जनजाति विकास प्रकोष्ठ एवं प्रमुख आदिवासी व्यक्तित्व
छत्तीसगढ़ की जनजातियों में कुछ समूह बहुत कमज़ोर स्थिति में हैं। उनके लिए अलग से प्राधिकरण, अभिकरण और प्रकोष्ठ बनाए गए हैं। यह अध्याय दो हिस्सों में है। पहले हिस्से में दस विकास प्रकोष्ठों की सूची और उनके जिले हैं। दूसरे हिस्से में उन ग्यारह आदिवासी व्यक्तित्वों की तालिका है जिनके बारे में परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है, जैसे वीरनारायण सिंह, गुण्डाधुर, गेंदसिंह, गहिरा गुरु, चेंदरू मंडावी, महेन्द्र कर्मा, बिरसा मुण्डा और कंगला माँझी। सीजीपीएससी, व्यापम और पटवारी परीक्षाओं में "कौन किस जनजाति का था" और "किस आंदोलन का नेता था" जैसे सीधे प्रश्न आते हैं, इसलिए हर पंक्ति ध्यान से याद करें।
विशेष रूप से कमज़ोर जनजातियों के लिए प्रकोष्ठ
स्रोत के अनुसार अनुसूचित जनजाति प्रशासन, प्राधिकरण, अभिकरण और प्रकोष्ठ विशेष रूप से कमज़ोर जनजातियों के विकास के लिए गठित किए गए हैं। इन प्रकोष्ठों और अभिकरणों के माध्यम से भारत सरकार द्वारा स्वीकृत विकास योजनाओं का संचालन छत्तीसगढ़ शासन करता है। कुल दस प्रकोष्ठ बताए गए हैं। जनजाति के नाम के आधार पर इन्हें चार समूहों में समझना आसान रहता है: कमार (3), बैगा (3), बिरहोर (2) और पहाड़ी कोरवा (1 अलग तथा 1 बिरहोर के साथ जुड़ा हुआ)।
| क्र. | प्रकोष्ठ | मुख्यालय / स्थान |
|---|---|---|
| 1 | कमार विकास प्रकोष्ठ | नगरी |
| 2 | कमार विकास प्रकोष्ठ | भानुप्रतापपुर |
| 3 | कमार विकास प्रकोष्ठ | महासमुंद |
| 4 | बैगा विकास प्रकोष्ठ | बैकुंठपुर |
| 5 | बैगा विकास प्रकोष्ठ | राजनांदगांव |
| 6 | बैगा विकास प्रकोष्ठ | मुंगेली |
| 7 | बिरहोर विकास प्रकोष्ठ | धरमजयगढ़ |
| 8 | पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर विकास प्रकोष्ठ | कोरबा |
| 9 | पहाड़ी कोरवा विकास प्रकोष्ठ | बलरामपुर |
| 10 | बिरहोर विकास प्रकोष्ठ | बिलासपुर (नवीनतम गठित) |
पृष्ठ के नक्शे में भी यही जिले चिह्नित हैं: कोरिया और बलरामपुर के भाग में पहाड़ी कोरवा, कोरबा और धरमजयगढ़ के पास पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर, बिलासपुर के पास बिरहोर, मुंगेली और राजनांदगांव के पास बैगा तथा नगरी, महासमुंद और भानुप्रतापपुर के पास कमार प्रकोष्ठ। ध्यान दें कि नक्शे में बैगा प्रकोष्ठ की रेखा कोरिया की ओर भी जाती है, जबकि सूची में बैकुंठपुर लिखा है; बैकुंठपुर कोरिया क्षेत्र में ही आता है।
पाँचवीं अनुसूची वाले अध्याय की सारणी में विशेष रूप से कमज़ोर जनजाति समूह के अभिकरण 8 (6 + 2) और प्रकोष्ठ 10 बताए गए हैं। कोष्ठक में पण्डो और भुंजिया विकास अभिकरणों का उल्लेख है, अर्थात 8 में से 2 अभिकरण इन दो जनजातियों के हैं।
प्रमुख आदिवासी व्यक्तित्व: तालिका
| क्र. | व्यक्तित्व | जनजाति | विशेष |
|---|---|---|---|
| 1 | शहीद वीरनारायण सिंह | बिंझवार | सोनाखान विद्रोह (1856-57) के प्रमुख नेता |
| 2 | गुण्डाधुर | धुरवा | भूमकाल विद्रोह (1910) के नेता |
| 3 | गेंदसिंह | अबूझमाड़िया | परलकोट विद्रोह (1824-25) के नेतृत्वकर्ता |
| 4 | संत गहिरागुरू | कंवर | जन्म गहिरा ग्राम (रायगढ़) 1905; मूल नाम संत रामेश्वर दास; संस्थापक: सनातन धर्म संत समाज (1943) |
| 5 | चेंदरू मंडावी | माड़िया | उपनाम टाइगर किड, बस्तर के मोगली; निवासी गड़बेगाल (नारायणपुर) |
| 6 | महेन्द्र कर्मा | माड़िया | सलवाजुडुम आंदोलन (2005 की शुरुआत में) |
| 7 | जतरा भगत | उरांव | ताना भगत आंदोलन (1914) के कुशल नेतृत्व के लिए चर्चित |
| 8 | रानी दुर्गावती | गोंड | गोंडवाना क्षेत्र की कुशल महिला शासक |
| 9 | बिरसा मुण्डा | मुण्डा | बिरसा मुण्डा आंदोलन (1895); छोटा नागपुर क्षेत्र में विद्रोह के नायक |
| 10 | कंगला माँझी | कोयतुर | मूल नाम हीरा सिंहदेव कांगे; निवासी तेलावट ग्राम (कांकेर जिला) |
| 11 | डॉ. भंवर सिंह पोर्ते | गोंड | जन्म 1943; ग्राम बदरोड़ी, मरवाही (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) |
विद्रोह और आंदोलन से जुड़े नेता
तालिका में तीन विद्रोह और तीन आंदोलन आते हैं। पहले तीन नेताओं को उनके विद्रोह, वर्ष और जनजाति के साथ जोड़कर याद करें।
- वीरनारायण सिंह बिंझवार जनजाति के थे और सोनाखान विद्रोह (1856-57) के प्रमुख नेता के रूप में दर्ज हैं। उन्हें शहीद कहा जाता है।
- गुण्डाधुर धुरवा जनजाति के थे। उन्होंने 1910 के भूमकाल विद्रोह का नेतृत्व किया।
- गेंदसिंह अबूझमाड़िया जनजाति के थे और परलकोट विद्रोह (1824-25) के नेतृत्वकर्ता थे।
- जतरा भगत उरांव जनजाति के थे। ताना भगत आंदोलन (1914) के नेतृत्व के लिए उन्हें जाना जाता है।
- बिरसा मुण्डा ने 1895 के आंदोलन का नेतृत्व किया। स्रोत के अनुसार वे छोटा नागपुर क्षेत्र में विद्रोह के नायक थे।
- महेन्द्र कर्मा से सलवाजुडुम जुड़ा है। यह आंदोलन 2005 की शुरुआत में हुआ और इसका अर्थ "शांति की ओर लौटो" बताया गया है।
संत गहिरागुरू
संत गहिरागुरू कंवर जनजाति के थे। उनका जन्म 1905 में गहिरा ग्राम (रायगढ़) में हुआ। उनका मूल नाम संत रामेश्वर दास बताया गया है। उन्होंने 1943 में सनातन धर्म संत समाज की स्थापना की। उनका आश्रम कैलाश गुफा या गहिरा गुरु गुफा कहलाता है। यह जशपुर के सामरबार में है। आश्रम कठोर पहाड़ी को काटकर बनाया गया है। यहाँ संस्कृत पाठशाला है और शिव-पार्वती का मंदिर भी है। पहचान के लिए याद रखें: नाम रामेश्वर दास, समाज 1943, स्थान जशपुर-सामरबार।
चेंदरू मंडावी: बस्तर के मोगली
चेंदरू मंडावी माड़िया जनजाति के थे और गड़बेगाल (नारायणपुर) के निवासी थे। उन्हें "टाइगर किड" और बस्तर का मोगली कहा गया। उन्हें बस्तराँचल से हॉलीवुड का पहला हीरो भी बताया गया है। मोगली के बाघ का नाम टेम्बू था। फिल्म का नाम "द जंगल सागा" है और इसके निर्देशक आर्ने सक्सडोर्फ थे। उनकी पुस्तक "बॉय एण्ड द टाइगर" है। लंबी बीमारी के बाद 2013 में उनका निधन हुआ।
महेन्द्र कर्मा
महेन्द्र कर्मा भी माड़िया जनजाति के थे। सलवाजुडुम आंदोलन 2005 की शुरुआत में हुआ। वे 2004 से 2008 तक विपक्ष के नेता रहे। 2000 से 2004 तक वे जोगी मंत्रिमंडल में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री थे। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में वे शहीद हुए।
कंगला माँझी और डॉ. भंवर सिंह पोर्ते
कंगला माँझी कोयतुर बताए गए हैं। उनका मूल नाम हीरा सिंहदेव कांगे था और वे कांकेर जिले के तेलावट ग्राम के निवासी थे। उनके दो विवाह दर्ज हैं: बचपन में बिरझा देवी से और 1965 में राजमाता फूलवादेवी कांगे से। डॉ. भंवर सिंह पोर्ते गोंड जनजाति के थे। उनका जन्म 1943 में बदरोड़ी गाँव, मरवाही (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) में हुआ। उन्होंने अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की स्थापना की। आदिवासियों के विकास और उत्थान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उनके नाम पर राज्य अलंकरण पुरस्कार दिया जाता है।
तुलना एवं संबंध
| व्यक्तित्व | जनजाति | आंदोलन / पहचान | वर्ष |
|---|---|---|---|
| वीरनारायण सिंह | बिंझवार | सोनाखान विद्रोह | 1856-57 |
| गुण्डाधुर | धुरवा | भूमकाल विद्रोह | 1910 |
| गेंदसिंह | अबूझमाड़िया | परलकोट विद्रोह | 1824-25 |
| जतरा भगत | उरांव | ताना भगत आंदोलन | 1914 |
| बिरसा मुण्डा | मुण्डा | बिरसा मुण्डा आंदोलन | 1895 |
| महेन्द्र कर्मा | माड़िया | सलवाजुडुम | 2005 |
| जनजाति | प्रकोष्ठ | जिले |
|---|---|---|
| कमार | कमार विकास प्रकोष्ठ (3) | नगरी, भानुप्रतापपुर, महासमुंद |
| बैगा | बैगा विकास प्रकोष्ठ (3) | बैकुंठपुर, राजनांदगांव, मुंगेली |
| बिरहोर | बिरहोर विकास प्रकोष्ठ (2 + 1 संयुक्त) | धरमजयगढ़, बिलासपुर; कोरबा (कोरवा के साथ) |
| पहाड़ी कोरवा | पहाड़ी कोरवा विकास प्रकोष्ठ (1 + 1 संयुक्त) | बलरामपुर; कोरबा (बिरहोर के साथ) |
याद रखने योग्य बिंदु
- विकास प्रकोष्ठ कुल 10 हैं; नवीनतम प्रकोष्ठ बिलासपुर का बिरहोर विकास प्रकोष्ठ है।
- कमार प्रकोष्ठ नगरी, भानुप्रतापपुर और महासमुंद में हैं।
- बैगा प्रकोष्ठ बैकुंठपुर, राजनांदगांव और मुंगेली में हैं।
- कोरबा में पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर का संयुक्त प्रकोष्ठ है।
- वीरनारायण सिंह: बिंझवार, सोनाखान, 1856-57।
- गुण्डाधुर: धुरवा, भूमकाल, 1910।
- गेंदसिंह: अबूझमाड़िया, परलकोट, 1824-25।
- गहिरागुरू: कंवर, मूल नाम रामेश्वर दास, संस्था 1943।
- चेंदरू मंडावी: माड़िया, गड़बेगाल (नारायणपुर), टाइगर किड।
- महेन्द्र कर्मा: सलवाजुडुम, 2005; निधन 25 मई 2013 झीरम घाटी।
- जतरा भगत: उरांव, ताना भगत, 1914।
- बिरसा मुण्डा: 1895, छोटा नागपुर।
- कंगला माँझी का मूल नाम हीरा सिंहदेव कांगे; निवास तेलावट (कांकेर)।
- डॉ. भंवर सिंह पोर्ते: गोंड, जन्म 1943, बदरोड़ी (मरवाही); अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद।
- चेंदरू के बाघ का नाम टेम्बू; फिल्म द जंगल सागा।
स्मरण सूत्र
- "वीर-सोना, गुण्डा-भूम, गेंद-पर": वीरनारायण-सोनाखान, गुण्डाधुर-भूमकाल, गेंदसिंह-परलकोट।
- "कमार नगर-भानु-महा": कमार प्रकोष्ठ नगरी, भानुप्रतापपुर, महासमुंद।
- "बैगा बैकुंठ-राज-मुंगेली": बैगा प्रकोष्ठ के तीन स्थान।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
जिन प्रश्नों को मैंने पूल में देखा, वे मुख्यतः तीन प्रकार के हैं। पहला, "यह व्यक्ति किस जनजाति या समुदाय का था" (वीरनारायण सिंह, गहिरा गुरु)। दूसरा, "अमुक वर्ष का विद्रोह किसके नेतृत्व में हुआ" (1910 का बस्तर विद्रोह और गुण्डाधुर)। तीसरा, आंदोलन के क्षेत्र से जुड़ा प्रश्न (बिरसा और छोटा नागपुर)। तालिका की मूल पंक्ति याद हो तो चारों विकल्पों में से सही उत्तर चुनना आसान हो जाता है।
स्वयं जाँचें
- प्रश्न: सोनाखान विद्रोह के नेता कौन थे? उत्तर: वीरनारायण सिंह (बिंझवार)।
- प्रश्न: भूमकाल विद्रोह किस वर्ष हुआ और नेता कौन थे? उत्तर: 1910; गुण्डाधुर।
- प्रश्न: गहिरागुरू ने किस संस्था की स्थापना 1943 में की? उत्तर: सनातन धर्म संत समाज।
- प्रश्न: नवीनतम गठित बिरहोर विकास प्रकोष्ठ कहाँ है? उत्तर: बिलासपुर।
- प्रश्न: चेंदरू मंडावी के बाघ का नाम क्या था? उत्तर: टेम्बू।
अभ्यास प्रश्न
राज्य के महान् क्रान्तिकारी वीरनारायण सिंह किस समुदाय के थे?
- (A) धनवार
- (B) बिरजिया
- (C) बिरहोर
- (D) बिंझवार
वीर नारायण सिंह किस जनजाति समूह के थे
- (A) गौड़
- (B) बैगा
- (C) उरांव
- (D) बिंझवार
संत गहिरा गुरु किस जनजाति के थे?
- (A) गोंड
- (B) कंवर,
- (C) खैरवार
- (D) रजवार,
इस राज्य के बस्तर में 1910 में हुये प्रसिद्ध आदिवासी विद्रोह का नेता कौन था?
- (A) भैरमदेव सिंह
- (B) कुंवर बहादुर सिंह
- (C) गुण्डाधुर
- (D) रामनाथ सिंह
निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में बिरसा आदिवासी विद्रोह के नायक थे ?
- (A) संथाल परगना
- (B) छोटा नागपुर
- (C) तेलंगाना
- (D) मलाबार मुण्डा
उत्तरमाला एवं व्याख्या
- (D) - वीरनारायण सिंह बिंझवार जनजाति के थे (तालिका पंक्ति 1)।
- (D) - तालिका में वीरनारायण सिंह की जनजाति बिंझवार दी गई है।
- (B) - गहिरागुरू कंवर जनजाति के बताए गए हैं।
- (C) - 1910 के भूमकाल विद्रोह के नेता गुण्डाधुर थे।
- (B) - बिरसा मुण्डा छोटा नागपुर क्षेत्र में विद्रोह के नायक थे।