प्रमुख जनजातियाँ: गोंड, कंवर, उराँव, मुरिया एवं माड़िया (दक्षिण सांस्कृतिक क्षेत्र)
पुस्तक के अनुसार मध्यप्रदेश में जनजातियों की जो सूची थी, वही सूची छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद भी भारतीय जनगणना द्वारा जारी की गई है। छत्तीसगढ़ में 42 प्रकार की जनजातियाँ पाई जाती हैं, जो 161 उपसमूहों में विभाजित हैं। इस अध्याय में राज्य की सबसे बड़ी जनजाति गोंड, फिर कंवर और उराँव तथा दक्षिण (बस्तर संभाग) की मुरिया व माड़िया जनजातियाँ ली गई हैं।
परीक्षा के लिए हर जनजाति के ये बिंदु याद रखें: उत्पत्ति, निवास, बोली, युवागृह, पंचायत प्रमुख, देवता, नृत्य, पर्व, पुस्तक-लेखक। मुख्य परीक्षा और पटवारी/व्यापम दोनों में इन्हीं पर एक-एक अंक के प्रश्न बनते हैं।
1. गोंड
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| उत्पत्ति | "कोंड" (तेलुगू भाषा) = पर्वत। कोंड के निवासी आगे चलकर गोंड कहलाए। गोंड स्वयं को "कोयतोर" (पर्वतवासी) कहते हैं |
| निवास | दक्षिण छत्तीसगढ़ (बस्तर संभाग), बिलासपुर, कोरबा, कवर्धा आदि |
| भाषा समूह | द्रविड़ियन समूह की भाषा; संपर्क बोली गोंडी |
| प्रकार | राजगोंड (सबसे श्रेष्ठ गोंड) और धरगोंड |
| उपजाति / शाखा | छ.ग. में सर्वाधिक 41 उपजातियाँ; गोंड जनजाति की 30 शाखाएँ |
| जनसंख्या | राज्य की कुल जनजाति का 56 प्रतिशत तथा राज्य की कुल जनसंख्या का 17.57 प्रतिशत; छ.ग. की सबसे बड़ी जनजाति समूह |
| कार्य | छत्तीसगढ़ की जनजातियों के पारंपरिक वैद्य के रूप में |
| पंचायत प्रमुख | राजा / भोई |
संस्कार एवं रस्म
- दोषी: विवाह कार्यक्रम संपन्न कराने वाला।
- प्रचलित विवाह: गुरावट (विनिमय), घरजमाई (सेवा विवाह), पैठू या दुकू (घुसपैठ), उढ़रिया (सहपलायन)।
- पर्व: मेघनाद पर्व।
- देवता: दूल्हादेव, बूढ़ादेव, सूरजदेव, डूमादेव (पितृदेव) आदि।
- मृतक संस्कार: मृत्यु के बाद तीसरे दिन "कोज्जी" और दसवें दिन "कुण्डा" मिलन संस्कार।
- कला: घर की दीवारों पर नोहडोरा अलंकरण।
पर्व, नृत्य एवं देवस्थान
- नवाखाई त्यौहार को इस जनजाति में पण्डुम कहते हैं।
- नृत्य: करमा, सैला, पंडकी (महिलाओं द्वारा)।
- गोंड जनजाति में "लिंगोपेन" को गोटुल का संस्थापक और नियामक माना जाता है।
- ग्राम के किनारे या मध्य में देवगुड़ी एवं मालागुड़ी होता है।
2. कंवर
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| उत्पत्ति (किंवदंती) | कौरव वंशीय राजा धृतराष्ट्र से; इसलिए कुरुवंशीय या चन्द्रवंशी; स्वयं को कौरवों का वंशज मानते हैं |
| समुदाय | गहिरागुरू कंवर समुदाय के थे |
| निवास | सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, बिलासपुर, कोरिया, रायपुर, महासमुंद, गरियाबंद, राजनांदगाँव और रायगढ़; बसाहट बिलासपुर जिले में सर्वाधिक |
| उपजाति | तंवर/छतरी, राठिया, पैंकरा, चेरवा, दूध कंवर |
| प्रमुख देवता | "सगराखंड" (पुस्तक में यह रूप; एक परीक्षा-प्रश्न में "खगराखण्ड" लिखा मिलता है) |
| मुख्य कार्य | सैन्य कार्य |
| नृत्य | बार नृत्य |
| विशेष | सात उपजातियों की पंचायत = सतगड़इयाँ; टोटम समूहों को "गोटी" कहते हैं; पाइक कंवर जनजाति से संबंधित; स्त्रियाँ छाती पर गोदने से कृष्ण भगवान का रूप अंकित करवाती हैं; खोड़िया (कोठी) में धान का भण्डारण |
3. उराँव
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निवास | सरगुजा अंचल (जशपुर, बलरामपुर, रायगढ़, कोरिया, सूरजपुर) |
| युवागृह | धुमकुरिया (मुखिया - धाँगरमहतो) |
| मुख्य देवता | सरना देवी (साल वृक्ष में निवास), धर्मेश (सूर्य देव) |
| नृत्य | सरहुल नृत्य, करमा नृत्य |
| भाषा परिवार | द्रविड़ भाषा; प्रमुख बोली कुरूख/कुड़ुख (कुजुर = औषधीय पौधा) |
| गाँव के प्रमुख | माँझी |
| प्रमुख पर्व | खट्टी, सरहुल एवं फाग |
| पारंपरिक पोशाक | करेया |
| त्यौहार | करमा त्यौहार; सरहुल (साल वृक्ष के नीचे) |
| गाथा महाकाव्य | कड़खडण्डी |
| छाई भीतर | आत्मा को पूर्वजों या परमात्मा से मिलाने की क्रिया |
दक्षिण सांस्कृतिक क्षेत्र (बस्तर संभाग)
दक्षिण सांस्कृतिक क्षेत्र में कांकेर, बस्तर, कोण्डागाँव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा शामिल हैं। यहाँ निवास करने वाली जनजातियाँ: मुरिया, दण्डामी मारिया (बायसन हार्न मारिया), हल्बा, भतरा, दोरला, परजा, गदबा, अबूझमाड़िया आदि। इस अंचल की संपर्क बोली हल्बी है।
4. मुड़िया / मुरिया
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| शब्द उत्पत्ति | "मुड़" शब्द से, जिसका अर्थ पलाश का वृक्ष है |
| मुख्य संकेन्द्रण | बस्तर एवं कोण्डागाँव क्षेत्र |
| युवागृह | गोटुल (विशेष सामाजिक महत्व) |
| कृषि | मुड़िया स्थायी कृषि करते हैं (जबकि माड़िया पेद्दा कृषि) |
| उप-जाति | गोटुल मुरिया, राजा मुरिया, झोरिया मुरिया; मुड़िया गोंडों की एक उपजाति |
| बोली | मुरिया (कोईतुर) |
| परगना / पंचायत प्रमुख | माँझी / पटेल |
| पुस्तक | द मुड़िया एण्ड देयर घोटुल (वेरियर एल्विन) |
| सगाई | मुड़िया विवाह में "माहला" (पुस्तक का शब्द "महिला/माहला" जैसा छपा है) का अर्थ सगाई होता है |
| प्रमुख गीत | रेला गीत |
| देवता / पुजारी | कोण्डागाँव के मुड़िया बूढ़ादेव (बुद्धदेव) को प्रमुख आराध्य मानते हैं; पुजारी गायता |
| विशेष | शहनाई बजाने वाले को "मोहरिया" कहते हैं; मुरिया काष्ठ कला के लिए प्रसिद्ध |
पुस्तक में मुरिया नृत्यों की सूची (18) दी गई है: पूस कोलांग (केवल पुरुष नृत्य करते हैं), मांदरी, ककसार, एबालतोर, हुलकी पाटा, घोटुल पाटा, माओपाटा, दीवाड़ पाटा, डोल पाटा, चिरहे पाटा/माडा पाटा, पडली पाटा, कुरकोलोनी पाटा, कोडा पाटा, गेड़ी/डिटोंग पाटा, अन पाटा, भुईहारी करमा, छेरता, कोलांग पाटा। यह जनजाति सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बताई गई है और इसके प्रमुख नृत्य जात्रापरक होते हैं।
5. माड़िया / दंडामी माड़िया / बायसन हार्न माड़िया
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| उपनाम | बायसन हार्न माड़िया (पुरुष गौरसींग युक्त मुकुट पहनते हैं) |
| उपजाति | गोंड की उपजाति |
| उत्पत्ति | भीमुलदेव (भीमादेव) के आशीर्वाद से |
| बोली / भाषा परिवार | गोंडी की विशेष बोली; कोयतुर; द्रविड़ भाषा परिवार |
| कृषि | पेद्दा खेती (अस्थायी कृषि पद्धति) |
| पेय | सल्फी; लांदा (चावल की शराब) विवाह के समय |
| पुस्तक | द गौर (वेरियर एल्विन) |
| मकान | वैडु कुरमा (पुस्तक में यह शब्द अबूझमाड़िया के अंश में प्रसवगृह के अर्थ में भी आता है) |
| निवास | कोण्डागाँव, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर; छ.ग. के अलावा महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश में भी |
| गोटुल | संचालन विधुर एवं परित्यक्त व्यक्ति द्वारा |
शब्दावली, मृत्यु संस्कार और पर्व
- शब्दावली: सिहारी (जंगल में पृथक झोपड़ी), रांधालोना (रसोईघर), लोना (आवास), माने कोट्टाम (बैठक-कक्ष), ओसेर (बरामदा), पटानद (शयनकक्ष), विस्क बट (श्मशान), विज्जा लोना (धान भंडार कक्ष), गोदमाल (गोदना गोदवाने की प्रथा), वेटा (शिकार)।
- मृत्यु संस्कार 1 - कूटेह: तीसरे दिन या कुछ दिनों बाद; मृतात्मा को घर के पूजा कक्ष में पीतर देवों हेतु स्थापित "अनाल कुंडा" में लाते हैं।
- मृत्यु संस्कार 2 - स्मृति स्तंभ: दंडामी माड़िया में मृतक की स्मृति के लिए स्थापित; हनालगट्टा (स्मृति स्तंभ) एवं मृतक स्तंभ/गायता पखना भी कहते हैं; कूटेह के दिन स्थापित; उर्से कल्ल, दान्या कल्ल व मठ प्रकार के स्तंभ; काष्ठ एवं पत्थर दोनों से।
- प्रमुख त्यौहार: अमुस (हरियाली/हरेली), कोड़ता (नवाखानी), नुका नोरदा नाद (नया चावल धोने का पर्व), दियारी तथा ककसाड़ जात्रा (गोत्र देव की पूजा)।
- नृत्य: बायसनहार्न नृत्य या गौर नृत्य (भैंस के सींग जैसी टोपी पहनकर), जात्रा पर्व के दौरान; दण्डामी माड़िया भी करते हैं; वेरियर एल्विन ने इसे विश्व का सबसे सुंदर नृत्य कहा।
- देवी-देवता: दंतेश्वरी देवी, मावली देवी, भैरम देव, परदेशीन माता, बंजारिन माता, गोत्र पेन तथा पूर्वज देव।
- गीत: पेंडुम पाटा (विवाह गीत), करसार पाटा (गोत्र देव यात्रा के गीत), अनाल पाटा (मृत्यु संस्कार गीत), पेद्दापाटा (नामकरण संस्कार के लिए)।
तुलना एवं संबंध
| जनजाति | भाषा/बोली | युवागृह | पंचायत प्रमुख | प्रमुख देवता | नृत्य |
|---|---|---|---|---|---|
| गोंड | गोंडी (द्रविड़) | गोटुल (संस्थापक लिंगोपेन) | राजा / भोई | बूढ़ादेव, दूल्हादेव, सूरजदेव, डूमादेव | करमा, सैला, पंडकी |
| कंवर | पुस्तक में नहीं दी | पुस्तक में नहीं दिया | सतगड़इयाँ (सात उपजाति पंचायत) | सगराखंड | बार |
| उराँव | कुरूख/कुड़ुख | धुमकुरिया | माँझी (गाँव) | सरना देवी, धर्मेश | सरहुल, करमा |
| मुरिया | मुरिया (कोईतुर) | गोटुल | माँझी (परगना), पटेल (पंचायत) | बूढ़ादेव | पूस कोलांग, मांदरी, ककसार, माओपाटा |
| माड़िया | गोंडी/कोयतुर | गोटुल (विधुर/परित्यक्त द्वारा संचालित) | पुस्तक में नहीं दिया | दंतेश्वरी, मावली, भैरम | गौर (बायसनहार्न) |
| कृषि / पेय / पुस्तक | मुरिया | माड़िया |
|---|---|---|
| कृषि | स्थायी | पेद्दा (अस्थायी) |
| पेय | पृष्ठ पर नहीं दिया | सल्फी; लांदा |
| एल्विन की पुस्तक | द मुड़िया एण्ड देयर घोटुल | द गौर |
| गाथा / पर्व | जनजाति |
|---|---|
| कड़खडण्डी | उराँव |
| लिगोपेन की गाथा | मुरिया (गोंड में लिंगोपेन गोटुल का संस्थापक माना गया है) |
| नवाखाई = पण्डुम | गोंड |
| सरहुल (साल वृक्ष के नीचे) | उराँव |
| मेघनाद पर्व | गोंड |
याद रखने योग्य बिंदु
- छत्तीसगढ़ में 42 प्रकार की जनजातियाँ हैं, जो 161 उपसमूहों में बँटी हैं।
- गोंड राज्य की सबसे बड़ी जनजाति हैं: 56% जनजातीय जनसंख्या, 17.57% कुल जनसंख्या।
- गोंड की 41 उपजातियाँ और 30 शाखाएँ बताई गई हैं; राजगोंड सबसे श्रेष्ठ।
- गोंड का मेघनाद पर्व; नवाखाई को पण्डुम कहते हैं।
- लिंगोपेन को गोटुल का संस्थापक माना गया है।
- कंवर स्वयं को कौरवों का वंशज मानते हैं; उनका मुख्य कार्य सैन्य कार्य।
- कंवर का बार नृत्य; सात उपजातियों की पंचायत सतगड़इयाँ।
- उराँव: युवागृह धुमकुरिया, बोली कुरूख/कुड़ुख, पोशाक करेया।
- उराँव का सरहुल पर्व साल वृक्ष के नीचे; देवी सरना देवी।
- मुरिया का युवागृह गोटुल; बोली कोईतुर; पूस कोलांग केवल पुरुषों का नृत्य।
- मोहरिया = शहनाई बजाने वाला; गायता = प्रमुख पुजारी।
- माड़िया की खेती पेद्दा; पेय सल्फी; गौर नृत्य को एल्विन ने विश्व का सबसे सुंदर नृत्य कहा।
- हनालगट्टा = माड़िया स्मृति स्तंभ; कूटेह संस्कार में मृतात्मा को पूजा कक्ष के "अनाल कुंडा" में लाया जाता है।
- बस्तर अंचल की संपर्क बोली हल्बी है।
- एल्विन की पुस्तकें: द मुड़िया एण्ड देयर घोटुल; द गौर।
स्मरण सूत्र
- "गोंड-गोंडी, उराँव-कुरूख" - बोलियाँ नाम से ही जुड़ी हैं।
- युवागृह: "उराँव - धुमकुरिया (ध), मुरिया - गोटुल (गो)", और गोंडों में गोटुल का संस्थापक लिंगोपेन।
- एल्विन की दो पुस्तकें: "मुड़िया-घोटुल" और "गौर (माड़िया)" - "मु-घो, मा-गौ"।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
- सबसे बड़ी जनजाति (गोंड) - पूल में कई बार, अलग-अलग शब्दों में मिली।
- बोली-जनजाति का मिलान: कुड़ुख - उराँव; संपर्क बोली - हल्बी (बस्तर)।
- युवागृह का नाम: धुमकुरिया, गोटुल; विकल्पों में मुरिया, माड़िया दोनों हों तो पुस्तक के अनुसार दोनों में गोटुल है, इसलिए ऐसे प्रश्न अस्पष्ट माने गए।
- नृत्य से जनजाति (सरहुल-उराँव, मांदरी-मुरिया, ककसार-मुरिया) और पर्व से जनजाति (नवाखाई पण्डुम - गोंड)।
- पोशाक और देवता: करेया - उराँव; सगराखंड - कंवर।
स्वयं जाँचें
- छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी जनजाति कौन-सी है? उत्तर: गोंड।
- उराँव का युवागृह क्या कहलाता है? उत्तर: धुमकुरिया।
- कंवर जनजाति का मुख्य पारंपरिक कार्य क्या है? उत्तर: सैन्य कार्य।
- माड़िया की कृषि पद्धति का नाम बताइए। उत्तर: पेद्दा खेती।
- बस्तर अंचल की संपर्क बोली कौन-सी है? उत्तर: हल्बी।
अभ्यास प्रश्न
“मेघनाद पर्व” से संबंधित छत्तीसगढ़ की कौन-सी जनजाति (CG Tribe) है ?
- (A) गोंड
- (B) बैगा
- (C) अबुझमारिया
- (D) दोरला
छत्तीसगढ़ में किस जनजाति में ‘‘सरहुल‘‘ लोकनृत्य प्रचलित है ?
- (A) परधान
- (B) बैगा
- (C) कोरवा
- (D) उरांव
उरांव जनजाति के सदस्य सरहुल पुजा के लिये एकत्र होते हैं-
- (A) साल वृक्ष के नीचे
- (B) किसी पहाड़ी पर
- (C) शीशम वृक्ष के नीचे
- (D) तालाब के पास
“कुडुख’ बोली कौन बोलते हैं ?
- (A) कमार
- (B) कोल
- (C) उरांव
- (D) गोण्ड
घुमकोरिया किस जनजाति का युवागृह है?
- (A) उराँव
- (B) मुरिया
- (C) भाटिया
- (D) कमार
‘करेया’ किस जनजाति की पारम्परिक पोशाक है?
- (A) बैगा
- (B) मुड़िया
- (C) उराँव
- (D) हल्बा
छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी जनजाति है
- (A) गोण्ड
- (B) मुड़िया
- (C) उराँव
- (D) बैगा
छ. ग. में सबसे बड़ी जनजाति है
- (A) गोंड
- (B) कंवर
- (C) उराँव
- (D) ढौगा
छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक आदिवासी किस प्रजाति के हैं?
- (A) मुरिया
- (B) माड़िया
- (C) बैगा
- (D) गोंड़
नई फसल आने पर ‘नवाखानी’ किस जनजाति का पर्व-त्यौहार माना जाता है?
- (A) उराँव
- (B) कोरवा
- (C) परजा
- (D) गोंड
कंवर जनजाति का प्रमुख देवता है
- (A) अंगादेव
- (B) सरना देवी
- (C) खुड़िया रानी
- (D) खगराखण्ड
कौन सी जनजाति देश सेवा के लिए फौज में कार्य करने को परंपरागत कार्य मानती है?
- (A) कंवर
- (B) बिंझवार
- (C) भतरा
- (D) कोल
मुरिया जनजाति का प्रसिद्ध लोक नाट्य कौन सा है?
- (A) मुरियानाट
- (B) माओपाट
- (C) दहिकांदो
- (D) राई
“मांदरी नृत्य” कौन करते है?
- (A) मुरिया
- (B) कमार
- (C) भतरा
- (D) उरांव
निम्न में से कौन-सा नृत्य मुरिया जनजाति का है?
- (A) परवा
- (B) पंथी
- (C) गौर
- (D) ककसार
बस्तर अंचल की संपर्क भाषा कौन सी है ?
- (A) गोंडी
- (B) कुडुख
- (C) भतरी
- (D) हल्बी
निम्न में से कौन सी जनजाति उत्तर- पूर्वी छत्तीसगढ़ क्षेत्र में नहीं पायी जाती है?
- (A) कोरबा
- (B) उरांव
- (C) माड़िया
- (D) बिरहोर
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (A) - मेघनाद पर्व गोंड जनजाति का पर्व है।
- (D) - सरहुल नृत्य/पर्व उराँव जनजाति में प्रचलित है।
- (A) - उराँव सरहुल पूजा साल वृक्ष के नीचे करते हैं।
- (C) - कुरूख/कुड़ुख उराँव की प्रमुख बोली है।
- (A) - धुमकुरिया उराँव का युवागृह है।
- (C) - करेया उराँव की पारंपरिक पोशाक है।
- (A) - गोंड राज्य की सबसे बड़ी जनजाति हैं।
- (A) - गोंड छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी जनजाति हैं।
- (D) - राज्य में सर्वाधिक आदिवासी गोंड हैं (जनजातियों का 56%)।
- (D) - नवाखाई को गोंड जनजाति में पण्डुम कहते हैं; विकल्पों में गोंड ही पुस्तक से मेल खाता है।
- (D) - पुस्तक में कंवर का प्रमुख देवता "सगराखंड" लिखा है; विकल्प (D) "खगराखण्ड" उसी देवता का भिन्न रूप है, बाकी विकल्प अन्य जनजातियों/देवताओं के हैं।
- (A) - कंवर जनजाति का मुख्य कार्य सैन्य कार्य बताया गया है।
- (B) - माओपाटा मुरिया नृत्य सूची में है।
- (A) - मांदरी नृत्य मुरिया जनजाति की नृत्य सूची में है।
- (D) - ककसार मुरिया के नृत्यों की सूची में है; बाकी विकल्प उसमें नहीं हैं।
- (D) - बस्तर अंचल की संपर्क बोली हल्बी है।
- (C) - माड़िया दक्षिण (बस्तर) क्षेत्र में रहते हैं, जबकि कोरबा, उराँव, बिरहोर उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की जनजातियाँ हैं।