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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सम्पूर्ण अध्ययन · Chapter 11
जनजातीय नृत्य (1): मुरिया, अबूझमाड़िया, माड़िया और वाद्ययंत्र

जनजातीय नृत्य (1): मुरिया, अबूझमाड़िया और माड़िया के नृत्य तथा वाद्ययंत्र

जनजातीय नृत्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान हैं। हर नृत्य का एक अवसर, एक जनजाति, कुछ खास वाद्य और अक्सर किसी देवता या पर्व से संबंध होता है। पुस्तक ने पहले सारे नृत्यों की क्रमवार सूची, फिर वाद्ययंत्र-तालिका, नक्शा और फिर जनजाति-वार विस्तृत विवरण दिया है।

इस अध्याय में पूरी नृत्य-सूची (19 प्रविष्टियाँ), नृत्य-वाद्य तालिका और बस्तर की तीन जनजातियों (मुरिया/मुड़िया, अबूझमाड़िया, माड़िया) के नृत्यों का विवरण है। बाकी जनजातियों के नृत्य अगले अध्याय में हैं।

जनजाति-वार प्रमुख नृत्य: पूरी सूची

क्र.जनजातिनृत्यविशेष
1मुड़ियामांदरी/मरमपाटागोटुल के बाहर किया जाता है
एबालतोरमड़ई महोत्सव में अंगादेव की पूजा हेतु
गेंड़ी नृत्य/डिटोंगपाटाकेवल लड़के भाग लेते हैं
हुलकीपाटासामान्य अवसर पर
घोटुल पाटामृत्यु के अवसर पर
माओ पाटाशिकार के समय
पूस कोलांग/कलंगकेवल पुरुषों द्वारा
छेरतानकटा-नकटी नृत्य
कोकरेंगनारायणपुर में मड़ई मेला के दौरान
दीवाड़ पाटादीपावली पर लड़कियों द्वारा
हर एंडन्नाविवाह के समय लड़के-लड़कियों द्वारा
ककसारगोटुल के देवता लिंगोपेन की आराधना हेतु
2अबूझमाड़ियाकाकसाड़ नृत्यकाकसार पर्व भी मनाया जाता है
कोटकी घोड़ाविवाह के समय
3माड़िया/दण्डामी माड़ियाबायसन हार्न नृत्यगोंचा पर्व में भैंस/गौर सींग लगाकर; अन्य नाम गौर सींग/गँवर नृत्य
4दोरलापैडुल नृत्यविवाह के अवसर पर
5धुरवामड़ई नृत्यमड़ई मेला एवं धार्मिक उत्सव
6धुरवा, परजापरब नृत्यसैन्य नृत्य
7बैगा, कोरकूपरघौनीविवाह के अवसर पर
8बैगा, गोंडबिल्मा; फागविजयादशमी; होली
9बैगा, गोंड, कमारकरमासामान्य अवसर
10बैगा, गोंड, परधानसैला/डंडादीपावली के समय
11परधानलिंगोपाटा-
12भूमिया, बैगा, उराँवअटारीविवाह से संबंधित
13उराँवसरहुलसाल वृक्ष में फूल आने पर
14कोरकूथापड़ी; ढांढलथापड़ी बैशाख माह में
15भतरा, कोरकूडंडारीहोली के अवसर पर
16कंवरबार नृत्यमनोरंजन के समय
17कोरवादमनचसबसे भयानक या खतरनाक नृत्य
18भारियाभड़म, सैतमसबसे लंबे समय तक चलने वाला नृत्य
19कोलकोलदहका-

सूचना: सूची में मुड़िया के लिए मांदरी, हुलकीपाटा और ककसार गोटुल से जुड़े बताए गए हैं। घोटुल पाटा और गोटुल पाटा एक ही नृत्य के दो लिखे रूप हैं।

नृत्य और संबंधित वाद्ययंत्र

नृत्यवाद्ययंत्र
मंदरीचिटकुल/बिरझिया ढोल
ककसारतुरही/अकुम
पूषकोलांगकोई भी वाद्ययंत्र नहीं बजाया जाता
गौरपुरुष - ढोल/मांदर; महिला - गुंजिड़
परबअलगोजा
बिल्मामांदर
फागमांदर व टिमकी
परघौनीनगाड़ा व टिमकी
करमामांदर, टिमकी एवं झांझ
सरहुलमांदर व झांझ
पैडुल/दोरलाविशेष प्रकार का ढोल
थापड़ीपंजा व चिटकोरा, ढोलक व बासुरी
ढांढलढोलक, बांसुरी, मृदंग, टिमकी
कोलदहकाझांझ व ढोलक

इसके अतिरिक्त पुस्तक कहती है कि गोंड की उप-जाति परधान, किन्नरी नामक वाद्ययंत्र बजाकर लोकगीत गाती है। ओझा गोंड, डहकी नामक वाद्ययंत्र बजाकर तथा भगवान महादेव का लोकगीत गाकर अन्य गोंड के घर भिक्षा माँगती है।

मुड़िया/मुरिया जनजाति के नृत्य: विस्तृत विवरण

मांदरी नृत्य

मुड़िया/मुरिया का नृत्य है जो गोटुल के चारों ओर घूम-घूमकर किया जाता है। वाद्य चिटकुल और बिरझिया ढोल हैं। नर्तक गाते नहीं, केवल नृत्य करते हैं। नृत्य के बाद लांदा (चावल से बना पेय) और दाडनों (महुए से बना पेय) दिए जाते हैं।

एबालतोर नृत्य

मुड़िया जनजाति का यह नृत्य मड़ई के प्रमुख देवता अंगादेव की आराधना के लिए आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ में नारायणपुर का मड़ई मेला सर्वप्रसिद्ध है, जिसमें अंगादेव का निर्माण काष्ठ से किया जाता है और इस नृत्य का आयोजन होता है।

गेंड़ी नृत्य या डिटोंग

मुड़िया जनजाति में पुरुष सदस्य भाग लेते हैं। अवसर नवाखानी पर्व और विवाह है। इस नृत्य में गायन नहीं होता और नर्तक बाँस की बनी गेंड़ी पर चढ़कर द्रुत गति से नाचते हैं। बस्तर की जनजातियाँ वर्षा के देव भीमादेव को प्रसन्न करने के लिए गेंड़ी नृत्य का आयोजन करती हैं।

हुलकी पाटा

मुरिया जनजाति का यह नृत्य गोटुल परिसर में मनोरंजन हेतु सामान्य अवसर पर होता है। युवक-युवतियों को इसका प्रशिक्षण गोटुल में दिया जाता है।

गोटुल पाटा

बस्तर अंचल में मुरिया जनजाति में मृत्यु के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य।

माओ पाटा

मुड़िया जनजाति (बस्तर) का नृत्य, उपनाम गवरमार/गौरमार नृत्य। यह गौर (वनभैंसा) के शिकार पर आधारित है। कई व्यक्ति वन जाकर गौर के शिकार का प्रदर्शन करते हैं; इस दौरान एक शिकारी गौर के हमले से घायल हो जाता है, अन्य साथी गौर का शिकार कर लेते हैं, और अंत में सिरहा (पुजारी) के उपचार से घायल स्वस्थ हो जाता है। शिकार की प्राप्ति और साथी के स्वस्थ होने से हर्षोल्लासपूर्वक यह नृत्य होता है।

कोलांग पाटा / पूस कोलांग / देव कोलांग

चैत्र माह में मुरिया जनजाति द्वारा गोटुल में किया जाने वाला पाटा जात्रा नृत्य-गीत है। इसमें केवल पुरुष भाग लेते हैं। देवताओं के सम्मान में होता है, कोई वाद्य नहीं बजता। इसे अपने गाँव में न करके दूसरे गाँव में किया जाता है। अनिवार्य रूप से 3 साल तक करने और विधिवत विसर्जन के बाद अगले 3 साल तक छेरता नृत्य किया जाता है। पूस कोलांग पाटा के अवसर पर चैत्र दादर और महुआ दादर नृत्य किया जाता है।

स्रोत में एक मामूली भिन्नता: नृत्य-सूची में इसका नाम "पूस कोलांग/पूस कलंग" तथा माह "पूस" से जुड़ता प्रतीत होता है, जबकि विस्तृत विवरण में माह चैत्र लिखा है। दोनों को जैसे लिखा है वैसे याद रखें।

छेरता नृत्य

अन्य नाम नकटा-नकटी नृत्य। मुरिया जनजाति में पूस पुन्नी त्योहार के अवसर पर किया जाता है। पूस कोलांग नृत्य को अनिवार्य रूप से 3 साल करके विसर्जन के बाद गाँव अगले 3 साल तक छेरता करने का अधिकारी होता है।

कोकरेंग, दीवाड़ एंदना और हर एंडन्ना

कोकरेंग मुरिया का नृत्य है जो नारायणपुर में मड़ई मेले में होता है। दीवाड़ एंदना/दीपावली नृत्य केवल लड़कियाँ दीपावली पर करती हैं। हर एंडन्ना विवाह के समय लड़के-लड़कियों द्वारा किया जाता है।

ककसार / ककसाड़ नृत्य (मुड़िया/मुरिया)

इसका आरंभ गोटुल (युवागृह) के देवता लिंगोपेन की आराधना हेतु हुआ। यह "जात्रा पर्व" का नृत्य है। गाँव के धार्मिक स्थल पर मुरिया आदिवासी वर्ष में एक बार ककसाड़ यात्रा पर पूजा करते हैं। लिंगोपेन को प्रसन्न करने के लिए युवक-युवतियाँ साज-सज्जा करके रात भर नृत्य-गायन करते हैं। वाद्य तुरही या अकूम है। ककसार नृत्य के दौरान गोटुल परिसर में युवक-युवतियों को नृत्य मंडली से जीवनसाथी चुनने की अनुमति मिलती है।

अबूझमाड़िया जनजाति के नृत्य

नृत्यउद्देश्य/विशेष
काकसाड़/काकसारगोत्र देव की पूजा; यह देवताओं की आराधना का नृत्य है
कोटकी-घोड़ाजात्रा पर्व की प्रकृति; कोटकी घोड़े का दृश्यांकन, कुछ व्यक्ति चीते का मुखौटा पहनकर युवक-युवतियों पर झपटने का अभिनय करते हैं

माड़िया जनजाति: गौर/बायसन हार्न/गँवर नृत्य

बिंदुविवरण
जनजातिमाड़िया
अवसरजात्रा पर्व के दौरान (आषाढ़ माह); मेला मड़ई, विवाहोत्सव, पर्व, धार्मिकोत्सव, मनोरंजन
सदस्य24 या अधिक स्त्री-पुरुष नर्तक
वाद्यपुरुष - ढोल या मांदर; महिला - गुंजिड़/तिरूड़ (लोहे की विशिष्ट फलियों से बना)
वस्त्रकोहक: नवयुवक सुंदर वेशभूषा में सिर पर गौर सींग का कौड़ियों से सजा मुकुट पहनते हैं
भाषाकोईतुर
अभिनयगौर आखेट का
विशेषनर्तक गौर/बायसन का सींग धारण करते हैं; वेरियर एल्विन ने इसे "विश्व का सबसे सुंदर नृत्य" माना और सींग के आधार पर इस जनजाति को बायसन हार्न माड़िया कहा

तुलना एवं संबंध

नृत्यजनजातिअवसरमुख्य संबंध
ककसारमुड़ियाजात्रा पर्वलिंगोपेन; तुरही/अकुम; जीवनसाथी चयन
काकसाड़अबूझमाड़ियागोत्र देव पूजादेवताओं की आराधना
गौर/बायसन हार्नमाड़ियाजात्रा पर्व (आषाढ़)गौर सींग मुकुट; ढोल/मांदर, गुंजिड़
गेंड़ीमुड़ियानवाखानी, विवाहकेवल पुरुष; भीमादेव
माओ पाटामुड़िया-गौर शिकार; सिरहा
पूस कोलांगमुरियाचैत्र (विवरण अनुसार)केवल पुरुष, कोई वाद्य नहीं, 3 साल

याद रखने योग्य बिंदु

  • मांदरी नृत्य गोटुल के चारों ओर घूम-घूमकर होता है; नर्तक गाते नहीं।
  • मांदरी के बाद लांदा और दाडनों दिए जाते हैं।
  • एबालतोर अंगादेव की आराधना हेतु।
  • गेंड़ी नृत्य में केवल पुरुष, बाँस की गेंड़ी।
  • माओ पाटा = गौर शिकार का नृत्य (गवरमार)।
  • घोटुल पाटा मृत्यु के अवसर पर।
  • पूस कोलांग केवल पुरुषों द्वारा, कोई वाद्ययंत्र नहीं।
  • छेरता = नकटा-नकटी नृत्य।
  • ककसार गोटुल के देवता लिंगोपेन की आराधना हेतु।
  • ककसार का वाद्य तुरही या अकूम।
  • काकसाड़ अबूझमाड़िया का, गोत्र देव की पूजा।
  • कोटकी-घोड़ा में चीते का मुखौटा।
  • गौर नृत्य माड़िया का; इसे एल्विन ने विश्व का सबसे सुंदर नृत्य माना।
  • गौर नृत्य में महिलाएँ गुंजिड़ बजाती हैं।

स्मरण सूत्र

  • "मांदरी मांदर से" नहीं, चिटकुल-बिरझिया ढोल से! ध्यान रखें।
  • "ककसार - तुरही, गौर - सींग, गेंड़ी - बाँस"
  • "पूस-कोलांग-3 साल-फिर छेरता"

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

सबसे ज्यादा प्रश्न "नृत्य किस जनजाति का है" और "नृत्य किस अवसर/देवता से जुड़ा है" पर आते हैं।

वाद्ययंत्र-आधारित प्रश्न (जैसे ककसार का वाद्य अकुम/तुरही) भी दिखते हैं।

गौर/बायसन हार्न, गेंड़ी और माओ पाटा जैसे विशेष लक्षण वाले नृत्य बार-बार पूछे जाते हैं।

स्वयं जाँचें

  • प्रश्न: ककसार पर्व किस जनजाति का? उत्तर: अबूझमाड़िया/मुरिया
  • प्रश्न: माओ पाटा किस पर आधारित है? उत्तर: गौर के शिकार
  • प्रश्न: गेंड़ी नृत्य में कौन भाग लेता है? उत्तर: केवल पुरुष
  • प्रश्न: माड़िया का प्रसिद्ध नृत्य? उत्तर: गौर/बायसन हार्न
  • प्रश्न: पूस कोलांग में वाद्य? उत्तर: कोई नहीं

अभ्यास प्रश्न

  1. अबूझमाड़िया आदिवासियों का प्रमुख पर्व है – (CG PSC-Pre-2012)

    • (A) गाँचा
    • (B) घेरसा
    • (C) ककसार
    • (D) करमा
  2. छत्तीसगढ़ का कौन-सा लोक नाट्य जंगली भैंसे (गौर) के शिकार का मंचन करता है?

    • (A) दहिकांदो
    • (B) सम्भर खेल
    • (C) माओपाटा
    • (D) भतरा नाट
  3. अबूझमाड़ियों में लोकप्रिय करसाड़ नृत्य के समय एक विशेष तुरही बजती है जिसे क्या कहते हैं?

    • (A) अकुम
    • (B) कोटोडका
    • (C) टिमकी
    • (D) तिरूडूडी

उत्तरमाला एवं व्याख्या

  1. (C) - अबूझमाड़िया का प्रमुख पर्व ककसार (काकसाड़) है।
  2. (C) - माओ पाटा गौर (जंगली भैंसे) के शिकार का मंचन है।
  3. (A) - ककसाड़ में तुरही/अकुम बजाई जाती है।
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