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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 22
मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र की जनजातियाँ: अगरिया से पाव तक

मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र की जनजातियाँ (बिलासपुर, रायपुर एवं दुर्ग संभाग)

मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र में बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग संभाग आते हैं। पुस्तक के अनुसार इसमें बिलासपुर, कोरबा तथा रायगढ़ जिलों के मैदानी क्षेत्र, जांजगीर-चांपा, सक्ती, मुंगेली, रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और कबीरधाम शामिल हैं।

इस क्षेत्र में अगरिया, बिंझवार, धनवार, भुंजिया, कोंध, कोल, संवरा, सौंता, शिकारी/पारधी, पाव, भैना, कंवर, गोंड, कमार, कड़रा, उरांव आदि रहते हैं। इस अध्याय में इनमें से बारह जनजातियाँ ली गई हैं: अगरिया, बिंझवार, धनवार, संवरा (सौंरा), कोंध, कोल, सौंता, पारधी, भैना, परधान, कंडरा और पाव। परीक्षा में इनका पेशा और निवास जिला सबसे अधिक पूछा जाता है।

1. अगरिया

अगरिया लोहे से जुड़ा व्यवसाय करने वाली जनजाति है और इसका मुख्य निवास मैकल श्रेणी है।

बिंदुविवरण
निवासमैकल श्रेणी, सरगुजा, कोरिया, जशपुर आदि
देवताधधकती भट्ठी
उपजाति2: पथरिया एवं खुटीया अगरिया
पितृ देवतालोहा सुर
प्रमुख देवबुढ़ा देव, ठाकुर देव, बाघदेव, जोगनी, शीतला माता, धुरलापाट
कार्यलोहे गलाने का व्यवसाय
विशेषउड़द दाल का विशेष महत्व
चूल्हाएक या दो मुँह का, अंग्रेजी के उल्टा U आकार का
दशहरादशहरा उत्सव के समय लोहासुर को काले मुर्गे की बलि
बिहार मेंइस जनजाति को असूर कहा जाता है

2. बिंझवार (Binjhwar)

बिंझवार विंध्य पर्वत से जुड़ा नाम है। यह जनजाति बलौदाबाजार, महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा तथा रायगढ़ में रहती है।

बिंदुविवरण
निवासबलौदाबाजार, महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा तथा रायगढ़
नामकरणविंध्य पर्वत के मूल निवासी होने के कारण
उत्पत्ति (किंवदंती)बारहभाई बेटकर
भाषाछत्तीसगढ़ी
प्रतीक चिह्नतीर-कमान पूजनीय प्रतीक
गोदनाझूँठी
महासभाकोटा सागर
विवाहतीर विवाह एवं सामान्य विवाह
देवी-देवताबारह भाई बेटकर, विंध्यवासिनी देवी
उपजाति4: बड़े बिंझवार, सोनझरा, बिरजिया, बिझिया (रसेल एवं हीरालाल के अनुसार)
ऐतिहासिक व्यक्तिसोनाखान के वीरपुत्र शहीद वीरनारायण सिंह इसी जनजाति से
पर्वदशहरे के दिन से चउरधोनी लोक पर्व

3. धनवार

धनवार को स्थानीय बोली में धनुहार/धनुवार कहा जाता है; धनुर्धारी अर्थ के साथ बाण निर्माण इसके नाम का कारण है।

बिंदुविवरण
संबोधनधनुहार / धनुवार
नामकरणबाण निर्माण के कारण
निवासबिलासपुर जिला क्षेत्र
कार्यबाँस के बर्तन बनाना
अर्थधनुर्धारी
वाद्ययंत्रनटकी बाजा (लोकगीत, नृत्य के समय)
विशेषस्त्री और पुरुष अलग-अलग झुंड बनाकर नृत्य करते हैं, जिसे पालनी खेलना कहते हैं

4. संवरा / सौंरा (Saura)

संवरा जनजाति महासमुंद, रायगढ़ और बिलासपुर में रहती है और साँप पकड़ना इसका कार्य बताया गया है।

बिंदुविवरण
निवासमहासमुन्द, रायगढ़, बिलासपुर
कार्यसाँप पकड़ना
उत्पत्तिस्वयं को शबरी का पूर्वज मानती है

5. कोंध

कोंध जनजाति रायगढ़ और महासमुंद क्षेत्र में रहती है। इसे खोंड या कोण्ड नाम से भी जाना जाता है।

बिंदुविवरण
निवासरायगढ़, महासमुंद
बोलीकुई (कोंधी)
उप-समूहडोंगरिया कोंध, कुटिया कोंध, पेंगा कोंध, झुरिया कोंध, जामिया कोंध, नानगुली कोंध, सीतहा कोंध
अन्य नामखोंड या कोण्ड
इतिहासलगभग 200 वर्ष पूर्व ओडिशा से आकर बसी मानी जाती है
कृषिपोडु खेती

6. कोल

कोल जनजाति कोरिया और बिलासपुर में रहती है तथा कोयला खनन से जुड़ी है। इसकी उत्पत्ति रीवा से मानी जाती है।

बिंदुविवरण
निवासकोरिया, बिलासपुर
कार्यकोयला खनन
उत्पत्तिजनजाति प्रमुखों के अनुसार रींवा (मध्यप्रदेश), जहाँ कोलगढ़ (त्योधर) नामक राजा राज्य करता था
पंचायत प्रमुखगोहिया / गोतिया
नृत्यकोलदहका / दहका
विशेषप्राचीन ग्रंथों में शबरी से संबंध का उल्लेख
गोत्रबान कहलाता है; टोटमिक अर्थात प्रत्येक गोत्र का गोत्र चिह्न

7. सौंता

सौंता जनजाति सूरजपुर, सरगुजा, बिलासपुर और रायगढ़ में पाई जाती है और कोरबा के कटघोरा क्षेत्र में केंद्रित है।

बिंदुविवरण
निवाससूरजपुर, सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़
उपजातियाँछत्तीसगढ़िया सौंता, उड़िया सौंता
मुख्य संकेन्द्रणकोरबा जिले के कटघोरा तहसील क्षेत्र में
विशेषबालक लोढ़ा को अपना पूर्वज मानते हैं

8. पारधी (Pardhi)

पारधी शब्द का संबंध शिकार से है। पुस्तक में शब्द उत्पत्ति दो रूपों में दी गई है: मराठी शब्द पारघू (आखेट) से, तथा संस्कृत शब्द पारध (शिकार) से।

बिंदुविवरण
शब्द उत्पत्तिमराठी पारघू (आखेट) से; संस्कृत पारध से
गोत्र12 गोत्र
निवास क्षेत्रसरगुजा, रायगढ़ और कोरबा
प्रकार8 उपभेद; एक उपवर्ग कारगर केवल काले पक्षियों का आखेट करता है
कार्यशिकारी (काले पक्षियों का आखेट); छिंद के पत्ते से चटाई व टोकरी निर्माण
विशेषछत्तीसगढ़ के कई जिलों व तहसीलों में अनुसूचित जनजाति अधिसूचित नहीं

9. भैना

भैना बिलासपुर और रायगढ़ में रहती है और इसके पंचायत प्रमुख को गौंटिया कहते हैं।

बिंदुविवरण
निवासबिलासपुर, रायगढ़
पंचायत प्रमुखगौंटिया

10. परधान

परधान जनजाति मुख्यतः कबीरधाम और बिलासपुर क्षेत्र में रहती है और लिंगोपाटा गाती है।

बिंदुविवरण
निवासकबीरधाम एवं बिलासपुर
गीतलिंगोपाटा
उपजातियाँराजपरधान, गांडा परधान, देसाई परधान, माढेर परधान, खलौटिया परधान, बैगा परधान
विशेषऐतिहासिक विवरण के अनुसार गोंड राजाओं की मंत्री जाति; पटरिया भी कहा जाता है
गाथावाचकगोंड राजाओं के गीत गायक होने से गाथावाचक माने जाते हैं
शाब्दिक अर्थदूसरे के अनाज पर निर्भर रहने वाला

11. कंडरा

कंडरा का नाम काण्ड यानी बाण से माना जाता है और यह जनजाति बाँस के बर्तन बनाती है।

बिंदुविवरण
निवासरायपुर, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव व धमतरी
उत्पत्तिकंडरा शब्द की उत्पत्ति कांड (बाण) से
उपसमूहझरिया व कनौजिया
कार्यबाँस का बर्तन बनाना

12. पाव

पाव जनजाति छत्तीसगढ़ की अल्पसंख्यक जनजाति है और अन्य जनजातियों के साथ रहती है।

बिंदुविवरण
निवासबिलासपुर एवं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के शहडोल (मध्यप्रदेश) से जुड़े क्षेत्र
सहनिवासगोंड, कंवर आदि जनजातियों के साथ गाँव में
उत्पत्तिपूर्वज पवईगढ़ में रहते थे, इसलिए पाव
विशेषछत्तीसगढ़ की अल्पसंख्यक जनजाति

तुलना एवं संबंध

जनजातिपेशानिवास
अगरियालोहा गलानामैकल श्रेणी, सरगुजा, कोरिया, जशपुर
बिंझवारतीर-कमान प्रतीकबलौदाबाजार, महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़
धनवारबाँस के बर्तनबिलासपुर
कंडराबाँस के बर्तनरायपुर, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, धमतरी
संवरासाँप पकड़नामहासमुंद, रायगढ़, बिलासपुर
कोलकोयला खननकोरिया, बिलासपुर
पारधीआखेट; चटाई-टोकरीसरगुजा, रायगढ़, कोरबा
जनजातिमाने गए पूर्वज/मूल
संवराशबरी के पूर्वज
कोलशबरी से संबंध (प्राचीन ग्रंथ)
सौंताबालक लोढ़ा
बिंझवारबारहभाई बेटकर

धनवार और कंडरा दोनों बाँस के बर्तनों से जुड़े हैं और दोनों के नाम बाण/धनुष के अर्थ से जोड़े गए हैं; इसलिए परीक्षा में इनमें भ्रम होना आम है। ध्यान रखें कि धनवार बिलासपुर क्षेत्र का है जबकि कंडरा रायपुर-दुर्ग क्षेत्र का।

याद रखने योग्य बिंदु

  • अगरिया लोहा गलाते हैं; देवता धधकती भट्ठी; पितृ देवता लोहासुर।
  • अगरिया को बिहार में असूर कहा जाता है।
  • बिंझवार का गोदना झूँठी कहलाता है; महासभा कोटा सागर।
  • शहीद वीरनारायण सिंह बिंझवार जनजाति से संबंधित थे।
  • धनवार बाण निर्माण के कारण, बिलासपुर में; बाँस के बर्तन।
  • धनवार में पालनी खेलना: स्त्री-पुरुष अलग झुंड में नृत्य।
  • संवरा साँप पकड़ते हैं और स्वयं को शबरी का पूर्वज मानते हैं।
  • कोंध की बोली कुई; लगभग 200 वर्ष पूर्व ओडिशा से आए।
  • कोल का नृत्य कोलदहका/दहका; गोत्र को बान कहते हैं।
  • सौंता का संकेन्द्रण कटघोरा (कोरबा) में।
  • पारधी में 12 गोत्र और 8 उपभेद।
  • परधान लिंगोपाटा गाते हैं; कबीरधाम-बिलासपुर में।
  • कंडरा का नाम कांड (बाण) से; बाँस के बर्तन।
  • पाव पवईगढ़ से; छत्तीसगढ़ की अल्पसंख्यक जनजाति।

स्मरण सूत्र

  • अगरिया-अंगारा-असूर: तीनों 'अ' से; लोहा, भट्ठी, असूर।
  • धनवार-धनुष-धनुहार; कंडरा-कांड-बाण: दोनों बाँस के बर्तन।
  • शबरी से जुड़े: संवरा और कोल (सं-को)।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

इस भाग से पेशे-जनजाति की जोड़ी और निवास जिले के प्रश्न सामान्य हैं (जैसे बिंझवार का निवास, धनवार का पेशा)।

पूल में पारधी की आजीविका, धनवार को धनुहर कहना और बिंझवार का निवास क्षेत्र वाले प्रश्न दिखते हैं।

उपजाति की संख्या (अगरिया 2, बिंझवार 4, पारधी 8 उपभेद) तथ्य-आधारित प्रश्नों में आती है।

नोट: पूल के कई प्रश्न इन पृष्ठों से जाँचे नहीं जा सके, इसलिए केवल सत्यापित प्रश्न रखे गए हैं।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: अगरिया किस धातु के व्यवसाय से जुड़े हैं? उत्तर: लोहा गलाना।
  2. प्रश्न: बिंझवार का महासभा स्थल? उत्तर: कोटा सागर।
  3. प्रश्न: पारधी में कितने गोत्र हैं? उत्तर: 12।
  4. प्रश्न: कंडरा का नाम किस शब्द से माना गया? उत्तर: कांड (बाण)।
  5. प्रश्न: सौंता कहाँ केंद्रित हैं? उत्तर: कोरबा के कटघोरा तहसील में।

अभ्यास प्रश्न

  1. ‘पारधी’जनजाति की आजीविका किस निर्भर है ?

    • (A) आखेट
    • (B) देव पूजा
    • (C) कृषि
    • (D) काष्ठ शिल्प
  2. बिंझवार का निवास क्षेत्र है।

    • (A) धमतरी जिला
    • (B) कबीरधाम (कवर्धा)
    • (C) बिलासपुर जिला
    • (D) सरगुजा जिला
  3. किस जनजाति को धनुहर भी कहा जाता है?

    • (A) सहारिया
    • (B) हल्बा
    • (C) धनवार
    • (D) बैगा

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (A) - पारधी शिकार (आखेट) पर निर्भर बताए गए हैं।
  2. (C) - बिंझवार का निवास बलौदाबाजार, महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ में बताया गया है, विकल्पों में बिलासपुर जिला ही आता है।
  3. (C) - धनवार को स्थानीय बोली में धनुहार/धनुवार कहते हैं।
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