जनजातियों के लोकवाद्य, लोकगाथाएँ एवं लोकसभा में अनुसूचित जनजाति सीटें
आदिवासी जीवन में संगीत केवल मनोरंजन नहीं, पूजा, फसल की रखवाली, विवाह और मृत्यु-संस्कार का भी हिस्सा है। पुस्तक जनजातीय लोकवाद्यों को संगीत-शास्त्र के अनुसार चार वर्गों में बाँटती है: तत् (तार वाले), वितत् या अवनद्ध (चमड़ा मढ़े), घन (धातु/लकड़ी से बने, आघात से बजने वाले) और सुषिर (फूँक से बजने वाले)।
इसी अध्याय में जनजातियों में प्रचलित लोकगाथाओं की तालिका और लोकसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की राज्यवार सूची भी है। परीक्षा में वाद्य का वर्ग, उसका उपयोग (किस नृत्य/मंदिर में) और लोकगाथा-जनजाति की जोड़ी बार-बार पूछी जाती है।
1. तत् वाद्ययंत्र
यह जनजातियों का तंतु (तार) संबंधी कलात्मक वाद्य है, जिसका उपयोग मुख्यतः पूजा-अर्चना के दौरान होता है। पुस्तक इसे तीन उप-भागों में रखती है।
| उप-भाग | विवरण |
|---|---|
| धनकुल वाद्य | निर्माण की चार चीज़ें: मिट्टी का घड़ा, सूपा, धनुष, बाँस की खपच्ची |
| किंकनी | पण्डवानी गायन में देवार जाति द्वारा प्रयुक्त वाद्य |
| अन्य वाद्य (12) | किरगिच, किनरेरी, कुंजाड, किन्दरी, किकीड़, डुभीर, दुसिर, दासाकोड़ी, तम्बुरा, चिकारा, तोहेली, रामबाजा |
2. वितत् / अवनद्ध वाद्ययंत्र
किसी मजबूत खोखले आधार पर चमड़ा मढ़कर ये बनाए जाते हैं। पुस्तक इन्हें चार प्रकारों में बाँटती है: एकमुखी, द्विमुखी, रायगढ़ी और बिरिया ढोल।
| प्रकार | वाद्य / विवरण |
|---|---|
| एकमुखी | नगाड़ा, गोगा-तासा (पुस्तक में "गोगा तासा" इसी रूप में छपा है), मुण्डा बाजा, तुड़बुड़ी बाजा, नीशान, चाँग्या-डफड़, ओझापर्रा |
| द्विमुखी | मांदर, ढोलक, मृदंग, बिरयाढोल, रायगढ़ी, तुरम, परग (अंतिम नाम की वर्तनी छपाई में अस्पष्ट है) |
| रायगढ़ी | पीतल से निर्मित, डमरू के आकार का; प्रयोग दंतेश्वरी मंदिर में पूजा के समय |
| बिरिया ढोल | मांदर का प्रतिरूप (उसी जैसा) |
ध्यान रहे कि सूची में बिरयाढोल द्विमुखी वर्ग में भी गिना गया है और अलग शीर्षक के रूप में भी आता है, तथा रायगढ़ी भी दोनों जगह है। इसलिए प्रश्न में "किस वर्ग का वाद्य" पूछा जाए तो दोनों को वितत् वर्ग में ही रखें।
3. घन वाद्ययंत्र
ये प्रायः ठोस धातु और कठोर काष्ठ से बने होते हैं और आघात देने पर ही बजते हैं।
| वाद्य | स्वरूप | प्रयोग / नृत्य |
|---|---|---|
| घंट | पीतल का एक गोलाकार यंत्र | - |
| घंटी | पीतल का गोल कटोरीनुमा यंत्र | - |
| मुयांग | गोंडी भाषा में घंटी को मुयांग कहते हैं | ककसाड़ नृत्य |
| चिटकुल | पीतल से बनी मंजीरा की आकृति का यंत्र | मांदरी नृत्य |
| झाब | घुंघरुओं का गुच्छा | - |
| तिरडुड्डी | लोहे से निर्मित वाद्य | माड़िया नाच |
अन्य घन वाद्य (9): घंटा, घुलघुला, मंजीरा, झाब, मुयांग, पिटोर्का (प्याले जैसी आकृति), दुड़का, घिनी, टिकरी।
4. सुषिर वाद्ययंत्र
ये मुँह से फूँककर बजाए जाते हैं, हवा के उतार-चढ़ाव से संगीत बदलता है।
| वाद्य | प्रयोग / विशेषता |
|---|---|
| तोड़ी | फसल रखवाली के समय |
| अकुम | फसल रखवाली के समय |
| सुलुड | बाँसुरी के समान |
| बावंसी | हल्बा-भतरी में |
| अन्य | बाँसुरी, मोहरी, मोरचंग, शंख |
दंतेश्वरी मंदिर के विशेष वाद्य: नेफ्री, करनाल, बिरकहाली। माहरा बाजा के प्रमुख वाद्य: नगाड़ा, मोहरी और तुड़बुड़ी।
जनजातियों में प्रचलित लोकगाथाएँ
| लोकगाथा | जनजाति |
|---|---|
| कुडुखखण्डी / कड़खडण्डी गाथा | उराँव |
| लिगोपेन की गाथा | मुरिया |
| नागाबैगा की गाथा | बैगा |
| लोहासुर की गाथा | अगरिया |
| जगार गाथा | हल्बा, भतरा |
| गोंडवानी गाथा | परधान, देवार |
ध्यान दें कि उराँव वाले अध्याय में यही गाथा-महाकाव्य "कड़खडण्डी" नाम से आता है और लिगोपेन का उल्लेख गोंड अध्याय में गोटुल के संस्थापक के रूप में भी है। इस तरह तीन जगहों की जानकारी आपस में जुड़ती है।
लोकसभा में अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटें
पुस्तक के अनुसार लोकसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए कुल आरक्षित सीटें 47 हैं और इसका आधार अनुच्छेद 330 है। राज्यवार वितरण इस प्रकार है।
| क्र. | राज्य / UT | सीट |
|---|---|---|
| 1 | मध्यप्रदेश | 6 |
| 2 | ओडिशा | 5 |
| 3 | झारखण्ड | 5 |
| 4 | छत्तीसगढ़ | 4 |
| 5 | महाराष्ट्र | 4 |
| 6 | गुजरात | 4 |
| 7 | राजस्थान | 3 |
| 8 | पश्चिम बंगाल | 2 |
| 9 | कर्नाटक | 2 |
| 10 | तेलंगाना | 2 |
| 11 | असम | 2 |
| 12 | मेघालय | 2 |
| 13 | आंध्रप्रदेश | 1 |
| 14 | मणिपुर | 1 |
| 15 | त्रिपुरा | 1 |
| 16 | मिजोरम | 1 |
| 17 | दादर व नगर हवेली तथा दमन-दीव | 1 |
| 18 | लक्षद्वीप | 1 |
जाँच: 6+5+5+4+4+4+3 = 31; उसके बाद पाँच राज्यों की 2-2 सीटें = 10 (कुल 41); अंत में छह इकाइयों की 1-1 सीट = 6, यानी कुल 47, जो पुस्तक की कुल संख्या से मेल खाती है।
तुलना एवं संबंध
| वर्ग | बनावट | बजाने का तरीका | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| तत् | तार / तंतु (तंतु संबंधी) | मुख्यतः पूजा-अर्चना में | धनकुल, किंकनी, तम्बुरा, चिकारा |
| वितत् | खोखले आधार पर चमड़ा | चमड़ा मढ़कर | नगाड़ा, मांदर, ढोलक, रायगढ़ी |
| घन | ठोस धातु/कठोर काष्ठ | आघात | घंट, घंटी, मुयांग, चिटकुल, झाब |
| सुषिर | फूँक से | मुँह से हवा का उतार-चढ़ाव | तोड़ी, अकुम, सुलुड, बावंसी, शंख |
| वाद्य | नृत्य / स्थान |
|---|---|
| मुयांग | ककसाड़ नृत्य |
| चिटकुल | मांदरी नृत्य |
| तिरडुड्डी | माड़िया नाच |
| रायगढ़ी | दंतेश्वरी मंदिर की पूजा |
| नेफ्री, करनाल, बिरकहाली | दंतेश्वरी मंदिर |
| तोड़ी, अकुम | फसल रखवाली |
याद रखने योग्य बिंदु
- लोकवाद्य चार वर्गों में बँटे हैं: तत्, वितत्, घन, सुषिर।
- धनकुल में मिट्टी का घड़ा, सूपा, धनुष और बाँस की खपच्ची लगती है।
- किंकनी का प्रयोग पण्डवानी गायन में देवार जाति करती है।
- रायगढ़ी पीतल की और डमरू आकार की होती है; दंतेश्वरी मंदिर की पूजा में बजती है।
- बिरिया ढोल मांदर का प्रतिरूप है।
- गोंडी में घंटी को मुयांग कहते हैं; ककसाड़ नृत्य में बजता है।
- चिटकुल मंजीरे जैसा है और मांदरी नृत्य में बजता है।
- तिरडुड्डी लोहे का वाद्य है, माड़िया नाच में।
- तोड़ी और अकुम फसल की रखवाली में बजते हैं।
- दंतेश्वरी मंदिर के विशेष वाद्य: नेफ्री, करनाल, बिरकहाली।
- कड़खडण्डी गाथा - उराँव; लिगोपेन - मुरिया; नागाबैगा - बैगा; लोहासुर - अगरिया।
- जगार गाथा - हल्बा, भतरा; गोंडवानी - परधान, देवार।
- लोकसभा में ST आरक्षित सीटें 47 हैं, आधार अनुच्छेद 330।
- छत्तीसगढ़ में ST की 4 सीटें हैं; मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 6।
स्मरण सूत्र
- "तत् = तार, वितत् = वितान (चमड़ा), घन = घात, सुषिर = साँस" - चारों की पहचान।
- गाथा-जोड़ी: "उराँव-कड़ख, मुरिया-लिगो, बैगा-नाग, अगरिया-लोहा" - नाम में ही जनजाति छिपी है।
- सीट 6-5-5-4-4-4 = "म.प्र., ओडिशा, झारखण्ड, छ.ग., महा., गुजरात" क्रम में घटते हैं।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
- वाद्य का वर्ग पूछा जाता है, जैसे तिरडुड्डी या चिटकुल किस वर्ग का है।
- किसी नृत्य/मंदिर में प्रयुक्त वाद्य का मिलान (मुयांग-ककसाड़, चिटकुल-मांदरी, रायगढ़ी-दंतेश्वरी)।
- लोकगाथा से जनजाति की जोड़ी; कड़खडण्डी और लिगोपेन के प्रश्न आम हैं।
- ST आरक्षित सीटों की कुल संख्या (47) और अनुच्छेद (330) या किसी राज्य की सीटें पूछी जाती हैं।
- प्रश्न-पूल के मेरे हिस्से में इस अध्याय के वाद्य/गाथा विषय पर कोई पुष्ट प्रश्न नहीं मिला।
स्वयं जाँचें
- धनकुल वाद्य बनाने में कौन-सी चार चीज़ें लगती हैं? उत्तर: मिट्टी का घड़ा, सूपा, धनुष, बाँस की खपच्ची।
- घंटी को गोंडी में क्या कहते हैं? उत्तर: मुयांग।
- जगार गाथा किन जनजातियों की है? उत्तर: हल्बा और भतरा।
- लोकसभा में ST की कुल आरक्षित सीटें कितनी हैं? उत्तर: 47 (अनुच्छेद 330)।
- छत्तीसगढ़ में ST की आरक्षित लोकसभा सीटें कितनी हैं? उत्तर: 4।
अभ्यास प्रश्न
इस अध्याय के विषय (शिल्प/वाद्य/सूची) पर पूल में ऐसे प्रश्न नहीं मिले जिनका उत्तर पृष्ठों से पूरी तरह पुष्ट हो सके, इसलिए यहाँ कोई प्रश्न नहीं जोड़ा गया है।