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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 9
जनजातीय युवागृह (गोटुल, धुमकुरिया आदि) और बेठिया प्रथा

जनजातीय युवागृह (गोटुल, धुमकुरिया आदि) और बेठिया प्रथा

युवागृह जनजातीय गाँवों की वह रात्रिकालीन संस्था है जहाँ शाम ढलते ही गाँव के युवक-युवतियाँ इकट्ठा होते हैं और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। इसे आदिवासी लोक-परंपरा का वाहक माना गया है। इस संस्था में युवा वर्ग को भावी जीवनसाथी चुनने का अवसर मिलता है और सदस्यता विवाह तक बनी रहती है।

इस अध्याय में युवागृह के प्रकार, अलग-अलग जनजातियों में उसके नाम, कोसीगोटुल और गोटुल की संरचना, धुमकुरिया की आयु-आधारित नामावली, गोटुल के अतिथियों व प्रचलित शब्दों तथा बस्तर की बेठिया प्रथा को क्रमवार समझाया गया है।

सीजीपीएससी, व्यापम और पटवारी स्तर की परीक्षाओं में "किस जनजाति का युवागृह क्या कहलाता है", "गोटुल का प्रमुख/सदस्य किसे कहते हैं" जैसे सीधे जोड़ी-मिलान वाले प्रश्न बार-बार आते हैं, इसलिए यह अध्याय तालिकाओं के सहारे याद करना चाहिए।

युवागृह की मूल अवधारणा

पुस्तक के अनुसार युवागृह गाँव की ऐसी संस्था है जो मनोरंजन के साथ-साथ भावी जीवन के लिए उपयोगी शिक्षा और प्रशिक्षण देती है। यहाँ शाम को तोड़ी (वाद्य) की आवाज के साथ गाँव की तरुणाई जुटती है। जीवनसाथी के चयन में सहायता इसका एक सामाजिक पक्ष है। युवक-युवतियों को इसकी सदस्यता विवाह होने तक मिली रहती है।

युवागृह के दो प्रकार

आधारएकलिंगीय युवागृहद्विलिंगीय युवागृह
प्रक्रियाअविवाहित युवक-युवतियाँ शाम को जाकर रात को घर वापस आ जाते हैंअविवाहित युवक-युवतियाँ शाम को जाते हैं और रातभर वहीं रहते हैं
किस जनजाति में प्रचलितअबूझमाड़ियामुरिया/मुड़िया
उदाहरणकोसी गोटुलगोटुल
विशेष-यह युवागृह गाँव के मध्य में स्थित होता है

ध्यान दें: इसी अध्याय के अन्य चित्र में कोसीगोटुल के "प्रकृति" वाले खाने में "एकलिंगीय युवागृह" और जनजाति में अबूझमाड़िया लिखा है, अर्थात दोनों जगह एक ही बात दोहराई गई है।

विभिन्न जनजातियों के युवागृह

क्र.जनजातियुवागृह का नाम
1अबूझमाड़ियाकोसीगोटुल / गोटुल
2उराँवधुमकुरिया
3मुरिया/मुड़िया (गोंड)गोटुल
4बिरहोरगितिओना
5भारियाघसरवासा
6भुइंयारंगबंग
7परजाधांगाबक्सर
8कोंधधांगड़ा घर (पुरुष) और धांगड़ी घर (महिला)

इनमें से धुमकुरिया, गोटुल, गितिओना, घसरवासा, रंगबंग और धांगाबक्सर के प्रश्न पूर्व वर्षों की परीक्षाओं में आए हैं। कोंध के लिए पुरुष और महिला के अलग-अलग घर बताए गए हैं, यह अलग से याद रखें।

कोसीगोटुल / गोटुल की रूपरेखा

पुस्तक की रूपरेखा के अनुसार कोसीगोटुल एकलिंगीय युवागृह है और अबूझमाड़िया जनजाति से जुड़ा है। इसके सहयोगी कोटवार (पुरुष) और कोटवारिन (महिला) कहलाते हैं। इसके देवता तालूरमुन्ते हैं। सदस्य 8 से 10 वर्ष के बालक-बालिकाएँ होते हैं, जिनमें बालक को "लेयोर" और बालिका को "लेयस्कू" कहा गया है। गोटुल/कोसीगोटुल के प्रमुख को पटेल कहा जाता है। इसका उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ भावी जीवनोपयोगी शिक्षा और प्रशिक्षण देना है।

धुमकुरिया (उराँव)

धुमकुरिया उराँव जनजाति का युवागृह है। इसमें पुरुष सदस्य "धांगर" और पुरुष प्रमुख "धांगर महतो" कहलाता है। महिला सदस्य "धांगरिन" तथा महिला प्रमुख "बारकी धांगरिन" है। सदस्यों का नामकरण आयु-वर्ग के आधार पर होता है:

आयुनाम
13 वर्ष से कमपुना जोरवार
13 से 18 वर्ष तकमजथुरिया जोरवार
18 वर्ष से अधिक पुरुषधांगर

गोटुल का विस्तृत विवरण (मुरिया/मुड़िया गोंड)

बिंदुविवरण
जनजातिमुरिया/मुड़िया (गोंड)
उत्पत्ति/जनकलिंगोपेन
प्रमुख देवतालिंगो / लिंगोपेन
वास्तविक नामगोटुल; इसका अर्थ "गोंगा स्थल" अर्थात विद्या स्थल बताया गया है
उद्देश्यसामाजिक शिक्षा देना; जीवनसाथी के चुनाव में सहायक होना; सेवाभाव जागृत करना
प्रचार-प्रसार1947 में वेरियर एल्विन की पुस्तक "The Muria and Their Ghotul" से इस संस्था का विश्वव्यापी प्रचार हुआ
सदस्यपुरुष सदस्य - चेलिक; महिला सदस्य - मोटियारिन
प्रमुखपुरुष सदस्य प्रमुख - सिरेदार; महिला सदस्य प्रमुख - बेलोसा
प्रमुख नृत्यहुलकी पाटा, मांदरी नृत्य, ककसार नृत्य
वाद्ययंत्रमांदर
त्योहारनुनानारे दाना पण्डुम (अक्टूबर माह; गोटुल की सभी मोटियारिनें दूसरे गोटुल में जाती हैं); इसके अलावा मरका पंडुम, कोरे पंडुम, कारा पंडुम, ईराऊ पंडुम
निषेधअविवाहित युवक-युवतियों को वर्ष में एक बार प्रवेश दिया जाता है (पुस्तक का कथन); विवाहित जोड़ों का गोटुल में आना प्रतिबंधित है

स्रोत में एक बात ध्यान देने की है: पृष्ठ पर "प्रमुख देवता" लिंगो/लिंगोपेन बताया गया है और "उत्पत्ति/जनक" भी लिंगोपेन ही लिखा है, जबकि कोसीगोटुल की रूपरेखा में देवता तालूरमुन्ते है। यानी देवता के नाम गोटुल और कोसीगोटुल के लिए अलग-अलग दिए गए हैं; इन्हें मिलाकर न पढ़ें।

गोटुल के अतिथि

पदनामविशेष (भूमिका)
गायताग्राम प्रमुख
पदग्राम के उपप्रमुख
सिरहाजादू-टोने, झाड़-फूँक करने वाला
अपरगना माँझीदूसरे परगना के मुखिया
पेडगा-पेडगीदूसरे गोटुल के आमंत्रित जवान लड़के-लड़कियाँ
पंचतौरजाति पंचायत का मुखिया
साई गुलीगोटुल के साथी

गोटुल में प्रचलित शब्द

शब्दअर्थ/आशय
कटकुलखाटिया (खाट)
खरहराएक प्रकार का झाड़ू
झरियासफाई का कार्य करता है
गुदेगोरतम्बाकू की डिबिया
चालकीतम्बाकू बाँटने का कार्य करता है
पड़ियांबाँस या लकड़ी से बनी कंघी (चेलिक द्वारा मोटियारिन को भेंट दी जाती है)
थोड़ीबाँस से बनी सुराही
मुसवानसाज-सज्जा का कार्य करता है
कोटवारसामान्य देख-रेख का कार्य करता है
लांदाचावल से निर्मित विशेष पेय पदार्थ
कंटवककाष्ठ से निर्मित जूते
करधनीकौड़ी से निर्मित माला जो कमर में पहनी जाती है
केकरेंगबाँस से निर्मित वाद्ययंत्र

बेठिया प्रथा

बेठिया गोंडी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है सामूहिक रूप से किसी व्यक्ति या परिवार का सहयोग करना। यह सहकारिता पर आधारित प्रथा है जिसमें गाँव के किसी व्यक्ति या परिवार के सुख-दुःख और जरूरत पर सारा गाँव एकजुट होकर सहायता करता है। यह बस्तर क्षेत्र में प्रचलित है। पुस्तक इसे बस्तर के अबूझमाड़ की प्रथा बताते हुए कहती है कि यह सहकारिता की मिसाल है।

तुलना एवं संबंध

तत्वकोसीगोटुलगोटुलधुमकुरिया
जनजातिअबूझमाड़ियामुरिया/मुड़ियाउराँव
प्रकारएकलिंगीयद्विलिंगीय (गाँव के मध्य)-
सदस्य (पुरुष/महिला)लेयोर / लेयस्कूचेलिक / मोटियारिनधांगर / धांगरिन
प्रमुखपटेलसिरेदार / बेलोसाधांगर महतो / बारकी धांगरिन

याद रखने योग्य बिंदु

  • युवागृह दो प्रकार का: एकलिंगीय और द्विलिंगीय।
  • अबूझमाड़िया में एकलिंगीय (कोसीगोटुल), मुरिया में द्विलिंगीय (गोटुल)।
  • उराँव का युवागृह धुमकुरिया है।
  • बिरहोर - गितिओना; भारिया - घसरवासा; भुइंया - रंगबंग; परजा - धांगाबक्सर।
  • कोंध में पुरुष का धांगड़ा घर और महिला का धांगड़ी घर।
  • गोटुल का अर्थ पुस्तक में "गोंगा स्थल" अर्थात विद्या स्थल।
  • गोटुल के जनक/देवता लिंगोपेन।
  • गोटुल पुरुष सदस्य चेलिक, महिला मोटियारिन।
  • सिरेदार पुरुष प्रमुख, बेलोसा महिला प्रमुख।
  • वेरियर एल्विन की 1947 की पुस्तक से गोटुल का विश्वव्यापी प्रचार।
  • नुनानारे दाना पण्डुम अक्टूबर माह में होता है।
  • लांदा चावल से बना पेय है।
  • बेठिया गोंडी शब्द, अर्थ सामूहिक सहयोग।
  • कोसीगोटुल के प्रमुख को पटेल कहते हैं।

स्मरण सूत्र

  • "कोसी-कोटवार" - कोसीगोटुल के सहयोगी कोटवार/कोटवारिन।
  • "चेलिक-मोटियारिन" - चे और मो: चेलिक लड़का, मोटियारिन लड़की।
  • "उराँव-धुम, बिरहोर-गिति, भारिया-घस, भुइंया-रंग, परजा-धांगा" - पहले अक्षर से युवागृह पहचानें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

पूर्व प्रश्नों में सबसे ज्यादा जोड़ी-मिलान आया है: जनजाति और युवागृह का नाम (जैसे उराँव-धुमकुरिया, मुरिया-गोटुल)।

दूसरा पैटर्न: गोटुल के पदाधिकारी, उद्देश्य और जनक (लिंगोपेन) पर प्रश्न।

कभी-कभी पुस्तकीय लेखक या वर्ष (एल्विन, 1947) और लांदा जैसे शब्दों पर भी प्रश्न बनते हैं।

स्वयं जाँचें

  • प्रश्न: उराँव जनजाति का युवागृह क्या है? उत्तर: धुमकुरिया
  • प्रश्न: गोटुल की महिला सदस्य को क्या कहते हैं? उत्तर: मोटियारिन
  • प्रश्न: कोसीगोटुल में बालक-बालिका का नाम बताइए। उत्तर: लेयोर और लेयस्कू
  • प्रश्न: बिरहोर का युवागृह? उत्तर: गितिओना
  • प्रश्न: बेठिया प्रथा का अर्थ? उत्तर: सामूहिक सहयोग

अभ्यास प्रश्न

  1. ‘धुमकुरिया’ किस जनजाति का युवागृह है ?

    • (A) नगेसिया
    • (B) कमार
    • (C) उरांव
    • (D) भैना
  2. उरांव जनजाति का युवागृह कहलाता है?

    • (A) धुमकुरिया
    • (B) करमा
    • (C) कुरूख
    • (D) धरमा
  3. उराँव जनजाति के युवागृह का नाम है –

    • (A) घोटुल
    • (B) धुमकुरिया
    • (C) धसरबासा
    • (D) गिति ओना
  4. युवा गृह ‘घोटुल किस जनजाति में पाया जाता है?

    • (A) भतरा
    • (B) उरांव
    • (C) मुरिया
    • (D) हल्बा

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (C) - धुमकुरिया उराँव का युवागृह है (तालिका में)।
  2. (A) - उराँव जनजाति का युवागृह धुमकुरिया कहलाता है।
  3. (B) - उराँव का युवागृह धुमकुरिया है; घोटुल मुरिया का, धसरबासा भारिया का, गितिओना बिरहोर का।
  4. (C) - गोटुल/घोटुल मुरिया जनजाति का युवागृह है।
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