला का पूर्व नाम कोया/कोयतुर; बोली डोरली।
- दोरला उप-शाखाएँ चार हैं।
- कप्पल पंडुम मेढकों का विवाह त्योहार है।
- गदबा की प्रमुख देवी बूढ़ी देवी या ठकुरानी माता।
- परजा का युवागृह धांगाबक्सर है।
- परजा में धार्मिक कार्य जानी और शुद्धिकरण भटनायक करता है।
स्मरण सूत्र
- माड़िया = मुकुट में गौर सींग, पेय सल्फी: 'मा-सी' यानी माड़िया-सल्फी।
- भतरा = सेवक, भतरी बोली, भतरानाट: तीनों में 'भ-त' ध्वनि।
- दोरला की चार शाखाएँ: गु-पा-तो-म (गुमिनोर, पार्मिलोर, तोगुतोर, मन्नोतोर)।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
इस भाग से जोड़ी मिलाने वाले प्रश्न बार-बार आते हैं: जनजाति और बोली, जनजाति और देवता, जनजाति और नृत्य/नाट्य।
पूल के प्रश्नों में भतरा की शिकार देवी, हल्बा में कबीर पंथ और माड़िया के सल्फी पेय जैसे तथ्य दिखते हैं।
कुछ प्रश्न कथन-आधारित होते हैं, जैसे सबसे साक्षर जनजाति या आर्थिक रूप से समृद्ध जनजाति।
विवाह की शब्दावली (दोरला, माड़िया) अक्सर मिलान प्रश्नों में रखी जाती है।
स्वयं जाँचें
- प्रश्न: भतरा का शाब्दिक अर्थ क्या है? उत्तर: सेवक।
- प्रश्न: दोरला में परीक्षा विवाह को क्या कहते हैं? उत्तर: इलेटाम।
- प्रश्न: परजा का युवागृह कौन-सा है? उत्तर: धांगाबक्सर।
- प्रश्न: माड़िया का स्मृति स्तंभ किस नाम से भी जाना जाता है? उत्तर: हनालगट्टा / गायता पखना।
- प्रश्न: 2011 में साक्षरता में शीर्ष जनजाति? उत्तर: हल्बा (76.2 प्रतिशत)।
अभ्यास प्रश्न
“शिकार देवी” का संबंध मुख्य रूप से किस जनजाति से है ?
- (A) कमार
- (B) बैगा
- (C) उराँव
- (D) भतरा
सल्फी नामक पेय किस जनजाति में अत्यधिक लोकप्रिय हा
- (A) कमार
- (B) माड़िया
- (C) हिल कोरबा
- (D) गोड
इनमें से किस जनजाति के अधिकतर लोग ने कबीर पंथ को अपना लिया है?
- (A) हल्बा
- (B) भतरा
- (C) मुडिया
- (D) कोरबा
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (D) - शिकार देवी भतरा जनजाति के देवता के रूप में दी गई हैं (साथ में माटीदेव)।
- (B) - माड़िया जनजाति का पेय पदार्थ सल्फी बताया गया है।
- (A) - हल्बा जनजाति पर कबीर पंथ का प्रभाव बताया गया है।