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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 18
जनजातियों के लोकवाद्य, लोकगाथाएँ एवं लोकसभा में अनुसूचित जनजाति सीटें

जनजातियों के लोकवाद्य, लोकगाथाएँ एवं लोकसभा में अनुसूचित जनजाति सीटें

आदिवासी जीवन में संगीत केवल मनोरंजन नहीं, पूजा, फसल की रखवाली, विवाह और मृत्यु-संस्कार का भी हिस्सा है। पुस्तक जनजातीय लोकवाद्यों को संगीत-शास्त्र के अनुसार चार वर्गों में बाँटती है: तत् (तार वाले), वितत् या अवनद्ध (चमड़ा मढ़े), घन (धातु/लकड़ी से बने, आघात से बजने वाले) और सुषिर (फूँक से बजने वाले)।

इसी अध्याय में जनजातियों में प्रचलित लोकगाथाओं की तालिका और लोकसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की राज्यवार सूची भी है। परीक्षा में वाद्य का वर्ग, उसका उपयोग (किस नृत्य/मंदिर में) और लोकगाथा-जनजाति की जोड़ी बार-बार पूछी जाती है।

1. तत् वाद्ययंत्र

यह जनजातियों का तंतु (तार) संबंधी कलात्मक वाद्य है, जिसका उपयोग मुख्यतः पूजा-अर्चना के दौरान होता है। पुस्तक इसे तीन उप-भागों में रखती है।

उप-भागविवरण
धनकुल वाद्यनिर्माण की चार चीज़ें: मिट्टी का घड़ा, सूपा, धनुष, बाँस की खपच्ची
किंकनीपण्डवानी गायन में देवार जाति द्वारा प्रयुक्त वाद्य
अन्य वाद्य (12)किरगिच, किनरेरी, कुंजाड, किन्दरी, किकीड़, डुभीर, दुसिर, दासाकोड़ी, तम्बुरा, चिकारा, तोहेली, रामबाजा

2. वितत् / अवनद्ध वाद्ययंत्र

किसी मजबूत खोखले आधार पर चमड़ा मढ़कर ये बनाए जाते हैं। पुस्तक इन्हें चार प्रकारों में बाँटती है: एकमुखी, द्विमुखी, रायगढ़ी और बिरिया ढोल।

प्रकारवाद्य / विवरण
एकमुखीनगाड़ा, गोगा-तासा (पुस्तक में "गोगा तासा" इसी रूप में छपा है), मुण्डा बाजा, तुड़बुड़ी बाजा, नीशान, चाँग्या-डफड़, ओझापर्रा
द्विमुखीमांदर, ढोलक, मृदंग, बिरयाढोल, रायगढ़ी, तुरम, परग (अंतिम नाम की वर्तनी छपाई में अस्पष्ट है)
रायगढ़ीपीतल से निर्मित, डमरू के आकार का; प्रयोग दंतेश्वरी मंदिर में पूजा के समय
बिरिया ढोलमांदर का प्रतिरूप (उसी जैसा)

ध्यान रहे कि सूची में बिरयाढोल द्विमुखी वर्ग में भी गिना गया है और अलग शीर्षक के रूप में भी आता है, तथा रायगढ़ी भी दोनों जगह है। इसलिए प्रश्न में "किस वर्ग का वाद्य" पूछा जाए तो दोनों को वितत् वर्ग में ही रखें।

3. घन वाद्ययंत्र

ये प्रायः ठोस धातु और कठोर काष्ठ से बने होते हैं और आघात देने पर ही बजते हैं।

वाद्यस्वरूपप्रयोग / नृत्य
घंटपीतल का एक गोलाकार यंत्र-
घंटीपीतल का गोल कटोरीनुमा यंत्र-
मुयांगगोंडी भाषा में घंटी को मुयांग कहते हैंककसाड़ नृत्य
चिटकुलपीतल से बनी मंजीरा की आकृति का यंत्रमांदरी नृत्य
झाबघुंघरुओं का गुच्छा-
तिरडुड्डीलोहे से निर्मित वाद्यमाड़िया नाच

अन्य घन वाद्य (9): घंटा, घुलघुला, मंजीरा, झाब, मुयांग, पिटोर्का (प्याले जैसी आकृति), दुड़का, घिनी, टिकरी।

4. सुषिर वाद्ययंत्र

ये मुँह से फूँककर बजाए जाते हैं, हवा के उतार-चढ़ाव से संगीत बदलता है।

वाद्यप्रयोग / विशेषता
तोड़ीफसल रखवाली के समय
अकुमफसल रखवाली के समय
सुलुडबाँसुरी के समान
बावंसीहल्बा-भतरी में
अन्यबाँसुरी, मोहरी, मोरचंग, शंख

दंतेश्वरी मंदिर के विशेष वाद्य: नेफ्री, करनाल, बिरकहाली। माहरा बाजा के प्रमुख वाद्य: नगाड़ा, मोहरी और तुड़बुड़ी।

जनजातियों में प्रचलित लोकगाथाएँ

लोकगाथाजनजाति
कुडुखखण्डी / कड़खडण्डी गाथाउराँव
लिगोपेन की गाथामुरिया
नागाबैगा की गाथाबैगा
लोहासुर की गाथाअगरिया
जगार गाथाहल्बा, भतरा
गोंडवानी गाथापरधान, देवार

ध्यान दें कि उराँव वाले अध्याय में यही गाथा-महाकाव्य "कड़खडण्डी" नाम से आता है और लिगोपेन का उल्लेख गोंड अध्याय में गोटुल के संस्थापक के रूप में भी है। इस तरह तीन जगहों की जानकारी आपस में जुड़ती है।

लोकसभा में अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटें

पुस्तक के अनुसार लोकसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए कुल आरक्षित सीटें 47 हैं और इसका आधार अनुच्छेद 330 है। राज्यवार वितरण इस प्रकार है।

क्र.राज्य / UTसीट
1मध्यप्रदेश6
2ओडिशा5
3झारखण्ड5
4छत्तीसगढ़4
5महाराष्ट्र4
6गुजरात4
7राजस्थान3
8पश्चिम बंगाल2
9कर्नाटक2
10तेलंगाना2
11असम2
12मेघालय2
13आंध्रप्रदेश1
14मणिपुर1
15त्रिपुरा1
16मिजोरम1
17दादर व नगर हवेली तथा दमन-दीव1
18लक्षद्वीप1

जाँच: 6+5+5+4+4+4+3 = 31; उसके बाद पाँच राज्यों की 2-2 सीटें = 10 (कुल 41); अंत में छह इकाइयों की 1-1 सीट = 6, यानी कुल 47, जो पुस्तक की कुल संख्या से मेल खाती है।

तुलना एवं संबंध

वर्गबनावटबजाने का तरीकाउदाहरण
तत्तार / तंतु (तंतु संबंधी)मुख्यतः पूजा-अर्चना मेंधनकुल, किंकनी, तम्बुरा, चिकारा
वितत्खोखले आधार पर चमड़ाचमड़ा मढ़करनगाड़ा, मांदर, ढोलक, रायगढ़ी
घनठोस धातु/कठोर काष्ठआघातघंट, घंटी, मुयांग, चिटकुल, झाब
सुषिरफूँक सेमुँह से हवा का उतार-चढ़ावतोड़ी, अकुम, सुलुड, बावंसी, शंख
वाद्यनृत्य / स्थान
मुयांगककसाड़ नृत्य
चिटकुलमांदरी नृत्य
तिरडुड्डीमाड़िया नाच
रायगढ़ीदंतेश्वरी मंदिर की पूजा
नेफ्री, करनाल, बिरकहालीदंतेश्वरी मंदिर
तोड़ी, अकुमफसल रखवाली

याद रखने योग्य बिंदु

  • लोकवाद्य चार वर्गों में बँटे हैं: तत्, वितत्, घन, सुषिर।
  • धनकुल में मिट्टी का घड़ा, सूपा, धनुष और बाँस की खपच्ची लगती है।
  • किंकनी का प्रयोग पण्डवानी गायन में देवार जाति करती है।
  • रायगढ़ी पीतल की और डमरू आकार की होती है; दंतेश्वरी मंदिर की पूजा में बजती है।
  • बिरिया ढोल मांदर का प्रतिरूप है।
  • गोंडी में घंटी को मुयांग कहते हैं; ककसाड़ नृत्य में बजता है।
  • चिटकुल मंजीरे जैसा है और मांदरी नृत्य में बजता है।
  • तिरडुड्डी लोहे का वाद्य है, माड़िया नाच में।
  • तोड़ी और अकुम फसल की रखवाली में बजते हैं।
  • दंतेश्वरी मंदिर के विशेष वाद्य: नेफ्री, करनाल, बिरकहाली।
  • कड़खडण्डी गाथा - उराँव; लिगोपेन - मुरिया; नागाबैगा - बैगा; लोहासुर - अगरिया।
  • जगार गाथा - हल्बा, भतरा; गोंडवानी - परधान, देवार।
  • लोकसभा में ST आरक्षित सीटें 47 हैं, आधार अनुच्छेद 330।
  • छत्तीसगढ़ में ST की 4 सीटें हैं; मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 6।

स्मरण सूत्र

  • "तत् = तार, वितत् = वितान (चमड़ा), घन = घात, सुषिर = साँस" - चारों की पहचान।
  • गाथा-जोड़ी: "उराँव-कड़ख, मुरिया-लिगो, बैगा-नाग, अगरिया-लोहा" - नाम में ही जनजाति छिपी है।
  • सीट 6-5-5-4-4-4 = "म.प्र., ओडिशा, झारखण्ड, छ.ग., महा., गुजरात" क्रम में घटते हैं।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

  • वाद्य का वर्ग पूछा जाता है, जैसे तिरडुड्डी या चिटकुल किस वर्ग का है।
  • किसी नृत्य/मंदिर में प्रयुक्त वाद्य का मिलान (मुयांग-ककसाड़, चिटकुल-मांदरी, रायगढ़ी-दंतेश्वरी)।
  • लोकगाथा से जनजाति की जोड़ी; कड़खडण्डी और लिगोपेन के प्रश्न आम हैं।
  • ST आरक्षित सीटों की कुल संख्या (47) और अनुच्छेद (330) या किसी राज्य की सीटें पूछी जाती हैं।
  • प्रश्न-पूल के मेरे हिस्से में इस अध्याय के वाद्य/गाथा विषय पर कोई पुष्ट प्रश्न नहीं मिला।

स्वयं जाँचें

  1. धनकुल वाद्य बनाने में कौन-सी चार चीज़ें लगती हैं? उत्तर: मिट्टी का घड़ा, सूपा, धनुष, बाँस की खपच्ची।
  2. घंटी को गोंडी में क्या कहते हैं? उत्तर: मुयांग।
  3. जगार गाथा किन जनजातियों की है? उत्तर: हल्बा और भतरा।
  4. लोकसभा में ST की कुल आरक्षित सीटें कितनी हैं? उत्तर: 47 (अनुच्छेद 330)।
  5. छत्तीसगढ़ में ST की आरक्षित लोकसभा सीटें कितनी हैं? उत्तर: 4।

अभ्यास प्रश्न

इस अध्याय के विषय (शिल्प/वाद्य/सूची) पर पूल में ऐसे प्रश्न नहीं मिले जिनका उत्तर पृष्ठों से पूरी तरह पुष्ट हो सके, इसलिए यहाँ कोई प्रश्न नहीं जोड़ा गया है।

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