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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 4
जनजाति विकास प्राधिकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTG) एवं अभिकरण

जनजाति विकास प्राधिकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTG) एवं अभिकरण

यह अध्याय राज्य में जनजातियों के विकास के लिए बनी संस्थाओं का है: नए आदिवासी विकास प्राधिकरण, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए केंद्र और राज्य के अभिकरण, अबूझमाड़ विकास अभिकरण और जनजातीय विकास के पंचशील सिद्धांत।

इसमें सबसे अधिक पूछे जाने वाले तत्व हैं: 27 फरवरी 2019, मुख्यालय-संभाग की जोड़ियाँ, PVTG के मापदंड, 5+2 का विभाजन, जनगणना का क्रम और साक्षरता, और पंचशील का स्थान-वर्ष-व्यक्ति।

अनुसूचित जनजाति विकास प्राधिकरण

राज्य शासन ने 27 फरवरी 2019 को पहले से बने बस्तर/दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण (मई 2004) और सरगुजा/उत्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण (मई 2004) को समाप्त किया और नए तीन आदिवासी विकास प्राधिकरण बनाए, साथ ही क्षेत्र का पुनर्गठन किया।

प्राधिकरणगठनमुख्यालयसचिवविस्तार
बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण27 फरवरी 2019जगदलपुरआयुक्त, बस्तर संभागउत्तर बस्तर कांकेर, कोण्डागांव, बस्तर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर
सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण27 फरवरी 2019अम्बिकापुरआयुक्त, सरगुजा संभागकोरिया (मनेंद्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी सहित), सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज
मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण27 फरवरी 2019रायपुरआयुक्त, रायपुर संभागबिलासपुर संभाग: कोरबा (सम्पूर्ण), गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (सम्पूर्ण), मुंगेली, बिलासपुर, रायगढ़ के आंशिक क्षेत्र तथा सक्ती जिले के उपयोजना क्षेत्र में सम्मिलित 46 ग्राम। रायपुर संभाग: बलौदाबाजार, महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी के आंशिक क्षेत्र। दुर्ग संभाग: मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (सम्पूर्ण) एवं बालोद, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिलों सहित, कबीरधाम के आंशिक क्षेत्र
प्राधिकरणस्थापनामुख्यालयकार्यक्षेत्र
बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण27 फरवरी 2019जगदलपुरबस्तर संभाग
सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण27 फरवरी 2019अम्बिकापुरसरगुजा संभाग
मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण27 फरवरी 2019रायपुरबिलासपुर + रायपुर + दुर्ग संभाग
अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण26 अगस्त 2020रायपुरसम्पूर्ण छत्तीसगढ़

अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण

यह प्राधिकरण 26 अगस्त 2020 को गठित हुआ, मुख्यालय रायपुर है और क्षेत्र सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ है। इसके अंतर्गत राज्य शासन द्वारा 25 प्रतिशत तक अनुसूचित जाति जनसंख्या बाहुल्य क्षेत्रों में भी आर्थिक एवं सामाजिक विकास के कार्य स्वीकृत किए जाते हैं।

विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG): अर्थ, आरंभ, मापदंड

जो जनजाति समूह अन्य जनजातियों की तुलना में अधिक पिछड़े हैं या जनजाति समाज की मुख्य धारा से बहुत दूर हैं, उन्हें विशेष पिछड़ी जनजाति कहा जाता है। यह श्रेणी 1973 में ढेबर आयोग की अनुशंसा पर शुरू हुई। देश के 75 जनजातीय समुदाय इस श्रेणी में हैं, जो 18 राज्यों तथा अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह में निवास करते हैं।

बिंदुविवरण
प्रारंभ1973 (ढेबर आयोग की अनुशंसा पर)
नामकरण2006 में भारत सरकार ने आदिम जनजाति समूह (PTG) का नाम विशिष्टतः असुरक्षित जनजाति समूह (PVTG) कर दिया
राज्य में संख्या7 (5 केंद्र सरकार द्वारा + 2 राज्य सरकार द्वारा)

मापदंड (5वीं पंचवर्षीय योजना के तहत), चार आधार:

क्र.मापदंड
1अत्यंत कम साक्षरता दर या साक्षरता 2% या 2% से कम
2घटती जनसंख्या या स्टेटिक जनसंख्या
3जीवन पद्धति: आदिम जीवन पद्धति अपना रहे हों
4अत्यंत पिछड़ी आर्थिक स्थिति (कृषि से पूर्व की पद्धति जैसे शिकार, वनोपज संग्रहण आदि)

राज्य की सात विशेष पिछड़ी जनजातियाँ

घोषित करने वाली सरकारसंख्याजनजातियाँ
केंद्र सरकार5अबूझमाड़िया, बैगा, कमार, बिरहोर, पहाड़ी कोरवा
राज्य सरकार2भुंजिया, पण्डो

भारतीय संविधान के तहत राष्ट्रपति द्वारा छ.ग. की 5 जनजातियों को विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल किया गया है। कोरवा जनजाति की दो उपशाखाएँ हैं: पहाड़ी कोरवा (मुख्यतः पहाड़ी क्षेत्रों में) और दिहाड़ी कोरवा (मुख्यतः मैदानी क्षेत्रों में); इनमें से केवल पहाड़ी कोरवा विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल है।

जनगणना: जनसंख्या और साक्षरता

जनजातिजनसंख्या
बैगा88,317 (सर्वाधिक)
पहाड़ी कोरवा44,026
कमार26,622
अबूझमाड़िया23,330
बिरहोर3,490
पण्डो (राज्य)31,814
भुंजिया (राज्य)10,603
जनजातिसाक्षरता
कमार47.7%
बैगा40.6%
बिरहोर39%
पहाड़ी कोरवा22.02%
अबूझमाड़िया19.25%

क्रम को इस तरह पढ़ें: केंद्र की पाँच में जनसंख्या सबसे अधिक बैगा की और सबसे कम बिरहोर की है, जबकि साक्षरता सबसे अधिक कमार की और सबसे कम अबूझमाड़िया की है। राज्य द्वारा घोषित पण्डो की जनसंख्या (31,814) पहाड़ी कोरवा से कम पर कमार से अधिक है।

विकास अभिकरण

केन्द्रीय अभिकरण (6):

क्र.अभिकरणमुख्यालय
1विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा विकास अभिकरणकवर्धा
2विशेष पिछड़ी जनजाति अबूझमाड़िया विकास अभिकरणनारायणपुर
3विशेष पिछड़ी जनजाति कमार विकास अभिकरणगरियाबंद
4विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा विकास अभिकरणअम्बिकापुर
5विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर विकास अभिकरणजशपुर
6विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा विकास अभिकरण (नवीनतम पुनर्गठित)गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही

राजकीय अभिकरण (2): राज्य शासन ने भुंजिया और पण्डो को विशेष कमजोर जनजाति के रूप में मान्यता दी है और उनके लिए अभिकरण बनाए हैं।

अभिकरणस्थापनामुख्यालय
पण्डो विकास अभिकरण2002-2003सूरजपुर
भुंजिया विकास अभिकरण2002-2003गरियाबंद

अबूझमाड़ विकास अभिकरण एवं पंचशील सिद्धांत

अबूझमाड़ विकास अभिकरण का गठन 1978-79 (13 जून 1978) में हुआ, उद्देश्य अबूझमाड़ में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर सुधारना था।

जनजातियों के विकास से संबंधित पंचशील सिद्धांत 1955 में जगदलपुर (बस्तर) में पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रतिपादित किए गए। पाँच बिंदु:

  • लोगों को उनकी योग्यता के अनुसार इच्छिक विकास हेतु प्रोत्साहित करना
  • जल, जमीन व जंगल पर जनजातियों के सनातनी हक का सम्मान करना
  • विकास और प्रशासन को प्रशिक्षित करना
  • आदिवासी क्षेत्रों में अति प्रशासन से बचना
  • अंतिम परिणाम के रूप में आँकड़ों और लागत की रकमों की जगह व्यक्ति के चारित्रिक विकास का लेखा-जोखा रखना

तुलना एवं संबंध

बिंदुकेंद्र की PVTGराज्य की PVTG
संख्या52
नामअबूझमाड़िया, बैगा, कमार, बिरहोर, पहाड़ी कोरवाभुंजिया, पण्डो
अभिकरण6 अभिकरण2 (स्थापना 2002-03)
मुख्यालयकवर्धा, नारायणपुर, गरियाबंद, अम्बिकापुर, जशपुर, GPMसूरजपुर, गरियाबंद
संस्थावर्ष/तारीखस्थान
आदिवासी विकास प्राधिकरण (3)27 फरवरी 2019जगदलपुर, अम्बिकापुर, रायपुर
अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण26 अगस्त 2020रायपुर
अबूझमाड़ विकास अभिकरण13 जून 1978अबूझमाड़
पंचशील सिद्धांत1955जगदलपुर

याद रखने योग्य बिंदु

  • PVTG की शुरुआत 1973 में ढेबर आयोग की अनुशंसा पर।
  • PTG से PVTG नामकरण 2006 में।
  • देश में 75 PVTG, 18 राज्य + अण्डमान-निकोबार।
  • राज्य में 7 PVTG: केंद्र 5, राज्य 2।
  • केंद्र की 5: अबूझमाड़िया, बैगा, कमार, बिरहोर, पहाड़ी कोरवा।
  • राज्य की 2: भुंजिया, पण्डो।
  • साक्षरता का मापदंड 2% या उससे कम; जनसंख्या घटती या स्थिर।
  • बैगा की जनसंख्या सबसे अधिक (88,317); बिरहोर की सबसे कम (3,490)।
  • साक्षरता में कमार सबसे आगे (47.7%), अबूझमाड़िया सबसे पीछे (19.25%)।
  • पहाड़ी कोरवा PVTG है, दिहाड़ी कोरवा नहीं।
  • तीन आदिवासी विकास प्राधिकरण 27 फरवरी 2019 को बने।
  • अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण: 26 अगस्त 2020, रायपुर।
  • अबूझमाड़ विकास अभिकरण: 13 जून 1978।
  • पंचशील: 1955, जगदलपुर, पं. नेहरू।

स्मरण सूत्र

  • 'बै-अबू-क-बि-प' पाँच PVTG; 'भुं-पं' दो राज्य की।
  • 'बैगा बड़ा, बिरहोर छोटा; कमार पढ़ा, माड़िया पीछे': जनसंख्या सबसे अधिक बैगा, सबसे कम बिरहोर; साक्षरता सबसे अधिक कमार, सबसे कम अबूझमाड़िया।
  • '19-19-2': 2019 में बने तीन आदिवासी प्राधिकरण (27 फरवरी); 2020 में अनुसूचित जाति प्राधिकरण (26 अगस्त)।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

PVTG की गिनती (7 = 5 + 2) और नाम पूछे जाते हैं, अक्सर 'कौन PVTG नहीं है' रूप में; पुस्तक में इसके लिए कई पूर्व-परीक्षा संदर्भ हैं।

PVTG के मापदंड (साक्षरता, जनसंख्या, जीवन पद्धति, आर्थिक स्थिति) के प्रश्न आते हैं।

अभिकरणों और प्राधिकरणों के मुख्यालय-तिथि की जोड़ियाँ पूछी जाती हैं।

'किस संभाग की PVTG' प्रकार के प्रश्न: बस्तर संभाग की PVTG केवल अबूझमाड़िया है।

अबूझमाड़ विकास अभिकरण की स्थापना तिथि/वर्ष का प्रश्न भी संदर्भित है।

स्वयं जाँचें

  1. प्रश्न: राज्य में कितनी विशेष पिछड़ी जनजातियाँ हैं? उत्तर: 7 (5 केंद्र + 2 राज्य)।
  2. प्रश्न: PTG का नाम PVTG कब रखा गया? उत्तर: 2006 में।
  3. प्रश्न: पंचशील सिद्धांत किसने और कहाँ दिया? उत्तर: पं. जवाहरलाल नेहरू, जगदलपुर, 1955।
  4. प्रश्न: केंद्र की PVTG में साक्षरता में सबसे पीछे कौन? उत्तर: अबूझमाड़िया (19.25%)।
  5. प्रश्न: तीन आदिवासी विकास प्राधिकरण कब बने? उत्तर: 27 फरवरी 2019।

अभ्यास प्रश्न

  1. निम्नलिखित में से कौन बस्तर संभाग की विशेष पिछड़ी जनजाति है?

    • (A) बिरहोर
    • (B) पहाड़ी कोरवा
    • (C) बैगा
    • (D) अबूझमाड़िया
  2. निम्नलिखित में कौन विशेष पिछड़ी जनजातियों में शामिल नहीं है?

    • (A) अबूझमाड़िया
    • (B) कमार
    • (C) दिहारी कोरवा
    • (D) बैगा

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (D) - बिरहोर, पहाड़ी कोरवा और बैगा उत्तर/मध्य में हैं; अबूझमाड़िया का निवास बीजापुर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर के अबूझमाड़ में है।
  2. (C) - केवल पहाड़ी कोरवा PVTG है; दिहाड़ी कोरवा (मैदानी क्षेत्र) इसमें शामिल नहीं है।
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